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जानें क्या है पौलीएमरस रिलेशनशिप ?

रिलेशनशिप कई तरह की होती हैं. मौनोगमस,पौलीएमरस, पौलीगेमरस रिलेशनशिप के कुछ प्रकार हैं. इन्हीं में से रिलेशनशिप का एक प्रकार है पौलीएमरस जिसे पोलीएमरी भी कहा जाता है. पौलीएमरी से अभिप्राय उस रिलेशनशिप से है जो केवल दो लोगों के बीच नहीं होती. इसमें  तीन या तीन से ज्यादा पार्टनर्स होते हैं जो एकदूसरे की रजामंदी (कंसेंट) के साथ रिलेशनशिप में होते हैं. जिस तरह की रिलेशनशिप को हमारे समाज में मान्यता दी जाती है मौनोगमस या मोनोगैमी रिलेशनशिप कहलाती है जिस में दो लोग एकदूसरे के साथ रिलेशनशिप में होते हैं और एकदूसरे को फिजिकल और इमोशनल सपोर्ट देते हैं. पौलीएमरी मोनोगैमी से बेहद अलग  रिलेशनशिप है.

पोलीएमरी का अर्थ मल्टीपल सेक्स पार्टनर्स रखना नहीं है, इस का अर्थ एक से ज्यादा रोमांटिक पार्टनर रखना है. यदि कोई व्यक्ति पोलीएमरस रिलेशनशिप में है तो उस के एक से ज्यादा रोमांटिक पार्टनर्स होंगे और उस के सभी पार्टनर्स को एक दूसरे के बारे में पता भी होगा. इसे सही तरह से समझने के लिए गार्गी का उदाहरण लेते हैं.

पोलीएमरी को समझना

गार्गी और रोहित की शादी को 4 साल हो चुके थे. दोनों में प्यार अब भी था पर वो स्पार्क नहीं था जो रिलेशनशिप के शुरूआती दौर में था. गार्गी एक मल्टीनेशनल कंपनी में क्रिएटिव मैनेजर थी जहां उस की मुलाक़ात अपने जूनियर नितिन से हुई. गार्गी को नितिन पसंद था लेकिन वह रोहित से रिश्ता खत्म नहीं करना चाहती थी और न ही उसे चीट करना चाहती थी.

रोहित इंजीनियर था, समझदार था और गार्गी की जरूरतों को अच्छी तरह समझता था. वह खुद भी गार्गी से बेहद प्यार करता था लेकिन दोनों के रिलेशनशिप में जो दूरियां बढ़ रही थीं उसे खत्म नहीं कर पा रहा था. रोहित ज्यादातर दिन काम के सिलसिले में विदेश में रहता था. वह नहीं चाहता था कि उस के इस तरह बिजी रहने से गार्गी उसे छोड़ कर चली जाए.

जब गार्गी ने रोहित को नितिन के बारे में बताया और ये कहा कि वह पोलीएमरस रिलेशनशिप चाहती है तो रोहित मान गया. रोहित ने गार्गी को यह मंजूरी दे दी कि वह नितिन के साथ भी रिलेशनशिप में रह सकती है. पिछले 8 महीनो से रोहित, गार्गी और नितिन पोलीएमरस रिलेशनशिप में हैं जहां तीनो एकदूसरे के बारे में जानते भी हैं और एकदूसरे के प्रति सहमति भी रखते हैं.

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पोलीएमरी का बढ़ता चलन

2014 के एक यूके बेस्ड सर्वे के अनुसार आजकल रिलेशनशिप औसतन दो साल और नौ महीने तक चलती हैं. मतलब लोग इस से ज्यादा एकदूसरे के साथ रिलेशनशिप नहीं निभा पा रहे. लोग एक ही पार्टनर के साथ रिलेशनशिप को ज्यादा कौम्प्लिकेटेड समझने लगे हैं जिस के कारण वह पोलीएमरी की तरफ लगातार बढ़ रहे हैं.

इस तरह की रिलेशनशिप्स हमारे समाज में देखने को बहुत कम मिलेंगी लेकिन धीरेधीरे इस का चलन पश्चिमी देशों की ही तरह भारत में भी बढ़ता जा रहा है. लोग पोलीएमरी अपना रहे हैं जिस का सब से बढ़ा कारण लोगों की व्यस्तता और उस व्यस्तता के चलते पूरी न हो पाने वाली इमोशनल नीड्स हैं. पोलीएमरी एक से ज्यादा पार्टनर्स के साथ फिजिकल से ज्यादा इमोशनल और रोमांटिक रिश्ते में रहना है जिस में सभी पार्टनर्स की सहमति हो.

लोग पोलीएमरी को इसलिए भी अपनाते हैं ताकि एक पार्टनर के साथ चाहे किसी भी तरह के मनमुटाव हों लेकिन उन्हें अपना रिश्ता खत्म न करना पड़े और न ही एकदूसरे को धोखा देना पड़े. यह रिलेशनशिप विश्वास और ईमानदरी पर टिकी होती है. इस में जलन की भावना भी समय के साथ पनप सकती है लेकिन आपसी रजामंदी और समझदारी रिश्ता कायम रखती है.

यह पोलीएमरी नहीं

अक्सर ही लोग पोलीएमरी को समझने में चूक करते हैं. लोगों को लगता है कि एक से ज्यादा पति या पत्नी रखना पोलीएमरी है, जबकि ऐसा नहीं है. एक समय में एक से ज्यादा पति होना पोलीएंड्री और एक से ज्यादा पत्नी होना पोलीजनी कहलाता है. इसे पोलीएमरी नहीं कहा जा सकता.

साथ ही एक समय में एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर्स होना भी पोलीएमरी नहीं है. पोलीएमरी का मतलब एक से ज्यादा लोगों के साथ सेक्स करना नहीं है बल्कि पोलीएमरी इंटिमसी और इमोशनल सपोर्ट है जो आपको एक से ज्यादा पार्टनर्स से मिलता है और इस में सभी पार्टनर्स की बराबर सहमति भी होती है.

पोलीएमरी ओपन रिलेशनशिप से भी अलग है. ओपन रिलेशनशिप में कपल एकदूसरे के अलावा कई और पार्टनर्स रखते हैं लेकिन उनके संबंध इमोशनल से ज्यादा फिजिकल होते हैं और सभी पार्टनर्स का कंसेंट उस में शामिल नहीं होता. पोलीएमरी की मुख्य शर्त ही कंसेंट का होना है. यानी की तीनो या चारो पार्टनर्स एकदूसरे को अपनाते हैं. यह एक तरह से तीन लोगों के बीच का रिश्ता है. जबकि ओपन रिलेशनशिप में कौन किस के साथ है इस में दूसरे पार्टनर्स की कोई सहमति नहीं होती.

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इस घड़ी में कभी नहीं बजते हैं 12!

जैसा कि आप जानते हैं, रात में घड़ी में 12 बजते ही दूसरे दिन की शुरुआत होती है. और वही दिन में 12 बजते ही दूसरा पहर शुरु हो जाता है. कुल मिलाकर हर घडी में 12 जरूर बजते है. लेकिन क्या आप जानते हैं, एक ऐसी भी घड़ी है, जिसमें 12 कभी नहीं बजते हैं, जी हां, सही सुना आपने. तो चलिए जानते हैं, ये कौन-सी घड़ी है जिसमें 12 नहीं बजते है.

आपको बता दें ये घड़ी स्विटजरलैंड देश सोलोथर्न शहर में है. यहां पर एक ऐसी घड़ी है,  जहां कभी 12 नहीं बजता है. इस शहर के टाउन स्क्वेयर पर एक घड़ी लगी है. उस घड़ी में घंटे की सिर्फ 11 सुइयां हैं. और 12 उसमें से गायब है.

ऐसा यहां पर क्यों है तो इसका कारण आपको बता दें. दरअसल, इस शहर की सबसे खास बात ये है कि इस शहर के लोगों को 11 नंबर से बहुत प्यार है. यहां की अधिकतर चीजों का डिजाइन इस नंबर के आसपास ही घूमता है.

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किचन को ऐसे बनाएं ईको फ्रैंडली

यह सच है कि सेहत का रिश्ता रसोई से जुड़ा है. रसोई में न सिर्फ स्वादिष्ठ भोजन पकता है, बल्कि पूरे परिवार की सेहत व लंबी उम्र भी रसोई पर ही निर्भर करती है. मगर सेहत और स्वाद का रिश्ता तभी बना रह सकता है जब रसोई का वातावरण अच्छा हो. बिजली के उपकरण सही तरीके से काम करते हों, बरतन सही हों, कीड़ेमकोड़े न हों.

बिजली के उपकरण व सही रखरखाव

आज के माहौल में रसोई की कल्पना बिना इलैक्ट्रौनिक ऐप्लायंसिस यानी बिजली के उपकरणों के बिना नहीं की जा सकती है. मगर ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए जिन में बिजली की कम खपत हो. रसोई में बिजली से चलने वाले उपकरणों जैसे मिक्सी, ओवन, एअरफ्रायर, टोस्टर, कौफी मेकर, माइक्रोवेव आदि के प्रयोग के बाद उन्हें बंद कर देना चाहिए. यह नहीं सोचना चाहिए कि ये तो औटोमैटिक बंद रहेंगे. उन्हें मेन प्लग से अलग कर दें या वहां से बंद कर दें.

– फ्रिज को बारबार नहीं खोलना चाहिए, क्योंकि बारबार खोलने से बिजली की ज्यादा खपत होती है. ज्यादा देर खोल कर भी खड़ी न रहें.

– खाना पकाने या गरम करने के लिए ओवन के बजाय माइक्रोवेव का इस्तेमाल करें. खाना गरम करने के लिए तो यह बहुत अच्छा उपकरण है. मिनटों में खाना गरम हो जाता है. बस ध्यान रहे कि माइक्रोवेव के लिए प्लास्टिक के बरतनों का प्रयोग बिलकुल न करें चाहे वे कितनी भी अच्छी क्वालिटी के हों. माइक्रोवेव के लिए कांच के बरतनों का प्रयोग सही रहता है.

– बिजली के उपकरणों की सफाई का भी ध्यान रखें. मसलन, टोस्टर में ब्रैड सेंकी है या सैंडविच बनाया है, तो टोस्टर को साफ कर मुलायम कपड़े से पोंछ कर ही रखें. मिक्सी का या हैंड ब्लैंडर का प्रयोग कर तुरंत लिक्विड सोप जार में डाल कर चलाएं व साफ कर के रखें.

– किचन में लाइट का इंतजाम सही रखें. ऐग्जौस्ट फैन या चिमनी का प्रयोग खाना बनाते समय जरूर करें ताकि छौंक आदि की गंध घर में न फैले और इन की भी समयसमय पर सफाई जरूर करती रहें.

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बरतनों का सही चुनाव व साफसफाई

रसोई को पर्यावरण फ्रैंडली बनाने के लिए सही बरतनों का चुनाव व उन की साफसफाई बहुत जरूरी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों यानी हैल्थ स्पैशलिस्टों के अनुसार पेट के संक्रमण से बचने के लिए रसोई में सफाई बहुत जरूरी है. सिंक में देर तक पड़े जूठे बरतन, मिक्सर, जूसर ग्राइंडर में बचे खाद्यकण जीवाणुओं व कीटाणुओं के जन्म लेने का कारण बनते हैं जो कई रोगों को जन्म देते हैं.

– आजकल बाजार में तरहतरह के बरतन मौजूद हैं. ध्यान देने की बात यह है कि बरतन कोई भी हो साफ होना चाहिए. साथ ही खट्टी सब्जी या कढ़ी आदि बनाने के लिए ऐल्यूमिनियम के बरतनों का प्रयोग सही नहीं है. इन की जगह स्टील के बरतनों का इस्तेमाल करें. खाना बनाने के लिए लोहे की कड़ाही, तवे आदि का प्रयोग अच्छा रहता है.

– आजकल नौनस्टिक बरतनों का चलन काफी बढ़ गया है. इन में चीज जलती और चिपकती नहीं, साथ ही बहुत कम तेल में खाना बन जाता है. मगर ध्यान रहे यदि ऐसे बरतनों की काली परत निकलने लगे तो उन का प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए. यदि ऐसा न किया जाए तो यह काला सा पदार्थ खाने में मिक्स हो जाता है, जो शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

यूनिवर्सिटी औफ कैलिफोर्निया में रिप्रोडक्टिव हैल्थ ऐंड ऐन्वायरन्मैंट प्रोग्राम की प्रमुख डा. ट्रेसी बुडरक कहती हैं कि नौनस्टिक बरतन में पके खाने की वजह से महिलाओं में टेफ्लौन की मात्रा बढ़ जाती है, जिस की वजह से प्रैगनैंसी में परेशानी आ सकती है, साथ ही थायराइड और कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है.

कहने का मतलब यह है कि जब भी नौनस्टिक बरतनों का प्रयोग करें तो उन में बिना कुछ डाले सीधे आंच पर गरम न करें. बरतन की सतह उखड़ रही हो तो उसे बिलकुल प्रयोग में न लाएं.

– बहुत से घरों में स्लैब पर ही रोटियां बेली जाती हैं. यह भी सही नहीं है. ऐसा करना ही हो तो पहले साफ कपड़े से स्लैब को अच्छी तरह पोंछ लें. इसी तरह कटिंग बोर्ड का प्रयोग कर उसे साबुन से धो कर रखें.

खाने की मेज पर

जब मेज पर खाना खा रहे हों तो सारी लाइटें न जलाएं. मेज पर पड़ने वाली एक ही लाइट का प्रयोग करें. कभीकभी कैंडल लाइट डिनर करें. इस से बिजली की बचत होगी.

डिस्पोजेबल पेपर नैपकिंस की जगह कपड़े के नैपकिंस प्रयोग में लाएं.

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हल्दी से ऐसे घटाएं वजन

हल्दी हमारे खानपान का एक जरूरी हिस्सा है. रोजमर्रा के खाने में हल्दी अनिवार्य है. ये ना केवल खाने को पीला रंग देती है, बल्कि इसके औषधीय गुण इसे और ज्यादा महत्वपूर्ण बनाते हैं. एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी ओबसिटी गुण के कारण हल्दी वजन कम करने की प्रमुख औषधि है. कई जानकारों का मानना है कि हल्दी में कर्क्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक होता है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है. वजन कम करने में इसका प्रमुख योगदान होता है.

  • वजन कम करने के लिए आप हल्दी की चाय का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे बनाने के लिए एक पैन में पानी गर्म कर लें. इसके बाद इसमें थोड़ी हल्दी मिलाएं. इसके अलावा आप इसमें दालचीनी मिला सकते हैं. दालचीनी भी वजन कम करने में मदद करती है. अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से हिलाएं और इसे एक कप में डालें. इसे गुनगुना ही पिएं.
  • इसके अलावा आप हल्दी का इस्तेमाल चावल की डिशेज, मिठाई और अन्य तरह के व्यंजनों में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. ये आपका वजन कम करने में काफी लाभकारी होगा.
  • दूध में हल्दी डाल कर पीने से भी वजन कम होता है. मध्यम आंच पर लगभग छह से सात मिनट तक दूध गर्म करें. एक गिलास में दूध डालें और इसमें हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं.

ध्यान रहे कि वजन कम करने के लिए हल्दी मात्र एक सहायक का काम करता है. कुल मिला कर संतुलित आहार और कसरत से ही आप वजन कम कर सकेंगे.

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ऐसे में भूल जाएंगे भूलभुलैया

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ घूमने के लिहाज से मशहूर और ऐतिहासिक जगह है. नवाबी और अंग्रेजी शासनकाल में बनी यहां की इमारतें वास्तुकला का बेजोड़ नमूना हैं. 1775 से 1856 तक लखनऊ अवध राज्य की राजधानी था. नवाबी काल में अवध की अदब और तहजीब का विकास हुआ. लखनऊ घूमने जो भी आता है वह सब से पहले बड़ा इमामबाड़ा और यहीं बनी भूलभुलैया जरूर देखना चाहता है. यह लखनऊ की सब से मशहूर इमारत है. चारबाग रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर दूर बना बड़ा इमामबाड़ा वास्तुकला का अदभुत नजारा पेश करता है.

1784 में इस को नवाब आसिफुद्दौला ने बनवाया था. इस इमारत का पहला अजूबा 49.4 मीटर लंबा और 16.2 मीटर चौड़ा एक हौल है. इस में किसी तरह का कोई खंभा नही है. इस के एक छोर पर कागज फाड़ने जैसी कम आवाज को भी दूसरे छोर पर आसानी से सुना जा सकता है. इस इमारत का दूसरा अजूबा इस के ऊपरी हिस्से में 409 गलियारे हैं. ये सब एकजैसे दिखते हैं और समान लंबाई के हैं. ये सभी एकदूसरे से जुडे़ हुए हैं. इन में घूमने वाले रास्ता भूल जाते हैं. इसीलिए इन गलियारों को भूलभुलैया कहा जाता है.

भूलभुलैया के पास नहाने के लिए एक बावली बनी है, जिस में गोमती नदी का पानी आता है. सुरक्षा की नजर से यह कुछ ऐसी बनी है कि इस के अंदर नहा रहा आदमी बाहर वाले को देख सकता है पर बाहर वाला अंदर वाले को कभी नहीं देख पाता.

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वास्तुकला का अद्भुत नमूना

बड़ा इमामबाड़ा से एक किलोमीटर आगे छोटा इमामबाड़ा बना हुआ है. मुगल स्थापत्य कला के इस बेजोड़ नमूने का निर्माण अवध के तीसरे नवाब मोहम्मद अली शाह द्वारा 1840 में कराया गया था. दूर से यह इमामबाड़ा ताजमहल जैसा दिखता है. यहां नहाने के लिए एक खास किस्म का हौज बनाया गया था, जिस में गरम और ठंडा पानी एकसाथ आता था. इस इमारत में शीशे के लगे हुए झाड़फानूस बहुत ही खूबसूरत हैं.

छोटे व बड़े इमामबाड़े के बीच के रास्ते में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं. इन को पिक्चर गैलरी, घड़ी मीनार और रूमी दरवाजा के नाम से जाना जाता है. इन सब जगहों पर जाने के लिए टिकट बड़े इमामबाड़ा से एकसाथ मिल जाता है. बड़े इमामबाड़े के बाहर बने 60 फुट ऊंचे दरवाजे को रूमी दरवाजा कहा जाता है. इस के नीचे से सड़क निकलती है. इस दरवाजे के निर्माण की खास बात यह है कि इस को बनाने में किसी तरह के लोहे या लकड़ी का प्रयोग नहीं किया गया है. रूमी दरवाजे से थोड़ा आगे चलने पर घड़ी मीनार बनी है. 221 फुट ऊंची इस मीनार का निर्माण 1881 में हुआ था. इस में लगी घड़ी का पेंडुलम 14 फुट लंबा है. 12 पंखुडि़यों वाला डायल खिले फूल की तरह दिखता है. इस के पास ही बनी पिक्चर गैलरी में अवध के नवाबों के तैलचित्र लगे हुए हैं.

पोशाक का विवाद

कुछ लोग यह मानते हैं कि बड़ा और छोटा इमामबाड़ा पर्यटन स्थल से पहले धार्मिक स्थल हैं. ऐसे में यहां घूमने आने वालों को धर्म के नियम मान कर उस के अनुसार ही कपडे़ पहन कर यहां आना चाहिए. इस के तहत सिर को ढकने के साथ ही ऐसे कपडे़ हों जिन में शरीर खुला न दिख रहा हो. ऐसे में लखनऊ जिला प्रशासन ने एक ड्रैसकोड बना दिया, जिस की हर तरफ आलोचना शुरू हो गई. जिला प्रशासन ने तो ऐसे कानून को वापस ले लिया, इस के बाद भी भूलभुलैया में घूमते समय सिर को ढक कर जाने के लिए कहा जाता है. इस के साथ ही पतिपत्नी या लड़केलड़की के जोडे़ को अंदर अकेले जाने नहीं दिया जाता है.

भूलभुलैया प्रबंधन से जुडे़ लोग यह मानते हैं कि कपल यानी जोड़े में घूमने आने वाले एकांत का लाभ उठा कर अश्लील हरकतें कर सकते हैं. ऐसे में जरूरी यह होता है कि वे अपने साथ गाइड ले कर जाएं. जानकार लोग कहते हैं कि इस तरह के नियमों के सहारे गाइड के कारोबार को आगे बढ़ाया जा रहा है. इसलिए इन नियमों का विरोध हो रहा है.

ऐसे नियमों से सब से अधिक परेशान नए शादीशुदा जोड़े होते हैं. कई जोडे़ इन नियमों से परेशान हो जाते हैं. कई लोगों को इस की आदत पड़ जाती है क्योंकि कई मंदिरों में भी पहनावे को ले कर नियमकानून हैं. इस के बाद भी भूलभुलैया घूमने आने वाले ड्रैसकोड से परेशान हैं. यहां आ कर उन्हें पर्यटन की अनुभूति नहीं हो रही है.

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सौतेले पिता से लड़ाई के बाद श्वेता तिवारी की बेटी पलक ने शेयर किया ये वीडियो

‘कसौटी जिंदगी की’ की पहली प्रेरणा और बिग बौस विनर श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी की भी सोशल मीडिया पर काफी फैन फौलोइंग है. खूबसूरत पलक आए दिन इंस्टाग्राम के जरिए अपने फैंस के बीच अपनी प्यारी तस्वीरें और वीडियो को पोस्ट करती रहती हैं. आपको बता दें,  हाल ही में अपने सौतेले पिता को लेकर इंस्टाग्राम में लिखे एक बयान में पलक ने खुलासा किया था कैसे अभिनव कोहली ने उन्हें और उनकी मां श्वेता तिवारी को परेशना किया था.

श्वेता तिवारी की पहली शादी 1998 में राजा चौधरी से हुई थी. उस समय श्वेता सिर्फ 19 साल की थी. बता दें पलक राजा चौधरी और श्वेता की बेटी हैं. पलक इन दिनों बुरे दौर से गुजर रही हैं लेकिन उन्होंने हाल ही में अपने फैंस के बीच एक खूबसूरत वीडियो शेयर किया है. जिसका कैप्शन उन्होंने लिखा, जब आपके पास तस्वीरें शेयर करने के लिए नहीं होती हैं तो वीडियो शेयर करना चाहिए.

 

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इस वीडियो में वह काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं. दरअसल हाल ही में श्वेता तिवारी ने अपने पति अभिनव कोहली के खिलाफ पलक से कथित छेड़छाड़ करने का मामला दर्ज कराया था. बाद में बताया गया कि अभिनव को जमानत दी गई थी.

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‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’: क्या बेटे की खुशी के लिए नायरा को घर वापस लाएगा कार्तिक ?

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के फैंस भले ही करेंट ट्रैक से निराश हो लेकिन हर कोई ये जानने के लिए उत्सुक रहता है कि आखिर आगे क्या होगा. आपको बता दें, बीते दिनों ही मोहसीन खान और शिवांगी जोशी स्टारर इस सीरियल के महा-एपिसोड में इस बात का खुलासा हुआ है कि कार्तिक और वेदिका की शादी हो चुकी है. तो वहीं कार्तिक और नायरा के बेटे कैरव की सर्जरी भी शुरु हो चुकी है.

आने वाले एपिसोड में दिखाया जाएगा कि कैरव की सर्जरी सक्सेसफुल हो गई है पर सर्जरी सक्सेसफुल होने का ये मतलब नहीं है कि कैरव पूरी तरह से ठीक हो जाएगा. खबरों के अनुसार तो डाक्टर नायरा और कार्तिक से कहेंगे कि वह अपने बेटे को किसी भी तरह से कोई स्ट्रेस ना दें. ऐसे में कार्तिक नायरा से कहेगा कि वह जल्द से जल्द अपने बेटे को ठीक करना चाहता है. इसके लिए नायरा को गोयनका हाउस चलकर एक खुशहाल परिवार का नाटक करना होगा.

ये सब सुनकर नायरा दंग रह जाएगी लेकिन वह कैरव की सलामती के लिए कार्तिक की बात मान भी जाएगी नायरा कार्तिक और कैरव के साथ ही गोयनका हाउस में आएगी और इस दौरान नायरा काफी इमोशनल भी होगी क्योंकि वह सालों बाद अपने ससुराल में कदम रखेंगी.

अब देखना ये होगा कि दर्शकों को इस सिरियल का ये महाट्विस्ट पसंद आता है या नही…

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छुट्टा सांड पंगा नहीं लेने का

‘छुट्टा सांड’ एक पुरानी कहावत है. इस कहावत का अर्थ यह है कि जो नियमकानून के दायरे से बाहर हो, वह छुट्टा सांड है. वैसे देखा जाए तो सांड हमेशा छुट्टा ही रहता रहा है. उस को छुट्टा छोड़ा जाता था. कई बार इस को चरित्र के लिहाज से नहीं माना जाता. दुश्चरित्र पुरुषों के लिए भी छुट्टा सांड शब्द का प्रयोग किया जाता है. छुट्टा सांड के आसपास ‘आवारा’ शब्द की गणना भी होती है. अगर देखें तो छुट्टा सांड को छुट्टा सांड या आवारा पशु कहना अब अच्छी बात नहीं है.

छुट्टा सांड भले ही अपने व्यवहार को न बदल रहा हो पर अब उसे छुट्टा सांड नहीं कहा जा सकता. कारण यह है कि सांड को यह शब्द संसदीय नहीं लगता है. सांड को उत्तर प्रदेश में यह सही नहीं लगता है. ऐसे में इस वर्ग की मांग है कि उन को छुट्टा सांड या आवारा पशु नहीं घुमंतू जानवर कहा जाए.

छुट्टा सांड अब यह भी नहीं चाहता कि उस के खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक मुकदमा थाने या कचहरी में चले. पहले छुट्टा सांड गांव में घूमा करते थे. अब ये भी गांव को छोड़ कर शहरों में बसने आ गए हैं. गांव की रूखीसूखी घास की जगह पर अब इन को शहर की चटपटी, मसालेदार चीजें पसंद आने लगी हैं. गांव में इन को मिट्टीभरे रास्ते और जगहों में चलनाबैठना पड़ता है. शहर की पक्की सड़कें, चमचमाती गलियां और रोशनीभरे माहौल छुट्टा सांड को पसंद आने लगे हैं. गांव में आताजाता कोई भी आदमी बिना बात के 2 लाठी मार कर भगा देता था. शहर में किसी को मारने, गाड़ी में टक्कर मार गिरा देने और यहां तक कि जान लेने के बाद भी ‘छुट्टा सांड’ छुट्टा ही रहते हैं.

कानून काम नहीं करता लड़के अगर लड़कियों की तरफ देख ही लें तो ‘एंटी रोमियो पुलिस’ पीछे लग जाती है. छुट्टा सांड अगर किसी लड़की की जान भी ले ले तो उस के खिलाफ कोई कानून काम नहीं करता, गाय का पिता जो ठहरा. गोंडा जिले के कृपा पुरवा निवासी ठाकुर प्रसाद की 13 साल की पुत्री साधना और रक्षाराम की 11 साल की बेटी रागिनी उच्च प्राथमिक विद्यालय, ठोरहंस में कक्षा 8 और 6 में पढ़ती थीं. स्कूल की छुट्टी होने के बाद वे अपने घर जा रही थीं. रास्ते में खड़े सांड ने उन को दौड़ा लिया. सांड से बचने के लिए वे सड़क किनारे पानीभरे गड्ढे में गिर गईं. पानी में डूब कर दोनों मर गईं. अगर छुट्टा सांड की जगह पर कोई आदमी होता तो उस पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा तो चल ही जाता. संरक्षण पाने के बाद आदमी ही नहीं, जानवर भी कितना खतरनाक हो जाता है, यह देखना है तो छुट्टा सांड की करतूतों पर गौर करिए. यह मत समझिए कि उत्तर प्रदेश कि राजधानी लखनऊ से गोंडा जैसे पिछड़े जिलों में छुट्टा सांड पर सरकार मेहरबान है. राजधानी लखनऊ भी छुट्टा सांड की सल्तनत में आता है.

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शहर के बाहरी इलाके ही नहीं, विधानसभा मार्ग, मंत्री आवास, मौल एवेन्यू और सचिवालय जैसी अहम जगहों पर भी छुट्टा सांड की दबंगई चलती है. थाना कोतवाली के डर से भी बेखौफ हो कर छुट्टा सांड यहां राज करते हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार में नंबर दो की हैसियत वाले एक नेताजी के परिवार को लगा कि वे तो वीवीआईपी हैं. भला छुट्टा सांड उन का क्या करेगा? उन की शिकायत तो सीधे मंत्री तक पहुंचेगी. एक दिन वे विश्वविद्यालय मार्ग से होते हुए हजरतगंज अपने औफिस स्कूटर से जा रहे थे. उन को पता चला था कि आगे वे छुट्टा सांड के इलाके में दाखिल होने जा रहे हैं. उन के स्कूटर की खटरपटर और हौर्न की आवाज छुट्टा सांड के इलाके में बैठी जनता को नागवार गुजरी.

कार्यवाही दर कार्यवाही

छुट्टा सांड की सल्तनत में बिना शिकायत के ही कार्यवाही हो जाती है. कार्यवाही भी ऐसी कि जिस के खिलाफ हो, वह जीवनभर याद करे. ‘खाता न बही, जो छुट्टा सांड करे वही सही’ की तर्ज पर इलाके में दाखिल हो कर अमनचैन भंग करने के जुर्म में छुट्टा सांड ने नेताजी के परिवार का लिहाज किए बिना मय स्कूटर उन को पटक दिया. इस से भी मन नहीं भरा, तो सींग मार कर उन को सड़क के नीचे ढकेल दिया.

औफिस जाने की जगह वे अस्पताल पहुंच गए और उन का स्कूटर गैराज में. स्कूटर तो 2 हजार रुपए खर्च कर के फिर से चलने वाला हो गया पर वे 2 लाख रुपए खर्च कर के भी फिर से चलने वाले नहीं हो पाए. घुटने में फ्रैक्चर हुआ था. 2 बार औपरेशन हुआ. लाखों लग गए. 6 माह हो गए. अभी भी वे चलने की हालत में नहीं हैं. अब तो छुट्टा सांड को तसवीर में भी देख लें, तो उन के पसीने छूट जाते हैं.

राजधानी की वन विहार कालोनी में अपने लिए बहुत ही शानदार घर दीक्षितजी ने बनवाया था. वे कर्मकांडी थे और पूजापाठ में बहुत रुचि रखते थे. जानवरों, खासकर गाय और कुत्तों, को खाना रोज खिलाने के बाद ही खुद खाते थे. बहुत सारे उपायों के बाद भी उन की शानदार कालोनी में छुट्टा सांड आने लगे. एक दिन सुबह का वक्त था. दीक्षितजी अपनी कार को पानी से धो रहे थे. अचानक उन की निगाह एक सांड पर पड़ी. वह कुछ परेशान सा लग रहा था. थोड़ा पास जा कर देखा तो सांड प्लास्टिक के डब्बे

में रखी किसी चीज को खा रहा था. प्लास्टिक का डब्बा उस के मुंह में फंस गया था. सांड को परेशान देख दीक्षितजी ने उस के पास जा कर डब्बे को खींच लिया और सांड को राहत की सांस मिली. सांड को दीक्षितजी की नेकी पसंद नहीं आई. सांड के मुंह से डब्बा छुड़ाने के बाद अपने कर्म पर घमंड करते दीक्षितजी वापस अपनी कार धोने लगे. उन को सांड के किसी भी तरह के इरादे की कोई भनक नहीं थी. सांड की तरफ उन की पीठ थी.

सांड को यह अच्छा नहीं लगा कि दीक्षितजी उस की उपेक्षा कर वापस अपने काम पर लग गए हैं. उस ने पूरी ताकत से दीक्षितजी की कमर पर पीछे से सींग मारा. सांड का जोर इतना था कि दीक्षितजी की कमर आगे कार से टकराई और रीढ़ की हड्डी टूट गई. एक साल बिस्तर पर गुजरा, लाखों रुपया लगा, बिजनैस बरबाद हो गया. अब वे व्हीलचेयर पर बैठे हैं. सांड तो क्या, उस के नाम से भी कांपते हैं वे.

दखलंदाजी बरदाश्त नहीं

छुट्टा सांड का कहर अफसर और नेताओं पर ही नहीं टूट रहा, चौथा स्तंभ भी इन की जद में आ गया है. छुट्टा सांड इस बात से खफा था कि चौथा स्तंभ उन के चरित्र का हनन कर रहा है. एक दिन एक दैनिक समाचारपत्र के लेखकपत्रकार रात को करीब 2 बजे अपने औफिस से निकल कर सहारा गंज के सामने से अपने घर त्रिवेणी नगर जा रहे थे. बीच सड़क पर सांड अपनी प्रणय लीला में व्यस्त था. लेखक महोदय ने रास्ता खाली कराने के उद्देश्य से हौर्न का प्रयोग कर लिया. प्रणय लीला में बाधा सांड को पसंद नहीं आई. उस ने लेखक महोदय को मोटरसाइकिल सहित पटक दिया. सिर में हैल्मेट लगा था तो चोट ज्यादा नहीं लगी. हैल्मेट का शीशा टूट कर चेहरे पर लग गया, जिस की वजह से लेखक को 6 टांके चेहरे पर लगे.

शहरों के साथ ही साथ छुट्टा सांड और उन की प्रजा का कहर किसानों पर सब से अधिक टूट रहा है. खेत से ले कर खुद किसानों पर जानलेवा हमले हो रहे हैं. इस के बाद भी छुट्टा सांड और उन की प्रजा पर किसी भी तरह का अंकुश संभव नहीं है.

सरकार ने उन की सेवा में कोताही बरतने वालों को दरबदर कर ऐसे जिलों में भेज दिया जहां केवल और केवल छुट्टा सांड ही हैं. अब प्रदेश में कानून से अधिक छुट्टा सांड का आतंक चलता है. सड़क से ले कर बाजारों तक इन को हर जगह घूमने का पूरा अधिकार है. किसी का भी खेत ये चर सकते हैं. ये कुछ भी करें, पर आप इन को कुछ नहीं कह सकते. अगर आप ने इन को मारा, तो आप ‘गौवंश’ पर हमला करने वाले माने जाएंगे. गौवंश पर हमला सत्ता पर हमले के बराबर है.

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सत्ता पर हमला करने वाला देशद्रोही माना जाता है. ऐसे में गौवंश पर हमला करने वाले भी देशद्रोही माने जाएंगे. अब यह कानून भले ही न बना हो, पर कानून से कम नहीं है. इस के बाद छुट्टा सांड और उस की प्रजा अमनचैन से है. आप को उत्तर प्रदेश की सड़कों पर चलना है तो छुट्टा सांड से पंगा नहीं लेना है. उत्तर प्रदेश में आप की यात्रा सकुशल गुजर जाए तो उन का शुक्रिया कहिए.

ब्रेस्टफीडिंग को इंटीमेसी का हिस्सा नहीं मानती ये TV एक्ट्रेस

हाल ही में मशहूर हेअर स्टाइलिश सपना भवनानी ने सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में ब्रेस्टफीडिंग की तुलना अपने सेक्शुअल काउंटर पार्ट से की थी. (सपना भवनानी के अनुसार स्तानपान भी यौन क्रीड़ा का हिस्सा है.) सपना के इस बयान पर टीवी एक्ट्रेस और एक बेटे रूद्रांष की मां मिताली नाग को काफी गुस्सा आया और उन्होंने सपना भवनानी को जवाब देते हुए फेसबुक पर नाराजगी जताते हुए ये बात लिखी.

मिताली ने लिख- ‘‘केवल एक बीमार दिमाग अपने बच्चे को दूध पिलाने वाली मां के स्तन की सुंदरता की तुलना सेक्स से कर सकता है. सपना भावनानी ने इस पोस्ट के साथ न केवल एक महिला की विनम्रता को नाराज किया है, बल्कि मातृत्व को भी शर्मसार किया है.‘‘ !!!’’

वह आगे लिखती हैं-‘‘मैं सभी माता और पिताओ से पूछना चाहती हूं कि क्या हम उनसे सार्वजनिक माफी की उम्मीद कर सकते हैं???’’

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मिताली नाग ने आगे लिखा- ‘‘सच्चाई यह है कि हमारा समाज सेक्स के प्रति जुनूनी है. कोई भी व्यक्ति स्तनपान जैसे सुंदर अधिनियम को यौन सुख के लिए कैसे इस्तेमाल कर सकता है? जहां दुनिया भर में महिलाएं अंतरराष्ट्रीय स्तनपान सप्ताह मना रही हैं. उनकी खुद की विभिन्न तस्वीरें इस्तेमाल करती है. न केवल हमारी सरकार बल्कि यूनिसेफ जैसी विश्व संस्थाएं स्तनपान कराने को बढ़ावा दे रही हैं. महिलाओं को स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए सेलेब्रिटीज और प्रभावशाली लोग अच्छा काम कर रहे हैं कि उन्हें कैसे इसके बारे में सचेत रहना चाहिए. अभिनेताओं ने सार्वजनिक संपत्तियों पर माताओं के लिए रिक्त स्थान की मांग करने का अभियान शुरू कर दिया है. आपको एक कार्यकर्ता होने के नाते, उन्हें इस तरह की पहल में मदद करनी चाहिए. आपको शर्मनाक और अश्लील पोस्ट नहीं करनी चाहिए.’’

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बता दें कि मिताली नाग ने 2011 में जीटीवी पर प्रसारित नारी सशक्तिकरण प्रधान सीरियल ‘‘अफसर बिटिया’’में कृष्णा राज का किरदार निभाकर अभिनय जगत में कदम रखा था. उसके बाद वह ‘दिल की नजर से खूबसूरत’,‘फिअर फाइल्स’ और ‘वेलकम’में नजर आयी थी.

मिताली ने संकल्प परदेसी से शादी की है. साल 2017 में वह एक बेटे रूद्रांष की मां बनी. 2017 में ही उन्होंने ‘स्टार प्लस’ के सीरियल ‘‘इस प्यार को क्या नाम दूं 3’’ में कैमियो किया. पिछले एक वर्ष से वह ‘कलर्स’’ के सीरियल ‘‘रूपः मर्द का नया स्वरूप’’ में हीरो की मां का रोल निभा रही थी. 17 मई 2019 को इस सीरियल का प्रसारण समाप्त हुआ था.

एडिट बाय- निशा राय

अब बौलीवुड में एंट्री करेंगे ‘महाभारत’ के ‘दुर्योधन’

लगभग तीस वर्ष पहले मशहूर फिल्मकार स्व. बी आर चोपड़ा ने पौराणिक ग्रंथ ‘‘महाभारत’’ पर दूरदर्शन के लिए सीरियल बनाया था. जिसे अपार सफलता मिली थी. उसके बाद कईयों ने ‘महाभारत’ पर सीरियल बनाए, पर उन्हे उतनी सफलता नसीब नहीं हुई. बी आर चोपड़ा के सीरियल ‘‘महाभारत’’ में अभिनेता पुनीत इस्सर ने दुर्योधन का किरदार निभाया था, जिसे इतना पसंद किया गया कि बाद में पुनीत इस्सर दुर्योधन की ईमेज से बाहर ही नहीं आ पाए. दो वर्ष पहले पुनीत इस्सर ने ‘‘महाभारत’’ पर एक नाटक का निर्माण किया और इस नाटक का निर्देशन पुनीत इस्सर ने खुद किया. इस नाटक में उन्होने सीरियल ‘महाभारत’ के गुरू द्रोणाचार्य यानी कि अभिनेता सुरेंद्र पाल सहित कई कलाकारों को शामिल किया था. मगर दुर्योधन का किरदार खुद निभाने की बजाय दुर्योधन का किरदार निभाने की जिम्मेदारी पुनीत इस्सर ने अपने बेटे सिद्धांत इस्सर को सौंपी थी. इस नाटक का मंचन विदशों में भी किया गया. गत वर्ष इस नाटक का मंचन दिल्ली में भी हुआ था.

इस फिल्म से एंट्री करेंगे पुनीत इस्सर के बेटे…

नाटक ‘‘महाभारत’’ से सिद्धांत इस्सर फिल्मकारों की नजर में आ गए और उन्हें फिल्मों के औफर मिलने लगे. पर सिद्धांत इस्सर ने काफी सोच समझ कर फिल्म करने का निर्णय लेते हुए फिल्म ‘‘लास्ट डील’’ से अभिनय की शुरूआत कर रहे हैं. रोमांचक अपराध कथा वाली फिल्म ‘‘लास्ट डील’’ के निर्देशक राजेश के राठी और फिल्म में सिद्धांत इस्सर के साथ प्रीति चैधरी, सुपर्णा माला कर, अमित पचैरी नजर आएंगे.

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‘श्री गहभाम प्रोडक्शंस’ और ‘एवीए फिल्म्स एंड एंटरटेनमेंट’ के बैनर तले बन रही फिल्म ‘‘लास्ट डील’’ के पांच निर्माता अर्जुन सिंह, रवि सिंह, ब्रजेश कुमार राजपूत (बौबी), राकेश यादव और मनोज कुमार हैं. फिल्म के सह निर्माता जेवियर एंथोनी सलदंहा (रूठ फिल्म्स) और अनु जैन है. जनवरी 2020 में प्रदशित होने वाली इस फिल्म में तीन गाने हैं, जो कि कहानी को आगे बढ़ाते हैं.

सिद्धांत इस्सर के चयन पर फिल्म के निर्देशक राजेश के राठी ने कहा-‘‘किरदार से मिलता जुलता चेहरा मिलने से कहानी बखूबी कही जा सकती है. सिद्धांत की तस्वीरें देखकर और इनसे मिलकर मुझे लगा कि यही इस किरदार के लिए परफेक्ट हैं. यह एक मुश्किल किरदार है कई लेयर्स है. लेकिन इन्होंने चैलेंज कबूल किया.‘‘

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सिद्धांत इस्सर कहते हैं- ‘‘मैं अपने करियर की पहली फिल्म के शुरू होने पर काफी उत्साहित हूं. जब मैने पटकथा सुनी, तो मैं मोहित हो गया था. इसमें मेरा बहुत ही आर्थोपैक किरदार है. फिल्म में मेरा किरदार हीरो है, मगर इसमें कई डार्क शेड्स भी हैं. जब मैने अपने पिता पुनीत इस्सर से इस फिल्म व अपने किरदार का जिक्र किया, तो उन्होने कहा कि मुझे इसी से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करनी चाहिए. मैं इस फिल्म के लिए काफी मेहनत कर रहा हूं. यह एक क्राइम थ्रिलर फिल्म है. इस फिल्म के लिए अपने बाल बढ़ाए हैं.’’

बता दें कि महाभारत नाटक के 42 स्टेज शो हो चुके हैं और इसका अगला शो 20 और 21 अगस्त को दिल्ली में होगा. इसमें दुर्योधन के किरदार में सिद्धांत इस्सर हैं.

एडिट बाय- करण मनचंदा

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