जब कोई गैर फिल्मी परिवार और छोटे शहर से बौलीवुड में कदम रखता है, तो उसे बौलीवुड की कार्यशैली और फिल्म निर्माण कला की कोई जानकारी नहीं होती है. सिख परिवार के मंजोत सिंह ने तो कभी स्कूल में भी किसी नाटक में अभिनय नहीं किया था. उन्होने अपने दोस्त से मजाक के चलते फिल्म ‘‘ओए लक्की लक्की ओए’’ के लिए औडीशन दिया और उन्हे महज सोलह साल की उम्र में अभय देओल के बचपन यानी यंग लविंदर उर्फ लक्की का किरदार निभाने का मौका मिल गया. फिल्म की शुरूआत उन्ही से होती है और पूरे पंद्रह मिनट तक वह फिल्म में छाए रहते हैं. इस फिल्म के लिए उन्हे सर्वश्रेष्ठ उभरते कलाकार का फिल्मफेअर अवार्ड भी मिल गया था, जबकि मंजोत सिंह ने आज तक अभिनय की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. लोग मानते हैं कि इस फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा तो यही पंद्रह मिनट हैं. उसके बाद मंजोत सिंह ने ‘‘उड़ान’, ‘स्टूडेंट आफ द ईअर’, ‘फुकरे’, ‘फुकरे रिटर्न’, ‘जब हैरी मेट सेजल’, ‘सोनचिरैया’ और ‘अर्जुन पटियाला’ सहित करीबन दस ग्यारह फिल्में करते हुए अपनी एक अलग पहचान बना ली है. इन दिनों मंजोत सिंह तेरह सितंबर को प्रदर्षित होने वाली फिल्म ‘‘ड्रीम गर्ल’’ को लेकर उत्साहित हैं.

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