‘छुट्टा सांड’ एक पुरानी कहावत है. इस कहावत का अर्थ यह है कि जो नियमकानून के दायरे से बाहर हो, वह छुट्टा सांड है. वैसे देखा जाए तो सांड हमेशा छुट्टा ही रहता रहा है. उस को छुट्टा छोड़ा जाता था. कई बार इस को चरित्र के लिहाज से नहीं माना जाता. दुश्चरित्र पुरुषों के लिए भी छुट्टा सांड शब्द का प्रयोग किया जाता है. छुट्टा सांड के आसपास ‘आवारा’ शब्द की गणना भी होती है. अगर देखें तो छुट्टा सांड को छुट्टा सांड या आवारा पशु कहना अब अच्छी बात नहीं है.

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