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अरुण जेटली: राजनीति का एक और बेहतरीन चेहरा खो गया 

मोदी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली 9 अगस्त 2019 से दिल्ली के अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान में इलाज करा रहे थे. 9 अगस्त को सांस लेने में समस्या के कारण उन्हें एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया था. स्थिति में सुधार ना होने से 66 वर्षीय अरुण जेटली की शनिवार 24 अगस्त को मौत हो गई. जेटली का पिछले वर्ष किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था. उनके बाएं पैर में सौफ्ट टिशू सर्कोमा नामक कैंसर था. जिसके सर्जरी के लिए वह इसी साल जनवरी में न्यूयौर्क गए थे. जहां से, मई में भाजपा के दुबारा सत्ता में आने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बधाई दी. जेटली ने अपने राजनीतिक मौकों के लिए आभार जताया और स्वास्थ्य कारणों से नई सरकार में किसी भी नई जिम्मेदारी को ना लेने की गुजारिश की.

एम्स की प्रवक्ता आरती विज ने मीडिया के लिए जारी प्रेस रिलीज में बताया कि अरुण जेटली ने शनिवार को दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली. एम्स में उनसे मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी पहुचें थे.

अरुण जेटली का सफर:

28 दिसम्बर 1952 को जन्में अरुण जेटली का राजनीतिक सफर 1974 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ. जब देश में कांग्रेस सरकार के नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन औफ इंडिया का बोलबाला भारत के हर छोटे बड़े कौलेजों में था. अरुण जेटली ने दिल्ली विश्वविद्यालय में भाजपा के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र नेता और छात्र अध्यक्ष का चुनाव जीता. उसके बाद 1975 से लेकर 1977 तक जब देश में इमरजेंसी लागू हुआ तब जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में इंदिरा गांधी के विरोध प्रदर्शन के दौरान जेटली को 9 माह का कारावास भी हुआ. जिसके बाद उनसे प्रभावित होकर जयप्रकाश नारायण ने उन्हें राष्ट्रीय छात्र एवं युवा संगठन समिति का संयोजक बना दिया. जेल में सजा के समय जेटली ने मानवीय मूल को समझने के लिए ढेरों किताबें पढ़ डाली. जिससे उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर पड़ा.

1980 में जेटली को भाजपा के युवा संघ का और दिल्ली यूनिट का अध्यक्ष  बनाया गया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य हाई कोर्ट में उन्होंने अपनी कानून की प्रैक्टिस भी जारी रखी और 1989 में वी.पी सिंह की सरकार में उन्हें सरकारी वकील बनाया गया. 1990 में वह दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता थे.
अपने खेल प्रेम के कारण वह 15 वर्षों तक दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष रहें. साथ ही वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहें. लेकिन आईपीएल मैच फिक्सिंग कांड के बाद अपना इस्तीफा दे दिया. 29 मई 2019 को स्वास्थ्य स्थिति के कारण वित्त मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दिया.

जेटली की उपलब्धि:

भाजपा सरकार में पार्टी के महासचिव के तौर पर जेटली ने आठ विधानसभा चुनाव कराए जो भाजपा के लिए विजयी साबित हुए. मोदी सरकार के कार्यकाल में वित्त मंत्री का पद सम्भालते हुए जेटली ने अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण निर्णयों में अपनी भूमिका निभाई. जिसमें नोटबंदी, कालाधन और जीएसटी के कार्यान्वयन जैसे निर्णायक मसले हल हुए. 2006 और 2012 में गुजरात से राज्य सभा के सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए जेटली ने राज्य सभा के सदस्य के तौर पर अपनी तीसर पारी खेली. 2018 में वह पुनः उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के सदस्य के रूप में चुने गए. लंदन पत्रिका में फाइनेंस मिनिस्टर औफ द ईयर और एशिया पुरस्कार से नवाजे गए अरुण जेटली भारतीय राजनीति में प्रभावशाली नेता थे.

जेटली के मुख्य कार्यभार:

मोदी सरकार के नेतृत्व में अरुण जेटली ने 26 मई 2014 से 30 मई 2019 तक भारत के वित्त मंत्री के साथ ही भारत के रक्षा मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार भी सम्भाला. 1991 में जेटली भारतीय जनता पार्टी से राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में जुड़े. 1999 में वाजपेयी सरकार में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया. 1999 में ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासनकाल में जेटली को पहली सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री के साथ विनिवेश मंत्री का भी स्वतंत्र कार्यभार सौंपा गया. उसके बाद 23 जुलाई 2000 को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय के प्रभार के साथ ही साथ 1 सितंबर 2001 को नौवहन मंत्री का कार्यभार भी जेटली ने सम्भाला. जुलाई 2002 को अरुण जेटली भारतीय जनता पार्टी से महा सचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर जुड़े. 2004 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हार के साथ ही वे पुनः भाजपा के महा सचिव के रूप में जुड़ गए और फिर से अपने कानूनी करियर को शुरू किया. 3 जनवरी 2009 में एल.के.आडवाणी द्वारा राज्यसभा में विपक्ष के नेता के पद को संभालते हुए जेटली ने पार्टी के सिद्धांत one man one post के अनुसार भाजपा के महा सचिव पद से अपना इस्तीफा दे दिया. मई 2014 तक विपक्ष के नेता बने रहने के बाद जेटली को 9 नवम्बर 2014 में मोदी सरकार के कार्यकाल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री भी बनाया गया. 2014 के लोक सभा चुनाव में जेटली ने अमृतसर से चुनाव लड़ा लेकिन अमरिंदर सिंह से हार का सामना करना पड़ा.

जेटली के जोरदार बयान:

राज्यसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर जेटली ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक की बातचीत के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जन लोकपाल विधेयक के लिए अन्ना हजारे का समर्थन किया.
26 अगस्त 2012 को जेटली ने संसद के बाहर कहा, “ऐसे अवसर होते है जब संसद में बाधा देश को अधिक लाभ पहुंचाती हैं.” जेटली के इस कथन को भारत में समकालीन राजनीति में संसद की बाधा को वैधता प्रदान करने वाला माना जाता है.

जेटली के खास रिश्तें : 

1974 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र अध्यक्ष के पद पर काम करते हुए अरुण जेटली की मुलाकात टीवी पत्रकार रजत शर्मा से हुई. जब रजत शर्मा दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने पहुचें तो उनके पास दाखिले के लायक फीस नहीं थी. जिससे वहां के अकाउंटेंट ने उन्हें काफी डांटा. जिसे सुनकर जेटली ने कौलेज अध्यक्ष होने के नाते पहले उस अकाउंटेंट को समझाया और फिर रजत शर्मा की दाखिले की फीस भरी. तब से रजत शर्मा और जेटली के पारिवारिक रिश्ते बन गए.

जेटली के लाल कृष्ण आडवाणी से भी अच्छे संबंध रहें हैं. उन्हें आडवाणी के काम करने का तरीका काफी प्रभावित करता था. लेकिन कुछ अफवाहें यह भी हैं की जेटली का आडवाणी के प्रधानमंत्री पद की दावेदारी खत्म करने में बड़ा हाथ रहा.

यह बात काफी चर्चा में रही कि जब 2014 में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का प्रश्न सामने आया तो जेटली ने नरेंद्र मोदी का नाम सबसे पहले सुझाया था. इसे जेटली के मोदी के साथ चालीस वर्षों की दोस्ती बताई गई. जो उनके छात्र राजनीति के साथ शुरू हुई थी. जब 2002 में गुजरात दंगे हुए तब वाजपेयी सरकार ने नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा कर उनके इस्तीफे की मांग की. तब जेटली ने मोदी की पुरजोर पैरवी की थी. वह मोदी के कानूनी सलाहकार भी बने रहें. 2002 में ही विधानसभा चुनाव के दौरान जेटली ने अपने पार्टी सहायक नरेंद्र मोदी को 182 में से 126 सीट जीतने में मदद की. फिर 2007 में दुबारा सत्ता में आने के लिए गुजरात में 182 में से 117 सीट की जीत हासिल कराई. भाजपा के रणनीति योजनाकार के रूप में जेटली की गहरी भूमिका रही हैं.

जेटली से जुड़े विवाद:

जेटली के उपलब्धियों के साथ ही कुछ विवाद भी जुड़े हुए हैं. जेटली पर पार्टी की अंदर की बातें लीक करने का इल्जाम लगाया गया. ऐसा कहा गया कि वह पार्टी की भीतर की बातें वह मीडिया के साथ साझा करते हैं. जिससे पार्टी की बातें विपक्ष तक पहुंच जाती हैं.

जेटली जब दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ से जुड़े थे तब 15 वर्ष कार्यरत रहने के बाद उनपर आम आदमी पार्टी ने घोटाले का आरोप लगाया. आप पार्टी ने यह इल्जाम लगाया कि अरुण जेटली की सहमति से दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ में भ्रष्टाचार हो रहा है और केवल पैसा बनाने के लिए फर्जी बिल और मुकदमें बनाए जा रहें हैं. आप पार्टी ने जेटली पर दिल्ली सचिवालय पर हुए छापेमारी के मामले में भी सलिंगता का गम्भीर आरोप लगाया.

जेटली का राजनीतिक प्रेम:

रजत शर्मा की आप की अदालत में अरुण जेटली से रजत शर्मा ने सवाल किया कि जब वह वकालत के पेशे में करोड़ो की कमाई कर रहें थे तो वह राजनीति में क्यों आए. उनके सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि “राजनीति का वैकल्पिक जीवन सोच कर चुना हैं और इसके लिए मुझे जरा भी अफसोस नहीं है. संसद में किसी बड़े विषय पर खड़े होकर बहस आरंभ करना और सयुंक्त राष्ट्र जाकर संबोधित करने , अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में जाकर भाषण देने और विश्व  व्यापार संगठन की अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में जाकर बोलने का अपना एक आनंद है जो पैसे में नापा नहीं जा सकता है.

मुझे लगता है कि केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहने , पार्टी का एक राष्ट्रीय पदाधिकारी रहने और विपक्ष का नेता रहने के अनुभवों ने मेरे व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका निभाई हैं. इससे मुझे संतुष्टि ही मिली है.”

शादी की खबरों पर मलाइका ने चुप्पी तोड़ी, ट्रोलर्स को दिया दो-टूक जवाब

बौलीवुड अदाकारा मलाइका अरोड़ा ने अर्जुन कपूर के साथ शादी की खबरों पर चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि हम सबकी लाइफ पर फैसला सुनाने वाले लोग मौजूद हैं. जब भी कोई सेलेब कुछ करता है तो उसको इस परेशानी से दो-चार होना पड़ता है. अगर आप इस दुनिया का हिस्सा बने रहना चाहते हैं तो आपको यह सब झेलना होगा. मीडिया रिपोर्मटस के मुताबिक जब मलाइका अरोड़ा से इंटरनेट पर होने वाली ट्रोलिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, ‘आप लोगों को रोक नहीं सकते हैं. यह उनके अपने विचार हैं. मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहती हूं.

मलाइका अरोड़ा इंडस्ट्री का एक जाना-माना नाम हैं लेकिन उन्होंने कभी भी फिल्मों को सीरियसली क्यों नहीं लिया, इस पर बात करते हुए मलाइका अरोड़ा ने  ये भी  बताया कि ‘मैं फिल्मों में कभी उस तरह से इंट्रेस्टिड थी ही नहीं. मैं फिल्मों की हीरोइन बनना ही नहीं चाहती थी. मैं इस चीज के लिए कभी आकर्षित ही नहीं हुई. मुझे इस इंडस्ट्री से प्यार था लेकिन फिल्मों में एक हीरोइन के तौर पर नाम कमाने का मुझे कोई शौक नहीं था.

बता दें, मलाइका अरोड़ा को लगातार जिम के बाहर देखा जाता है, वो अपने फिटनेस का काफी ख्याल रखती है. मलाइका अरोड़ा का एयरपोर्ट लुक भी हमेशा चर्चा में रहता है, इन सारी चीजों पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया, मुझे लगता है कि यह सब ओवररेटेड है. फोटोग्राफर्स अपना काम कर रहे हैं.

नोटबंदी और इंस्पेक्टर राज आर्थिक मंदी के सबसे बड़े कारण

उद्योग जगत को वित्तमंत्री की राहत भरी घोषणाओं से यह अंदाजा तो लग रहा है कि सरकार को अब देश की आर्थिक हालत का अंदाजा हो गया है. यह बात और है कि सरकार अभी भी अपनी गलत आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार नहीं मान रही है. देश आर्थिक मंदी की चपेट में है. जिम्मेदार मंत्री और अफसर अभी भी मुख्य कारणों की बात ना करके केवल सरकार के मनपसंद बयान दे रहे हैं.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत को लेकर जो घोषणाएं की है यह पहले होनी चाहिये थी. सरकार को यह बताना चाहिए कि जीएसटी, आयकर और नोटबंदी को लेकर जो काम हुए उनका देश पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ा. अगर सरकार की आर्थिक नीतियां देश और उद्योग जगत के हित में थी तो देश का कारोबार डूब क्यों रहा है?  जीएसटी और आयकर को लेकर सरकार ने जो नियम बनाए. उससे कारोबारियों पर लालफीताशाही हावी हो गई. कारोबारी इंस्पेक्टर राज में फंस गये. आयकर विभाग के नोटिस, छापे कारोबारियों को तोड़ने में सफल रहे. वित्तमंत्री ने अब इस बात को समझा और आयकर कर नोटिस के स्वरूप को बदलने की बात कही है.

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बड़े कारोबारी से लेकर सड़क पर दुकान लगाने वाला छोटा रेहडी वाला तक लाल फीताशाही का शिकार हो रहा था. सरकार यह तर्क दे रही थी कि अगर देश की जनता उसके कामों से खुश नहीं थी तो उनको चुनाव में जीत कैसे मिल रही थी?  केन्द्र सरकार ने अपने इस तर्क के आगे हर बात को अनसुना कर दिया. अपनी किसी नीति में सुधार नहीं किया. लिहाजा देश लगातार आर्थिक मंदी के दौर में फंसता गया. जब पानी गले तक आ गया तो उद्योग जगत में त्राहि त्राहि मच गई. तब सरकार  के कानून पर जूं रेगीं और वित्त मंत्रालय ने आनन फानन में कुछ सुविधाओं का ऐलान कर दिया. सरकार अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि देश की आर्थिक मंदी गलत आर्थिक नीतियों का खामियाजा है.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इसके लिये कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया. सरकार की यह नीति अपने आप में बेहद हास्यपद है कि गलत कामों के लिये वह कांग्रेस को जिम्मेदार मानती है और अच्छे कामों के लिए खुद की पीठ ठोकती है.

राजधानी लखनऊ में मिठाई का कारोबार करने वाला एक छोटा कारोबारी सरकार की आर्थिक नीतियों को बेहद सरल तरह से समझते हुए कहता है ‘नोटबंदी के दौरान मुद्रा बैंक में जमा हो गई. उसे अब लोग वापस निकालना नहीं चाहते हैं. नोटबंदी, जीएसटी और आयकर की नोटिस के डर से वह किसी कारोबार को शुरू नहीं करना चाहते. सरकार ने नई नोट के रूप में जो मुद्रा दो हजार के नोट से लेकर 10 रूपये के नोट तक चलन में आई है वह बेहद घटिया कागज पर है. ऐसे में सरकार की नोट पर अब जनता को भरोसा नहीं रह गया है. ऐसे में कारोबार टूट रहा है. जिस मिठाई की दुकान से हम रोज 30 हजार की बिक्री रोज करते थे अब घटकर 10 हजार रह गई है. पहले हमें यह लग रहा था कि नोटबंदी जीएसटी और आयकर के डर जल्द खत्म हो जायेंगे. हालत सुधर जाएंगे,  2 साल भी हालात खराब के खराब ही होते जा रहे है.’

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप बंसल कहते हैं ‘सरकार को कारोबारी संगठन और समाज पहले से यह समझा रहा था कि उसकी आर्थिक नीतियां गलत है. इसके बाद भी सरकार ने पूरी तरह से कारोबारियों की आवाज को अनसुना कर दिया. आज देश आर्थिक मंदी के दौर में है. वितमंत्री ने जो घोषणाएं की है उसके आगे जाकर और भी राहत देने की जरूरत है तभी इस देश का कारोबार और कारोबारी बच सकेंगे. देश उन्नति की राह पर जायेगा. गलर्त आर्थिक नीतियों से देश का कोई भला नहीं होगा.’

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मीका ने मांगी देश से माफी, पाकिस्तान में किया था परफौर्म

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बौलीवुड सिंगर मीका सिंह ने पाकिस्तान में परफौर्मेंस दी थी जिस पर खूब विवाद हुआ. वास्तव में पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया. और आठ अगस्त को पाकिस्तान के अरबपति कारोबारी अदनान असद की बेटी की शादी में बौलीवुड सिंगर मीका सिंह ने परफौर्म किया. यह बात जग जाहिर होते ही विवाद होना स्वाभाविक ही था. इस बात का खुलासा होने पर ‘‘द फेडरेशन औफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलाइज एशोसिएशन’’ने मीका सिंह प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि, ‘‘जो लोग मीका सिंह के साथ काम करेंगे, उन पर भी प्रतिबंध लगेगा.’’

मीका सिंह पर लगे इस प्रतिबंध का सीघा असर पड़ा सलमान खान के विदेशी टूर पर, जो कि 25 अगस्त को न्यूजीलैंड से शुरू होने वाला है. पर 28 अगस्त को अमरीका के हौस्टन शहर और 30 अगस्त को अमेरिका के सैन जोस में होने वाले शो में सलमान खान के साथ मीका सिंह भी परफार्म करने वाले थे.

मीका सिंह पर प्रतिबंध की खबर के बाद सलमान खान ने अपनी तरफ से कार्यवाई करते हुए अमरीका सहित अपने विदेश टूर में मीका सिंह को न ले जाने का फैसला कर लिया. इस म्यूजिक कंसर्ट के लिए पहले जो पोस्टर छपे थे, उनमें सलमान खान और मीका सिंह की तस्वीरें थीं. विवाद के बाद पोस्टर से मीका सिंह की फोटो गायब हो गई. और यह खबर आग की तरह फैल गयी कि सलमान खान अपने शो के लिए मीका सिंह को नहीं ले जाएंगे.

इसके बाद 21 अगस्त को मीका सिंह फेडरेशन के मुंबई में अंधेरी स्थित कार्यालय पहुंचे और मीडिया के भारी जमावड़े और फेडरेशन के पदाधिकारियों की मौजूदगी में प्रेस कांफ्रेंस कर देश से माफी मांगते हुए कहा-‘‘आगे से यह गलती नहीं होगी. मैंने गलती की है तो देश से माफी मांगता हूं.’’

मीका सिंह ने आगे कहा- ‘‘मेरा पाकिस्तान जाना और अनुच्छेद ३७० का हटना केवल संयोग था. अगर मैंने गलत किया है तो मैं फेडरेशन और पूरे देश से माफी मांगता हूं.‘’’

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इस अवसर पर फेडरेशन औफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्पलाईज केप्रेसिडेंट बी.एन. तिवारी, इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित, फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे, फेडरेशन केट्रेजरार गंगेश्वर श्रीवास्तव (संजू), सिनियर वाईस प्रेसिडेंट फिरोज खान(राजाभाई), वाईस प्रेसिडेंट संगम उपाध्याय, ज्वाईंट सेक्रेटरी स्टेनली डिसोजा, ज्वाईंट सेक्रेटरी राजेन्द्र सिंह, ज्वाईंट ट्रेजरार नदीम खान, मुख्य सलाहकार शरद शेलार, राकेश मौर्या सहित अन्य यूनियनों के लोग भी मौजूद थे.

मीका सिंह के माफी मांगने के बाद फेडरेशन के प्रेसिंडेंट बी. एन तिवारी ने मीका सिंह से प्रतिबंध नहीं लगाने की घोषणा करते हुए कहा-‘‘मीका सिंह ने चुंकी खुद फेडरेशन के कार्यालय में आकर के अपनी गलती मीडिया के सामने स्वीकार किया और माफी मांगी. इसलिए उनके पक्ष को सुनने के बाद फेडरेशन के पदाधिकारियों की बैठक में यह तय हुआ कि उन पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा.’’ उधर ‘‘द फेडरेशन औफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलाइज एशोसिएशन’’ से माफी मांगकर अपने उपर लगे प्रतिबंध को हटवाने के बाद से मीका सिंह की सारी कोशिश यह है कि अब सलमान खान से माफी मिल जाए, अभी तक जो खबर है उसके अनुसार सलमान खान माफ करने को तैयार नहीं है.

देखना है कि अगले एक दो दिन में हमेशा विवादों में रहने वाले गायक मीका सिंह को सलमान खान से माफी मिलती है या नहीं और क्या मीका सिंह, सलमान खान के साथ विदेश टूर पर जा पाएंगे.?

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Janmashtami Special: घर पर बनाएं शकरकंद का हलवा

आज आपको शकरकंद का हलवा बनाने की रेसिपी बताते हैं और इसे बनाना भी बहुत आसान है. इसे खाना बड़े भी पसंद करते हैं और बच्चे भी. तो चलिए झट से बताते है आपको इसकी रेसिपी.

शकरकंद (4 मीडियम आकार की, उबली हुई)

नारियल ( 02 बड़े चम्मच, कद्दूकस किया हुआ)

देशी घी (03 बड़े चम्मच)

शक्कर  (1/2 कप)

छोटी इलाइची (पाउडर)

बादाम (1 बड़ा चम्मच कतरे हुए)

पिस्ता ( 01 बड़ा चम्मच कतरे हुए)

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बनाने की विधि :

सबसे पहले उबली हुई शक्करकंद को छील कर उसका गूदा एक बर्तन में रखें और उसे अच्छी तरह से मसल लें.

अब एक नौन स्टिक कढाई में घी डाल के गरम करें.

घी गरम होने पर शक्करकंद का गूदा उसमें डालें और धीमी आंच पर चलाते हुए गुलाबी होने तक भून लें.

जब मिश्रण घी छोड़ने लगे, तक उसमें शक्कर मिला दें और लगातार चलाते हुए मिश्रण के सूखने तक भूनें और इसके बाद मिश्रण में इलाइची पाउडर मिला दें और गैस बंद कर दें.

लीजिए अब आपका शकरकंद का हलवा तैयार है. इसे मेवों से गार्निश करें और सर्व करें.

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अगर आपके पास भी ऐसी ही कोई रेसिपी हो तो हमारे साथ जरूर शेयर करें.

फरिश्ता : भाग 3

अचानक दरवाजे पर हुई दस्तक ने पूनम को चौंका दिया. अनजानी आशा से उसकी छाती धाड़-धाड़ बजने लगी. उसके हर्ष की सीमा न रही जब उसने दरवाजे पर डौक्टर सूर्यकांत को खड़ा पाया. हल्के नीले रंग की शर्ट और काली पैंट में वह सचमुच एक फरिश्ते के समान लग रहा था.

‘क्या मैं अन्दर आ जाऊं…?’ उसने मजाकिया लहज़े में पूछा.

‘जी… आइये न…’  पूनम खुशी से कंपकपाते स्वर में बोली और उसने आगे बढ़कर उसका बैग थाम लिया.

‘अब कैसे हैं तुम्हारे बाबा..?’

‘जी, पहले से बहुत अच्छे हैं… आइये…’ वह उसे लेकर भीतर वाले कमरे की ओर बढ़ गयी.

‘नमस्ते डौक्टर साहब…’ मास्टर जी ने उसे देखा तो खुशी से हाथ जोड़े उठने की कोशिश करने लगे.

‘अरे-अरे… आप लेटे रहिए… अब तो आप काफी अच्छे लग रहे हैं. ऐसे ही समय से दवाएं वगैरह लेते रहिए… देखिएगा महीने भर में आप दौड़ने लगेंगे….’ वह स्टूल खींचकर उनके पलंग के पास बैठ गया. उसने बैग खोल कर अपना आला निकाला और उन्हें चेक करने लगा.

‘बेटा, जा दौड़कर चाय बना ला डौक्टर साहब के लिए…’ बूढ़े ने पूनम से कहा.

‘जी…’ पूनम जल्दी से रसोई की तरफ चली गयी.

ताकत का इंजेक्शन देने के बाद डौक्टर सूर्यकांत मास्टर जी से बतियाने लगा.

‘आगे दवाएं वैसे ही लेते रहिएगा… मैं बीच-बीच में आता रहूंगा…’ उसने मास्टर जी से कहा.

‘डौक्टर साहब, मैं आपके एहसान का बदला कभी नहीं…’ मास्टर जी की आवाज लड़खड़ा गयी. आंखों में आंसू भरे वह उसके पैरों की तरफ झुक गये.

‘अरे-अरे… ये क्या कर रहे हैं? आप तो मुझे शमिन्दा कर रहे हैं मास्टर जी… मैंने तो सिर्फ अपना फर्ज़ निभाया है…..’ उसने उन्हें पकड़कर बिस्तर पर लिटा दिया.

‘अब आप इस तरह करेंगे तो मैं नहीं आऊंगा….’ वह उनको धमकाने के अंदाज में बोला और मास्टर जी रोते-रोते मुस्कुरा पड़े.

पूनम चाय ले आयी थी. आज चाय गुड़ की जगह चीनी की बनी मालूम पड़ती थी. चाय पीते हुए डौक्टर ने पूनम से पूछा, ‘आगे पढ़ने की इच्छा हो तो मैं शहर के कौलेज में बात करूं तुम्हारे लिए… मैं चाहता हूं कि तुम पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो जाओ और अपने बाबा का सहारा बनो. फिर मास्टर जी की तबियत भी सुधर रही है… क्यों मास्टर जी?’ उसने अपनी बात के समर्थन के लिए उनकी तरफ देखा.

‘डौक्टर साहब, मेरी इतनी औकात कहां कि इसे आगे पढ़ा सकूं. इच्छा तो बहुत थी पर…’ वह खामोश हो गये.

‘अगर आप कहें तो मैं कोशिश करूं… शहर में कुछ कौलेज गरीब लड़कियों को मुफ्त शिक्षा और साथ में काम की ट्रेनिंग भी देते हैं.’ उसने बताया.

‘डौक्टर साहब, आपके वैसे ही बहुत उपकार हैं हम पर…’ बूढ़े ने हाथ जोड़ दिये.

‘ओफ्फो मास्टर जी… आपकी यही बात मुझे पसन्द नहीं है… आखिर इंसान इंसान के काम नहीं आएगा, तो क्या देवता उतरेंगे आसमान से? बस… अगर आप राजी हैं तो मैं इसके लिए जरूर कोशिश करूंगा… मगर पहले आप सेहतमंद हो जाएं ताकि अपने रोजमर्रा के कामकाज स्वयं कर सकें.’

‘हां-हां… मैं जल्दी अच्छा हो जाऊंगा…’ मास्टर जी खुशी से कंपकपाते स्वर में बोले.

पूनम को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वह आगे पढ़ भी सकती है और नौकरी भी कर सकती है. वह मन ही मन डौक्टर के चरणों में अर्पित हो गयी. उसे कुछ न सूझा कि किन शब्दों में वह डौक्टर साहब का धन्यवाद करे.

‘अच्छा, अब मैं चलता हूं… अभी विधायक बाबू को देखने भी जाना है… अच्छा पूनम… बाबा का ध्यान रखना…..’ उसने मास्टर जी की ओर देख कर हाथ जोड़े और बैग उठाकर बाहर की ओर चल पड़ा. देहरी पर किवाड़ थामे पूनम उसे दूर तक जाते हुए देखती रही… ‘कितनी शालीनता है इनके व्यक्तित्व में… कितना अपनापन…. कितना सहज’ वह सोच रही थी.

तीन महीने बीतते-बीतते मास्टर जी ने चलना-फिरना शुरू कर दिया था. अब तो वह रोज सुबह कुछ दूर खेतों की ओर टहलने भी निकल जाते थे. डौक्टर नियत समय पर उनके लिए दवाएं और इंजेक्शन आदि भेज दिया करता था और मास्टर जी को देखने आता तो किसी न किसी बहाने रुपये भी दे जाता था, ताकि वह जरूरत के हिसाब से फल और दूध आदि लेते रहें. पूनम की लक्ष्मी मौसी भी देखभाल में लगी रहती थीं. डौक्टर के दिये रुपयों से घर की हालत में सुधार आ गया था. दो वक्त चूल्हा जलने लगा था. दु:ख के बादल धीरे-धीरे छंट रहे थे. फिर एक दिन अचानक डौक्टर सूर्यकांत ने यह सुखद समाचार सुनाया…

‘तुम्हारा एडमिशन शहर के एक कौलेज में हो गया है… उसी के हौस्टल में तुम्हारे रहने का इंतजाम भी… बस अब मन लगाकर आगे की पढ़ाई करो… मास्टर जी की सेहत भी सुधर गयी है… बाकी देखभाल और खानापीना तो लक्ष्मी मौसी भी कर दिया करेंगी… क्यों मास्टर जी?’  उसने मास्टर जी की ओर देखा.

‘हां-हां, क्यों नहीं…’ मास्टर जी भर्राए स्वरों में बोले, ‘अपनी देखभाल तो अब मैं खुद भी कर सकता हूं….’ उन्होंने पूनम का हौसला बढ़ाने के लिए कहा.

और बस कुछ ही दिन बाद पूनम डौक्टर सूर्यकांत के साथ शहर आ गयी. लक्ष्मी मौसी भी उसे शहर तक छोड़ने के लिए डौक्टर की गाड़ी में बैठकर आयी थीं. जिस कौलेज में उसका एडमिशन हुआ था वह काफी बड़ा कौलेज था. इतना बड़ा कौलेज देखकर ही पूनम का दिल बैठा जा रहा था. हौस्टल की वार्डन उसे बड़ी सख्त औरत लगी, लेकिन बाद में समझ में आया कि ऊपर से पत्थर दिखने वाली वार्डन अन्दर से बिल्कुल मोम की तरह मुलायम थीं. ईसाई औरत थीं. लोग उन्हें सिस्टर सिरिल के नाम से पुकारते थे. पहले तो पूनम उनसे काफी डर गयी, परन्तु धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि वह ममता की साक्षात मूरत थीं, मगर कुछ बदमाश लड़कियों के लिए चंडी का रूप भी धर लेती थीं. उनकी सख्ती वाजिब थी. को-एजुकेशन वाला कौलेज था, इसलिए हौस्टल की लड़कियों को अनुशासन में रखना बहुत जरूरी था. लड़के और लड़कियों के हौस्टल आसपास ही बने थे. हौस्टल में पहले दिन पूनम काफी घबरायी-घबरायी सी रही. गांव से अचानक शहर के वातावरण में वह अपने आपको एडजेस्ट कर पाएगी या नहीं, यही चिन्ता उसे घेरे रही. डौक्टर सूर्यकांत उसको वार्डन के पास छोड़कर लक्ष्मी मौसी को वापसी की बस में बिठाने के लिए चले गये थे.

वार्डन ने अपने कमरे में बिठा कर पूनम को काफी देर तक सारी ऊंच-नीच समझायी, सारे नियम-कायदे बताए और फिर बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं…

‘कोई परेशानी हो तो बिना झिझक सीधे मेरे पास आ सकती हो… और यह कुछ सामान व किताबें डॉक्टर सूर्यकांत तुम्हारे लिए दे गये हैं… डौक्टर बाबू बहुत भले आदमी हैं. इस कौलेज को उनसे काफी डोनेशन मिलता है…’ डौक्टर की तारीफ करते-करते उन्होंने एक छोटा सूटकेस और किताबों का बंडल पूनम को पकड़ा दिया. पूनम ने झिझकते हुए सूटकेस और किताबों का बंडल पकड़ा और वार्डन के साथ अपने कमरे की ओर चल पड़ी. उसका रोम-रोम डौक्टर सूर्यकांत को धन्यवाद दे रहा था. उसका जी चाह रहा था कि कहीं से उनकी एक तस्वीर मिल जाती तो वह रात-दिन उनकी पूजा करती, उनके चरणों को अपने आंसुओं से धोती. न जाने किस जनम के पुण्य थे, जो उसे इस देवता स्वरूप व्यक्ति के दर्शन हुए थे. कमरे में पहुंचकर वह खुशी और अहसानों के बोझ तले फूट-फूट कर रो पड़ी. न जाने कितनी देर तक वह रोती रही. आज उसे अपनी स्वर्गवासी मां की बेहद याद आयी. उसने सूटकेस खोला तो उसमें पांच साड़ियां, ब्लाउज, पेटिकोट, दो शलवार-सूट, तौलिया, चादर, कंघा, पाउडर और छोटी-छोटी जरूरत की तमाम चीजों के साथ एक पत्र भी मिला. लिखा था –

‘कौलेज के वातावरण के हिसाब से रहने की कोशिश करना. ऐसा न लगे कि तुम गांव से आयी हो, वरना मजाक बनते देर नहीं लगेगी. हर तरफ से दिमाग हटाकर सिर्फ पढ़ाई पर लगाना. बाबा की फिक्र करने की जरूरत नहीं है. मैं हर हफ्ते उन्हें देखने के लिए जाता रहूंगा. कोई परेशानी हो तो वार्डन से कहने में हिचकिचाना नहीं. मैं बीच-बीच में मिलता रहूंगा. किसी चीज की जरूरत हो तो फोन कर देना… सूर्यकांत.’

पूनम की आंखों में पुन: आंसू आ गये. काफी देर तक वह बिस्तर पर पड़ी उनके बारे में सोचती रही. उसे पता ही न चला कि कब नींद ने उसे अपनी आगोश में ले लिया.

पूनम धीरे-धीरे कौलेज के वातावरण में ढल गयी. वह मेहनत से पढ़ रही थी. प्रथम वर्ष की परीक्षा उसने काफी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की थी. डौक्टर सूर्यकांत कभी स्वयं आकर और कभी फोन से उसका हालचाल लेते रहते थे. बाबा भी उसे लगातार चिट्ठियां लिख-लिख कर अपने सेहतमंद होने की खबर देते रहते थे और उसकी हौसलाअफ्जाई भी करते रहते थे. बाबा की हर चिट्ठी में डौक्टर सूर्यकांत की तारीफें भरी रहती थीं. वह हर हफ्ते नियम से बाबा को देखने जाते थे और फल और पैसे भी नियमित भिजवाते रहते थे.

सेकेंड इयर का इम्तहान देने के पश्चात् डौक्टर के परामर्श से पूनम ने नर्सिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी. वह महसूस कर रही थी कि दूसरे साल में डौक्टर सूर्यकांत का हौस्टल आना काफी कम हो गया था. कभी-कभी तो वह वार्डन से ही उसका हालचाल पूछकर चले जाते थे. पूनम बहुत बेचैनी से उनका इंतजार करती थी. वह तो मन ही मन अपने देवता के चरणों में समर्पित हो गयी थी.

इम्तहान के बाद छुट्टियों में वह दो साल बाद अपने घर जाने वाली थी. वह बहुत खुश थी. दो साल में, शहर के वातावरण में ढल कर उसका रूप निखर आया था. बातचीत का सलीका बदल गया था. उठने-बैठने के ढंग में बदलाव आ चुका था. अब तो उसमें और किसी शहरी लड़की में फर्क करना ही मुश्किल था. कहां वह गांव की डरी-सहमी चिथड़ों में लिपटी पूनम और कहां साफ उजली साड़ी में लिपटी खूबसूरत नवयौवना. वह स्वयं भी शीशे में खुद को निहार कर विश्वास नहीं कर पाती थी कि वह वही गांव वाली पूनम है. बाबा और लक्ष्मी मौसी भी उसको देखकर जरूर हैरान होएंगे और गांव वाले भी पता नहीं क्या-क्या बातें बनाएंगे. वह सारी बातें सोच-सोच कर अकुला रही थी.

डौक्टर सूर्यकांत उसको लेने के लिए दोपहर ढले हौस्टल पहुंच गये. सिस्टर सिरिल ने पूनम को उसके कमरे से बुलवाया. डौक्टर के आने का समाचार सुन कर वह भागती हुई वार्डन के कमरे में पहुंची. दरवाजे पर उसे खड़ा देख वार्डन ने कहा, ‘आओ बेटी… डौक्टर साहब छुट्टियों में तुम्हें गांव वापस ले जाने आये हैं… जाओ अपना सामान तैयार कर लो…..’

डौक्टर ने एक उड़ती हुई नजर पूनम पर डाली और मुस्कुरा कर वार्डन से बातें करने लगा. वार्डन का आदेश सुनते ही पूनम खुशी से लगभग दौड़ती हुई अपने कमरे में आयी. उसने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े समेटकर सूटकेस में रख लिये. आज वह बहुत खुश थी. वह दो साल बाद अपने बाबा से मिलेगी, लक्ष्मी मौसी से मिलेगी…

(धारावाहिक के अगले भाग में पढ़िये कि शहर के वातावरण में बिल्कुल निखर चुकी अपनी बेटी पूनम को सामने देखकर उसके बाबा का क्या हाल हुआ और उनकी चिन्ता क्यों बढ़ गयी.)

अफवाह के चक्कर में

जैसे ही बड़े साहब के कमरे में छोटे साहब दाखिल हुए, बड़े साहब हत्थे से उखड़ पड़े, ‘‘इस दीवाली पर प्रदेश में 2 अरब की मिठाई बिक गई, आप लोगों ने व्यापार कर वसूलने की कोई व्यवस्था ही नहीं की. करोड़ों रुपए का राजस्व मारा गया और आप सोते ही रह गए. यह देखिए अखबार में क्या निकला?है? नुकसान हुआ सो हुआ ही, महकमे की बदनामी कितनी हुई? पता नहीं आप जैसे अफीमची अफसरों से इस मुल्क को कब छुटकारा मिलेगा?’’

बड़े साहब की दहाड़ सुन कर स्टेनो भी सहम गई. उस के हाथ टाइप करतेकरते एकाएक रुक गए. उस ने अपनी लटें संभालते हुए कनखियों से छोटे साहब के चेहरे की ओर देखा, वह पसीनेपसीने हुए जा रहे थे. बड़े साहब द्वारा फेंके गए अखबार को उठा कर बड़े सलीके से सहेजते हुए बोले, ‘‘वह…क्या है सर? हम लोग उस से बड़ी कमाई के चक्कर में पड़े हुए?थे…’’

उन की बात अभी आधी ही हुई थी कि बड़े साहब ने फिर जोरदार डांट पिलाई, ‘‘मुल्क चाहे अमेरिका की तरह पाताल में चला जाए. आप से कोई मतलब नहीं. आप को सिर्फ अपनी जेबें और अपने घर भरने से मतलब है. अरे, मैं पूछता हूं यह घूसखोरी आप को कहां तक ले जाएगी? जिस सरकार का नमक खाते हैं उस के प्रति आप का, कोई फर्ज बनता है कि नहीं?’’

यह कहतेकहते वह स्टेनो की तरफ मुखातिब हो गए, ‘‘अरे, मैडम, आप इधर क्या सुनने लगीं, आप रिपोर्ट टाइप कीजिए, आज वह शासन को जानी है.’’

वह सहमी हुई फिर टाइप शुरू करना ही चाहती थी कि बिजली गुल हो गई. छोटे साहब और स्टेनो दोनों ने ही अंधेरे का फायदा उठाते हुए राहत की कुछ सांसें ले डालीं. पर यह आराम बहुत छोटा सा ही निकला. बिजली वालों की गलती से इस बार बिजली तुरंत ही आ गई.

‘‘सर, बात ऐसी नहीं थी, जैसी आप सोच बैठे. बात यह थी…’’ छोटे साहब ने हकलाते हुए अपनी बात पूरी की.

‘‘फिर कैसी बात थी? बोलिए… बोलिए…’’ बड़े साहब ने गुस्से में आंखें मटकाईं. स्टेनो ने अपनी हंसी को रोकने के लिए दांतों से होंठ काट लिए, तब जा कर हंसी पर कंट्रोल कर पाई.

‘‘सर, हम लोग यह सोच रहे थे कि मिठाई की बिक्री तो 1-2 दिन की थी, जबकि फल और सब्जियों की बिक्री रोज होती है, पापी पेट भरने के लिए सब्जियां खरीदा जाना आम जनता की विवशता है. तो क्यों न उस पर…’’

इतना सुनना था कि बड़े साहब की आंखों में चमक आ गई, वह खुशी से उछल पडे़, ‘‘अरे, वाह, मेरे सोने के शेर. यह बात पहले क्यों नहीं बताई? अब आप बैठ जाइए, मेरी एक चाय पी कर ही यहां से जाएंगे,’’ कहतेकहते फिर स्टेनो की तरफ मुड़े, ‘‘मैडम, जो रिपोर्ट आप टाइप कर रही?थीं, उसे फाड़ दीजिए. अब नया डिक्टेशन देना पड़ेगा. ऐसा कीजिए, चाय का आर्डर दीजिए और आप भी हमारे साथ चाय पीएंगी.’’

अगले दिन से शहर में सब्जियों पर कर लगाने की सूचना घोषित कर दी गई और उस के अगले दिन से धड़ाधड़ छापे पड़ने लगे. अमुक के फ्रिज से 9 किलो टमाटर निकले, अमुक के यहां 5 किलो भिंडियां बरामद हुईं. एक महिला 7 किलो शिमलामिर्च के साथ पकड़ी गई?थी, पर 2 किलो के बदले में उसे छोड़ दिया. जब आईजी से इस बाबत बात की गई तो पता चला कि वह सब्जी बेचने वाली थी, उस ने लाइसेंस के लिए केंद्रीय कार्यालय में अरजी दी हुई है. शहर में सब्जी वालों के कोहराम के बावजूद अच्छा राजस्व आने लगा. बड़े साहब फूले नहीं समा रहे थे.

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एक दिन बड़े साहब सपरिवार आउटिंग पर थे. आफिस में सूचना भेज दी थी कि कोई पूछे तो मीटिंग में जाने की बात कह दी जाए. छोटे साहब और स्टेनो, दोनों की तो जैसे लाटरी लग गई. उस दिन सिवा चायनाश्ते के कोई काम ही नहीं करना पड़ा. अभी हंसीमजाक शुरू ही हुआ था कि चपरासी ने उन्हें यह कह कर डिस्टर्ब कर दिया कि कोई मिलने आया है.

छोटे साहब ने कहा, ‘‘मैं देख कर आता हूं,’’ बाहर देखा तो एक नौजवान अच्छे सूट और टाई में सलाम मारता मिला. उसे कोई अधिकारी जान छोटे साहब ने अंदर आने का निमंत्रण दे डाला. उस ने हिचकिचाते हुए अपना परिचय दिया, ‘‘मैं छोटामोटा सब्जी का आढ़ती हूं. इधर से गुजर रहा था तो सोचा क्यों न सलाम करता चलूं,’’ यह कहते हुए वह स्टेनो की ओर मुखातिब हुआ, ‘‘मैडम, यह 1 किलो सोयामेथी आप के लिए?है और ये 6 गोभी के फूल और 2 गड्डी धनिया, छोटे साहब आप के लिए.’’

छोटे साहब ने इधरउधर देखा और पूछा, ‘‘बड़े साहब के लिए?’’

उस ने दबी जबान से बताया, ‘‘एक पेटी टमाटर उन के घर पहुंचा आया हूं.’’

बड़े साहब की रिपोर्ट शासन से होती हुई जब अमेरिका पहुंची तो वहां के नए राष्ट्रपति ने ऐलान किया कि अगर लोग हिंदुस्तान की सब्जी मार्किट में इनवेस्ट करना शुरू कर दें तो वहां के स्टाक मार्किट में आए भूचाल को समाप्त किया जा सकता है.

एक अखबार ने हिंदुस्तान की फुजूलखर्ची पर अफसोस जताते हुए खबर छापी, ‘‘अगर चंद्रयान के प्रक्षेपण पर खर्च किए धन को सब्जी मार्किट में लगा दिया जाता तो उस के फायदे से लेहमैन जैसी 100 कंपनियां खरीदी जा सकती थीं.’’

जैसे आयकर के छापे पड़ने से बड़े लोगों के सम्मान में चार चांद लगते हैं, बड़ेबड़े घोटालों के संदर्भ में छापे पड़ने से राजनीतिबाज गर्व का अनुभव करते हैं, आपराधिक मुकदमों की संख्या देख कर चुनावी टिकट मिलने की संभावना बढ़ती है वैसे ही सब्जी के संदर्भ में छापे पड़ने से सदियों से त्रस्त हम अल्पआय वालों को भी सम्मान मिल सकता है, यह सोच कर मैं ने भी अपने महल्ले में अफवाह उड़ा दी कि मेरे घर में 5 किलो कद्दू है.

छापे के इंतजार में कई दिन तक कहीं बाहर नहीं निकला. अपनी गली से निकलने वाले हर पुलिस वाले को देख कर ललचाता रहा कि शायद कोई आए. मेरा नाम भी अखबारों में छपे. 15 दिन की प्रतीक्षा के बाद जब मैं यह सोचने को विवश हो चुका था कि कहीं कद्दू को बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) में तो नहीं रख दिया गया? तभी एक पुलिस वाला आ धमका. मेरी आंखों में चमक आ गई. मैं ने बीवी को बुलाया, ‘‘सुनती हो, इन को कद्दू ला के दिखा दो.’’

बीवी मेरे द्वारा बताए गए दिशा- निर्देशों के अनुसार पूरे तौर पर सजसंवर कर…बड़े ही सलीके से 250 ग्राम कद्दू सामने रखती हुई बोली, ‘‘बाकी 15 दिन में खर्च हो गयाजी.’’

पुलिस वाले ने गौर से देखा कि न तो चायपानी की कोई व्यवस्था थी और न ही मेरी कोई मुट्ठी बंद थी. उस की मुद्रा बता रही थी कि वह मेरी बीवी के साजशृंगार और मेरे व्यवहार, दोनों ही से असंतुष्ट था. वह मेरी तरफ मुखातिब हो कर बोला, ‘‘आप को अफवाह फैलाने के अपराध में दरोगाजी ने थाने पर बुलवाया है.’’

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मेरी बनाई राह पर कई कलाकार चल रहे हैं: गुलशन ग्रोवर

बौलीवुड के बैड मैन यानी कि अभिनेता गुलशन ग्रोवर इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं. इस चर्चा की 2 वजहें हैं. एक तो उन की जीवनी वाली किताब ‘बैड मैन’ बाजार में आने वाली है तो दूसरी तरफ इसी वर्ष गुलशन ग्रोवर ‘सूर्यवंशी,’ ‘सड़क 2’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों में मुख्य खलनायक के किरदार निभाते हुए खलानायकी की वापसी कर रहे हैं.

बौलीवुड में 40 वर्षों के दौरान गुलशन ग्रोवर अब तक 450 हिंदी फिल्मों के अलावा ‘बीपर,’ ‘ब्लाइंड एंबिशन,’ ‘डेस्परेट एंडेवोर,’ ‘प्रिजनर औफ द सन’ सहित कई चर्चित हौलीवुड फिल्मों के साथसाथ पोलिश, ईरानी व मलयेशियाई फिल्में कर चुके हैं. इन दिनों वे बौलीवुड की 3 फिल्मों के साथ ही इतालवी, फ्रांसीसी, आस्ट्रेलियाई और जरमन फिल्में कर रहे हैं.

बौलीवुड में आप को ‘बैड मैन’ का खिताब मिला. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

इस सवाल पर वे कहते हैं, ‘‘जी हां, इस का सारा श्रेय फिल्मकार सुभाष घई को देता हूं. उन्होंने एक फिल्म ‘राम लखन’ बनाई जिस में उन्होंने मुझे खलनायक का किरदार दिया. मैं इस फिल्म में बारबार ‘बैड मैन’ बोलता रहता हूं. यह डायलौग इतना सफल हुआ कि देशविदेश हर जगह लोग मुझे बैड मैन के नाम से पुकारने लगे. एक कलाकार की सब से बड़ी सफलता, उस के अभिनय की सब से बड़ी कद्र यही होती है कि लोग उसे उस के नाम के बजाय, उस के द्वारा निभाए गए किरदार के नाम से पहचानने लगें.’’

तो क्या इसी के चलते आप ने अपनी जीवनी वाली किताब का नाम ‘बैड मैन’ रखा? इस पर वे कहते हैं, ‘‘मुझे यही उपयुक्त लगा. मैं निजी जीवन में बहुत शरीफ इंसान हूं, पर मेरे फैंस मुझे ‘बैड मैन’ बुलाते हैं.’’

आप ने अपनी जीवनी की किताब में जिंदगी के किन पड़ावों या पहलुओं को महत्त्व दिया है?

यह पूछने पर वे बताते हैं, ‘‘मैं ने इस किताब को लिखते समय किसी खास बात को दिमाग में रख कर किसी चीज को महत्त्व नहीं दिया. पर मेरी किताब की जो असाधारण बात है वह यह है कि मैं ने अपनी जिंदगी के बहुत शुरुआती वक्त को इस किताब में ज्यादा महत्त्व दिया है. मेरी जिंदगी के जो शुरुआती दिन थे, वे गरीबी और संघर्ष के थे. उन्हें पढ़ कर हर इंसान सोचेगा, यह जो शख्स महंगी गाड़ी से उतरते हुई दिखाई देता है, प्रिंस चार्ल्स के साथ नजर आता है, विदेशों में लोकप्रिय है, उस ने इस तरह की जिंदगी भी जी है.’’

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कैरियर के किन मोड़ों को आप ने बहुत महत्त्वपूर्ण माना? इस पर वे बताते हैं, ‘‘सब से पहले रोशन तनेजा के ऐक्टिंग स्कूल में मेरा ऐक्टिंग सीखना. उस वक्त अनिल कपूर और मजहर खान मेरे बैचमेट थे. फिर रोशन तनेजा के ऐक्टिंग स्कूल में ही ऐक्टिंग शिक्षक के तौर पर नौकरी करना. पहली फिल्म ‘रौकी’ का मिलना. फिर ‘हम पांच’ मिलना. उस के बाद फिर मेरे सामने अंधेरा छा गया था. फिर शबाना आजमी के साथ मुझे फिल्म ‘अवतार’ करने का मौका मिला. उस में मेरा बहुत जबरदस्त किरदार था जिस ने मेरे कैरियर को बहुत ऊंचाई दी.

‘‘इस तरह यदि आप देखेंगे तो मेरी जिंदगी टर्निंग पौइंट्स से भरी हुई है. यदि मैं सब का जिक्र आप के सामने करने लगूंगा, तो पता नहीं कितने पन्ने भर जाएंगे. तरक्की हुई, मैं कुछ कदम आगे बढ़ा, बारबार मैं कुछ कदम आगे बढ़ता रहा, फिर राष्ट्रीय सिनेमा के साथसाथ अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा का भी हिस्सा बना.

‘‘मैं ने देखा कि पूरी दुनिया हौलीवुड में काम कर रही है, तो मैं ही क्यों पीछे रहूं. इसीलिए मैं हौलीवुड फिल्मों में काम करने लगा. मैं वहां से तुरंत वापस आ जाता था. इस के चलते शुरुआत में मुझे तकलीफ हुई, पर मैं अडिग रहा.

‘‘आज यहां तक पहुंचा हूं. मैं ने जो रास्ता बनाया, उसी राह पर अनुपम खेर, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण जा कर काम करते हैं और भारत वापस आ जाते हैं. इस तरह की राह तो मैं ने ही बनाई.’’

आप ने तमाम हौलीवुड फिल्मों में अभिनय किया. लेकिन उस का हौआ कभी खड़ा नहीं किया. जबकि प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण ने 1-2 हौलीवुड फिल्में कर के ही हौआ खड़ा कर दिया? इस पर वे कहते है, ‘‘उस वक्त इंटरनैट नहीं था. सोशल मीडिया नहीं था. डिजिटल प्लेटफौर्म नहीं था. अब तो सारी चीजें उपलब्ध हैं.’’

बतौर खलनायक काम करते हुए लुक को बदलने के लिए आप ने बहुत प्रयोग किए. इतने प्रयोग शायद किसी अन्य कलाकार ने नहीं किए. इस सवाल पर गुलशन कहते हैं, ‘‘मैं इस बात में यकीन करता हूं कि जैसे ही फिल्म के साथ किरदार व किरदार का नाम बदलता है, वैसे ही कलाकार के लुक्स पर भी ध्यान रखना चाहिए कि उस की शख्सियत भी बदलती है.

‘‘उन दिनों जिस तरह के प्रयोग बतौर खलनायक मैं करता था, कोई हीरो नहीं करता था. मेरे समय में किसी भी हीरो ने अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कभी नहीं की. पर आज के कलाकार किरदार के अनुरूप फिल्मों में अपने चेहरे को छिपाने की कोशिश करने लगे हैं. अब हीरो भी प्रौस्थेटिक मेकअप का सहारा लेने लगे हैं, जो कि आसान है. जब मैं चेहरा बदलता था उस वक्त यह सब आसान नहीं था. एक तरह से आज के हीरो मुझे कौंप्लीमैंट दे रहे हैं. अब हीरो हर फिल्म की शूटिंग से पहले अपने लुक पर काम करता है. चरित्र के साथ लुक बदलना जरूरी है.’’

आप को नहीं लगता कि अब फिल्मों में खलनायक गायब हो गए हैं? इस पर मुसकराते हुए गुलशन कहते हैं, ‘‘जी हां, इस की वजह यह है कि अब कहानी बदल गई है. अब जीवंत खलनायक के बजाय हालात खलनायक हो गए हैं. कलाकार खुद खलनायक हो गए हैं. तकनीकी प्रगति खलनायक हो गई है. पहले इंसानियत व इंसान खलनायक हुआ करते थे, अब वे नहीं रहे. लेकिन लोग इंसानरूपी खलनायक की कमी महसूस कर रहे थे, इसलिए 3 बड़ी फिल्मों ‘सूर्यवंशी,’ ‘सड़क 2’ और ‘मुंबई सागा’ में मुझे वापस बुला लिया गया.’’

आप की किताब ‘बैड मैन’ को ले कर किस तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं? इस सवाल पर गंभीर होते हुए वे कहते हैं, ‘‘अब तक जिन लोगों ने भी पढ़ा है, सभी ने तारीफ ही की है. देखिए, अपनी इस जीवनी में मैं ने जीवन व कैरियर के शुरुआती दौर को ही ज्यादा प्रमुखता दी है. कुछ लोगों की राय में इस में राष्ट्रीय गौरव की भावना है. अक्षय कुमार व शाहरुख खान ने इसे दिलचस्प बताया. जबकि फिल्मकार महेश भट्ट मेरी इस जीवनी ‘बैड मैन’ को युवाओं के लिए प्रेरणादायक मानते हैं.’’

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Janmashtami Special: इस फेस्टिव सीजन में ऐसा होगा मेकअप तो निखर जाएगा लुक

फेस्टिवल का सीजन आ गया है और ऐसे में हर महिला खुद को स्टाइलिश व गौर्जियस दिखाना चाहती है. इन मौकों पर अलग दिखने के लिए अगर आप लहंगा , गाउन व साड़ी वियर करना चाहती हैं तो उसके साथ मेकअप करना भी बहुत जरूरी होता है ताकि लुक और निखर कर आ सके. क्योंकि एक महिला की खूबसूरती उसके रूप श्रृंगार के बाद ही निखरती है. लेकिन इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मौसम भी अपना रुख कभी भी बदल रहा है. ऐसे में चाहे कोई भी मौका क्यों न हो हमें उसी के हिसाब से अपनी स्किन को तैयार करना होगा ताकि हमारी मेंहनत पर पानी न फिरे. आइए जानते हैं इस संबंध में डा. निवेदिता से कि कैसे मेकअप भी अच्छा हो और उसके खराब होने का भी डर न रहे.

सबसे पहले हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मेकअप से पहले स्किन की प्रिपरेशन करना बहुत जरूरी होता है तभी किया गया मेकअप अच्छा आउटपुट दे पाता है. इसके लिए सबसे पहले आप चेहरे को अच्छी तरह क्लीन करके फिर चेहरे पर 10 मिनट तक बर्फ को रगड़ें. यह स्टेप नमी के कारण निकलने वाले पसीने को रोकने में मददगार साबित होता है. इसके बाद बेस अप्लाई करने से वह लंबे समय तक टिका रहता है और परफेक्ट लुक के लिए अच्छा कैनवास बनाने में मदद करता है.

इसके बाद आप प्रेप + प्राइम फिक्स का इस्तेमाल करें. इसमें  ग्रीन टी व खीरे का मिश्रण होता है. यह स्किन को सॉफ्ट व ग्लोइंग बनाने का काम करता है. इसके बाद लाइट वेट और फुल कवरेज देने वाले वाटर प्रूफ फाउंडेशन का इस्तेमाल करें. अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ऑयली है तो स्किन पर ऑयल फ्री प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना ही बेस्ट रहेगा.

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इस मौसम में जो भी प्रोडक्ट्स स्किन पर इस्तेमाल करने होते हैं वो वाटरप्रूफ होने चाहिए वरना मेकअप के बहने का डर रहता है. और इस बात का खास ध्यान रखें कि उनकी पतली लेयर ही स्किन पर अप्लाई की जाए ताकि नेचुरल लुक आ सके. इसके बाद आप आई क्रेयोन का उपयोग कर सकती हैं , जो स्मुज प्रूफ होती है. फिर आप आई  लिड पर हलके रंग के आई शैडो पाउडर का इस्तेमाल करें . इस सीजन में आप ग्लिटरी आई शैडो पाउडर का इस्तेमाल न ही करें तो अच्छा रहेगा.  आप वाटरप्रूफ आई लाइनर और काजल चूज़  करें.  आई ब्रो पर ब्रो पेंसिल और पलकों पर जेल मस्कारे का इस्तेमाल करें. फिर कंट्रोलिंग के लिए ब्रोंज़र यूज़ करें. यह लुक आपकी सुंदरता में चारचांद लगाने का काम करेगा.

आप जानते हैं कि होठों को रंगे बिना मेकअप अधूरा सा ही लगता है. इसके लिए आप मेट लिप रंगों का इस्तेमाल करें. अंत में सब कुछ सेट करने के लिए फिक्सिंग स्प्रे का इस्तेमाल करें. फिर देखिए आपका लुक कैसे निखर कर आता है.

मेकअप में इन बातों का भी रखें खास खयाल

  1. आई  मेकअप करने से पहले अपने हाथों को वाश करना न भूलें. इससे आप बैक्टीरिया व जर्म्स के संपर्क में आने से बच पाएंगी.

2. कोई भी प्रोडक्ट खरीदने व इस्तेमाल करने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें वरना आपकी स्किन पर साइड इफ़ेक्ट हो सकता है. अपनी मेकअप किट से  एक्सपायरी प्रोडक्ट्स को आउट करें. .

3.  मेकअप प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने के बाद उन्हें टाइटली बंद कर दें , वरना उनके सूखने का डर बना रहता है.

4.  लिपस्टिक, लाइनर, मसकारा व काजल जैसे प्रोडक्ट्स को किसी के साथ शेयर नहीं करें. क्योकि इससे इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है.

5.  अगर आपके मेकअप प्रोडक्ट का कलर चेंज हो गया है या फिर वह थिक हो गया है तो भूल कर भी उसमें पानी डालकर उसे सही करने की कोशिश न करें. क्योंकि इससे भी इन्फेक्शन हो सकता है.

6.  अपने मेकअप प्रोडक्ट्स को सेफ रखने के लिए उन्हें हीट वाली जगहों पर न रखें. बल्कि आप उन्हें ड्राई व ठंडी जगहों पर रखें.

7. अपने स्किन टाइप को ध्यान में रखकर ही हमेशा मेकअप प्रोडक्ट्स खरीदें. क्योंकि इससे जब हम स्किन टाइप के हिसाब से मेकअप प्रोडक्ट्स खरीदते हैं तो उसका रिजल्ट अच्छा आ पाता  है.

8. रात में मेकअप लगाकर न सोएं . बल्कि मेकअप रिमूवर की मदद से मेकअप को हटाएं.

9.  हैल्थी बालों के लिए औयलिंग करना न भूलें. हफ्ते में 3-4 बार औयलिंग जरूर करें. इनर के साथसाथ अपनी आउटर पर्सनालिटी को बढ़ाने के लिए पोस्टिक डाइट लें.

10.  अवसर के हिसाब से ही मेकअप करें. दिन के लिए लाइट और रात के लिए डार्क मेकअप ही करना सही रहता है.

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क्या आप भी हैं लिव इन रिलेशनशिप में तो जरूर पढ़ें ये खबर

बौलीवुड फिल्मों मे लिव इन रिलेशनशिप के कई रूप दिखाए गए हैं, लेकिन असल जिंदगी में किसी के साथ बिना शादी के रहना आसान नहीं होता. अगर आप अपने साथी के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बारे में सोच रहे हैं तो उससे पहले आपको बहुत सी बातों पर ध्यान देने की जरूरत है. यह एक बहुत बड़ा फैसला होता है. जिसमें आपको कमिटमेंट, प्यार, प्लानिंग करनी पड़ती है. आइए आपको उन 4 चीजों के बारे में बताते हैं जो आपको जरूर फौलो करनी चाहिए.

  1. घर के कामों को बांट लें

जब आप और आपका पार्टनर साथ रहना शुरू कर देते हैं तो सबसे पहले आप दोनों को अपने कामों को बांटने की जरूरत होती है ताकि आपके बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर नोक-झोक ना हो. क्योंकि छोटी-छोटी चीजें ही आपके रिश्ते को खराब कर सकती हैं. जब आप काम को बांट लेंगे तो एक-दूसरे को अधिक समय दे पाएंगे और साथ ही खुश भी रहेंगे.

  1. बांट लें खर्च

अगर आप दोनों वर्किंग हैं तो आपके लिए सबसे जरूरी है कि आप दोनों अपने हर खर्चे को बांट लें ताकि आगे चलकर आपके बीच पैसों को लेकर कोई समस्या या गलतफहमी ना आए. चाहे खर्चे छोटे हों या बडे़ं आप दोनों को मिल-बांटकर करने चाहिए. इससे आप दोनों के बीच पैसे को लेकर कभी कोई लड़ाई नहीं होगी और ना हीं पैसे की कमी का आभास होगा. कोशिश करें कि बिना मतलब के खर्चे ना करें और भविष्य के लिए पैसे बचाएं.

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  1. साफ-सुथरा रखें घर

ऐसा हो सकता है कि आप दोनों में किसी एक को साफ-सफाई करना नहीं पसंद हो लेकिन फिर भी आप कोशिश करें कि घर की चीजों को व्यवस्थित रखें. हर इंसान की पसंद अलग-अलग होता है इसलिए आपको ऐसी चीजें खरीदनी चाहिए जो आप दोनों को पसंद हो ताकि आपका घर अच्छा भी दिखें और इन बातों कि वजह से आपके बीच लड़ाई भी ना हो.

  1. एक-दूसरे को समय दें

एक साथ रहने का ये मतलब नहीं है कि आप एक-दूसरे को अपना प्यार दिखाना या समय देना छोड़ दें. अगर आप ऐसा करेंगे तो इससे आपके रिश्ते में दूरी बढ़ जाएगी और एक समय के बाद आप दोनों को साथ रहने के फैसले पर अफसोस होने लगेगा. इसलिए कोशिश करें कि कहीं बाहर चले जाएं ताकि कुछ समय साथ बिताने को मिल जाए. अपने रिश्ते में प्यार बनाएं रखने के लिए एक-दूसरे की तारीफ करें या एक-दूसरे की भावनाओं को अच्छी तरह समझें और ऐसा तभी होगा जब आप कुछ समय एक-दूसरे के साथ बिताएंगे.

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