बौलीवुड के बैड मैन यानी कि अभिनेता गुलशन ग्रोवर इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं. इस चर्चा की 2 वजहें हैं. एक तो उन की जीवनी वाली किताब ‘बैड मैन’ बाजार में आने वाली है तो दूसरी तरफ इसी वर्ष गुलशन ग्रोवर ‘सूर्यवंशी,’ ‘सड़क 2’ और ‘मुंबई सागा’ जैसी फिल्मों में मुख्य खलनायक के किरदार निभाते हुए खलानायकी की वापसी कर रहे हैं.

बौलीवुड में 40 वर्षों के दौरान गुलशन ग्रोवर अब तक 450 हिंदी फिल्मों के अलावा ‘बीपर,’ ‘ब्लाइंड एंबिशन,’ ‘डेस्परेट एंडेवोर,’ ‘प्रिजनर औफ द सन’ सहित कई चर्चित हौलीवुड फिल्मों के साथसाथ पोलिश, ईरानी व मलयेशियाई फिल्में कर चुके हैं. इन दिनों वे बौलीवुड की 3 फिल्मों के साथ ही इतालवी, फ्रांसीसी, आस्ट्रेलियाई और जरमन फिल्में कर रहे हैं.

बौलीवुड में आप को ‘बैड मैन’ का खिताब मिला. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

इस सवाल पर वे कहते हैं, ‘‘जी हां, इस का सारा श्रेय फिल्मकार सुभाष घई को देता हूं. उन्होंने एक फिल्म ‘राम लखन’ बनाई जिस में उन्होंने मुझे खलनायक का किरदार दिया. मैं इस फिल्म में बारबार ‘बैड मैन’ बोलता रहता हूं. यह डायलौग इतना सफल हुआ कि देशविदेश हर जगह लोग मुझे बैड मैन के नाम से पुकारने लगे. एक कलाकार की सब से बड़ी सफलता, उस के अभिनय की सब से बड़ी कद्र यही होती है कि लोग उसे उस के नाम के बजाय, उस के द्वारा निभाए गए किरदार के नाम से पहचानने लगें.’’

तो क्या इसी के चलते आप ने अपनी जीवनी वाली किताब का नाम ‘बैड मैन’ रखा? इस पर वे कहते हैं, ‘‘मुझे यही उपयुक्त लगा. मैं निजी जीवन में बहुत शरीफ इंसान हूं, पर मेरे फैंस मुझे ‘बैड मैन’ बुलाते हैं.’’

आप ने अपनी जीवनी की किताब में जिंदगी के किन पड़ावों या पहलुओं को महत्त्व दिया है?

यह पूछने पर वे बताते हैं, ‘‘मैं ने इस किताब को लिखते समय किसी खास बात को दिमाग में रख कर किसी चीज को महत्त्व नहीं दिया. पर मेरी किताब की जो असाधारण बात है वह यह है कि मैं ने अपनी जिंदगी के बहुत शुरुआती वक्त को इस किताब में ज्यादा महत्त्व दिया है. मेरी जिंदगी के जो शुरुआती दिन थे, वे गरीबी और संघर्ष के थे. उन्हें पढ़ कर हर इंसान सोचेगा, यह जो शख्स महंगी गाड़ी से उतरते हुई दिखाई देता है, प्रिंस चार्ल्स के साथ नजर आता है, विदेशों में लोकप्रिय है, उस ने इस तरह की जिंदगी भी जी है.’’

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कैरियर के किन मोड़ों को आप ने बहुत महत्त्वपूर्ण माना? इस पर वे बताते हैं, ‘‘सब से पहले रोशन तनेजा के ऐक्टिंग स्कूल में मेरा ऐक्टिंग सीखना. उस वक्त अनिल कपूर और मजहर खान मेरे बैचमेट थे. फिर रोशन तनेजा के ऐक्टिंग स्कूल में ही ऐक्टिंग शिक्षक के तौर पर नौकरी करना. पहली फिल्म ‘रौकी’ का मिलना. फिर ‘हम पांच’ मिलना. उस के बाद फिर मेरे सामने अंधेरा छा गया था. फिर शबाना आजमी के साथ मुझे फिल्म ‘अवतार’ करने का मौका मिला. उस में मेरा बहुत जबरदस्त किरदार था जिस ने मेरे कैरियर को बहुत ऊंचाई दी.

‘‘इस तरह यदि आप देखेंगे तो मेरी जिंदगी टर्निंग पौइंट्स से भरी हुई है. यदि मैं सब का जिक्र आप के सामने करने लगूंगा, तो पता नहीं कितने पन्ने भर जाएंगे. तरक्की हुई, मैं कुछ कदम आगे बढ़ा, बारबार मैं कुछ कदम आगे बढ़ता रहा, फिर राष्ट्रीय सिनेमा के साथसाथ अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा का भी हिस्सा बना.

‘‘मैं ने देखा कि पूरी दुनिया हौलीवुड में काम कर रही है, तो मैं ही क्यों पीछे रहूं. इसीलिए मैं हौलीवुड फिल्मों में काम करने लगा. मैं वहां से तुरंत वापस आ जाता था. इस के चलते शुरुआत में मुझे तकलीफ हुई, पर मैं अडिग रहा.

‘‘आज यहां तक पहुंचा हूं. मैं ने जो रास्ता बनाया, उसी राह पर अनुपम खेर, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण जा कर काम करते हैं और भारत वापस आ जाते हैं. इस तरह की राह तो मैं ने ही बनाई.’’

आप ने तमाम हौलीवुड फिल्मों में अभिनय किया. लेकिन उस का हौआ कभी खड़ा नहीं किया. जबकि प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण ने 1-2 हौलीवुड फिल्में कर के ही हौआ खड़ा कर दिया? इस पर वे कहते है, ‘‘उस वक्त इंटरनैट नहीं था. सोशल मीडिया नहीं था. डिजिटल प्लेटफौर्म नहीं था. अब तो सारी चीजें उपलब्ध हैं.’’

बतौर खलनायक काम करते हुए लुक को बदलने के लिए आप ने बहुत प्रयोग किए. इतने प्रयोग शायद किसी अन्य कलाकार ने नहीं किए. इस सवाल पर गुलशन कहते हैं, ‘‘मैं इस बात में यकीन करता हूं कि जैसे ही फिल्म के साथ किरदार व किरदार का नाम बदलता है, वैसे ही कलाकार के लुक्स पर भी ध्यान रखना चाहिए कि उस की शख्सियत भी बदलती है.

‘‘उन दिनों जिस तरह के प्रयोग बतौर खलनायक मैं करता था, कोई हीरो नहीं करता था. मेरे समय में किसी भी हीरो ने अपना चेहरा छिपाने की कोशिश कभी नहीं की. पर आज के कलाकार किरदार के अनुरूप फिल्मों में अपने चेहरे को छिपाने की कोशिश करने लगे हैं. अब हीरो भी प्रौस्थेटिक मेकअप का सहारा लेने लगे हैं, जो कि आसान है. जब मैं चेहरा बदलता था उस वक्त यह सब आसान नहीं था. एक तरह से आज के हीरो मुझे कौंप्लीमैंट दे रहे हैं. अब हीरो हर फिल्म की शूटिंग से पहले अपने लुक पर काम करता है. चरित्र के साथ लुक बदलना जरूरी है.’’

आप को नहीं लगता कि अब फिल्मों में खलनायक गायब हो गए हैं? इस पर मुसकराते हुए गुलशन कहते हैं, ‘‘जी हां, इस की वजह यह है कि अब कहानी बदल गई है. अब जीवंत खलनायक के बजाय हालात खलनायक हो गए हैं. कलाकार खुद खलनायक हो गए हैं. तकनीकी प्रगति खलनायक हो गई है. पहले इंसानियत व इंसान खलनायक हुआ करते थे, अब वे नहीं रहे. लेकिन लोग इंसानरूपी खलनायक की कमी महसूस कर रहे थे, इसलिए 3 बड़ी फिल्मों ‘सूर्यवंशी,’ ‘सड़क 2’ और ‘मुंबई सागा’ में मुझे वापस बुला लिया गया.’’

आप की किताब ‘बैड मैन’ को ले कर किस तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं? इस सवाल पर गंभीर होते हुए वे कहते हैं, ‘‘अब तक जिन लोगों ने भी पढ़ा है, सभी ने तारीफ ही की है. देखिए, अपनी इस जीवनी में मैं ने जीवन व कैरियर के शुरुआती दौर को ही ज्यादा प्रमुखता दी है. कुछ लोगों की राय में इस में राष्ट्रीय गौरव की भावना है. अक्षय कुमार व शाहरुख खान ने इसे दिलचस्प बताया. जबकि फिल्मकार महेश भट्ट मेरी इस जीवनी ‘बैड मैन’ को युवाओं के लिए प्रेरणादायक मानते हैं.’’

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