कौन अपने दोस्त से प्यार नहीं करता, आप भी करते होंगे है ना. लेकिन दोस्त से प्यार यदि दोस्ती से बढ़कर वाला हो तो ज़िन्दगी उथलपुथल होने लगती है, दोस्ती और प्यार के बीच जंग होने लगती है, मन हिचकोले खाने लगता है कि अपने दोस्त को अपनी चाहत का इजहार करूं या चुपचाप जिस तरह से दोस्ती आगे बढ़ रही है वैसे ही बढ़ने दूं. पता है होता क्या है, जब दोस्त के लिए मन में दोस्ती से ज्यादा भी फीलिंग्स आने लगती हैं तो सबकुछ अचानक से बदलने लगता है, उसका बात बात पर मुस्कुराना आप की खुद की मुस्कुराहट का कारण बन जाता है, उस का लड़ना झगड़ना और रूठना मनाना घंटों दिमाग में छाया रहता है. परंतु, अक्सर यह फीलिंग वनसाइडेड प्यार बनकर रह जाती है.

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