शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया था, जो न केवल दुनिया के 7 अजूबों में शामिल है, बल्कि इसे देखने के लिए हर साल देशविदेश के लाखों पर्यटक आते हैं. झूठ सच तो पता नहीं लेकिन कहा जाता है कि शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे ताकि वे ऐसी कोई दूसरी इमारत न बना सकें.

इसी तरह की कहानी रूस की ओनेत्रा झील में स्थित एक द्वीप पर बने किझी पोगोस्त  की भी है. यह रूस की परंपरागत काष्ठकला का अनुपम नमूना है. इस द्वीप पर विशेष तरह के स्कौट देवदार की लकड़ी से 2 चर्च और एक घंटाघर बनाए गए हैं.

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17वीं शताब्दी में 37 मीटर ऊंचे इन चर्चों में एक में 22 और दूसरे में 9 गुंबद हैं. पिछले 300 सालों से खड़ी लकड़ी की इन इमारतों को बनाने के लिए एक खास तरह की कुल्हाड़ी के अलावा कोई भी किसी तरह का औजार इस्तेमाल नहीं किया गया.

इतना ही नहीं, इन्हें जोड़ने में भी कील का इस्तेमाल भी नहीं हुआ. इन्हें बनाने वाले का नाम किसी को भी मालूम नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि ऐसी इमारत कोई और न बना सके, इस के लिए उस ने जिस कुल्हाड़ी से इसे बनाया था, उसे झील में फेंक दिया था.

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