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कपास को कीड़ों से बचाने के लिए इन तरीकों का करें इस्तेमाल

कर्नाटक, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सूबे मिल कर देश के उत्पादन का तकरीबन 90 फीसदी कपास पैदा करते?हैं. देश की करीब 60 फीसदी कपास की पैदावार केवल 3 राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में होती है. दूसरे खास कपास उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और हरियाणा हैं. यह नकदी फसल है.

भारत में कपास की खेती 78.11 लाख हेक्टेयर रकबे में होती है. हमारे देश में कपास की खेती महाराष्ट्र में सब से ज्यादा रकबे में होती है. इस के बाद गुजरात, मैसूर, मध्य प्रदेश और पंजाब में कपास की खेती होती है. कपास के गुणों पर बारिश, गरमी व हवा वगैरह का बहुत असर पड़ता है.

कपास की फसल को कीड़ों से बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है. कपास में लगने वाले कीड़ों से बचाव जरूरी है.

रस चूसक कीट

माहू : यह काले या पीले रंग का छोटा कीड़ा है, जिस का आकार 4 से 6 मिलीमीटर होता है. ये कीड़े झुंड में पाए जाते?हैं. ये कीड़े

2-3 हफ्ते तक जिंदा रहते?हैं. मादा रोजाना 5 से 20 अर्भक पैदा करती है. अर्भक करीब 5 दिनों में बड़े कीड़े में बदल जाते?हैं. इस का असर दिसंबर से मार्च माह तक ज्यादा होता?है. इस के बच्चे व बड़े पत्तियों व फूलों से रस चूसते?हैं, जिस से पत्तियां किनारों से मुड़ जाती?हैं. ये चिपचिपा पदार्थ अपने शरीर से बाहर निकालते?हैं, जिस से पत्तियों के ऊपर काली फफूंद आ जाती है. इस से पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर बुरा असर पड़ता है.

रोकथाम

* कीड़े के असर वाले भागों को तोड़ कर खत्म कर दें.

* माहू का असर होने पर पीले चिपचिपे ट्रैप का इस्तेमाल करें, ताकि माहू ट्रैप पर चिपक कर मर जाएं.

* परभक्षी काक्सीनेलिड्स या सिरफिड या क्राइसोपरला कार्निया का संरक्षण कर 50,000-1,00,000 अंडे या सूडि़यां प्रति हेक्टेयर की दर से छोड़ें.

* नीम का अर्क 5 फीसदी या 1.25 लिटर नीम का तेल 100 लिटर पानी में मिला कर छिड़कें.

* बीटी का 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

* थायोमिथाक्सोम 25 डब्ल्यूपी 100 जी या मिथाइल डेमेटान 25 ईसी 1 लिटर या इमिडाक्लोप्रिड 1.0 मिलीलिटर या मेटासिस्टाक्स का 1.5-2.0 का प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए.

सफेद मक्खी : इस के निम्फ धुंधले सफेद होते?हैं. निम्फ व वयस्क दोनों ही पत्ती की निचली सतह पर बैठना पसंद करते हैं. इन के शरीर पर सफेद मोमिया परत पाई जाती है.

मादा मक्खी पत्तियों की निचली सतह पर 1-1 कर के अंडे देती है, जिन की तादाद तकरीबन 100-150 तक होती है. निम्फ अवस्था 81 दिनों में पूरी हो जाती है. इस का प्रकोप पूरी फसल के समय में बना रहता है, साथ ही साथ दूसरी फसलों पर भी पूरे साल इस का प्रकोप पाया जाता?है. निम्फ व वयस्क पत्तियों की निचली सतह पर झुंड में पाए जाते?हैं, जो पत्तियों की कोशिकाओं से रस चूसते हैं, जिस से पत्तियां कमजोर हो कर गिर जाती हैं.

रोकथाम

* पीले चिपचिपे 12 ट्रैप प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल करें.

* क्राइसोपरला कार्निया के 50,000-1,00,000 अंडे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छोड़ें.

* कीट लगे पौधों पर नीम का तेल

5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें या मछली रोसिन सोप का

25 मिलीग्राम प्रति लिटर की दर से छिड़काव करना चाहिए.

* बीच या बाद की अवस्था में थायोमिथाक्सोम 25 डब्ल्यूपी 100 जी का छिड़काव करें या?क्लोथिनीडीन 50 फीसदी डब्ल्यूडीजी 20-24 ग्राम 500 लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें या एक्टामाप्रिड

20 एसपी या फोसलोन 35 ईसी 2.5 लिटर प्रति हेक्टेयर या क्विनालफास 25 ईसी का 2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर सकते हैं.

लीफ हौपर : यह बहुत ही छोटा कीट है. इस की लंबाई महज 4 मिलीमीटर होती है. इस का रंग भूरा, पंख पर छोटे काले धब्बे व सिर पर 2 काले धब्बे होते?हैं. इस की मादा निचले किनारे पर पत्ती की शिराओं के अंदर पीले से अंडे देती है. ये अंडे 6 से 10 दिनों में फूटते?हैं. पंखदार वयस्क 2 से 3 हफ्ते तक जिंदा रहते हैं. इस के शिशु व वयस्क पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते?हैं, जिस से पत्तियों के किनारे मुड़ जाते हैं और लालभूरे हो जाते?हैं व पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं.

रोकथाम

* पौधे के कीटग्रस्त भाग को तोड़ कर खत्म कर देना चाहिए.

* प्रपंची फसलें जैसे भिंडी का इस्तेमाल करना चाहिए.

* क्राइसोपरला कार्निया परभक्षी के 50,000 अंडे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छोड़ें.

* जरूरत पड़ने  डाईमिथोएट 30 ईसी का 1.0-1.5 लिटर या मेटासिस्टाक्स का

1.5-2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

थ्रिप्स  : ये बहुत ही?छोटे आकार के कीट होते?हैं. वयस्क कीट का रंग भूरा व अर्भक का रंग हलका पीलापन लिए होता है. इस की लंबाई करीब 1 मिलीमीटर होती?है. इस की मादा हरे पौधों के?ऊतकों के अंदर 1-1 कर के हर रोज गुरदे की शक्ल के 4-5 अंडे देती?है. इन में से

5 दिनों में निम्फ निकल आते?हैं. निम्फ का जीवनचक्र 5 दिन, प्यूपा का 4-5 दिन व वयस्क का 2-4 हफ्ते का होता?है. वयस्क कीट भूरे रंग का कटे पंख वाला होता?है. इस की इल्ली व वयस्क पत्ती की सतह फाड़ कर रस चूसते हैं. इस से पत्तियां मुड़ जाती?हैं और सूख कर नीचे गिर जाती?हैं.

रोकथाम

* पौधे के उन भागों को जहां कीट का हमला होता?है, तोड़ देना चाहिए.

* इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूएस 7 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों को उपचारित करने से फसल 8 हफ्ते तक खराब नहीं होती है.

* क्राइसोपरला कार्निया परभक्षी के 50,000 से 75,000 अंडे प्रति हेक्टेयर छोड़ें.

* जरूरत होने पर थायोमिथाक्सोम 25 डब्ल्यूपी 100 जी या क्लोथिनीडीन 50 फीसदी डब्ल्यूडीजी 20-24 ग्राम 500 लिटर पानी में या डाईमिथोएट 30 ईसी का 1.0-1.5 लिटर या मेटासिस्टाक्स का 1.5-2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

लाल कीड़ा : यह कीट गहरे लाल रंग का होता?है. इस के अगले पंख के पिछले भाग पर काले धब्बे होते?हैं. मादा कीट नरम मिट्टी या जमीन की दरारों में 100 से 130 अंडे देती?है. इस का विकास 49 से 89 दिनों में पूरा होता?है.

सर्दियों में यह वयस्क अवस्था में रहता है. वयस्क लंबे गोलाकार फैले हुए गहरे लाल रंग के होते?हैं. उदर पर एक ओर से दूसरी ओर तक सफेद पट्टी होती?है. इस की इल्ली व वयस्क हरे गूलरों का रस चूस कर उन में छेद कर देते?हैं. इस से गूलरों पर सफेद से पीले धब्बे बनते?हैं. ये रेशों को अपने मल द्वारा खराब कर देते हैं, जिस से फोहा रेशा पीला हो जाता है.

रोकथाम

* अंडे व प्यूपा को शुरू में ही इकट्ठा कर के खत्म करते रहना चाहिए.

* गूलर खिलते ही चुनाई कर लें.

* 5 फीसदी नीम अर्क के घोल का इस्तेमाल करें.

* रासायनिक रोकथाम के लिए डाईमिथोएट 30 ईसी का 1.0-1.5 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

गूलर खाने वाले कीट

पत्ती लपेटक कीट : प्रौढ़ कीट का रंग हलका पीलापन लिए हुए सफेद होता?है, जिस पर कालेभूरे रंग के धब्बे होते?हैं. इस की मादा पत्ती की निचली सतह पर 1-1 कर के तकरीबन 250-350 अंडे देती?है. सूंड़ी अर्द्धपारदर्शी हरापन लिए सलेटी या गुलाबी रंग की होती है. इस का प्यूपा मिट्टी या लिपटी हुई पत्तियों में पाया जाता?है. जीवनचक्र 23-53 दिनों में पूरा होता है. इस कीट की केवल सूंड़ी ही नुकसानदायक होती है. सूंड़ी किनारे या मध्य से 2-3 पत्तियों को एकसाथ मोड़ कर उन का हरा भाग खाती रहती है, जिस से पत्तियों से?भोजन बनना बंद हो जाता है और वे सूख जाती?हैं.

रोकथाम

* ग्रसित पत्तियों को हाथ से चुन कर सूंडि़यों सहित खत्म कर देना चाहिए.

* ट्राइकोकार्ड (ट्राइकोग्रामा बेसिलिएनसिस) के 50,000 से 1,00,000 अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से छोड़ें.

* प्रकोप बढ़ने पर क्लोरोपाइरीफास

20 ईसी 2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर या डाईक्लोरोवास डब्ल्यूएससी 1 लिटर प्रति हेक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 14.5 फीसदी

एससी (1 मिलीलिटर प्रति 2 लिटर)

प्रति लिटर का छिड़काव करें.

तंबाकू की सूंड़ी : इस के वयस्क पतंगों के पंख सुनहरे भूरे रंग के सफेद धारीदार होते?हैं. हर मादा पतंगा 1,000-2,000 अंडे गुच्छों में पत्तियों के नीचे देती है. इस के अंडे के गुच्छे बादामी रोओं से ढके रहते?हैं. अंडे 3-5 दिनों में फूटते हैं. सूंड़ी मटमैले से काले रंग की, शरीर पर हरीनारंगी धारियां लिए होती है. इस की साल में 6-8 पीढि़यां पनपती हैं. सूंडि़यां झुंड में पत्ती की निचली सतह पर हरा पदार्थ खा कर व रस चूस कर नुकसान पहुंचाना शुरू करती हैं. आखिर में पत्तियों की शिराएं बाकी बचती?हैं. पत्तियों के बाद ये फूलों की कलियों व डंठलों वगैरह को खाती हैं. कपास के अलावा इन का हमला फूलगोभी, तंबाकू,?टमाटर व चना वगैरह पर पाया जाता है.

रोकथाम

* अंडे या सूंड़ी के गुच्छों को हाथ से पत्ती के साथ तोड़ कर नष्ट कर देना चाहिए.

* खेत में 20 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं.

* खेत में चारों ओर अरंडी की फसल की बोआई करें.

* ट्राइकोग्रामा किलोनिस 1.5 लाख प्रति हेक्टेयर या किलोनिस ब्लैकबर्नी या?टेलिनोमस रिमस के 1,00,000 अंडे प्रति हेक्टेयर 1 हफ्ते के अंतराल पर छोडें़.

* 5 किलोग्राम धान का भूसा,

1 किलोग्राम शीरा व 0.5 किलोग्राम कार्बारिल को मिला कर पतंगों को आकर्षित करें.

* एसएलएनपीवी 250 एलई का प्रति हेक्टेयर की दर से 8-10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें.

* 1 किलोग्राम बीटी का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

* प्रकोप बढ़ने पर फिपरोनिल 5 एससी या क्विनालफास 25 ईसी 1.5-2.0 का प्रति लिटर की दर से छिड़काव करें.

* फसल में जहर चारा 12.5 किलोग्राम राइसबीन, 1.25 किलोग्राम जगेरी, कार्बारिल 50 फीसदी डब्ल्यूपी 1.25 किलोग्राम और

7.5 लिटर पानी के?घोल का शाम के समय छिड़काव करें, जिस से जमीन से सूंडि़यां बाहर निकल कर जहर चारा खा कर मर जाएंगी.

अमेरिकन गूलर सूंड़ी : यह कीट सालभर विभिन्न फसलों पर सक्रिय रहता?है. प्रौढ़ कीट का पंख विस्तार 3-4 सैंटीमीटर होता?है और इस के शरीर की लंबाई 2 सैंटीमीटर होती?है. इस का रंग हलका हरापन लिए हुए पीला या भूरा होता?है, जिस पर काले या?भूरे धब्बे पाए जाते हैं.

मादा का रंग नर से गहरा होता है. मादा पौधे के कोमल अंगों पर 1-1  कर के सफेद अंडे देती है. एक मादा 500 से 700 अंडे देती?है. ये अंडे 3-4 दिनों में फूटते?हैं. अंडों की अवस्था 3-5 दिनों, सूंड़ी की 17-35 दिनों व प्यूपा की 17-20 दिनों की होती है. 25-60 दिनों में इस का जीवनचक्र पूरा हो जाता है. इस का प्यूपा मिट्टी में बनता है. हर साल इस कीट की 7-8 पीढि़यां बनती हैं. इस की सूंड़ी हरे से पीले रंग की होती है. शरीर पर उभरे हुए निशान होते हैं.

रोकथाम

* सूंड़ी सहित कीट लगे भागों को खत्म कर दें.

* जाल फसल के लिए बीचबीच में टमाटर की लाइन लगाएं.

* खेत में 20 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से 20-25 मीटर की दूरी पर लगाएं.

* अंडों व सूंड़ी के गुच्छों को हाथ से पत्ती सहित तोड़ कर नष्ट कर देना चाहिए.

* कीट का हमला या अंडे देखते ही ट्राइकोग्रामा किलोनिस 1.5 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर प्रति हफ्ते के अंतराल पर 6-8 बार छोडें़.

* सूंड़ी दिखाई देते ही एसएल, एनपीवी की 250 एलई या 3×1012 पीओबी का प्रति हेक्टेयर की दर से 7-8 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें.

* उस के बाद 1 किलोग्राम बीटी का छिड़काव करें. इस के अलावा 5 फीसदी नीम की निंबोली के सत का इस्तेमाल कर सकते?हैं.

* स्पाइनोसैड 45 एससी, इंडोक्सकार्ब 14.5 एससी व थायोमेंक्जाम 70 डब्ल्यूएससी का 1 मिलीमीटर प्रति लिटर का इस्तेमाल करें.

गुलाबी सूंड़ी : ये कीट छोटे आकार के तकरीबन 1 सैंटीमीटर लंबे होते हैं. ये पतंगे कलियों, टहनियों और नई छोटी पत्तियों पर सफेद अंडे देते?हैं. काले रंग की मादा पतंगा अंडे देने के लिए रोएंदार भाग पसंद करती?है. इन से 8-41 दिनों में सूंड़ी निकलती है. छोटी सूंड़ी पहले पीले रंग की व बाद में गुलाबी हो जाती?है. भूरा सिर इस की खास पहचान है. सूंड़ी

छोटे गूलर बनने की अवस्था में ही अंदर घुस जाती है और बिना पके कच्चे बीज बिनौला खाती है. यह फल में घुसने के बाद छेद को बंद कर लेती है. सूड़ी गिरी हुई पत्तियों में अपना कुकून बनाती?है और 16-29 दिनों तक इस अवस्था में रहती है.

रोकथाम

* खेत की गहरी जुताई करें, जिस से सूंड़ी व प्यूपा खत्म हो जाएं.

* खेत में 20 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से 20-25 मीटर की दूरी पर लगाएं.

* ट्राइकोग्रामा किलोनिस 1.5 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर प्रति हफ्ते के अंतराल पर 6-8 बार छोंडे़.

* परभक्षी क्राइसोपरला कार्निया के 50,000 से 1,00,000 अंडे खेत में छोड़ें.

* 1 किलोग्राम बीटी का प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें.

* प्रकोप ज्यादा होने पर ट्राईजोफोस 40 ईसी 2.5 लिटर प्रति हेक्टेयर या क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी का 2.5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी की दर से घोल बना कर छिड़काव करना चाहिए.

चित्तीदार सूंड़ी : यह कीट पीलापन लिए हुए हरे रंग का होता?है. इस का पंख विस्तार

25 सैंटीमीटर होता?है. इस के वयस्क के पंखों में फन के आकार की हरी धारी पंख के शुरू से आखिर तक होती?है. मादा पतंगा 1-1 कर फूलों की पंखडि़यों पर 200-400 अंडे देती है.

सूंड़ी 10 से 16 दिनों तक बनी रहती है. प्यूपा 4-9 दिनों व वयस्क 8-22 दिनों तक रहता है. प्यूपा नीचे पुरानी पत्तियों में बनता है. सूंड़ी शुरू में सिरे की छोटी टहनियों में छेद कर देती है, जिस से शाखाएं सूख जाती?हैं. ग्रसित फूल व कलियां नीचे गिर जाती हैं. ग्रसित गूलर नीचे गिरने से खराब हो जाते?हैं और गूलर के अंदर की रूई सड़ने के चलते बेकार हो जाती है.

रोकथाम

* सब से पहले अंडों के समूहों को इकट्ठा कर के खत्म कर देना चाहिए.

* फसल में?ट्रैप फसल भिंडी की बोआई करनी चाहिए.

* बोआई के 40 दिनों बाद या कीड़े दिखाई पड़ते ही ट्राइकोग्रामा किलोनिस के 1.5 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर 8-10 दिनों के अंतराल पर 4-6 बार छोड़ें.

जानें कैसे करें फुट डिटौक्स

आजकल डिटौक्स करना बहुत जरूरी है. आप जो पानी पीते हैं, प्रदूषित हवा  में सांस लेते हैं. ये सारे टौक्सिन्स आपके लीवर और आंत में इकट्ठे होकर कई तरह की हेल्थ समस्याएं खड़ी करते हैं. इसकी वजह से आपके स्किन पर भी दानों और पिपंल्स निकलने लगते है.

इन समस्याओं को देखते हुए मार्केट में कई तरह के डिटौक्स उपलब्ध हैं. इनमें सबसे ज्यादा  फूट डिटौक्स  पौपुलर हो रहा है. यह पूरी बौडी को डिटौक्स करने का सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि पैरों में नर्व एंडिंग्स और स्वेट ग्लैंड्स होती हैं. यहां तक कि पैरों को गुनगुने पानी में डालने से ही पूरे शरीर को आराम मिलता है. सूजन कम होती है और पूरी हेल्थ में सुधार होता है. तो आइए जानते हैं कैसे करते हैं फूट डिटौक्स.

ऐसे करें फुट डिटौक्स

पानी में पैर डालकर: पानी में पैर डालकर बैठें, इसमें थोड़ा एप्सम सौल्ट और इसेंशल औइल मिला हैं. 15 मिनट तक पैरों को पानी में डाले रहें इसके बाद सुखाकर मौइश्चराइजर लगाएं.

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फुट मास्क: ये मास्क पैरों पर कुछ देर के लिए लगाए जाते हैं फिर इन्हें धो दिया जाता है. फुट मास्क पैरों की स्किन को नर्म बनाते हैं और फंगस जैसी समस्याओं को भी दूर करते हैं.

फुट स्क्रब: पैरों पर नियमित रूप से स्क्रब करना चाहिए. इससे डेड स्किन सेल्स निकलती है साथ ही पैरों की स्मेल भी खत्म होती है.

फुट पैड्स: फुट पैड्स इस तरह से बनाए जाते हैं जिनसे पैरों से पसीना आए. माना जाता है कि इस प्रक्रिया से शरीर से टौक्सिन्स बाहर आते हैं.

ऐक्युप्रेशर वाली मसाज: हमारे पैर पेड़ की जड़ की तरह होते हैं जिनमें कई सारी नर्व्स होती हैं. ऐक्युप्रेशर मसाज से शरीर के कई हिस्सों में दर्द से राहत मिलती है.

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ऐसे बनाएं टेस्टी मसाला कौर्न

कौर्न यानी भुट्टा, इसे कई तरह से खाने में इस्तेमाल किया जाता है. कुछ लोग इसे भूनकर खाते हैं तो कुछ उबालकर. लेकिन कई लोगों को कौर्न तीखे और खट्टे जायके में पसंद आता है. आज आपको बताते है मसाला कौर्न बनाने की रेसिपी.

सामग्री

2 कप कौर्न

आधा चम्मच गरम मसाला पाउडर

1 चौथाई चम्मच नींबू का रस

नमक स्वादानुसार

4 चम्मच बटर

1 चौथाई चम्मच लाल मिर्च पाउडर

आधा चम्मच चाट मसाला

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बनाने की वि​धि

सबसे पहले कौर्न को उबाल लें और फिर उसमें हल्का सा नमक डाल दें और जब उबल जाएं तो उन्हें पानी में से बाहर निकाल लें.

अब मध्यम आंच पर एक पैन रखें और उसमें बटर डालें.

अब उबले कौर्न डालें और अपने स्वाद के अनुसार नमक डालें.

गरम मसाला, चाट मसाला और लाल मिर्च पाउडर डालें. 5 मिनट तक कौर्न को चलाएं.

जब कौर्न हल्के ब्राउन हो जाएं तो फिर गैस बंद कर दें और गरमागरम परोसें.

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‘नच बलिए 9’: जानिए इस शो में कंटेस्टेंट्स को क्या मिलेगा सरप्राइज

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला रियलिटी शो नच बलिए 9  काफी चर्चा में बना हुआ है. क्योंकि शो की इस बार की थीम ‘एक्स कपल’ जो  काफी दिलचस्प है. इस शो में एक्स कपल के साथ जोड़ियां परफौर्म कर रही हैं. और ये नया सीजन अभी तक के सबसे पौपुलर सीजन के तौर पर सामने आया है. पहले एपिसोड से ही शो में एक्स कंटेस्टेंट्स के लड़ाई-झगड़े सुर्खियों में बने हुए हैं. पिछले दो हफ्ते में शो के सबसे पौपुलर एक्स कपल्स उर्वशी ढोलकिया-अनुज सचदेवा और मधुरिमा तुली-विशाल आदित्य सिंह के एलिमिनेशन से लोगों को काफी झटका लगा. लेकिन अब शो में आने वाले एलिमिनेशन को लेकर नई और शौकिंग खबरें सामने आ रही हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हफ्ते नच बलिए शो में कोई भी जोड़ी एलिमिनेट नहीं होगी. खबरें हैं कि इस हफ्ते बौटम 2 में श्रद्धा आर्या-आलम और सौरभ राज जय-रिद्धिमा जैन होंगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, शो में बौटम 2 की घोषणा करने के बाद कंटेस्टेंट्स को बताया जाएगा कि इस बार शो में एलिमिनेशन नहीं होगा. ये सुनते ही सभी कंटेस्टेंट्स को काफी रिलैक्स महसूस होगा.

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खबरों के अनुसार इस बार नो एलिमिनेशन वीक के बाद अगले हफ्ते शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री कराई जाएगी. खबरें थीं कि उर्वशी ढोलकिया और उनके पार्टनर के अलावा टीवी एक्ट्रेस आशिका भाटिया को वाइल्ड कार्ड के लिए अप्रोच किया गया है. लेकिन अभी तक किसी भी कंटेस्टेंट का नाम साफ नहीं है कि शो में कौन सी जोड़ी वाइल्ड कार्ड के तौर पर एंट्री लेगी. बता दें, इस बार सलमान खान ने ये शो प्रोड्यूस किया है. जज की भूमिका में अहमद खान और रवीना टंडन नजर आ रहे हैं. शो शुरुआत से ही लाइमलाइट में बना हुआ है. सभी जोड़ियां एक-दूसरे को डांस में कड़ी टक्कर दे रही हैं.

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जब एकता की खातिर वेजिटेरियन दिव्यांका को छूना पड़ा नौनवेज

टीवी एक्ट्रेस दिव्यंका त्रिपाठी आने वाली वेब सीरीज ‘कोल्ड लस्सी और चिकन मसाला’ के साथ डिजिटल की दुनिया में अपनी शुरुआत करने के लिए तैयार हैं. एकता कपूर की इस वेब सीरीज में दिव्यंका को शेफ की भूमिका के लिए खाना बनाने से लेकर काफी कुछ सीखना पड़ा.

आपको बता दें, दिव्यंका वेजटेरियन हैं, इसलिए उन्हें कच्चे चिकन और मछली को छूना भी एक चुनौती थी. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक दिव्यांका ने बताया, “मैं अपनी असल जिंदगी में ज्यादा अच्छी कुक नहीं हूं इसलिए एक शेफ की भूमिका निभाना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था. मैं घर पर तभी खाना बनाती हूं, जब मैं अपने पति को इंप्रेस करने की कोशिश करती हूं. इसलिए मुझे शो के लिए सीखना पड़ा. भूमिका के लिए तैयारी के रूप में मैंने बहुत सी चीजें सीखीं. सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा कच्चे चिकन और कच्ची मछली को छूना और काटना था, क्योंकि मैं एक शाकाहारी हूं. मैंने चुनौतियों का सामना किया और इससे सीखा.

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दरअसल एकता और दिव्यांका बहुत अच्छी दोस्त भी है. जिस वजह से दिव्यांका ने ये काम किया. इस शो की कहानी दो सफल शेफ की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कभी एक-दूसरे से प्यार करते थे. सीरीज में दिव्यंका ‘नित्या’ नाम की एक शेफ का किरदार निभा रही हैं. उनके साथी कलाकार राजीव खंडेलवाल इस सीरीज में उनके अपोजिट नजर आने वाले हैं.

इस सीरीज को प्रदीप सरकार ने निर्देशित किया है. इस सीरीज में प्रियांशु चटर्जी, बरखा बिष्ट, नवनीत निशान और मानिनी मिश्रा भी हैं. 2003 में टेलीविजन पर अपने करियर की शुरुआत करते हुए, दिव्यंका ने टीवी सीरीज “बनूं मैं तेरी दुल्हन” से मशहूर हुई. एक्ट्रेस के अनुसार, उन्होंने शो के लिए अपने लुक पर भी काम किया. कोल्ड लस्सी और चिकन मसाला का औनलाइन प्लेटफौर्म औल्ट बालाजी और जी 5 पर 3 सितंबर से स्ट्रीम किया जाएगा.

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‘‘प्रसार भारती’’ की कार्यशैली को अनूप जलोटा भी नही बदल पाए!

भारत में सरकारी तंत्र और सरकार से जुड़े ब्यूरोके्रट्स अपने ही अंदाज में काम करते हैं. इनकी कार्यशैली को कोई बदल नहीं सकता. सरकारें आती जाती रहती हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में ‘‘भारतीय जनता पार्टी’’ के नेतृत्व में ‘एनडीए’ की सरकार बनी थी. और अब 2019 में भी पुनः वही सरकार शासन में आयी है. सरकारी काम काज में अमूल चूल परिवर्तन लाने के नाम पर केंद्र सरकार ने कई संस्थानों के अध्यक्ष, चेयरमैन व बोर्ड मेंबर अपने हिसाब से नियुक्त किए थे. मगर कहां क्या काम हुआ, उस पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि सब कुछ ढाक के तीन पात रहा.

बहरहाल, 2015 में केंद्र सरकार ने दूरदर्शन और ‘आल इंडिया रेडियो’ में सुधार लाने के मकसद से प्रसार भारती में कई नए लोगों की नियुक्ति की थी. प्रसार भारती के बोर्ड मेंबर की हैसियत से भजन सम्राट के रूप में मशहूर पद्मश्री अनूप जलोटा की नियुक्ति की गयी थी. अपनी नियुक्ति के छह माह बाद अनूप जलोटा ने हमें बताया था कि वह भक्ति संगीत के अलावा भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाले दो नए चैनल दूरदर्शन पर शुरू करने वाले हैं. पर आज तक ऐसा नहीं हो पाया.

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हाल ही में जब ‘‘शेमारू भक्ति स्टूडियो’’ के कार्यक्रम की शुरूआत के वक्त हमने अनूप जलोटा से सवाल किया कि ‘‘आप प्रसार भारती से जुड़े हुए थे. उस वक्त आप दूरदर्शन पर नए चैनल लेकर आने वाले थे. चैनल तो आज तक नहीं आए. कहां गड़बड़ी हो गई? इस पर अनूप जलोटा ने कहा- ‘‘अफसोस की बात है कि दूरदर्शन ही आगे नहीं बढ़ पाया. हम प्रसार भारती में बोर्ड मेंबर की हैसियत से 2 साल रहे. मैंने देखा कि वहां लालफीताशाही हावी है. जो फैसला तुरंत व फटाफट लेना चाहिए, उसे लेने में भी कई माह लगा देते हैं. प्रसार भारती में सारे फैसले जल्द लिए जाने लगे तो दूरदर्शन का भी फायदा होगा. दूरदर्शन का विस्तार होगा. कई नए चैनल शुरू होंगे. काफी कुछ हो सकता है.गुंजाइश बहुत है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि फैसला कब लेगा? लेकिन मुझे लग रहा है कि अब कुछ बदलाव वहां भी हो रहे हैं. शायद इन बदलाव के चलते दूरदर्शन में जो प्रगति होगी, वह देखने लायक होगी.’’

जब हमने उनसे प्रसार भारती की कार्यशैली की धीमी गति पर सवाल किया, तो अनूप जलोटा ने कहा- ‘‘अरे सर, बोर्ड मेंबर में मैं अकेला नहीं था, मेरे अलावा 6-7 लोग थे. सभी धीमी गति से चलना चाह रहे थे. सिर्फ अकेले मेरे फैसले लेने से कुछ नहीं हो रहा था. लेकिन इस बार सरकार हर मोर्चे पर बहुत तेज गति से काम कर रही है. इसलिए मुझे लग रहा है कि अब दूरदर्शन में भी तेजी आएगी. तेजी से बदलाव होगा. अब जो नए मंत्री जी आए हैं, वह बहुत तेजी से काम कर रहे हैं. मुझे पूरी उम्मीद है कि अब दूरदर्शन और आल इंडिया रेडियो पर तेज गति से काम होगा. इन दोनों की तरक्की बहुत होने वाली है.’’

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कपल्स भूलकर भी न करें इंस्टाग्राम पर ऐसे पोस्ट

रिलेशनशिप में रहना और उसे जीना एक अलग बात है, अपने रिलेशनशिप के चर्चे इंस्टाग्राम पर बहाल करना अलग. कप्लस के ऐसे कितने ही इंस्टाग्राम पोस्ट्स और एक्टिविटीज हैं जो न केवल बचकाने होने के साथसाथ इरिटेटिंग भी होते हैं. कप्लस के कुछ पोस्ट उन के जानने वालों के सामने उन के रिलेशनशिप के चिट्ठे खोल कर तो रख ही देते हैं, साथ ही सिंगल के लिए ये पोस्ट दिमाग खराब कर देने वाले होते हैं.

इंस्टाग्राम पर कपल्स की कभी कभी पोस्ट की गई तस्वीरें सचमुच क्यूट और अमेजिंग लगती हैं, लेकिन हर दूसरे दिन ऐसा करना बाकि लोगों को तो अजीब लगता ही है, लेकिन यह कपल्स के खुद के रिश्ते के लिए भी सही नहीं होता. तकरीबन 100 लोगों पर रिसर्च के बाद नोर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी ने पाया कि वे कपल जो अपने पार्टनर को ले कर हद से ज्यादा सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, असल में अपने रिलेशनशिप में इनसिक्योर फील करते हैं.

कपल्स का अपनी हर छोटी बड़ी जानकारी को इंस्टाग्राम पर डाल देना न केवल यह दिखाता है कि वे एक दूसरे की प्राइवेसी का सम्मान नहीं करते बल्कि इस तरह कपल्स अपने सभी जानने वालों को अपने रिलेशनशिप में बोलने का अधिकार भी दे देते हैं. इसलिए, कुछ सीमाओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

आइए आज आपको बताते हैं वे कौन-सी चीजें हैं जो आप को अपने रिलेशनशिप के बारे में इंस्टाग्राम पर कभी पोस्ट नहीं करनी चाहिए.

लोगों को  टीएमआई न दें

लोगों को टीएमआई  अर्थात टू मच इन्फोर्मेशन न दें. आप दोनों को एक दूसरे की कौन सी बातें अच्छी लगती हैं, कौन सी नहीं इस से लोगों को कोई मतलब नहीं है. आप दोनों का एकदूसरे के बारे में वो बातें, कैप्शंस या कमेंट्स में लिखना जो बहुत ज्यादा पर्सनल हों, लोगों को बताने की कोई जरुरत नहीं है.

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इंटिमेट डिटेल्स पोस्ट न करें

कपल्स के किसिंग पोस्ट या थोड़े बहुत इंटिमेट पोस्ट अच्छे लगते हैं लेकिन कुछ हदें हैं जो कपल्स को सोशल मीडिया पर पार नहीं करनी चाहिए. कपल्स का अपनी शारीरिक गतिविधियों के बारे में इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालना या कोई अत्यधिक इंटिमेट या अंतरंग तस्वीर पोस्ट करना, इस बात को दर्शाता है कि उन की पर्सनल बाउंड्रीज कितनी कमजोर हैं. साथ ही कप्लस अपने एक दूसरे को दिए सीक्रेट/क्यूट नाम, सोने की तस्वीरें, पर्सनल मोमेंट्स की वीडियोज इत्यादि इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं जो शायद उन्हें नहीं करनी चाहिएं. कप्लस को यह बात समझनी चाहिए कि कुछ चीजें इंस्टाग्राम से वास्ता नहीं रखतीं, तो नहीं रखती.

स्क्रीन्शौट्स  पोस्ट करना

कुछ कपल्स अपनी बातों के स्क्रीन्शौट्स इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं. इन स्क्रीन्शौट्स में अक्सर उन दोनों की प्यारभरी बातों के मैसेज होते हैं. कुछ कपल्स वीडियो चैट या कौल्स पर जितने घंटे बात की है उस के भी स्क्रीन्शौट्स पोस्ट करते हैं. यकीनन, ऐसा करना आप के रिश्ते को जगजाहिर करता है और लोगों को यह एहसास दिलाता है कि आप कितने बड़े शौओफ हैं. यह आप की इमेज को लोगों की नजर में बिगाड़ने के अलावा कुछ नहीं करता. आप अपनी पर्सनल बातें पर्सनल ही रखें तो बेहतर है.

लड़ाई को पब्लिक करना

कुछ कप्लस लड़ाई के तुरंत बाद अपने पार्टनर के बारे में गुस्से भरे पोस्ट इंस्टाग्राम पर डालते हैं. कई पार्टनर तो कमेंट सेक्शन में ही लड़ने लगते हैं. छोटी मोटी लड़ाई को सब के लिए एंटरटेनमेंट का विषय बना देना कपल्स की सबसे बड़ी गलतियों में से एक है. लड़ाई के बाद कपल्स को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि वे इंस्टाग्राम पर अपना दुखदर्द या गुस्सा जाहिर करने के लिए इस तरह के कोट्स, गाने, या बातें पोस्ट न करें. लड़ाई सुलझने के बाद आप को खुद अपने किए पर पछतावा होगा. उदाहरण के तौर पर नेहा कक्कर को देख लीजिए जिन्होंने अपने ब्रेकअप के बाद कुछ इस तरह के पोस्ट इंस्टाग्राम पर किए जिस से न केवल वे ट्रोल हुईं बल्कि बाद में पछताईं भी.

लंबे लंबे कैप्शंस

कुछ कपल्स अपने पार्टनर के साथ की कोई तस्वीर या वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं तो कैप्शन के रूप में लंबे लंबे प्यार के फसाने लिख देते हैं. इंस्टाग्राम पर अधिकतर सभी तस्वीर और वीडियो देखना पसंद करते हैं जिस में एक या दो या ज्यादा से ज्यादा पांच या छ: लाइनों के कैप्शंस वे पढ़ते हैं. आप के इतने लंबे कैप्शन आप के पार्टनर के अलावा शायद ही कोई पढ़ता है, तो फिर बेहतर तो यही है न कि आप इन लंबे खतों को उन्हें पर्सनल चैट पर ही भेज दें.

कमेंट सेक्शन को  डीएम  बना लेना

इंस्टाग्राम पर डीएम का मतलब होता है  डायरेक्ट मैसेज करना अर्थात इन्बौक्स. कपल्स एकदूसरे के कमेंट सेक्शन में फ्लर्ट करना शुरू कर देते हैं और कभी कभी तो दूसरों के कमेंट सेक्शन में भी. ये आदत अच्छी नहीं है. अगर आप दोनों को बात ही करनी है तो अपने डीएम में जा कर करें, आखिर कमैंट्स सेक्शन को डीएम क्यों बनाना फ्लर्ट तो  फिर भी ठीक है, लेकिन कुछ लोग अपने पार्टनर्स के पोस्ट पर भद्दे कमेंट्स करते हैं, उन्हें बेइज्जत तक कर देते हैं. अगर आप को अपने पार्टनर से या उस को कुछ कहना ही है तो सरेआम करने से बेहतर इन्बौक्स में जा कर कहिए.

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हैशटैग ओवरलोड

कपल्स के कैप्शंस तो फिर भी अन्य सह लें लेकिन उन के हैशटैग्स का ओवरलोड या कहें ओवरयूज करना कभी कभी असहनीय हो जाता है. मुझे अच्छी तरह याद है मेरी कौलेज की एक क्लासमेट जो अपने पार्टनर और अपनी हद से ज्यादा तस्वीरें पोस्ट करती थी, हर तस्वीर पर 10 से ज्यादा हैशटैग डालती थी. इन हैशटैग्स में कुछ हैशटैग्स इस प्रकार थे, हैशटैग माईबैबेस्टबै, हैशटैग माइन, हैशटैग फोरेवरलव, हैशटैग मेडफौरईचअदर. इन हैशटैग्स को देखकर कभीकभी तो उस की बुद्धि पर ही शक होने लगता था. कम से कम आप ये गलती न करें.

फब्बिंग

फब्बिंग का अर्थ है व्यक्ति का अपने साथ बैठे व्यक्ति या पार्टनर को इग्नोर या नजरअंदाज कर अपने फोन में व्यस्त रहना, अपने पार्टनर से ज्यादा अपने फोन को अटेंशन देना और फोन में ही घुसे रहना. मान लीजिए आप अपने पार्टनर की कोई ऐसी वीडियो पोस्ट कर रहे हैं जिस में वह कुछ खा रहा है या टीवी देख रहा है या कोई ऐसा काम कर रहा है जिस में वह मग्न है और आप अपने फोन से उस की वीडियो या तस्वीर ले रहे हैं, तो इस का मतलब है कि असल में आप का ध्यान अपने पार्टनर से ज्यादा अपने फोन पर है. जिन मोमेंट्स को आप दोनों को साथ जीना चाहिए उन मोमेंट्स को आप असल में इंस्टाग्राम पर जीने की कोशिश कर रहे हैं. कभी कभी दोनों पार्टनर ही फब्बिंग में इतने व्यस्त होते हैं कि उन का रिलेशनशिप ही इंस्टाग्राम के इर्द गिर्द घूमने लगता है बजाए उन के खुद के.

इंस्टाग्राम को ज्यादा गंभीरता से न लें

एक गलती जो कपल्स अक्सर करते हैं. यह कि वह इंस्टाग्राम को इतना सीरियस ले लेते हैं कि वो असल में उन की रिलेशनशिप को प्रभावित करने लगता है. पार्टनर के साथ कहीं भी जाना और इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने लायक तस्वीर के लिए मचलना, अपने पार्टनर के साथ हुई हर मुलाकात की तस्वीर इंस्टाग्राम पर डालना असल में आप के पार्टनर को भी अजीब लग सकता है. इसलिए अपने रिलेशनशिप को गंभीरता से लें, इंस्टाग्राम को नहीं.

बारिश का पानी जमा कर ऐसे करें खेती

पानी की जरूरत से ज्यादा अहमियत की वजह से ही इसे अमृत और जीवन का आधार माना जाता है. रोटीचावल वगैरह चीजें मुहैया कराने वाली खेती भी पानी पर टिकी होती है और पानी की किल्लत जगजाहिर है. मौजूदा हालात में बरसात का पानी बचा कर ही खेती का भला हो सकता है.

बारिश के भरोसे खेती करने के दिन अब लद गए हैं. बारिश के पानी के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए खुद ही इंतजाम करने की जरूरत है. इस के लिए कुछ खास मेहनत और खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि बारिश के पानी को बचा कर रखने से ही सिंचाई की सारी मुश्किलों से छुटकारा मिल सकता है. बरसात के पानी के भरोसे खेती करने के बजाय सिंचाई के पुराने तरीके अपना कर उम्दा खेती की जा सकती है. बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड के कथौली गांव के किसान बृजनंदन प्रसाद ने अपने गांव में 10 एकड़ जमीन में तालाब बनाए हैं, जिस से करीब 200 एकड़ खेत में लगी फसलों को पानी मिलता है. उन्होंने सिंचाई की आस में हाथ पर हाथ धर कर सरकार और किस्मत को कोसने वाले किसानों को नया रास्ता दिखाया है. बृजनंदन कहते हैं कि खुद को और खेती को बरबाद होते देखने से बेहतर है कि अपने आसपास के पुराने और बेकार पड़े तालाबों और पोखरों को दुरुस्त कर के खेती और सिंचाई की जाए.

कुछ इसी तरह के जज्बे और हौसले की कहानी बांका जिले के बाबूमहल गांव के किसान नुनेश्वर मरांडी की भी है. 32 एकड़ में फैले लहलहाते  बाग मरांडी की मेहनत और लगन की मिसाल हैं. उन्होंने अपने गांव में छोटेछोटे तालाब बना कर बरसात का पानी जमा किया और अपने गांव की बंजर जमीन में जान फूंक दी. उन्होंने पुराने और छोटे तालाबों को धीरेधीरे बड़ा किया और नए तालाब भी खुदवाए. तालाबों के पानी से सिंचाई कर के उन्होंने अपनी 32 एकड़ जमीन में पपीता और अमरूद के बाग का लहलहा दिए. तालाब  के पानी से खेतों की सिंचाई करने के साथसाथ वे उस में मछलीपालन भी कर रहे हैं और अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं.

कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में सिंचित क्षेत्र ज्यादा होने के बाद भी किसान समय पर फसलों की सिंचाई नहीं कर पाते हैं. पिछले 6 सालों में सिंचित क्षेत्रों में करीब 2 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. अभी कुल सिंचित क्षेत्र 35 लाख 20 हजार हेक्टेयर है. इस में 10 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की नहरों से, 1 लाख 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की तालाबों से और 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की कुओं से सिंचाई हो पाती है. कुओं और तालाबों जैसे सिंचाई के परंपरागत तरीकों की अनदेखी करने की वजह से यह गिरावट आई है.

कृषि वैज्ञानिक बीएन सिंह कहते हैं कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत बीज, खाद, मिट्टी, कीटनाशकों के साथ पानी की सब से बड़ी भूमिका होती है और हम पानी को बचाने को ले कर ही सब से ज्यादा लापरवाह बने हुए हैं. बारिश के पानी के भरोसे बैठे रहने वाली किसानों की मानसिकता ने ही खेती और किसानों का बेड़ा गर्क किया है. बारिश के मौसम में कब, कहां और कितनी बारिश होगी? इस का सटीक अंदाजा लगाना आज भी मुश्किल है. फसलों को पानी के अभाव में बरबाद होने से बचाने के लिए बारिश के पानी को बचाने और उस के सही इस्तेमाल के तरीके किसानों को सीखने होंगे. बिहार में 93.29 हजार हेक्टेयर में तालाब और पोखर हैं. इस के अलावा 25 हजार हेक्टेयर में जलाशय और 3.2 हजार हेक्टेयर में सदाबहार नदियां हैं. देश भर में आमतौर पर 15 जून के बाद से बारिश शुरू होती है और धान की नर्सरी डालने का सही समय 25 मई से 6 जून तक का होता है. मिसाल के तौर पर पटना जिले के पिछले 40 सालों के बारिश के आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि वहां जून में 134 मिलीमीटर, जुलाई में 340 मिलीमीटर, अगस्त में 260 मिलीमीटर और सितंबर में 205 मिलीमीटर की औसत बारिश होती है. जून में 6 दिन, जुलाई में 13 दिन, अगस्त में 12 दिन और सितंबर में 10 दिन ही बरसात होती है. बारिश के पानी को बेकार बहने से बचाने को ले कर किसानों को जागरूक होना पड़ेगा और तालाबों व पोखरों वगैरह को बचाना होगा. इस से किसान किसी महीने में कम बारिश होने पर भी अपनी फसलों को सूखने से बचा सकेंगे. इस के साथ ही सिंचाई पर होने वाली लागत में भी कमी आएगी.

किसान सलाहकार रजत यादव बताते हैं कि खेतों की मेंड़ों की ऊंचाई को बढ़ा कर मानसून के दौरान बारिश के पानी को खेतों में रोक कर रखा जा सकता है. मेंड़ की ऊंचाई जितनी ज्यादा होगी, उतने ही बारिश के पानी को बचा कर रखा जा सकेगा. अमूमन मेंड़ों की ऊंचाई 7 सेंटीमीटर से 15 सेंटीमीटर तक होती है. बारिश के पानी को खेतों में महफूज रखने के लिए मेंड़ों की ऊंचाई 20 से 25 सेंटीमीटर और मोटाई 10 से 15 सेंटीमीटर कर लेना जरूरी है. यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि खेतों में इतना पानी न जमा हो जाए कि फसलों को नुकसान होने लगे. जरूरत से ज्यादा पानी खेतों में न जमा हो, इस के लिए पानी की निकासी का भी इंतजाम करना चाहिए. ज्यादा समय तक खेतों में पानी भरे रहने से धान के पौधों के गलने का खतरा भी बढ़ सकता है.

बारिश के पानी को खेतों में बचा कर रखने से केवल सिंचाई का ही फायदा नहीं होता है, बल्कि सिंचाई पर होने वाले खर्च में कमी आती है. गौरतलब है कि डीजलपंप से सिंचाई करने पर किसानों को हर घंटे 80-90 रुपए खर्च करने पड़ते हैं. इस से खेती की लागत, पैदावार और किसानों की आमदनी पर बुरा असर पड़ता है. खेत में ज्यादा समय तक बारिश का पानी जमा रहने से जमीन के नीचे के पानी के स्तर को बढ़ावा मिलता है.

पेंच में फंसा वर्षा जल संरक्षण

बारिश का पानी जमा करने के लिए आम लोगों को जागरूक बनाने के लिए सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन बिहार में 2 विभागों के अफसरों के पेंच में यह योजना फंसी हुई है. सूबे के 8 सूखा प्रभावित जिलों में बहुत तामझाम के साथ इस योजना को शुरू करने का ढिंढोरा पीटा गया. मगर यह योजना कृषि विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच उलझ कर रह गई है. बिहार कृषि विभाग केंद्रीय कृषि मंत्रालय को योजना का प्रस्ताव भेज चुका है. पर उस के लिए फंड मुहैया कराने का जिम्मा ग्रामीण विकास विभाग के पास है. पैसे की कमी की वजह से सूबे में बारिश के पानी को जमा करने की योजना ठप पड़ी हुई है. राज्य में जलछाजन के तहत 40 योजनाओं के जरीए 1.92 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा बहाल करने पर काम शुरू किया गया था. पिछले साल 64 नई योजनाओं को इस में शामिल किया गया है. इस से 3 लाख हेक्टेयर में बारिश के पानी से सिंचाई का इंतजाम किया जाना है. इस योजना के पूरा होने से गया, नवादा, बांका, मुंगेर, जमुई, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद जिलों में सिंचाई का ठोस इंतजाम हो जाएगा.

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अगले 15 सालों में सिंचाई का इंतजाम न होने वाले 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी पहुंचाने की योजना बनाई है, लेकिन 2 विभागों के चक्कर में उलझ कर यह योजना दम तोड़ रही है.

इन्तकाम : भाग 5

आजकल मार्केट में निक्की खान के नये रैप एलबम की धूम मची हुई थी. क्या जबरदस्त गाने थे. सुनते ही लोगों के पैर थिरकने लगते थे. आजकल पब्लिक को सिर्फ मसाला चाहिए. अंग्रेजी-हिन्दी मिले शब्दों की खिचड़ी पर अर्द्धनग्नता का मसाला छिड़क कर पेश कर दो और जम कर पब्लिक का पैसा और तारीफ लूटो.

निक्की खान का कोई एलबम तीन-चार सौ रुपये से कम का नहीं बिक रहा था. चारों ओर उसके गानों और डांस की धूम मची हुई थी. मुम्बई की कई बड़ी म्यूजिक कम्पनियां उसके साथ काम करने के लिए ललायित थीं. एक-एक स्टेज शो के वह लाखों रुपये लेती थी. उसका एक बड़ा म्यूजिक ग्रुप था, डांसर्स थे. चटकीले और उत्तेजक पाश्चात्य ड्रेस में वाद्य-यन्त्रों की धुन पर थिरकती निक्की खान अपने डांस ग्रुप के साथ जब स्टेज पर उतरती थी तो दर्शक उसकी खनकदार आवाज, गीत के हृदय में उतरते बोल और डांस मूवमेंट्स को देखकर मन्त्रमुग्ध हो जाते थे. निक्की की सम्मोहित कर देने वाली आवाज उन्हें घंटों अपनी जगह पर बंधे रहने के लिए मजबूर कर देती थी. अपने ही देश में नहीं, बल्कि विदेशों में भी यह ग्रुप कई परफौरमेंस दे चुका था.

‘आज तो इस शहर की किस्मत खुल गयी…’ मोनिका ने संजीव को दरवाजे से अन्दर आते देखा तो खुशी से चहकते हुए बोली.

‘वो कैसे…?’

‘डार्लिंग, तुम्हें नहीं पता…? शहर में हंगामा मचा हुआ है, आज होटल ताज में निक्की खान का म्यूजिकल ग्रुप आने वाला है…   शाम सात बजे से उसका शो है…’ मोनिका ने खुश होते हुए बताया.

‘अच्छा…!’ संजीव आश्चर्य से बोला.

‘हां… मुझे बड़ी मुश्किल से दो पास मिले हैं….’ वह उसे कार्ड दिखाते हुए बोली, ‘चलोगे न…?’ उसने संजीव की ओर देखा.

‘हां यार, निक्की खान का प्रोग्राम तो देखने वाला होगा… सुना है बहुत अच्छी सिंगर है…’ संजीव ने भी चलने में दिलचस्पी दिखायी.

शाम ढलते ही संजीव और मोनिका कार में सवार होटल ताज की ओर उड़े जा रहे थे. कहीं ऐसा न हो कि पहुंचने में देर हो जाए और उन्हें सामने की जगह न मिले. मोनिका इस वक्त अपने पसंदीदा पाश्चात्य वस्त्रों में थी. उसके कपड़ों से उठने वाले परफ्यूम की सुगन्ध पूरी कार में भरी हुई थी. संजीव को उसका यह पहनावा बहुत अखरता था. उसकी आधी से ज्यादा खुली हुई टांगें और पीठ, जिस पर दूसरों की निगाहें जोंक की तरह चिपकी रहती थीं, उसे हमेशा बुरी लगतीं, मगर मोनिका को कुछ कहना खुद को बैकवर्ड साबित करना था. सो वह चुप ही रहता था.

पार्किंग में कार लगाकर दोनों भीतर पहुंचे तो एक बड़े से स्टेज के सामने दूर तक बिछी ज्यादातर मेजें दर्शकों से भर चुकी थीं. हालांकि कार्यक्रम शुरू होने में अभी पूरा एक घण्टा बाकी था, मगर हौल लगभग भर चुका था. लोगों की उत्सुकता उनके चेहरों से स्पष्ट हो रही थी. लोग बार-बार अपनी घड़ियों की ओर देख रहे थे. संजीव और मोनिका भी एक मेज घेरकर बैठ गये. नियत समय पर कार्यक्रम शुरू हुआ. निक्की खान की तारीफों के पुल बांधते हुए विशिष्ट अतिथि महोदय ने भाषण खत्म किया और माइक मंच का संचालन करने वाले व्यक्ति को पकड़ा दिया. उसकी संक्षिप्त बात के साथ ही हॉल की सारी लाइट्स बुझ गयीं और फिर तेज म्यूजिक के बीच स्टेज पर रोशनी का एक गोला उभरा. चमचमाते हुए भड़कीले वस्त्रों में एक बहुत ही हसीन युवती ने स्टेज पर प्रकट होकर दर्शकों का अभिवादन किया. हौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. ये निक्की खान थी, जो इस वक्त एक जलपरी की भांति प्रतीत हो रही थी. उसके कंधों और माथे को ढके चमकीले घुंघराले बाल, होंठों पर सुर्ख लिप्सटिक, गले में पड़े हीरे के बहुमूल्य हार से निकलने वाली आभा उसके चेहरे को बेहद आकर्षक बना रही थी. झक गोरी रेशमी नंगी टांगे ऊंची हील की सुनहरी सैंडल में कयामत ढा रही थीं. तालियों की गड़गड़ाहट थमते ही हौल पुन: रोशनी से जगमगा उठा. स्टेज का पूरा दृश्य साफ नजर आने लगा. सभी वादक कलाकार अपने आधुनिक वाद्य-यन्त्रों के साथ अपनी जगहों  पर उपस्थित थे. पहला गाना शुरू हो चुका था. तेज संगीत लहरी और उस पर साथी कलाकारों के साथ नृत्य करते हुए निक्की खान की मधुर आवाज ने सबको अपने सम्मोहन में बांध लिया था.

एक पल को तो संजीव को लगा कि जैसे वह निक्की खान को जानता है. उससे पहले कहीं मिल चुका है. वह गौर से उसकी शक्ल पहचानने की कोशिश करने लगा. निक्की खान के घुंघराले बालों ने उसका आधे से ज्यादा चेहरा ढंक रखा था. नृत्य करते-करते जब वह अपने बालों को पीछे की ओर झटका देती तो एक बिजली से कौंध जाती थी.

संजीव और मोनिका स्टेज से काफी दूरी पर बैठे थे, अत: संजीव को बड़ी बेचैनी महसूस हो रही थी. वह लगातार उस चेहरे को पहचानने की कोशिश कर रहा था. उसका ध्यान गाने की ओर से उचट कर निक्की खान के चेहरे पर ही टिक गया था. निक्की खान में उसे बार-बार निकहत की झलक मिल रही थी. मगर कहां निकहत… साधारण सी लड़की… हमेशाा शलवार-कुर्ते और दुपट्टे में रहने वाली… तेल लगे सीधे बालों की लम्बी सी चोटी रखती थी… जिसके होंठों पर संजीव ने कभी लिप्सटिक के निशान नहीं देखे थे… और कहां निक्की खान…? भरपूर मेकअप, चुस्त पोशाक और अद्भुत नृत्य-शैली कि देखने वाले का दिल निकल कर बाहर आ जाए. फिर भी संजीव के मस्तिष्क में जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई थी. उसका मन कर रहा था कि आगे जाकर वह उसे एक बार करीब से देख ले, मगर मजबूर था.

अचानक… निक्की खान माइक लिए गाती हुई स्टेज के नीचे उतर आयी. दर्शकों के बीच नृत्य करते हुए गाना उसकी अपनी एक खास अदा थी. दर्शक उत्तेजनावश खड़े होकर उसके गाने की ताल पर तालियां बजा रहे थे, कई तो उसके साथ थिरकने को उतावले हो रहे थे. लेकिन संजीव… वह तो जैसे अपनी जगह पर जम गया था. निक्की खान ज्यों-जयों उसके पास आ रही थी, उसकी आंखें आश्चर्य से फटी जा रही थी. वह उसके बिल्कुल करीब आ चुकी थी. संदेह की कोई गुंजाइश न थी, वही चेहरा, वही बड़ी-बड़ी आंखें. वह निकहत को पहचानने में धोखा नहीं खा सकता था… और तभी… निक्की ने लगभग उसकी मेज पर आधा झुकते हुए अपना गीत खत्म किया. हौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. निक्की खान ने झुककर दर्शकों को धन्यवाद दिया और संजीव पर एक उड़ती सी नजर डाल, माइक लिए झूमती हुई स्टेज पर वापस लौट आयी.

घर पर बनाएं राज कचौरी

राज कचौरी बहुत ही टेस्टी डिश है. इसे सभी खाना पसंद करते हैं और इसे बनाना भी बहुत आसान है. तो आइए झट से आपको इसकी रेसिपी बताते है, जिससे आप घर पर आसानी से राज कचौरी बना सकते हैं.

 सामग्री

– मैदा 01 कप

– सूजी मोटी (1/4 कप)

– बेकिंग सोडा  (02 चुटकी)

– तेल (तलने के लिये)

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कचौरी भरने के लिये

– आलू  (उबले हुए)

– पपड़ी (15 से16 नग)

– बेसन की पकौडी  (15 से 16 नग)

– ताजा दही  (01 कप फेटा हुआ)

– सेव भुजिया (1/2 कप)

– अनार के दाने (1/2 कप)

– चना (1/2 कप उबले हुये)

– मीठी चटनी (1/2 कप)

– हरी चटनी  (1/2 कप)

– भुना जीरा (02 छोटे चम्मच)

– काला नमक (01 छोटा चम्मच)

– लाल मिर्च पाउडर  (01 छोटा चम्मच)

– नमक  (आवश्यकतानुसार)

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बनाने की विधि :

– सबसे पहले मैदा, सूजी और बेकिंग सोडा को आपस में मिला लें.

– इसके बाद पानी की सहायता से इसे गूंथ लें, गुंथा हुआ आटा पूरी के आटे जैसा होना चाहिये.

– आटा गूंथने के बाद उसे अच्छी तरह से मसल लें, जिससे यह एकदम नरम हो जाये.

– अब एक भारी तले की कढ़ाई में तेल डालकर गरम करें.

– जब तक तेल गरम हो रहा है, आटे की 15-16 लोइयां बना लें.

– लाेइयों को गीले कपड़े से ढ़क दें, जिससे वे सूखें नहीं.

– इसके बाद गूथे गये आटे को बेलन पर रख कर लगभग 3 इंच व्यास में बेल लें.

– बेलने के बाद पूरी को गरम तेल में डालें और आंच मीडियम कर दें.

– पूरी को कलछी से दबा-दबा कर सेंक लें, जिससे वह अच्छी तरह से फूल जायें और कचौरी के आकार की हो जायें.

– कचौरी के ऊपर कलछी से गरम-गरम तेल डालें और उलट-पलट कर गोल्डेन ब्राउन होने तक सेंक लें.

– सारी पूरियों को सेंकने के बाद नैपकिन पेपर में रखते जाएं, जिससे उनका अतिरिक्त तेल निकल जाए.

– कचौरी बनने के बाद अब इनकी फिलिंग करने की बारी है.

– इसके लिए कचौरी की पतली वाली सतह को सावधानीपूर्वक थोड़ा सा तोड़ें और सर्विंग प्लेट में रख लें.

– अब कचौरी में एक पकौड़ी, आलू के छोटे-छोटे 4-5 पीस, 2 चम्मच उबले हुये चने, छोटा सा भुना जीरा, लाल मिर्च पाउडर, काला नमक, सादा नमक, दही, मीठी चटनी, हरी चटनी डालें.

– इसके बाद एक बार फिर से कचौरी में जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, काला नमक, दही, चटनियां, सेव भुजिया और अनार के दाने डालें.

– लीजिए, राज कचौरी बनाने की विधि कम्‍प्‍लीट हुई.

– अब आपकी स्वादिष्ट राज कचौरी  तैयार है, इसे परोसें और स्वयं भी परिवार के साथ आनंद लें.

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