कर्नाटक, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सूबे मिल कर देश के उत्पादन का तकरीबन 90 फीसदी कपास पैदा करते?हैं. देश की करीब 60 फीसदी कपास की पैदावार केवल 3 राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में होती है. दूसरे खास कपास उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और हरियाणा हैं. यह नकदी फसल है.

भारत में कपास की खेती 78.11 लाख हेक्टेयर रकबे में होती है. हमारे देश में कपास की खेती महाराष्ट्र में सब से ज्यादा रकबे में होती है. इस के बाद गुजरात, मैसूर, मध्य प्रदेश और पंजाब में कपास की खेती होती है. कपास के गुणों पर बारिश, गरमी व हवा वगैरह का बहुत असर पड़ता है.

कपास की फसल को कीड़ों से बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है. कपास में लगने वाले कीड़ों से बचाव जरूरी है.

रस चूसक कीट

माहू : यह काले या पीले रंग का छोटा कीड़ा है, जिस का आकार 4 से 6 मिलीमीटर होता है. ये कीड़े झुंड में पाए जाते?हैं. ये कीड़े

2-3 हफ्ते तक जिंदा रहते?हैं. मादा रोजाना 5 से 20 अर्भक पैदा करती है. अर्भक करीब 5 दिनों में बड़े कीड़े में बदल जाते?हैं. इस का असर दिसंबर से मार्च माह तक ज्यादा होता?है. इस के बच्चे व बड़े पत्तियों व फूलों से रस चूसते?हैं, जिस से पत्तियां किनारों से मुड़ जाती?हैं. ये चिपचिपा पदार्थ अपने शरीर से बाहर निकालते?हैं, जिस से पत्तियों के ऊपर काली फफूंद आ जाती है. इस से पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर बुरा असर पड़ता है.

रोकथाम

* कीड़े के असर वाले भागों को तोड़ कर खत्म कर दें.

* माहू का असर होने पर पीले चिपचिपे ट्रैप का इस्तेमाल करें, ताकि माहू ट्रैप पर चिपक कर मर जाएं.

* परभक्षी काक्सीनेलिड्स या सिरफिड या क्राइसोपरला कार्निया का संरक्षण कर 50,000-1,00,000 अंडे या सूडि़यां प्रति हेक्टेयर की दर से छोड़ें.

* नीम का अर्क 5 फीसदी या 1.25 लिटर नीम का तेल 100 लिटर पानी में मिला कर छिड़कें.

* बीटी का 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

* थायोमिथाक्सोम 25 डब्ल्यूपी 100 जी या मिथाइल डेमेटान 25 ईसी 1 लिटर या इमिडाक्लोप्रिड 1.0 मिलीलिटर या मेटासिस्टाक्स का 1.5-2.0 का प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए.

सफेद मक्खी : इस के निम्फ धुंधले सफेद होते?हैं. निम्फ व वयस्क दोनों ही पत्ती की निचली सतह पर बैठना पसंद करते हैं. इन के शरीर पर सफेद मोमिया परत पाई जाती है.

मादा मक्खी पत्तियों की निचली सतह पर 1-1 कर के अंडे देती है, जिन की तादाद तकरीबन 100-150 तक होती है. निम्फ अवस्था 81 दिनों में पूरी हो जाती है. इस का प्रकोप पूरी फसल के समय में बना रहता है, साथ ही साथ दूसरी फसलों पर भी पूरे साल इस का प्रकोप पाया जाता?है. निम्फ व वयस्क पत्तियों की निचली सतह पर झुंड में पाए जाते?हैं, जो पत्तियों की कोशिकाओं से रस चूसते हैं, जिस से पत्तियां कमजोर हो कर गिर जाती हैं.

रोकथाम

* पीले चिपचिपे 12 ट्रैप प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल करें.

* क्राइसोपरला कार्निया के 50,000-1,00,000 अंडे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छोड़ें.

* कीट लगे पौधों पर नीम का तेल

5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें या मछली रोसिन सोप का

25 मिलीग्राम प्रति लिटर की दर से छिड़काव करना चाहिए.

* बीच या बाद की अवस्था में थायोमिथाक्सोम 25 डब्ल्यूपी 100 जी का छिड़काव करें या?क्लोथिनीडीन 50 फीसदी डब्ल्यूडीजी 20-24 ग्राम 500 लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें या एक्टामाप्रिड

20 एसपी या फोसलोन 35 ईसी 2.5 लिटर प्रति हेक्टेयर या क्विनालफास 25 ईसी का 2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर सकते हैं.

लीफ हौपर : यह बहुत ही छोटा कीट है. इस की लंबाई महज 4 मिलीमीटर होती है. इस का रंग भूरा, पंख पर छोटे काले धब्बे व सिर पर 2 काले धब्बे होते?हैं. इस की मादा निचले किनारे पर पत्ती की शिराओं के अंदर पीले से अंडे देती है. ये अंडे 6 से 10 दिनों में फूटते?हैं. पंखदार वयस्क 2 से 3 हफ्ते तक जिंदा रहते हैं. इस के शिशु व वयस्क पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते?हैं, जिस से पत्तियों के किनारे मुड़ जाते हैं और लालभूरे हो जाते?हैं व पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं.

रोकथाम

* पौधे के कीटग्रस्त भाग को तोड़ कर खत्म कर देना चाहिए.

* प्रपंची फसलें जैसे भिंडी का इस्तेमाल करना चाहिए.

* क्राइसोपरला कार्निया परभक्षी के 50,000 अंडे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छोड़ें.

* जरूरत पड़ने  डाईमिथोएट 30 ईसी का 1.0-1.5 लिटर या मेटासिस्टाक्स का

1.5-2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

थ्रिप्स  : ये बहुत ही?छोटे आकार के कीट होते?हैं. वयस्क कीट का रंग भूरा व अर्भक का रंग हलका पीलापन लिए होता है. इस की लंबाई करीब 1 मिलीमीटर होती?है. इस की मादा हरे पौधों के?ऊतकों के अंदर 1-1 कर के हर रोज गुरदे की शक्ल के 4-5 अंडे देती?है. इन में से

5 दिनों में निम्फ निकल आते?हैं. निम्फ का जीवनचक्र 5 दिन, प्यूपा का 4-5 दिन व वयस्क का 2-4 हफ्ते का होता?है. वयस्क कीट भूरे रंग का कटे पंख वाला होता?है. इस की इल्ली व वयस्क पत्ती की सतह फाड़ कर रस चूसते हैं. इस से पत्तियां मुड़ जाती?हैं और सूख कर नीचे गिर जाती?हैं.

रोकथाम

* पौधे के उन भागों को जहां कीट का हमला होता?है, तोड़ देना चाहिए.

* इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूएस 7 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों को उपचारित करने से फसल 8 हफ्ते तक खराब नहीं होती है.

* क्राइसोपरला कार्निया परभक्षी के 50,000 से 75,000 अंडे प्रति हेक्टेयर छोड़ें.

* जरूरत होने पर थायोमिथाक्सोम 25 डब्ल्यूपी 100 जी या क्लोथिनीडीन 50 फीसदी डब्ल्यूडीजी 20-24 ग्राम 500 लिटर पानी में या डाईमिथोएट 30 ईसी का 1.0-1.5 लिटर या मेटासिस्टाक्स का 1.5-2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

लाल कीड़ा : यह कीट गहरे लाल रंग का होता?है. इस के अगले पंख के पिछले भाग पर काले धब्बे होते?हैं. मादा कीट नरम मिट्टी या जमीन की दरारों में 100 से 130 अंडे देती?है. इस का विकास 49 से 89 दिनों में पूरा होता?है.

सर्दियों में यह वयस्क अवस्था में रहता है. वयस्क लंबे गोलाकार फैले हुए गहरे लाल रंग के होते?हैं. उदर पर एक ओर से दूसरी ओर तक सफेद पट्टी होती?है. इस की इल्ली व वयस्क हरे गूलरों का रस चूस कर उन में छेद कर देते?हैं. इस से गूलरों पर सफेद से पीले धब्बे बनते?हैं. ये रेशों को अपने मल द्वारा खराब कर देते हैं, जिस से फोहा रेशा पीला हो जाता है.

रोकथाम

* अंडे व प्यूपा को शुरू में ही इकट्ठा कर के खत्म करते रहना चाहिए.

* गूलर खिलते ही चुनाई कर लें.

* 5 फीसदी नीम अर्क के घोल का इस्तेमाल करें.

* रासायनिक रोकथाम के लिए डाईमिथोएट 30 ईसी का 1.0-1.5 लिटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

गूलर खाने वाले कीट

पत्ती लपेटक कीट : प्रौढ़ कीट का रंग हलका पीलापन लिए हुए सफेद होता?है, जिस पर कालेभूरे रंग के धब्बे होते?हैं. इस की मादा पत्ती की निचली सतह पर 1-1 कर के तकरीबन 250-350 अंडे देती?है. सूंड़ी अर्द्धपारदर्शी हरापन लिए सलेटी या गुलाबी रंग की होती है. इस का प्यूपा मिट्टी या लिपटी हुई पत्तियों में पाया जाता?है. जीवनचक्र 23-53 दिनों में पूरा होता है. इस कीट की केवल सूंड़ी ही नुकसानदायक होती है. सूंड़ी किनारे या मध्य से 2-3 पत्तियों को एकसाथ मोड़ कर उन का हरा भाग खाती रहती है, जिस से पत्तियों से?भोजन बनना बंद हो जाता है और वे सूख जाती?हैं.

रोकथाम

* ग्रसित पत्तियों को हाथ से चुन कर सूंडि़यों सहित खत्म कर देना चाहिए.

* ट्राइकोकार्ड (ट्राइकोग्रामा बेसिलिएनसिस) के 50,000 से 1,00,000 अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से छोड़ें.

* प्रकोप बढ़ने पर क्लोरोपाइरीफास

20 ईसी 2.0 लिटर प्रति हेक्टेयर या डाईक्लोरोवास डब्ल्यूएससी 1 लिटर प्रति हेक्टेयर या इंडोक्साकार्ब 14.5 फीसदी

एससी (1 मिलीलिटर प्रति 2 लिटर)

प्रति लिटर का छिड़काव करें.

तंबाकू की सूंड़ी : इस के वयस्क पतंगों के पंख सुनहरे भूरे रंग के सफेद धारीदार होते?हैं. हर मादा पतंगा 1,000-2,000 अंडे गुच्छों में पत्तियों के नीचे देती है. इस के अंडे के गुच्छे बादामी रोओं से ढके रहते?हैं. अंडे 3-5 दिनों में फूटते हैं. सूंड़ी मटमैले से काले रंग की, शरीर पर हरीनारंगी धारियां लिए होती है. इस की साल में 6-8 पीढि़यां पनपती हैं. सूंडि़यां झुंड में पत्ती की निचली सतह पर हरा पदार्थ खा कर व रस चूस कर नुकसान पहुंचाना शुरू करती हैं. आखिर में पत्तियों की शिराएं बाकी बचती?हैं. पत्तियों के बाद ये फूलों की कलियों व डंठलों वगैरह को खाती हैं. कपास के अलावा इन का हमला फूलगोभी, तंबाकू,?टमाटर व चना वगैरह पर पाया जाता है.

रोकथाम

* अंडे या सूंड़ी के गुच्छों को हाथ से पत्ती के साथ तोड़ कर नष्ट कर देना चाहिए.

* खेत में 20 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं.

* खेत में चारों ओर अरंडी की फसल की बोआई करें.

* ट्राइकोग्रामा किलोनिस 1.5 लाख प्रति हेक्टेयर या किलोनिस ब्लैकबर्नी या?टेलिनोमस रिमस के 1,00,000 अंडे प्रति हेक्टेयर 1 हफ्ते के अंतराल पर छोडें़.

* 5 किलोग्राम धान का भूसा,

1 किलोग्राम शीरा व 0.5 किलोग्राम कार्बारिल को मिला कर पतंगों को आकर्षित करें.

* एसएलएनपीवी 250 एलई का प्रति हेक्टेयर की दर से 8-10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें.

* 1 किलोग्राम बीटी का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें.

* प्रकोप बढ़ने पर फिपरोनिल 5 एससी या क्विनालफास 25 ईसी 1.5-2.0 का प्रति लिटर की दर से छिड़काव करें.

* फसल में जहर चारा 12.5 किलोग्राम राइसबीन, 1.25 किलोग्राम जगेरी, कार्बारिल 50 फीसदी डब्ल्यूपी 1.25 किलोग्राम और

7.5 लिटर पानी के?घोल का शाम के समय छिड़काव करें, जिस से जमीन से सूंडि़यां बाहर निकल कर जहर चारा खा कर मर जाएंगी.

अमेरिकन गूलर सूंड़ी : यह कीट सालभर विभिन्न फसलों पर सक्रिय रहता?है. प्रौढ़ कीट का पंख विस्तार 3-4 सैंटीमीटर होता?है और इस के शरीर की लंबाई 2 सैंटीमीटर होती?है. इस का रंग हलका हरापन लिए हुए पीला या भूरा होता?है, जिस पर काले या?भूरे धब्बे पाए जाते हैं.

मादा का रंग नर से गहरा होता है. मादा पौधे के कोमल अंगों पर 1-1  कर के सफेद अंडे देती है. एक मादा 500 से 700 अंडे देती?है. ये अंडे 3-4 दिनों में फूटते?हैं. अंडों की अवस्था 3-5 दिनों, सूंड़ी की 17-35 दिनों व प्यूपा की 17-20 दिनों की होती है. 25-60 दिनों में इस का जीवनचक्र पूरा हो जाता है. इस का प्यूपा मिट्टी में बनता है. हर साल इस कीट की 7-8 पीढि़यां बनती हैं. इस की सूंड़ी हरे से पीले रंग की होती है. शरीर पर उभरे हुए निशान होते हैं.

रोकथाम

* सूंड़ी सहित कीट लगे भागों को खत्म कर दें.

* जाल फसल के लिए बीचबीच में टमाटर की लाइन लगाएं.

* खेत में 20 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से 20-25 मीटर की दूरी पर लगाएं.

* अंडों व सूंड़ी के गुच्छों को हाथ से पत्ती सहित तोड़ कर नष्ट कर देना चाहिए.

* कीट का हमला या अंडे देखते ही ट्राइकोग्रामा किलोनिस 1.5 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर प्रति हफ्ते के अंतराल पर 6-8 बार छोडें़.

* सूंड़ी दिखाई देते ही एसएल, एनपीवी की 250 एलई या 3×1012 पीओबी का प्रति हेक्टेयर की दर से 7-8 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें.

* उस के बाद 1 किलोग्राम बीटी का छिड़काव करें. इस के अलावा 5 फीसदी नीम की निंबोली के सत का इस्तेमाल कर सकते?हैं.

* स्पाइनोसैड 45 एससी, इंडोक्सकार्ब 14.5 एससी व थायोमेंक्जाम 70 डब्ल्यूएससी का 1 मिलीमीटर प्रति लिटर का इस्तेमाल करें.

गुलाबी सूंड़ी : ये कीट छोटे आकार के तकरीबन 1 सैंटीमीटर लंबे होते हैं. ये पतंगे कलियों, टहनियों और नई छोटी पत्तियों पर सफेद अंडे देते?हैं. काले रंग की मादा पतंगा अंडे देने के लिए रोएंदार भाग पसंद करती?है. इन से 8-41 दिनों में सूंड़ी निकलती है. छोटी सूंड़ी पहले पीले रंग की व बाद में गुलाबी हो जाती?है. भूरा सिर इस की खास पहचान है. सूंड़ी

छोटे गूलर बनने की अवस्था में ही अंदर घुस जाती है और बिना पके कच्चे बीज बिनौला खाती है. यह फल में घुसने के बाद छेद को बंद कर लेती है. सूड़ी गिरी हुई पत्तियों में अपना कुकून बनाती?है और 16-29 दिनों तक इस अवस्था में रहती है.

रोकथाम

* खेत की गहरी जुताई करें, जिस से सूंड़ी व प्यूपा खत्म हो जाएं.

* खेत में 20 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से 20-25 मीटर की दूरी पर लगाएं.

* ट्राइकोग्रामा किलोनिस 1.5 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर प्रति हफ्ते के अंतराल पर 6-8 बार छोंडे़.

* परभक्षी क्राइसोपरला कार्निया के 50,000 से 1,00,000 अंडे खेत में छोड़ें.

* 1 किलोग्राम बीटी का प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें.

* प्रकोप ज्यादा होने पर ट्राईजोफोस 40 ईसी 2.5 लिटर प्रति हेक्टेयर या क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी का 2.5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी की दर से घोल बना कर छिड़काव करना चाहिए.

चित्तीदार सूंड़ी : यह कीट पीलापन लिए हुए हरे रंग का होता?है. इस का पंख विस्तार

25 सैंटीमीटर होता?है. इस के वयस्क के पंखों में फन के आकार की हरी धारी पंख के शुरू से आखिर तक होती?है. मादा पतंगा 1-1 कर फूलों की पंखडि़यों पर 200-400 अंडे देती है.

सूंड़ी 10 से 16 दिनों तक बनी रहती है. प्यूपा 4-9 दिनों व वयस्क 8-22 दिनों तक रहता है. प्यूपा नीचे पुरानी पत्तियों में बनता है. सूंड़ी शुरू में सिरे की छोटी टहनियों में छेद कर देती है, जिस से शाखाएं सूख जाती?हैं. ग्रसित फूल व कलियां नीचे गिर जाती हैं. ग्रसित गूलर नीचे गिरने से खराब हो जाते?हैं और गूलर के अंदर की रूई सड़ने के चलते बेकार हो जाती है.

रोकथाम

* सब से पहले अंडों के समूहों को इकट्ठा कर के खत्म कर देना चाहिए.

* फसल में?ट्रैप फसल भिंडी की बोआई करनी चाहिए.

* बोआई के 40 दिनों बाद या कीड़े दिखाई पड़ते ही ट्राइकोग्रामा किलोनिस के 1.5 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर 8-10 दिनों के अंतराल पर 4-6 बार छोड़ें.

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