धारावाहिक कहानी: इन्तकाम भाग-1

धारावाहिक कहानी: इन्तकाम भाग-2

धारावाहिक कहानी: इन्तकाम भाग-3

धारावाहिक कहानी: इन्तकाम भाग-4

अब आगे पढ़ें- 

आजकल मार्केट में निक्की खान के नये रैप एलबम की धूम मची हुई थी. क्या जबरदस्त गाने थे. सुनते ही लोगों के पैर थिरकने लगते थे. आजकल पब्लिक को सिर्फ मसाला चाहिए. अंग्रेजी-हिन्दी मिले शब्दों की खिचड़ी पर अर्द्धनग्नता का मसाला छिड़क कर पेश कर दो और जम कर पब्लिक का पैसा और तारीफ लूटो.

निक्की खान का कोई एलबम तीन-चार सौ रुपये से कम का नहीं बिक रहा था. चारों ओर उसके गानों और डांस की धूम मची हुई थी. मुम्बई की कई बड़ी म्यूजिक कम्पनियां उसके साथ काम करने के लिए ललायित थीं. एक-एक स्टेज शो के वह लाखों रुपये लेती थी. उसका एक बड़ा म्यूजिक ग्रुप था, डांसर्स थे. चटकीले और उत्तेजक पाश्चात्य ड्रेस में वाद्य-यन्त्रों की धुन पर थिरकती निक्की खान अपने डांस ग्रुप के साथ जब स्टेज पर उतरती थी तो दर्शक उसकी खनकदार आवाज, गीत के हृदय में उतरते बोल और डांस मूवमेंट्स को देखकर मन्त्रमुग्ध हो जाते थे. निक्की की सम्मोहित कर देने वाली आवाज उन्हें घंटों अपनी जगह पर बंधे रहने के लिए मजबूर कर देती थी. अपने ही देश में नहीं, बल्कि विदेशों में भी यह ग्रुप कई परफौरमेंस दे चुका था.

‘आज तो इस शहर की किस्मत खुल गयी…’ मोनिका ने संजीव को दरवाजे से अन्दर आते देखा तो खुशी से चहकते हुए बोली.

‘वो कैसे…?’

‘डार्लिंग, तुम्हें नहीं पता…? शहर में हंगामा मचा हुआ है, आज होटल ताज में निक्की खान का म्यूजिकल ग्रुप आने वाला है…   शाम सात बजे से उसका शो है…’ मोनिका ने खुश होते हुए बताया.

‘अच्छा…!’ संजीव आश्चर्य से बोला.

‘हां… मुझे बड़ी मुश्किल से दो पास मिले हैं….’ वह उसे कार्ड दिखाते हुए बोली, ‘चलोगे न…?’ उसने संजीव की ओर देखा.

‘हां यार, निक्की खान का प्रोग्राम तो देखने वाला होगा… सुना है बहुत अच्छी सिंगर है…’ संजीव ने भी चलने में दिलचस्पी दिखायी.

शाम ढलते ही संजीव और मोनिका कार में सवार होटल ताज की ओर उड़े जा रहे थे. कहीं ऐसा न हो कि पहुंचने में देर हो जाए और उन्हें सामने की जगह न मिले. मोनिका इस वक्त अपने पसंदीदा पाश्चात्य वस्त्रों में थी. उसके कपड़ों से उठने वाले परफ्यूम की सुगन्ध पूरी कार में भरी हुई थी. संजीव को उसका यह पहनावा बहुत अखरता था. उसकी आधी से ज्यादा खुली हुई टांगें और पीठ, जिस पर दूसरों की निगाहें जोंक की तरह चिपकी रहती थीं, उसे हमेशा बुरी लगतीं, मगर मोनिका को कुछ कहना खुद को बैकवर्ड साबित करना था. सो वह चुप ही रहता था.

पार्किंग में कार लगाकर दोनों भीतर पहुंचे तो एक बड़े से स्टेज के सामने दूर तक बिछी ज्यादातर मेजें दर्शकों से भर चुकी थीं. हालांकि कार्यक्रम शुरू होने में अभी पूरा एक घण्टा बाकी था, मगर हौल लगभग भर चुका था. लोगों की उत्सुकता उनके चेहरों से स्पष्ट हो रही थी. लोग बार-बार अपनी घड़ियों की ओर देख रहे थे. संजीव और मोनिका भी एक मेज घेरकर बैठ गये. नियत समय पर कार्यक्रम शुरू हुआ. निक्की खान की तारीफों के पुल बांधते हुए विशिष्ट अतिथि महोदय ने भाषण खत्म किया और माइक मंच का संचालन करने वाले व्यक्ति को पकड़ा दिया. उसकी संक्षिप्त बात के साथ ही हॉल की सारी लाइट्स बुझ गयीं और फिर तेज म्यूजिक के बीच स्टेज पर रोशनी का एक गोला उभरा. चमचमाते हुए भड़कीले वस्त्रों में एक बहुत ही हसीन युवती ने स्टेज पर प्रकट होकर दर्शकों का अभिवादन किया. हौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. ये निक्की खान थी, जो इस वक्त एक जलपरी की भांति प्रतीत हो रही थी. उसके कंधों और माथे को ढके चमकीले घुंघराले बाल, होंठों पर सुर्ख लिप्सटिक, गले में पड़े हीरे के बहुमूल्य हार से निकलने वाली आभा उसके चेहरे को बेहद आकर्षक बना रही थी. झक गोरी रेशमी नंगी टांगे ऊंची हील की सुनहरी सैंडल में कयामत ढा रही थीं. तालियों की गड़गड़ाहट थमते ही हौल पुन: रोशनी से जगमगा उठा. स्टेज का पूरा दृश्य साफ नजर आने लगा. सभी वादक कलाकार अपने आधुनिक वाद्य-यन्त्रों के साथ अपनी जगहों  पर उपस्थित थे. पहला गाना शुरू हो चुका था. तेज संगीत लहरी और उस पर साथी कलाकारों के साथ नृत्य करते हुए निक्की खान की मधुर आवाज ने सबको अपने सम्मोहन में बांध लिया था.

एक पल को तो संजीव को लगा कि जैसे वह निक्की खान को जानता है. उससे पहले कहीं मिल चुका है. वह गौर से उसकी शक्ल पहचानने की कोशिश करने लगा. निक्की खान के घुंघराले बालों ने उसका आधे से ज्यादा चेहरा ढंक रखा था. नृत्य करते-करते जब वह अपने बालों को पीछे की ओर झटका देती तो एक बिजली से कौंध जाती थी.

संजीव और मोनिका स्टेज से काफी दूरी पर बैठे थे, अत: संजीव को बड़ी बेचैनी महसूस हो रही थी. वह लगातार उस चेहरे को पहचानने की कोशिश कर रहा था. उसका ध्यान गाने की ओर से उचट कर निक्की खान के चेहरे पर ही टिक गया था. निक्की खान में उसे बार-बार निकहत की झलक मिल रही थी. मगर कहां निकहत… साधारण सी लड़की… हमेशाा शलवार-कुर्ते और दुपट्टे में रहने वाली… तेल लगे सीधे बालों की लम्बी सी चोटी रखती थी… जिसके होंठों पर संजीव ने कभी लिप्सटिक के निशान नहीं देखे थे… और कहां निक्की खान…? भरपूर मेकअप, चुस्त पोशाक और अद्भुत नृत्य-शैली कि देखने वाले का दिल निकल कर बाहर आ जाए. फिर भी संजीव के मस्तिष्क में जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई थी. उसका मन कर रहा था कि आगे जाकर वह उसे एक बार करीब से देख ले, मगर मजबूर था.

अचानक… निक्की खान माइक लिए गाती हुई स्टेज के नीचे उतर आयी. दर्शकों के बीच नृत्य करते हुए गाना उसकी अपनी एक खास अदा थी. दर्शक उत्तेजनावश खड़े होकर उसके गाने की ताल पर तालियां बजा रहे थे, कई तो उसके साथ थिरकने को उतावले हो रहे थे. लेकिन संजीव… वह तो जैसे अपनी जगह पर जम गया था. निक्की खान ज्यों-जयों उसके पास आ रही थी, उसकी आंखें आश्चर्य से फटी जा रही थी. वह उसके बिल्कुल करीब आ चुकी थी. संदेह की कोई गुंजाइश न थी, वही चेहरा, वही बड़ी-बड़ी आंखें. वह निकहत को पहचानने में धोखा नहीं खा सकता था… और तभी… निक्की ने लगभग उसकी मेज पर आधा झुकते हुए अपना गीत खत्म किया. हौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. निक्की खान ने झुककर दर्शकों को धन्यवाद दिया और संजीव पर एक उड़ती सी नजर डाल, माइक लिए झूमती हुई स्टेज पर वापस लौट आयी.

(धारावाहिक के छठे भाग में पढ़िये कि निकहत को पहचानने के बाद संजीव की क्या हालत हुई. निक्की के रूप में निकहत का यह मेकओवर उसके दिल-दिमाग पर कैसे हावी हो गया और वह उससे मिलने के लिए क्यों आतुर हो उठा.)

Tags:
COMMENT