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महिलाओं की औनलाइन बोली: बुल्ली बाई- सुल्ली डील्स की कली दुनिया

इन दिनों साइबर ब्लैकमेलिंग का क्राइम तेजी से फैला है. ऐप्स और इंटरनेट पर लोगों को परेशान करना, डरानाधमकाना और ठगी कर लेना दिनप्रतिदिन एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. इसी तरह बुल्ली बाई और सुल्ली डील्स मोबाइल ऐप्स के जरिए मुसलिम महिलाओं की औनलाइन नीलामी के मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि…

हरियाणा में भी लौकडाउन लग चुका था. दिल्ली का बौर्डर सील था. आवागमन मुश्किल था. 24 वर्षीया मधुलिका कनाट प्लेस जाना चहती थी.

घर में अकेली पड़ीपड़ी ऊबने लगी थी. सोचने लगी कि क्या करे कि पैसे की आमदनी हो और दिल भी बहलता रहे.

थोड़ी देर बालकनी में चहलकदमी करने के बाद रोहित की याद आई. उस ने उस का फोन मिला दिया, ‘‘हैलो रोहित, कैसे हो? क्या हो रहा है? मेरे लायक कोई काम है तो बताओ न. मैं घर में बोर हो रही हूं.’’

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‘‘तो तुम 2 महीने बाद फोन कर रही हो और ऊपर से एक साथ इतने सवाल दाग दिए,’’ रोहित शिकायती लहजे में बोला.

‘‘हां यार, मेरी गलती है. तभी तो खाली पड़ी सड़ रही हूं.’’ मधुलिका बोली.

‘‘तुम चाहो तो घर बैठे डिजिटल मार्केटिंग का काम कर लो.’’ रोहित बोला.

‘‘कर दूंगी. कोई क्लाइंट मिला है क्या?’’ मधुलिका ने पूछा.

‘‘क्लाइंट तो नहीं मिला है, लेकिन एक कंपनी है, जो सेलिब्रेटीज को ट्रोल करवाने और कमेंट्स लिखवाती है. बोलो तो उस के साथ तुम्हें जोड़ दूं, लेकिन फेक आईडी बनानी होगी.’’ रोहित झिझकते हुए बोला.

‘‘सोच कर बताती हूं. वैसे किस के लिए काम करना होगा?’’ मधुलिका ने जिज्ञासा से पूछा.

‘‘अरे एक सुल्ली डील्स ऐप है. उस पर कुछ महिलाओं की आधा चेहरा बुरके में छिपी तसवीरें होंगी. उन्हें देख कर और पहचान करनी होगी. और फिर कुछ कमेंट लिखना होगा.’’

‘‘बस इतना ही. वह तो मैं कर दूंगी.’’ मधुलिका बोली.

‘‘चलो डन रहा. उस का लिंक भेज दूंगा. डाउनलोड कर लेना.’’

‘‘पैसा मिलेगा ना?’’

‘‘मैं बगैर पैसे के कोई काम करता हूं क्या. तुम्हें तो पता ही है.’’ कहते हुए रोहित हंसने लगा.

इस तरह से मधुलिका ने रोहित के कहे अनुसार काम शुरू कर दिया, लेकिन कुछ दिनों में ही उस ने उस काम से किनारा कर लिया. साथ ही रोहित से शिकायत भी की कि उस ने जो काम बताया है वह उसे न जाने क्यों गलत लग रहा है.

बात आईगई हो गई. रोहित ने काम पसंद नहीं आने पर सौरी बोल लिया.

मधुलिका भी सौफ्टवेयर डेवलपमेंट के कंटेंट का कोई दूसरा काम ढूंढने लगी. दरअसल, उस ने बीटेक किया हुआ था और कुछ महीने से खाली चल रही थी.

कुछ हफ्तों बाद बीते साल का कोरोना का दौर खत्म हो गया. सभी काम पर आनेजाने लगे. मधुलिका को भी गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी में जौब मिल गई. नया साल 2022 आ चुका था, साथ ही कोरोना की आहट फिर सुनाई देने लगी थी. रोहित ने मधुलिका को हैप्पी न्यू ईयर का विश मैसेज भेजा.

मधुलिका को उस का मैसेज पढ़ कर अच्छा लगा. लगे हाथों उस ने जवाब में लिख डाला,‘‘कहां छिपे रहे इतने दिन? सुल्ली डील में इतना खो गए कि दोस्त को भी भूल गए. माना की हम फेसबुक फ्रैंड हैं, लेकिन हैं तो फ्रैंड.’’

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मैसेज पढ़ कर रोहित ने तुरंत काल किया, ‘‘मधुलिका पहले तो मैं तुम से लंबे समय तक कोई कांटेक्ट नहीं रख पाने के लिए सौरी बोलता हूं, लेकिन एक बात बताना चाहता हूं.’’

‘‘क्या बात है?’’

‘‘तुम ने न्यूज देखी होगी. 2 डेवलपर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है? दोनों बुल्ली बाई से जुड़े थे. अरे यार, उत्तराखंड से गिरफ्तार लड़की की अभीअभी नौकरी लगी थी. दूसरा असम से पकड़ा गया है,’’ रोहित बोला.

‘‘बुल्ली बाई? यह क्या बला है?

‘‘बला नहीं, पूरी तरह से बुरी बलाबलाई है. तुम ने अच्छा किया सुल्ली डील्स से पहले ही किनारा कर लिया था. वह तो कुछ दिनों में ही हिंदूमुसलिम के विवाद में फंस गया था. बुल्ली बाई में भी वही सब काली दुनिया थी. किसी का ट्रोल करो, किसी को ट्रेंड करो… किसी का फालोअर बढ़ाओ और फिर उस की बोली लगा कर पैसे कमाने का जरिया बनाओ…’’ रोहित बोलता चला गया.

‘‘तो अब क्या होगा उन बेचारों का? जरूर वे किसी बहकावे में आ गए होंगे. लेकिन अपनी भी तो समझ होनी चाहिए थी,’’ मधुलिका ने कहा.

‘‘तुम सही कहती हो. चलो, जो हुआ सो हुआ, आगे से सतर्क रहना होगा. आईटी कानून सख्त हो चुके हैं. साइबर क्राइम काफी तेजी से फैल रहा है. उन की नजर हम जैसे सौफ्टवेयर डेवलपरों पर टिकी रहती है. किसी न किसी बहाने से डाटा इकट्ठा करवाते हैं और साइबर क्राइम को बढ़ावा देते हैं.’’

बुल्ली बाई विवाद और गिरफ्तारियां

नए साल में पहली जनवरी को मुंबई के कई राजनेता और सोशल मीडिया यूजर्स ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज की थी कि बुल्ली बाई ऐप द्वारा उन की निजता पर नजर रखी जा रही है.

शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा था कि सैकड़ों मुसलिम महिलाओं की तसवीरें गिटहब प्लेटफौर्म के जरिए एक ऐप पर अपलोड की गई हैं. चतुर्वेदी ने इस मामले को मुंबई पुलिस के सामने उठाया और उन्होंने इस के दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की.

इस पर मुंबई पुलिस ने बुल्ली बाई मामले में 2 जनवरी, 2022 को मुकदमा दर्ज कर बुल्ली बाई ट्विटर अकाउंट और उसे फालो करने वालों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी.

मुंबई पुलिस के कमिश्नर ने पाया कि इस अकाउंट के 5 फालोवर थे, जिन में से एक फालोवर खालसा विचारधारा का लग रहा था. उस के बाद काररवाई शुरू करने में तत्परता दिखाते हुए मुंबई पुलिस के जौइंट सीपी मिलिंद भारांबे ने कुछ और छानबीन की.

इस तरह उन्हें पता चला कि एक खालसा विचारधारा वाला भी इस अकाउंट का फालोवर है. और फिर मुंबई पुलिस विशाल कुमार झा तक पहुंच गई.

जांच करने के सिलसिले में मुंबई पुलिस ने यह भी पाया कि विशाल झा ने खालसा समर्थक की फरजी पहचान का इस्तेमाल किया था, ताकि पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाए. उस ने ऐप को खालिस्तानी विचारधारा के समर्थकों द्वारा बनाए गए दिखने की कोशिश की थी.

उस के बाद मुंबई पुलिस ने 3 जनवरी को विशाल कुमार को बेंगलुरु, श्वेता सिंह और मयंक रावल को उत्तराखंड से पहले संदिग्धों के तौर पर गिरफ्तार कर लिया.

इस के लिए अभियुक्तों की पहचान के बाद गिरफ्तारी करने के लिए पुलिस की एक टीम को बेंगलुरु और दूसरी को उत्तराखंड भेजा गया था.

उन की गिरफ्तारी में मुंबई पुलिस के इंसपेक्टर और सबइंसपेक्टर की भूमिका सराहनीय कही जाने लगी, क्योंकि ये गिरफ्तारियां महज 24 घंटे के भीतर ही हो गईं.

गिरफ्तार तीनों युवाओं में से 2 का सीधा संबंध उत्तराखंड से था. इन में एक पौड़ी जिले के कोटद्वार कस्बे के रहने वाले, किंतु फिलहाल जम्मू में तैनात फौज के एक सूबेदार का 21 साल का बेटा मयंक रावत है.

वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से कैमिस्ट्री औनर्स कर रहा है, जबकि दूसरा अभियुक्त रुद्रपुर की रहने वाली 18 साल की 12वीं पास श्वेता सिंह इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही है.

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पुलिस इन दोनों को बुल्ली बाई ऐप का मास्टरमाइंड बता रही है. इस मामले में मुंबई के अलावा दिल्ली में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है. साथ ही केंद्र सरकार से इस ऐप को बनाने वाले के खिलाफ सख्त काररवाई की मांग की गई.

किस की कैसी भूमिका

गिरफ्तार आरोपियों में सब से कम उम्र की श्वेता सिंह है. वह निम्नमध्यवर्गीय परिवार से है. उस की मां का 10 साल पहले निधन हो चुका है, जबकि उस के पिता पिछले साल कोरोना के शिकार हो गए थे. परिवार में उस की एक बड़ी बहन और एक छोटी बहन के अलावा एक छोटा भाई भी है.

उस की गिरफ्तारी से पहले बुल्ली बाई ऐप के मुख्य क्रिएटर को दिल्ली पुलिस, स्पैशल सेल की आईएफएसओ (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक औप्स) यूनिट ने असम से नीरज विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया.

नीरज ही बुल्ली बाई ऐप का मास्टरमाइंड है. उस ने ही गिटहब पर बुल्ली बाई ऐप को बनाया था. इस के बाद इसे प्रमोट करने के लिए ट्विटर पर ‘बुल्ली बाई अंडर स्कोर’ नाम से ट्विटर अकाउंट बनाया. बाद में इसे सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा शेयर कर दिया. पुलिस ने इस की पुष्टि उस से बरामद मोबाइल और लैपटौप से की.

नीरज की गिरफ्तारी दिल्ली और असम पुलिस की मदद से संभव हो पाई. दिल्ली पुलिस इस मामले में कोऔर्डिनेट कर रही है. दिल्ली पुलिस की टीम असम पहुंची और असम पुलिस के साथ मिल कर 12 घंटे के औपरेशन में नीरज को हिरासत में ले लिया गया था.

जोरहाट निवासी नीरज बिश्नोई भोपाल में पढ़ता है. उसे जोरहाट से दिल्ली लाया गया. भोपाल में एक स्थानीय पुलिस के अनुसार नीरज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वीआईटी कालेज का स्टूडेंट है. कालेज से 100 किलोमीटर दूर स्थित सिहोर जिले में रहता है. कालेज प्रबंधन के अनुसार कोरोना महामारी के कारण लगे लौकडाउन के चलते वह अब तक औनलाइन कक्षाएं ही लेता रहा है.

मामले की जांच में कई जानकारियां सामने आई हैं. जिस में सभी आरोपियों की भूमिका अलगअलग थी. इन में मयंक अन्य आरोपियों के संपर्क में था और उन्हीं की तरह उस के पास भी कई सोशल मीडिया हैंडल थे.

आरोपी कथित तौर पर अश्लील सामग्री पोस्ट करने के लिए कई ट्विटर अकाउंट संभाल रहे थे. पुलिस का कहना है कि इस नफरती ऐप को चलाने का दिमाग श्वेता सिंह का था. जांच में खुलासा हुआ है कि श्वेता सिंह बुल्ली बाई और 3 अन्य ऐप्स को चला रही थी.

मुसलमान औरतों की नीलामी

सानिया समेत दरजनों मुसलिम औरतों की तसवीरों को उन की सहमति के बगैर इसी साल जनवरी में बुल्ली बाई और जुलाई 2021 में सुल्ली डील्स नाम से बनाए गए मोबाइल ऐप्स इस्तेमाल कर उन की नीलामी की गई थी. इस की व्यापक आलोचना होने के बाद ही कथा लिखे जाने तक 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

सानिया को इस मामले में काफी पीड़ा झेलनी पड़ी थी. उन्होंने इस बारे में बीबीसी को बताया कि सुल्ली-बुल्ली तो बाद में हुआ. नवंबर 2020 में कुछ ऐसे अकाउंट्स थे, जिस में उन के चेहरे को नंगी तसवीरों पर मौर्फ कर ट्विटर पर डाल दिया गया था.

उन्होंने यह भी बताया कि उन की हमनाम पत्रकार दोस्त की तसवीर के साथ ट्विटर पर डाल कर पूछा गया, ‘अपने हरम के लिए कौन सी सानिया पसंद करोगे?’ इस पोस्ट पर 100 लोगों ने वोट भी दिए थे. फिर वे डायरेक्ट मैसेज पर ग्रुप्स बना कर, उन के साथ यौन संबंध बनाने, गंदी हरकतें करने पर डिसकशन करने लगे थे.

उल्लेखनीय है कि मुंबई में टीवी धारावाहिकों के लिए स्क्रीनप्ले लिखने वाली सानिया ट्विटर पर काफी मुखर रहने वाली लेखिका हैं. वह अपनी हर राय को बेझिझक रखती रही हैं. उन का कहना है वह खास विचारधारा रखने वालों के द्वारा सैक्सुअली हैरेस हुई हैं.

हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि कई बार तो वह बेहद गंदी ट्रोलिंग को नजरअंदाज करती रहीं, लेकिन जब इसे ले कर कुछ अकाउंट्स से शिकायत की गई तो अपनी गलती मानने और माफी मांगने के बजाय बदले की भावना से और पीछे पड़ गए.

उन्होंने बताया कि मैं अपनी दोस्त सानिया के साथ मिल कर वैसे अकाउंट्स को रिपोर्ट करते रहे और वे बंद भी होते रहे, लेकिन फिर नए बना लिए जाते थे. यह सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था, तब जा कर मामला मुंबई पुलिस तक गया.

सानिया अपनी एक घटना के बारे में बताती हैं. बात मई 2020 में ईद के मौके की थी. एक यूट्यूब चैनल पर कुछ पाकिस्तानी मुसलिम औरतों की तसवीरें डाल कर उन की नकली नीलामी की गई थी. वे सभी ईद के मौके पर काफी सजीसंवरी हुई थीं. चैनल ने उन के रूपसौंदर्य और ग्लैमर को भुनाने की कोशिश की थी.

यह देख कर सानिया को आशंका हुई थी कि कहीं त्यौहार के लिए तैयार हो कर खींची तसवीरें सोशल मीडिया पर डालने पर मुसलमान औरतों की नीलामी में उन का इस्तेमाल न हो जाए. उस चैनल के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई. वह सस्पेंड हो गया, लेकिन उस के बाद मुसलमान औरतों को निशाना बनाने के लिए एक दूसरी पहल हो गई.

जुलाई, 2020 में सुल्ली डील्स नाम से ऐप बनाया गया और उस पर हुई नकली नीलामी में सानिया और उन की दोस्त सानिया समेत दरजनों मुसलमान औरतों की बोली लगाई गई.

इस बारे में सानिया का कहना है कि मुसलिम औरतें चाहे जिस भी प्रोफेशन में हों, उन्हें इस ऐप में टारगेट बनाया गया है. इन में कई वैसी भी औरतें रही हैं, जिन का सोशल मीडिया से कोई वास्ता नहीं रहा है. वे न तो किसी सामाजिकराजनीतिक मुद्दे पर अपनी राय रखती थीं और न ही किसी को फालो करती थीं.

हैरानी की बात तो यह हुई कि सोशल मीडिया पर ही कई लोगों ने सवाल उठाए कि एक ऐप पर मुसलमान औरतों की झूठी या मनगढ़ंत नीलामी हुई तो इस से क्या फर्क पड़ने वाला है?

जिन की तसवीरें डाली गईं

हालांकि यह अलग बता है कि इस से न तो औरतों की नीलामी हुई और न ही उन को कोई शारीरिक नुकसान पहुंचा, लेकिन मानसिक उत्पीड़न जरूर हुआ. इसी कारण वैसी औरतों ने जब बोलना शुरू किया तब कुछ एफआईआर भी दर्ज हुईं. इस में सानिया की लेखकपत्रकार दोस्त, सानिया के अलावा, कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम की संयोजक हसीबा अमीन, पायलट हना मोहसिन खान, कवयित्री नाबिया खान भी दिल्ली में एफआईआर दर्ज करवा चुकी हैं.

‘बुल्ली बाई’ ऐप पर जिन की तसवीरें डाली गईं, उन में प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आजमी, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की पत्नी, कई पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता शामिल हैं.

पत्रकार इस्मत आरा उन महिलाओं में से एक हैं जिन की तसवीरें बुल्ली बाई पर पोस्ट की गई हैं. उन्होंने इस के खिलाफ दिल्ली पुलिस साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है.

इस्मत आरा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन उन के खिलाफ कोई ठोस काररवाई नहीं हुई, जिस से ऐसे लोगों का हौसला काफी बढ़ गया. यह मामला पहले भी उजागर हो चुका है. अच्छी बात यह है कि लोगों ने इस की आलोचना की और सब ने बेहद गलत बताया है.

इसे ले कर महिला आयोग तक ने संज्ञान लिया था. संसद में बात उठाई गई थी. गृह मंत्री को खत लिखे गए थे. उस के बावजूद उस केस का कोई निष्कर्ष नहीं दिखा. इस्मत को अब थोड़ी उम्मीद जागी है, क्योंकि 2 जगह मामला दर्ज कराया गया है.

बुल्ली की नीलामी में सानिया जैसी कई औरतें थीं जिन की तसवीरों को सुल्ली ऐप के वक्त भी इस्तेमाल किया गया था. पर कई नाम नए थे और आगे बढ़ कर बोलने को तैयार थे. इन में जानीमानी रेडियो जौकी सायमा, पत्रकार और लेखक राणा अय्यूब, इतिहासकार राणा सफवी और सामाजिक कार्यकर्ता खालिदा परवीन शामिल थीं.

इन में से कई की उम्र 60 पार कर चुकी है पर इन्हें भी इस सैक्सुअल हैरेसमेंट के लिए चिह्नित किया गया. उन औरतों की शिकायत यह भी रही कि उन की आवाज अनसुनी कर दी गई. उन की शिकायत पर महीनों तक पुलिस काररवाई नहीं हुई. यहां तक कि महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी तक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

इस बारे में जब महिलाओं ने दिल्ली पुलिस के पीआरओ से बात की और इस मामले में देरी का कारण पूछा, तब उन्हें बताया गया कि इस की वजह ऐप के एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म ‘गिटहब’ पर होस्ट होना है.

ईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिनमय बिसवाल का कहना था कि यह अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म से संबंधित डाटा का तकनीकी मामला है. उस के द्वारा तहकीकात में पूरी तरह कोऔपरेट करने के लिए एसएलएटी नाम की अंतरराष्ट्रीय ट्रीटी के जरिए उन्हें संपर्क करना होता है. उस के बाद ही उन्हें सारा डाटा मिल सकता है.

इसी के साथ उन्होंने आश्वासन भी दिया कि इस की उन्हें अनुमति मिल गई है, और वे आगे की काररवाई कर रहे हैं.

बुल्ली बाई ऐप के जरिए लोगों को बरगलाने और पैसा कमाने के लिए देश भर में एक वैसे संदिग्ध समूह द्वारा विकसित किया गया ऐप था, जिस की पहचान को ले कर पुलिस प्रयास में थी. ऐप को बनाने के पीछे का मकसद भारतीय महिलाओं में ज्यादातर मुसलिमों को नीलामी के लिए रखना और बदले में पैसा कमाना था.

औनलाइन स्कैमर्स सोशल मीडिया अकाउंट से महिलाओं की तसवीरें चुरा कर उन्हें बुल्ली बाई प्लेटफार्म पर लिस्ट कर देते थे. इसे देखते हुए पुलिस और सोशल साइट के जानकारों का कहना है कि महिलाओं को हमेशा अपनी प्रोफाइल लौक कर के रखनी चाहिए या फिर अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट बना कर रखें.

सुल्ली डील्स बनाने वाले भी शिकंजे में

मुसलिम महिलाओं के खिलाफ साजिश रचने वाले बीते साल जुलाई में चर्चा में आई ऐप सुल्ली डील्स में भी पहली गिरफ्तारी हुई. इस पर भी करीब 80 मुसलिम महिलाओं की औनलाइन बिक्री का आरोप लग चुका है.

दिल्ली पुलिस ने 10 जनवरी, 2021 को सुल्ली डील्स के मास्टरमाइंड ओंकारेश्वर ठाकुर को इंदौर की न्यूयार्क सिटी टाउनशिप से गिरफ्तार किया. उस पर आरोप है कि वह मुसलिम महिलाओं को ट्रोल करने के लिए बने ट्विटर के ट्रेड ग्रुप का भी सदस्य था. उस में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि 25 साल के ओंकारेश्वर ठाकुर ने यह बात मान ली है.

दिल्ली में स्पैशल सेल के डीसीपी के.पी.एस. मल्होत्रा का कहना है कि ओंकारेश्वर उसी ट्रेड ग्रुप का सदस्य था, जिस में मुसलिम महिलाओं को ट्रोल करने की साजिश रची जाती थी. उस ग्रुप के जरिए विशेष समुदाय को निशाना बनाया जाता था. इसी के लिए उस ने गिटहब पर कोड विकसित किए थे.

ओंकारेश्वर का यह कुबूलनामा उस पर की गई शुरुआती जांच से मिला है. ठाकुर ने जनवरी, 2020 में ट्विटर हैंडल ञ्चद्दड्डठ्ठद्दद्गह्यष्द्बशठ्ठ का इस्तेमाल कर ट्विटर पर ट्रेड महासभा के नाम से ग्रुप में शामिल हुआ था.

सदस्यों ने मुसलिम महिलाओं को ट्रोल करने की साजिश रची थी. हंगामे के बाद सभी लोगों ने सोशल मीडिया फुटप्रिंट्स को डिलीट कर दिया था.

‘सुल्ली’ महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल किया जाने वाला अपमानजनक शब्द है. यह चर्चा में तब आया था जब देश में कोरोना की दूसरी लहर फैली हुई थी. कई राज्यों में लौकडाउन की स्थिति थी. लोग घरों में दुबके थे और अधिकतर नौकरीपेशा लोग वर्क फ्रौम होम पर थे. उन्हीं दिनों आई कंपनियां सफलता के नया आयाम बना रही थीं.

सौफ्टवेयर डेवलपर नएनए ऐप बना रहे थे, तो उन्हें तेजी से लोकप्रिय बनाने के लिए सोशल साइटों पर धड़ल्ले से ग्रुप भी बनाए जा रहे थे.

उन्हीं दिनों 4 जुलाई, 2021 को ट्विटर पर सुल्ली डील्स के नाम से कई स्क्रीनशौट साझा किए गए थे. इस ऐप में एक टैग लाइन लगी थी, ‘सुल्ली डील औफ द डे’ और इसे मुसलिम महिलाओं की फोटो के साथ शेयर किया जा रहा था.

इस बारे में एक खास बात की चर्चा भी हुई थी कि इसे माइक्रोसौफ्ट द्वारा संचालित गिटहब पर एक अज्ञात समूह द्वारा बनाया गया था. बहुत जल्द ही इसे ले कर विवाद खड़ा हो गया था, क्योंकि इस बारे में यह धारणा बन गई कि ये ‘ट्रैड्स’ मुख्यरूप से दलितों, मुसलिमों, ईसाइयों और सिखों के विचारों के खिलाफ करते हैं, जिस से हिंसा को बढ़ावा मिलने की आशंका बनती है.

कारण था कि इन के बयानों, ट्रोल और ट्रेड द्वारा हत्या, बलात्कार और हर तरह की हिंसा करने की खुलेआम धमकी की बातें झलकती हैं.

ये राजनीतिक दलों की विचारधाराओं पर कड़वी टिप्पणी करते हैं. उन के नेताओं पर कटाक्ष करते हैं. उन पर अपने विचारों को थोपने के लिए मजबूर करते हैं. आलोचना करते समय भाजपा, कांग्रेस समेत लेफ्ट पार्टियों को निशाना बनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को नहीं छोड़ते हैं.

गिटहब पर बुल्ली बाई और सुल्ली डील्स

अधिकतर इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप गूगल के प्लेस्टोर पर उपलब्ध हैं, लेकिन बुल्ली बाई और सुल्ली डील्स होस्टिंग प्लेटफार्म गिटहब पर बने हैं. इस पर मालिकाना हक अमेरिकी कंपनी माइक्रोसाफ्ट का है, जिसे उस ने 2018 में खरीदा था. यहां ओपन सोर्स कोड का भंडार रहता है. यह फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम की तरह ही एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म है.

इस पर बने बुल्ली बाई और सुल्ली डील्स भारत में लोगों के गुस्से के शिकार हो गए हैं. कारण इन पर औरतों को निशाना बनाया गया. यहां तक कि एक खास समुदाय की लड़कियों और महिलाओं की निजी बातें, पहनावे, दिखावे, बेबाक बातें आदि के साथ छेड़छाड़ कर उन की बोली तक लगा दी गई. उन की बोली लगा कर पैसा कमाने का जरिया बना दिया गया.

दरअसल, इन दोनों ऐप्स पर मुसलिम महिलाओं की फोटो डाल कर शेयर किया जाता था और उस पर बोली लगाने के लिए कहा जाता था.

ये देश की उन मुसलिम महिलाओं को टारगेट कर रहे थे, जो सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रही हैं. सेलिब्रिटी हैं. अपने निजी संबंधों को ले कर विवाद में रही हैं.

विवाह, तलाक, सामाजिक कुरीतियां, विसंगतियां या फिर यौन संबंधी मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं देती रही हैं. या फिर तमाम सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक मुद्दों पर अपनी राय रखती हैं.

गिटहब का इस्तेमाल सौफ्टवेयर डेवलपर्स और कोडिंग करने वाले लोग कर के ऐप्स बनाते हैं. उन के सौफ्टवेयर और कोड्स इसी प्लेटफार्म पर स्टोर और सेव किए जाते हैं.

यहां सोर्स से डेवलपर को कोड का गिट मिलता है, उस के जरिए ऐप अपलोड कर दिया जाता है. उस के बाद इसे सुविधानुसार मैनेज किया जा सकता है. इस के बाद वर्जन कंट्रोल तकनीक के जरिए बाकायदा इसे ट्रैक किया जा सकता है.

गिटहब को टौम प्रसटोन वार्नेर, चेरिस वानस्ट्रेथ, पी.जे. हेयट्ट और स्कौट ने मिल कर साल 2007 में लौंच किया गया. इसे डेवलपर्स की इंडस्ट्री में एक बड़ा मील का पत्थर माना गया था और तब से ले कर तमाम तरह के डेवलपिंग से संबंधित बदलाव किए जाते रहे हैं.

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डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल बढ़ने के साथसाथ इस की मांग भी बढ़ती चली गई. यहां यूजर्स अपने सोर्स प्रोजेक्ट को होस्ट करते हैं. साथ ही इस में दूसरे सौफ्टवेयर के प्रोग्रामर्स को सौफ्टवेयर इंप्रूव करने में मदद मिलती है. इस के बारे में महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यहां कोई भी आसानी से फ्री में एकाउंट बना सकता है.

इस के लिए केवल ईमेल आईडी ही चाहिए होती है. यूजर्स जितनी जानकारी

देना चाहे, उसे पब्लिक में दे सकता है. हालांकि उस की प्राइवेसी सेटिंग उस के हाथ में होती है.

उल्लेखनीय है कि ऐप बनाना आसान है, लेकिन इस तरह के ऐप्स पर धार्मिक उन्माद फैलाना, आपराधिक कृत्य करना कानून के दायरे में आता है.

यह आईटी ऐक्ट और क्रिमिनल ला ऐक्ट 2013 के अंतर्गत आता है. इस में दोषी पाए जाने पर 66सी, 66ई, 67, 67ए के अंतर्गत जेल भेजा जा सकता है.

सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार बुल्ली बाई ऐप यूजर को गिटहब द्वारा ब्लौक कर दिया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि गिटहब की ओर से यूजर को ऐप ब्लौक करने की सूचना दे दी गई है.

तुम सावित्री हो: क्या पत्नी को धोखा देकर खुश रह पाया विकास?

 Writer- Dr. Vilas Joshi

अमेरिका के एअरपोर्ट से जब मैं हवाईजहाज में बैठी तो बहुत खुश थी कि जिस मकसद से मैं यहां आई थी उस में सफल रही. जैसे ही हवाईजहाज ने उड़ान भरी और वह हवा से बातें करने लगा वैसे ही मेरे जीवन की कहानी चलचित्र की तरह मेरी आंखों के आगे चलने लगी और मैं उस में पूरी तरह खो गई…

विकास और मैं एक मल्टीनैशनल कंपनी में कार्यरत हैं. वैसे मैं उम्र में विकास से 1 वर्ष बड़ी हूं. वे कंपनी में एम.डी. हैं, जबकि मैं सीनियर मैनेजर. कंपनी में साथसाथ काम करने के दौरान अकसर हमारी मुलाकात होती रहती थी. मेरे मम्मीपापा मेरी शादी के लिए लड़का देख रहे थे, लेकिन कोई अच्छा लड़का नहीं मिल रहा था. आखिर थकहार के मम्मीपापा ने लड़का देखना बंद कर दिया. तब मैं ने भी उन से टैलीफोन पर यही कहा कि वे मेरी शादी की चिंता न करें. जब होनी होगी तब चट मंगनी पट शादी हो जाएगी. दरअसल, विकास का कार्यक्षेत्र मेरे कार्यक्षेत्र से एकदम अलग था. यदाकदा हम मिलते थे तो वह भी कंपनी की लिफ्ट या कैंटीन में. वे कंपनी में मुझ से सीनियर थे, हालांकि मैं पहले एक दूसरी कंपनी में कार्यरत थी. मैं ने उन के 3 वर्ष बाद यह कंपनी जौइन की थी. एक बार कंपनी के एक सेमिनार में मुझे शोधपत्र पढ़ने के लिए चुना गया. उस समय सेमिनार की अध्यक्षता विकास ने की थी. जब मैं ने अपना शोधपत्र पढ़ा तब वे मुझ से इतने इंप्रैस हुए कि अगले ही दिन उन्होंने मुझे अपने कैबिन में चाय के लिए आमंत्रित किया. चाय के दौरान हम ने आपस में बहुत बातें कीं. बातोंबातों में उन्होंने मुझ से मेरे बारे में ंसारी बातें मालूम कर लीं. रही उन के बारे में जानकारी लेने की बात, तो मैं उन के बारे में बहुत कुछ जानती थी और जो नहीं जानती थी वह भी उन से पूछ लिया.

जब मैं उन के कैबिन से उठने लगी, तब उन्होंने कहा, ‘‘अलका, क्या तुम मुझ से शादी करना चाहोगी?’’

‘‘पर सर, मैं उम्र में आप से 1 साल बड़ी हूं.’’

‘‘उम्र हमारे बीच दीवार नहीं बनेगी,’’ वे बोले.

‘‘फिर ठीक है, मैं अपने मम्मीपापा से बात कर के आप को बताती हूं.’’

‘‘वह तो ठीक है, लेकिन मैं इस बारे में तुम्हारी अपनी राय जानना चाहता हूं?’’

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‘‘जो आप की राय है, वही मेरी,’’ मैं ने कुछ शरमाते हुए कहा और कैबिन से बाहर आ गई. ड्यूटी से घर लौटने के बाद मैं ने टैलीफोन पर मम्मीपापाजी से विकास के प्रस्ताव पर सविस्तार बात की तो वे बोले, ‘‘बेटी, यदि तुम्हें यह रिश्ता पसंद है तो हम भी तैयार हैं.’’ फिर क्या था मेरी और विकासजी की चट मंगनी और पट शादी हो गई. यह हमारी शादी के 2 साल बाद की बात है. एक दिन विकास ने मुझे अपने कैबिन में बुलाया और बताया, ‘‘कंपनी मुझे 2 सालों के लिए अमेरिका भेजना चाहती है. अब मेरा वहां जाना तुम्हारे हां कहने पर निर्भर है. तुम हां कहोगी तो ही मैं जाऊंगा वरना बौस से कह दूंगा कि सौरी कुछ परिस्थितियों के चलते मैं अमेरिका जाने के लिए असमर्थ हूं.’’ यह मेरे लिए बड़ी खुशी की बात थी कि कंपनी स्वयं अपने खर्च पर विकास को अमेरिका भेज रही थी. ऐसा चांस बहुत कम मिलता है. अत: मैं ने उन्हें अमेरिका जाने के लिए उसी समय अपनी सहमति दे दी. करीब 1 माह बाद विकास अमेरिका चले गए. वहां जाने के बाद मोबाइल पर हमारी बातें होती रहती थीं, लेकिन समय बीतने के साथसाथ बातें कम होती गईं. जब एक बार मैं ने उन से इस के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ‘‘यहां बहुत काम रहता है, फिर यहां नया होने के कारण सब कुछ समझने में मुझे ज्यादा वक्त देना पड़ रहा है.’’ इस प्रकार 8-9 माह बीत गए. एक दिन सुबह 5 बजे हमारी डोरबैल बजी. मैं ने दरवाजा खोला तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. मेरे सामने विकास खड़े थे. जब वे अंदर आए तब मैं ने पूछा, ‘‘आप ने तो आने के बारे में कुछ बताया ही नहीं?’’

तब वे बोले, ‘‘तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था. दरअसल, मैं कंपनी के काम से केवल 1 सप्ताह के लिए यहां आया हूं.’’

‘‘बस 1 सप्ताह?’’ मैं ने पूछा.

‘‘हां, कंपनी ने मेरे इंडिया आने के साथसाथ मेरा रिटर्न टिकट भी करवा दिया है,’’ मुझ से आंखें चुराते हुए उन्होंने जवाब दिया. इस 1 सप्ताह के दौरान हम रोज शाम को कहीं बाहर घूमने चले जाते और फिर रात को किसी होटल में खाना खा कर ही लौटते. दिन बीतने को कितना समय लगता है? देखतेदेखते हफ्ता बीत गया और वे लौट गए. एक दिन जब मैं ड्यूटी से घर लौटी तो दरवाजे के पास एक चिट्ठी पड़ी देखी. चिट्ठी विकास की थी. मैं बैडरूम में आई और अपने कपड़े चेंज कर चिट्ठी पढ़ने लगी. पूरी चिट्ठी पढ़ने पर ऐसा लगा जैसे मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गई हो. उन्होंने चिट्ठी में लिखा था:

‘अलका,

तुम्हें सच बता रहा हूं कि मैं कंपनी के किसी काम से इंडिया नहीं आया था. दरअसल, जब हम रोज शाम को घूमने जाते थे तो उस दौरान यह बात तुम्हें बताना चाहता था, लेकिन तब हिम्मत न जुटा पाने के कारण कुछ नहीं बता पाया, इसलिए यहां पहुंचते ही यह चिट्ठी लिख रहा हूं. यहां रहने के दौरान मैं एक लड़की सायना जेली के संपर्क में आया और फिर हम ने शादी कर ली.

तुम्हारा- विकास.’

विकास की चिट्ठी पढ़ने के बाद मन किया आत्महत्या कर लूं, क्योंकि मेरी दुनिया में विकास के अलावा और कोई था ही नहीं. फिर सोचा यदि आत्महत्या कर ली तो मेरे मम्मीपापा मुझे ही दोषी समझेंगे. अत: मैं ने अपना मन मजबूत करना शुरू किया. अब मेरे सामने सवाल यह था कि मैं करूं तो करूं क्या? यदि मैं इस बात को अपने मम्मीपापा को बताती तो उन का दिल बैठ जाता. यदि इस बात को मैं अपनी कंपनी की सहेलियों के साथ शेयर करती तो भी बदनामी हमारी ही होनी थी, क्योंकि कहते हैं न जितने मुंह उतनी बातें. अत: मैं ने धैर्य रखने का निर्णय लिया और रोजाना ड्यूटी जाती तो किसी को इस बात का एहसास नहीं होने देती कि मेरे साथ क्या हुआ है और मैं इस समय किस दौर से गुजर रही हूं. सब के साथ हंसहंस कर बातें करती. यदाकदा कोई विकास के बारे में पूछता तो कह देती कि अमेरिका में आनंद ले रहे हैं. ऐसे ही डेढ़ साल बीत गया. एक दिन मम्मी ने टैलीफोन पर पूछा, ‘‘अलका, तेरे पति के लौटने का समय हो गया है न? कब आ रहे हैं हमारे दामादजी?’’ अब मैं क्या जवाब देती? मम्मी को समझाने भर के लिए कहा, ‘‘मम्मीजी, शायद कंपनी उन के 6 महीने और बढ़ाना चाहती है. अत: वे 6-7 महीने बाद ही आएंगे. दरअसल, वे चाहते हैं कि मैं ही 1-2 महीनों की छुट्टी ले कर अमेरिका चली आऊं.’’

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मैं ने मम्मी से यह कह तो दिया, पर उस पूरी रात सो नहीं पाई. बिस्तर पर पड़ेपड़े मुझे अचानक यह खयाल आया कि हमारी शादी को हुए 2 साल हो गए हैं. इस दौरान मैं मां न बन सकी. विकास चाहते थे कि पहला बच्चा जल्दी हो जाए. घर में बच्चे की किलकारियां सुनने के लिए वे बहुत बेताब थे. तभी मुझे खयाल आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि विकास बच्चा जल्दी चाहते थे, इसीलिए उन्होंने वहां जा कर सायना से शादी कर ली? यह विचार मन में आते ही मैं एकदम बिस्तर से उठ बैठी. इस विचार ने मुझे सारी रात जगाए रखा. एक दिन घर लौट रही थी, तब हमारी कंपनी के उज्ज्वल सर मुझे मिल गए. मैं ने उन का अभिवादन किया. वे देर तक खामोश खड़े रहे. तब मैं ने ही खामोशी को तोड़ते हुए उन से पूछा, ‘‘सर, आप कब अमेरिका से आए?’’

‘‘मैडम, मुझे यहां आए 1 सप्ताह ही हुआ है… सच बताऊं विकास के साथ वहां बहुत बुरा हुआ.’’

मैं उन की बात सुन कर दंग रह गई. और फिर तुरंत पूछा, ‘‘सर, विकास के साथ क्या बुरा हुआ?’’

वे बोले, ‘‘मैडम, विकास ने जिस सायना से शादी की थी, उस ने विकास के बैंक खाते में जमा लाखों डौलर औनलाइन सर्विस के माध्यम से अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए और फिर विकास ने जो गोल्ड खरीद रखा था, उसे भी अपने साथ ले कर फरार हो गई. अभी तक उस का कोई अतापता नहीं है. इतना ही नहीं उस ने विकास के नाम पर कई जगहों से क्रैडिट पर कीमती सामान की खरीदारी भी की. विकास बुरी तरह आर्थिक परेशानी के दौर से गुजर रहा है. इस घटना के बाद विकास ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की पर बचा लिया गया. सायना फ्रौड लेडी है और ऐसा औरों के साथ भी कर चुकी है.’’ इस घटना से मैं पुन: सदमे में आ गई. हालांकि एक सचाई यह भी थी कि विकास और मेरे बीच अब कोई संबंध नहीं रह गया था. जब सायना उन की जिंदगी में आई थी तभी से मेरे उन के संबंध खत्म हो गए थे. मैं घर आई तो सोच के समंदर में डूब गई कि अब क्या किया जाए? सोच की हर लहर मेरे मन के किनारे पर आ कर टकरा रही थी.

तभी एक शांत लहर ने मेरे विचारों को दिशा दी कि विकास तुम्हारे साथ प्यार या संबंध निभाने में भले ही असफल रहे हों, लेकिन तुम ने भी तो उन्हें अपनी जिंदगी के लिए चुना था? तो फिर अब तुम चुपचाप कैसे बैठ सकती हो? उन से गलती हुई है इस का अर्थ यह तो नहीं कि उन के और तुम्हारे बीच कभी प्यार के संबंध थे ही नहीं? आज उन के बुरे वक्त में उन का साथ देना तुम्हारा दायित्व है. ऐसे अनगिनत सवाल मेरे मन से आ कर टकराए और तभी मैं ने निश्चय किया कि मैं अपना दायित्व अवश्य निभाऊंगी. फिर क्या था. मैं ने अपनी एक सहेली की मदद से अपने फ्लैट को एक कोऔपरेटिव बैंक के पास गिरवी रख कर क्व25 लाख कर्ज लिया और अमेरिका पहुंच गई. जब मैं ने उन के फ्लैट की डोरबैल बजाई तो उन्होंने ही दरवाजा खोला और फिर मुझे देखते ही आश्चर्यचकित तो हुए ही, साथ ही शर्मिंदा भी. मैं जानती थी कि वे इस घटना के कारण गहरे अवसाद से गुजर रहे हैं, फिर भी मैं ने एक बार तो उन से पूछ ही लिया, ‘‘विकास, सायना से अंतरंग संबंध बनाते समय क्या तुम्हें एक बार भी मेरा खयाल नहीं आया कि मुझ पर क्या गुजरेगी? खैर, मुझ पर क्या गुजर रही है, यह तुम क्योंकर सोचोगे भला?’’ मेरी बात सुन कर विकास एक अपराधी की तरह खामोश रहे. उन का चेहरा गवाही दे रहा था कि उन्हें अपनी गलती पर पछतावा है. उन से कोई जवाब न पा कर मैं सीधे अपने उस मकसद पर आ गई, जिस के लिए मैं अमेरिका आई थी. उन के साथ बैठ कर मैं ने एक लिस्ट तैयार की जिस में सायना ने जहांजहां से इन के क्रैडिट पर कीमती वस्तुएं खरीदी थीं. अगले दिन विकास को अपने साथ ले कर उन की सारी उधारी चुकता कर दी. हम फ्लैट में लौटे तब रात के 10 बज रहे थे. मैं थकीहारी सोफे पर आ कर बैठ गई. तब विकास बोले, ‘‘अलका, सच, तुम सावित्री हो. जिस प्रकार सावित्री सत्यवान को मौत के मुंह से वापस लाई थी, उसी प्रकार तुम भी मुझे मौत के मुंह से वापस लाई हो वरना मैं तो आत्महत्या करने का अपना इरादा फिर से पक्का कर चुका था.’’

विकास की बात सुन कर मैं ने इतना ही कहा, ‘‘विकास, हमारे रिश्ते में सेंध तुम ने ही लगाई है. खैर, अब तुम पूरी तरह मुक्त हो, क्योंकि न तुम ऋणग्रस्त हो और न ही किसी बंधन में गिरफ्त. मैं ने तो यहां आ कर सिर्फ अपना पत्नीधर्म निभाया है, क्योंकि मैं ने अपनी तरफ से यह रिश्ता नहीं तोड़ा है. चूंकि मैं मुंबई से रिटर्न टिकट ले कर यहां आई हूं, इसलिए कल ही मुझे मुंबई लौटना है.’’ तभी एअरहोस्टेज की इस घोषणा से मेरी तंद्रा टूटी कि हवाईजहाज मुंबई एअरपोर्ट पर लैंड करने वाला है. कृपया अपनीअपनी सीटबैल्ट बांध लें. एअरपोर्ट उतर टैक्सी पकड़ अपने फ्लैट पहुंची. अब घर पर अकेली रह कर भी क्या करती, इसलिए अगले ही दिन से ड्यूटी जौइन कर ली. करीब 2 सप्ताह बाद विकास भी अमेरिका से लौट आए. अब हम दोनों रोज साथसाथ कंपनी जाते हैं. और हां, एक गुड न्यूज यह भी है कि मैं शीघ्र ही मां बनने वाली हूं.

Valentine’s Special: तोहफा हो प्यार का, न की उधार का

फरवरी माह आते ही हर युवा प्यार के रंगों में सराबोर नजर आने लगता है. कारण है इस माह में आने वाला त्योहार वैलेंटाइन डे. जो प्यार और प्यार के इजहार का दिन है. अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने के लिए हर युवा दिल को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है, और हो भी क्यों न, इस दिन प्रेमी अपने प्यार का इजहार एकदूसरे को तोहफे व फूल दे कर करते हैं. कुछ युवा तो महंगे तोहफे खरीदने के लिए उधारी तक कर लेते हैं.

तोहफे की अहमियत

हर प्रेमी की यह चाहत होती है कि वह अपने वैलेंटाइन डे को यादगार बनाए. ऐसे में इस दिन को यादगार बनाने के लिए तोहफे की अहमियत बढ़ जाती है. अपने वैलेंटाइन को महंगे से महंगा तोहफा देने के लिए प्रेमी अपनी जेब तो हलकी करते ही हैं, साथ ही उधार लेने से भी नहीं कतराते, जबकि प्यार का तोहफा दिल का तोहफा होना चाहिए न कि उधार का.

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प्यार की उधार चढ़ी दुकान

प्यार एक खूबसूरत एहसास है. जब किसी को किसी से प्यार हो जाता है तो वह रिश्ते की शुरुआत में अकसर इतना एक्साइटेड हो जाता है कि अपने प्यार की फीलिंग्स व्यक्त करने और अपनी शान बघारने के चक्कर में महंगा गिफ्ट खरीद कर अपने वैलेंटाइन को देता है, चाहे इस के लिए उसे किसी से उधार लेना पड़े या फिर तोहफे की कीमत किस्तों में अदा करनी पड़े. आखिर मामला प्यार का जो है, पर यह कितना सही है?

जितनी चादर हो उतने पैर पसारें

यह जरूरी नहीं कि अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए आप जरूरत से ज्यादा महंगा गिफ्ट खरीद कर अपने वैलेंटाइन को देंगे तभी उस से अपने दिल की बात कह पाएंगे. आप अपनी और उस की पसंद के अनुसार ही गिफ्ट देने की सोचें, नहीं तो बाद में समस्या आप को ही होगी और महंगे गिफ्ट की उधारी चुकातेचुकाते आप परेशान हो जाएंगे. इसलिए अपने बजट के अनुसार ही गिफ्ट का चुनाव करें.

आजकल मार्केट में हर रेंज के लव गिफ्ट्स मौजूद हैं. आप अपनी जेब के हिसाब से उन में से कोई भी चुन सकते हैं.

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देखादेखी न करें

प्यार में गिफ्ट देने में कभी भी कंपीटिशन न करें. किसी दूसरे के पार्टनर ने अपने वैलेंटाइन को महंगा गिफ्ट दिया है तो आप को भी महंगा गिफ्ट देना है, यह जरूरी नहीं. अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही गिफ्ट का चयन करें. नहीं तो इस से आप को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कम और गिफ्ट के बारे में चिंता ज्यादा रहेगी. ऐसे में आप के प्यार की शुरुआत ही बेकार होगी और जो प्यारभरी बात आप को अपने वैलेंटाइन से करनी है, वह भी अधूरी रह जाएगी. अत: अपनी जेब और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर ही गिफ्ट खरीदें. प्यार भरा गिफ्ट जब आप अपने वैलेंटाइन को देंगे तो बात बन जाएगी.

गिफ्ट हो कुछ इस तरह खास

– अगर आप अपने दिल के जज्बातों को अपने पार्टनर से शेयर करने के लिए कोई ऐसा गिफ्ट देना चाहते हैं जो हमेशा उसे आप की याद दिलाए तो दिल से निकला संदेश दें. इस के लिए आप कुछ ऐसा करें, जिस से आप की जेब भी हलकी न हो और आप अपनी भावनाओं को भी अच्छी तरह से व्यक्त कर सकें.

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– सब से पहले अपने बिजी शैड्यूल में से कुछ समय निकालें, क्योंकि सब से कीमती उपहार है आप का साथ, जो आज के समय में कम ही मिल पाता है.

– अपने हाथों से ग्रीटिंग कार्ड बनाएं व उस पर अपनी भावनाओं को कविता के रूप में लिख कर व्यक्त करें, यह अनमोल उपहार आप के वैलेंटाइन को बहुत पसंद आएगा.

– उस के पंसदीदा फोटोग्राफ्स से भरी एक खूबसूरत स्क्रैप बुक बना कर उसे तोहफे में दें. यह नायाब तोहफा उस के दिल को छू जाएगा.

–  अपने वैलेंटाइन के साथ बिताए पलों की सुनहरी यादों को फिर से दोहराएं, ये पल वाकई उसे रोमांचित कर देंगे.- अगर आप का वैलेंटाइन पढ़ने का शौकीन है तो उसे अच्छी किताब गिफ्ट करें.

– यदि आप के वैलेंटाइन की संगीत में रुचि है या उसे पुरानी फिल्में देखने का शौक है, तो उसे उस के पसंदीदा गानों व मूवी की सीडी गिफ्ट कर सकते हैं.

– जरूरी नहीं कि उस दिन आप अपने वैलेंटाइन को किसी फाइव स्टार होटल में ही पार्टी दें. अगर आप उसे उस की पसंद के अनुसार अपने हाथों से कोई स्पैशल डिश बना कर खिलाएंगी तो उसे खुशी होगी और अपनापन लगेगा. जैस चौकलेट केक, ब्राउनी, कुकीज कप केक आदि.

– युवतियों को फंकी ज्वैलरी बहुत पंसद आती है, ऐसे में यह भी आप के बजट के अनुसार आसानी से मिल जाएगी.

– ज्यादातर युवकों को स्पोर्ट्स पसंद होता है. ऐसे में आप स्पोर्ट्स का कोई आइटम या स्पोर्ट्स क्लब की मैंबरशिप उसे गिफ्ट कर सकती

चूक गया अर्जुन का निशाना: भाग 4

करसन और कान्हा अगले ही दिन उस गांव पहुंच गए, जिस गांव में रामजी ने सविता को देखने की बात बताई थी. उस गांव में जा कर कान्हा और करसन ने सारी सच्चाई का पता लगा लिया. अर्जुन और सविता उस गांव में नाम बदल कर पतिपत्नी बन कर रह रहे थे.

अर्जुन ने पूरे गांव को बेवकूफ बना दिया था. सविता की हत्या का कौतुक रच कर दिनेश को तो फंसा ही दिया, साथ ही बड़ी होशियारी से पूरे गांव की सहानुभूति भी पा ली थी. बेटी समान पुत्रवधू से अवैध संबंध बना कर अधेड़ अर्जुन, सोच भी नहीं सकता था उस से भी अधिक होशियार निकला था.

करसन और कान्हा अगले दिन गांव लौट आए. गांव में किसी को कुछ बताए बगैर वे सीधे थाना भादरवा पहुंचे और नए आए थानाप्रभारी फौजदार सिंह से मिले. फौजदार सिंह ईमानदार और सख्त पुलिस अधिकारी थे. वह अपने कर्तव्य के प्रति काफी सजग माने जाते थे. शिकायतकर्ता की बात ध्यान से सुन कर अपराधी को कानून का भान कराना उन्हें अच्छी तरह आता था.

कान्हा और करसन ने जब सारी बात बता कर फौजदार सिंह को अर्जुन और सविता द्वारा किए गए कारनामे के बारे में बताया तो उन का कारनामा सुन कर फौजदार सिंह भी हैरान रह गए.

उन्होंने तुरंत दोनों से एक एप्लीकेशन ले कर अर्जुन और सविता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. उस के बाद अपनी एक टीम बना कर कान्हा तथा करसन को साथ ले कर अर्जुन और सविता की गिरफ्तारी के लिए चल पड़े.

खंभाडि़या पुलिस की मदद से थानाप्रभारी फौजदार सिंह ने गांव में छिप कर रह रहे अर्जुन और सविता को गिरफ्तार कर लिया. दोनों को गिरफ्तार कर थाना भादरवा लाया गया. थाने ला कर दोनों से पूछताछ की गई तो बिना किसी हीलाहवाली के दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

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उस के बाद उन्होंने इस अपराध के पीछे की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर सभी दंग रह गए. अवैध संबंध की इस कहानी ने रिश्तों को तो कलंकित किया ही, एक निर्दोष और रिश्तों के प्रति समर्पित आदमी की जिंदगी भी बरबाद कर दी थी.

अर्जुन रबारी मंजूसर गांव का बहुत पुराना निवासी था. उस के पूर्वजों ने दूध बेच कर काफी पैसा कमाया था. अपनी कमाई का सही उपयोग करते हुए उन्होंने गांव में काफी जमीनें खरीद ली थीं. उस की कुछ जमीन जीआईडीसी में चली गई थी, जिस का उसे अच्छाखासा मुआवजा मिला था.

मुआवजे की रकम से अपनी सड़क के किनारे वाली जमीन पर उस ने दुकानें और कमरे बनवा कर किराए पर उठा दिए थे. इस तरह किराए के रूप में उसे एक मोटी रकम मिल रही थी. बाकी बची जमीन पर वह खेती करवा कर आराम की जिंदगी जी रहा था.

उस का एक ही बेटा था मोहन. अचानक 2 साल पहले उस की पत्नी की मौत हो गई तो बापबेटे ही बचे. गुजरात में जबारियों में देर से शादी करने का रिवाज है. पर अर्जुन के घर रोटी बनाने वाला कोई नहीं था, इसलिए पत्नी की मौत के बाद उस ने बेटे की शादी जल्दी ही कर डाली.

पुत्रवधू के आने से दोनों को दो जून की रोटी आराम से मिलने लगी. बापबेटे की जिंदगी आराम से कट रही थी. मोहन ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली थी. उस ने कई गाएं और भैंसें पाल रखी थीं, जिन का दूध बेच कर वह अच्छा पैसा कमा रहा था.

मकानों और दुकानों का किराया तो आता ही था, खेती से भी ठीकठाक आमदनी हो जाती थी. उस की पत्नी सविता भी उस के हर काम में उस के साथ रह कर उस की मदद करती थी.

मोहन का सब से अच्छा दोस्त था दिनेश. हालांकि दिनेश उस से 2-3 साल बड़ा था, पर दोनों में खूब पटती थी. उन की दोस्ती ऐसी थी कि ज्यादा देर तक दोनों एकदूसरे से अलग नहीं रह पाते थे. ज्यादा देर तक दोनों एकदूसरे के साथ रह सकें, इस के लिए दोनों ही खेती या घर के कामों में एकदूसरे की मदद भी करते या दोनों ही कोई भी काम एक साथ मिल कर करते.

इस से वे ज्यादा से ज्यादा देर साथ भी रह लेते और काम भी आसानी से निपट जाता. सिर्फ वे काम के ही साथी नहीं थे, दुखसुख में भी एकदूसरे का साथ देते थे.

दिनेश के पिता की बहुत पहले मौत हो गई थी. उस की शादी के साल भर बाद ही अचानक उस की मां की भी मौत हो गई थी. मां की मौत के बाद दिनेश और उस की पत्नी ही रह गए थे.

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दिनेश यारों का यार था, इसलिए उस के मोहन के अलावा भी तमाम दोस्त थे. उन में कान्हा, करसन, रफीक और महबूब खास दोस्त थे. जबकि मोहन की दोस्ती सिर्फ दिनेश से ही थी. बाकी से उस की हायहैलो भले हो जाती थी, पर साथ उठनाबैठना कोई खास नहीं था.

सब कुछ बढि़या चल रहा था कि एक दिन अचानक मोहन को घास काटते समय जहरीले सांप ने काट लिया तो उस की मौत हो गई. मोहन की मौत के बाद सविता का तो संसार ही उजड़ गया था, अर्जुन का भी बुढ़ापे का सहारा छिन गया था.

मोहन की मौत का उतना ही दुख दिनेश को भी था, जितना सविता और अर्जुन को था. इसलिए उस की मौत के बाद भी दिनेश का मोहन के घर उसी तरह आनाजाना बना रहा.

पहले जिस तरह वह हर काम में मोहन की मदद करता था, उसी तरह उस की मौत के बाद सविता की मदद करता रहा. चूंकि अब सविता विधवा हो चुकी थी, दूसरे अभी वह एकदम जवान थी, इसलिए दिनेश का उस के घर आना, उस की मदद करना लोगों की आंखों में कांटे की तरह चुभ रहा था.

सविता के ससुर अर्जुन को भी यह जरा भी पसंद नहीं था. क्योंकि दिनेश की पत्नी उसे छोड़ कर चली गई थी. वह भी अकेला था.

सविता जवान भी थी और सुंदर भी. इसलिए गांव के हर लड़के की नजर उस पर थी. अर्जुन को पता था कि सविता अभी जवान है, इसलिए कभी भी उस का पैर फिसल सकता है.

दिनेश उस के साथ हमेशा लगा ही रहता था. हालांकि वह जानता था कि दिनेश इस तरह का आदमी नहीं है, पर किसी का क्या भरोसा कब मन बदल जाए. आग और फूस करीब रहेंगे तो कभी भी आग लग सकती है.

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सविता अब करोड़ों की मालकिन थी. क्योंकि अर्जुन की सारी संपत्ति अब उसी की थी. अर्जुन नहीं चाहता था कि गांव का कोई शोहदा उस की पुत्रवधू से संबंध बना कर उस की दौलत पर उस की पुत्रवधू के साथ मौज करे. इस के लिए उस ने बिना किसी शरम संकोच के सीधे सविता से बात की.

Yeh Rishta Kya Kehalata Hai: अभिमन्यु और अनीषा पर शक करेगी अक्षरा, सामने आया Video

हर्षद चोपड़ा (Harshad Chopda) और प्रणाली राठौर (Pranali Rathore) स्टारर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’(Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) की कहानी में लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. दर्शकों को कहानी का लेटेस्ट ट्रैक काफी पसंद आ रहा है. पिछले दो हफ्ते से टीआरपी लिस्ट में इस शो का दबदबा देखने को मिल रहा है. शो में लम्बा लीप आने के बाद कहानी में दिलचस्प मोड़ आ चुका है.

शो में आपने देखा कि अनीषा का कनेक्शन कायरव से है. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

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शो का नया प्रोमो सामने आया है. जिसमें अक्षरा अपने प्यार अभिमन्यु पर शक करती हुई नजर आ रही है. शो में दिखाया जा रहा है कि अभिमन्यु के साथ अनीषा की नजदीकियां बढ़ रही है. अक्षरा कुछ भी नहीं समझ पा रही है, आखिर उसके साथ क्या हो रहा है.

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इस प्रोमो में आप देख सकते हैं कि अक्षरा अभिमन्यु से सवाल करेगी. वह अक्षरा के हर सवाल का जवाब देगा और इस बात का भी खुलासा करेगा कि अनीषा क्या चाहती है?

 

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शो में आपने देखा था कि कायरव और अनीषा एक-दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन अपने घर के हालात देखकर ही कायरव ने अनीषा के साथ अपने सारे रिश्ते-नाते तोड़ दिये थे. प्रोमो देखकर ये कहा जा सकता है कि कायरव और अनीषा के रिश्ते के कारण अक्षरा-अभिमन्यु के बीच सब कुछ बदल भी सकता है.

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पति हर्ष लिम्बाचिया के कारण फूट-फूट कर रोईं भारती सिंह, देखें Video

टीवी की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) अपने कॉमेडी अंदाज से फैंस के दिलों पर राज करती है. भारती सिंह अपने फैंस को खुश करने के लिए शानदार कॉमेडी करती है. भारती अपने पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में छायी रहती है. वह अक्सर अपने पति के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करती रहती हैं. अब भारती का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह अपने पति के कारण रोती हुई दिखाई दे रही हैं. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला.

भारती सिंह जल्द ही मां बनने वाली हैं. इन दिनों वह पति के साथ हुनरबाज को होस्ट कर रही हैं. शो से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है. जिसमें कॉमेडियन भारती सिंह फूट-फूट कर रोती नजर आईं. उनके रोने का हर्ष लिम्बाचिया थे. दरअसल फील क्रू ने भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया की लव स्टोरी को दर्शाते हुए परफॉर्मेंस दी थी. इसमें उन्होंने न केवल भारती सिंह के संघर्षों के बारे में बताया.

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फ्रील क्रू ने डांस के जरिए ये भी बताया कि भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया की दोस्ती कैसे प्यार में बदल गई थी और एक दिन हर्ष ने उन्हें प्रपोज तक कर दिया था. परफॉर्मेंस के दौरान, हर्ष से एक बार सवाल किया गया था कि उन्होंने मोटी पंजाबी भारती सिंह में ऐसा क्या देखा था जो उसे दिल दे बैठे थे.

 

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इस बात पर हर्ष ने जवाब दिया, ‘दिल’. परफॉर्मेंस देख भारती सिंह फूट-फूटकर रोने लगी. तो वहीं हर्ष भी भावुक नजर आये. आपको बता दें कि हर्ष लिम्बाचिया ने ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ के मंच पर बताया था कि भारती सिंह उनकी पहली और आखिरी गर्लफ्रेंड तो थीं ही, साथ ही उनकी जिंदगी की भी पहली और आखिरी लड़की थीं.

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इधर-उधर: भाग 2

Writer- Rajesh Kumar Ranga

तनु हार मानने वालों में से नहीं थी. बोली, ‘‘और जो आप के मातापिता हमारे घर पर काजू, किशमिश और चायकाफी उड़ा रहे हैं उस का क्या?

‘‘बात तो सही है, हम दिल्ली वाले हैं. मुफ्त का माल पर हाथ साफ करना हमें खूब आता है…’’

अंबर ने हंसते हुए कहा, ‘‘चिंता न करें मैं दोनों के पैसे दे चुका हूं, नारियल वाला छुट्टा करवाने गया है.’’

यह सुन कर तनु भी हंसे बगैर नहीं रह पाई.

अंबर के जूते मिट्टी से सन गए थे. उस ने पौलिश वाले बच्चे से जूते पौलिश करवाए, तब तक नारियल वाला भी आ चुका था.

‘‘आप ने देशविदेश में कहां की सैर की है,’’ तनु ने पूछा.

अंबर के पास जवाबहाजिर था, ‘‘यह पूछिए कहां नहीं गया, नौकरी ही ऐसी है पूरा एशिया और यूरोप का कुछ हिस्सा मेरे पास है… आनाजाना लगा ही रहता है…’’

‘‘क्या फर्क लगता है आप को अपने देश और परदेश में?’’

‘‘इस का क्या जवाब दूं, सभी जानते हैं, हम हिंदुस्तानी कानून तोड़ने में विश्वास करते हैं, नियम न मानना हमारे लिए फख्र की बात है… वहां के तो जानवर भी कायदेकानून की हद से बाहर नहीं जाते.’’

‘‘फिर क्या होगा अपने देश का?’’

‘‘फिलहाल तो यह सोचिए हमारा क्या होगा, आसमान पर बादल छा रहे हैं और मेरे 10 गिनने तक बरसात हमें अपने आगोश में ले लेगी.’’

‘घर तो जाना जरूरी है. मेरी दूसरी शिफ्ट भी है,’ तनु मन ही मन बुदबुदाई और फिर ऊंची आवाज में बोली, ‘‘चलते हैं और अगर भीग भी गए तो मुझे फर्क नहीं पड़ता, मुझे बरसात में भीगना पसंद है.’’

‘‘मुझे भी,’’ अंबर ने मोटरसाइकिल स्टार्ट करते हुए कहा, ‘‘मगर यों भीगने से पहले थोड़ा इंतजार करना अच्छा नहीं रहेगा? चलिए रेस्तरां में 1-1 कप कौफी हो जाए, यह मेरा रोज का सिलसिला है…’’

तनु ने मुसकरा कर हामी भर दी. अगले चंद ही मिनटों में दोनों रेस्तरां में थे. अंबर ने ऊंची आवाज में वेटर को आवाज दी और जल्दी से 2 कप कौफी लाने का और्डर दिया. कौफी खत्म कर के अंबर ने एक बड़ा नोट बतौर टिप वेटर को दिया और दोनों बाहर आ गए. बारिश रुकने के बजाय और तेज हो चुकी थी.

पूरे रास्ते तेज बरसात में भीगते हुए तनु को बहुत आनंद आ रहा था. घर पहुंचतेपहुंचते दोनों पूरी तरह भीग चुके थे. अंबर के मातापिता मानो उन का इंतजार ही कर रहे थे, उन के आते ही औपचारिक बातचीत कर के सभी वहां से चल पड़े.

‘‘कैसा लगा लड़का?’’ भाभी ने उतावलेपन से पूछा तो तनु ने भी स्पष्ट कर दिया, ‘‘भाभी दूसरे लड़के को मना ही कर दो, कह दो मेरी तबीयत ठीक नहीं है. मुझे अंबर पसंद है…’’

‘‘तनु, अब अगर वे आ ही रहे हैं तो आने दो. कुछ समय गुजार कर उन्हें रुखसत कर देना… कम से कम हमारी बात रह जाएगी.’’

‘‘लेकिन भाभी जब मुझे अंबर पसंद है, तो इस स्वयंवर की क्या जरूरत है?’’

ठीक 4 बजे एक लंबीचौड़ी गाड़ी आ कर रुकी. गाड़ी में से एक संभ्रांत उम्रदराज जोड़ा और एक नवयुवक उतरा. पूरे परिवार ने बड़े ही सम्मान से उन का स्वागत किया.

तनु ने एक नजर लड़के पर डाली और उस के मुंह से अनायास ही निकल गया, ‘‘आप सूटबूट में तो ऐसे आए हैं मानो किसी इंटरव्यू में आए हो.’’

जयनाथजी ने इशारे से तनु को हद में रहने को कहा.

जवाब में युवक ने एक ठहाका लगाया और फिर बिना ?िझके कहा, ‘‘आप सही कह रही हैं. एक तरह से मैं एक इंटरव्यू से दूसरे इंटरव्यू में आया हूं… दरअसल, हम यहां के कामा होटल को खरीदने का मन बना रहे हैं. अभी उन के निदेशकों से मीटिंग थी, जो किसी इंटरव्यू से कम नहीं थी और यह भी किसी इंटरव्यू से कम नहीं है…’’

तनु इधरउधर की औपचारिक बातें करने के बाद मुद्दे पर आ गई. बोली, ‘‘अगर आप लोग इजाजत दें तो मैं और आकाश थोड़ा समय घर से बाहर…’’

‘‘हां जरूर,’’ लगभग सब ने एकसाथ ही कहा.

आकाश ने ड्राइवर से चाबी ली और तनु के लिए गाड़ी का दरवाजा खोल कर बैठने का आग्रह किया. तनु की फरमाइश पर गाड़ी ने एक बार फिर गेटवे औफ इंडिया का रुख किया.

‘‘यहां से एक शौर्टकट है. आप चाहें तो मुड़ सकते हैं 15-20 मिनट बच जाएंगे.’’

‘‘तनुजी आप भूल रही हैं कि इधर नो ऐंट्री है,’’ आकाश ने कहा. फिर मानो उसे कुछ याद आया, ‘‘अगर आप बुरा न मानें तो मैं रास्ते में सिर्फ 10 मिनट के लिए होटल कामा में रुक जाऊं… वहां के निर्देशकों का मैसेज आया है. वे मुझ से मिलना चाहते हैं.’’

तनु ने अनमने मन से हां कर दी. आकाश ने तनु को कौफी शौप में बैठ कर वेटर को आवाज दे कर कौफी और चिप्स का और्डर दिया और स्वयं पुन: माफी मांग कर बोर्डरूम की तरफ चला गया.

10 मिनट के बाद जब आकाश आया तो उस के चेहरे पर खुशी और विजय के भाव थे, ‘‘मेरा पहला इंटरव्यू कामयाब हुआ. यहां की डील फाइनल हो गई है… तनुजी आप हमारे लिए शुभ साबित हुईं…’’

आकाश ने वेटर को बिल लाने को कहा तो मैनेजर ने बिल लाने से इनकार कर दिया, ‘‘यह हमारी तरफ से.’’

‘‘नहीं मैनेजर साहब, अभी हम इस होटल के मालिक नहीं बने हैं और बन भी जाएं तो भी मैं नहीं चाहूंगा कि हमें या किसी और को कुछ भी मुफ्त में दिया जाए. मेरा मानना है कि मुफ्त में सिर्फ खैरात बांटी जाती है और खैरात इंसान की अगली नस्ल तक को बरबाद करने के लिए काफी होती है.’’

होटल के बाहर निकल कर आकाश ने तनु की ओर नजर डाली और कहा,

‘‘बहुत दिनों से लोकल में सफर करने की इच्छा थी, आज छुट्टी का दिन है भीड़भाड़ भी कम होगी. क्यों न हम यहां से लोकल ट्रेन में चलें फिर वहां से टैक्सी.’’

तनु ने अविश्वास से आकाश की ओर देखा और फिर दोनों स्टेशन की तरफ चल पड़े.

‘‘आप तो अकसर विदेश जाते रहते होंगे. क्या फर्क लगता है हमारे देश में और विदेशों में?’’

‘‘सच कहूं तो लंदन स्कूल औफ इकौनोमिक्स से डिगरी लेने के बाद मैं विदेश बहुत कम गया हूं. आजकल के जमाने में इंटरनैट पर सबकुछ मिल जाता है और जहां तक घूमने की बात है यूरोप की छोटीमोटी भुतहा इमारतें जिन्हें वे कैशल कहते हैं और किले मुझे ज्यादा भव्य लगते हैं… स्विटजरलैंड से कहीं अच्छा हमारा कश्मीर है, सिक्किम है, अरुणाचल है, बस जरूरत है सफाई की, सुविधाओं की और ईमानदारी की…’’

‘‘जो हमारे यहां नहीं है… है न?’’ तनु ने प्रश्न किया.

‘‘आप इनकार नहीं कर सकतीं कि बदलाव आया है और अच्छी रफ्तार से आया है. जागरूकता बढ़ी है, देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है, हमारे पासपोर्ट की इज्जत होनी शुरू हो गई है. आज का भारत कल के भारत से कहीं अच्छा है और कल का भारत आज के भारत से लाख गुना अच्छा होगा.’’

‘‘आप तो नेताओं जैसी बातें करने लगे आकाशजी,’’ तनु को उस की बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी.

गेटवे के किनारे तनु ने फिर नारियल पानी पीने की इच्छा जाहिर कर दी. दोनों ने नारियल पानी पीया.

सही कहा गया है कि इंसान के हालात का और मुंबई की बरसात का कोई भरोसा नहीं. एक बार फिर बादलों ने पूरे माहौल को अपने आगोश में ले कर लिया और चारों ओर रात जैसा अंधेरा छा गया. अगले ही पल मोटीमोटी बूंदों ने दोनों को भिगोना शुरू कर दिया. दोनों भाग कर पास की एक छप्परनुमा दुकान में घुस कर गरमगरम भुट्टे खाने लगे.

प्यार नहीं पागलपन- भाग 3: लावण्य से मुलाकात के बाद अशोक के साथ क्या हुआ?

वे बचपन से ही कहती थीं, ‘मैं किसी सैनिक से ही शादी करूंगी.’ अशोक, मेरे डैडी सिर्फ इसीलिए सेना में गए थे, जिस से वे विद्या यानी मेरी मम्मी से शादी कर सकें. वे मेरी मम्मी के सपनों का राजकुमार बन कर उन की जिंदगी में वापस आए थे. सैकंड लैफ्टिनैंट का कमीशन ले कर आने पर मेरी मम्मी को उन पर गर्व हुआ था. यूनिफौर्म का गर्व मेरे डैडी को था तो डैडी पर मेरी मम्मी को गर्व था.

‘‘कभीकभी तो उन दोनों के प्यार को देख कर मु  झे ही ईर्ष्या होने लगती थी. मम्मी जैसी खूबसूरत स्त्री मैं ने आज तक नहीं देखी है,’’ लावण्य बोली.

अशोक भी कहना चाहता था कि उस जैसी सुंदर, लावण्यमयी स्त्री उस ने भी नहीं देखी परंतु कह नहीं सका. तभी लावण्य ने अपनी बगल वाली कुरसी पर रखा अपना पर्स उठाया और उस में से पोस्टकार्ड साइज का एक फोटो निकाल कर अशोक के हाथ में रख दिया. अशोक ने किसी पत्रिका की कवरगर्ल जितनी सुंदर उस तसवीर को देखा. वह जिस भी औरत की तसवीर थी, सचमुच वह बहुत सुंदर थी. लावण्य की बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं थी.

‘‘इस तसवीर से भी अधिक वह सुंदर थीं. यस, मोर ब्यूटीफुल दैन दिस पिक्चर. मेरे डैडी, बस, उन्हें प्रेम करते थे, अनर्गल प्रेम, नितांत अतिशयोक्तिभरा प्रेम,’’ इतना कह कर लावण्य शांत हो गई.

अशोक उस दिन लावण्य के साथ काफी देर तक बैठा रहा. दोनों ने साथसाथ खाना भी खाया. दोदो कप चाय भी पी ली थी. दोनों अलग हुए तो उस पर दुख की छाया थी, पर उस दुख में एक नया तत्त्व मिला था, अपनत्व का. अब उन्हें एकदूसरे से कहने की जरूरत नहीं थी कि वे एकदूसरे को प्यार करते हैं.

अशोक और लावण्य की दोस्ती प्रेम में बदल गई थी. अशोक ने लावण्य का परिचय अपने घर वालों से करा दिया था. अशोक के पिता शहर के जानेमाने डाक्टर थे. अशोक घर में सब से छोटा था. बड़ा भाई पिता की तरह डाक्टर हो गया था. बड़ी बहन भी गायनीकोलौजिस्ट थी और डाक्टर से शादी की थी. बड़े भाई और भाभी ने अपना अस्पताल बना लिया था. अशोक अपनी मां के साथ रहता था. लेकिन हर रविवार को निश्चितरूप से पूरा परिवार इकट्ठा होता था और दोनों समय का खाना एकसाथ खाता था.

लावण्य अशोक का परिवार देख कर बहुत खुश हुई थी. अशोक के घर वाले सम  झ गए थे कि उस ने लावण्य को उन से क्यों मिलवाया है. वह अशोक की जिंदगी का सब से खुशी का दिन था.

उस दिन अशोक लावण्य को उस के घर पहुंचाने गया था. जैसे ही लावण्य और अशोक घर में दाखिल हुए, जया आंटी रसोई से भागती हुई आईं, ‘‘लावण्य, साहब अभी तक नहीं आए हैं.’’

‘‘कहां गए हैं?’’

‘‘रणजीत मामा के यहां गए थे. उन का फोन था. तुम जा कर उन्हें ले आओ बेटा.’’

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‘‘कब गए थे?’’

‘‘4 घंटे हो गए हैं. उन्होंने खाना भी नहीं खाया है.’’

‘‘ओके आंटी, आप चिंता मत कीजिए,’’ लावण्य ने कहा, ‘‘मैं अभी देखती हूं.’’

‘‘मैं भी तुम्हारे साथ चलूं?’’ जया ने पूछा.

‘‘नहीं, मैं पहले फोन पर बात कर लेती हूं,’’ कह कर लावण्य ने फोन लगाया. फोन उस की मामी ने उठाया. थोड़ी देर बाद फोन पर मेजर विवेक आए.

लावण्य बोली, ‘‘हैलो डैडी.’’

‘‘लावण्य?’’ उस के डैडी ने पूछा.

‘‘मैं कितनी देर से आप का इंतजार कर रही हूं,’’ लावण्य ने कहा.

‘‘अरे भई, मैं तुम्हारी मम्मी को लिए बगैर कैसे आ जाऊं. वे डौली को ले कर बाहर गई हैं. अभी तक लौटी नहीं हैं,’’ मेजर ने कहा, ‘‘वे वहां तो नहीं चली गई हैं?’’

‘‘नहीं डैडी, डौली को तो वे नोएडा में ही छोड़ आई हैं,’’ लावण्य बोली.

‘‘पर, उन्हें वहां पहुंच कर मु  झे फोन तो करना चाहिए था,’’ वे बोले.

‘‘डैडी, अब आप तुरंत यहां आ जाइए.’’

‘‘तुम अपनी मम्मी को फोन दो.’’

‘‘डैडी, वे आप से नाराज हैं. वे फोन पर नहीं आएंगी.’’

‘‘तुम उस से कह दो कि वह फोन पर नहीं आएगी तो मैं उस से बात नहीं करूंगा.’’

‘‘यह आप ही आ कर कह दीजिएगा. मैं आप लोगों के बीच में क्यों पड़ूं,’’ लावण्य ने कहा और फोन रख दिया.

अशोक चुप खड़ा आश्चर्य से उन की बातें सुन रहा था. लावण्य ने एक लंबी सांस ले कर कहा, ‘‘क्या करूं, डैडी का. उन का यह रवैया धीरेधीरे बढ़ता ही जा रहा है. आजकल वे जहां भी जाते हैं, ऐसा ही करते हैं. कल डाक्टर संजय के अस्पताल पहुंच गए थे. मम्मी को वहां आईसीयू में रखा गया था. वे वहां से आ ही नहीं रहे थे. मैं जा कर उन्हें किसी तरह घर लाई थी. यह तो अच्छा है कि डाक्टर संजय उन के पुराने दोस्त हैं. मैं यह सब करते अब थक गई हूं.’’

अशोक ने लावण्य के सिर पर हाथ रख कर कहा, ‘‘रिलैक्स डियर.’’

अशोक ने लावण्य को सांत्वना देने का प्रयास किया. 15 मिनट बाद मेजर विवेक घर आ गए. घर में घुसते ही वे बोले, ‘‘अरे अशोक, तुम?’’

‘‘आप से मिलने के लिए कब से बैठा हूं सर,’’ अशोक ने कहा.

‘‘अच्छा,’’ उन्होंने मुसकराते हुए कहा, ‘‘आओ, आओ, आज सुबह से ही मैं तुम्हारे बारे में सोच रहा था. रणजीत को तो तुम जानते हो न?’’

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‘‘जी सर, मामा, आई मीन, लावण्य

के मामा.’’

‘‘आप का खाना लगाऊं डैडी?’’ लावण्य बीच में बोली.

‘‘खाना?’’ उन्होंने घड़ी देख कर कहा, ‘‘ओह, पौने 9 बज गए हैं. यस, अब तो खाना खा ही लेना चाहिए. अशोक, तुम भी खा लो.’’

‘‘नहीं सर, मैं अभीअभी घर से खा कर, आई मीन नाश्ता कर के आया हूं.’’

‘‘आज मैं अशोक के घर गई थी डैडी.’’

‘‘अरे वाह तो मु  झे भी अपने साथ ले चलना था.’’

‘‘सर, आप जब कहें तब आप को अपने घर ले चलूं,’’ अशोक ने कहा. तब तक जया और एक नौकर ने खाना ला कर   झट से लगा दिया.

‘‘आप हाथ धो लीजिए डैडी,’’ लावण्य बोली. मेजर मुसकराते हुए बाथरूम की ओर बढ़े.

‘‘अशोक, अकसर ऐसा ही होता है. अच्छा हुआ कि तुम घर में थे. तुम्हें देख कर वे मम्मी को भूल गए. उन के खाने तक तो तुम रुकोगे न, अशोक?’’

‘‘क्यों नहीं?’’ अशोक ने कहा तो लावण्य जया आंटी की मदद करने चली गई.

‘‘कम औन यंगमैन,’’ मेजर ने कहा. फिर सब लोग टेबल पर बैठ गए. जया खाना परोसने लगी, तभी मेजर ने कहा, ‘‘जया, गुलाबजामुन खत्म हो गए क्या?’’

‘‘हैं न सर.’’

‘‘तो फिर लाओ न.’’

जया ने गुलाबजामुन का कटोरा ला कर रखा तो मेजर साहब ने उसे अशोक की ओर खिसका दिया.

‘‘अशोक, आज मैं एक गंभीर चिंता

में था.’’

‘‘कैसी चिंता सर?’’

‘‘लावण्य को ले कर, तुम्हें तो पता है?’’ उन्होंने हंस कर कहा.

‘‘मैं सम  झा नहीं सर?’’

‘‘आज रणजीत मिलने आया था.’’

‘‘रणजीत मामा?’’ लावण्य ने पूछा, ‘‘कब?’’

‘‘सवेरे, यू नो, जानती हो किसलिए आए थे?’’

‘‘नहीं डैडी.’’

‘‘तुम बड़ी चालाक हो गई हो लावण्य. अभी तक तो तुम मु  झ से सारी बातें बता देती थीं, परंतु अब कुछ नहीं बताती हो.’’

‘‘डैडी, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं ने कभी आप से कोई बात नहीं छिपायी है.’’

‘‘छिपाई है न,’’ मेजर ने हंसते हुए अशोक की ओर देख कर कहा, ‘‘अशोक छिपाई है कि नहीं, तुम्हारा क्या कहना है?’’

‘‘सर, मैं क्या कहूं? मु  झे पता ही नहीं कि इस ने कौन सी बात छिपाई है. लेकिन, मैं ने आप से जरूर एक बात छिपाई है,’’ अशोक ने कहा.

‘‘एट लीस्ट, भई तुम ईमानदार आदमी हो. आई लाइक दैट,’’ मेजर विवेक ने कहा, ‘‘अब बोलो, कौन सी बात छिपाई है.’’

‘‘आप नाराज तो नहीं होंगे?’’

‘‘बिलकुल नहीं.’’

‘‘प्रौमिस सर. ए सोल्जर्स प्रौमिस…’’ अशोक ने कहा.

‘‘यस, ए सोल्जर्स प्रौमिस,’’ मेजर

ने कहा.

अधूरी रह गई फैशन ब्लॉगर की मोहब्बत- भाग 3

इस घटना के बाद पुलिस के कब्जे में रितिका की लाश, लिवइन पार्टनर विपुल अग्रवाल और हत्यारोपी पति आकाश गौतम के साथ घटना में शामिल दोनों महिलाएं कुसुमा व काजल थीं. यानी साजिश और घटना का हर सिरा और किरदार बड़ी आसानी से पुलिस के हत्थे लग चुका था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिलीं टूटी हड्डियां

दूसरे दिन शनिवार को रितिका के शव का पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम डाक्टरों के एक पैनल ने किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में  रितिका के सिर, हाथपैर की हड्डियों के साथ ही पसलियां टूटी हुई थीं. उस के पेट में खून भर गया था. सिर में गहरा घाव होने से खून ज्यादा बहा था, इन सभी कारणों से उस की मौत हुई थी.

मृतका के पिता सुरेंद्र व मां मंजू ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों का बचाव कर रही है. अपार्टमेंट के बाहर खड़ी मिली बाइक से ही हत्यारोपी आकाश गौतम फ्लैट में आया था. वह बाइक से भागता, इस से पहले ही पकड़ा गया.

जब वह घर से घटना को अंजाम देने आ रहा था तो इसी नंबर की बाइक पर सवार था जिस की फुटेज पुलिस को उपलब्ध करा दी गई है. लेकिन पुलिस ने बाइक को थाने की जीडी में लावारिस में दिखाया है.

रितिका सिंह ने अपने पति आकाश गौतम के साथ ही लिवइन में रह रहे विपुल के सालों व पत्नी दीपाली से अपनी जान को खतरा बताया था. उस ने 12 मार्च, 2022 को इस संबंध में थाना टूंडला में अनिल धर, सत्यम धर, दीपाली निवासी मोहल्ला चाऊ, सब्जीमंडी, फिरोजाबाद तथा पति आकाश गौतम व 2 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इस संबंध में 23 मार्च को पुलिस ने मजिस्ट्रैट के समक्ष रितिका के बयान भी कराए थे.

इस के बाद 25 मार्च को नामजद लोगों ने मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाते हुए जान से मारने या मरवाने की धमकी दी थी. इस पर रितिका ने 28 मार्च को एसएसपी फिरोजाबाद को एक शिकायतीपत्र दिया, जिस में धमकी से भयभीत होने तथा भविष्य में उस के साथ कोई अप्रिय घटना होने पर इसी शिकायती पत्र को अंतिम बयान माने जाने की बात भी कही थी.

रितिका के मातापिता का आरोप है कि पुलिस ने उस के पत्र पर कोई काररवाई नहीं की. मां मंजू ने कहा कि सरकार बेटियों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा रही है. इस के बावजूद उन की बेटी की घर में हत्या कर दी गई. यदि पुलिस समय रहते कदम उठाती तो उन की बेटी जिंदा होती.

रितिका का इमोशनल लेटर

रितिका की मां मंजू का कहना है कि आकाश के टौर्चर से बेटी बहुत परेशान थी. घर वालों ने उस का एक लेटर जारी किया है. लेटर रोमन लिपि में था, हालांकि उस की भाषा हिंदी है. इस पर 10 जून, 2021 की तारीख लिखी थी. पत्र में लिखा था—

‘बचपन से अब तक बहुत दुख, संघर्ष देखे हैं. पर जब बड़ी हुई तो दुखों ने हर तरफ से घेर लिया. हमेशा दूसरों के चेहरे पर मुसकान लाने की कोशिश की. शायद किस्मत में इतने दुख लिख कर लाई थी कि बस सब ने इस बात का फायदा उठा कर बहुत सताया.

‘पहले आकाश ने, जो अभी तक मेरी फैमिली को परेशान कर रहा है. मेरी झूठी फोटो बना कर हर जगह झूठे आरोप लगा कर मुझे बदनाम कर रहा है और वो औरत दीपाली उस ने तो मुझे, मेरी फैमिली को इतना परेशान किया है कि नरक में भी उसे जगह नहीं मिलेगी.’

बताते चलें कि दीपाली लिवइन में रह रहे दोस्त विपुल अग्रवाल की पत्नी है.

सीओ (सदर) अर्चना सिंह के अनुसार पुलिस ने अपार्टमेंट के इस फ्लैट पर ताला लगा दिया है. अभी और सुबूत जुटाए जाएंगे. रितिका द्वारा की गई शिकायत की भी जांच की जाएगी. गिरफ्तार हत्यारोपी पति आकाश गौतम व दोनों महिलाओं कुसुमा व काजल को जेल भेज दिया गया है.

लिवइन पार्टनर विपुल अग्रवाल के खिलाफ पुलिस को कोई सबूत न मिलने पर उसे छोड़ दिया गया.

पति को पत्नी का गैरपुरुष के साथ संबंध नागवार गुजरता है. पत्नी की बेवफाई यदि साबित हो जाती है तो इस मजबूत आधार पर पुरुष को पत्नी से तलाक मिल सकता है. कुछ इसी तरह की सोच को ले कर आकाश ने योजना बनाई थी.

लेकिन असली योजना उस के मन में कुछ और ही थी इस की भनक तक उस ने योजना में शामिल अपने सहयोगियों तक को भी नहीं लगने दी थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

वजूद से परिचय: भैरवी के बदले रूप से क्यों हैरान था ऋषभ?

Writer- Padma Aggarwal

‘‘मम्मी… मम्मी, भूमि ने मेरी गुडि़या तोड़ दी,’’ मुझे नींद आ गई थी. भैरवी की आवाज से मेरी नींद टूटी तो मैं दौड़ती हुई बच्चों के कमरे में पहुंची. भैरवी जोरजोर से रो रही थी. टूटी हुई गुडि़या एक तरफ पड़ी थी.

मैं भैरवी को गोद में उठा कर चुप कराने लगी तो मुझे देखते ही भूमि चीखने लगी, ‘‘हां, यह बहुत अच्छी है, खूब प्यार कीजिए इस से. मैं ही खराब हूं… मैं ही लड़ाई करती हूं… मैं अब इस के सारे खिलौने तोड़ दूंगी.’’

भूमि और भैरवी मेरी जुड़वां बेटियां हैं. यह इन की रोज की कहानी है. वैसे दोनों में प्यार भी बहुत है. दोनों एकदूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकतीं.

मेरे पति ऋषभ आदर्श बेटे हैं. उन की मां ही उन की सब कुछ हैं. पति और पिता तो वे बाद में हैं. वैसे ऋषभ मुझे और बेटियों को बहुत प्यार करते हैं, परंतु तभी तक जब तक उन की मां प्रसन्न रहें. यदि उन के चेहरे पर एक पल को भी उदासी छा जाए तो ऋषभ क्रोधित हो उठते, तब मेरी और मेरी बेटियों की आफत हो जाती.

शादी के कुछ दिन बाद की बात है. मांजी कहीं गई हुई थीं. ऋषभ औफिस गए थे. घर में मैं अकेली थी. मांजी और ऋषभ को सरप्राइज देने के लिए मैं ने कई तरह का खाना बनाया.

परंतु यह क्या. मांजी ऋषभ के साथ घर पहुंच कर सीधे रसोई में जा घुसीं और फिर

जोर से चिल्लाईं, ‘‘ये सब बनाने को किस ने कहा था?’’

मैं खुशीखुशी बोली, ‘‘मैं ने अपने मन से बनाया है.’’

वे बड़बड़ाती हुई अपने कमरे में चली गईं और दरवाजा बंद कर लिया. ऋषभ भी चुपचाप ड्राइंगरूम में सोफे पर लेट गए. मेरी खुशी काफूर हो चुकी थी.

ऋषभ क्रोधित स्वर में बोले, ‘‘तुम ने अपने मन से खाना क्यों बनाया?’’

मैं गुस्से में बोली, ‘‘क्यों, क्या यह मेरा घर नहीं है? क्या मैं अपनी इच्छा से खाना भी नहीं बना सकती?’’

मेरी बात सुन कर ऋषभ जोर से चिल्लाए, ‘‘नहीं, यदि तुम्हें इस घर में रहना है तो मां की इच्छानुसार चलना होगा. यहां तुम्हारी मरजी नहीं चलेगी. तुम्हें मां से माफी मांगनी होगी.’’

मैं रो पड़ी. मैं गुस्से से उबल रही थी कि सब छोड़छाड़ अपनी मां के पास चली जाऊं. लेकिन मम्मीपापा का उदास चेहरा आंखों के सामने आते ही मैं मां के पास जा कर बोली, ‘‘मांजी, माफ कर दीजिए. आगे से कुछ भी अपने मन से नहीं करूंगी.’’

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मैं ने मांजी के साथ समझौता कर लिया था. सभी कार्यों में उन का ही निर्णय सर्वोपरि रहता. मुझे कभीकभी बहुत गुस्सा आता मगर घर में शांति बनी रहे, इसलिए खून का घूंट पी जाती.

सब सुचारु रूप से चल रहा था कि अचानक हम सब के जीवन में एक तूफान आ गया. एक दिन मैं औफिस में चक्कर खा कर गिर गई और फिर बेहोश हो गई. डाक्टर को बुलाया गया, तो उन्होंने चैकअप कर बताया कि मैं मां बनने वाली हूं.

सभी मुझे बधाई देने लगे, मगर ऋषभ और मैं दोनों परेशान हो गए कि अब क्या किया जाए.

तभी मांजी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे बेटा नहीं था उसी कमी को पूरा करने के लिए यह अवसर आया है.’’

मां खुशी से नहीं समा रही थीं. वे अपने पोते के स्वागत की तैयारी में जुट गई थीं.

अब मां मुझे नियमित चैकअप के लिए डाक्टर के पास ले जातीं.

चौथे महीने मुझे कुछ परेशानी हुई तो डाक्टर के मुंह से अल्ट्रासाउंड करते समय अचानक निकल गया कि बेटी तो पूरी तरह ठीक है औैर मां को भी कुछ नहीं है.

मांजी ने यह बात सुन ली. फिर क्या था. घर आते ही फरमान जारी कर दिया कि दफ्तर से छुट्टी ले लो और डाक्टर के पास जा कर गर्भपात कर लो. मांजी का पोता पाने का सपना जो टूट गया था.

मैं ने ऋषभ को समझाने का प्रयास किया, परंतु वे गर्भपात के लिए डाक्टर के पास जाने की जिद पकड़ ली. आखिर वे मुझे डाक्टर के पास ले ही गए.

डाक्टर बोलीं, ‘‘आप लोगों ने आने में बहुत देर कर दी है. अब मैं गर्भपात की सलाह नहीं दे सकती.’’

अब मांजी का व्यवहार मेरे प्रति बदल गया. व्यंग्यबाणों से मेरा स्वागत होता. एक दिन बोलीं, ‘‘बेटियों की मां तो एक तरह से बांझ ही होती हैं, क्योंकि बेटे से वंश आगे चलता है.’’

अब घर में हर समय तनाव रहता. मैं भी बेवजह बेटियों को डांट देतीं. ऋषभ मांजी की हां में हां मिलाते. मुझ से ऐसा व्यवहार करते जैसे इस सब के लिए मैं दोषी हूं. वे बातबात पर चीखतेचिल्लाते, जिस से मैं परेशान रहती.

एक दिन मांजी किसी अशिक्षित दाई को ले कर आईं और फिर मुझ से बोलीं, ‘‘तुम औफिस से 2-3 की छुट्टी ले लो… यह बहुत ऐक्सपर्ट है. इस का रोज का यही काम है.

यह बहुत जल्दी तुम्हें इस बेटी से छुटकारा दिला देगी.’’

सुन कर मैं सन्न रह गई. अब मुझे अपने जीवन पर खतरा साफ दिख रहा था. मैं ऋषभ के आने का इंतजार करने लगीं. वे औफिस से आए तो मैं ने उन्हें सारी बात बताई.

ऋषभ एक बार को थोड़े गंभीर तो हुए, लेकिन फिर धीरे से बोले, ‘‘मांजी नाराज हो जाएंगी, इसलिए उन का कहना तो मानना ही पड़ेगा.’’

मुझे कायर ऋषभ से घृणा होने लगी. अपने दब्बूपन पर भी गुस्सा आने लगा कि क्यों मैं मुखर हो कर अपने पक्ष को नहीं रखती. मैं क्रोध से थरथर कांप रही थी. बिस्तर पर लेटी तो नींद आंखों से कोसों दूर थी.

ऋषभ बोले, ‘‘क्या बात है? बहुत परेशान दिख रही हो? सो जाओ… डरने की जरूरत नहीं है. सबेरे सब ठीक हो जाएगा.’’

मैं मन ही मन सोचने लगी कि ऋषभ इतने डरपोक क्यों हैं? मांजी का फैसला क्या मेरे जीवन से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? मेरा मन मुझे प्रताडि़त कर रहा था. मुझे अपने चारों ओर उस मासूम का करुण क्रंदन सुनाई पड़ रहा था. मेरा दिमाग फटा जा रहा था… मुझे हत्यारी होने का बोध हो रहा था. ‘बहुत हुआ, बस अब नहीं,’ सोच मैं विरोध करने के लिए मचल उठी. मैं चीत्कार कर उठी कि नहीं मेरी बच्ची, अब तुम्हें मुझ से कोई नहीं दूर कर सकता. तुम इस दुनिया में अवश्य आओगी…

मैं ने निडर हो कर निर्णय ले लिया था. यह मेरे वजूद की जीत थी. अपनी जीत पर मैं स्वत: इतरा उठी. मैं निश्चिंत हो गई और प्रसन्न हो कर गहरी नींद में सो गई.

सुबह ऋषभ ने आवाज दी, ‘‘उठो, मांजी आवाज दे रही हैं. कोई दाई आई है… तुम्हें बुला रही हैं.’’

मेरे रात के निर्णय ने मुझे निडर बना दिया था. अत: मैं ने उत्तर दिया, ‘‘मुझे सोने दीजिए… आज बहुत दिनों के बाद चैन की नींद आई है. मांजी से कह दीजिए कि मुझे किसी दाईवाई से नहीं मिलना.’’

मांजी तब तक खुद मेरे कमरे में आ चुकी थीं. वे और ऋषभ दोनों ही मेरे धृष्टता पर हैरान थे. मेरे स्वर की दृढ़ता देख कर दोनों की बोलती बंद हो गई थी. मैं आंखें बंद कर उन के अगले हमले का इंतजार कर रही थी. लेकिन यह क्या? दोनों खुसुरफुसुर करते हुए कमरे से बाहर जा चुके थे.

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भैरवी और भूमि मुझे सोया देख कर मेरे पास आ गई थीं. मैं ने दोनों को अपने से लिपटा कर खूब प्यार किया. दोनों की मासूम हंसी मेरे दिल को छू रही थी. मैं खुश थी. मेरे मन से डर हवा हो चुका था. हम तीनों खुल कर हंस रहे थे.

ऋषभ को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि रात भर में इसे क्या हो गया. अब मेरे मन में न तो मांजी का खौफ था न ऋषभ का और न ही घर टूटने की परवाह थी. मैं हर परिस्थिति से लड़ने के लिए तैयार थी.

यह मेरे स्वत्व की विजय थी, जिस ने मुझे मेरे वजूद से मेरा परिचय कराया था.

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