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पौरुष की कमी से जूझ रही है युवा पीढ़ी

आजकल शादीशुदा जोड़ों में दूरीयां बढ़ रही है. हर दस में से तीन कपल की यही आपबीती है.  पत्नी समझ ही नहीं पाती कि उसका पति उससे बेरुखी क्यों दिखा रहा है? वह उससे कटा-कटा सा क्यों रहने लगा है? वे यह शक भी पाल बैठती हैं कि हो सकता है इनका कोई एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा है. यह सोच पत्नियों को और ज्यादा तनाव से भर देती है. कुछ पत्नियां सोचती हैं कि शायद उनका रंग-रूप पहले की तरह मोहक नहीं रह गया. वे सजती-संवरती हैं कि पति को लुभा सकें. तरह-तरह के व्यंजन बनाती हैं कि पति का प्यार पा सकें, मगर पति का दिल फिर भी नहीं पसीजता.

दरअसल पत्नी के प्रति पति की बेरुखी का कारण हमेशा वह नहीं होता जो पत्नियां सोच-सोच कर परेशान होती रहती हैं, बल्कि प्रौब्लम कुछ और है. पति की बेरुखी का कारण उन में पुरुष हार्मोन की कमी हो सकती है, जिसके चलते पति शारीरिक सम्बन्धों से दूरी बनाने लगते हैं क्योंकि उन्हें यह डर होता है कि बिस्तर पर वह पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाएंगे. उन पर नामर्दगी का आरोप लगेगा. वह पत्नी की नजर में गिर जाएंगे. अगर पत्नी को पता चल गया कि वे उसको संतुष्ट करने में अक्षम हैं तो वह किसी दूसरे पुरुष का साथ ढूंढेगी और चोरी-छिपे अपनी शारीरिक जरूरत पूरी करने लगेगी. यह तमाम डर पुरुष मन पर हावी हो जाते हैं और वह खामोशी ओढ़ कर पत्नी से दूरी बना लेता है और पत्नी को उसकी उधेड़बुन में फंसे रहने देता है. अब पत्नी से कैसे कहे कि वे उसको बिस्तर पर संतुष्टि देने लायक नहीं रहा. जीवनसाथी को अपनी कमी को न बता पाने की विवशता अपराधबोध भी पैदा करती है, मगर फिर भी आशंका और बदनामी के भय से मुंह सिल कर पड़े रहते हैं और दाम्पत्य में दूरियां और गलतफहमियां पैदा होने देते हैं.

पति द्वारा अपनी शारीरिक समस्या पर खामोशी ओढ़े रहना दम्पत्तियों के बीच न सिर्फ दूरी बढ़ा रहा है, बल्कि कहीं-कहीं तो नौबत तलाक तक जा पहुंची है. पौरुष की कमी की वजह से पुरुष न सिर्फ सेक्स से दूर हो रहे हैं, बल्कि नामर्दगी के डर से उत्पन्न तनाव के कारण अन्य कई प्रकार की बीमारियां भी उनमें पनप रही हैं. हाल ही में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल की एक रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि साठ फीसदी मर्द जवानी में ही अपनी मर्दानगी खोने की कगार पर हैं. देश में 40 साल की उम्र तक पहुंचने वाला हर तीसरा पुरुष सेक्शुअल हॉर्मोन की कमी से जूझ रहा है यानी हर तीसरा व्यक्ति टेस्टोस्टेरोन डिफिसिएंसी सिंड्रोम (टीडीएस) से पीड़ित है. अस्पताल ने 745 लोगों पर किये शोध में इस बात के खुलासे से मेडिकल जगत में काफी हलचल मची हुई है.

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डौक्टरों का मानना है कि यह परेशानी लगातार बढ़ रही है. अस्पताल ने टीडीएस का पता लगाने के लिए पहले बिना जांच किये सिर्फ लक्षण के आधार पर इसका पता लगाया. इसके लिए शोध में शामिल युवाओं से 10 सवाल पूछे गये. डाक्टर ने बताया कि सेक्स के प्रति रुचि यानी कामेच्छा, क्षमता यानी स्टैमिना और स्ट्रेंथ में कमी जैसे तीन लक्षणों के आधार पर 48.18 प्रतिशत लोगों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कम पाया गया. लेकिन जब इन सभी का बायोकेमिकल टेस्ट किया गया तो आंकड़ा बढ़कर 60.17 प्रतिशत हो गया. सर गंगाराम अस्पताल के यूरॉलजी विभाग के चेयरमैन डाक्टर सुधीर चड्ढा कहते हैं कि इस स्टडी से यह साफ हो रहा है कि हमारी आबादी में हर तीसरा इंसान सेक्स हॉर्मोन की कमी से पीड़ित है. उन्होंने कहा कि जब लोग डायबीटीज, हाइपरटेंशन, विटमिन डी की कमी, हार्ट डिजीज जैसी बीमारी से पीड़ित होते हैं तो उनमें टीडीएस यानी टेस्टोस्टेरोन की कमी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों में यौन क्षमता बनाये रखने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन है. किसी पुरुष में इसकी कमी से सेक्स से जुड़ी परेशानियां पैदा होने लगती हैं. शोध के मुताबिक मधुमेह, हाइपरटेंशन और हार्ट के मरीजों में टीडीएस का खतरा और ज्यादा पाया गया है. 40 साल की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन में हर साल 0.4 से 2.6 फीसदी की कमी होने लगती है. डाक्टरों का मत है कि भारत में 40 साल से अधिक उम्र का हर तीसरा व्यक्ति सेक्सुअल हॉर्मोन की कमी से जूझ रहा है, जिसके चलते पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने से बचने के कारण उनके वैवाहिक जीवन में असंतुष्टि, शक, कड़ुवाहट, तनाव और दूरियां बढ़ रही हैं. चालीस साल से अधिक उम्र के वे लोग जो डायबिटीज, हार्ट डिजीज, बीपी, विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें हर साल टीडीएस की जांच जरूर करवानी चाहिए. सेक्स सम्बन्धों से अरुचि का मुख्य कारण तो यह है ही, तनाव, बीपी और हाइपरटेंशन का भी जनक है.

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डायबिटीज, बीपी, दिल की बीमारी होने पर टीडीएस का खतरा ज्यादा

स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को डायबिटीज नहीं थी, उनमें टीडीएस का स्तर 52.8 प्रतिशत था और डायबिटीज वालों में यह 71.03 प्रतिशत था. इसी प्रकार हाई बीपी के मरीजों में टीडीएस का खतरा 72.89 प्रतिशत पाया गया और नॉन बीपी वालों में यह केवल 54.86 प्रतिशत था. कोरोनरी हार्ट डिजीज के 32 मरीज भी इस स्टडी में शामिल हुए थे, इमसें से 27 यानी 84.30 प्रतिशत में टीडीएस की बीमारी थी. डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे लोग जिनकी उम्र ज्यादा है और वे डायबिटीज, हार्ट डिजीज, बीपी, विटमिन-डी की कमी से जूझ रहे हैं उन्हें हर साल टीडीएस की जांच करानी चाहिए.

क्या है टेस्टोस्टेरौन हार्मोन

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को पिट्यूटरी ग्रंथी और हाइपोथैलेमस नियंत्रित करते हैं. इसका स्रावण अंडकोष में होता है. सेक्स और शुक्राणुओं की संख्या के लिए यह हार्मोन जिम्मेदार है. टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में कमी को हाइपोगोनडिजम भी कहा जाता है. टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन पुरुष में मर्दानगी के लक्षणों को पैदा करने वाला मुख्य कारक है. सरल भाषा में कहें तो युवावस्था में यह एक लड़के को मर्द बनाता है, जैसे चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ आना, सीने पर बाल आना, आवाज में भारीपन आना, जननांग का विकसित होना, शरीर का सुडौल होना, ताकतवर मांसपेशिया बनना सब इस हार्मोन के कारण ही होता है. शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ के लिए यह हार्मोन पुरुषों के लिए जरूरी है.

टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन बढ़ती उम्र के साथ कम होने लगता है. एक अनुमान के मुताबिक 30 और 40 की उम्र के बाद इसमें हर साल दो फीसदी की गिरावट आने लगती है. इसमें क्रमिक गिरावट सेहत से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, लेकिन जब कुछ खास बीमारियों, इलाज या चोटों के कारण यह सामान्य से कम हो जाता है, परेशानी तब शुरू होती है. अंडकोष में चोट, उसकी सर्जरी, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम और आनुवांशिकी गड़बड़ी से पिट्यूटरी ग्रंथि और हाइपोथैलेमस प्रभावित होता है, जिससे हाइपोगोनडिजम के हालात पैदा होते हैं. इन्फेक्शन, लीवर और किडनी में बीमारी, शराब की लत, कीमोथेरपी या रेडिएशन थेरपी के कारण भी टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन में कमी आती है. टेस्टोस्टेरोन की कमी वैवाहिक जीवन में कलह का कारण बनती है. इस हॉर्मोन की कमी के चलते पुरुष चाहकर भी स्त्री को शारीरिक सुख नहीं दे पाता है.

सोशल टैबू ने पुरुषों को जकड़ रखा है

भारत में सामाजिक बंधन और शर्मिंदगी की वजह से पुरुष न तो अपनी इस कमी को उजागर करते हैं और न ही इसके इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं. इसके विपरीत वे ताकत की दवाएं, झाड़फूंक, योगा या आयुर्वेद जैसी चीजों का सहारा लेने लगते हैं, जो उनके मर्ज को और ज्यादा बढ़ा देते हैं. टेस्टोस्टेरोन की कमी एक प्रकार की बीमार है जिसका इलाज एलोपैथी में सम्भव है. औरतों की तरह पुरुषों में भी सेक्स हार्मोन रीप्लेसमेंट सम्भव है. बस जरूरत है सोशल टैबू को भूल कर डॉक्टर के पास जाने की.

पत्नी को विश्वास में लें

आपकी जीवनसाथी को आपके जीवन पर पूरा अधिकार है. उससे अपनी बीमारी, अपनी कमी, अपनी गलतियां मत छिपाइये. उसे विश्वास में लें. उसे बतायें कि आप किस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं. यदि आप ठीक तरीके से अपनी समस्या पत्नी को बताएंगे तो न सिर्फ आपका वैवाहिक जीवन तबाह होने से बचेगा, बल्कि आपके बीच बॉन्डिंग भी बढ़ेगी. इसके साथ ही जीवनसाथी का साथ और विश्वास पाकर आप में डॉक्टर के पास जाने और उचित इलाज करवाने की हिम्मत भी पैदा होगी.

कैसे जानें टेस्टोस्टेरोन की कमी को  

ऐसे कई लक्षण हैं जो पुरुष शरीर में टेस्टोस्टेरोन की कमी को प्रदर्शित करते हैं. यौन सम्बन्ध बनाने की इच्छा न होना एक स्पष्ट संकेत है कि आप में यह हार्मोन कम हो रहा है. इसके अलावा यदि आपको थकान और सुस्ती ज्यादा महसूस होने लगी है तो यह भी इस हॉर्मोन की कमी का लक्षण है. अवसाद, चिंता, चिड़चिड़ापन, ज्यादा देर तक कसरत न कर पाना, यौन अंग की मजबूती में गिरावट टेस्टोस्टेरोन की कमी को दर्शाते हैं. इसके अलावा दाढ़ी-मूंछों का बढ़ना कम हो जाये, पसीना ज्यादा आने लगे, याददाश्त कम हो रही हो या एकाग्रता में कमी नजर आ रही हो तो यह लक्षण भी टेस्टोस्टेरोन की कमी बताते हैं. लम्बे समय तक हाइपोगोनडिजम से हड्डियों को नुकसान पहुंचने का जोखिम रहता है. टेस्टोस्टेरान की कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और फ्रैक्चर की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए जैसे ही आपको महसूस हो कि आपकी मर्दानगी कम हो रही है, तुरंत टेस्टोस्टेरोन की जांच करवाएं और उचित इलाज शुरू करें.

क्यों होती है टेस्टोस्टेरोन की कमी

आज की भागदौड़ वाली जिन्दगी में तनाव होना आम बात है. नौकरी की टेंशन, प्रमोशन की टेंशन, सहकर्मियों से गलाकाट प्रतिस्पर्द्धा के चलते शहरों की तनावपूर्ण जिन्दगी से युवा पीढ़ी परेशान है. तनाव कई बीमारियों की जड़ है. टेस्टोस्टेरोन हॉमोन में कमी तनाव के कारण होती है. इसके अलावा फास्टफूड कल्चर के चलते बढ़ता मोटापा भी इस हॉर्मोन की कमी का मुख्य कारण है. मोटापे को किसी भी लिहाज से उचित नहीं माना जा सकता है. मोटापे का मतलब होता है अनेक बिमारियों को स्वयं आमंत्रित करना. भारतीय वातावरण के अनुरूप फल, दाल, हरी सब्जियां, जूस, सलाद जैसी चीजें खाने की जगह युवा पीढ़ी पास्ता, बर्गर, पीजा, चाऊ जैसी फालतू और अस्वस्थकर चीजों से पेट भर रही है. जिससे अनावश्यक चर्बी तो शरीर पर बढ़ ही रही है, इसमें यूज होने वाले अनेक लवण जैसे अजीनोमोटो या लाल तीखी मिर्च इत्यादि हमारी सेहत और सेक्स हॉर्मोन के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं.

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बहुत देर साइक्लिंग करना, या कई किलोमीटर स्कूटर या गाड़ी ड्राइव करने के कारण लगातार एक जगह पर ही बैठे रहना पड़ता है, जिसके कारण अंडकोष के आसपास का तापमान बहुत बढ़ जाता है. इससे टेस्टोस्टेरोन की बनने की मात्रा तो प्रभावित होती ही है, शुक्राणुओं को भी बहुत नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा अन्त:वस्त्रों पर ध्यान न देने से भी यह समस्या पैदा होती है. शरीर को सामान्य तापमान पर बनाये रखने के लिए जरूरी है कि अन्त:वस्त्र ऐसे हों जो सूती होने के साथ हवा के आने-जाने की राह में रुकावट न बनें. अधिक टाइट अंडरवियर पहनना भी इस रोग को आमंत्रण देना है. बेहतर होगा कि जब तक आप घर पर हों, टाइट अंडरवियर की जगह सूती कपड़े से बना ढीला अन्त:वस्त्र पहनें. इसके साथ ही कुछ व्यायाम और खेलकूद को रोजाना की जिन्दगी में जगह दें. यह आपको तनाव से दूर रखेगा और पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाएगा, जिससे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के बनने में मदद मिलेगी.

पालक दाल खिचड़ी रेसिपी

पालक दाल की खिचड़ी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आपके हेल्थ के लिए भी लाभदायक है. आपको इसमें कार्बोहाईड्रेड और प्रोटीन भरपूर मात्रा में मिलती है. इस खिचड़ी को आप पापड़, चटनी, रायता या अचार के साथ परोस सकती हैं.

सामग्री

चावल (½ कप)

दाल (1 कप)

जीरा (1 टी स्पून)

सरसों के दाने (1 टी स्पून)

पालक (1 कप)

प्याज (टुकड़ों में कटा हुआ)

टमाटर ( टुकड़ों में कटा हुआ)

आइसक्रीम सनडे रेसिपी

बनाने की वि​धि

चावल को 15 मिनट के लिए भिगो दें और दाल को धो लें.

एक प्रेशर कूकर लें और इसमें तेल डालें.

एक बार जब तेल गर्म हो जाए तो इसमें सरसों के दाने, जीरा, कढ़ीपत्ता, ताजा बना अदरक लहसुन का पेस्ट डालकर अच्छी तरह भूनें.

इसमें बारीक कटा हुआ टमाटर और प्याज डालें, अपने स्वादानुसार हरी मिर्च डालें और पकने दें.

इसमें हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर भूनें  और स्वादानुसार नमक डालें.

दाल और चावल डालें और साथ ही इसमें एक गिलास पानी भी डालें.

इसे 2 मिनट पकाने के बाद ताजी कटी पालक डालकर प्रेशर कूकर को बंद कर दें.

इसे 10 से 12 मिनट पकने दें.

पकने के बाद पालक खिचड़ी में देसी घी डालें और गरमागरम परोसें.

फिश मौली रेसिपी

posted by- saloni

अब घर बैठे करें 5 तरीकों से नेचुरल ब्लीच

अगर आप चेहरे की नेचुरल रंगत पाना चाहती हैं तो सबसे आसान उपाय है ब्लीच कराना . जब कि आपको मार्केट में कई तरह के  प्रोडक्ट्स मिलेंगे, जो ब्लीच के लिए बेस्ट प्रोडक्ट्स  माने जाते हैं. लेकिन ये जरूरी नहीं कि आपके चेहरे के लिए फायदेमंद ही साबित हो. क्योंकि इसमें कई केमिकल मिले होते हैं जिससे आपके चेहरे को नुकसान पहुंचता हैं. तो आईए जानते हैं कि आप नेचुरल तरीके से कैसे ब्लीच कर सकती हैं.

आलू

आलू का रस चेहरे की रंगत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. आलू के रस को चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. उसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें. सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर करें.

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टमाटर

एक पके हुए टमाटर का रस निकाल लें. अब इस रस को पूरे चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें. उसके बाद चेहरे को सादे पानी से धो लें. इस उपाय को हर रोज करें.

पपीता

पपीता भी एक नेचुरल ब्लीच है. पपीते के रस को चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दीजिए और उसके बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. इस प्रक्रिया को कुछ दिन लगातार करें.

दही

दही में कई तरह के एंजाइम मौजूद होते हैं. साथ ही इसमें मौजूद लैक्ट‍िक एसिड त्वचा की रंगत निखारने का काम करता है. चेहरे पर दही लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. इसके बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें.

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नींबू

नींबू को नेचुरल ब्लीच के तौर पर जाना जाता है. सोने से पहले चेहरे पर नींबू का रस लगाकर सोएं. इस प्रक्रिया को कुछ-कुछ दिनों के अंतराल पर करते रहें. इस प्रक्रिया से आपके चेहरे पर एक अलग ही निखार आ जाएगा.

posted by- Saloni

जहां से चले थे

पूर्व कथा

मां की मौत के बाद संध्या अकेली रह जाती है. बेमन से आफिस जाती है. वहां उस का मन नहीं लगता तो घर वापस आ महरी को डांटने लगती है. महरी उसे चाय बना कर देती है और वह बचपन की यादों में खो जाती है.

संध्या अपने मातापिता की इकलौती संतान थी. बेटी होने के बावजूद बेटे की तरह पाला था उन्होंने उसे. उस के दबंग और अक्खड़ स्वभाव के कारण स्कूलकालिज में लड़के उस से बात तक नहीं करते थे. एम.बी.ए. करने के बाद संध्या के लिए अच्छे घर के रिश्ते आने लगे थे. वह मीनमेख निकाल कर इनकार कर देती लेकिन पिता की जिद के आगे झुक कर ‘हां’ करनी पड़ी. शादी के दिन उस ने अपने पापा के गिड़गिड़ाने की आवाज सुनी तो गुस्से में आ कर शादी से इनकार कर दिया.

इस हादसे से दुखी उस के पापा की मौत हो गई लेकिन मरने से पहले संध्या को शादी के दिन का सच बता गए. मां भी उस के दबंग स्वभाव की वजह से चुप रह गई थीं.

मातापिता की मौत के बाद संध्या का झूठा दंभ टूट जाता है और उसे अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगता है. और अब आगे…

अंतिम भाग

गतांक से आगे…

संध्या की मां को गुजरे 4-5 दिन हो चुके थे पर वह आज भी अतीत में विचरण कर रही थी.

15 अगस्त वाले दिन सुबहसुबह मेरी अंतरंग सहेली वंदना मिलने आ गई. मैं उसे देखते ही उछल पड़ी और बोली, ‘अब आई है तुझे मेरी याद. मां की अंतिम यात्रा में शामिल हो कर तू ने समझा सारे फर्ज निभा दिए.’

नाराज होते हुए वह बोली, ‘मिलूं कैसे, आफिस में तेरा फोन हमेशा व्यस्त रहता है और घर तू देर से पहुंचती है.’

‘अच्छा, अब बातें न बना,’ यह कह कर उस का हाथ पकड़ उसे बिठाते हुए मैं बोली, ‘बता, क्या लेगी?’

‘कुछ भी बना ले,’ वंदना बोली, ‘तेरी बड़ी याद आ रही थी, सो सोचा कि तू आज के दिन तो घर पर ही मिलेगी,’ और इसी के साथ वंदना पांव पसार कर बैठ गई.

जब तक मैं चायनाश्ता तैयार कर के लाई वंदना ने मेज पर ढेर सारे पत्र और फोटो बिछा दिए.

‘यह सब क्या है,’ मैं ने मेज के एक कोने पर टे्र रखते हुए पूछा.

‘बस, क्या बताऊं संध्या, आंटी ने मरने से कुछ ही दिन पहले मुझे बुलाया और तेरे लिए पुन: घर वर खोजने को कहा था, शायद उन से तेरी बात हुई होगी. यह उसी विज्ञापन के पत्र हैं.’

‘बात तो हुई थी, मैं ने तो वैसे ही उन का मन रखने के लिए कह दिया था पर मुझे क्या पता था कि मां सचमुच मेरे विवाह के लिए इतनी सीरियस हैं. शायद उन्हें अपने जाने का एहसास हो गया था,’ कह कर मैं बिलखने लगी.

‘संध्या, जमाना अभी भी वहीं है और समाज आज भी पुरुषों का ही है, वश उन का ही चलता है. तुम नए सिरे से मनुस्मृति लिखने की कोशिश मत करो. रहना तुम्हें भी इसी समाज में है. तुम चाहे कितनी भी ऊंचाइयां छू लो, रहोगी तुम औरत ही. स्त्रियोचित मर्यादा, गुण, स्वभाव, शर्म तुम्हें भी अपनाने होंगे,’ कह कर वंदना चुप हो गई.

मैं इस बहस को ज्यादा तूल नहीं देना चाहती थी और उत्सुकतावश एकएक कर के पत्र और फोटो देखने लगी.

‘बस, यही सब रह गए हैं अब मेरे लिए,’ मैं कुछ लोगों का विवरण पढ़ते हुए बोली, ‘कोई विधुर 2 बच्चों का बाप है तो कोई तलाकशुदा. किसी का बच्चा विदेश में है तो कोई विकलांग. एकदो को छोड़ कर बाकी मुझ से आधी तनख्वाह भी नहीं पाते.’

‘मैडम, अब तुम्हारे लिए कोई 20-22 वर्ष का नौजवान तो मिलेगा नहीं. मिलेगा तो आदमी ही. तुम्हारी उम्र 45 के आसपास है, बालों में भी सफेद चांदी के तार चमकने लगे हैं. अब इस उम्र में कोई अपनी वंशवृद्धि के लिए तो विवाह करेगा नहीं और न ही तुम सक्षम हो, और कोई इस उम्र तक तुम्हारे लिए भी नहीं बैठा होगा. अब तो वही मिलेगा जो उम्र के इस पड़ाव में साथ चाहता होगा.’

‘तेरा मतलब है मैं उस की केयर टेकर बन कर उस का साथ दूं,’ यह कह कर मैं ने वंदना की ओर देखा और बोली, ‘इस से तो शादी न करना ही अच्छा है,’ मुझ से अपने व्यक्तित्व का अपमान बरदाश्त नहीं हुआ.

वंदना मेरी तरफ देख कर बोली, ‘तब भी तुम में यही गरूर था जो आज है. आज तो फिर भी तुम्हारे पास 10-12 रिश्ते हैं, और देर करोगी तो 60-62 साल का वृद्ध ही मिलेगा, वह भी पेंशन होल्डर. जवानी का सारा सुख तो तुम ने दांव पर लगा दिया. मातृत्व सुख क्या होता है तुम्हें एहसास ही नहीं. जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहती थीं न…अब कोई जिम्मेदारी नहीं मिलेगी, सिवा इस के कि उस का हाथ पकड़ कर तुम सड़क पार कराओगी,’ चाय खत्म करते हुए वंदना ने कहना जारी रखा.

‘शायद इसीलिए पुराने लोग जल्द से जल्द बच्चों की शादी कर दिया करते थे. लड़की आसानी से उस परिवार में ढल जाती थी. एकदूसरे के साथ रहतेरहते, प्रेम, तकरार, संवेदनाओं और भावनाओं का एहसास होता रहता था. एक बार फिर से सोच लो तुम. यह जो कुछ तू ने कमा कर जोड़ा है न उस का सुख तब दूसरे ही भोगेंगे…पर इतना याद रखना, इस तपते रेगिस्तान में चलना तुम्हें अकेले ही पड़ेगा.’

बात कड़वी थी पर थी सच. मुझे वंदना की सरल भाषा में कही गई बातों ने सोचने पर मजबूर कर दिया. मैं अपने अंधेरे भविष्य को देख कर एकदम घबरा गई.

‘अच्छा, अब मैं चलती हूं. घर पर बच्चे इंतजार कर रहे होंगे. बस, इतना बता दो कि तुम शादी करना चाहती हो या नहीं, ताकि मैं इस बारे में आगे सोच सकूं. आंटी मुझे यह काम सौंप गई थीं, इसलिए मैं तुम्हें समझाने चली आई.’

मां की इच्छा और वंदना के तर्क के आगे मैं एकदम बौनी पड़ गई और मैं ने उस की बात मान ली.

जातेजाते वंदना बोल गई, ‘देखो, तुम दिन भर बैठ कर फिर से सारे पत्र पढ़ लो. समझ में आता है तो ठीक, नहीं तो नया विज्ञापन दे देती हूं. मैं शाम को आती हूं, फिर पता नहीं तुम्हें कब फुरसत मिले.’

शाम को वंदना के आने से पहले मैं ने सारे पत्र पढ़े. जैसा वर मुझे चाहिए था, उन में वैसा कोई न मिला. मैं विरोधाभास के समुद्र में तैरती रही. मांपापा की इच्छा का ध्यान रखते हुए मैं ने 2-3 बायोडाटा अलग रख लिए.

ठीक 6 बजे वंदना आ गई. अपने साथ आए एक व्यक्ति का परिचय करवाते हुए बोली, ‘यह विजय शर्मा हैं, यह मेरे परिचित भी हैं और मैरिज काउंसलर भी. मैं ने सोचा इन्हें साथ लेती चलूं ताकि तुम्हारे मन में कोई शंका हो तो निवारण कर लोगी.’

उन के लिए झट से शरबत बना कर मैं वहीं पास ही में बैठ गई.

‘संध्या, मैं ने इन को तुम्हारे बारे में सबकुछ बता दिया है, अब तुम बिना झिझक इन से बात कर सकती हो,’ वंदना मुझे देखते हुए बोली, ‘उन में से कोई तुम्हें पसंद आया क्या?’

मैं ने अपने चुने हुए पेपर उन के सामने रख दिए.

विजयजी ने पेपर्स देखते हुए पूछा, ‘मैम, क्या आप साफसाफ बता सकती हैं कि इस उम्र में शादी क्यों करना चाहती हैं?’

‘यह कैसा बेहूदा सवाल है?’ मैं ने चिढ़ कर कहा. मेरी आवाज में रोष स्पष्ट था.

‘यही तो अहम प्रश्न है, संध्या,’ उन की अनुभवी नजरों ने मुझे चीर कर रख दिया.

‘शायद इसलिए कि मां चाहती थीं या शायद समाज मुझे भेद भरी नजरों से न देखे इसलिए या शायद मुझे सहारे की जरूरत हो,’ मैं ने अपनेआप से प्रश्न किया. मैं मन ही मन उचित शब्दों को तलाशती रही फिर बोली, ‘मुझे लगता है मैं बहुत अकेली जी ली, अब कदम जिस उम्र की ओर बढ़ रहे हैं शायद मैं अकेली न चल सकूं,’ मैं ने 1-1 अक्षर पर जोर दे कर कहा.

‘तो वह व्यक्ति भी आप के स्टेटस का होना चाहिए?’ प्रश्न जितना सरल था समाधान उतना ही कठिन.

मैं ने वंदना की तरफ देख कर कहा, ‘मुझे लगता है यह अब संभव नहीं हो पाएगा. उम्र, जाति, बंधन, स्टेटस, धन, ऐश्वर्य की अब मुझे कोई चाहत नहीं है. व्यक्ति कैसा भी हो बस, मेरी भावनाओं को समझने वाला और सहारा देने वाला होना चाहिए. एक बार मैं ने शादी की उम्र में शादी क्या तोड़ दी, मुझे ग्रहण लग गया है. कभी पापा का सहारा तो कभी मां की गोद और एकएक कर के सभी संबंध टूटते चले गए. आज मैं बिलकुल अकेली खड़ी हूं,’ कह कर मैं सुबकने लगी. मेरा सारा दुख आंखों के रास्ते बाहर निकल गया. हमारे बीच एक गहरी चुप्पी छा गई.

‘संध्या,’ वंदना ने मेरे पास आ कर मेरे गाल थपथपाए और कहने लगी, ‘विजय वही व्यक्ति हैं जिस की शादी बरसों पहले तुम से हो रही थी. तुम्हारे झूठे लांछन की वजह से न इन की शादी हो पाई और न ही तुम ने की. मैं ने तुम से झूठ बोला कि यह मेरे जानने वाले हैं. विज्ञापन के उत्तर में इन का भी एक पत्र आया था, जो मैं ने संभाल कर रख लिया था. तुम से सबकुछ सुनने के बाद ही मैं ने इन से तुम्हारे बारे में बात की है. इन के मन में अब भी तुम्हारे प्रति रोष था किंतु मैं ने इन्हें सबकुछ बता दिया है. बाकी तुम दोनों बात कर लो.’

यह सुनते ही मेरी सांसें ठहर गईं. जैसे मैं सब के सामने निर्वसन हो गई हूं. मेरी जबान ने अब मेरा साथ छोड़ दिया. मैं बेहद परेशान हो गई थी. अपने पर काबू पाने में मुझे कुछ समय लगा, फिर मैं बोली, ‘मुझ में अब इतनी हिम्मत नहीं है कि इन से नजर भी मिला सकूं. पहले ही मैं ने इन का जीवन बरबाद कर दिया. मुझे जब तक इन के बारे में पता चला, बहुत देर ही चुकी थी. यदि यह मुझे स्वीकार कर लें तो इन का मुझ पर बड़ा एहसान होगा. मैं वादा करती हूं कि ताउम्र इन की दासी बन कर इन की सेवा करूंगी. बस, यह सिर्फ एक बार मुझे माफ कर दें.’

‘क्या तुम मेरे लिए नौकरी छोड़ सकती हो?’ विजयजी ने पूछा.

‘हां, आप की खुशी के लिए मैं अभी इस्तीफा भेज सकती हूं. बस, मुझे एक बार प्रायश्चित का अवसर दीजिए,’ कह कर मैं रोने लगी. मेरा कंठ एकदम अवरुद्ध हो गया और मैं उन के पैरों पर गिर पड़ी.

विजय ने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया और बोले, ‘मैं तुम्हें न तो नौकरी छोड़ने के लिए कहूंगा और न ही कुछ ऐसा कहूंगा जो तुम्हारी इच्छाओं के विरुद्ध हो. बस, पिछली बातों को ले कर मन में कोई अवसाद न रखना,’

मैं उन की ओर न देखने का बहाना करते भी चोरीचोरी उन्हें देखने लगी. पता नहीं कैसे मुझ में से 18 साल की किशोरी संध्या निकल कर बाहर आ गई और पुन: उन के सीने से जा लगी.

मुझे अपने चारों ओर बांहों के घेरे का एहसास हुआ तो मैं वापस वहीं पर पहुंच गई जहां से चली थी. कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी मुझे, यह बस, मैं

क्यों भड़के सैफ अली खान, यहां जानिए

पिछले कुछ समय से सैफ अली खान अपने बेटे तैमूर अली खान को लेकर काफी परेशान है. हाल ही में सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में कहा हैं कि मीडिया कैमरा पर्सनल को बच्चों का पीछा नहीं करना चाहिए. अपने बेटे के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा है कि – ‘तैमूर बच्चा है. पैपराजी जब उनकी तस्वीरें लेते है तो फ्लैश का इस्तेमाल करते है.

कैमरे के इस फ्लैश से तैमूर को ईश्यू हो रहा था इसके कारण मैंने पैपराजी को तैमूर की तस्वीरें नहीं लेने को कहा था.’ मालूम हो कि पैपराजी से बात करते हुए सैफ अली खान ने गुस्से में उनसे कहा था कि ‘मत करो ऐसा, मेरा बच्चा अंधा हो जाएगा.’ पैपराजी से विनती करते हुए कहा था कि ‘तैमूर का पीछा करना अब बंद करो,वो एक छोटा बच्चा है कोई स्टार नहीं है.

 

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आपको बता दें, सोशल मीडिया पर तैमूर अली खान की पौपुलैरिटी किसी बौलीवुड स्टार से कम नहीं है. सोशल मीडिया के फैंस उनकी लेटेस्ट तस्वीरों का इंतजार करते हुए दिखाई देते है. आम लोगों के बीच तैमूर की पौपुलैरिटी इतनी है कि उनके नाम से मार्केट में कुकीज और खिलौने तक बिक रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार , हाल ही में मुंबई पुलिस ने सैफ-करीना के घर के बाहर से मीडिया कैमरों का हटाया था. इसके बाद खबर आई कि सैफ अली खान ने पैपराजियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. इस बारे में बात करते हुए सैफ अली खान ने कहा- ‘मैंने कभी भी पैपराजियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की है. लेकिन मेरे किसी पड़ोसी पैपराजियों की भीड़ से तंग आकर पुलिस में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई हो.’

 

इमरजेंसी से भी बदतर हालत में मीडिया

देश के अधिकतर लोग महसूस करते हैं कि देश का मीडिया अब निष्पक्ष नहीं रह गया है. हर कोई सरकार के प्रचार और चापलूसी में लगा है. इसकी कई वजह भी हैं जिनमें से पहला है फंड, अधिकांश मीडिया हाउस सरकारी विज्ञापनों की खैरात से चल पा रहे हैं और इस एहसान का बदला वे सरकार के झूठे सच्चे गुणगान करके चुका भी रहे हैं. अफसोस तो इस बात का भी है कि चुनाव के वक्त में लोकतंत्र का यह चौथा स्तम्भ अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े हुए हैं, जिससे आम लोग गफलत में हैं.

पिछले पांच सालों से मीडिया का एक बड़ा वर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिस पूर्वाग्रही तरीके से उन्हें सुपरमैन बनाने और दिखाने की कोशिश कर रहा हैं, इसके कारण इसे गोदी मीडिया कहा जाने लगा है. इमरजेंसी के दौरान सरकार की तरफ से सच बोलने और लिखने पर पहरा था लेकिन पिछले पांच सालों से सरकार और नरेंद्र मोदी को महिमा मंडित करने वालों को प्रोत्साहित करने वाले को सरकारी विज्ञापनो की मलाई चांदी की तश्तरी में परोस कर चटाई जा रही है. ऐसा लगता है कि मीडिया सरकारी भोंपू बनकर रह गया है.

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मोदी या गोदी मीडिया समर्थित न्यूज चैनल्स और पत्र पत्रिकाएं लगातार अपने दर्शक और पाठकों को खो रहे हैं जिसके दूरगामी घातक नतीजों से उन्हें कोई सरोकार भी नहीं है, क्योंकि सच और घटनाओं को तोड़ मरोड़ कर वे इस तरह से पेश कर रहे हैं कि हर मामले में सरकार उन्हें हीरो ही नजर आती है. मीडिया के इन पंडों को मालूम है कि दक्षिणा अपनी यजमान सरकार से चाहिए तो उसे दोबारा सत्ता में लाने के लिए झूठ बोलने ही पड़ेंगे, नहीं तो दुकान पर ताला जड़ना पड़ेगा. इमरजेंसी के दौरान तो मीडिया सरकारी दमन के बाद भी घुमा फिराकर सच बयान कर ही देता था लेकिन अब ऐसा बहुत अल्प मात्रा में है. इस पर भी जो सरकार की बखिया उधेड़ रहे हैं उन्हें तरह तरह से तंग किया जा रहा है.

प्रेस आजाद है या उसे सच कहने से रोका नहीं जा रहा है इस तथ्य की पुष्टि तरह तरह से होती भी रही है. हाल ही में पेरिस स्थित आरएफएस यानि रिपोर्टर्स सेंस फ़्रंटियर्स ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी करते बताया हैं कि प्रेस की आजादी के मामले में भारत का स्थान 180 देशों में से 140वां है, जो 2 पायदान नीचे खिसका है. और मौजूदा आम चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थकों द्वारा पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं. हिन्दुत्व को नाराज करने वाले विषयों पर बोलने या लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर घृणित अभियान चलाये जा रहे हैं.

यानि कट्टरवादियों ने अघोषित सेंसर शिप लागू कर रखी है और इसके लिए उसे सरकार का संरक्षण और आशीर्वाद मिला हुआ है. इन भगवावादियों की कोशिश यह है कि जो हिन्दुत्व के बारे में सच बोले उसे इतना प्रताड़ित और परेशान कर दो कि वे हतोत्साहित होकर मैदान छोड़ दें. ऐसे पत्रकारों और संपादकों को बहिष्कृत करने की साजिश भी ये लोग रचते रहते हैं.

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सरकार भी भेदभाव करने में कोई कोताही या कंजूसी नहीं करती, जो लोग उसके तलवे नहीं चाटते उन्हें सरकारी विज्ञापनों के हक से वंचित कर दिया जाता है, जिससे वे परेशान होकर उसकी गोद में आ बैठें या फिर पत्रकारिता छोडकर कहीं पान का ठेला लगा लें या फिर छोले भटूरे का खोमचा चलाने लगें .

दो दिक्कतें इस मामले में बड़ी अहम हैं जिनमें से पहली यह है कि प्रेस की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व आम लोग नहीं समझते कि उनका, देश का भला और भविष्य इसी से तय होता है और दूसरी बात यह कि इलेक्ट्रानिक्स और प्रिंट मीडिया अब अपने दर्शकों और पाठकों के दम पर नहीं बल्कि सरकारी पैसे से जीवित है. जो कुछ लोग जैसे तैसे अपने बूते पर निष्पक्ष पत्रकारिता कर भी रहे हैं सरकार उनके रास्तों में कांटे बिछाने में कोई कसर नहीं छोड़ती.

यह बेहद निराशाजनक स्थिति है. अगर मीडिया पर बंदिशें लगाई जा रहीं हैं तो यह एक तरह की तानाशाही ही है, जिसके प्रति हर स्तर पर उदासीनता पसरी हुई है. पिछले साल देश में कम से कम 6 पत्रकारों की हत्या हुई, इनमें से अधिकांश सरकार और भगवावादियों की पोलपट्टी खोलने बाले थे. ये और इस तरह के पत्रकार चूंकि सरकार के लिए खतरा होते हैं,और किसी भी कीमत पर बिकते नहीं इसलिए हमेशा के लिए मिटा दिये जाते हैं.

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इन हालातों को देखते किसी भी मुंह से नहीं कहा जा सकता कि देश में बोलने की आजादी और लोकतन्त्र कहीं बचा है. बचा वो है जो सरकार और नरेंद्र मोदी की गलतियों और ज़्यादतियों को भी उनकी महानता, बुद्धिमानी, दूरदर्शित, उदारता और दरियादिली साबित करता है. जो भी पसरते पंडावाद और फिर से थोपी जा रही वर्ण व्यवस्था पर एतराज जताता है, उसका तो भगवान भी मालिक नहीं होता जिसके दम पर सरकार चल रही है और धर्म का धंधा दिन दोगुना और रात चार गुना फल फूल रहा है.

बिकाऊ मीडिया

2019 के चुनावों में यदि नरेंद्र मोदी अपनी सफलताओं का आकलन जनता से करवाने के लिए उतर रहे हैं तो मीडिया दूसरे नंबर का उम्मीदवार है. पहले कभी भी मीडिया इस बुरी तरह निशाने पर नहीं आया है.

मीडिया की निष्पक्षता व ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न तो हमेशा लगते रहे हैं पर इस बार जिस तरह मीडिया ने सरकारी पक्ष लिया है और जिस तरह कुछ चैनलों व समाचारपत्रों ने अपनी नीतियां बनाई हैं, उन से मीडिया भी जनता के सामने कटघरे में खड़ा हो गया है.

मीडिया या प्रैस की स्वतंत्रता को संविधान में राजनीतिक दलों से ज्यादा महत्ता दी गई है. संविधान की प्रस्तावना (प्रिअंबल) में चुनावों को जनता की प्राथमिकता नहीं बताया गया है बल्कि विचारों की अभिव्यक्ति को संविधान का मुख्य ध्येय घोषित किया गया है. मौलिक अधिकारों में चुनावों, पार्टियों, नेताओं की चर्चा नहीं है लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में विचारों की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बताया गया है.

अस्वच्छ भारत

प्रैस और मीडिया का अधिकार चुनावों, नेताओं, प्रधानमंत्री से ऊपर है पर जिस तरह से इस बार इन पर आरोप लग रहे हैं, इस से स्पष्ट है कि प्रैस व मीडिया ने अपना स्तर घटा दिया है. जो विशिष्ट स्थान उसे संविधान के तहत मिला हुआ है, उसने उस की धज्जियां उड़वा ली हैं. बिकाऊ मीडिया का तमगा कितने ही चैनलों, ऐंकरों, समाचारपत्रों पर लग चुका है. इलैक्ट्रौनिक मीडिया ने लाइसैंसों के चक्कर में और प्रिंट मीडिया ने विज्ञापनों के लिए सरकार की जो चाटुकारिता की है, वह जनता की आंखों से बच नहीं पाई है.

समाचारपत्र उस जमाने में भी सरकार के पक्ष या विपक्ष में खड़े होते थे जब टैलीविजन व रेडियो सिर्फ सरकारी थे और डिजिटल मीडिया का आविष्कार नहीं हुआ था. पर फिर भी वे अपनी स्वतंत्रता का आवरण ओढ़े रहने में सफल रहते थे. इस बार अति हो गई है. ज्यादातर चैनल और समाचारपत्र खुल्लमखुल्ला सरकार के पक्ष में खड़े हैं.

मोदी की नैया

कम्युनिस्ट या तानाशाही देशों में जिस तरह के समाचारपत्र और टीवी चैनल होते थे, एक लोकतंत्र में इन का वैसे होना गंभीर खतरे की निशानी है. खतरा यह भी है कि मीडिया में जो प्रकाशित होगा उस में हर बात पर प्रश्न लगा रहेगा कि क्या यह सरकार या पार्टीविशेष द्वारा प्रायोजित है.

विडंबना यह है कि 1975-1977 में इंदिरा गांधी की सरकार ने यह काम पुलिस के बलबूते कराया था. इस बार यह अपनेआप किया जा रहा है और शायद रोजगार को बचाना ज्यादा बड़ा कारण है बजाय सरकारी भय या लालच के. मौलिक अधिकार इतने सस्ते हो सकते हैं, ऐसा पहली बार दिख रहा है.

खूबसूरत त्वचा पाने के ये हैं 4 टिप्स

ग्लोइंग स्किन पाना हर किसी की ख्वाहिश होती हैं.  पर इस चाहत को पूरी करने के लिए आपको अपनी त्वचा का ध्यान रखना होगा. प्रदूषण, धूल, मिट्टी, धुंआ के कारण आपकी त्वचा बेजान होने लगती है. ऐसे में आपको अपनी त्वचा को नियमित रुप से देखभाल करने की जरूरत है.

ग्लोइंग स्किन पाने के लिए बस आपको थोड़ी सी सावधानी बरतने की जरूरत है. आप पिग्मेंटेशन, एंटी एजिंग जैसी समस्याओं से आसानी से बच सकती हैं. अगर समय से आप अपनी त्वचा का ध्यान देना शुरू कर दें तो इन समस्याओं से बच सकती हैं. तो आइए बताते हैं की आप अपनी त्वचा की खूबसूरती कैसे बढ़ाएं.

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  1. क्‍लींजिंग:

नारियल पानी का इस्तेमाल आप अपना चेहरा साफ करने के लिए का भी कर सकती हैं. क्‍लींजिंग के बाद स्किन के पोर्स बंद करने के लिए अल्कोहल फ्री टोनर का इस्तेमाल करना चाहिए.

2. मौइश्चराइजर:

मौइश्चराइजर का इस्तेमाल आप किसी भी मौसम में कर सकती हैं. अगर आपकी ऑयली स्किन है तो आपको वाटर बेस्ड जेल और मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए. चेहरे को ठंडे पानी से धोएं. इससे  चेहरे पर औयल कम आएगा और मुहांसे भी नहीं होंगे.

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3.सनस्क्रीन:

धूप में निकलने से पहले सनस्‍क्रीन लोशन लगाना कभी ना भूलें. UVA प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन नार्मल स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है. अगर आपकी सेंसिटिव स्किन है तो सनब्लौक UVB प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल कर सकती हैं.

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4. नाइट क्रीम:

रात को सोने से पहले चेहरा धोकर नाइट क्रीम जरूर लगाएं.

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आइसक्रीम सनडे रेसिपी

सामग्री

250 चौकलेट कम्पाउंड

क्रीम (1 टी स्पून)

मक्खन (1 टी स्पून)

शहद (1 टी स्पून)

डाइजेटिव बिस्कुट (3 टुकड़े)

पनीर ढोकला रेसिपी

5 वालनट

वनीला आइसक्रीम (100 ग्राम)

बिस्कुट (3 डाइजेटिव)

चिली पाउडर (एक चुटकी)

बनाने की वि​धि

एक पैन को गर्म करे और इसमें चौकलेट कम्पाउंड को मीडियम आंच पर पिघाल लें.

इसमें क्रीम, मक्खन और शहद डालें और इन सभी चीजों को अच्छी तरह से मिलाकर सौस तैयार कर लें.

इसे लगातार चलाते रहे यह जलना नहीं चाहिए.

पावभाजी रेसिपी

इसमें 2 चुटकी लाल मिर्च पाउडर डालें.

डाइजेस्टिव बिस्कुट को क्रम्बल करके डिजर्ट गिलास में डालें.

इसमें ताजी बनी हुई चॉकलेट सौस डालें

इस पर 4 से 5 कटे हुए अखरोट डालें.

एक मोटा पीस वनीला आइसक्रीम का डालें और इस पर थोड़ी सी चौकलेट सौस, वालनट और लाल मिर्च पाउडर डालें.

सोयाबिन फ्राइड राइस

 

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प्रेग्नेंसी में मिसकैरेज से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

प्रेग्नेंसी के वक्त आपको बेहद सावधानी बरतनी होती है. इसमें आपका खानपान, दिनचर्या और मानसिक अशांति शामिल है. हालिया अध्ययन में ये बात सामने आई कि प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा तनाव में रहने वाली महिलाओं में मिसकैरेज (Miscarriage) का खतरा बढ़ जाता है.

शोधकर्ताओं का दावा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव में रहने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 42 फीसदी अधिक हो जाता है. इससे पहले हुए अध्ययन की रिपोर्ट में यह पाया गया था कि 24 सप्ताह की प्रेग्नेंसी में होने वाले गर्भपात में 20 फीसदी मामले तनाव के कारण होते हैं. हालांकि बाद में हुए अध्ययन के बाद यह पाया गया कि आंकड़ें इससे कहीं ज्यादा हैं. क्योंकि गर्भपात के कई मामले दर्ज ही नहीं होते.

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इसके अलावा रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि युवावस्था से ही तनाव और अवसाद का सामना करने वाले लोगों को आगे जीवन में कई तरह की बीमारियों का खतरा तेज हो जाता है.

जानिए कैसे करें प्रेग्नेंसी में तनाव पर काबू

  • घर का ज्यादा काम ना करें. कोशिश करें कि अपने लिए कुछ खास वक्त निकालें. खाली वक्त में आप किताबें पढ़ सकती हैं या आराम कर सकती हैं.
  • रात में जल्दी सोने की आदत डाल लें. आपके बच्चे के लिए ये बेहद जरूरी है.
  • दूसरों की बातों का बुरा ना माने. इस दौरान अगर लोग आपको कुछ कहते भी हैं तो उन्हें अनसुना कर दिया करें.

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  • अगर आप कामगर महिला हैं तो औफिस से छुट्टी लें और घर पर आराम कर अपना वक्त बिताएं.
  • स्वीमिंग या वौक नियमित तौर पर करें.
  • हेल्दी खाएं, संतुलित आहार आपके शरीर और मानसिक सेहत दोनों को ठीक रखेगा.
  • अगर आप कोई काम नहीं करना चाहती तो मना करना सीखें. टेंशन ले कर किसी काम को करना आपके और आपके बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है.
  • लाख कोशिशों के बाद भी आप तनाव से दूर नहीं हो पा रही हैं तो बेहतर है कि आप किसी डाक्टर या थेरेपिस्ट से संपर्क करें.

edited by- Shubham

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