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रक्षाबंधन स्पेशल डिश: ऐसे बनाएं पनीर की खीर

आप आसतौर पर चावल की खीर बनाते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि पनीर की भी खीर बना सकते हैं. यह बहुत स्वादिष्ट होती है.  तो  इस रक्षाबंधन पर आप पनीर की खीर जरुर बनाएं. पर इसके लिए आपको ये रेसिपी पढ़नी होगी. आइए बताते हैं.

सामग्री

इलाइची पाउडर (½ छोटी चम्मच)

काजू (6 से 7)

फुल क्रीम दूध  (½ लीटर)

पिस्ता (2 से 3)

पनीर (250 ग्राम)

चीनी (100 ग्राम)

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बनाने की विधि

किसी भगोने में दूध लें और गैस पर उबाल लें, जब तक दूध उबले तब तक पनीर कद्दूकस कर लें.

दूध में अच्छे से उबाल आने के बाद, इसे 6 से 7 मिनिट और धीमी आंच पर उबालकर गाढ़ा कर ले फिर, कद्दूकस किए हुए पनीर को दूध में डालकर मिक्स कर दें.

पनीर डालने के बाद, दूध को लगातार चलाते हुए दोबारा उबाल आने तक पका लें.

फिर, खीर को मध्यम आंच पर गाढ़ा होने तक पकने दें.

खीर के पकने के दौरान प्रत्येक 2 से 3 मिनिट में खीर को चमचे से चला लें.

इसी बीच काजू भी काटकर तैयार कर लें.

खीर के गाढ़े होने पर खीर में चीनी डाल दें.

साथ ही काजू और इलाइची पाउडर भी डाल दें.

सारी चीजों को खीर में अच्छे से मिक्स कर लीजिए और खीर को 1 से 2 मिनिट चीनी घुलने तक पका लें.

खीर बनकर तैयार है, गैस बंद कर दें.

खीर को प्याले में निकाल लें और सर्व करें.

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अगर आप भी अपनी उम्र से कम दिखना चाहती हैं तो पढ़े ये खबर

क्‍या आप भी चाहती हैं आपकी त्‍वचा साफ-सुथरी, झुर्री मुक्‍त और मुलायम दिखे ताकि आप खूबसूरत और अपनी उम्र से कम दिख सके. अगर हां तो चिंता ना करें क्‍योंकि आप भी अब बिना क्रीम और लोशन के त्‍वचा की खूबसूरती को बरकरार रख सकती हैं. अगर आप अपनी त्‍वचा की सही से देखभाल करना शुरु कर दें तो आप अपनी उम्र से कहीं कम ही दिखने लगेंगी.

ठीक तरह से अपनी त्‍वचा की देखभाल, अच्‍छा खान-पान, एक्‍सरसाइज करके आप कम उम्र की दिखाई देने लगेंगी. इसके अलावा आप जिस ढंग से कपड़े पहनती हैं या फिर आपकी हेयरस्‍टाइल किस तरह की है, इससे आप की उम्र ज्‍यादा या कम की लगने लगती है. इसलिये अपने कपड़ों के पहनावे पर भी ध्‍यान दें. आइये जानते हैं कि आप कैसे अपनी उम्र से कम की दिख सकती हैं.

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  • त्‍वचा पर ज्‍यादा मेकअप करने से बचें. धाग-धब्‍बों को छुपाने के लिये पाउडर फाउंडेशन के ऊपर औइल फ्री कीम ही लगाएं.
  • मेकअप पर भारी पाउडर ना लगाएं.
  • लिक्‍विड आइलाइन का प्रयोग ना करें. हमेशा आई पेंसिल लगाएं.
  • लिपस्टिक की जगह पर लिप ग्‍लास लगाएं.
  • दिन में दो बार अपनी त्‍वचा पर माइस्‍चराइजर लगाएं. इससे आपकी त्‍वचा में ब्‍लड सर्कुलेशन होगा और बारीक रेखाएं गायब होने लगेंगी.
  • अंडर आई क्रीम का प्रयोग हमेशा करें.
  • सूरज की अल्‍ट्रा वाइलेट किरणों से त्‍वचा को बचाएं. इससे बचाव के लिये सनस्‍क्रीन का प्रयोग करें.
  • हफ्ते में एक बार बालों को हौट आइल मसाज दें.
  • रात को सोने से पहले अपने चेहरे को विटामिन ई क्रीम से मसाज करें.
  • रेगुलर एक्‍सरसाइज करें, इससे शरीर और मासपेशियां टोन अप हो जाएंगी.
  • खूब सारा पानी और फ्रूट जूस पियें.
  • चीनी युक्‍त स्‍नैक्‍स और मेवों का प्रयोग बंद कर दें. इसी जगह पर ताजे फल और सब्‍जियां खाएं.

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बच्चों को डिप्रैशन से कैसे बाहर निकाले?

15 साल की रिया जब भी स्कूल जाती, क्लास में सब से पीछे बैठ कर हमेशा सोती रहती. उस का मन पढ़ाई में नहीं लगता था. वह किसी से न तो ज्यादा बात करती और न ही किसी को अपना दोस्त बनाती. अगर वह कभी सोती नहीं थी, तो किताबों के पन्ने उलट कर एकटक देखती रहती. क्या पढ़ाया जा रहा है, इस से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता. हर बार उस की शिकायत उस के मातापिता से की जाती, पर इस का उस पर कोई असर नहीं पड़ता था.

वह हमेशा उदास रहा करती थी. इसे देख कर कुछ बच्चे तो उसे चिढ़ाने भी लगते थे, पर वह उस पर भी अधिक ध्यान नहीं देती थी. परेशान हो कर उस की मां ने मनोवैज्ञानिक से सलाह ली. कई प्रकार की दवाएं और थेरैपी लेने के बाद वह ठीक हो पाई.

दरअसल, बच्चों में डिप्रैशन एक सामान्य बात है, पर इस का पता लगाना मुश्किल होता है. अधिकतर मातापिता इसे बच्चे का आलसीपन समझते हैं और उन्हें डांटतेपीटते रहते हैं. इस से वे और अधिक क्रोधित हो कर कभी घर छोड़ कर चले जाते हैं या फिर कभी आत्महत्या कर लेते हैं.

बच्चों की समस्या न समझ पाने की 2 खास वजहें हैं. पहली तो हमारे समाज में मानसिक समस्याओं को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता और दूसरे, अभी बच्चा छोटा है, बड़ा होने पर समझदार हो जाएगा, ऐसा कह कर अभिभावक इस समस्या को गहराई से नहीं लेते. मातापिता को लगता है कि यह समस्या सिर्फ वयस्कों को ही हो सकती है, बच्चों को नहीं.

शुरुआती संकेत : जी लर्न की मनोवैज्ञानिक दीपा नारायण चक्रवर्ती कहती हैं कि आजकल के मातापिता बच्चों की मानसिक क्षमता को बिना समझे ही बहुत अधिक अपेक्षा रखने लगते हैं. इस से उन्हें यह भार लगने लगता है और वे पढ़ाई से दूर भागने लगते हैं. अपनी समस्या वे मातापिता से बताने से डरते हैं और उन का बचपन ऐसे ही डरडर कर बीतने लगता है, जो धीरेधीरे तनाव का रूप ले लेता है. मातापिता को बच्चे में आए अचानक बदलाव को नोटिस करने की जरूरत है. कुछ शुरुआती लक्षण निम्न हैं :

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  • अगर बच्चा आम दिनों से अधिक चिड़चिड़ा हो रहा हो या बारबार उस का मूड बदल रहा हो.
  • बातबात पर  गुस्सा होना या रोना.
  • अपनी किसी हौबी या शौक को फौलो न करना.
  • खानेपीने में कम दिलचस्पी रखना.
  • सामान्य से अधिक समय तक सोना.
  • अलगथलग रहने की कोशिश करना.
  • स्कूल जाने की इच्छा का न होन
  • या स्कूल के किसी काम को न करना आदि.

इस बारे में दीपा आगे बताती हैं कि किसी भी मातापिता को बच्चे को डिप्रैशन में देखना आसान नहीं होता और वे इसे मानने को भी तैयार नहीं होते कि उन का बच्चा डिप्रैशन में है.

तनाव से निकालना : निम्न कुछ बातों से बच्चे को तनाव से निकाला जा सकता है–

  • हमेशा धैर्य रखें, गुस्सा करने पर बच्चा भी रिवोल्ट करेगा और आप उसे कुछ समझा नहीं सकते.
  • बच्चे को कभी यह एहसास न होने दें कि वह बीमार है. यह कोई बीमारी नहीं है, इस का इलाज हो सकता है.
  • हिम्मत से काम लें, बच्चे को डिप्रैशन से निकालने में मातापिता से अच्छा कोई नहीं हो सकता.
  • बच्चे से खुल कर बातचीत करें, तनावग्रस्त बच्चा अधिकतर कम बात करना चाहता है. ऐसे में बात करने से उस के मनोभावों को समझना आसान होता है. उस के मन में कौन सी बात चल रही है, उस का समाधान भी आप कर सकते हैं.
  • हमेशा बच्चे को लोगों से मिलनेजुलने के लिए प्रेरित करें.
  • बातचीत से अगर समस्या नहीं सुलझती है, तो इलाज करवाना जरूरी है. इस के लिए आप खुद उसे मनाएं और ध्यान रखें कि डाक्टर जो भी दवा दे, उसे वह समय पर ले, इस से वह जल्दी डिप्रैशन से निकलने में समर्थ हो जाएगा.

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अपना दायित्व समझें : मातापिता बच्चे के रिजल्ट को ले कर बहुत अधिक परेशान रहते हैं. इस बारे में साइकोलौजिस्ट राशिदा कपाडि़या कहती हैं कि बच्चों में तनाव और अधिक बढ़ जाता है जब उन की

बोर्ड की परीक्षा हो: ऐसे में हर मातापिता अपने बच्चे से 90 प्रतिशत अंक की अपेक्षा लिए बैठे रहते हैं और कम नंबर आने पर वे मायूस होते हैं. ऐसे में बच्चा और भी घबरा जाता है. उसे एहसास होता है कि नंबर कम आने पर उसे कहीं ऐडमिशन नहीं मिलेगा, जबकि ऐसा नहीं है, हर बच्चे को अपनी क्षमता के अनुसार दाखिला मिल ही जाता है.

कई ऐसे उदाहरण हैं जहां रिजल्ट देखे बिना ही बच्चे परीक्षा में अपनी खराब परफौर्मेंस के बारे में सोच कर आत्महत्या तक कर लेते हैं. इस से बचने के लिए मातापिता को खास ध्यान रखने की जरूरत है :

  • अपने बच्चे की तुलना किसी अन्य बच्चे से न करें.
  • वह जो भी नंबर लाया है उस की तारीफ करें और उस की चौइस को आगे बढ़ाएं.
  • अपनी इच्छा बच्चे पर न थोपें.
  • उस की खूबियों और खामियों को समझने की कोशिश करें. अगर किसी क्षेत्र में प्रतिभा नहीं है, तो उसे छोड़ उस के हुनर को उभारने की कोशिश करें.
  • एप्टिट्यूड टैस्ट करवा लें, इस से बच्चे की प्रतिभा का अंदाजा लगाया जा सकता है.
  • उस के सैल्फ स्टीम को कभी कम न करें.उस की मेहनत को बढ़ावा दें.
  • समस्या के समाधान के लिए बच्चे से खुल कर बातचीत करें और उस के मनोभावों को समझें तथा उस के साथ चर्चा करें.
  • अपनी कम कहें, बच्चे की ज्यादा सुनें, इस से बच्चा आप से कुछ भी कहने से हिचकिचाएगा नहीं.
  • बच्चे को हैप्पी चाइल्ड बनाएं, डिप्रैशनयुक्त नहीं.

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सृष्टि की दृष्टि में लड़कियां भी कुछ कम नहीं हैं

टैलीविजन सीरियल ‘दिव्य दृष्टि’ में सिमरन का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सृष्टि माहेश्वरी ने कम ही समय में अपनी अलग पहचान बनाई है. उन्होंने टैलीविजन पर पहला सीरियल ‘दो दिल बंधे एक डोरी से’ किया. उस के बाद ‘थपकी प्यार की’, ‘ब्रह्मराक्षस’, ‘गुमनाम’, ‘अलादीन’ आदि सीरियलों में काम किया. उन्होंने बौलीवुड में भी कदम रखा औैर फिल्म ‘शादी तेरी बजाएंगे हम बैंड’ में वे दिखाई दीं. वे रेडियो पर आरजे मंत्रा के साथ अपनी आवाज का जादू बिखेरने की कोशिश करती हैं. यहां पेश हैं, सृष्टि माहेश्वरी से हुई बातचीत के खास अंश :

आप का अभिनय के क्षेत्र में कैसे आना हुआ? पूछने पर सृष्टि माहेश्वरी कहती हैं, ‘‘जब मैं 8वीं क्लास में थी तब मैं ने थिएटर किया था और टीवी पर आने से पहले मैं ने काफी तैयारी की थी. एक बार डायरैक्टर रंजीत कपूर बरेली आए हुए थे, बच्चों के औडिशन चल रहे थे. मैं भी अपनी मम्मी के साथ वहां गई थी. मैं ने डायरैक्टर रंजीत कपूर के साथ ‘रंग विनायक’ में काम किया था.’’

अभी तक के जीवन की कोई खास घटना? दिमाग पर जोर डालते हुए वे कहती हैं, ‘‘घटनाएं तो बहुत सी हैं. मैं आर्मी अफसर बनना चाहती थी और ऐक्टर बन गई. मैं ने 5 साल तक इस के लिए जीतोड़ तैयारी की थी. एनसीसी का सी सर्टिफिकेट भी लिया और कई कैंप किए, मैं स्टेट लैवल तक ऐथलीट भी रही हूं.’’

मी टू जैसे मूवमैंट पर अपनी राय जाहिर करते हुए सृष्टि माहेश्वरी कहती हैं, ‘‘मेरी नजर में मी टू मूवमैंट अच्छा है. इस मूवमैंट का गहरा असर पड़ा है. अब कोई भी आसानी से किसी को कुछ कहने की हिम्मत नहीं करता है. पर मैं यह भी कहना चाहती हूं कि इस का गलत इस्तेमाल भी हुआ है. मैं महसूस करती हूं कि लड़कियां भी कुछ कम नहीं हैं. सो, दोनों पक्षों की बात को सुना जाना चाहिए.’’

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परिवार के बारे में पूछे जाने पर वे बताती हैं, ‘‘मेरे 2 भाई और एक बहन हैं. मेरे पापा डाक्टर हैं और मम्मी गायनोकोलौजिस्ट. बहन श्रद्धा मुझ से एक साल बड़ी हैं जो डैंटल सर्जन हैं. मेरा एक भाई अक्षय इंजीनियरिंग कर चुका है और छोटा भाई आदित्य 12 वीं कर चुका है.’’

आप अपना प्रेरणास्रोत किसे मानती हैं? के पूछने पर उन का कहना है,‘‘मैं मम्मी को अपना प्रेरणास्रोत मानती हूं. बचपन से ही मैं ने मम्मी को बहुत मेहनत करते देखा है.’’

आप के और क्याक्या शौक हैं? इस सवाल पर वे मुसकराती हुई कहती हैं, ‘‘डांस करने का शौक है. समय मिलने पर वीडियो गेम्स खेलती हूं, कभीकभी बास्केट बौल भी खेल लेती हूं. इस के अलावा पढ़ने और म्यूजिक सुनने का शौक है. औैर हां, घर पर खाना बनाने का शौक भी रखती हूं.’’

आप के सपनों का राजकुमार कैसा होगा? इस पर वे कुछ ठहरती हैं, फिर कहती हैं, ‘‘सपनों का राजकुमार क्यों कहना है. जो होगा वो राजकुमार ही होगा, इसलिए मैं सपने नहीं देखती हूं. मैं आज में यकीन रखती हूं. जिसे सपनों की राजकुमारी चाहिए होगी उस से पूछना है कि उसे कैसी राजकुमारी चाहिए?’’

टैलीविजन और फिल्मों में तालमेल बैठाने की बाबत सृष्टि कहती हैं, ‘‘जब आप 2 चीजों को कर रहे होते हैं तो बीच में थोड़ाबहुत कन्फ्यूजन हो ही जाता है, क्योंकि हर किसी को प्राथमिकता देनी होती है. सो, मैं अच्छे से बात करती हूं, बैठती हूं, मैं अपनी बात रखती हूं. दोनों चीजें तो करनी ही हैं. अगर कैरियर बनाना है तो मेहनत भी करनी है.’’

फिल्म ‘शादी तेरी बजाएंगे हम बैंड’ में आप के काम की तारीफ हुई है. आप कैसा महसूस कर रही हैं? इस सवाल पर वे खुल कर हंसती हैं, फिर बताती हैं, ‘‘बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं. बडे़ परदे पर आना मेरे लिए काफी खुशी की बात थी. फिल्म छोटी हो या बड़ी, इस से फर्क नहीं पड़ता है. पर इतनी बड़ी स्क्रीन पर आ रहे हो, इस से फर्क पड़ता है. राहुल बग्गा, राजपाल यादव के साथ काम कर के बहुत अच्छा लगा. सभी ने काफी सपोर्ट किया.’’

भविष्य में आप की क्या योजना है? इस सवाल पर गंभीर होते हुए वे कहती हैं, ‘‘मैं फ्यूचर प्लानिंग नहीं करती हूं. कल अगर खराब गया है तो उसे आज ही सुधार लो. मैं रोज मेहनत करती हूं ताकि मेरा कल खराब न हो.’’

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‘बिग बौस सीजन 7’ का अनुभव कैसा रहा? यह पूछे जाने पर वे खुश हो जाती हैं, कहती हैं, ‘‘काफी यादगार था, क्योंकि जब मैं पहली बार सलमान खान सर से मिली थी, उस समय 17 साल की थी. टीवी पर काम करना, वह भी सलमान खान के साथ स्क्रीन शेयर करना, मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी.’’

आप की नजर में सलमान खान कैसे ऐक्टर हैं और कैसे इंसान हैं? इस सवाल पर वे गर्व महसूस करती हुई कहती हैं, ‘‘सलमान खान के साथ काम करना मेरी यादों में शुमार है. वे बहुत ही अच्छे ऐक्टर हैं. लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप को स्क्रिप्ट कैसी मिल रही है. ऐक्टर भी वही करता है जो स्क्रिप्ट में होता है. व्यक्तिगत तौर पर वे काफी सपोर्ट करते हैं.’’

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अब तो आप रेडियो जौकी भी हैं. यह कैसे हुआ? इस पर उन का कहना है, ‘‘हर घर में टैलीविजन पहुंच गया है. लोग टीवी पर आप की ऐक्टिंग को देख रहे हैं, पर रेडियो जौकी में काम करना बहुत अच्छा लग रहा है. रेडियो सीरीज करना मतलब आप को लोग सुन रहे हैं, आप की आवाज, आप के बोलने का लहजा, आप के परफौर्म करने का तरीका जो लोगों को उस दुनिया में ले जाए जो कहानी उन के सामने चल रही है. सो, ऐक्टर हूं, हर ऐक्टिंग की फील्ड में जाने की कोशिश कर रही हूं.’’

आप अपनेआप को खूबसूरत बनाए रखने के बारे में वे कहती हैं, ‘‘मैं अपने घर में हमेशा से स्लीपिंग ब्यूटी रही हूं. मुझे सोना बहुत पसंद है. जहां भी मौका मिलता है, मैं बीचबीच में नैप यानी झपकी ले लेती हूं. मैं सैट पर भी सो लेती हूं. लोग ढूंढ़ते हैं, परेशान होते हैं, पर आखिर में किसी एक कोने में मुझे सोता देख कर चैन की सांस लेते हैं.’’

अपनी फिटनैस के बारे में सृष्टि बताती हैं, ‘‘मेरी फिटनैस का राज यही है कि मैं बाहर का खाना खाने से बचती हूं. घर की बनी चीजें खाओ और हैल्दी रहो. अगर फिट रहना है तो थोड़ाबहुत कार्डियो कर लो, रनिंग कर लो. मैं आप को बता दूं कि मैं स्टेट लैवल तक ऐथलीट रह चुकी हूं. मैं ऐथलीट हूं, डांसर हूं. ये सारी चीजें मुझे फिट रखने में काफी मददगार रहती हैं.’’

आप अपने चाहने वालों को कोई संदेश देना चाहेंगी? इस पर उन का कहना है, ‘‘मैं अपने चाहने वालों से यही कहूंगी कि आप पूरी तैयारी से यहां आइए. आप अपनी पढ़ाई बीच में न छोडि़ए, वरना यहां संघर्ष बहुत है.’’

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जम्मू कश्मीर विवाद: धारा 370 का बौलीवुड पर असर, टली फिल्म की शूटिंग

जम्मू-कश्मीर में धारा 370  हटाए जाने के बाद पूरे देश में हलचल मच चुकी है. इस समय जम्मू- कश्मीर में केंद्र सरकार ने धारा 144 लगाई गई है. इसके अनुसार, इस जगह पर चार से ज्यादा लोगों जमा नहीं हो सकते.

आपको बता दें कि धारा 370 लागू करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बांटने के निर्णय लिया गया है. इससे तनाव और भी बढ़ गया है. इसका असर बौलिवुड पर भी दिख रहा है.कश्मीर के तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने ‘सड़क 2’ की शूटिंग कैंसल कर दी है. साथ ही सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म शेरशाह का शूटिंग शेड्यूल भी मेकर्स ने आगे कर दी हैं.

इन दोनों फिल्मों की शूटिंग जम्मू- कश्मीर  में होने वाली थी. लेकिन जिस तरह वहां पर तनाव का मौहोल हैं उसमें शूटिंग करना काफी मुश्किल है. जिस वजह से मेकर्स ने अपनी फिल्मों की शूटिंग आगे कर दी हैं.

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ऐश्वर्या का आरोप: ड्रग एडिक्ट हैं तेज प्रताप

यह बात कोई और कहता तो उसकी मंशा पर शक किया जा सकता था. लेकिन ऐश्वर्या के आरोप को एकदम नजरंदाज नहीं किया जा सकता कि उनके पति तेजप्रताप ड्रग एडिक्ट हैं. ऐश्वर्या ने यह आरोप अदालत में लगाया है, जो तेजप्रताप की ऊटपटांग हरकतों को देखते सच के नजदीक लगता है. गौरतलब है कि एश्वर्या की शादी लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे बिहार के स्वास्थ मंत्री रहे तेजप्रताप यादव मई 2018 में हुई थी. मियां बीबी में उम्मीद से कम वक्त में ही खटपट शुरू हो गई थी जिसके चलते तेजप्रताप ने एश्वर्या पर तलाक का मुकदमा दायर कर दिया था .

बेइंतहा खूबसूरत ऐश्वर्या ने अपने जबाब में धारा 26 घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत परिवार अदालत में आवेदन देते अपनी सुरक्षा की भी गुहार लगाई है. बकौल ऐश्वर्या तेजप्रताप मारिजुयाना नाम की ड्रग का सेवन करते हैं और उन्हें प्रताड़ित भी करते हैं. इस बारे में उन्होंने अपनी ससुराल वालों को बताया लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की. इस बात का एहसास ऐश्वर्या को शादी के कुछ दिनों बाद ही हो गया था कि तेजप्रताप ड्रग्स लेते हैं और गांजा भी पीते हैं .

तलाक का यह हाइप्रोफाइल मुकदमा अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ पहुंचा है जिसमें ऐश्वर्या ने यह भी आरोप लगाया है कि तेजप्रताप खुद के शिव का अवतार होने का दावा करते हैं. और एक बार तो ड्रग लेने के बाद उन्होंने घाघरा चोली पहन कर राधा का रूप रख लिया था. सवाल जवाब करने पर वह गांजे को भोले बाबा का प्रसाद बताते हैं और राधा ही कृष्ण और कृष्ण ही राधा है का राग अलापने लगते हैं.

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इसमें कोई शक नहीं कि एश्वर्या झूठ नहीं बोल रहीं हैं क्योंकि तेजप्रताप की ये उलूल जुलूल हरकतें आए दिन सार्वजनिक रूप से भी चर्चा का विषय बनती रहती हैं. कुछ दिन पहले ही उनका एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वे शिव बने नजर आ रहे हैं .

उनके गले में सांप सी आकृति भी लटकी है और हाथ में त्रिशूल भी है. पूरे शरीर पर भस्म लगी है और वे कमर में जानवर की खाल लपेटे हुये हैं. इतना ही नहीं कभी वे कृष्ण बन जाते हैं और हर कभी धर्म स्थलों की सैर पर निकल जाते हैं. कभी वे मजदूरों की तरह सड़कों पर काम करते भी नजर आते हैं और तांत्रिकों के पास तो हर कभी जाते रहते हैं.

इसमें भी कोई शक नहीं कि तेजप्रताप एक असामान्य व्यक्ति हैं. जिसका व्यावहारिकता से कोई वास्ता नहीं लगता ऐसा है कि उन्होंने शिजोफ़्रेनिया के मरीज की तरह अपनी एक काल्पनिक दुनिया बना रखी है. और वे उसी को हकीकत मानते हैं. मुमकिन है ऐश्वर्या की मांग पर उन्हें चिकित्सीय जांचों से भी होकर गुजरना पड़े.

लालू यादव के कुनबे की राजनीति खात्मे की कगार पर है तो इसकी एक बड़ी वजह उनके बच्चों की परवरिश में कोताही और लापरवाही भी है. खुद लालू भी अपनी मजाकिया हरकतों के चलते सुर्खियों में रहते थे लेकिन वे हरकतें तेजप्रताप जितनी सनक भरी नहीं होती थीं. चारा घोटाले में जेल की सजा भुगत रहे कल के इस दिग्गज और जमीनी नेता को इतने दुर्दिन देखना पड़ेंगे. यह किसी ने नहीं सोचा था. रेलवे के घोटालों में भी फंसे खुद लालू यादव कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. उन्होंने कुछ दिनों पहले ही मांसाहार की इच्छा जताई थी जिसे उनकी गिरती सेहत देखते हुये डाक्टरों ने नकार दिया था.

लालू की सत्ता और भूतपूर्व बादशाहत उनके बेटे संभाल नहीं पाये तो इसकी बड़ी वजह उनका यह मान लेना दिखती है कि लोग हमेशा उन्हें चाहते रहेंगे और वोट देते रहेंगे. लेकिन लोकसभा चुनाव में जिस तरह राजद का सूपड़ा साफ हुआ उससे यह भी साफ हो गया है कि अब लालू परिवार की राजनीति खत्म हो चली है.

नई दिक्कत तेजप्रताप ने खड़ी कर दी है जिन्हें अपने पिता के रसूख से कोई वास्ता नहीं उल्टे वह आए दिन उल्टे सीधे ऐसे फसाद खड़े करते रहते हैं. जिन्होंने उन्हें मजाक से ज्यादा तरस का पात्र बना दिया है. सहानुभूति ऐश्वर्या जैसी पत्नियों से होना स्वभाविक है. जिनके पल्ले खब्त पति पड़ जाता है तो उन्हें दुनिया भर की दुश्वारियों से जूझना पड़ता है.

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सुषमा स्वराज का सफरनामा: कूटनीतिक मोर्चे पर भी जीनियस

पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का मंगलवार दिनांक 6 अगस्त 2019 की रात हार्ट अटैक के चलते 10.50 पर दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया. वे 67 वर्ष की थीं. वे दिन भर बिलकुल ठीक थीं और लोकसभा की कार्रवाई पर नज़र रखे हुए थीं, जहाँ जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा चल रही थी. विधयक पास होने पर उन्होंने सरकार को सफलता पर बधाई के ट्वीट भी किये. अचानक रात 9. 35 पर उनको अचेत अवस्था में एम्स लाया गया जहां डौक्टर्स ने हार्ट अटैक की पुष्टि की. किडनी ट्रांसप्लांट से गुजरने वाली सुषमा स्वराज शुगर की बीमारी से भी पीड़ित थीं, इसलिए मोदी सरकार-2 में उन्होंने स्वास्थ कारणों का हवाला देते हुए कोई पद लेने से इंकार कर दिया था. बावजूद इसके वे पार्टी और सरकार के कार्यों पर पूरी तरह दृष्टि जमाये हुए थीं. मंगलवार को लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पास होने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्बोधित करते हुए ट्वीट किया था कि वो सारी जिंदगी इस दिन का इंतज़ार करती रहीं हैं. वहीं अपनी मृत्यु से चंद मिनट पहले उन्होंने वकील हरीश साल्वे से फ़ोन पर पकिस्तान जेल में बंद कुलभूषण जाधव के केस के बारे में भी बात की और हंसते हुए साल्वे से बोली थीं कि कल आकर अपनी फीस की एक रुपया ले जाना.

सुषमा स्वराज के अकस्मात् निधन की खबर से पूरा देश स्तब्ध है. सुषमा ने अपनी जीवन यात्रा में तमाम ऐसे मुकाम हासिल किए जिन पर देश को हमेशा गर्व रहेगा. सियासी सफर में ऊंचाइयां चढ़ते हुए उन्होंने अपने निजी जीवन को भी बखूबी संजोया.

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उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव

हरियाणा में जन्म

सुषमा का जन्म 14 फरवरी 1952 को अंबाला कैंट, हरियाणा में हुआ था. वे हरदेव शर्मा और लक्ष्मी देवी की बेटी थीं. स्वराज कौशल से विवाह के बाद वे सुषमा शर्मा से सुषमा स्वराज बन गई.

पाकिस्तान से भी था नाता

सुषमा स्वराज के माता-पिता पाकिस्तान के लाहौर के धर्मपुर के रहने वाले थे जो आज़ादी के बाद हरियाणा में आकर बस गए थे. पाकिस्तान के अपने आखिरी दौरे में सुषमा धर्मपुर भी गई थीं.

सुषमा की शिक्षा

सुषमा ने अंबाला कैंटोनमेंट के सनातन धर्म कॉलेज से शुरुआती शिक्षा पूरी की थी. उन्होंने संस्कृत और राजनीति विज्ञान में बैचलर डिग्री ली थी. उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई की थी. वे एक ख्यात वकील थीं.

एनसीसी की बेस्ट कैडेट

अंबाला कैंट के एसडी कॉलेज से पढ़ाई करते हुए उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक एनसीसी के बेस्ट कैडेट का खिताब भी जीता था.

संगीत-नाटक में दिलचस्पी

सुषमा को शास्त्रीय संगीत, कविता, फाइन आर्ट्स और ड्रामा में दिलचस्पी थी. वह शानदार ऑलराउंडर थीं.

सियासी सफर

1970 में सुषमा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हुई थीं और यहीं से उनका सियासी सफर शुरू हुआ था. सुषमा स्वराज के पिता भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख सदस्य थे.

सुप्रीम कोर्ट में करियर की शुरुआत

1973 में सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की. वह बड़ौदा डायनामाइट मामले (1975-77) में स्वराज कौशल के साथ जॉर्ज फर्नांडीस की लीगल टीम का हिस्सा थीं.

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स्वराज कौशल के साथ शादी

सुषमा स्वराज ने आपातकाल के दौरान 13 जुलाई 1975 को स्वराज कौशल के साथ शादी की थी. स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील के तौर पर काम कर रहे थे और उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 34 साल थी. स्वराज कौशल फरवरी 1990 से फरवरी 1993 के बीच मिजोरम के राज्यपाल भी रहे. सुषमा और स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में साथ-साथ काम किया था.दोनों ने आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. यहीं से दोनों की नजदीकियां और बढ़ीं और उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया. लेकिन यह इतना भी आसान नहीं था. दोनों को अपने परिवारों को मनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.

सबसे युवा कैबिनेट मंत्री

1977 में जनता पार्टी की सरकार में 25 वर्षीय सुषमा स्वराज सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बन गई थीं. 27 वर्ष की उम्र में सुषमा जनता पार्टी की हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं. वह किसी राजनीतिक पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता भी बनीं. इसके अलावा, बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री, विपक्ष की पहली महिला महासचिव, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, प्रवक्ता और विदेश मंत्री बनने का भी खिताब उनके नाम ही है.

फिल्म इंडस्ट्री की मुक्ति

अंडरवर्ल्ड से लेकर कानूनी कागजों तक फिल्म प्रोडक्शन के इंडस्ट्री बनाने तक के सफर में भी सुषमा स्वराज का ही हाथ था. सुषमा ने ही फिल्म प्रोडक्शन को इंडियन फिल्म इंडस्ट्री घोषित किया जिससे फिल्मी जगत को बैंक फाइनेंस में सुविधा होने लगी. स्वराज उस वक्त (1988) में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री थीं.

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री

1998 में (13 अक्टूबर-3 दिसंबर) तक काफी कम समय के लिए वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा

सुषमा ने 1999 में सोनिया गांधी को कर्नाटक की बेल्लारी संसदीय सीट से चुनाव में कड़ी टक्कर दी. इसी वक्त वह लोगों के बीच लोकप्रिय हुईं. सुषमा केवल 12 दिनों के कैंपेन करके ही 358,000 वोट जीतने में कामयाब रही थीं. लेकिन इस मुकाबले में वह सोनिया गाँधी से 7 फीसदी मतों से हारी थीं.

एम्स खोले

जनवरी 2003 से मई 2004 तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के पद पर रहते हुए सुषमा स्वराज ने भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश में 6 एम्स खोले.

सांसद के तौर पर शानदार प्रदर्शन

2004 में सुषमा को आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवार्ड से नवाजा गया था. वह पहली और इकलौती महिला सांसद हैं जिन्हें यह सम्मान मिला. वह सात बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं और 3 बार विधानसभा सदस्य रहीं.

तेलंगाना के लिए आडवाणी से बहस

तेलंगाना के गठन में भी सुषमा स्वराज ने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने इसके लिए अपने गुरू और वरिष्ठ बीजेपी नेता एल के आडवाणी से भी बहस कर डाली थी.

दूसरी महिला विदेश मंत्री

इंदिरा गांधी के बाद वह भारत की दूसरी महिला विदेश मंत्री बनी थीं. मोदी सरकार में वह विदेश मंत्री के तौर पर हर भारतीय की मदद करने के लिए तैयार रहती थीं.

कूटनीतिक मोर्चे पर भी जीनियस

यमन संकट के वक्त औपरेशन राहत उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धि रही. भारत ने यूके, रूस, यूएस जैसे देशों की मदद की.

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सुषमा के चलते उज्मा वापसी संभव हुई

सुषमा ने अपने मजबूत इरादों का हर मोर्चे पर सशक्त परिचय दिया. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में बतौर विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने विदेश में फंसे कई भारतीयों को बचाया. चाहे इराक में फंसी हुई नर्सों को सुरक्षित निकालना हो, कुवैत और दुबई में काम दिलाने के बहाने धोखा खाने वाले मजदूर हों या पाकिस्तान में फंसीं उज्मा और गीता की सकुशल वापसी. सुषमा स्वराज के मानवता के कई ऐसे किस्से हैं जिसकी चर्चा देश ही नहीं दुनिया में भी होती है. सुषमा ने पाकिस्तान में जबरन शादी का शिकार हुईं भारतीय नागरिक उज्मा अहमद को वापस वतन लाने में मदद की थी. पाकिस्तान में उज्मा से एक पाकिस्तानी डौक्टर ताहिर अली ने जबरन शादी कर ली थी. उज्मा ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि उसे तत्काल घर लौटने की इजाजत दी जाए क्योंकि पहले विवाह से उसकी बेटी है जो भारत में है और थैलेसीमिया से पीड़ित है. अदालत ने  उज्मा को उसके आव्रजन संबंधी दस्तावेज भी लौटा दिए जो उसके मुताबिक ताहिर अली ने उससे ले लिए थे. अली ने अदालत के आदेश पर ये दस्तावेज जमा करवा दिए थे. उज्मा ने आरोप लगाया था कि ताहिर ने बंदूक की नोंक पर उसे विवाह करने को मजबूर किया. उसके बाद से वह इस्लामाबाद में भारतीय मिशन में रह रही थी. सुषमा स्वराज और भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों के प्रयासों से उज्मा का भारत लौटना संभव हुआ.

उज्मा कहती है कि सुषमा मैडम, हर रोज और कई बार तो दिन में तीन या चार बार मुझे फोन करतीं और कहती थीं कि बेटा फिक्र मत करो. तुम इसे देश की, भारत की बेटी हो. हिम्मत रखना, हम तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे. तुम्हें ताहिर के साथ नहीं जाने देंगे.

सुषमा ने की गीता की घर वापसी में मदद

गीता की भारत वापसी में सुषमा स्वराज की मदद को कौन भूल सकता है. 26 अक्टूबर 2015 को सुषमा स्वराज के प्रयासों की वजह से ही मूक-बधिर लड़की गीता की एक दशक के बाद पाकिस्तान से स्वदेश वापसी हो सकी. गीता रास्ता भटककर पाकिस्‍तान जा पहुंची थी. गीता के परिवार की तलाश में विदेश मंत्रालय ने खूब प्रयास किए. विदेश मंत्री रहते हुए एक बार सुषमा स्‍वराज ने कहा था कि मैं जब भी गीता से मिलती हूं वह शिकायत करती है और कहती है कि मैडम किसी तरह मेरे माता-पिता को तलाशिये.

सुषमा ने अपील करते हुए कहा कि जो भी गीता के मां बाप हों सामने आएं. उन्होंने कहा था कि मैं इस बेटी को बोझ नहीं बनने दूंगी. इसकी शादी, पढ़ाई की सारी जिम्मेदारी हम उठाएंगे.

गीता के स्वदेश वापसी के अगले ही दिन उसे इंदौर में मूक-बधिरों के लिए चलाई जा रही गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर में भेज दिया गया. बाद में उसके परिजनों की तलाश भी की गई.

गायक अदनान सामी को दिलाई भारतीय नागरिकता

बौलीवुड सिंगर अदनान सामी सुषमा स्वराज को अपनी मां सामान मानते हैं. सुषमा स्वराज के विदेश मंत्री रहते ही अदनान सामी को भारत की नागरिकता मिली थी. अदनान सामी ने सुषमा के निधन पर भावुक होते हुए लिखा कि मैं और मेरा परिवार सुषमा जी के निधन की खबर सुनकर हैरान हैं. हम सभी के लिए वो मां के समान थीं. वह एक शानदार नेता थीं और प्रखर वक्ता थीं.

आडवाणी टीम की मज़बूत नेता

भारतीय जनता पार्टी के लौहपुरुष और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के टीम की महत्वपूर्ण नेता थीं सुषमा स्वराज. 80 के दशक में जब आडवाणी पार्टी अध्यक्ष थी तब सुषमा स्वराज युवा नेता के तौर पर उभर रही थीं. उस वक़्त उनके तेवरों को देखते हुए आडवाणी ने उनको अपनी टीम का हिस्सा बनाया था. लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी के साथ सुषमा स्वराज ने काफी लंबे समय तक काम किया. समय के साथ-साथ वह पार्टी में प्रमुख नेता बनती चली गईं और देश की महिलाओं के लिए रोल मौडल भी बनीं.  सुषमा स्वराज एक प्रखर वक्ता थीं, जो किसी भी बात को बेहतरीन तरीके से बताने की क्षमता रखती थीं.

आडवाणी कहते हैं कि सुषमा स्वराज एक शानदार इंसान थीं. उन्होंने हर किसी का दिल जीता, हर साल मेरे जन्मदिन के अवसर पर वो मेरा फेवरेट चौकलेट केक लाना नहीं भूलती थीं. सुषमा स्वराज का जाना देश और निजी तौर पर उनके लिए एक बड़ी क्षति है.

जब इस ब्यूटी कौन्टेस्ट का हिस्सा बनी थीं सुषमा स्वराज

अव्वल तो खुद सुषमा स्वराज का नैसर्गिक सौन्दर्य कभी किसी सबूत का मोहताज नहीं रहा. जिसमें सादगी का तड़का उन्हें एक अलग लुक देता था जो हर भारतीय के दिलो दिमाग में शिद्दत से बसा हुआ है. लेकिन आमतौर वे सौंदर्य प्रतियोगिताओं में जाने से परहेज ही करती  थीं. बात साल 2008 की सर्दियों की है तब सुषमा विदिशा से राज्यसभा सदस्य थीं और 2009  के लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी इसी सीट से कर रहीं थीं जो भाजपा का मजबूत गढ़ आज भी है. अघोषित ऐलान हो चुका था कि वे इसी सुरक्षित सीट से लड़ेंगी.

भोपाल के रवींद्र भवन में महिलाओं के लिए आयोजित एक सौन्दर्य प्रतियोगिता में वे दिखीं तो हर कोई हैरान रह रह गया था क्योंकि बात उनके स्वभाव से मेल खाती हुई नहीं थी. इस प्रतियोगिता का आयोजन तूलिका संस्था की विनीता त्रिवेदी ने किया था. विनीता खुद भी विदिशा की रहने वाली हैं. विदिशा का नाम सुनकर सुषमा उन्हें न नहीं कह पाईं लेकिन इसके पहले उन्होंने तसल्ली कर ली थी कि आयोजन पारिवारिक और गरिमामयी होने के अलावा भारतीय मूल्यों पर ही आधारित है.

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विनीता बताती हैं, उनसे मिलना और बात करना एक अलग अनुभव था. वहां आई महिलाएं उन्हें अपलक निहारे जा रहीं थीं तब किसी को यह नहीं मालूम था कि वे भविष्य की विदेश मंत्री से बात कर रहीं हैं. काफी मनुहार के बाद उन्होंने आधा घंटे का वक्त दिया.

लेकिन जब वे रवींद्र भवन आईं तो कार्यक्रम देखने पूरे दो घंटे रुकीं. सब कुछ उनकी उम्मीद से बेहतर था जिसमें युवतियों से लेकर अधेड़ महिलाएं तक शामिल थीं. आयोजन पूरी तरह लीक से हटकर पारिवारिक मूल्यों पर आधारित था और अधिकांश प्रतिभागी पहली बार स्टेज और रेंप पर उतरी थीं. तूलिका मिसेज भोपाल का टाइटल कौन जीतता है, इसकी उत्सुकता सुषमा स्वराज को भी हो रही थी. तब भी महिलाओं में उनका गजब का क्रेज था. हर कोई बार बार सुषमा स्वराज को देख रहा था जो आसपास के माहौल से बेखबर अपने आप में खोईं प्रतियोगिता के विभिन्न राउंड्स का लुत्फ उठा रहीं थीं. उस दिन उन्हें और भी कार्यक्रमों में जाना था. साथ आए स्टाफ के बार बार याद दिलाने पर भी वे टस से मस नहीं हुईं.

और जब विजेता की घोषणा हुई तो मौजूद दर्शकों के साथ साथ सुषमा स्वराज को भी हैरानी हुई क्योंकि खिताब 63 वर्षीय अरुणा मेहता ने जीता था. बकौल विनीता नतीजे के ऐलान के साथ सुषमा जी मुख्य अतिथि न रहकर आम दर्शक हो गईं थीं और तालियां बजाकर अरुणा को प्रोत्साहन दे रहीं थीं. अपने भाषण में उन्होंने ऐसी प्रतियोगिताओं के आयोजन पर जोर दिया. यह और बात है कि वे फिर कभी ऐसी किसी प्रतियोगिता में दिखाई नहीं दीं.

भोपाल के गुलमोहर त्रिलंगा इलाके में रहने वालीं अरुणा भी सुषमा स्वराज के असामयिक निधन पर स्तब्ध हैं और बार बार उस फोटो को देखे जा रहीं हैं जिसमें वे सुषमा स्वराज जैसी दिग्गज और लोकप्रिय हस्ती के हाथों पुरुस्कृत हो रहीं हैं. वे कहती हैं हाल फिलहाल सुषमा जी के बारे में कुछ कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. विनीता बताती हैं, पहली मुलाकात के बाद कभी-कभी उनसे फोन पर बात होती रही. उनकी याददाश्त गजब की थी और वे कटाक्ष करने से भी नहीं चूकती थीं. जब मेरी शादी हुई तो उन्होंने हंसते हुए फोन पर कहा था कि वाह! मिसेज एमपी कराके अब खुद मिसेज बन गईं.

मुंबई का रोमांटिक अंदाज

मुंबई में नशा है, यहां के समुद्र में और यहां रातदिन काम करने वाले प्रोफैशनल्स के मिजाज में, जो अपने टारगेट को पूरा करने के बाद पार्टी करते हैं, सैलीब्रेशन होता है. हर कोई पंछी की तरह जोड़े में रहता है. हर कपल रोमांटिक होता है.

पूर्णतया पाश्चात्य रंग में रंगी होती है मुंबई. देर रात पार्टियों की वजह से ही यहां का माहौल और रंगीन हो जाता है. अपने काम से काम और दूसरों की जिंदगी में हस्तक्षेप न करने की जीवनशैली इसे बेबाक बनाती है.

स्टाइल में रहने वालों का फैशनेबल शहर है मुंबई. यहां की लड़कियों की तरह यहां की इमारतें, कोठी, बंगले भी बेहद आकर्षक होते हैं. जितने बुटीक यहां फिल्मी हस्तियों की बीवियों ने खोले हैं, उतने ही सैलीब्रिटीज द्वारा इंटीरियर डिजाइनिंग भी खोले गए हैं. यहां के पानी में रोमांस घुला है. वे हर तरह का रोमांस करते हैं. समुद्रतट से असीम विस्तार के नीले पानी से, सुबह की सैर से, ताजा होटल के पास गेटवे औफ इंडिया के कबूतरों से, चर्चगेट व दादर के फुटपाथ पर दौड़तीभागती भीड़ से और यहां अपने काम के सिलसिले में आई भीड़ से.

मुंबई रोमांस करती है खूबसूरती और स्मार्टनैस से, दिलफेंक नौजवानों से और ऐसे अमीरों से जो यारों पर पैसा दिल खोल कर लुटाते हैं.

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यहां के लोगों को कारों का इतना शौक है कि नई से नई लक्जरी कारें वे लेते हैं तथा हर एक के पास 3-4 मौडल्स होते हैं. कारों के लेटैस्ट मौडल का चस्का मुंबइवासियों को हद से ज्यादा है. फ्लैट अपना हो या न हो पर कार तो अपनी होनी चाहिए. अपनी गाड़ी में गर्लफ्रैंड को घुमाने के शौकीनों का यह शहर अलग ही रोमानी अंदाज में जीता है.

रोमांस के मामले में बेतक्कलुफ है यह शहर. यहां आने वाले संघर्षशील युवकयुवती प्राय: कपल के रूप में रहते हैं और अपना मुकाम हासिल होने पर वे पार्टनर भी बदल लेते हैं.

देर रात चलने वाली पार्टियों में लड़कियों का होश में न होना, उन का झूमते हुए अपने साथी की बाहों में लड़खड़ाना यहां तक कि पार्टी से अलग होने पर अपने साथी से संबंध बनाए जाने की घटना तकरीबन हर पार्टी में होती है, क्योंकि यहां लड़कियां खुल कर तबीयत से पीती हैं.

सेक्स को ले कर यहां देश के अन्य क्षेत्रों सरीखी पाबंदियों नहीं हैं. उन्मुक्त जीवनशैली यहां की पहचान है. निजता का सम्मान भी यहां काफी होता है. इस लिहाज में मुंबई थोड़ा वैस्टर्न स्टेटस जैसा है भारत के लिए.

कुछ पी कर हंगामा भी करती हैं. एक नेपाली अभिनेत्री, जो हिंदी फिल्मों में बड़ी पारी खेल चुकी है, नशा कर के इतना हंगामा करती रही है कि उस की सोसायटी का वाचमैन उसे डंडे से मार कर उस के फ्लैट तक पहुंचाता था.

रोमांस उन का चलता है, सड़कों, पार्कों, बीच व लोकल टे्रन में, सभी जगह वे एकदूसरे से सटे चोंच लड़ाते व रोमांस करते नजर आते हैं. इस शहर का जितना रोमांटिक मिजाज है उतना ही दोस्ताना भी. दोस्तों पर जीजान लुटाने वालों का शहर है यह. यहां कंजूसी या खूसट लोगों के लिए कोई जगह नहीं है. फिल्मी हस्तियां मेहरबान हो कर कार तक तोहफे में दे देते हैं.

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वाकई बड़ा दिलचस्प शहर है यह. जो कहते या सोचते हैं कि मुंबई से फिल्म इंडस्ट्री को कहीं और शिफ्ट किया जाए, वे हवाईकिले बनाते हैं. न तो कहीं मुंबई जैसे बड़े होटल्स हैं, न यहां का मस्तीभरा बेफिक्र अंदाज. न यहां की तरह सुरक्षित लाइफ स्टाइल है, न कहीं इस तरह निजता की इज्जत करने का जज्बा. सभी दूसरों की आजादी का खयाल करते हैं, मिल कर रहते हैं, मुसकराते हैं और गाते हैं. यहां गालीगलौज, दंगाफसाद जैसी घृणित बातों को पसंद नहीं किया जाता. सभी कम्युनिटी के लोग मिल कर रहते हैं इसलिए तो इसे ‘मुंबई मेरी जान’ और ‘आमची मुंबई’ जैसे उपनामों से बुलाते हैं.

आखिर गरमियों में भी क्यों ठंडा रहता है मधुमक्खी का छत्ता?

मधुमक्खियों का काफी घना छत्ता होता है. ये छत्तों में एक साथ रहती हैं. क्या आप जानते हैं, फिर भी इनको गरमी के मौसम में ठंडक का एहसास मिलता है.

एक शोध के अनुसार, मधुमक्खियां अपने छत्ते का निर्माण ही कुछ इस प्रकार करती हैं कि जिससे गर्मियों में वह हवादार बना रहता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जब मधुमक्खियों को ऐसा लगता है कि छत्ते के भीतर गर्माहट आ गई है या छत्ता अंदर से काफी गर्म हो गया है तो कुछ मधुमक्खियां छत्ते के प्रवेश द्वार या छिद्रों के पास चली जाती हैं और अपने पंखों को फडफ़ड़ाने लगती हैं जैसे कि पंखा चल रहा हो. इस प्रकार वे अंदर की गर्मी को बाहर निकाल देती हैं.

यह शोध-पत्र जर्नल औफ रौयल सोसायटी इंटरफेस में प्रकाशित हुआ है.

इसमें शोधकर्ताओं ने मानव निर्मित कई मधुमक्खियों के छत्तों पर प्रयोग किया. इसमें देखा गया कि पंखों को फडफ़ड़ाकर मधुमक्खियां अपने छत्ते को हवादार बनाती हैं और गर्मियों में भी अपने घरों में ठंडक का एहसास करती हैं.

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