बौलीवुड में अक्षय कुमार उन कलाकारों में से हैं, जो कि अब तक 22 नए निर्देशकों व बीस के करीब नए कलाकारों के साथ अभिनय कर चुके हैं. अक्षय कुमार ने मल्टीस्टारर फिल्मों में छोटे किरदार निभाने से भी परहेज नहीं किया. फिल्म ‘‘मिशन मंगल’’ में उन्होंने पांच हीरोईन व तीन हीरों के साथ अभिनय किया है. जबकि वे इस फिल्म के निर्माता भी हैं. मगर वह इन दिनों एक नवोदित कलाकार की एक मांग से काफी आहत हैं.

हाल ही में जब अक्षय कुमार से हमारी एक्सक्लूसिव बातचीत हुई और फिल्म ‘‘मिशन मंगल’’ में पांच हीरोईन के साथ एक छोटा किरदार निभाने की चर्चा चली, तो अक्षय कुमार ने अपने दिल का दर्द बयां कर ही दिया. अक्षय कुमार ने कहा- ‘‘यह मेरी सोच नहीं है. मेरी राय में यदि कोई फिल्म ‘ग्रेट’ फिल्म है, मैं बड़ी फिल्म की बात नहीं कर रहा, यदि फिल्म की कहानी की ग्रेटनेस है, तो मुझे उस फिल्म में एक छोटा सा किरदार करने से भी परहेज नही है. मैं यह नहीं देखता कि फिल्म में मेरा किरदार लंबा है या छोटा. मैंने अतीत में भी कई ऐसी फिल्में की हैं, जिन्हें करने से लोग कतरा सकते थे. क्योंकि उनके किरदार छोटे थे. पर मैंने की थी. मेरी जो सोच है, वह हौलीवुड के कलाकारों की तरह है. हौलीवुड का कोई भी कलाकार हमेशा कहानी व चरित्र के महत्व पर गौर करता है. वह किरदार की लंबाई पर ध्यान नही देता. यही मेरी सोच है.’’

अक्षय कुमार आगे कहते हैं- ‘‘मसलन, राज कुमार संतोषी निर्देशित फिल्म ‘खाकी’ को लें. इस फिल्म में इंटरवल के बाद मेरे किरदार शेखर वर्मा की मौत हो जाती है. लेकिन जब राजकुमार संतोषी साहब ने मुझे यह फिल्म सुनायी, तो कहानी सुनते ही मैंने कहा कि यह कमाल की कहानी है. और मैं शेखर वर्मा का किरदार करना चाहूंगा. जबकि राजकुमार संतोषी ने यह किरदार परेश रावल के लिए लिखा था. मेरी बात सुनकर राजकुमार संतोषी जी ने आश्चर्य चकित होते हुए मुझसे पूछा, ‘क्या बात करते हैं. आप इस किरदार को करना चाहेंगे. और मैंने यह किरदार निभाया था.’

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इसके बाद अक्षय कुमार ने रहस्योद्घाटन सा करते हुए एक नवोदित कलाकार की आहत करने वाली मांग को लेकर कहा- ‘‘खैर, मेरे छोटे किरदार निभाने की बात अलग है. मैं आपसे दो चार दिन पहले की घटना का जिक्र करना चाहूंगा,  मगर कलाकार का नाम नहीं लूंगा. आपके सवाल ने ही मुझे यह घटना फिर से याद दिला दी. एक दो हीरो की बेहतरीन कहानी वाली फिल्म पर काम हो रहा है. इस फिल्म के लिए एक नए हीरो से बातचीत हुई. यह नया लड़का है. अभी तक इसने 5 -6 फिल्में की हैं, जिसमें से उसकी 2-3 फिल्मों ने कुछ ज्यादा ही सफलता हासिल कर ली. तो इस कलाकार ने मांग रखी है कि, ‘‘सबसे पहले मेरा सोलो पोस्टर आएगा. उसके बाद हम दोनों का एक साथ वाला पोस्टर आएगा.’’ मैं उसकी यह मांग सुनकर हैरान हो गया. मुझे लगा कि आखिर उसके दिमाग में इस तरह की सोच आयी कहां से कि पहले उसका सोलो पोस्टर आएगा. जबकि हम सभी जानते हैं कि सिर्फ पोस्टर से कुछ होना नही है. मगर उसकी यह सोच है. अब आप खुद सोच लें कि यह कलाकार ‘मिशन मंगल’ जैसी फिल्म तो जिंदगी में नहीं करेगा, जिसमें पांच महिला किरदार हैं. यह कलाकार तो अपनी पूरी जिंदगी में 3 हीरो वाली या 2 हीरो व 2 हीरोईन वाली फिल्म भी नहीं कर सकता.’’

वे आगे कहते हैं- ‘‘शायद उसको लगता है कि जब उसका पहला सोलो पोस्टर आएगा, तो वे बहुत बड़ी उंचाई पर नजर आएंगे. और उसके साथ वाला हीरो उससे कमतर होगा. अब ऐसा कलाकार अपनी इस सोच के कारण कहां जाएगा, मैं कुछ कहना नही चाहता.’’

अक्षय कुमार ने शायद इस नवोदित कलाकार को कुछ समझाने के मकसद से अभिनेता जीतेंद्र का जिक्र करते हुए कहा- ‘‘मुझे तो जीतेंद्र साहब की कार्यशैली व उनकी सोच हमेशा पसंद आयी. मैंने तो जीतेंद्र साहब की तमाम फिल्में देखी हैं. जब मैं उनके करियर पर गौर करता हूं, तो पाता हूं कि उन्होंने कभी भी किरदार की लंबाई के बारे में नहीं सोचा. मजेदार बात यह हैं कि वह तो तमाम नारीप्रधान फिल्मों में हीरो बनकर आए. फिल्म का नाम ज्योति, कहानी ज्योति पर लेकिन हीरो जीतेंद्र होते थे. इसी तरह फिल्म का नाम ‘आशा’ और हीरो जीतेंद्र. मैंने देखा कि उन्होंने इस तरह की फिल्में धनाधन की हैं. उन्होंने कभी भी निर्माता से यह नहीं कहा होगा कि फिल्म का नाम ‘ज्योति’ से बदलकर जौन कर दो. पर आज के इस कलाकार ने तो मुझे हैरत में डाल दिया.’’

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