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शतशत नमन

अपुन का देश वाकई महान है. इतिहास गवाह है कि पुराने जमाने में विदेशियों के लिए यह सोने की चिडि़या और देशियों के लिए 33 करोड़ देवीदेवताओं का निवास स्थान था. समय बदला, बहुत कुछ बदला मगर अपुन के देश की महानता में कोई कमी नहीं आई. आज भी 33 करोड़ से ज्यादा देवीदेवता अपने कर्मों से इस पावन भूमि को पवित्र कर रहे हैं.

जी नहीं, आप गलत समझे. मेरा उद्देश्य अंधविश्वास फैलाना कदापि नहीं है. मैं सच्चीमुच्ची के देवीदेवताओं की बात कर रहा हूं. क्या कहा? इस कलयुग में देवीदेवता कहां से आ गए? अरे भाई, मेरे हिसाब से देवीदेवता वे होते हैं जो जादू से या किसी और तरकीब से असंभव को संभव बना दें. किसी नई सृष्टि की रचना कर दें. छोटे को बड़ा और बड़े को छोटा कर दें. ऐसे महान पुरुषार्थी हमारे देश के कणकण में या कहें हर गलीकूचे में विद्यमान हैं. बस, जरूरत उन्हें पहचानने की है. मेरा उन से अकसर सामना होता रहता है. आप का भी होता होगा, लेकिन आप उन में छिपे देवत्व को पहचान नहीं पाए. अगर पहचान जाते तो मेरी तरह आप भी लेखक न बन जाते.

खैर…बहस से क्या फायदा. मैं न तो कृपण हूं और न ही स्वार्थी. इसलिए जिन देवताओं के मैं ने दर्शन किए हैं उन के निस्वार्थ भाव से आप को भी दर्शन करा रहा हूं. चाहें तो थोड़ी सी दुआ दे दीजिएगा या नहीं भी देंगे तो भी चलेगा.

मेरे हिसाब से देवता नंबर वन है मेरा दूध वाला, जिसे मैं ‘दूधिया देवता’ कहता हूं. किसी जमाने में अपुन के देश में दूधघी की नदियां बहती होंगी मगर हम जब से जानने वाले हुए, गरमियां आते ही दूध गायब हो जाता था. शहरों में खोए और छेने की मिठाइयां प्रतिबंधित हो जाती थीं. लौकी और नारियल की मिठाइयां खाखा कर हम जवान हुए.

अब जिस हिसाब से लोगों में गायभैंस पालने का रुझान कम हो रहा है, मुझे लगता है कि हमारे बच्चे ब्लैक में दूध खरीद कर पिएंगे. मगर वाह रे ‘दूधिया देवता’, दूध की तो गायभैंस से डिपेंडेंसी ही खत्म कर दी. सीधे यूरिया और शैंपू से दूध बनाने लगे. सारी कमी दूर हो गई. आज गायभैंस भले ही न दिखें मगर दूध की कोई कमी नहीं. जितना चाहो हाजिर है. सच कहा जाए तो एक बार फिर दूधघी की नदियां बह रही हैं. ऐसा चमत्कार कोई देवता ही कर सकता है.

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मेरा दूसरा देवता है मेरा सब्जी वाला जिसे मैं ‘लौकिया देवता’ कहता हूं. पुराने जमाने में अपने यहां ‘योग’ को कोई पूछता नहीं था लेकिन जब से यह चोला बदल पश्चिमी देशों से ‘योगा’ के नाम से लौटा है, चमत्कार हो गया है. चारों ओर योग उर्फ योगा की बहार छाई है. एक ‘आ’ का डंडा (ा) लग जाने से कितना सशक्तिकरण हो सकता है इस से बढि़या उदाहरण अन्यत्र दुर्लभ होगा.

छोटेबड़े सारे टीवी चैनल इसी के प्रचारप्रसार में जुटे हैं. एक बाबा ने लौकी का जूस पीने का नारा बुलंद किया तो पूरा देश लौकी पीने में जुट गया. डिमांड बढ़ी, सप्लाई घटी और प्रोडक्ट मार्केट से गायब. अर्थशास्त्र का पुराना सिद्धांत यहां भी लागू हो गया. लौकियापन में लौकी के भाव आसमान पर चढ़ गए और लोगबाग झोला लिए दीवानों की तरह लौकी की तलाश में दरदर भटकने लगे. संकट देख ‘लौकिया देवता’ सामने आए. फटाफट लौकी की बेल में 20-20 पैसे वाले इंजेक्शन लगाने लगे. रात भर में छोटीछोटी लौकियां फटाफट 2-2 फुट की हो गईं. जितना चाहो खाओ, जितना चाहो पिओ. कोई कमी नहीं. ऐसा अद्भुत चमत्कार कोई देवता ही कर सकता है.

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मेरा तीसरा देवता है मेरा केमिस्ट जिसे मैं ‘धर्मराज’ कहता हूं. सभी जानते हैं कि यह संसार दुखों का सागर है फिर भी मोहमाया में फंस कर लोग लंबे समय तक यहां दुख भोगते रहते हैं. लाइलाज बीमारियों में भी डाक्टर लोग पानी की तरह पैसा बहाव कर मरीज को घसीटते रहते हैं. भले ही इलाज के चक्कर में बाकी पूरा परिवार तबाह हो जाए.

मेरा केमिस्ट बहुत धर्मात्मा है. लोगों का कष्ट उस से देखा नहीं जाता. इसलिए बड़ीबड़ी नामी कंपनियों की दवाएं लोकल लेविल पर ही बनवा लेता है. उन्हें खाते ही सीधे बैकुंठ धाम का टिकट प्राप्त होता है. सारे झंझटों से मुक्ति, सीधे मोक्ष. धर्म के ऐसे काम कोई देवता ही कर सकता है.

मेरा चौथा देवता है मेरे महल्ले का पंसारी जिसे मैं ‘अन्न देव’ कहता हूं. हरितक्रांति और नईनई टेक्नोलौजी के दम पर खेतों की फसल तो खूब बढ़ी मगर बढ़ती आबादी के आगे सब बेकार. जिस देश में करोड़ों पेट डेली खाना खाने के लिए तैनात हों वहां कोई कितना अनाज उपजाएगा? जित्ती फसल बढ़ाओगे, अगले साल उस से ज्यादा आबादी भोजन भक्षने के लिए तैयार.

अनाज और आबादी के बीच का यह गैप साल दर साल बढ़ता ही जा रहा था. इसे पूरा करने का बीड़ा उठाया हमारे ‘अन्न देव’ ने. अरहर की दाल में खेसारी, आटे में खडि़या, सरसों के तेल में भूसी का तेल, हलदी में पिसी ईंट, कालीमिर्च में पपीते के बीज, धनिया में घोड़े की लीद और जाने क्याक्या में क्याक्या मिलाया पर भले आदमी ने किसी चीज की कमी नहीं होने दी. जो भी उस के दर पर गया उसे मुंहमांगा सामान दिया. ऐसा समृद्ध भंडार तो मां अन्नपूर्णा का भी नहीं होगा.

मेरा 5वां देवता है मेरा घी का सप्लायर जिसे मैं ‘घृत देव’ कहता हूं. द्वापर में गोकुल की गोपियां अपने कपड़े यमुना के तट पर रख कर स्नान करती थीं. इस से बड़ी अव्यवस्था फैलती थी. एक दिन कृष्ण सब के चीरहरण कर पेड़ पर जा बैठे. काफी मानमनौअल के बाद जब सब ने खुल्लमखुल्ला स्नान न करने की हामी भरी तब कपड़े वापस हुए. इस तरह एक बुराई का नाश हुआ.

आधुनिक युग में भी जिस को देखो वह डब्बा भरभर कर देशी घी के लड्डू लिए मंदिर में लाइन लगाए रहता था. घर में बच्चे भूखों मरते थे और पंडितपुजारी माल उड़ाते थे. ‘घृत देव’ ने इस बुराई का नाश करने के लिए अपनी माया से चरबी को देशी घी में बदल दिया. इस से एक तरफ बदनसीब जानवरों की चरबी सड़ने से बच गई, दूसरी तरफ मंदिरों में लड्डू चढ़ने बंद हो गए. घी बचा तो बच्चों के पेट में पहुंचा जिस से देशवासियों का शरीर मजबूत हुआ. न यकीन हो तो किंग खान के सिक्स-पैक-ऐब्स और गजनी की बाडी देख लो. इसी सुधार के बाद पहली बार देश के पहलवानों ने ओलिंपिक में मेडल भी जीता है वरना पहले बड़ेबड़े पहलवान खाली मिट्टी छू कर लौट आते थे. ऐसा चमत्कार ‘घृत देव’ की कृपा से ही संभव हुआ है.

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मेरा छठा देवता है…क्या कहा, आप को इतने में ही ज्ञान प्राप्त हो गया है. बाकी के देवता अब आप खुद ढूंढ़ लेंगे. सच्ची बात, ईश्वर की तलाश स्वयं करनी चाहिए. किसी दूसरे के भरोसे नहीं रहना चाहिए.

अंत में आप सब का ज्यादा समय न ले कर बस, इतनी विनती करूंगा कि अगर आप को ऐसे अन्य देवताओं के दर्शन हो जाएं तो दूसरों को भी बता दीजिएगा, क्योंकि अपना देश अज्ञानियों से भरा हुआ है और अज्ञानतावश कहीं वे इन देवताओं के दर्शन से चूक न जाएं.

दीवारों को सजाने के लिए अपनाएं ये 4 टिप्स

घर की रौनक बढ़ाने के लिए दीवारों को सजाना बहुत जरुरी है. पर दीवारों को सजाने के लिए आपके पास बेहतरीन आइडियाज होनी चाहिए और इसके साथ-साथ आपका बजट भी. आपके बजट को ध्यान में रखते हुए कुछ बेहतरीन आइडियाज आपको बताते हैं.

  1. घर के बड़े हौल या बारांडे को रिच लुक देने के लिए आपकी कोई खूबसूरत साड़ी या कढ़ाईदार कपड़ा काम आ सकता है. कार्डबोर्ड के चौकोर टुकड़े दीवार पर लगाकर आप अपने कमरे को शाही लुक दे सकती हैं.

2. स्कार्फ, चादर या स्टोल, किसी अच्छे प्रिंट वाले क‌िसी एक कपड़े से भी आप दीवार को डिजाइनर लुक दे सकती हैं इसके लिए बड़े प्रिंट अच्छा विकल्प हैं.ध्यान रखें कपड़े का बेस रंग दीवार के रंग जैसा ही होना चाहिए.

3. पुराने फ्रेम से दीवार सजाने के ल‌िए कोई महंगी पेंटिंग खरीदने के बजाय आप प्रिंटेड वालपेपर, हाथ से बनी पेंटिंग, पैच वर्क जैसा कोई भी प्रयोग कर सकते हैं.लिविंग रूम व स्टडी रूम में इस तरह का प्रयोग काफी फबेगा.

4. एक साइज के कई गोल पैच, या एक जैसे आकार के पैच को बड़े से कार्डबोर्ड पर चिपकाएं. इसे आप पलंग के ऊपर बेडरूम में लगाकर बेडरूम को ड‌िजाइनर बना सकती हैं.

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रिया चक्रवर्ती संग अफेयर की खबरों पर सुशांत ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा

बौलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के अफेयर की खबरें अक्सर चर्चे में रहती है. अब सुशांत का नाम रिया चक्रवर्ती के साथ जोड़ा जा रहा है. हाल ही में सुशांत रिया के जन्मदिन पर उनके साथ लद्धाख के ट्रिप पर भी गए थे. खबरों के अनुसार सुशांत ने एक बेशकीमती लौकेट भी रिया को गिफ्ट किया है. आए दिन सुशांत और रिया लंच और डिनर डेट पर जाते हुए स्पौट किए जाते हैं.

 

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हालांकि दोनों ने इस रिश्ते को लेकर औफिसियली अनाउंसमेंट नहीं किया है. लेकिन सुशांत राजपूत ने अफेयर की खबरों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सुशांत ने कहा है कि लोगों को शुरुआत से ही बातें बनानी शुरू नहीं करनी चाहिए. सुशांत ने आगे कहा कि, ‘मैं सिर्फ अपने से रिलेटेड चीजों पर बात करना पंसद करता हूं,  अगर बात किसी दूसरे शख्स की होती है तो मैं उस बारे में बात करने से बचता हूं.

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आपको बता दें, फिल्म सोन-चिरैया में सुशांत नजर आए थे. यह फिल्म बौक्स औफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई. वैसे जल्द ही सुशांत सिंह राजपूत धर्मा प्रोडक्शन की नई फिल्म ड्राइव में नजर आने वाले है. इस फिल्म में सुशांत के साथ बौलीवुड अदाकारा जैकलीन फर्नांडीस भी नजर आने वाली है.

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बेईमानी का नतीजा : राम शास्त्री का क्या हुआ

लेखक- बीएन लक्ष्मीनारायण

आधी रात का समय था. घना अंधेरा था. चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ था. ऐसे में रामा शास्त्री के घर का दरवाजा धीरे से खुला. वे दबे पैर बाहर आए. उन का बेटा कृष्ण भी पीछेपीछे चला आया. उस के हाथ में कुदाली थी. रामा शास्त्री ने एक बार अंधेरे में चारों ओर देखा. लालटेन की रोशनी जहां तक जा रही थी, वहां तक उन की नजर भी गई थी. उस के आगे कुछ भी नहीं दिख रहा था.

रामा शास्त्री ने थोड़ी देर रुक कर कुछ सुनने की कोशिश की. कुत्तों के भूंकने की आवाज के सिवा कुछ भी नहीं सुनाई दे रहा था. रामा शास्त्री ने अपने घर से सटे हुए दूसरे घर का दरवाजा खटखटाया और पुकारा, ‘‘नारायण.’’

नारायण इसी इंतजार में था. आवाज सुनते ही वह फौरन बाहर आ गया. ‘‘सबकुछ तैयार है. चलें क्या?’’ रामा शास्त्री बोले.

‘‘हां चलो,’’ कह कर नारायण ने घर में ताला लगा दिया और उन के पीछे हो लिया. उस के हाथ में टोकरी थी. उस की बीवी और बच्चे मायके गए थे. रामा शास्त्री लालटेन ले कर आगेआगे चलने लगे और कृष्ण व नारायण उन के पीछे चल पड़े.

रामा शास्त्री और उन का छोटा भाई नारायण पहले एक ही घर में रहते थे. छोटे भाई की 2 बेटियां थीं. रामा शास्त्री का बेटा कृष्ण 25 साल का था. उस की शादी अभी नहीं हुई थी. नारायण की बेटियां अभी छोटी थीं. घर में जेठानी और देवरानी में पटती नहीं थी. उन दोनों में हमेशा किसी

न किसी बात को ले कर झगड़ा होता रहता था. अपने मातापिता के जीतेजी नारायण व रामा शास्त्री बंटवारा नहीं करना चाहते थे. मातापिता की मौत के बाद दोनों भाइयों और उन की बीवियों के बीच मनमुटाव बढ़ गया. अंदर सुलगती आग अब भड़क उठी थी.

नारायण का मिजाज कुछ नरम था पर रामा शास्त्री चालबाज थे. भाई और भाभी की बातों में आ कर नारायण अपनी बीवी को अकसर पीटता रहता था. उस की नासमझी का फायदा उठा कर रामा शास्त्री ने चोरीछिपे कुछ रुपए भी जमा कर रखे थे. नारायण के साथ जो नाइंसाफी हो रही थी, उसे देख कर गांव के कुछ लोगों को बुरा लगता था. उन्होंने नारायण को बड़े भाई के खिलाफ भड़का दिया.

नतीजतन एक दिन दोनों के बीच जबरदस्त झगड़ा हुआ और घर व जमीनजायदाद का बंटवारा हो गया. मातापिता की मौत के बाद 3 महीने के अंदर ही वे अलग हो गए. सब बंटवारा तो ठीक से हो गया, मगर बाग को ले कर फिर झगड़ा शुरू हो गया. रामा शास्त्री बाग को अपने लिए रखना चाहते थे. इस के बदले में वे सारी जायदाद छोड़ने के लिए तैयार थे. लेकिन 6 एकड़ के बाग में नारायण अपना हिस्सा छोड़ने को तैयार नहीं था.

बाग में 3 सौ नारियल के पेड़ और सौ से ज्यादा सुपारी के पेड़ थे. उस से सटी हुई 6 एकड़ खाली जमीन भी थी. बाकी जमीन भी बहुत उपजाऊ थी. बाग से जितनी आमदनी होती थी, उतनी बाकी जमीन में भी होती थी. लेकिन नारायण की जिद की वजह से बाग का भी 2 हिस्सों में बंटवारा हो गया.

रामा शास्त्री ने अपने हिस्से के बाग में जो खाली जगह थी, वहां रहने के लिए मकान बनवाना शुरू कर दिया. इसी चक्कर में एक दिन शाम को मजदूरों के जाने के बाद कृष्ण नींव के लिए खोदी गई जगह का मुआयना कर रहा था. वह एक जगह पर कुदाली से मिट्टी हटाने लगा, क्योंकि वहां मिट्टी अंदर से खिसक रही थी.

कृष्ण ने 2 फुट गहराई का गड्ढा खोद डाला. नीचे एक बड़ा चौकोर पत्थर था. उस के नीचे एक लोहे का जंग लगा ढक्कन था, मगर वह उसे खोल नहीं सका. उस ने सोचा कि वहां कोई राज छिपा हुआ होगा. वह मिट्टी से गड्ढा भर कर वापस घर लौट गया. उस ने अपने पिता को सबकुछ बताया. रामा शास्त्री ने बेटे के साथ आ कर अच्छी तरह से गड्ढे की जांच की. देखते ही देखते उन का चेहरा खिल उठा. उन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वे कुछ पलों तक सुधबुध खो कर बैठ गए.

कुछ देर बाद रामा शास्त्री ने इधरउधर देखा और कहा, ‘‘कृष्ण, मिल गया… मिल गया.’’ 4-5 पीढि़यों पहले रामा शास्त्री का कोई पुरखा किसी राजा का खजांची रह चुका था. वह अपने एक साथी के साथ राजा के खजाने का बहुत सा धन चुरा कर भाग गया था. राजा को इस बात का पता चल गया था.

राजा ने सैनिकों को चारों ओर भेजा, लेकिन वे चोर तलाशने में नाकाम रहे. राजा ने चोरों के घर वालों को तमाम तकलीफें दीं, मगर कुछ भी नतीजा नहीं निकला. इस के बाद सभी पीढ़ी के लोग मरते समय अपने बेटों को यह बात बता कर जाते. लेकिन किसी को भी वह छिपाया गया खजाना नहीं मिला था.

रामा शास्त्री ने तय किया था कि अगर उन्हें खजाना मिल गया तो वे एक मंदिर बनवाएंगे. उन का सपना अब पूरा होने वाला था. बापबेटा दोनों लोहे का ढक्कन हटाने की कोशिश कर रहे थे कि उसी समय नारायण भी वहां आ गया. उस का आना रामा शास्त्री व कृष्ण दोनों को अच्छा नहीं लगा.

उन की बेचैनी देख कर नारायण को कुछ शक हुआ और इस काम में वह भी शामिल हो गया. तीनों ने मिल कर उस ढक्कन को हटा दिया. उस के नीचे भी मिट्टी ही थी. लेकिन वहां कुछ खोखला था. लकड़ी के तख्त पर मिट्टी बिछी हुई थी. उन को यकीन हो गया कि अंदर कोई खजाना है.

इतने में दूर से किसी की बातचीत सुनाई पड़ी, इसलिए उन्होंने गड्ढे पर पत्थर रख दिया. फिर रात को दोबारा आ कर खजाना निकालने की योजना बनाई गई.

आधी रात को कुदाली ले कर तीनों चल पड़े. वे गांव के मंदिर के पास वाली पगडंडी से होते हुए बाग की ओर चल पड़े. वे चारों ओर सावधानी से देखते हुए चल रहे थे. दूर से किसी की आहट सुन कर वे लालटेन बुझा कर पास के इमली के पेड़ की आड़ में छिप गए.

पड़ोस के गांव गए 2 लोग बातें करते हुए वापस आ रहे थे. नजदीक आतेआते उन की बातें साफ सुनाई दे रही थीं. एक ने कहा, ‘‘इधर कहीं आग की लपट दिखाई दी थी न?’’

दूसरे ने कहा, ‘‘हां, मैं ने भी देखी थी… आग का भूत होगा.’’ पहला आदमी बोला, ‘‘सचमुच भूत ही होगा. उसे परसों रंगप्पा ने यहीं देखा था. इस इमली के पेड़ में मोहिनी भूत है.

‘‘रंगप्पा अकेला आ रहा था. पेड़ के पास कोई औरत सफेद साड़ी पहने खड़ी थी. उसे देख कर रंगप्पा डर कर घर भाग गया था. उस के बाद वह 3 दिनों तक बीमार पड़ा रहा.’’ तभी इमली के पेड़ से सरसराहट की आवाज सुनाई दी.

‘भूत… भूत…’ चिल्ला कर वे दोनों तेजी से भागे. कुछ देर बाद रामा शास्त्री, नारायण और कृष्ण पेड़ की आड़ से बाहर निकल कर बाग की ओर चल पड़े. बाग के पास पहुंच कर उन्होंने कुछ देर तक आसपास का जायजा लिया. वहां कोई न था. दूर से सियारों की आवाज आ रही थी. फिर तीनों वहां खड़े हो गए, जहां खजाना गड़ा होने की उम्मीद थी.

कृष्ण कुदाली से मिट्टी खोदने लगा, तो नारायण टोकरी में भर कर मिट्टी एक तरफ डालता रहा. रामा शास्त्री आसपास के इलाके पर नजर रखे हुए थे. लोहे का ढक्कन हटा कर नीचे की मिट्टी निकाल कर एक ओर फेंक दी गई. उस के नीचे मौजूद लकड़ी के तख्त को भी हटा दिया गया, तख्त के नीचे एक गोलाकार मुंह वाला गहरा गड्ढा नजर आया. उस की गहराई करीब

6 फुट थी. लालटेन की रोशनी में अंदर कुछ कड़ाहियां दिखाई पड़ीं. नारायण गड्ढे के अंदर झांक कर देख रहा था तभी रामा शास्त्री ने कृष्ण को कुछ इशारा किया. अचानक नारायण के सिर पर एक बड़े पत्थर की मार पड़ी. वह बिना आवाज किए वहीं लुढ़क गया.

दोबारा पत्थर की मार से उस का काम तमाम हो गया. उस की लाश को बापबेटे ने घसीट कर एक ओर फेंक दिया. रामा शास्त्री लालटेन हाथ में ले कर खड़े हो गए. कृष्ण गड्ढे में कूद पड़ा. गड्ढे में जहरीली गैस की बदबू भरी थी. कृष्ण को सांस लेने में मुश्किल हो रही थी. उस ने लालटेन की रोशनी में अंदर चारों ओर देखा.

दीवार से सटी हुई 6 ढकी हुई कड़ाहियां रखी हुई थीं. कृष्ण ने कुदाली से एक कड़ाही के मुंह पर जोर से मारा, तो उस का ढक्कन खुल गया. उस में चांदी के सिक्के भरे थे. दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वे उस सारे खजाने के मालिक थे. तभी कृष्ण की नजर वहां एक कोने में पड़ी हुई किसी चीज पर पड़ी. वह जोर से चीख उठा. डर से उस का जिस्म कांपने लगा.

रामा शास्त्री ने परेशान हो कर भीतर झांक कर देखा तो वे भी थरथर कांपने लगे. वहां 2 कंकाल पड़े थे. वे शायद खजांची और उस के साथी के रहे होंगे. रामा शास्त्री ने किसी तरह खुद को संभाला और बेटे को हौसला बंधाते हुए एकएक कर सभी कड़ाहियां ऊपर देने को कहा.

कड़ाहियां भारी होने की वजह से उन्हें उठाना कृष्ण के लिए मुश्किल हो रहा था. जहरीली गैस की वजह से उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी. कृष्ण ने बहुत कोशिश कर के एक कड़ाही को कमर तक उठाया ही था कि उस का सिर चकरा गया और आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वह कड़ाही लिए हुए नीचे गिर गया.

रामा शास्त्री घबरा कर कृष्ण को पुकारने लगे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. परेशान हो कर वह भी गड्ढे में कूद पड़े. जहरीली गैस की वजह से उन से भी वहां सांस लेना मुश्किल हो गया. उन्होंने कृष्ण को उठाने की कोशिश की, लेकिन उठा न सके. वह भी बेदम हो कर नीचे गिर पड़े. बाप और बेटे फिर कभी नहीं उठे. वे मर चुके थे.

हिना खान का सिरफिरा आशिक बनेगा ये एक्टर

एक्ट्रेस हिना खान छोटे पर्दे पर धमाल मचाने के बाद बौलीवुड की दुनिया में दस्तक देने वाली हैं. सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के जरिए हिना  खान ने टीवी इंडस्ट्री में एंट्री की थी. और इस सीरियल से वे अक्षरा के किरदार में काफी मशहूर हुई.

हाल ही में उन्हें एकता कपूर के सीरियल ‘कसौटी जिंदगी के 2’ में ‘कौमोलिका’ के किरदार में नजर आई थी. इसके बाद वे अपनी शौर्ट फिल्म ‘लाइन्स’ की शूटिंग पूरी की. अब वे जल्द ही विक्रम भट्ट की फिल्म ‘हैक्ड’ में नजर आएंगी. इस फिल्म को इस साल ही रिलीज होना था, पर किसी कारणवश ये फिल्म होल्ड पर रह गई.

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आपको बता दें, हिना खान इस फिल्म की शूटिंग भी शुरु करने वाली हैं. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक इस फिल्म में एक और धमाकेदार एक्टर की एंट्री हो चुकी है. जी हां डिजिटल प्लेटफौर्म पर धमाल मचाने वाले रोहन शाह इस फिल्म में दमदार भूमिका अदा करने वाले है. बता दें, रोहन कई टीवी शोज के साथ-साथ फिल्मों में भी काम कर चुके हैं. ऋतिक रोशन की फिल्म कृष 3 में विवेक ओबेरौय के बचपन का रोल रोहन ने प्ले किया था.

 

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फिल्म “हैक्ड” में रोहन शाह  सिरफिरे आशिक का किरदार निभाने वाले हैं. हिना के प्यार में रोहन पागल होते हुए नजर आएंगे. खबरों के अनुसार रोहन का कहना है कि वह इस फिल्म की शूटिंग को लेकर काफी एक्साइटेड है. उन्होंने ये भी कहा है कि मैंने कभी भी ऐसा रोल नहीं निभाया है और ना ही मैंने पर्दे पर लम्बे समय से इस तरह का किरदार देखा है. मेरे किरदार के चलते ही इस फिल्म में कई ट्विस्ट आने वाले है. तो एक अभिनेता के तौर पर मेरे लिए ये सपने के सच होने जैसा है.

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ऐडवेंचर और नेचर का संगम कुंभलगढ़

आप अगर कभी राजस्थान घूमने का मन बनाते हैं, तो वहां के रेतीले टीले और सूखे व कटीले जंगल ही जेहन में आते हैं, जबकि राजस्थान पहाड़ों, झीलों का भी शहर है. राजस्थान का कुंभलगढ़ एक ऐसा ही खास स्थान है, जो देश में ही नहीं विदेशों में भी मशहूर है. यहां पूरे साल पर्यटकों का तांता लगा रहता है. उदयपुर से 80 किलोमीटर दूर व समुद्रतल से 1087 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह शहर अरावली पहाडि़यों में स्थित है. यह शहर दुर्ग, प्राकृतिक अभयारण्य, झीलों, कला और

संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है. वैसे तो यहां हर मौसम में पर्यटक आते हैं पर मौनसून में इस की हरियाली देखने के लिए पर्यटकों का तांता लग जाता है. यहां उदयपुर से बस या प्राइवेट टैक्सी ले कर पहुंचा जा सकता है. इस के बाद स्थानीय जगहों पर घूमने के लिए साधन उपलब्ध हैं.

यहां की आकर्षक जगहें

ट्रैवल डैस्क पर काम करने वाले प्रशांत कुमार झा बताते हैं कि कुंभलगढ़ में कुंभलगढ़ का फोर्ट, हमीर की पाल, कुंभलगढ़ वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी, अरावली की ऊंचीऊंची पहाडि़यां, हल्दीघाटी म्यूजियम आदि सभी देखने योग्य हैं. लेकिन इन में कुंभलगढ़ के फोर्ट की अपनी एक अलग खासीयत है. राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित यह किला चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सब से बड़ी दीवार है. यह 150 किलोमीटर एरिया में फैला है. यहां की जलवायु मौडरेट होने की वजह से साल भर सैलानी यहां घूमने आते हैं. अमेरिका, फ्रांस, जरमनी और इटली के टूरिस्ट यहां पूरा साल देखे जा सकते हैं.

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कुंभलगढ़ किले के बारे में कहा जाता है कि यह दुर्ग मेवाड़ के यशस्वी राजा रण कुंभा ने अपनी सूझबूझ और प्रतिभा से बनाया था. यह किला मेवाड़ों की संकटकालीन राजधानी होने के साथसाथ महाराणा प्रताप का जन्मस्थान भी है. इस किले को अजेयगढ़ भी कहा जाता है, क्योंकि इस किले पर विजय प्राप्त करना असंभव था. इस का निर्माणकार्य पूरा होने में 15 वर्ष लगे थे. इस किले में प्रवेशद्वार, प्राचीर, जलाशय, बाहर जाने के लिए संकटकालीन रास्ता, महल, स्तंभ, छत्रियां आदि हैं.

फैशन शौप चलाने वाले दिनेश मालवीय कहते हैं कि कुंभलगढ़ का किला देखने सालों से पर्यटक आते रहे हैं, क्योंकि यह विश्वप्रसिद्ध है. इस की दीवार 36 किलोमीटर की लंबाई में किले को घेरे हुए है. इसे ‘ग्रेट वाल औफ इंडिया’ भी कहा जाता है. यहां की ऐंट्री फीस भारतीयों के लिए क्व15 और विदेशियों के लिए क्व100 है. कैमरे के लिए कोई फीस नहीं है. यह किला सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है. इसे 2013 में ‘यूनैस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट’ घोषित किया गया था.

कुंभलगढ़ फोर्ट का अधिक आनंद लेने के लिए शाम को लाइट ऐंड साउंड कार्यक्रम देखना आवश्यक है, जो 7 से 8 बजे तक होता है. इस से किले का पूरा इतिहास पता चलता है. कुंभलगढ़ फोर्ट से 48 किलोमीटर की दूरी पर हल्दीघाटी और 68 किलोमीटर की दूरी पर रनकपुर का जैन टैंपल देखा जा सकता है. जैन मंदिर संगमरमर पर खास कलाकृतियों के लिए मशहूर है.

वाइल्ड लाइफ सफारी

फौरेस्ट गाइड रतन सिंह 15 सालों से कुंभलगढ़ में वाइल्ड लाइफ सफारी करवाते हैं. उन का कहना है कि पहले केवल 1-2 खुली जीपें सफारी के लिए जाती थीं, पर अब हर दिन 15 से 20 गाडि़यां जाती हैं. 3 घंटे के समय में पूरे जंगल की सैर हो जाती है. कुंभलगढ़ अभयारण्य में लोग आसपास के क्षेत्रों से वीकैंड में भी आते हैं और जंगल सफारी का आनंद उठाते हैं. यह 578 किलोमीटर एरिया में फैला हुआ बहुत ही आकर्षक जंगल है. यहां तेंदुए, बारहसिंगे, हिरण, सांभर, जंगली बिल्लियां, भालू, नीलगाय, लंगूर, बंदर, पोर्की पाइन आदि जानवर और भिन्नभिन्न प्रकार के पक्षी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. यहां पहले राजारजवाड़े शिकार के लिए आते थे, लेकिन अब इस के सरकारके पास आ जाने की वजह से शिकार करना बंद हो चुका है.

हैंडीक्राफ्ट का सामान बेचने वाले जगदीश कुम्हार कहते हैं कि यहां के जंगलों की वनस्पति भी अति सुंदर है. जंगलों में महुआ, आम, खाखरा, गेमकी, घोस्ट के पेड़ों के अलावा शीशम की दुर्लभ प्रजाति डलवजिया शैलेशिया के पेड़ उपलब्ध हैं.

प्रशांत कुमार झा कहते हैं कि सफारी में ऐंट्री का समय दिन में सुबह 6 से ले कर 9 बजे रात तक होता है. दोपहर में 3 से 5 बजे तक और रात में 9 से 11 बजे तक नाइट सफारी होती है. नाइट सफारी में लोग अधिक जाते हैं, क्योंकि रात में जानवर घूमते हुए अधिक दिखाई देते हैं और मौसम भी ठंडा रहता है.

मौनसून में जंगल सफारी बंद रहती है. इस की ऐंट्री फीस 2,300 से ले कर 2,500 तक है. नाइट सफारी के लिए फौरेस्ट गाइड जीप ड्राइवर के पास बैठ कर लेड टौर्च लाइट का प्रयोग करते हैं ताकि जानवरों को नोटिस किया जा सके. जंगल सफारी में हमेशा थोड़ी सावधानी रखनी पड़ती है. मसलन, जानवरों को न छेड़ना, मोबाइल फोन की घंटी न बजाना आदि ताकि जानवर असहज महसूस न करें.

इतिहास जानिए करीब से

प्रेम सिंह कहते हैं कि हमीर की पाल तालाब सैलानियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है. इस तालाब में हजारों की संख्या में कैटफिश हैं, जिन का कोई शिकार नहीं कर सकता. गांव के लोग इस की पहरेदारी करते हैं. कहा जाता है कि हमीर नामक राजा ने इस पौंड को क्व1 लाख खर्च कर बनवाया था. इसीलिए इस का नाम लाखेला तालाब भी है.

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इस के अलावा हल्दीघाटी म्यूजियम जो कुंभलगढ़ से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है, वहां कार या बाइक से जाया जा सकता है. इस संग्रहालय में महाराणा प्रताप के पुतले के अलावा उन के समय के प्रयोग किए गए अस्त्रशस्त्र, किताबें, तसवीरें आदि करीने से सजा कर रखी गई हैं. हर 15 मिनट बाद यहां लाइट ऐंड साउंड प्रोग्राम भी होता है, जिस में महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े विषयों पर लघु फिल्म दिखाई जाती है. यहां हर साल सैलानी बड़ी संख्या में आते हैं.

इन्हें जरूर खाएं

क्लब महिंद्रा के रिजोर्ट मैनेजर सुप्रियो ढाली बताते हैं कि राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में शाकाहारी व्यंजन दाल बाटी, केर सांगड़ी, गट्टे की खिचड़ी, बूंदी रायता, बाजरे की रोटी, मक्के की रोटी आदि मुख्य भोजन हैं. नौनवैज में लाल मांस अधिक पौपुलर है. यहां की राजस्थानी थाली में कई तरह के स्वादिष्ठ व्यंजनों को छोटीछोटी कटोरियों में परोसा जाता है. दाल बाटी में बाटी को बालू में रख कर कंडों को जला कर पकाया जाता है. इस से इस का स्वाद मीठा होता है. ये व्यंजन अधिक महंगे नहीं होते.

जगदीश कुम्हार बताते हैं कि कुंभलगढ़ के हर रेस्तरां में यहां का भोजन मिल जाता है, जो खासकर देशी घी के साथ खाया जाता है. यहां आने पर यहां के भोजन का स्वाद चखना न भूलें. दालें यहां कई प्रकार की बनती हैं. मूंग की दाल, चने की दाल, अरहर की दाल. ये सभी दालें बाटी और देसी घी के साथ खाई जाती हैं. यहां का भोजन भी मौसम के अनुसार होता है. अधिक ठंड होने पर मूंगफली के कच्चे तेल के साथ दाल ढोकली, केर सांगरी आदि बनाई जाती है.

कहां से क्या करें खरीदारी

ज्वैलरी विक्रेता दिनेश मालवीय कहते हैं कि कुंभलगढ़ में अधिकतर सामान उदयपुर और नाथद्वार से मंगवाया जाता है. इस के अलावा लोकल और आसपास की भी कुछ महिलाएं घर पर हैंडीक्राफ्ट का काम करती हैं. इस में खासकर लहंगे पर कढ़ाई, ओढ़नी, दुपट्टा, वाल हैंगिंग्स, पौटरी बैंबू साड़ी, महारानी साड़ी आदि हैं. कठपुतली अधिकतर मारवाड़ के लोग बनाते हैं. ये सभी वस्तुएं आसपास के बाजारों या छोटीछोटी दुकानों में किफायती दाम पर मिल जाती हैं.

सोविनियर शौप चलाने वाले जगदीश कुम्हार का कहना है कि यहां आने पर अधिकतर लोग ट्रैडिशनल सोने, चांदी, लाख की ज्वैलरी, ब्लौक प्रिंट की कुरतियां, मौजरी, लकड़ी के खिलौने आदि की खरीदारी करते हैं. गहनों पर मीनाकारी का काम बहुत ही बारीकी से किया जाता है. इन के अलावा तरहतरह के मिट्टी के बरतन और खिलौने भी यहां बिकते हैं.

ठहरने की सुविधा

कुंभलगढ़ में ठहरने की अच्छी व्यवस्था है. यहां करीब छोटेबड़े 30-35 होटल हैं. प्रशांत झा बताते हैं कि यहां होटलों का किराया पीक सीजन अर्थात अक्तूबर से मार्च तक अधिक रहता है, लेकिन बाकी समय में कई होटलों में क्व500 में भी कमरा मिल जाता है. रामादा रिजोर्ट, क्लब महिंद्रा रिजौर्ट, न्यू रतनदीप, रंग भवन इन, लेक अल्पी, राजगढ़, महुआ बाढ़ रिजोर्ट आदि कई छोटेबड़े होटल हैं. पैसे के अनुसार सुविधाएं भी इन होटलों में मिलती हैं. मसलन, घूमने के लिए गाड़ी, सफारी के लिए खुली जीप की व्यवस्था आदि.

घूमने का सही समय

वैसे तो कुंभलगढ़ में पूरा साल सैलानी आते हैं, लेकिन अक्तूबर से मार्च के समय में पर्यटकों की भीड़ अधिक रहती है. बाकी समय में अधिकतर कपल्स ही आते हैं. विदेशी सैलानियों में यूरोप के लोग अधिक आते हैं. मौनसून में घाटियों की हरियाली तो बढ़ जाती है, पर पर्यटक कम आते हैं, क्योंकि उस समय जंगल सफारी बंद रहती है.

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अनियमित पीरियड्स से मूड स्विंग

हर माह आने वाले पीरियड या माहवारी एक प्राकृतिक क्रिया है जिस के बारे में जानना हर बढ़ती उम्र की लड़की के लिए जरूरी है. इन दिनों में लड़कियों के शरीर में अलगअलग बदलाव होते हैं और ये बदलाव होते बहुत ही सामान्य हैं. ये बदलाव हर लड़की के हार्मोंस पर निर्भर करते हैं.

कुछ लड़कियां पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स का सामना करती हैं तो कुछ लड़कियों को कोई खास बदलाव महसूस नहीं होता है. ऐसे ही कुछ लड़कियां डिप्रैशन, इमोशनल आउटबर्स्ट और क्रेविंग्स का शिकार होती हैं. इसे कहते हैं प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम और 90 प्रतिशत लड़कियां वर्तमान में इसे महसूस कर रही हैं.

पीरियड के दौरान अनेक परेशानियां भी आती हैं. महीने में 2 बार पीरियड्स क्यों हो रहे हैं? मसलन, फ्लो इतना ज्यादा या इतना कम क्यों है? पीरियड्स और लड़कियों के समान क्यों नहीं हैं? अनियमित पीरियड्स क्यों हैं? ये सब प्रश्न अकसर हमारे दिमाग में घर कर लेते हैं. हमें यह समझने की जरूरत है कि ये सब परेशानियां असामान्य नहीं हैं. हर महिला का मासिकधर्म और रक्तस्राव का स्तर अलगअलग है.

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असामान्य पीरियड्स

पिछले कुछ मासिक चक्रों की तुलना में रक्तस्राव असामान्य होना, पीरियड्स देर से आना, कम से कम रक्तस्राव से ले कर भारी मात्रा में खून बहना आदि असामान्य पीरियड माने जाते हैं. यह कोई बीमारी नहीं है. इसे अलगअलग हर लड़की में देखा जाता है. इस में अचानक मरोड़ उठने लगती है और बदनदर्द होने लगता है. अनियमित और असामान्य पीरियड को एनोबुलेशन से भी जोड़ा जा सकता है. आमतौर पर इस कारण हार्मोंस में असंतुलन हो सकता है.

प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम

प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम हर साल भारत की एक करोड़ से भी ज्यादा लड़कियों में देखा जाता है. यह एक ऐसी समस्या है जो लड़कियों को हर महीने पीरियड से कुछ दिनों पहले प्रभावित करती है. इस दौरान लड़कियां शारीरिक और भावनात्मक रूप से खुद को कमजोर महसूस करती हैं.

मुंहासे, सूजन, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स इस के कुछ सामान्य लक्षण हैं. सटीक लक्षण और उन की तीव्रता लड़की से लड़की और चक्र से चक्र पर निर्भर करती है.

ये कारण हो सकते हैं.

हार्मोंस में परिवर्तन इस सिंड्रोम का एक महत्त्वपूर्ण कारण है. विटामिन की कमी, शरीर में उच्च सोडियम का स्तर, कैफीन और शराब का अधिक सेवन पीएमएस का कारण बन सकते हैं. पीएमएस 20 से 40 वर्ष की महिलाओं में देखा जा सकता है.

इलाज है जरूरी

माहवारी में आने वाले अनियमित पीरियड्स या पीएमएस जैसी परेशानियों का इलाज बहुत ही सरल है. ऐक्सरसाइज हमेशा से ही पीरियड्स की परेशानी का हल रही है. एक स्त्रोत के अनुसार हफ्ते में 5 दिन 35 से 40 मिनट ऐक्सरसाइज करने से उन हार्मोंस की मात्रा कम हो जाती है जिन के कारण अनियमित माहवारी हो सकती है.

यदि किसी लड़की को पीरियड्स के दौरान बहुत दर्द हो, भारी रक्तस्राव हो, 7 दिनों? से ज्यादा पीरियड के बीच उल्टियां हों तो अच्छा यही होगा कि तुरंत उसे डाक्टर के पास ले कर जाएं.

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अजब गजब: इस गांव में पैदा होते हैं जुड़वा बच्चे

विश्व में बहुत सी ऐसी रहस्यमयी पहेलियां है, जिनको कोई सुलझा नहीं पाया है. दरअसल जिस रहस्य के बारे में अपको बताने जा रहे हैं, ये मामला भारत का है. तो आइए जानते हैं क्या है ये रहस्य.

देश में एक ऐसा गांव है जिसे ‘विलेज औफ ट्विंस’, ‘ट्वीन टाउन’ के नाम से जाना जाता है. इस गांव का नाम ऐसा इसीलिए है क्योंकि ये ऐसा गांव है जहां सबसे अधिक संख्या में जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं. हैरतअंगेज करने वाली बात ये है कि जो लोग ये गांव छोड़कर बाहर जा चुके हैं. उन्हें भी जुड़वा बच्चे ही पैदा हुए हैं.

केरल में मलप्पुरम जिले का ‘कोडिन्ही’ एक गांव है. यह गांव तिरुंगण्डी शहर के करीब स्थित है. आंकड़ों की मानें तो पिछले 65 सालों में इस गांव में 250 जुड़वा बच्‍चों के जोड़े हैं.

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एक धूर्त का बैंड बाजा बारात

25मई, 2019 की बात है. राजस्थान के जिला सीकर के एसपी डा. अमनदीप सिंह कपूर से मिलने के लिए एक अधेड़ उम्र का आदमी उन के औफिस पहुंचा. उस आदमी ने अपना नाम सुशील कुमार शर्मा निवासी सीकर शहर बताया. सुशील ने करीब आधे घंटे तक एसपी को अपनी दास्तान सुनाई.

सुशील की बातें सुन कर एसपी डा. कपूर हैरान रह गए. उन्होंने कहा कि मेरी पुलिस की अब तक की नौकरी में पहली बार इस तरह का अनोखा मामला सामने आया है. आप पुलिस थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज करवा दीजिए. हम उस धोखेबाज और उस के साथियों का पता लगा कर कानून के मुताबिक सजा दिलवाएंगे.

सुशील को आश्वासन देने के बाद एसपी डा. कपूर ने उसी समय कोतवाली प्रभारी को फोन कर कहा कि आप के पास सुशील कुमार जी आएंगे. उन की रिपोर्ट दर्ज कर किसी होशियार अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराइए और इस मामले में जो भी प्रोग्रेस हो, मुझे बताते रहिए.

एसपी की बातें सुन कर सुशील कुमार को कुछ उम्मीद जगी. एसपी साहब से मिलने के बाद वह सीधे थाने पहुंच गए. वहां मौजूद थानाप्रभारी श्रीचंद सिंह को उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा कि उन्हें एसपी साहब ने भेजा है.

थानाप्रभारी ने सुशील को सम्मान से बिठाया, फिर पूछा कि आप लिखी हुई रिपोर्ट लाए हैं या यहां बैठ कर लिखेंगे. सुशील ने बताया कि वह पहले ही रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर लिख कर लाए हैं. इसी के साथ सुशील ने अपने बैग से 2-3 कागज निकाल कर थानाप्रभारी को दे दिए.

थानाप्रभारी श्रीचंद सिंह ने तसल्ली से उन कागजों को पढ़ा. फिर अपने मातहत अधिकारी को बुला कर उन्हें कागज सौंपते हुए एफआईआर दर्ज करने को कहा. जब तक कंप्यूटर पर रिपोर्ट दर्ज करने की काररवाई चलती रही, तब तक थानाप्रभारी ने फौरी तौर पर सुशील से केस संबंधी कई बातें पूछ लीं, ताकि मुलजिमों को जल्द पकड़ा जा सके.

रिपोर्ट दर्ज करने की काररवाई में तकरीबन एक घंटे का समय लग गया. एफआईआर की एक कौपी सुशील शर्मा को दे कर थानाप्रभारी ने भरोसा दिया कि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ने का प्रयास किया जाएगा.

सुशील कुमार की ओर से पुलिस थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह था कि इमरान नाम के युवक ने फरजी तरीके से ब्राह्मण बन कर कबीर शर्मा के नाम से उन की बेटी सुमन से धोखे से शादी रचा ली थी.

शादी के लिए इमरान ने फरजी परिवार और फरजी ही बाराती तैयार किए थे. ये सभी लोग कबीर की शादी में माथे पर तिलक छाप लगा कर ब्राह्मण के रूप में शामिल हुए थे.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू की. सुशील शर्मा और उन के परिवार के बयान और प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कुछ साल पहले इमरान भाटी ने कबीर शर्मा के नाम से फरजी फेसबुक आईडी बनाई थी. फेसबुक पर उस ने सीकर की रहने वाली युवती सुमन शर्मा से दोस्ती की. उस समय सुमन सीकर जिले के एक निजी कालेज में पढ़ती थी.

फेसबुक पर दोस्ती हुई तो दोनों में चैटिंग करने लगे. बाद में मोबाइल पर भी बातें होने लगीं. सुमन को कबीर की बातों से यह अहसास नहीं हुआ कि वह किसी दूसरी जातिधर्म का है.

सुमन उस की बातों और उस के व्यक्तित्व से प्रभावित थी. कबीर ने इस का फायदा उठाया और सुमन को अपने प्रेमजाल में फंसा लिया. सुमन उस से प्यार करने लगी.

कबीर इस खेल में माहिर था. वह सुमन को नित नए सपने दिखाने लगा. सुमन उन सतरंगी सपनों की कल्पना में खो कर मन ही मन कबीर से विवाह करने की सोचने लगी. लेकिन वह संस्कारी युवती थी. उसे अपने मातापिता की इज्जत प्यारी थी. वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती थी, जिस से उस के परिवार की प्रतिष्ठा पर जरा सी भी आंच आए. इस बीच वह एक निजी कालेज में जौब करने लगी थी.

सुमन कालेज स्तर तक पढ़लिख चुकी थी. उस की उम्र भी शादी लायक हो गई थी. कालेज में जौब करने से वह आत्मनिर्भर भी हो गई थी. मांबाप अब उस के हाथ पीले करने की सोच रहे थे. इस के लिए उन्होंने अपने नातेरिश्तेदारों से भी सुमन के लिए अच्छा वर तलाशने को कह दिया था. घर में जब सुमन की शादी के लिए लड़का देखने की बातें होने लगीं तो नवंबर 2018 में एक दिन उस ने अपने मातापिता को कबीर के बारे में बताया. सुमन ने मोबाइल पर कबीर की फोटो दिखा कर उस से शादी करने की इच्छा जताई.

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पिता को सुमन की यह बात जरा भी बुरी नहीं लगी. उन्होंने सुमन से कहा कि अगर कबीर शर्मा उस की नजर में अच्छा और सज्जन लड़का है तो उन्हें उस से शादी करने में कोई ऐतराज नहीं है. लेकिन पहले कबीर से मिल कर उस के मातापिता, परिवार और खानदान वगैरह के बारे में पता लगाएंगे.

सुमन ने भी इस पर सहमति जता कर कहा कि मैं कबीर से आप की बात करा दूंगी. सुमन ने कबीर को फोन कर अपने पिता की इच्छा के बारे में बता दिया. इस के 1-2 दिन बाद ही कबीर ने सुशील शर्मा को फोन कर खुद का परिचय दिया.

सुशील के पूछने पर कबीर ने खुद को जयपुर निवासी गौड़ ब्राह्मण बताया. कबीर ने विदेश में खुद का बिजनैस होने का हवाला दे कर कहा कि वह जनवरी में जयपुर आएगा.

इस के बाद कबीर की सुशील शर्मा से 1-2 बार और बात हुई. सुमन से तो उस की प्राय: बात रोज ही बात होती थी. सुमन को भी उम्मीद थी कि परिवार की सहमति से उस की शादी उस के सपनों के राजकुमार कबीर से हो जाएगी.

इसी साल जनवरी में एक दिन जयपुर में लड़का लड़की देखने का कार्यक्रम तय हो गया. तय कार्यक्रम के मुताबिक सीकर से सुमन, उस के पिता और परिवार के अन्य लोग जयपुर के निवारू रोड पर स्थित साउथ कालोनी के एक फ्लैट पर पहुंच गए.

फ्लैट पर कबीर ने सुशील शर्मा और उन के परिवार के लोगों को अपने चाचा रामकुमार शर्मा, चाची संतोष और भतीजे मनन से मिलवाया. उस समय फ्लैट पर कई अन्य लोग भी मौजूद थे. कबीर ने उन्हें भी अपना रिश्तेदार बताया.

कबीर ने सुमन के पिता को बताया कि उस के पिता रामेश्वर शर्मा जयपुर में ही पीतल फैक्ट्री के पास शास्त्रीनगर में रहते हैं. पिता ने दूसरी शादी की है. सौतेली मां के कारण पिता उस के पास नहीं आते.

उसे यह फ्लैट चाचा रामकुमार ने दिलवाया है. कबीर के पिता के दूसरी शादी करने और अलग रहने पर सुशील शर्मा को कुछ शंका हुई कि रामेश्वरजी शादी में शरीक होंगे या नहीं. यह शंका जताने पर कबीर ने सुशील शर्मा को आश्वस्त किया कि वह उन्हें मना लेगा.

बातचीत में सुशील शर्मा को बेटी सुमन के लिए कबीर उपयुक्त लड़का लगा. ब्राह्मण कुल के कबीर के चाचाचाची और अन्य रिश्तेदारों से मिल कर वह उन के घरपरिवार के बारे में संतुष्ट हो गए.

फिर भी सुशील शर्मा ने कबीर की जन्मकुंडली का मिलान कराने की बात कही. कबीर ने पहले से तैयार अपनी जन्मकुंडली सुमन के पिता को सौंप दी. दूसरी तरफ, कबीर के रिश्तेदार भी सुमन को अपने घर की बहू बनाने को तैयार हो गए.

सुशील शर्मा ने सीकर आ कर कबीर की जन्मकुंडली पंडित को दिखाई तो उस में कोई दोष नजर नहीं आया. जन्मपत्री के मुताबिक कबीर मांगलिक था और सुमन भी मांगलिक थी. मांगलिक युवती की शादी मांगलिक युवक से ही हो सकती है, यह बात इमरान उर्फ कबीर को पता थी.

सुमन को प्रेमजाल में फांसने के बाद जब इमरान को सुमन के मांगलिक होने का पता चला तो उस ने फरजी नाम, जातिधर्म व पते वाली मांगलिक दोष की जन्मपत्री बनवा कर रख ली थी. यही जन्मपत्री कबीर ने सुमन के पिता को दी थी.

जन्मपत्री का मिलान होने पर सुशील शर्मा ने कबीर से शादी की बात आगे बढ़ाई. इस पर कबीर ने कहा कि हमारे सारे रिश्तेदार जयपुर में रहते हैं. वे सब सीकर नहीं आ सकते, आप को जयपुर आ कर शादी करनी होगी. जयपुर में शादी की सारी व्यवस्था हम लोग कर देंगे. आप केवल पैसों और जेवरों का इंतजाम कर लेना. सुशील शर्मा चाहते तो यही थे कि बेटी की शादी सीकर से ही धूमधाम से हो लेकिन वरपक्ष की इच्छा को देखते हुए वह जयपुर में शादी करने को तैयार हो गए.

बातचीत के बाद तय हुआ कि 12 फरवरी को जयपुर में सगाई करेंगे और इस के अगले ही दिन विवाह का सही मुहूर्त है, इसलिए 13 फरवरी की शादी तय हो गई.

कुछ दिन बाद कबीर ने सुशील शर्मा को जयपुर बुला कर शादी के लिए लोहामंडी में मातेश्वरी रिसोर्ट दिखाया. सुशील शर्मा को व्यवस्था ठीकठाक लगी तो उन्होंने 12 और 13 फरवरी के लिए रिसोर्ट बुक करवा दिया. शादी के लिए बैंड, कैटरिंग, सजावट, घोड़ी, पंडित, वीडियो फोटोग्राफर और अन्य सारी व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी कबीर ने ले ली थी.

शादी में कबीर की ओर से छपवाए गए शादी के कार्ड में उस के पिता का नाम रामेश्वर शर्मा और दादा का नाम भागीरथ शर्मा लिखा था. कार्ड में जयपुर के पीतल फैक्ट्री शास्त्रीनगर निवारू रोड का पता और 2 मोबाइल नंबर भी लिखे हुए थे.

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12 फरवरी, 2019 को जयपुर के मातेश्वरी रिसोर्ट में पारंपरिक रीतिरिवाज से कबीर और सुमन की सगाई  हो गई. रिंग सेरेमनी में सुमन और कबीर ने एकदूसरे को अंगूठी पहनाई. सगाई के दस्तूर में कबीर के वे सारे रिश्तेदार शामिल हुए, जो जनवरी में फ्लैट में मिले थे. वधू पक्ष से भी सीकर से कई लोग वहां पहुंचे थे.

इस के दूसरे ही दिन 13 फरवरी, 2019 को इसी रिसोर्ट में धूमधाम से कबीर और सुमन की शादी हो गई. वधूपक्ष के लोगों ने वरपक्ष के रिश्तेदारों के बारे में पूछा तो किसी को कबीर का चाचा, किसी को जीजा और किसी को भतीजा बताया गया. स्टेज पर वरवधू को आशीर्वाद देने का कार्यक्रम हुआ. बाद में हिंदू रीतिरिवाज से अग्नि के समक्ष फेरे लिए गए.

धूमधाम से शादी होने पर सुमन के पिता सुशील शर्मा ने रात को ही सारी व्यवस्थाओं के बिल ले कर कबीर को 11 लाख रुपए नकद दिए. रिसोर्ट के किराए के डेढ़ लाख रुपए और खाने के करीब पौने 2 लाख रुपए अलग से दिए.

इस के अलावा उन्होंने बेटी को शादी में करीब 5 लाख रुपए की ज्वैलरी कपड़े वगैरह दिए. एकलौती बेटी होने के कारण सुशील शर्मा ने दिल खोल कर दानदहेज दिया था. वैवाहिक रस्में पूरी होने के बाद तड़के सुशील शर्मा ने बेटी सुमन को ससुराल के लिए विदा कर दिया. सुमन की ससुराल निवारू रोड पर साउथ कालोनी के उसी फ्लैट में बताई गई थी, जहां पहली बार लड़कालड़की देखने की रस्म हुई थी.

शादी के कुछ दिनों बाद सुमन अपने पीहर सीकर आ गई. दामाद कबीर शर्मा कुछ दिन बाद सीकर आया तो उस की खूब आवभगत की गई. इस दौरान कबीर ने सुशील शर्मा से कारोबार के लिए 5 लाख रुपए की आवश्यकता बताई. सुशील ने कुछ दिन पहले ही बेटी की शादी की थी, इसलिए वह पैसों की व्यवस्था नहीं कर सके.

1-2 दिन ससुराल में खातिरदारी कराने के बाद जमाई राजा कबीर जयपुर जाने की बात कह कर सुमन के साथ चला गया. बाद में कबीर फोन कर सुमन के पिता पर पैसों का इंतजाम करने का दबाव डालने लगा.

थकहार कर सुशील शर्मा ने अपने परिचित से ढाई लाख रुपए उधार लिए. यह रुपए ला कर उन्होंने घर में रख दिए और कबीर को बता दिया.

कबीर और सुमन 14 मई को सीकर आए और उसी रात करीब 3 बजे कबीर वे ढाई लाख रुपए और घर में रखे जेवर चुरा कर सुमन के साथ वहां से भाग गया.

अगले दिन सुबह जब सुशील शर्मा को दामाद और बेटी घर में नहीं मिले तो वह समझ नहीं पाए कि अचानक बिना बताए कहां चले गए.

बाद में घर में पैसे और जेवर भी गायब मिले तो उन्हें शक हुआ. उन्होंने कबीर और सुमन के मोबाइल पर काल किया, लेकिन उन के फोन स्विच्ड औफ मिले.

सुशील को बड़ा ताज्जुब हुआ. वह समझ नहीं पा रहे थे कि माजरा क्या है. 1-2 दिन इंतजार करने के बाद भी दामाद और बेटी से बात नहीं हुई तो सुशील शर्मा ने शादी में मोबाइल द्वारा खींची गई फोटो अपने परिचितों और कुछ जानकारों को दिखाईं. फोटो देख कर उन्हें जो बातें पता चलीं, उसे सुन कर उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

लोगों ने बताया कि जिस युवक को आप कबीर शर्मा बता रहे हैं, उस का असली नाम इमरान भाटी है. वह सीकर के ही वार्ड 28 में अंजुमन स्कूल के पास अपने बीवीबच्चों के साथ रहता है, परिवार में पत्नी के अलावा 3 बच्चे हैं.

कबीर शर्मा के इमरान भाटी होने और फरजी जातिधर्म, नकली परिवार और बाराती बना कर फरजीवाड़े से शादी रचाने की बात पता चलने के बाद सुशील शर्मा ने 25 मई, 2019 को सीकर के एसपी डा. अमनदीप सिंह कपूर से मुलाकात की. इस के बाद ही उन की रिपोर्ट दर्ज हुई.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एडिशनल एसपी डा. देवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी. पुलिस ने सीकर शहर में इमरान भाटी के घर पहुंच कर उस के घर वालों से पूछताछ की. पता चला कि इमरान की पत्नी और तीनों बच्चे मुंबई गए हुए हैं. इमरान के मोबाइल की काल डिटेल्स भी निकलवाई गई. साथ ही उस के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया गया.

जांचपड़ताल में पता चला कि इमरान सीकर में जयपुर रोड स्थित एक कार शोरूम में मार्केटिंग की नौकरी करता था. बाद में पैसों की हेराफेरी करने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. कार शोरूम में नौकरी करते हुए भी उस ने एक युवती का एमएमएस बना लिया था. फिर उसे धमकी दे कर मोटी रकम ऐंठी थी. बदनामी के डर से युवती ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी.

इमरान की शादी सन 2005 में सीकर के रोशनगंज मोहल्ले में रहने वाली सईदा से हुई थी. सईदा पढ़ीलिखी है. उस के 3 बच्चे हैं. बड़ा बेटा 13 साल, उस से छोटा 11 साल का और सब से छोटी बेटी 7 साल की है. इमरान के पिता इकबाल भाटी ने पुलिस को बताया कि इस साल फरवरी में इमरान ने कहा था कि उस का ट्रांसफर जयपुर हो गया है, इसलिए अब वह जयपुर में ही रहेगा.

जयपुर जाते समय इमरान उन से 4 लाख रुपए ले कर गया था. इकबाल भाटी ने बताया कि उन के बेटे इमरान ने सीकर की सुमन शर्मा से जयपुर में दूसरी शादी कर ली, इस का पता उन्हें बाद में लगा था. इमरान की पत्नी सईदा और उस के पीहर व ननिहाल वालों को भी इस बात की जानकारी मिल गई थी.

पति द्वारा दूसरी शादी करने का पता चलने पर सईदा मुंबई में अपने पीहर वालों के पास चली गई. उस ने यह बात मायके वालों को बताई तो उन्हें भी उस की इस करतूत पर हैरत हुई.

सईदा ने बताया कि उस के लिए इमरान मर चुका है. उस ने मेरा और बच्चों का जीवन बरबाद कर दिया. जातिधर्म बदल कर फरजी तरीके से दूसरी शादी कर के उस ने अब हमें कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा.

बेटे इमरान की करतूतें सामने आने पर पिता इकबाल भाटी ने भी उसे अपनी प्रौपर्टी से बेदखल कर दिया. जो मकान इमरान के नाम था, उसे बहू सईदा और उस के बच्चों के नाम गिफ्ट डीड करवा दिया. एक गैराज में से इमरान का हिस्सा बहू और उस के बच्चों के नाम कर दिया.

फरजीवाड़े से दूसरी शादी करने के बाद इमरान ने एक दिन सईदा को फोन कर कहा, ‘‘मैं 40 दिन की जमात पर जा रहा हूं. इस दौरान मैं धर्म के काम में व्यस्त रहूंगा, इसलिए मुझे फोन मत करना.’’ लेकिन जब बाद में सईदा को असलियत पता चली तो इमरान ने उसे फोन नहीं किया.

जांच में यह भी पता चला कि अय्याश किस्म का इमरान भाटी उर्फ कबीर शर्मा चेन स्मोकर और शराबी है. उस ने सीकर के अपने कई दोस्तों से भी लाखों रुपए उधार ले रखे थे. वह देर रात तक मोबाइल पर लड़कियों से चैटिंग करता था. रात को शराब पी कर घर आने पर पत्नी सईदा और मां से झगड़ा करता था.

जातिधर्म बदल कर फरजीवाड़े से शादी करने के मामले में पुलिस किसी भी आरोपी को नहीं पकड़ पाई थी, इस से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा था. सर्वसमाज के लोग पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने के लिए लामबंद हो गए. 31 मई को सर्वसमाज के प्रमुख लोगों ने सीकर में बैठक कर कहा कि मामले में जल्द काररवाई नहीं की गई तो सड़क पर उतरना पड़ेगा.

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जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस ने जांचपड़ताल तेज कर दी. आरोपी इमरान उर्फ कबीर शर्मा की तलाश में 4 पुलिस टीमें जयपुर, पुणे, दिल्ली व मुंबई भेजी गईं. पुलिस ने कई लोगों से इमरान के संभावित ठिकाने के बारे में पूछताछ की, लेकिन उस का सुराग नहीं मिला.

वह बीचबीच में मोबाइल बंद रख कर अपने ठिकाने बदलता रहा, जिस से पुलिस को उस की लोकेशन नहीं मिल पा रही थी. सुमन का मोबाइल फोन भी बंद था. इमरान अपने परिवार, किसी दोस्त से फोन, इंटरनेट या सोशल साइट्स के जरिए भी संपर्क नहीं कर रहा था.

एडिशनल एसपी डा. देवेंद्र कुमार शर्मा और सीओ सिटी सौरभ तिवाड़ी के नेतृत्व में पुलिस टीमें लगातार भागदौड़ कर इमरान के बारे में सूचनाएं हासिल कर रही थीं, लेकिन उस का पता नहीं चल पा रहा था. पुलिस ने इमरान की शादी में ब्राह्मण के रूप में नकली बाराती बन कर पहुंचे लोगों को भी तलाश कर पूछताछ की गई.

इस बीच 2 जून को इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब सुमन के 2 वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किए गए, जो कुछ ही देर में वायरल हो गए. वीडियो में सुमन ने एक दल और अपने परिवार वालों से खुद और इमरान की जान को खतरा बताया था. सुमन ने यह भी कहा कि मैं इमरान को 6 साल से जानती हूं. यह भी जानती हूं कि वह शादीशुदा है और उस के 3 बच्चे हैं.

इन में एक वीडियो 8.21 मिनट का और दूसरा 7.40 मिनट का था. दोनों वीडियो में 17 कट थे. वीडियो देख कर महसूस हो रहा था कि जैसे सुमन कोई लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ रही है. इस से यह माना गया कि सुमन पर दबाव बना कर यह वीडियो बनाया और जारी किया गया.

वीडियो में सुमन का कहना था कि वह 18 मार्च को एएसपी के सामने पेश हुई थी, वहां परिजनों ने उस से एक प्रार्थनापत्र दिलवाया था. लेकिन असल में एएसपी 18 मार्च को खाटू श्यामजी के मेले में ड्यूटी पर थे और अगले दिन 19 मार्च को वह अवकाश पर थे. इस से सुमन की कहानी में झूठ पकड़ में आ गया.

पुलिस ने वायरल हुए वीडियो के संबंध में भी जांच शुरू कर दी, लेकिन वीडियो से उन के ठिकाने के बारे में कोई अनुमान नहीं लग सका. वीडियो वायरल होने के बाद सर्वसमाज और भगवा रक्षा वाहिनी ने 3 जून, 2019 को मामले में जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन दिया. ज्ञापन में कहा गया कि आरोपियों ने युवती को डराधमका कर झूठा वीडियो वायरल करवाया है. लगातार भागदौड़ के बाद पुलिस को इमरान के मुंबई में होने का पता चला.

मुंबई में पहले से ही सीकर पुलिस की टीम इमरान और सुमन की फोटो ले कर होटलों व अन्य स्थानों पर उस की तलाश में जुटी हुई थी.

पुलिस को पता चला कि 3 व 4 जून की रात इमरान अपनी बीवी के साथ मुंबई के पालघर इलाके में नियामतनगर के एक फ्लैट पर आएगा. पुलिस ने उस फ्लैट पर निगरानी रखी.

रात करीब 2 बजे इमरान जब सुमन के साथ उस फ्लैट पर पहुंचा तो पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया. यह फ्लैट इमरान के एक परिचित का था. पुलिस दल 4 जून की सुबह दोनों को ले कर सीकर के लिए रवाना हो गई.

पुलिस पूछताछ में इमरान ने बताया कि 15 मई, 2019 को सीकर से भागने के बाद वे दोनों दिल्ली चले गए. दिल्ली में काफी पैसे खर्च हो गए थे. बाद में सुमन को साथ ले कर इमरान अपने दोस्त के पास शरण लेने के लिए पुणे चला गया. लेकिन पुणे में वह दोस्त नहीं मिला. तब इमरान अपने सौतेले भाई की पत्नी के पास मुंबई के नियामत नगर आ गया.

सौतेले भाई की पत्नी इन दोनों के आने से परेशान हो गई. इस पर इमरान और सुमन सुबह जल्दी उस के फ्लैट से निकल जाते और आधी रात के बाद वापस आते थे. दिन में वे रेलवे स्टेशन पर छिप कर रहते और शाम को किराए का मकान तलाशते थे.

इस बीच इमरान को सुमन के पिता की ओर से पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने का पता चल गया था. इमरान ने खुद को बचाने के लिए सुमन से 6 पेज में वे सारी बातें लिखवाईं जो उस के पक्ष में हो सकती थीं. इस के बाद उस ने सुमन को डराधमका कर दोनों वीडियो बनवाए.

इमरान ने कई बार वीडियो रुकवा कर उस से अपने मनमुआफिक बातें बुलवाईं. वीडियो बनवा कर इमरान ने ही यूट्यूब पर अपलोड कर दिए. फिर अपने दोस्तों को लिंक शेयर कर वीडियो वायरल करा दिए. दोनों वीडियो पुणे में बनाए गए थे.

सुमन ने पुलिस को बताया कि इमरान उसे डराधमका कर ले गया था. पुलिस को सुमन के बैग से 6 पेज की वह स्क्रिप्ट भी मिल गई जो इमरान ने वीडियो बनाने के लिए उस से लिखवाई थी. सुमन के पास जेवर व अन्य दस्तावेज भी मिल गए. बाद में सुमन को उस की इच्छा पर मां के साथ भेज दिया गया.

6 जून, 2019 को पुलिस ने इमरान को अदालत में पेश कर 4 दिन के रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान पूछताछ में उस ने बताया कि जयपुर में फरजी ब्राह्मण परिवार और रिश्तेदारों की व्यवस्था करने के लिए उस ने एक इवेंट कंपनी को ठेका दिया था. इवेंट कंपनी के मालिक रामकुमार शर्मा को ही उस ने अपना चाचा बना कर सुमन के परिजनों के सामने पेश किया था.

सगाई और शादी में भी रामकुमार ने ही कबीर के रिश्तेदारों के नाम पर किराए के लोगों की व्यवस्था की और उन्हें किराए के ही सूटबूट पहना दिए. इन में किसी को जीजा, किसी को मामा और फूफा बताया गया.

पूछताछ में इमरान से पता चला कि सुमन परिवार में एकलौती थी, इसलिए उस की नजर सुमन के मातापिता की संपत्ति पर थी. इमरान ने पहली बीवी सईदा से पीछा छुड़ाने के लिए फरवरी में जयपुर जाने से पहले खुद के नाम की संपत्ति सईदा और बच्चों के नाम कर दी थी. इमरान की करतूतों का ही परिणाम था कि ईद वाले दिन वह अपने शहर में पुलिस की गिरफ्त में था, लेकिन ईद पर उस से मिलने के लिए कोई नहीं आया.

पुलिस ने 7 जून, 2019 को सुमन शर्मा के बयान अदालत में मजिस्ट्रैट के समक्ष दर्ज कराए. बयान में उस ने अपहरण और शादी से पहले दुष्कर्म करने की बात कही. यह भी कहा कि हिंदू रीतिरिवाज से शादी करने के बाद इमरान उसे दिल्ली ले गया, वहां निजामुद्दीन में एक मसजिद में जबरन निकाह भी किया. इमरान ने उस पर जबरन धर्म बदल कर अपने साथ रहने का दबाव बनाया.

बयान में उस ने कहा कि 15 मई की रात इमरान ने साथ चलने को कहा तो उस ने मना कर दिया था. इस पर इमरान ने धमका कर कहा कि तूने मुझ से शादी की है, अपराध में तू भी बराबर की भागीदार है. मेरे साथ तू भी जेल जाएगी. इस के बाद डराधमका कर घर से जेवर और नकदी निकाल कर वे दोनों रात करीब 3 बजे चले गए थे.

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सुमन ने बयान में कहा कि इमरान से उस का परिचय 6 साल पहले तब हुआ, जब वह सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ में पढ़ाई करती थी. इमरान ने जयपुर में एक होटल में ले जा कर उस के साथ दुष्कर्म किया था. बाद में भी उस ने यह काम कई बार किया था.

बयानों के आधार पर पुलिस ने सुमन का मैडिकल परीक्षण कराया. इस में दुष्कर्म की पुष्टि हुई. नतीजतन मुकदमे में दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ दी गईं. केस की जांच भी एसआई अमित कुमार से बदल कर थानाप्रभारी श्रीचंद सिंह को सौंप दी गई.

पुलिस ने 9 जून, 2019 को इमरान उर्फ कबीर शर्मा का पोटेंसी टेस्ट कराया. इस में वह पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम पाया गया. पुलिस ने जयपुर में उस होटल पर पहुंच कर भी जांच-पड़ताल की, जहां इमरान ने युवती के साथ दुष्कर्म किया था. सुमन और इमरान के फोन नंबरों की काल डिटेल्स की भी जांच की गई.

रिमांड अवधि पूरी होने पर पुलिस ने 10 जून, 2019 को इमरान उर्फ कबीर शर्मा को अदालत में पेश कर फिर से 2 दिन के रिमांड पर लिया. पुलिस ने इमरान से फरजी रिश्तेदारों और बारातियों के बारे में पूछताछ की. उसे शादी का वीडियो दिखा कर उन की पहचान कराई गई. कथा लिखे जाने तक पुलिस मामले की जांच कर रही थी.

—कथा में सुशील कुमार शर्मा और सुमन शर्मा परिवर्तित नाम हैं

सौजन्य कहानी: मनोहर कहानी

सोशल मीडिया में खो रहा रूठने मनाने का जमाना

सोशल मीडिया दुनिया के ऐसे लोगों को जोड़ रहा है जो नजर से बहुत दूर हैं जबकि वह उन अपनों को दूर कर रहा है जो नजर के सामने हैं.

एक समय था जब चिट्ठियों के सहारे हम जिंदगी के सुखदुख बांट लिया करते थे. चिट्ठियों के इंतजार में यादें संजोया करते थे. चिट्ठी यदि लेट भी आया करती थी तो उस को पढ़ने की उत्सुकता और बढ़ जाती थी. लेकिन आज सबकुछ बदल चुका है. बढ़ती टैक्नोलौजी के कारण लोगों के जीवन और रिश्ते दोनों में खासा बदलाव देखने को मिला है.

आज सोशल मीडिया द्वारा हम अपने प्रियजनों के संपर्क में तो हैं, लेकिन इसी सोशल मीडिया ने कई रिश्तों को अंदर से खोखला कर दिया है. किसी को प्यार दिखाना है तो सोशल मीडिया, किसी पर गुस्सा निकालना है तो सोशल मीडिया, यहां तक कि किसी को फंक्शन में आमंत्रित करना है तो सोशल मीडिया का सहारा. ऐसे में रिश्तों में सिर्फ दिखावा ही रह गया है या यों कहें रिश्ते अब बनावटी होते जा रहे हैं.

बात अगर दोस्ती की करें, तो अब मित्रता भी कच्चे धागे की तरह हो गई है. जो दोस्त कभी घंटों एकदूसरे का इंतजार किया करते थे, अब वही दोस्त सोशल मीडिया पर लेट रिप्लाई आने पर मुंह फुलाते दिखते हैं. ऐसा ही अंकिता और जोशना के साथ भी हुआ.

अंकिता और जोशना की दोस्ती कालेज के प्रथम वर्ष में हुई थी. यह उन का कालेज का आखिरी वर्ष है. 3 साल दोनों ने खूब मस्ती की. सोशल मीडिया पर दोनों की तसवीरें साफ दर्शाती हैं कि दोनों की दोस्ती में कितना प्यार है. लेकिन यह कैसा प्यार था जिस की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई और खत्म भी सोशल मीडिया पर ही हुई.

दरअसल, तीसरे वर्ष की परीक्षा के बाद जोशना एमए की प्रवेश परीक्षा की तैयारी में लग गई थी. इधर कालेज में विदाई समारोह यानी फेयरवैल के लिए सभी उत्सुक थे. जोशना भी बहुत खुश थी. लेकिन जब प्रवेश परीक्षा का एडमिट कार्ड उस के हाथ आया तो उसे देखते ही जोशना उदास हो गई. दरअसल, परीक्षा और फेयरवैल की तारीख एक ही दिन पड़ गई थी.

जोशना को समझ ही नहीं आ रहा था अब वह क्या करे. यह बात जब उस ने अंकिता को बताई तो वह भी उदास हो गई. आखिर में सब ने उस को फेयरवैल के बजाय परीक्षा देने की ही सलाह दी.

कुछ दिन बीते. जोशना परीक्षा की तैयारी में व्यस्त थी और अंकिता फेयरवैल की. हालांकि बीचबीच में दोनों की बात सोशल मीडिया पर हो जाया करती थी, लेकिन जोशना को अंकिता के बात करने के तरीके में बदलाव नजर आने लगा था.

फेयरवैल वाले दिन जोशना को उम्मीद थी कि अंकिता उस को परीक्षा की शुभकामनाएं देने के लिए मैसेज जरूर करेगी. मैसेज न आने पर जोशना ने खुद ही व्हाट्सऐप पर मैसेज कर के लिख दिया, ‘मैं परीक्षा के लिए जा रही हूं, तू तैयार हो कर फोटो जरूर भेजना, मुझे देखना है तू साड़ी में कैसी लगेगी.’ इतना लिख कर जोशना परीक्षा के लिए चली गई.

परीक्षा के बाद जब जोशना ने फोन देखा तो सिर्फ ओके लिखा हुआ आया था. जोशना को लगा शायद अंकिता व्यस्त होगी या थक गई होगी. लेकिन रात को भी उस ने फोटो नहीं भेजी और न उस ने उस की परीक्षा के बारे में कुछ सवाल किया.

जोशना को इस बात का बहुत बुरा लगा. जोशना ने अंकिता को मैसेज करना ही बंद कर दिया. अचानक 4 दिनों बाद जोशना के फोन पर अंकिता का मैसेज आया. मैसेज खोला तो देखा अंकिता की फेरयवैल की फोटोज थीं. जोशना ने फोटोज देखीं लेकिन बदले में कोई मैसेज नहीं भेजा. अब होना क्या था, दोनों की दोस्ती अहंकार के कुएं में डूबती जा रही थी.

अंकिता ने एक दिन बाद फिर मैसेज भेजा और पूछा, ‘कैसी लगी पिक?’ लेकिन जोशना ने कोई जवाब नहीं दिया. कुछ समय बाद जब दोनों कालेज में मिलीं तो दोनों ही अजीब व्यवहार कर रही थीं. दोस्तों के बहुत कहने पर दोनों ने बात तो की लेकिन एकदूसरे पर इलजाम लगा कर.

अंकिता उसे समझा रही थी कि वह मैसेज देख कर भूल गई थी और घर पर कोई नहीं था, इसलिए वह ज्यादा फोन इस्तेमाल नहीं कर रही थी. लेकिन जोशना अपने गुस्से को बराबर रखे हुए थी. लेट मैसेज और गलतफहमी के कारण अंकिता और जोशना की दोस्ती में मनमुटाव हमेशा के लिए हो गया.

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रिश्तों पर भारी सोशल मीडिया की लत

आज के समय में रिश्तों में बस औपचारिकता ही रह गई है. पहले लोग एकदूसरे के साथ वक्त बिताया करते थे, अब लोग सिर्फ एकदूसरे के साथ फोटो डालना पसंद करते हैं. पिछले एक दशक में सोशल नैटवर्किंग साइट्स की लोकप्रियता जबरदस्त बढ़ी है. जमाना बदल रहा है, रिश्ते बदल रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी बदलाव जारी हैं. कल तक जो पड़ोसी और रिश्तेदार एकदूसरे से बहुतकुछ छिपाया करते थे, आज वे खुद ही सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल कर हर राज से परदा हटा देते हैं और फिर खुद ही रोते रहते हैं.

इंटरनैट के जमाने में लोग सोशल मीडिया से इस कदर जुड़ गए हैं कि रोज अपनी दिनचर्या को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. उस के बाद अपनी जिंदगी के हर पहलू पर लोगों की राय, उन की पसंदनापसंद जानना चाहते हैं.

सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग आपस में जुड़े तो हैं लेकिन इस जुड़ाव में न तो अपनापन है, न असली रुचि, बल्कि लोगों में प्रतिस्पर्धा और जलन अधिक है. सोशल मीडिया पर लोग घंटों समय बिता देते हैं लेकिन लोगों के पास एकदूसरे से मिलने का समय नहीं होता. वीडियोकौल, फोनकौल, चैटिंग ने बहुतकुछ बदल कर रख दिया है.

पहले लोग शौपिंग करने जाते थे तो पूरा परिवार साथ जाता था. साथ शौपिंग करने में कितना मजा आता था. लेकिन अब तो बस कोई एक चला जाए और फोटो भेज दे तो इसी से हो जाती है शौपिंग. जब कभी घर में शादीविवाह जैसा कोई फंक्शन हुआ करता था तब लोग समय निकाल कर घरघर जा कर न्योता दिया करते थे. लेकिन आज का समय बदल गया है. लोग घरघर जाने के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से ही न्योता दे देते हैं.

सोशल मीडिया की लत में लोग समय की बचत करने लगे हैं या यों कहें लोगों को एक हाथ से ही ताली बजाने का मौका मिल गया है. नतीजतन, हम साथ तो चल रहे हैं लेकिन रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं.

दोस्ती और गलतफहमी

दोस्ती के रिश्ते में थोड़ीबहुत तूतूमैंमैं तो होती रहती है. लेकिन कई बार सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान हुई गलतफहमी भी तकरार की वजह हो सकती है. हम अकसर देखते हैं लोगों को सोशल मीडिया पर बातचीत करते वक्त ‘ओके,’ ‘हम्म,’ ‘ठीक है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए. लेकिन इन शब्दों की गिनती बेमन से भेजे जाने वाले शब्दों में की जाती है जिस का ज्यादा इस्तेमाल करने से दोस्ती में कड़वाहट आ जाती है. सोशल मीडिया पर गलतफहमी सब से ज्यादा दोस्ती के रिश्तों में देखी जाती है.

सोनाक्षी और सौरभ दोनों एकदूसरे को अच्छा दोस्त मानते हैं. दोनों जब भी मिलते हैं, खूब मस्ती करते हैं. लेकिन सौरभ को ऐसा लगता है कि सोनाक्षी उस से बेमन से बातें किया करती है. ऐसा लगने की वजह है सोशल मीडिया. सोनाक्षी को चैटिंग के जरिए बात करना ज्यादा पसंद नहीं. ऐसे में जब भी सौरभ उस को मैसेज करता है तो उस का जवाब ‘ठीक है’ में ही आता है.

कई बार दोनों की इस बात पर बहस भी हुई है. एक दिन दोनों की यह बहस लड़ाई में बदल गई. सौरभ कहता है, ‘‘तू औनलाइन आती है, फिर भी जवाब देर से देती है और सच कहूं तो ‘हम्मओके’ में जवाब देना होता है तो मत ही दिया कर.’’ यह सुनते ही सोनाक्षी भी गुस्से से लाल हो गई.

गुस्से में उस ने भी जवाब देना शुरू कर दिया, ‘‘तुझे कितनी बार बताया है कि मुझे इस तरह से बात करना ज्यादा पसंद नहीं. लेकिन तुझे पता नहीं क्या होता है. हमेशा यह सवाल ले कर मेरे सामने आ जाता है. जब भी मैं तुझ से मिलती हूं, अच्छे से बात करती हूं. इस के बावजूद तू ऐसे सवाल करता है. ऐसा कर कि आज के बाद बात ही मत करना, क्योंकि में सच में अब परेशान हो चुकी हूं.’’

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