सपा-बसपा गठबंधन को लेकर मायावती पूरी तरह से मुखर हैं और लगातार हमले कर लोकसभा चुनाव में हार के लिये सपा को जिम्मेदार ठहरा रही है. दूसरी तरफ सपा नेता अखिलेश यादव पूरी तरह से चुप्पी साधे हैं. अखिलेश की चुप्पी समाजवादी पार्टी और नेताओं पर भारी पड़ रही है. उनको यह समझ नही आ रहा कि बसपा के साथ संबंधों को लेकर जमीनी स्तर पर कैसे निपटे. बसपा के साथ ऊहापोह की यह हालत अखिलेश यादव के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगा रही है.

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