लोकसभा चुनाव परिणाम के पहले केदारनाथ धाम की जिस गुफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिवसीय साधना की थी. इसमे जाकर साधना करने के ख्वाहिशमंद लोगों की तादाद इतनी बढ़ती जा रही है कि उसे एक लग्जरी रूम बना दिया गया है. अब तक हालांकि कोई 25 श्रद्धालु ही इसमे गए हैं  लेकिन बढ़ती भीड़ देखकर गढ़वाल विकास निगम के महाप्रबंधक बीएल राणा ने इसकी आनलाइन बुकिंग शुरू करवा दी है. जिसे खासा रिस्पौंस भी मिल रहा है. बकौल राणा अभी तक कुल 20 लोग ही इस गुफा में रुके हैं लेकिन इस चुनाव को जिताऊ और पीएम बनाऊ गुफा की डिमांड इतनी बढ़ रही है कि हम और मोदी गुफाएं बनाने जा रहे हैं. लेकिन चूंकि यह पूरी तरह कृत्रिम गुफा नहीं है इसलिए दूसरी ऐसी गुफाएं बनाने में वक्त लगेगा.

अगर आप भी मोदी गुफा में रुककर पीएम न सही पार्षद या पंच सरपंच बनने साधना करना चाहते हैं तो इस मनोकामना की पूर्ति के लिए आपको महज 1500 रु अदा करने होंगे लेकिन नंबर कब आएगा यह अभी नहीं बताया जा सकता क्योंकि गुफा एक ही है और एक दिन में एक ही आदमी इसमें ठहर सकता है. 1500 रु देने पर आप एक दिन मोदी की तरह साधना के जरिया भोले को खुश कर सकते हैं. सहूलियत के लिए इस मोदी गुफा में जरूरी बुनियादी सहूलियतें मुहैया करा दी गईं हैं. गुफा के बाहर एक अटेंडेंट तैनात कर दिया गया है अगर आपको शंकर के दर्शन न होने के अलावा और किसी भी किस्म की दिक्कत या शिकायत होती है तो यह अटेंडेंटनुमा बैरा घंटी बजते ही सेवा में हाजिर हो जाएगा. जो आपको आपका पसंदीदा खाना नानवेज छोड़कर देगा और चाय नाश्ता लाकर भी देगा.

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मोदी गुफा वैदिक काल की गुफाओं जैसी दुर्गम न लगे इसलिए इसमें बिजली की व्यवस्था कर दी गई है. इतना ही नहीं आराम फरमाने गुफा में एक कमरा भी बनवा दिया गया है और आराम देह बिस्तर का भी इंतजाम कर दिया गया है. गोया की यह गुफा अब गुफा नहीं रह गई है बल्कि एक कमरे वाली होटल बन गई है. खासियत या शर्त यह भी है कि मोदी गुफा में एक बार में एक श्रद्धालु ही साधना कर सकता है.  यह डर वाजिब है कि एक से ज्यादा लोग होंगे तो साधना वासना में भी तब्दील हो सकती है. गढ़वाल विकास निगम आपके चेक इन और चेक आउट टाइम का निर्धारण करेगा.

लेकिन इस गुफा तक पहुंचना मोदी जी की तरह आसान नहीं है. इसके लिए आपको बुकिंग तारीख के दो दिन पहले गुप्तकाशी पहुंचना होगा जो कि केदारनाथ मंदिर का बेस केंप है. इसके बाद आप पैदल या फिर खीसे में पैसा हो तो हेलिकाप्टर से उड़कर गुफा तक पहुंच सकते हैं. यहां आपकी दूसरी बार चिकित्सीय जांच होगी पहली बेस केंप में हो चुकी होगी. बुकिंग की राशि अग्रिम देना होगी जो बुकिंग केंसिल कराने पर वापिस नहीं होगी. आम लोगों को मीडिया कर्मी ले जाने की इजाजत नहीं होगी.

एडवेंचर टूरिजम के शौकीनों के लिए यह एक बेहतर और हाल फिलहाल सस्ती पेशकश है. इससे दूसरा फायदा यह है कि भोलेनाथ अगर मोदी की तरह आप पर प्रसन्न हो गए तो पीएम न सही छुटभैया सियासी पद दिला ही देगा. गुफा की आन लाइन बुकिंग जारी है और लोग इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं जिसे देख कहा जा सकता है कि आपका हो न हो पर गुफा का भविष्य उज्ज्वल है और गढ़वाल विकास निगम की भी बल्ले बल्ले हो रही है.

यह बल्ले बाले और बढ़ेगी क्योंकि हमारे देश में सिद्ध और चमत्कारी स्थलों की भरमार है किसी कुंड या झरने में नहाने से चर्म रोग दूर होते हैं. भले ही उसमे पानी की जगह कीचड़ विराजमान हो लेकिन इससे आस्था डिगती नहीं है. किसी धार्मिक स्थल पर अर्जी देने से पाप को माफी मिलती है तो किसी खास जगह पर जाने से मनोरोगी ठीक हो जाते हैं.

अब एक नई गुफा तैयार है जो 18 मई के बाद हिट हुई है. लोगों को सत्यनारायन कथा की लीलावती और कलावती की तरह लग रहा है कि जैसे मोदी जी की पूरी हुई वैसे ही उनकी भी मनोकामना पूरी होगी. हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर जल्द ही कोई विदद्वान ज्ञाता धार्मिक पोथे पत्रियों में से यह सच खंगाल कर ले आए कि दरअसल में मोदी गुफा का अपना अलग महात्म्य है. क्योंकि इसमे सतयुग या त्रेता युग में फलां ऋषि ने घोर तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप शंकर को खुश होकर उसे मनचाहा वरदान देना पड़ा था और शंकर ने यह भी कहा था कि कलयुग में नरेंद्र मोदी नाम का एक धार्मिक शासक यहां आकर घनघोर तप करेगा जिसके प्रभाव से राक्षसी प्रवर्ति कांग्रेस 52 सीटों पर सिमट कर रह जाएगी.

दरअसल में गढ़वाल विकास मण्डल मोदी गुफा को लेकर कच्चा खा गया है जो इस रूम रूपी गुफा या गुफा रूपी रूम का किराया 15 हजार रु भी रखता तो और ज्यादा बुकिंग होतीं और फिर गोपनीय तरीके से राहुल गांधी भी धोती और जनेऊ लटकाते हुए यहां आते और पूरे साल भर की बुकिंग करा डालते. हां दिक्कत या फसाद तब खड़े होते जब भाजपा के उम्रदराज नेता यानि मार्गदर्शक या फिर मंत्रिमंडल के ही कुछ सदस्य इस चमत्कारी गुफा की बुकिंग कराते. तब मुमकिन है इस मोदी गुफा को भी भृतहरि की गुफाओं की तरह बंद कर दिया जाता और पांच साल में एक बार ही सिर्फ नरेंद्र मोदी के लिए ही खोला जाता वह भी लोकसभा चुनाव नतीजों के पांच दिन पहले.

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