असमंजस में किया गया कोई भी फैसला राजनीति में सही परिणाम नहीं देता है. बसपा के लिये मायावती के फैसले असमंजस भरे है. पार्टी में परिवारवाद का विरोध करते करते मायावती ने पार्टी को परिवारवाद के हवाले कर दिया हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि बसपा में अब भरोसेमंद नेताओं की पीढ़ी खत्म हो गई है.

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