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पलभर का सच : भाग 1

उस दिन रात में लगभग 12 बजे फोन की घंटी बजी तो नींद में हड़बड़ाते हुए ही मैं ने फोन उठाया था और फिर लड़खड़ाते शब्दों में हलो कहा तो दूसरी ओर से मेरे दामाद सचिन की चिरपरिचित आवाज मुझे सुनाई दी :

‘‘मैं सचिन बोल रहा हूं सा मां.’’

मेरी सब से प्रिय सहेली शुभ का बेटा सचिन पहले मुझे ‘आंटी’ कह कर बुलाता था. मगर जब से मेरी बेटी पूजा के साथ उस की शादी हुई है वह मुझे मजाक में ‘सा मां’ यानी सासू मां कह कर बुलाता था. उस रात उस की आवाज सुन कर मैं अनायास ही खुश हो गई थी और बोल पड़ी थी :

‘‘हां, बोलो बेटे…क्या बात है? इतनी रात गए कैसे फोन किया…सब ठीक तो है?’’

‘‘हां हां, सबकुछ ठीक है सा मां… पर आप को एक सरप्राइज दे रहा हूं. पूजा और मम्मी कल राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली आप के पास पहुंच रही हैं.’’

‘‘अरे वाह, क्या दिलखुश करने वाली खबर सुनाई है…और तुम क्यों नहीं आ रहे उन के साथ?’’

‘‘अरे, सा मां…आप को तो पता ही है कि मैं काम छोड़ कर नहीं आ सकता. और इन दोनों का प्रोग्राम तो अचानक ही बन गया. तभी तो प्लेन से नहीं आ रहीं. मैं तो कल से आप का फोन ट्राई कर रहा था. मगर फोन मिल ही नहीं रहा था…तभी तो आप को इतनी रात को तंग करना पड़ा… ये दोनों कल 10 साढ़े 10 बजे निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर उतरेंगी… राजू भैया को लेने के लिए भेज देना.’’

‘‘हां हां, राजू जरूर जाएगा और वह नहीं जा सका तो उस के डैडी जाएंगे… तुम चिंता मत करना.’’

यह कहते हुए मैं ने फोन रख दिया था और खुशी से तुरंत अपने पति को जगाते हुए उन्हें पूजा के आने की खबर सुना दी.

‘‘गुडि़या आ रही है यह तो बहुत अच्छी बात है पर उस के साथ तुम्हारी वह नकचढ़ी सहेली क्यों आ रही है?’’ हमेशा की तरह उन्होंने शुभा से नाराजगी जताते हुए मजाक में कहा.

‘‘अरे, उस का और एक बेटा भी यहां दिल्ली में ही रहता है. उस से मिलने का जी भी तो करता होगा उस का. पूजा को यहां पहुंचा कर शुभा कल चली जाएगी अपने बेटे के पास.’’

शुभा को शुरू से ही जाने क्यों यह पसंद नहीं करते थे जबकि वह मेरी सब से प्रिय सहेली थी. स्कूल और कालिज से ही हमारी अच्छीखासी दोस्ती थी. कालिज में शुभा को मेरी ही कक्षा के एक लड़के शेखर से प्यार हो गया था. उन दोनों के प्यार में मैं ने किसी नाटक के ‘सूत्रधार’ सी भूमिका निभाई थी. मुझे कभी शेखर की चिट्ठी शुभा को पहुंचानी होती तो कभी शुभा की चिट्ठी शेखर को. शुभा अपने प्यार की बातें मुझे सुनाती रहती थी.

खूबसूरत और तेज दिमाग की शुभा अमीर बाप की इकलौती बेटी होने के बावजूद मेरे जैसी सामान्य मिडल क्लास परिवार की लड़की से दोस्ती कैसे रखती है…यह उन दिनों कालिज के हर किसी के मन में सवाल था शायद. दोस्ती में जहां मन मिल जाते हैं वहां कोई कुछ कर सकता है भला?

शुभा का शेखर से प्यार हो जाने के बाद यह दोस्ती और भी पक्की हो गई थी. शेखर के पिता बहुत बड़े उद्योगपति थे. साइंस में इंटर करने के बाद शेखर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई चला गया मगर शुभा को वह भूला नहीं था. आखिर कालिज की पढ़ाई पूरी करतेकरते ही शुभा और शेखर का प्रेम विवाह हम सब सहपाठियों के लिए एक यादगार बन कर रह गया था.

शुभा की शादी के साल भर बाद ही मेरी भी शादी हो गई और मैं यह जान कर बेहद खुश थी कि शादी के बाद मैं भी शुभा की ही तरह मुंबई में रहने जा रही थी.

मुंबई में हम जब तक रहे थे दोनों अकसर मिलते रहते थे मगर शुभा और शेखर के रईसी ठाटबाट से मेरे पति शायद कभी अडजस्ट नहीं हो सके थे. इसी से जब भी शुभा से मिलने की बात होती तो ये अकसर टाल देते.

मेरे पहले बेटे राजू के जन्म के बाद मेरे पति ने पहली नौकरी छोड़ कर दूसरी ज्वाइन की तो हम दिल्ली आ गए. यहां आने के 3 साल बाद पूजा का जन्म हुआ और फिर घरगृहस्थी के चक्कर में मैं पूरी तरह फंस गई.

शुभा से मेरी निकटता फिर धीरेधीरे कम होती गई थी. इस बीच शुभा भी 2 बच्चों की मां बन गई थी और दोनों बार लड़के हुए थे. यह सब खबरें तो मुझे मिलती रही थीं, मगर अब हमारी दोस्ती दीवाली, न्यू ईयर या बच्चों के जन्मदिनों पर बधाई भेजने तक ही सिमट कर रह गई थी.

पूजा को मुंबई के एक कालिज में एम.बी.ए. में एडमिशन मिल गया और वहीं उस की मुलाकात सचिन से हो गई.

पहले मुलाकात हुई, फिर दोस्ती हुई और फिर ठीक शुभा और शेखर की ही तरह पूजा और सचिन का प्यार भी परवान चढ़ा था.

मुझे धुंधली सी आज भी याद है… जब शादी तय करने की बारी आई थी तो सब से पहले शुभा ने ही शादी का विरोध किया था. कुछ अजीब से अंदाज में उस ने कहा था, ‘शादी के बारे में हम 2 साल बाद सोचेंगे.’

मैं तो उस के मुंह से यह सुन कर हैरान रह गई थी. शुभा के बात करने के तरीके को देख कर गुस्से में ही मैं ने झट से कहा था, ‘तू ने भी तो कभी लव मैरिज की थी… तो आज अपने बच्चों को क्यों मना कर रही है?’

इस पर बड़े ही शांत स्वर में शुभा बोली थी, ‘तभी तो मुझे पता है कि लव और मैरिज ये 2 अलगअलग चीजें होती हैं.’

ये दर्शनशास्त्र की बातें मत झाड़. तू सचसच बता…क्या तुझे पूजा पसंद नहीं? या फिर हमारे परिवारों की आर्थिक असमानताओं के लिए तू मना कर रही है?’

‘नहींनहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. दरअसल, मैं शादी का विरोध नहीं कर रही हूं. मैं तो सिर्फ यह कह रही हूं कि शादी 2 साल बाद करेंगे.’

‘लेकिन क्यों, शुभा? सचिन तो अब अच्छाखासा कमा रहा है और पूजा की पढ़ाई खत्म हो चुकी है. फिर अब बेकार में 2 साल रुकने की क्या जरूरत है?’

‘यह मैं तुम्हें आज नहीं बता सकती,’ और पता नहीं कभी बता भी पाऊंगी कि नहीं.’

हम सब तो चुप हो गए थे लेकिन सचिन और पूजा दोनों ठहरे आज के आधुनिक विचारों के बच्चे. वे दोनों कहां समझने वाले थे. उन दोनों ने अचानक एक दिन कोर्ट में जा कर शादी कर ली थी और हम सब को हैरान कर दिया था.

शुभा और शेखर ने हालात को समझते हुए एक भव्य फाइव स्टार होटल में शादी की जोरदार पार्टी दी थी और फिर सबकुछ ठीकठाक हो गया था.

पूजा की शादी को साल भर हो चुका था. इस दौरान वह और सचिन अकसर दिल्ली मेरे यहां आया करते थे मगर शुभा पहली बार मेरे यहां बतौर समधन आ रही थी इसलिए भी मैं मन ही मन बहुत खुश हो रही थी. मुझ में बहुत सी पुरानी यादें उमड़ती जा रही थीं और उन मीठी सुहानी यादों की डोर मुझे कभी बचपन में तो कभी जवानी में ले जा कर ‘मायके’ पहुंचा रही थी.

ठीक 11 बजे राजू पूजा और शुभा को घर ले आया. कार से उतरते हुए मैं ने उन दोनों को देखा तो पूजा सिर्फ एक बैग ले कर आई थी मगर शुभा तो 3-4 बैग के साथ आई थी. बैगों को देख कर मेरे चेहरे पर आए अजीबोगरीब भावों को देख कर कुछ झेंपते हुए शुभा बोली, ‘‘मेरा सामान बहुत ज्यादा है न. दरअसल, मैं अब दिल्ली में अपने बेटे मुन्ना के पास रहने के इरादे से आई हूं. मेरा सामान यहीं बाहर ही रहने दो…अभी थोड़ी देर में मुन्ना आ जाएगा तो मैं उस के साथ चली जाऊंगी.’’

‘‘मेरी प्यारी समधन जी, आप हमारे घर अपनी इच्छा से आई हैं, मगर जाएंगी हमारी इच्छा से, समझीं? अब ज्यादा नखरे मत दिखाओ और चुपचाप अंदर चलो.’’

मैं ने शुभा से मजाक करते हुए कहा था तो मेरे बोलने के अंदाज से वह बहुत खुश हो गई और मेरे गले लग कर पहले की तरह हंसनेबोलने लगी थी.

खाना खा लेने के बाद हम सब कुछ देर तक गपशप करते रहे. पूजा अपने डैडी से अपने काम की बातें करती जा रही थी. पूजा की बातों से प्रभावित हो कर राजू भी अपनी छोटी बहन से सवाल पर सवाल पूछता जा रहा था. कुछ देर तक उन तीनों की बातें सुन लेने के बाद मैं शुभा को ले कर अपने कमरे में चली गई थी.

कमरे में जा कर हम दोनों जब पलंग पर लेट गए तो मैं ने सोचा कि हम दोनों एकसाथ होते ही पहले की तरह अनगिनत बातें शुरू कर देंगे और बातें करने को समय कम पड़ जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं था.

क्या उम्र के तकाजे ने या बदलते रिश्ते ने हमारे होंठ सिल दिए थे? मैं सोचने लगी कि शुभा बड़े धीरगंभीर और संयत स्वर में अचानक बोली थी, ‘‘मैं तलाक ले रही हूं, शालो.’’

‘‘क…क्याऽऽऽ?’’ कहते हुए मैं पलंग पर उठ कर बैठ गई थी.

‘‘हां, शालो, यह सच है. तुम्हें कहीं बाहर से खबर मिले और फिर तुम लोग परेशान हो जाओ, इस से अच्छा है कि मैं ही बता दे रही हूं…इसीलिए पहले मैं ने पूजा व सचिन की शादी 2 साल बाद करने की बात कही थी… सोचती थी कि बेटे की शादी के बाद यह सब अच्छा नहीं लगेगा… लेकिन अब मुझ से सहा नहीं जा रहा. अब मैं ने अपना मन पक्का कर लिया है.’’

‘‘लेकिन इतने सालों बाद यह फैसला क्यों, शुभा?’’

‘‘वैसे तो बहुत लंबी कहानी है, मगर जिस किसी को सुनाऊं उसे तो यह बहुत ही छोटी सी बात लगती है. कोई क्या जाने कि कभीकभी छोटी सी बात ही दिल में बवंडर बन कर समूचे जीवन को तहसनहस कर देती है.

‘‘तुम तो जानती ही हो कि शेखर मुझ से बेहद प्यार करता था. प्यार तो वह शायद आज भी बहुत करता है लेकिन शादी के बाद ही मैं ने उस के प्यार में बहुत बड़ा अंतर पाया है. शादी के पहले मुझे यह तो पता था कि हमारे यहां शादी सिर्फ पति से ही नहीं उस के पूरे परिवार से होती है. लेकिन शेखर से शादी करने के बाद मुझे लगा कि मेरी शादी शेखर के परिवार से नहीं उस के  परिवार की अजीबोगरीब अमीरी से हुई है.

घर पर बनाएं पनीर दो प्याजा

पनीर खाने में भी टेस्टी लगता है और सेहत के लिए काफी हेल्दी भी होता है. यह बच्चों के साथ-साथ  बड़ों  को भी पसंद आती है. तो चलिए आपको झट से बताते हैं पनीर दो प्याजा की रेसिपी.

सामग्री

पनीर – 250 ग्राम

प्याज – 03

हरी मिर्च – 01

अदरक – 02 इंच का टुकड़ा

गरम मसाला पाउडर – 01 छोटा चम्मच

धनिया पाउडर – 01 छोटा चम्मच

धनिया पत्ती – 01 बड़ा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर – 01 छोटा चम्मच

जीरा – 01 छोटा चम्मच

तेल – 02 बड़े चम्मच

नमक – स्वादानुसार

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बनाने की विधि‍

पनीर दो प्याजा बनाने के लिये सबसे पहले कड़ाही में तेल डाल कर गर्म करें. तेल गर्म हो जाने पर उसमें जीरा डालें. जीरा पक जाने पर कड़ाही में कटी हुई हरी मिर्च डालें और हल्का सा चला लें.

इसके बाद पैन में अदरक और प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें. इसके बाद गरम मसाला, धनिया पाउडर और लाल मिर्च का पाउडर डालें. इस सारी सामग्री को सुनहरा होने तक भून लें.

प्याज भूनते समय अगर वह जलने लगे, तो उसमें थोड़ा सा पानी मिला लें. जब प्याज अच्छी तरह से पक जाए, तो उसमें कटे हुए पनीर के टुकड़े डाल दें और उसे 2 मिनट तक पकायें.

अब आपका पनीर दो प्याजा तैयार है. बस इसे कटी हुई धनिया से सजाएं और गरमा गरम सर्व करें.

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छोटी सरदारनी: शूटिंग के बाद ऐसे पुशअप्स करते हैं परम और सरबजीत

कलर्स का शो छोटी सरदारनी इन दिनों टीवी औडियंस को काफी पसंद आ रहा है, जिसका अंदाजा शो के कलाकारों की औफस्क्रीन बौंडिंग से लगाया जा सकते हैं. छोटी सरदारनी के मेहर, सरब और परम अक्सर औफ स्क्रीन एक-दूसरे के साथ वक्त बिताते हैं, जिसके साथ वह मस्ती भी करते हैं. आइए आपको दिखाते हैं औनस्क्रीन पिता-बेटे की जोड़ी की औफस्क्रीन मस्ती…

एक साथ नजर आए सरब और परम

सीरियल छोटी सरदारनी के सेट से आई फोटो में परम और सरब एक साथ वक्त बिताने के साथ वर्कआउट करते हुए नजर आ रहे हैं.

 

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परम ने दी पुशअप करने की चुनौती

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सरबजीत गिल के किरदार को निभाने वाले एक्टर अविनाश रेखी परम के साथ एक खास बौंडिंग रखते हैं, जिसका अंदाजा इस फोटो से लगाया जा सकता है, जिसमें परम सरबजीत को पुश-अप्स करने की चुनौती देते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं चुनौती को कबूलते हुए परम की खुशी के लिए सरबजीत हारने का नाटक करते हुए नजर आए.

परम के साथ बौंडिंग को लेकर ये कहते हैं सरब

 

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एक्टर अविनाश रेखी ने परम के साथ बौंडिंग का जिक्र करते हुए कहा, “मैं रियल लाइफ में एक बेटे का पिता हूं, इसलिए एक तरह से, मेरे पास बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए इसका एक्सपीरियंस है. परम हैप्पी और लकी बच्चा है, जो 24X7 एनर्जी से भरपूर रहता है. ऐसे में जब हम अपने लंबे टाइम तक की शूटिंग से चिढ़ और थक जाते हैं, तो परम हमें एंटरटेन करता रहता है. इसी बीच हम काफी मस्ती भी करते हैं.

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बता दें, शो में इन दिनों मेहर की प्रेग्नेंसी को लेकर कईं नए-नए ट्विस्ट फैंस को काफी पसंद आ रहे हैं. ऐसे ही शो में परम, सरब और मेहर की बौंडिग अब आप एक दिन और देख पाएंगे. तो देखते रहिये  ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, शाम 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

शुभारंभ: राजा-रानी की मुलाकात से होगा एक नई दोस्ती का शुभारंभ

कलर्स चैनल पर आने वाले शो ‘शुभारंभ’ में दो अलग-अलग स्वभाव के राजा-रानी की कहानी में जल्द ही नया मोड़ नजर आने वाला है. शो मे राजा-रानी जितना एक-दूसरे के पास हैं, उतना ही एक दूसरे से दूर हैं. वहीं अब शो में दोनों की ये दूरी खत्म होने वाली है. आइए आपको बताते हैं कि कैसी होगी राजा-रानी की ये खास मुलाकात…

रानी की तलाश में है राजा

अब तक आपने देखा कि राजा, रानी को सोशल मीडिया पर ढूंढकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता है. इसी के साथ रानी की तलाश करते हुए राजा का सामना रानी के पिता छगन से हो जाता है.

रानी ने नहीं किया राजा पर भरोसा

रानी की तलाश करते हुए राजा को गरबा प्रतियोगिता के दौरान रानी मिल जाती हैं जहाँ दीपन के असली रूप के बारे में राजा, रानी को बताने की कोशिश करता है, लेकिन रानी उसपर भरोसा नही करती.

रानी का टूटेगा दिल

आज आप देखेंगे कि जब रानी को दीपन के बुरे इरादों का पता चलेगा तो रानी को एहसास होगा कि राजा पर भरोसा ना करके उसने गलती की है और उसे इस बात का बेहद पछतावा भी होगा.

क्या राजा बनेगा रानी का डांस पार्टनर

दीपन के इरादों को जानने के बाद जहाँ एक तरफ रानी का दिल टूटेगा वहीं डांस प्रतियोगिता में पार्टनर नही होने से वह निराश हो जाएगी. लेकिन राजा-रानी का डांस पार्टनर बनने के लिए तैयार हो जाएगा और दोनों प्रतियोगिता जीत जाएंगे. वहीं राजा की भेजी हुई फ्रेंड रिक्वेस्ट को रानी कबूल कर लेगी.

अब देखना ये है कि राजा-रानी की ये दोस्ती दोनों को किस मोड़ पर ले जाती है. जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ’, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सिर्फ कलर्स पर.

छोटी सरदारनी: क्या परम का डर बन जाएगा मेहर के बच्चे के लिए मुसीबत

कलर्स के शो छोटी सरदारनी मे जहां मेहर, सरब और परम की जिंदगी से जुड़ती जा रही है तो वहीं सरबजीत का परिवार भी मेहर को अपना चुका है, लेकिन शो में अब जल्द ही नए ट्विस्ट देखने को मिलने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं परम का कौन सा डर मेहर के बच्चे के लिए मुसीबत बनने वाला है…

पहले प्यार को भूलकर आगे बढ़ेगी मेहर


पिछले एपिसोड में आपने देखा कि मेहर को धीरे-धीरे फैमिली को अपनाने लगी है. इसी के साथ मेहर अपने अतीत मानव को भी भुलाने की पूरी कोशिश कर रही है.

क्या परम का डर बन जाएगा मेहर के बच्चे के लिए मुसीबत

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आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि परम दूसरा भाई या बहन नही चाहता, जिसके पीछे कारण है उसका डर. दरअसल, परम के मन में ये डर आ गया है कि अगर उसकी मेहर मम्मा ने बच्चे को जन्म दिया तो वह मर जाएगी और वह उसकी जिंदगी से दूर हो जाएगी.

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अब देखना ये है कि मेहर और सरब किस तरह परम को मना पाते हैं? जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, शाम 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

मामांगम फिल्म रिव्यू: ‘‘ऐतिहासिक घटनाक्रम का असफल चित्रण… ’’

रेटिंगःढाई स्टार

निर्माताःवेणु कुन्नाप्पल्ली

निर्देशकः एम पदमकुमार

कलाकारःममूटी,प्राची तेहलानमास्तर अच्युतन,उन्नी मुकुंदन,तरूण अरोड़ा,मोहन शर्मा,मणिकंदन अचारी व अन्य.

अवधिः दो घंटे 36 मिनट      

पंद्रहवी से 18 वीं सदी के बीच केरला के मालाबार क्षेत्र में नदी किनारे आयोजित होने वाले उत्सव ममंकम की कहानी को फिल्मकार एम पद्मकुमार फिल्म ‘‘मामांगम’’में लेकर आए हैं. जो कि समुद्री शासक  के खिलाफ वल्लुवनाड के आत्मघाती अनाम योद्धाओं के साथ छल विश्वासघात की रोचक कथा है. मगर यह फिल्म सदियों पुराने एक्शन दृश्यों और उत्पीड़न का ऐसा कोलाज बनकर रह गयी है कि दर्शकों को लगता है कि वह कोई टीवी सीरियल देख रहा हो. मूलतः मलयालम में बनी इस फिल्म को हिंदी,तमिल,कन्नड़ व तेलगू में डब करके एक साथ प्रदर्शित किया गया है.

कहानीः

फिल्म सत्रहवीं सदी में युद्ध के दृश्य के साथ शुरू होती है,जहां चंद्रोत वाल्या पणिक्कर(ममूटी)और आत्मघाती योद्धाओं का एक समूह समुद्री शासक की सेना से लड़ता है. मगर समुद्री शासक को मारने के करीब आने के बाद युद्ध के मैदान से भाग जाते हैं. जिससे वल्लुवनाड़ योद्धा कबीले की निर्भयता की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है. वल्लुवनाड़ कबीले के लोग उनका नाम तक लेना पसंद नहीं करते. इस युद्ध के 24 साल के  बाद वल्लुवनाड़ कबीले के नए प्रमुख चंद्रोथ पणिक्कर (उन्नी मुकुंदन)फिर से सम्रदी राजा के खिलाफ युद्ध करने का फैसला करते हुए मामांगम उत्सव का हिस्सा बनने का निर्णय लेते हैं. वह अपने परिवार के सदस्यों से कहते है कि ममंकम उत्सव का हिस्सा बनने का आदेश उन्हे भगवती देवी ने दिया है. कबीले की महिलाएं यह जानते हुए भी अपने पुरुषों को युद्ध के मैदान में भेजती रही है कि उनके जीवित रहने की संभावना धूमिल है.

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चंद्रोथ पणिक्कर के साथ उनका 12 साल का भांजा चान्थुनी (मास्टर आच्युतन), जो कि अति कम उम्र का योद्धा हैं,वह भी अपेन मामा के साथ मामांगम जाने का फैसला लेता है. चंद्रोथ और चन्थुनी मामांगम के लिए रवाना होते है. पता चलता है कि जमोरियन समुद्री शासक ने अपने सैनिकों की सीमा पर ऐसी घेरे बंदी की है कि वल्लुवनाड़ कबीले का कोई योद्धा उनके देश में प्रवेश न कर पाए.

तभी पता चलता है कि   तिरुवनवय के एक वेश्यालय में समुद्री राा के खास व्यापारी की हत्या से हड़कंप मच गया है. समुद्री राजा के कहने पर इसकी जांच करने सेनापति पहंुचता है. वहीं पर कहानी में कई मोड़ आते हैंं. यह देवदासी यानीकि मुख्य वेश्या उन्नीमाया(प्राची तेहलान)का महल है. यहीं चंद्रोत वाल्या पणिक्कर एक चित्रकार के अवतार में अपने परिवार की नई पीढ़ी के सदस्यों चंद्रोत पणिक्कर और चांथुन्नी से मिलते हैं,जो लड़ाई लड़ने के लिए दृढ़ होते हैं. और चंद्रोत वाल्या पणिक्क्र के ही हाथ व्यापारी की हत्या होती है,मगर उन्नीमाया, उनकी सह वेश्याएं और अन्य लोग पूरी तरह से सेनापति से इस सच को  पाने का असफल प्रयास करती है.

 ‘यहां चंद्रोत शांति के उपदेशक के रूप में नजर आते हैं. उनका मानना है कि 350 साल से बदले की आग वल्लुवनाड़ के योद्धा,समुद्री शासक को मारने आते हैं और राजा की सेना द्वारा मारे जाते हैं. यहां तक कि उनका शव भी वल्लुवनाड़ नहीं पहुंच पाता. परिणामतः अब वल्लुवनाड़ में एक भी पुरूष नही बचा है. वह अपने परिवार के सदस्यों को उस भाग्य के बारे में चेतावनी देते हैं, जो आत्मघाती योद्धा कबीले का इंतजार करता है. मगर चंद्रोथ पणिक्कर और चान्थुनी मामांगम के लिए दृढ़ संकल्प हैं. अब वल्लुवनाड के यह योद्धा युद्ध के मैदान में सफल होते हैं या अपने कबीले की शहादत के भाग्य को बदलते हैं, यह तो फिल्म देखने पर ही पता चलेगा.

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लेखन व निर्देशनः

मूल पटकथा लेखक और निर्देशक संजीव पिल्लई को फिल्म के निर्माता ने असहमति के चलते हटाकर बाद में एम पदमकुमार को निर्देशक बनाया, इसका असर फिल्म में साफ तौर पर नजर आता है. अफसोस लेखक ऐतिहासिक घटना क्रम का सही ढंग से विवेचन नही कर पाए. फिल्म काफी सुस्त,थकाउ व सीरियल बनकर रह गयी है. लगता है जैसे कि फिल्म को एडिट ही नही किया गया. फिल्म में बदले की आग में अपने परिवार के पुरूषों को खो रही महिलाएं है,मगर उन्हे देखकर कहीं कोई इमोशंस नही उभरते.

अभिनयः

चंद्रोत वल्या पणिक्कर के किरदार में ममूटी निराश करते हैं. उम्र के चलते वह एक्शन दृश्यों में जमते नही है. ममूटी का किरदार महज एक कैरीकेचर बनकर रह गया है. इसके अलावा उन्नीमाया के महल में उनका स्त्रीलिंग में परिवर्तन हजम नही होता. बाल योद्धा चांथुन्नी के किरदार में मास्टर अच्युतन हर किसी का दिल मोह लेते हैं. कमाल का अभिनय और काल के एक्शन दृश्य किए हैं. उन्नी मुकुन्दन ने काफी हद तक बेहतरीन परफार्मेंस दी है. उन्नी माया के किरदार में प्राची तेहलान छाप छोड़ जाती हैं. प्राची तेहलान उम्मीद जगाती है कि उनके अंदर अभिनय क्षमता है, जिसे उकेरने के लिए उन्हे बेहतर कथा,किरदार व निर्देशक की दरकार है. अनु सीता और कान्हा के हिस्से करने को कुछ खास नही है. तरूण अरोड़ा,मणिकंदन अचारी ने ठीक ठाक काम किया है.

एक्शन स्टंटः

हवा में उड़ते योद्धाओं के साथ एक्शन दृश्य कहीं से भी वास्तविक नहीं लगते.  वीएफएक्स भी स्तरहीन है.

‘जुमांजी नेक्स्ट लेवल’ : बेहतरीन रोमांचक फिल्म

रेटिंग:  तीन स्टार

निर्देशकः जेक कासड

कलाकारः ड्वेन जौनसन, केविन हार्ट, जैक ब्लैक, करेन गिलन, निक जोनास, एलेक्स वोल्फ, मार्गन टर्नर, सेरियस डैरन, अक्वावाफिना, डैनी ग्लोवर, डैनी डेविटो और मैडिसन इस्मान आदि

अवधिः 2 घंटा 3 मिनट

फिल्म‘‘जुमांजीः द नेक्स्ट लेवल’’ 1995 के जुमांजी का यह तीसरा सिक्वअल है. दूसरा सिक्वअल ‘जुमांजीः वेलकम टू द जंगल’ 2017 में आयी थी. दो साल पहले आई ‘जुमांजीः वेलकम टु द जंगल‘ के दौरान किसी तरह जान बचाकर निकलने वाले स्पेंसर (एलेक्स वाल्फ) और उसके साथी फ्रिज (सरडेरियस ब्लेन), मार्था (मौर्गन टर्नर) और बेथनी (मैडिसन आइसमैन)ने तय किया था कि वह इस खतरनाक वीडियो गेम को कभी हाथ नहीं लगाएंगे. क्योंकि वह खेलने वाले को अपने भीतर खींच लेता है और उसे गेम के किरदारों में तब्दील कर खतरनाक जुमांजी द्वीप पर मुसीबतों से जूझने के लिए छोड़ देता है. लेकिन स्पेंसर की अपनी असुरक्षा की भावना उसे और उसके दोस्तों को एक बार फिर इसी फैंटसी द्वीप पर पहुंचा देती हैं. पर इस बार इनके किरदार बदल जाते हैं. इस बार फिल्म के किरदारों की अदला-बदली फिल्म की सबसे बड़ी रोचकता है.

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कहानीः

पिछली फिल्म में ‘जुमांजी’ से वापस आने के बाद मार्था, बेथनी और फ्रिज जहां भरपूर जिंदगी जी रहे हैं, वहीं स्पेंसर अपनी असुरक्षाओं से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाया है. वह खुद को जुमांजी के ताकतवर किरदार डौक्टर स्मोल्डर ब्रेवस्टोन (ड्वेन जौनसन)के रूप में फिर से देखना चाहता है और इसी चक्कर में विडियोगेम के जरिए वह जुमांजी पहुंच जाता है. इधर स्पेंसर के गायब होने से परेशान उसके दोस्त मार्था, फ्रिज और बेथनी भी उसे बचाने वीडियो गेम के जरिए जुमांजी पहुंच जाते हैं. मजेदार बात यह है कि इस बार इनके किरदारों की अदला- बदली हो जाती है. जैसे कि स्पेंसर की बजाय उसके दादा जी एडी इस बार डौक्टर ब्रेवस्टोन बन जाते हैं, तो फ्रिज के बजाय एडी के दोस्त माइलो को मूज (केविन हार्ट) का किरदार मिल जाता है. मार्था इस बार भी रूबी राउंडहाउस (कैरेन गिलन) है, तो फ्रिज इस बार प्रोफेसर शेल्डन शैली (जेक ब्लैक) बन जाते हैं. उसके बाद इन किरदारो को कई रोमांचक व खतरनाक टास्क पूरे करने पड़ते हैं.

निर्देशनः

निर्देशक ने फिल्म में कौमेडी, इमोशन, एक्शन, रोमांच बेहतरीन समन्वय पेश किया है. वह विषय को लेकर अधिक महत्वाकांक्षी नजर आए हैं. उनके निर्देशकीय प्रतिभा की तारीफ करनी पड़ेगी. मगर पिछली फिल्म के मुकाबले इस बार पटकथा के सतर पर कमियां हैं. पटकथा की कमजोरी के चलते खलनायक के उद्भव पर फिल्म खामोश रहती है. पर स्पेंसर के वीडियो गेम से जुड़ने की ठोस वजह बतायी गयी है.

एक बार फिर इतिहास पर बनी कोई फिल्म बनी विरोध का कारण…

अभिनयः

एडी (डैनी डेविटो) और उनके दोस्त मिलो (डैनी ग्लोवर) जैसे दिग्गजों का जुड़ाव मजेदार है. दोनों का रिश्ता काफी प्यारा लगता है. करेन गिलन अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही हैं. निक जोनस हैंडसम लगे हैं. आक्वाफीना ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है. ड्वेन जौनसन और केविन हार्ट ने शानदार अभिनय किया हैं. ड्वेन जौनसन और केविन हार्ट के बीच की केमिस्ट्री देखने लायक है. जैक ब्लैक मनोरंजक हैं.

फिल्म में औस्ट्रिचेज और भालुओं से भिड़ंत वाले सीन शानदार बन पड़े हैं.

#bethebetterguy: हमेशा मंजिल तक नहीं पहुंचाती ओवर स्पीडिंग

लेखिका- ज्योति

मेरा यह लेख पढ़ने से पहले एक बार आप यह इमेजिन करिए कि आप अपनी फैमिली के साथ लौन्ग ड्राइव पर जा रहे हैं, रोड एकदम खाली है. आपने सोचा अरे वाह road  तो खाली है चलो स्पीड बढ़ाते हैं. आपकी स्पीड हुई  100 ,अरे वाह अभी भी कोई नहीं है आसपास,आपकी स्पीड हुई 120,अभी भी कोई नहीं है  स्पीड हुई 160 चलो और तेज करता हूं 180 फिर अचानक आपके सामने से कोई वाहन निकलता है ,और फिर……..  ???????

क्या हुआ? आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते ,जब आप इसके बारे में सोच नहीं सकते तो आप कर कैसे सकते हैं, इतनी जल्दी क्यों? ओवर स्पीडिंग  के  कारण  हर साल जाने कितने  मासूमों  की जान चली जाती है. कुछ आंकड़ों के अनुसार –

एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के कारण भारत में 1 साल में 58. 58 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है, जिसका मूल्य देश की GDP के लगभग 3 % के बराबर  है . अधिकतम सड़क दुर्घटनाएं ओवर-स्पीडिंग के कारण होती हैं. एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में भारत में 1.5लाख से भी अधिक लोगों की जान गई है.

W.h.o. की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की दुर्घटनाओं से संबंधित मौतों में 11 % हिस्सा भारत का है. रिपोर्ट में सामने आया है कि सड़क दुर्घटनाओं की वजह से सबसे ज्यादा मौतें  तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में हुई हैं. दुर्घटनाओं में हुई मौतों में 18 से 60 वर्ष की आयु के लोगों की 84.7% हिस्सेदारी पाई गई है.

ट्रैफिक उल्लंघनो के  तहत, 5.8% लोग सड़क पर गलत साइड पर ड्राइव करने से, 2.4 % मोबाइल का उपयोग करने से और 2.8% लोग शराब पीकर गाड़ी चलाने से मारे गए हैं.

वैसे तो हमारी सरकार द्वारा ट्रैफिक नियमों का पालन ना करने पर कठोर दंड का प्रावधान है पर वाहन चलाते समय यातायात के नियमों का पालन करना हमारी भी जिम्मेदारी है.

आइए जाने की ओवरस्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से कैसे बचा जाए-

1-स्पीड लिमिट के अंदर गाड़ी चलाए

निर्धारित गतिसीमा से अधिक ड्राइविंग ना करे ,ये न केवल अवैध है बल्कि खतरनाक भी है. सड़क पर जहां गति सीमा 50 किलोमीटर /घंटा है वहां पर 60 किलोमीटर / घंटा की स्पीड से गाड़ी चलाना आपके 20 मिनट बचा तो सकता है लेकिन लेकिन दुर्घटनाओं की संभावना को बढ़ा भी सकता है.  दुर्घटनाओ से बचने का सबसे आसान तरीका निर्धारित गति सीमा के अन्दर गाड़ी चलाना है.

2-गाडी चलते समय दूसरों के साथ रेस  से बचे-

तेज़ गति में  यह अन्य कारों के साथ रेस  रोमांचकारी जरूर हो सकती है  पर सुरक्षित नहीं. ऐसा करने से दंड और दुर्घटनाएं दोनों हो सकती हैं और शायद आपका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द भी हो सकता है.सार्वजनिक सड़कों पर अन्य कारों के साथ race लगाना न केवल वाहन के लोगों के लिए खतरनाक है, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी खतरनाक है, जो सड़कों पर सबसे अधिक असुरक्षित हैं.

3 -अपना ध्यान मार्ग पर रखे –

“मैंने उसे  नहीं देखा! “एक दुर्घटना के बाद इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे आम बहाना है। अक्सर दुर्घटनाओ के बाद लोग यही कहते है कि  मै देख नहीं पाया या वो अचानक से सामने आ गया .कई दुर्घटनाएं इसलिए  होती हैं क्योंकि एक चालक सड़क पर क्या हो रहा है, इस पर ध्यान नहीं देता है। इसलिए सतर्क रहे और ये सुनिश्चित  करे की गाड़ी चलते समय आप mobile phone पर बात न करे और फुल वॉल्यूम में गाने न सुने.

हमेशा ये याद रखे की यदि बाकी की गाड़ियां तेज़ रफ़्तार से चल रही है तो लेन को बाईं ओर रखे और तेज़ वाहनों के रास्ते से बाहर रहें। यदि आपको अपने से धीमी गति से चलने वाले वाहन से आगे निकलने की आवश्यकता है, तो दाईं ओर से ओवरटेक  करें। ओवरटेक करने से पहले संकेतक का उपयोग करके. अपने इरादे स्पष्ट करें.

4-अगर आप परेशान है या अस्वस्थ्य है तो ड्राइव न करे

अगर आप अधिक  काम करने की वजह से तनावग्रस्त है या थके हुए है तो गाड़ी मत चलाये क्योंकि ऐसा होने से आपको गाडी  चलाते समय नींद आ सकती है और फिर दुर्घटना होने से कोई नहीं रोक सकता .अगर आप थका हुआ महसूस  कर रहे है तो आप सड़क के किनारे गाड़ी लगा ले और थोड़ा आराम कर ले.

5-शराब पीकर गाड़ी न चलाये

शराब पीकर गाड़ी चलाना एक दंडनीय अपराध है इससे न केवल गति तेज़ होती है बल्कि आपके साथ साथ आस पास के लोगों की जान को भी खतरा रहता है.यदि आप किसी ऐसी पार्टी में जा रहे हैं, जहाँ आपको शराब का सेवन करने की संभावना है, तो सुनिश्चित करें कि जो शराब नहीं पिए हुए हो  है वह गाड़ी  चलाये .

6-समय पर पहुंचने के लिए समय पर निकले

इस तेज-तर्रार माहौल में, लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए हमेशा देरी से चल रहे हैं। अगर उन्हें कहीं जाना होता है तो वो निकलते तो देर से है पर पहुँचना  जल्दी चाहते है.सारी  ज़ल्दी उन्हें रोड पर ही होती है. ये सब कारण उन्हें ओवर स्पीडिंग के लिए प्रोत्साहित  करते है हालांकि ये तरकीबें उन्हें कुछ मिनटों के लिए बचा सकती हैं, लेकिन अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। लोगों को यह समझाना जरूरी है कि रेस  ड्राइविंग और ओवर स्पीडिंग द्वारा समय पर पहुंचना उन्हें अपनी जिंदगी से हाथ धोने को मजबूर कर सकता है.

इसलिए, लोगो  को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपनी मीटिंग या पार्टीज की पहले से योजना बना लें और अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय रखें। इससे न केवल उनकी गति पर अंकुश लगेगा बल्कि दुर्घटनाओं से भी बचा जा सकेगा।

‘ओवर स्पीड से बचना कोई लापरवाही नहीं बल्कि समझदारी हैं.  समझदार इंसानों ने कहा है, दुर्घटना से देर भली मतलब हम अपने मंजिल पर कुछ समय देर से पहुंचे लेकिन सुरक्षित पहुंचे. ‘

रक्षात्मक ड्राइविंग सुस्त लग सकती है, पर खतरनाक नहीं…


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ऐसे बनाएं दही गोभी की सब्जी

माइक्रोवेव में बनने वाली दही गोभी एक बहुत ही स्वादिष्ट वेजिटेरियन सब्जी है, इस रेसिपी में दही और मसालों को मिला कर मिलेगा. इस माइक्रोवेव रेसिपी को लगभग एक घंटे में तैयार किया जा सकता है. तो चलिए जानते हैं इसकी रेसिपी.

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सामग्री

गोभी (500 ग्राम)

घी (1 टेबल स्पून)

जीरा (2 टी स्पून)

हींग (एक चुटकी)

दही (1/4 कप)

अदरक (1 टेबल स्पून)

साबुत धनिया (1 टेबल स्पून)

नमक (1/2 टी स्पून)

गरम मसाला (1/4 टी स्पून)

हरी मिर्च (1 टेबल स्पून  बारीक कटा हुआ)

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गार्निशिंग के लिए

जीरा पाउडर (2 टी स्पून)

हरा धनिया (2 टी स्पून)

बनाने की वि​धि

घी, जीरा और हींग को मिलाकर हाई स्पीड पर 2 मिनट के लिए ढककर पकाएं.

इसमें अदरक और दही डालें,  इसे अच्छी तरह मिलाएं ताकि इसमें गांठे न पड़े.

इसे 2 मिनट के लिए पकाएं और इसके बाद इसमें धनिया, नमक, हल्दी, गरम मसाला और हरी मिर्च डालें.

इसे अच्छी तरह मिलाएं और इसमें गोभी डालें.

इसे 12 मिनट के लिए पकाएं, इसे एक बार चलाएं.

अगर आपको नरम गोभी पसंद है तो आप इसे थोड़ा और पका सकते हैं.

जीरा पाउडर और हरा धनिया डालकर गार्निश करके सर्व करें.

समर रेसिपी : पत्तागोभी सैलेड

घर पर आसानी से ऐसे बनाएं वैक्स

अक्सर महिलाएं हर महीने पार्लर में काफी पैसे खर्च करती हैं. खासतौर पर वैक्सिंग पर काफी खर्च होतो हैं. ऐसे में अगर आपको अगर  इस खर्च से बचना है तो आप घर पर भी वैक्स बना सकती हैं. तो आइए जानते हैं, घर पर वैक्स बनाने का तरीका.

घर पर ऐसे बनाएं वैक्स

एक पैन में दो कप शुगर में एक चौथाई कप नींबू का रस और एक चौथाई कप पानी डालें.  खुशबू के लिए आप किसी भी औइल की दो-तीन बूंदे डाल सकती हैं.

पैन को गैस पर रखने के बाद उसमें डाली गई सामग्री को मध्यम आंच पर गर्म होने दें.

चीनी और नींबू के रस को लगातार चम्मच से हिलाते रहें, इससे लंप्स नहीं बनेंगे. चीनी जल्दी जल भी जाती है इसलिए भी मिक्स को हिलाना बंद न करें.

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मिक्स्चर जब चाश्नी जैसा हो जाए और उसका कलर हल्का भूरा हो तो गैस बंद कर दें.

आपका होममेड वैक्स तैयार है, इसे आप अपनी पसंद के एयरटाइट जार में डाल लें और जब चाहें तब गर्म कर इस्तेमाल करें.

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ऐसे करें इस्तेमाल

होममेड वैक्स को आप किसी आम वैक्स की तरह ही यूज कर सकते हैं. वैक्स को जार से निकालकर माइक्रोवेव या फिर पैन में गर्म कर लें फिर उसे स्किन पर लगाएं और कौटन या बाजार में उपलब्ध पेपर वैक्स स्ट्रिप को उस पर रखें. रब करें और फिर एक साइड से बालों की उल्टी दिशा में स्ट्रिप को खींच लें.

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