रेटिंगःढाई स्टार

निर्माताःवेणु कुन्नाप्पल्ली

निर्देशकः एम पदमकुमार

कलाकारःममूटी,प्राची तेहलानमास्तर अच्युतन,उन्नी मुकुंदन,तरूण अरोड़ा,मोहन शर्मा,मणिकंदन अचारी व अन्य.

अवधिः दो घंटे 36 मिनट      

पंद्रहवी से 18 वीं सदी के बीच केरला के मालाबार क्षेत्र में नदी किनारे आयोजित होने वाले उत्सव ममंकम की कहानी को फिल्मकार एम पद्मकुमार फिल्म ‘‘मामांगम’’में लेकर आए हैं. जो कि समुद्री शासक  के खिलाफ वल्लुवनाड के आत्मघाती अनाम योद्धाओं के साथ छल विश्वासघात की रोचक कथा है. मगर यह फिल्म सदियों पुराने एक्शन दृश्यों और उत्पीड़न का ऐसा कोलाज बनकर रह गयी है कि दर्शकों को लगता है कि वह कोई टीवी सीरियल देख रहा हो. मूलतः मलयालम में बनी इस फिल्म को हिंदी,तमिल,कन्नड़ व तेलगू में डब करके एक साथ प्रदर्शित किया गया है.

कहानीः

फिल्म सत्रहवीं सदी में युद्ध के दृश्य के साथ शुरू होती है,जहां चंद्रोत वाल्या पणिक्कर(ममूटी)और आत्मघाती योद्धाओं का एक समूह समुद्री शासक की सेना से लड़ता है. मगर समुद्री शासक को मारने के करीब आने के बाद युद्ध के मैदान से भाग जाते हैं. जिससे वल्लुवनाड़ योद्धा कबीले की निर्भयता की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है. वल्लुवनाड़ कबीले के लोग उनका नाम तक लेना पसंद नहीं करते. इस युद्ध के 24 साल के  बाद वल्लुवनाड़ कबीले के नए प्रमुख चंद्रोथ पणिक्कर (उन्नी मुकुंदन)फिर से सम्रदी राजा के खिलाफ युद्ध करने का फैसला करते हुए मामांगम उत्सव का हिस्सा बनने का निर्णय लेते हैं. वह अपने परिवार के सदस्यों से कहते है कि ममंकम उत्सव का हिस्सा बनने का आदेश उन्हे भगवती देवी ने दिया है. कबीले की महिलाएं यह जानते हुए भी अपने पुरुषों को युद्ध के मैदान में भेजती रही है कि उनके जीवित रहने की संभावना धूमिल है.

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