Download App

मकड़जाल में फंसी जुलेखा : भाग 1

रियल एस्टेट कारोबारी संजय यादव ने जुलेखा से पीछा छुड़ाने के लिए उसे ठिकाने लगवा दिया था. सभी आरोपी निश्चिंत थे कि पुलिस उन तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन पुलिस को एक सुराग ऐसा मिला कि…

जुलेखा लखनऊ के आलमबाग स्थित अमित इंफ्रा हाइट्स प्रा.लि. नाम की रियल एस्टेट कंपनी में नौकरी करती थी. 3

अगस्त, 2019 को भी वह रोजाना की तरह हंसखेड़ा स्थित अपने घर से ड्यूटी के लिए निकली थी, लेकिन शाम को निर्धारित समय पर घर नहीं पहुंची तो मां शरबती को चिंता हुई.

भाई नफीस ने जुलेखा के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ मिला. कई बार कोशिश करने के बाद भी जब फोन पर जुलेखा से संपर्क नहीं हो सका तो उस ने मां शरबती को समझाते हुए कहा, ‘‘अम्मी, हो सकता है कंपनी के काम में ज्यादा व्यस्त होने की वजह से जुलेखा ने अपना फोन बंद कर लिया हो. आप परेशान न हों, देर रात तक घर लौट आएगी.’’

कभीकभी औफिस में ज्यादा काम होने पर जुलेखा को घर लौटने में देर हो जाती थी. तब वह घर पर फोन कर के सूचना दे दिया करती थी. लेकिन उस दिन उस ने देर से लौटने की कोई सूचना घर वालों को नहीं दी थी, इसलिए सब को चिंता हो रही थी.

ये भी पढ़ें- एक रोटी के लिए हत्या

जुलेखा का एक दोस्त था श्रेयांश त्रिपाठी. नफीस ने सोचा कि कहीं वह उस के साथ तो नहीं है, इसलिए उस ने बहन के बारे में जानकारी लेने के लिए श्रेयांश को फोन किया. लेकिन उस का फोन भी बंद मिला.

देर रात तक नफीस, उस की मां शरबती और पिता शरीफ अहमद जुलेखा के लौटने का इंतजार करते रहे लेकिन वह नहीं लौटी. सुबह होने पर नफीस ने पिता से कहा कि हमें यह सूचना जल्द से जल्द पुलिस को दे देनी चाहिए.

लेकिन मां शरबती ने कहा, ‘‘इस मामले में जल्दबाजी करना ठीक नहीं है. थाने जाने से पहले उस के औफिस जा कर कंपनी के मालिक संजय यादव से पूछताछ कर ली जाए कि उन्होंने उसे कंपनी के किसी काम से बाहर तो नहीं भेजा है.’’

नफीस ने बहन के औफिस जा कर कंपनी मालिक संजय यादव से संपर्क किया तो उस ने बताया कि जुलेखा कल वृंदावन कालोनी स्थित किसी दूसरी कंस्ट्रक्शन कंपनी में इंटरव्यू देने गई थी. तेलीबाग के चौराहे तक वह उसे अपनी कार में ले गया था.

वहां वह वृंदावन कालोनी के गेट पर उतर गई थी. उस के बाद वह कहां गई, उसे पता नहीं है. वह वृंदावन सोसायटी में रहने वाली बड़ी बहन रूबी के पास जाने को भी कह रही थी.

‘‘वह रूबी के यहां नहीं पहुंची.’’ नफीस बोला.

‘‘हो सकता है वह कहीं और चली गई हो. उस के आने का इंजजार करो. हो सकता है 2-4 दिन में लौट आए.’’

संजय से भरोसा मिलने के बाद नफीस घर लौट आया. लेकिन उस के मन में कई तरह की आशंकाएं उमड़घुमड़ रही थीं.

नफीस और उस के मातापिता 3 दिन तक जुलेखा के घर आने का इंतजार करते रहे. जब वह नहीं आई तो 5 अगस्त, 2019 को नफीस थाना पारा पहुंचा और थानाप्रभारी त्रिलोकी सिंह से मिल कर जुलेखा के बारे में उन्हें विस्तार से बताया.

अमित इंफ्रा हाइट्स कंपनी का नाम सुन कर थानाप्रभारी टालमटोल करते हुए बोले कि 2 दिन और देख लो. 2 दिन बाद भी वह न आए तो थाने आ जाना.

थानाप्रभारी के आश्वासन पर नफीस घर चला गया. 2 दिन बाद भी जुलेखा नहीं आई तो 7 अगस्त, 2019 को नफीस फिर से थानाप्रभारी त्रिलोकी सिंह से मिला और रिपोर्ट दर्ज कर बहन को तलाश करने की मांग की. लेकिन उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाए उसे समझाबुझा कर अगले दिन आने को कह दिया.

इस के बाद नफीस 9 अगस्त, 2019 को एसएसपी कलानिधि नैथानी से मिला और जुलेखा के गायब होने की बात बता कर कहा कि जुलेखा आलमबाग स्थित अमित इंफ्रा हाइट्स प्रा.लि. कंपनी में काम करने वाले संजय यादव, अवधेश यादव, गुड्डू यादव और अजय यादव के संपर्क में रहती थी.

इन दिनों पैसों के लेनदेन को ले कर जुलेखा का कंपनी मालिक संजय यादव से मनमुटाव चल रहा था. उसे शक है कि इन लोगों ने उस की बहन को कहीं गायब कर दिया है.

नफीस का दुखड़ा सुनने के बाद एसएसपी ने पारा के थानाप्रभारी त्रिलोकी सिंह को आदेश दिया कि जुलेखा वाले मामले में जांच कर दोषियों के खिलाफ काररवाई करें. कप्तान साहब का आदेश मिलते ही थानाप्रभारी हरकत में आ गए. उन्होंने सब से पहले नफीस और उस के मातापिता से बात की. इस के बाद जुलेखा का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा दिया.

ये भी पढ़ें- हिमानी का याराना : भाग 1

काल डिटेल्स से पता चला कि जुलेखा ने अंतिम बार श्रेयांश त्रिपाठी को फोन किया था. त्रिपाठी ने उसे बुला कर कंपनी में काम करने के लिए बात की थी. चौकी हंसखेड़ा के प्रभारी सुभाष सिंह ने श्रेयांश त्रिपाठी को बुला कर उस से जुलेखा के बारे में पूछताछ की.

इस के बाद थानाप्रभारी त्रिलोकी सिंह एसआई रामकेश सिंह, सुभाष सिंह, धर्मेंद्र कुमार, सिपाही मयंक मलिक, आशीष मलिक और राजेश गुप्ता को साथ ले कर आलमबाग स्थित अमित इंफ्रा हाइट्स प्रा.लि. कंपनी के औफिस पहुंचे.

वहां कंपनी मालिक संजय यादव का साला गुड्डू यादव निवासी बिजनौर तथा आलमबाग आजादनगर के रहने वाले एक दरोगा का बेटा अजय यादव मिला.

पुलिस सभी को थाने ले आई. सीओ आलमबाग लालप्रताप सिंह की मौजूदगी में उन सभी से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि उन लोगों ने जुलेखा की हत्या कर के उस की लाश हरचंद्रपुर में साई नदी के किनारे फेंक दी थी.

यह जानने के बाद थानाप्रभारी के नेतृत्व में गठित टीम आरोपियों को साथ ले कर हरचंद्रपुर में साई नदी के पास उस जगह पहुंच गई, जहां जुलेखा के शव को ठिकाने लगाया था.

पुलिस को नदी किनारे कीचड़ में एक शव मिला. शव युवती का था और पूरा गल गया था. हड्डियों के अलावा वहां लेडीज कपड़े मिले. जुलेखा के भाई नफीस और मां शरबती ने कपड़ों से उस की शिनाख्त जुलेखा के रूप में की. पिता शरीफ अहमद ने बताया कि जुलेखा के ये कपड़े उन्होंने ईद पर खरीद कर दिए थे.

पुलिस ने जरूरी काररवाई कर जुलेखा के कंकाल को पोस्टमार्टम व डीएनए जांच के लिए भिजवा दिया. जुलेखा की हत्या और अपहरण में मुख्य आरोपी संजय यादव के साले गुड्डू यादव व अजय यादव से जुलेखा के संबंध में पूछताछ की तो उन्होंने उस का अपहरण कर उस की हत्या करने की जो कहानी बताई, वह बड़ी सनसनीखेज थी—

शरीफ अहमद अपने परिवार के साथ लखनऊ के थाना पारा के अंतर्गत आने वाली कांशीराम कालोनी नई बस्ती में रहता था. बुद्धेश्वर चौराहे पर उस की आटो पार्ट्स की दुकान थी. परिवार में उस की पत्नी शरबती के अलावा 2 बेटियां रूबी व जुलेखा और एक बेटा नफीस था. बड़ी बेटी रूबी का पास के ही वृंदावन में विवाह हो चुका था.

नफीस पिता के काम में हाथ बंटाता था. सन 2013 में उस ने छोटी बेटी जुलेखा की शादी मुंबई के रहने वाले एक युवक से कर दी थी. जुलेखा महत्त्वाकांक्षी थी. वह आत्मनिर्भर बनना चाहती थी. शादी के 2 साल बाद जुलेखा ने एक बेटे को जन्म दिया.

बेटे के जन्म के बाद जुलेखा अपने मन की कमजोरी को छिपा कर न रख सकी क्योंकि वह स्वच्छंद जीवन जीने की आदी थी, जबकि उस का शौहर उस की आदतों के खिलाफ था. अंतत: एक दिन पति से लड़झगड़ कर वह अपने मायके आ गई. सन 2019 में पति ने जुलेखा को तलाक दे दिया. तलाक के बाद वह एकदम आजाद हो गई थी.

जुलेखा चारदीवारी में बैठने के बजाए नौकरी कर के आत्मनिर्भर होना चाहती थी, जिस से अपने बेटे की ढंग से परवरिश कर सके. पढ़ीलिखी होने के साथसाथ उसे कंप्यूटर की जानकारी थी. लिहाजा उस ने प्राइवेट कंपनियों में नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी.

थोड़ी कोशिश के बाद उसे आलमबाग स्थित अमित इंफ्रा हाइट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में 15 हजार रुपए प्रतिमाह की तनख्वाह पर कंप्यूटर औपरेटर की नौकरी मिल गई.

ये भी पढ़ें- एक लड़की ऐसी भी : भाग 3

इस कंपनी का औफिस लखनऊ के बारह विरवा में था और इस का मालिक था काकोरी निवासी संजय यादव. कुछ दिनों तक जुलेखा ने इस कंपनी में डाटा एंट्री का काम किया. इस दौरान वह संजय यादव के साले सरोजनीनगर निवासी गुड्डू यादव, आलमबाग आजादनगर के रहने वाले दरोगा के बेटे अजय यादव और अवधेश यादव के संपर्क में आई.

गिरती अर्थव्यवस्था

आर्थिक समीक्षा करने वाली विश्व संस्थाओं ने भारत की प्रगति को कम कर के 4.8 फीसदी के आसपास हो जाने का अनुमान लगाया है. कुछ तो अब 4.2 प्रतिशत वृद्धि का ही अनुमान लगा रहे हैं. पाकिस्तान की प्रगति दर भी कम हो रही है और अब वह 2.8 फीसदी रह गई है. बंगलादेश की दर बढ़ कर 8.1 प्रतिशत हो सकती है. दक्षिण एशिया के इन 3 देशों का जो हाल आज हो रहा है वह उन की सरकारों के कारण है, जनता के नहीं.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ रही है क्योंकि कई दशकों से वहां मुख्य ध्येय इसलाम की रक्षा करना है. जियाउल हक ने पाकिस्तान को फिर से पुराने इसलामिक गड्ढे में धकेल दिया था. बंगलादेश ने 1971 के बाद कुछ साल राजनीतिक अस्थिरता में गुजारे. पर अब वहां धर्म की जगह उद्योगों ने ले ली है. वहां तेजी से छोटे उद्योग लग रहे हैं और चीन से हट रहे हलकी तकनीक वाले उद्योग वहां खूब पनप रहे हैं.

ये भी पढ़ें- झारखंड : भाजपा की हार

भारत में चमक 1991 के बाद आनी शुरू हुई थी. वैसे तो वह 1992 के रामरथयात्रा से ढीली पड़ी और फिर 1992 के बाबरी मसजिद के विध्वंस के बाद, फिर भी नरसिंहराव और मनमोहन सिंह के सुधारों का असर बहुत बड़ा हुआ और 10-15 साल अच्छे गुजर गए. पर उस के बाद देश में धार्मिक जोश एक बार फिर उबाल मारने लगा और 2014 का चुनाव बिना किसी कारण धार्मिक कुरुक्षेत्र युद्ध की तरह लड़ा गया जिस में एक तरफ कट्टरवादी थे तो दूसरी ओर उदासीन, अपनेअपने काम में मस्त, ढीलेढाले नेता और उन के खामोश समर्थक. वे देश की प्राथमिकताएं सम झ ही नहीं पाए.

ये भी पढ़ें- महाराष्ट्र में शिवसेना राज

अलविदा 2019 : इस साल देश में क्या हुआ नया ? 

आइए जानते हैं, 2019 में क्या हुआ नया ?

* भारत का पहला  डायनासोर पार्क :-  देश का पहला डायनासोर और फॉसिल पार्क  के लिए खोल दिया गया है.  यह पार्क 128 एकड़ में बनाया है. 36 साल पहले यहीं डायनासोर के जीवाश्म पाए गए थे. यह दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान है, जहां इतनी बड़ी मात्रा में अंडों के अवशेष मिले थे. इसे दुनिया में डायनासोर का तीसरा सबसे बड़ा जीवाश्म स्थल भी माना जाता है.  डायनासोर के 6.5 करोड़ साल के इतिहास को बताने के लिए यह देश का पहला आधुनिक म्यूजियम होगा. यहां डायनासोर के रहन-सहन, खान-पान और उनकीजीवन से जुड़ी सभी जानकारी मुहैया कराई जाएंगी.

ये भी पढ़ें- कैसे समझें अकेलापन को सच्चा दोस्त

* स्पेस टेक पार्क : केरल सरकार तिरुवनंतपुरम स्थित नॉलेज सिटी में देश के पहले स्पेस टेक पार्क की स्थापना कर रही है. इसका उद्देश्य इस शहर को अंतरिक्ष से संबंधित प्रौद्योगिकी हेतु एक विनिर्माण हब बनाना है. भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर स्थापित अंतरिक्ष संग्रहालय भी इस बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा होगा.

* रोबोटिक सर्जरी सेवा –  इस साल देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने रोबोटिक सर्जरी सेवा का उद्घाटन नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में किया . इसके साथ ही रोबोटिक सर्जरी सेवा विधिवत रूप से शुरू हो गई है. ऐसा करने वाला यह देश का पहला अस्पताल है .

* देश का पहला गिद्ध प्रजनन संरक्षण केंद्र :- इस साल उत्तर प्रदेश सरकार ने महराजगंज जिले में राज्य के पहले गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है.

* पहला फन जोन :- आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम रेलवे स्टेशन पर इसकी शुरुआत हो गई है. यहां प्लेटफार्म 1 पर देश का पहला गेमिंग जोन बना है. यह गेमिंग जोन वाल्टर डिविजन की पहल से बना है. इस गेमिंग जोन की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यहां बच्चों के साथ साथ बड़ों के लिए भी कई फन एक्टिविटीज हैं.

इस फन गेम जोन में आपको डोरेमौन, हिट माउस, बास्केट बॉल और निशाने लगाने वाले गेम्स के अलावा भी कई प्रकार के गेम है , इसके लिए सिर्फ 50 रुपया भुगतना करना होगा.

ये भी पढ़ें- क्या होती है रेव पार्टी ?

पहला अर्बन वाटर  ट्रेन :-  कोलकाता में भारत का पहला अंडर वॉटर ट्रेन प्रॉजेक्‍ट तैयार हो चुका है. यह मेट्रो जल्‍द ही काम करने लगेगी.

रोबोट रेस्टोरेंट :- चेन्नई की ओल्ड महाबलिपुरम रोड में एक ऐसा रेस्तरां हैं, जहां रोबोट्स लोगों को खाना परोसते हैं. इस रेस्तरां का नाम ‘ROBOT’ रखा गया है . यह इस तरह का भारत का पहला रेस्तरां है. हर एक टेबल पर एक आई-पैड की सुविधा दी गई है, जिसके माध्यम से कस्टमर अपना खाना और्डर करता है. ये और्डर्स सीधे किचन तक पहुंचेंगे. और्डर तैयार होने पर रोबोट वेटर्स आपकी टेबल तक आएंगे और खाना सर्व करेंगे. आपको बता दें की इस रेस्टोरेंट में खाना बनाए वाले इंसान ही हैं बस उन्हें परोसने वाले रोबोट्स हैं . इसकी शुरुआत 2017  में हुए थे ,  चेन्नई और कोयम्बटूर के बाद इस साल (2019 ) में  बंगलौर में यह इस तरह का पहला रेस्तरां  शुरुआत किया गया है.

ये भी पढ़ें- लोगों में NRC और CAA की अनभिज्ञता है विरोध का कारण

ऐसे बनाएं पोटैटो पैनकेक

कच्चे आलुओं को छील कर कस लें. उबला आलू छील कर कस लें. एक बाउल में कसे आलू, मैदा, मिर्च व प्याज डाल कर पानी के साथ गाढ़ा बैटर बना लें. इसमें नमक व बेकिंग पाउडर मिला कर फेंट लें.

सामग्री

-2 कच्चे आलू

-1 उबला आलू

-1 प्याज कटा

-1-2 हरीमिर्चें कटी

-1/2 कप मैदा

-1/4 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर

– 2-3 बड़े चम्मच तेल

-नमक स्वादानुसार.

ये भी पढ़ें- WINTER SPECIAL : ऐसे बनाएं हांडी पनीर

विधि

कच्चे आलुओं को छील कर कस लें. उबला आलू छील कर कस लें. एक बाउल में कसे आलू, मैदा, मिर्च व प्याज डाल कर पानी के साथ गाढ़ा बैटर बना लें. इस में नमक व बेकिंग पाउडर मिला कर फेंट लें. गरम तवे पर एक बड़े चम्मच से बैटर डाल कर फैला लें. दोनों तरफ तेल डाल कर सेंक लें. सौस के साथ गरमगरम परोसें.

कोई शर्त नहीं : भाग 2

कुलदीप ने नोटिस किया कि राधा ठिठक कर लहरिया की ओढ़नी देखने लगी.

इस बार जब घर आए तो न जाने क्या सोच कर शशि से छिपा कर कुलदीप ने लालहरे रंग की एक लहरिया की ओढ़नी राधा के लिए खरीद ली.

ओढ़नी पा कर राधा खिल उठी.

अगले दिन राधा वह ओढ़नी ओढ़ कर आई तो कुलदीप उसे देखते ही रह गए… झीने घूंघट से झांकता उस का चेहरा किसी चांद से कम नहीं लग रहा था. उसे यों अपलक निहारता देख राधा शरमा गई.

समय मानो रेत की तरह हाथ से फिसल रहा था. हर सुबह कुलदीप को राधा का इंतजार रहने लगा.

राधा के आने में अगर जरा भी देर हो जाती तो वे बेचैनी से घर के बाहर चक्कर लगाने लगते.

राधा भी मानो रातभर सुबह होने का इंतजार करती थी. सुबह होते ही बंगले की तरफ ऐसे भागती सी आती थी जैसे किसी कैद से आजाद हुई हो.

आज भी कुलदीप सुबहसवेरे बंगले के अंदरबाहर चक्कर लगा रहे थे. सुबह के 8 बज गए थे, मगर राधा अभी तक नहीं आई थी. जोरावर सिंह भी अब तक दिखाई नहीं दिया था.?

कुलदीप ने सुबह की चाय किसी तरह से बना कर पी, मगर उन्हें मजा नहीं आया. उन्हें तो राधा के हाथ की बनी चाय पीने की आदत पड़ गई थी.

कुलदीप को यह सोच कर हंसी आ गई कि एक बार उन्होंने शशि से भी कह दिया था कि ‘चाय बनाने में राधा का जवाब नहीं’. यह सुन कर मुंह फुला लिया था शशि ने.

चाय का कप सिंक में रख कर कुलदीप सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बढ़े. अंदर किसी तरह की कोई हलचल न देख कर कुलदीप को किसी अनहोनी का डर हुआ.

उन्होंने धीरे से दरवाजे को धक्का दिया. दरवाजा खुल गया. भीतर का सीन देखते ही उन के होश उड़ गए.

राधा जमीन पर बेसुध पड़ी थी. जोरावर सिंह का कहीं अतापता नहीं था.

कुलदीप ने राधा को होश में लाने की भरसक कोशिश की, मगर उस ने आंखें नहीं खोलीं.

कुलदीप ने उसे बड़ी मुश्किल से बांहों में उठाया और बंगले तक ले कर आए. उसे बैडरूम में सुला कर एसी चला दिया.

कुलदीप ने पहली बार राधा को इतना नजदीक से देखा था. उस की मासूम खूबसूरती देख कर वे अपनेआप को रोक नहीं सके और उन के हाथ राधा के माथे को सहलाने लगे.

अचानक राधा के शरीर में हलचल हुई और उस ने कराहते हुए आंखें खोलीं.

कुलदीप को देखते ही राधा डरी हुई हिरनी सी उन से लिपट गई.

‘‘साहब, मुझे बचा लो… यह राक्षस मुझे मार डालेगा,’’ कहतेकहते राधा फिर बेहोश हो गई.

कुलदीप ने औफिस से छुट्टी ले ली और सारा दिन राधा के सिरहाने बैठे रहे. 2 बार जा कर जोरावर सिंह को भी देख आए, मगर वह अभी तक नहीं लौटा था.

3-4 घंटे बाद राधा को पूरी तरह से होश आ गया तो उस ने बताया कि जोरावर सिंह अकसर शराब पी कर उस से मारपीट करता है.

शादी के इतने साल बाद भी बच्चा न होने की वजह भी वह राधा को ही मानता है, मगर सच यह है कि जोरावर सिंह ही नामर्द है.

पहली पत्नी के भी उसे कोई बच्चा नहीं था, मगर जोरावर सिंह को खुद में कोई कमी नजर नहीं आती. वह अपनेआप को मर्द मानता है और इस तरह अपनी मर्दानगी दिखाता है.

कुलदीप ने राधा को पेनकिलर की गोली दे दी, तो थोड़ी देर बाद ही वह कुलदीप से ऐसे चिपक कर सो गई जैसे कोई बच्चा अपनी मां के आंचल में निश्चिंत हो कर सिमट जाता है. कुलदीप ने भी उसे अपने से अलग नहीं किया.

2 दिन बाद जोरावर सिंह आया तो कुलदीप ने उसे बहुत लताड़ लगाई और समझाया भी कि अगर राधा ने पुलिस में शिकायत कर दी तो उस की नौकरी जा सकती है और उसे जेल भी जाना पड़ सकता है.

इस का असर यह हुआ कि अब जोरावर सिंह ने राधा पर हाथ उठाना काफी कम कर दिया था, मगर फिर भी कभीकभार उस के अंदर का मर्द जाग उठता था और तब डरी हुई राधा कुलदीप से लिपट जाती थी…

कुलदीप की छुअन जैसे उस के सारे दर्द की दवा बन चुकी थी. एक अनाम सा रिश्ता बन गया था इन दोनों के बीच जिस में कोई शर्त नहीं थी… कोई वादा नहीं था… किसी तरह के हक की मांग नहीं थी…

देखते ही देखते 2 साल बीत गए. कुलदीप को अपने ट्रांसफर की चिंता सताने लगी. पहली बार उन्होंने चाहा कि उन का ट्रांसफर न हो. वे राधा से दूर नहीं जाना चाहते थे. हालांकि दोनों के बीच कोई जिस्मानी रिश्ता नहीं था, मगर एकदूसरे को देख कर उन की मानसिक भूख शांत होती थी.

जब कुलदीप ने राधा को अपने ट्रांसफर की बात बताई तो राधा एकदम से कुछ नहीं बोल पाई, चुप रही.

2 दिन बाद राधा ने कुलदीप से कहा, ‘‘साहब, आप का जाना तो रुक नहीं सकता… आप मुझे अपनी कोई निशानी दे कर जाओ.’’

‘‘क्या चाहिए तुम्हें?’’ कुलदीप ने उस के दोनों हाथ अपने हाथों में कसते हुए पूछा.

‘‘दे सकोगे?’’

‘‘तुम मांग कर तो देखो…’’

‘‘मर्द की जबान है तो तुम पलटना मत…’’

‘‘कभी नहीं…’’ कह कर कुलदीप ने उस से वादा किया कि वह जो मांगेगी, उसे मिलेगा.

आखिर जिस बात का डर था, वही हुआ… कुलदीप के ट्रांसफर और्डर आ गए. उन्हें 4 दिन बाद यहां से जाना था.

उन्होंने राधा से कहा, ‘‘तुम ने कुछ मांगा नहीं…’’

‘‘मुझे आप से बच्चा चाहिए, ‘‘राधा ने उन की आंखों में देखते हुए कहा.

यह सुन कर कुलदीप चौंक गए और बोले, ‘‘तुम होश में तो हो न…?’’

कुलदीप को मानो बिजली के नंगे तार ने छू लिया.

राधा उन के आगे कुछ नहीं बोली. चुपचाप वह पैर के अंगूठे से जमीन कुरेदती रही.

आज शाम से ही तेज बारिश हो रही थी. जोरावर सिंह अपनी पीने की तलब मिटाने के लिए आबू गया हुआ था. कल दोपहर तक शशि भी आने वाली थी. राधा रात का खाना बना कर जा चुकी थी.

कुलदीप खाना खा कर बैडरूम में जा ही रहे थे कि जोरजोर से दरवाजा पीटने की आवाज आई. उन्होंने बाहर की लाइट जला कर देखा तो राधा खड़ी थी.

कुलदीप का दिल जोरजोर से धड़कने लगा. उन्होंने पूछा, ‘‘क्या हुआ, इतनी रात को क्यों आई हो?’’

‘‘आप की निशानी लेने आई हूं.’’

कुलदीप दरवाजा नहीं खोल सके. सामाजिक मान्यताओं ने उन के पैर में बेडि़यां डाल दीं. बाहर राधा खड़ी रही… भीगती रही… भीतर कुलदीप के दिल और दिमाग में जंग छिड़ी थी…

ये भी पढ़ें- तीन शब्द : राखी से वो तीन शब्द कहने की हिम्मत जुटा पाया परम

आखिर इस जंग में दिल की जीत हुई. कुलदीप राधा को बांहों में भर कर भीतर ले आए. राधा ने उन्हें अपना सबकुछ सौंप दिया… और कुलदीप के प्यार को सहेज लिया अपने भीतर… हमेशा के लिए… मानो कोई मोती फिर से सीप में कैद हुआ हो…

राधा को पहली बार प्यार के इस रूप का अहसास हुआ था. पहली बार उस ने जाना कि मर्दऔरत का रिश्ता इतना कोमल, इतना मखमली होता है… और कुलदीप ने भी शायद पहली बार ही सही माने में मर्दऔरत के रिश्ते को जीया था… इस से पहले तो सिर्फ शरीर की प्यास ही बुझती रही थी… मन तो आज ही तृप्त हुआ था.

कुलदीप बारबार सर्वेंट क्वार्टर की तरफ देख रहे थे, मगर राधा कहीं नजर नहीं आ रही थी.

पत्नी शशि जयपुर से आ गई थी और आज का खाना भी उस ने ही बनाया था.

शाम होतेहोते एक नजर राधा को देखने की लालसा मन में ही लिए कुलदीप चले गए अपनी नई पोस्टिंग पर… मगर वह नहीं आई… उस के बाद राधा से उन का कोई संपर्क नहीं रहा.

10 साल बाद वक्त का पहिया घूम कर फिर से कुलदीप को सिरोही ले आया.

इस बार उन की पोस्टिंग आबू में हुई थी. दोनों बच्चे अपनीअपनी लाइफ में सैट हो चुके थे, इसलिए शशि उन के साथ ही आ गई थी.

एक दिन औफिस में किसी ने बताया कि पिंडवाड़ा वाले जोरावर सिंह की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई है.

औफिस का पुराना कर्मचारी होने के नाते सामान्य शिष्टाचार निभाने के लिए कुलदीप ने भी अफसोस जताने के लिए उस के घर जाना निश्चित किया.

यादों के शीशे पर जमी वक्त की गर्द थोड़ी साफ हुई… उन के दिमाग में राधा का चेहरा घूम गया… 10 साल एक लंबा अरसा होता है… कैसी दिखती होगी अब वह…

पुराना बंगला कुलदीप को बहुत कुछ याद दिला गया. अभी वे सर्वेंट क्वार्टर की तरफ जा ही रहे थे कि 8-9 साल का एक बच्चा दौड़ता हुआ उन के सामने से गुजरा. हुबहू अपना अक्स देख कर कुलदीप चौंक गए…

तभी राधा वहां आई. उस ने फीकी हंसी हंसते हुए कहा, ‘‘यह आप की निशानी है साहब.’’

ये भी पढ़ें- यह दुनिया उसी की जमाना उसी का

कुलदीप यह सुन कर जड़ हो गए… मगर राधा अब भी मुसकरा रही थी… उस की मुसकराहट कुलदीप को आश्वस्त कर रही थी… नहीं, कभी कोई शर्त नहीं थी इस रिश्ते में… आज भी नहीं…

क्या आप को भी लगती है ज्यादा ठंड

क्या आप को जरूरत से ज्यादा ठंड लगती है, हमेशा आप के हाथपैर ठंडे रहते हैं और जाड़े के मौसम में स्वेटर्स की 2-3 लेयर्स से कम में आप का काम नहीं चलता? आइए जानते हैं क्यों लगती है कुछ लोगों को अधिक ठंड.

थायराइड की समस्या

हाइपोथायराइडिज्म एक स्थिति है जब थायराइड ग्लैंड कम एक्टिव होता है. थायराइड ग्लैंड बहुत सारे मेटाबौलिज्म प्रक्रियाओं के लिए उत्तरदायी है.

इस का एक काम शरीर के तापमान का नियंत्रण करना भी है. जाहिर है हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित व्यक्ति ज्यादा ठंड महसूस करते हैं क्यों कि उन के शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी रहती है.

ये भी पढ़ें- WINTER SPECIAL : ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

अधिक उम्र

अधिक उम्र में ठंड अधिक लगती है. खासकर 60 साल के बाद व्यक्ति का मेटाबोलिज्म स्लो हो जाता है. इस वजह से शरीर कम हीट पैदा करता है.

एनीमिया

आयरन की कमी से शरीर का तापमान गिरता है क्यों कि आयरन रेड ब्लड सेल्स का प्रमुख स्रोत है. शरीर को पर्याप्त आयरन न मिलने से रेड ब्लड सेल्स बेहतर तरीके से काम नहीं कर पाते और हमें ज्यादा ठंड लगने लगती है.

खानपान

यदि आप गर्म चीजें ज्यादा खाते हैं जैसे ड्राई फ्रूट्स, नौनवेज, गुड, बादाम आदि तो आप को ठंड कम लगेगी. इस के विपरीत ठंडी चीजें जैसे, सलाद, आइसक्रीम, वेजिटेबल्स, दही आदि अधिक लेने से ठंड ज्यादा लगती है.

प्रेगनेंसी

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को एनीमिया और सरकुलेशन की शिकायत हो जाती है. इस वजह से कई बार ठंड लगने खासकर हाथ पैरों के ठंडा होने की शिकायत करती है.

डीहाइड्रेशन

पानी कम मात्रा में पीने से शरीर का मेटाबौलिज्म घट जाता है और शरीर खुद को गर्म रखने के लिए आवश्यक एनर्जी और हीट तैयार नहीं कर पाता.

ये भी पढ़ें- आयुर्वेदिक सुझाव : अस्थमा के मरीजों के बेहतर सांस लेने के लिए गए कुछ खास

हारमोंस

अलगअलग तरह के हार्मोन्स भी हमारे शरीर के तापमान को प्रभावित करते हैं. उदाहरण के लिए एस्ट्रोजेन साधारणतः डाइलेटेड ब्लड वेसल्स और बौडी टेंपरेचर प्रमोट करता है. जबकि पुरुषों में मौजूद टेस्टोस्टेरोन हार्मोन इस के विपरीत कार्य करता है. इस वजह से महिलाओं का शरीर ज्यादा ठंडा होता है. एक अध्ययन के मुताबिक महिलाओं के हाथ पैर पुरुषों के देखे लगातार अधिक ठंडे रहते हैं. यही नहीं महिलाओं में थायराइड और अनीमिया की समस्या भी अधिक होती है. दोनों ही ठंड लगने के लिए अहम् कारक हैं.

पुअर सर्कुलेशन

यदि आप का पूरा शरीर तो आरामदायक स्थिति में है मगर हाथ और पैर ठंडे हो रहे हैं तो इस का मतलब है कि आप को सरकुलेशन प्रौब्लम है जिस की वजह से खून का प्रवाह शरीर के हर हिस्से में सही तरीके से नहीं हो रहा. हार्ट भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में भी ठंड अधिक लगने की समस्या पैदा हो सकती है.

तनाव और चिंता

जिन लोगों की जिंदगी में अधिक तनाव और डिप्रेशन होता है वे अक्सर ठंड अधिक महसूस करते हैं क्यों कि तनावग्रस्त होने की स्थिति में हमारे मस्तिष्क का वह भाग सक्रिय हो जाता है जो खतरे के समय आप को सचेत रखता है.ऐसे में शरीर अपनी सारी ऊर्जा खुद को सुरक्षित रखने के लिए रिज़र्व रखता है और हाथपैर जैसे हिस्सों तक गर्मी नहीं पहुंच पाती.

ये भी पढ़ें- छोटे-छोटे पत्तें बड़े काम के …

जब बीएमआई कम हो

न केवल बीएमआई और वजन कम होने के कारण आप को ठंड ज्यादा लग सकती है बल्कि आप के शरीर में फैट और मसल्स की मात्रा भी उस की वजह बनती है. मसल्स अधिक मात्रा में होने से शरीर अधिक हीट पैदा करता है और फैट की वजह से भी शरीर से हीट लौस कम होता है जिस से ठंड कम लगती है.

यदि आप को लगता है कि दूसरों के मुकाबले आप का शरीर हमेशा ही ज्यादा ठंडा रहता है या फिर पहले कभी आप ने ठंड महसूस नहीं किया मगर अब हमेशा ही ऐसा लगने लगा है तो आप को मेडिकल चेकअप कराना चाहिए. यदि ठण्ड के साथ आप के वजन में तेजी से बढ़ोतरी या कमी हो रही है, बाल झड़ रहे हैं और कब्ज की शिकायत रहने लगी है ,तो भी किसी अच्छे डाक्टर से जरूर मिलें.

अलविदा 2019 : इस साल शादी के बंधन में बंधे बौलीवुड के ये 5 कपल

आपको बताते हैं, 2019 मेें किन बौलीवुड सेलिब्रेटी ने शादी की.

  1. पूजा बत्रा और नवाब शाह

फिल्म ‘विश्वविधाता’ से बौलीवुड की दुनिया में कदम रखने वाली पूजा बत्रा ने एकटर नवाब शाह से शादी की. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूजा बत्रा और नवाब शाह ने पारंपरिक रीति-रिवाज से अपनी शादी की. दोनों की साथ में कई फोटो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थी.

https://www.instagram.com/p/BzxoDLCgqFw/?utm_source=ig_web_copy_link

2. आरती छाबड़िया और  विशारद बीडसी

बौलीवुड एक्ट्रेस आरती छाबड़िया ने आरती ने मुंबई में अपने बायफ्रेंड विशारद बीडसी के साथ सात फेरे ले लिए. आरती की शादी 24 जून को हुई,  मगर उन्होंने इसकी कानोंकान ख़बर नहीं लगने दी. आरती की शादी का खुलासा उनकी सोशल मीडिया पोस्ट से हुआ.

ये भी पढ़ें- भाईजान के जन्मदिन पर बहन ने दिया बेहद खास तोहफा

3. नुसरत जहां और निखिल जैन

बंग्ला फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस नुसरत जहां कोलकाता के बिजनसमैन निखिल जैन के साथ 19 जून को तुर्की में शादी की. शादी की पहली तस्वीरें निखिल और नुसरत ने अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर भी की थी.

https://www.instagram.com/p/B0qkVrKHTwt/?utm_source=ig_web_copy_link

4. नीति मोहन और निहार पांड्या

बौलीवुड में कई हिट गाने देने वाली नीति मोहन ने एक्टर और मौडल निहार पांड्या संग सात फेरे लिए थे.  शादी के 5 दिन बाद नीति ने अपनी शादी की पहली तस्वीर शेयर की थी. तस्वीर में नीति और निहार पिंक ड्रेस के कौम्बिनेशन में बेहद खूबसूरत लग रहे थे.

ये भी पढ़ें- बिग बौस 13 : चुपके-चुपके रोमांस कर रहे हैं ये कंटेस्टेंट

5. शीना बजाज और रोहित पुरोहित

‘मरियम खान रिपोर्टिंग लाइव’ फेम एक्ट्रेस शीना बजाज  और ‘पोरस’ फेम ऐक्टर रोहित पुरोहित शादी के बंधन में बंध गए. इस शादी में दोनों के परिवार के लोग और नजदीकी लोग शामिल हुए थे. दोनों ऐक्टर्स की यह शादी रोहित के होम टाउन जयपुर में हुई.

भाईजान के जन्मदिन पर बहन ने दिया बेहद खास तोहफा

सलमान खान के जन्मदिन के मौके पर  उनके फैमली, फ्रेंड्स और फैंस सहित सभी ने उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जन्मदिन की बधाई दी. लेकिन सब की बधाइयों के साथ सलमान खान की बहन अर्पिता खान शर्मा ने उन्हें दूसरी बार मामा बना कर सबसे खास तोहफा दिया. सलमान की बहन अर्पिता ने एक बेटी को जन्म दिया है . बेटी का नाम आयत रखा गया है.

अर्पिता के पति और अभिनेता आयुष शर्मा ने अपनी बेटी के नाम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर बेटी का नाम साझा किया है. आयुष शर्मा की इंस्टा पोस्ट के अनुसार उनकी बेटी का नाम आयत शर्मा है. अर्पिता अस्पताल में सी-सेक्शन डिलीवरी के जरिए इस बेटी को जन्म दिया और भाईजान के 54वें जन्मदिन को जीवन भर के लिए यादगार बना दिया है.

सलमान के जन्मदिन के मौके पर हजारों फैंस उनके घर के बाहर बधाई देने पहुंचे. सलमान हर साल अपने फैंस की बधाई लेने के लिए घर की बालकनी पर आते हैं . कल जब सलमान अपने फैंस से मिले तो उन्होंने हाथ हिलाकर सबको धन्यवाद किया . इस बीच सलमान की आंखों में आंसू आ गए. सलमान ये देखकर भावुक हो गए कि उन्हें हजारों फैंस का प्यार मिल रहा है.

फैंस के साथ मिलते हुए सलमान की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं. सलमान ने मीडिया के साथ अपना बर्थडे केक काटा . जब सलमान मीडिया के सामने आए तो सभी ने उन्हें जन्मदिन के साथ मामा बनने की भी बधाई दी . इस मौके पर सलमान ने कहा, ‘जब मैं सोकर उठा तो मैंने फोन में सबसे पहले आयत की फोटो देखी .’

‘हमारे परिवार के लिए इससे अच्छा तोहफा कुछ नहीं हो सकता .’ सलमान दूसरी बार मामा बने हैं . इस पर उन्होंने कहा, ‘अभी हो गया मामा का, चाचा का, अब बस बाप बनने का बाकी है .’ अर्पिता की बेटी का नाम आयत रखने पर सलमान ने बताया कि उनके परिवार ने दो नाम सोचे थे .

सलमान ने कहा, ‘हमने दो नाम सोचे थे एक सिफारा और दूसरा आयत . अर्पिता ने आयत चुना .’ सलमान ने बताया कि ये नाम पिता सलीम खान ने उनके बेटे या बेटी के लिए सोचे थे . वो कहते हैं, ‘ये दोनों ही नाम मेरे बेटे या बेटी के लिए सोचे गए थे . वो हमेशा से इसके लिए तैयार थे लेकिन अब इन नामों को ले लिया गया है.’

कोई शर्त नहीं : भाग 1

‘‘खानाबदोश सी बन गई है जिंदगी… अभी तंबू गाड़े भी नहीं थे कि उखाड़ने की तैयारी शुरू…’’ अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुलदीप अपना बैग पैक करतेकरते राज्य सरकार की ट्रांसफर पौलिसी को कोस रहे थे. पत्नी शशि गुमसुम सी सामान पैक करने में उन की मदद कर रही थी. उस की उदास आंखें भी सरकार की इस पौलिसी के प्रति अपनी नाराजगी की गवाही दे रही थीं.

अभी 2 साल भी पूरे नहीं हुए थे कुलदीप को अपने होम टाउन जयपुर में ट्रांसफर हुए कि फिर से ट्रांसफर और वह भी गुजरात सीमा के पास… एक आदिवासी इलाके में… सिरोही जिले में एक छोटी सी जगह पिंडवाड़ा…

हालांकि राज्य सरकार की तरफ से अपने प्रशासनिक अधिकारियों को सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, मगर परिवार की अपनी जिम्मेदारियां भी होती हैं.

पिंडवाड़ा में सभी चीजें मुहैया होने के बावजूद भी कुलदीप की मजबूरी थी कि वे शशि और बच्चों को अपने साथ नहीं ले जा सकते थे.

बड़ी बेटी रिया ने अभी हाल ही में इंजीनियरिंग कालेज के फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया है और छोटा बेटा राहुल तो इस साल 10वीं जमात में बोर्ड के एग्जाम देगा. ऐसे में उन दोनों को ही बीच सैशन में डिस्टर्ब नहीं किया जा सकता, इसलिए शशि को बच्चों के साथ जयपुर में ही रहना पड़ेगा.

अगर दूरियां नापी जाएं तो जयपुर और पिंडवाड़ा के बीच ज्यादा नहीं है, मगर प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारियां ही इतनी होती हैं कि हर हफ्ते इन दूरियों को तय कर पाना कुलदीप के लिए मुमकिन नहीं था. महीने में सिर्फ 1 या 2 बार ही कुलदीप का जयपुर आना मुमकिन होगा. यह बात पतिपत्नी दोनों ही बिना कहे समझ रहे थे.

कुलदीप की सब से बड़ी समस्या घर के खाने को ले कर थी. खाने के नाम पर उन्होंने कालेज में पढ़ाई के दौरान सिर्फ चावल बनाने ही सीखे थे और बाद में मैगी बनाना भी सीख लिया था. हां, शादी के बाद उन्हें चाय बनाना जरूर आ गया था.

ये भी पढ़ें- एक रिक्त कोना

हमेशा तो ट्रांसफर होने पर शशि व बच्चे उन के साथ ही शिफ्ट हो जाते थे, मगर अब बच्चों की पढ़ाई उन की सुविधा से ज्यादा जरूरी हो गई है.

इधर जैसेजैसे उम्र बढ़ रही थी, होटलों और ढाबों के तेज मसालों वाले खाने से कुलदीप को एसिडिटी होने लगी थी. नौकरी वगैरह का तनाव होने के चलते शरीर में ब्लड शुगर का लैवल भी बढ़ने लगा था.

डाक्टरों ने कसरत करने के साथसाथ कम मसाले वाला खाना और हरी पत्तेदार सब्जियों के खाने की सख्त हिदायत दे रखी थी. पत्नी शशि परेशान थी कि उन के खाने का इंतजाम कैसे होगा.

पिंडवाड़ा पहुंचते ही जोरावर सिंह ने गरमागरम चाय के साथ कुलदीप का स्वागत किया.

जोरावर सिंह कुलदीप का सहायक होने के साथसाथ बंगले का चौकीदार और माली सबकुछ था.

जोरावर सिंह बंगले के पीछे बने सर्वेंट क्वार्टर में अपनी पत्नी राधा के साथ रहता था. चाय सचमुच बहुत अच्छी बनी थी. पीते ही कुलदीप बोले, ‘‘तुम्हें देख कर तो नहीं लगता कि यह चाय तुम ने ही बनाई है.’’

‘‘सही कहा साहब, यह चाय मैं ने नहीं, बल्कि मेरी जोरू ने बनाई है,’’ जोरावर सिंह अपने पीले दांत निकाल कर हंसा.

कुलदीप ने इस बार ध्यान से देखा उसे. बड़ीबड़ी मूंछें, कानों में सोने की मुरकी, सिर पर पगड़ी और धोतीअंगरखा पहने दुबलापतला जोरावर सिंह कुलदीप के पास जमीन पर उकड़ू बैठा हुआ उसे एकटक देख रहा था.

‘‘यहां खाने का क्या इंतजाम है?’’ कुलदीप ने पूछा.

‘‘आसपास कई गुजराती ढाबे हैं… आप को राजस्थानी खाना भी मिल जाएगा… और विदेशी खाना चाहिए तो फिर शहर में अंदर जाना पड़ेगा…’’ जोरावर सिंह ने अपनी जानकारी के हिसाब से बताया.

‘‘कोई यहां बंगले पर आ कर खाना बनाने वाला या वाली नहीं है क्या?’’ कुलदीप ने पूछा.

‘‘साहब, मैं पूछ कर बताता हूं,’’ कह कर जोरावर सिंह चाय का कप उठाने लगा.

‘कहां राजधानी जयपुर और कहां पिंडवाड़ा…’ सोच कर कुलदीप को अच्छा तो नहीं लगा, मगर उन्होंने देखा कि अरावली की पहाडि़यों की गोद में बसा पिंडवाड़ा एक खूबसूरत और शांत कसबा है.

यह एक हराभरा आदिवासी बहुल इलाका है. उन्हें यहां के लोग भी बहुत सीधेसादे और अपने काम से काम रखने वाले लगे.

ये भी पढ़ें- अंधेरी आंखों के उजाले

कुलदीप का सरकारी बंगला अंदर से काफी बड़ा और शानदार था. वैल फर्निश्ड घर में 2 बैडरूम अटैच बाथरूम समेत, एक ड्राइंगरूम, गैस स्टोव और चिमनी के साथ बड़ी सी किचन. एक लौबी के अलावा छोटा सा स्टोर भी था… लौबी में 4 कुरसी वाली डाइनिंग टेबल भी रखी थी.

चारों तरफ से खुलाखुला बंगला कुलदीप को बेहद पसंद आया. एक बैडरूम में एयरकंडीशनर भी लगा था. कुलदीप ने अपना सूटकेस बैडरूम में रखा और नहाने की तैयारी करने लगे.

औफिस का टाइम हो रहा था. कुलदीप नाश्ते के बारे में सोच रहे थे कि क्या किया जाए. अब तो मैगी बनाने जितना टाइम भी नहीं था. वे पहले ही दिन लेट नहीं होना चाहते थे.

‘वहीं कुछ खा लूंगा,’ सोचते हुए कुलदीप तैयार हो कर बाहर निकले तो डाइनिंग टेबल पर एक डोंगे में ढका हुआ नाश्ता रखा देखा. ढक्कन उठाया तो करीपत्ते से सजे हुए गरमागरम पोहे की खुशबू पूरे घर में फैल गई.

कुलदीप के मुंह में पानी आ गया… उन्होंने तुरंत प्लेट में डाल लिया. खाया तो स्वाद सचमुच लाजवाब था, मगर तारीफ सुनने के लिए आसपास कोई भी नहीं था. जोरावर सिंह भी नहीं…

औफिस में कुलदीप का दिन काफी थकाने वाला था. काम तो वही पुराना था, मगर नया माहौल… नए लोग… सब का परिचय लेतेलेते ही दिन बीत गया.

घर पहुंचते ही पत्नी शशि का फोन आ गया. बिजी होने के चलते दिन में बात ही नहीं कर पाए थे उस से…

यों भी शशि की बातें बहुत लंबी होती हैं, इसलिए फुरसत में ही वे उसे फोन करते हैं. अभी दोनों बातें कर ही रहे थे कि एक चीख की आवाज ने कुलदीप को चौंका दिया.

‘‘बाद में बात करता हूं,’’ कह कर उन्होंने शशि का फोन काटा और आवाज की दिशा में दौड़े.

‘आवाज तो सर्वेंट क्वार्टर में से आ रही है… तो क्या जोरावर सिंह अपनी पत्नी को पीट रहा है?’ कुलदीप कुछ देर खड़े सोचते रहे. धीमी होतीहोती सिसकियां बंद हो गईं तो वे बंगले की तरफ पलट गए.

चपरासी से कह कर रात का खाना पैक करा लिया था. सुबह नाश्ते के लिए ब्रैडजैम भी मंगवा लिया था, मगर सुबह की चाय का इंतजाम नहीं हो सका था.

सुबह उठ कर कुलदीप बंगले के गार्डन में सैर के लिहाज से चक्कर लगा रहे थे, मगर उन की आंखें सर्वेंट क्वार्टर की तरफ ही लगी थीं, तभी उन्हें जोरावर सिंह आता हुआ दिखाई दिया.

जोरावर सिंह के हाथ में चाय का कप देख कर कुलदीप को मनमांगी मुराद मिल गई.

चाय पीतेपीते उन्होंने जोरावर सिंह से फिर से खाना बनाने के इंतजाम का जिक्र किया.

‘‘साहब, कितने पैसे दोगे नाश्ता और 2 टाइम का खाना बनाने के?’’ जोरावर सिंह ने अपनी बात रखी.

‘‘तुम पैसे की चिंता मत करो, बस चायनाश्ता और खाना बिलकुल वैसा ही होना चाहिए, जैसा कल सुबह था.’’

‘‘साहब, इस का सीधा सा हिसाब है… 3 टाइम का खाना… 3,000 रुपए…’’ जोरावर सिंह ने अपने पीले दांत दिखाए.

‘‘मंजूर है, पर है कौन… कब से शुरू करेगा या करेगी?’’

‘‘अरे साहब, और कौन, राधा है न… वही बना देगी… आज और अभी से… मैं भेजता हूं उसे…’’ कह कर जोरावर सिंह ने चाय का कप उठाया और राधा को बुलाने चला गया.

राधा ने आते ही अपने सधे हुए हाथों से रसोई की कमान संभाल ली. टखनों से थोड़ा ऊंचा घाघरा और कुरती… ऊपर चटक रंग की ओढ़नी… पैरों में चांदी के मोटे कड़े और हाथों में पहना सीप का चूड़ा… कुलदीप की आंखों में ‘मारवाड़ की नार’ की छवि साकार हो उठी.

हालांकि कुलदीप ने उस का चेहरा नहीं देखा था, क्योंकि वह उन के सामने घूंघट निकालती थी, मगर कदकाठी से वह जोरावर से काफी कम उम्र की लगती थी.

सुबह की चाय जोरावर सिंह अपने घर से लाता था, उस के बाद कुलदीप का टिफिन पैक कर के राधा उन का चायनाश्ता टेबल पर लगा देती थी.

शाम का खाना कुलदीप के औफिस से लौटने से पहले ही बना कर राधा हौटकेस में रख देती थी. कुलदीप ने उसे अपने घर की एक चाबी दे रखी थी.

अभी 4-5 दिन ही बीते थे कि कुलदीप ने फिर से सर्वेंट क्वार्टर से चीखने की आवाज सुनी. उन के कदम उठे, मगर फिर ‘पतिपत्नी का आपसी मामला है’ सोच कर रुक गए.

अगले दिन उन्होंने देखा कि राधा कुछ लंगड़ा कर चल रही है. उन्होंने पूछा भी, मगर राधा ने कोई जवाब नहीं दिया.

ये भी पढ़ें- आत्ममंथन

4 दिन बाद फिर वही किस्सा… इस बार कुलदीप ने राधा के हाथ पर चोट के निशान देखे तो उन से रहा नहीं गया.

कुलदीप ने खाना बनाती राधा का हाथ पकड़ा और उस पर एंटीसैप्टिक क्रीम लगाई. राधा दर्द से सिसक उठी.

कुलदीप ने नजर उठा कर पहली बार राधा का चेहरा देखा. कितना सुंदर… कितना मासूम… नजरें मिलते ही राधा ने अपनी आंखें झुका लीं.

अब तो यह अकसर ही होने लगा. जोरावर सिंह अपनी शराब की तलब मिटाने के लिए हर 8-10 दिन में आबू जाता था. पर्यटन स्थल होने के कारण वहां हर तरह की शराब आसानी से मिल जाती थी. वहां से लौटने पर राधा की शामत आ जाती थी.

राधा जोरावर सिंह की दूसरी पत्नी थी. वह बेतहाशा शराब पी कर राधा से संबंध बनाने की कोशिश करता और नाकाम होने पर अपना सारा गुस्सा उस पर निकालता था, मानो यह भी मर्दानगी की ही निशानी हो.

राधा के जख्म कुलदीप से देखे नहीं जाते थे, मगर मूकदर्शक बनने के अलावा उन के पास कोई चारा भी नहीं था. वह चोट खाती रही… कुलदीप उन पर मरहम लगाते रहे. एक दर्द का रिश्ता बन गया था दोनों के बीच.

धीरेधीरे राधा उन से खुलने लगी थी… अब तो खुद ही दवा लगवाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा देती थी… कभीकभी घरपरिवार की बातें भी कर लेती थी… उन की पसंदनापसंद पूछ कर खाना बनाने लगी थी. एक अनदेखी डोर से दोनों के दिल बंधने लगे थे.

2 महीने बीत गए. इस बीच कुलदीप एक बार जयपुर हो आए थे. राधा के खाना बनाने से कुलदीप को ले कर पत्नी शशि की चिंता भी दूर हो गई थी.

एक दिन सुबह राधा नाश्ता टेबल पर रखने आई तो कुलदीप टैलीविजन पर ‘ई टीवी राजस्थान’ चैनल देख रहे थे, जिस में एक मौडल लहरिया के डिजाइन दिखा रही थी.

लहसुन उखाड़ने की मशीन से काम हुआ आसान

राजस्थान के जोधपुर जिले का मथानिया गांव उम्दा खेतीकिसानी के लिए जाना जाता है. मथानिया की लाल मिर्च के नाम से इस गांव के खेतों में उपजी मिर्च की मांग विदेशों तक थी. फिर किसानों द्वारा फसलचक्र को तवज्जुह न देने की वजह से यहां की मिर्ची की खेती तमाम रोगों का शिकार हो गई. लेकिन धीरेधीरे किसान जागरूक हुए हैं और कुदरत के नियमों का पालन कर रहे हैं. अब इस इलाके में मिर्च के अलावा गाजर, पुदीना और लहसुन की खेती भी जोरों पर है. लहसुन की खेती में यहां के किसानों को शिकायत थी कि जब वे लहसुन को खेत में से उखाड़ने का काम करते हैं, तो उन के हाथ खराब हो जाते हैं. हाथ फटने और नाखूनों में मिट्टी चले जाने के कारण अगले दिन खेत में जा कर मेहनत करना कठिन होता था.

किसान मदन सांखला ने इस समस्या को चैलेंज के रूप में स्वीकारते हुए लहसुन की फसल निकालने के लिए एक मशीन बनाने की सोची. मदन को किसान होने के साथसाथ अपने बड़े भाई अरविंद के लोहे के यंत्र बनाने के कारखाने में मिस्त्री के काम का अनुभव भी था. उस ने अपने अनुभव के आधार पर जो मशीन बनाई, उसे काफी बदलावों के बाद कुली मशीन नाम दिया, चूंकि लहसुन में कई कुलियां होती हैं. बातचीत के दौरान मदन ने बताया, ‘हमारा पूरा परिवार खेती करता है. लहसुन की खेती में 1 मजदूर दिन भर में 100 से 200 किलोग्राम लहसुन ही खेत से उखाड़ (निकाल) पाता है. दिन भर की मेहनत के बाद हम सब के हाथ खराब हो जाते थे. अगले दिन खेत में मजदूरी करना सब के बस की बात नहीं रहती थी. इस तरह से लागत बढ़ने लगी और हम लोग लहसुन को कम महत्त्व देने लगे.

‘समस्या के हल के लिए हम ने लहसुन को लोहे की राड या हलवानी से निकालना शुरू किया. इस से हमें काम में थोड़ीबहुत आसानी जरूर हुई, पर यह समस्या का अंत नहीं था. मुझे अंत तक पहुंचने की जल्दी थी. ‘तब मैं ने एक मशीन बनाई. नालीदार शेप वाले मजबूत ऐंगल से बनी हल जितनी ऊंची यह मशीन खूब लोकप्रिय हो रही है. इसे ट्रैक्टर के पीछे टोचिंग कर के इस्तेमाल किया जाता?है. यह एक एडजस्टेबल मशीन है. खेत में मिट्टी के हिसाब से लहसुन की गांठें कम या ज्यादा गहराई तक बैठती हैं, लिहाजा ट्रैक्टर से जोड़ कर इसे हल की तरह मनचाहे एंगल पर खेत में उतारा जा सकता?है. जमीन के भीतर रहने वाले हिस्से में एक आड़ी पत्ती (ब्लेड) लगी रहती?है, जिसे जमीनतल के समानांतर न रख कर थोड़ा टेढ़ा रखा गया?है. यह आड़ी पत्ती मजबूत लोहे की बनी होती है.

मशीन की पत्ती जमीन में 7-8 इंच या 1 फुट तक गहरी जाती?है और मिट्टी को नरम कर देती?है. इस से फायदा यह होता है कि लहसुन को ढीली पड़ चुकी मिट्टी से बाद में आसानी से इकट्ठा किया जा सकता है. लहसुन रहता मिट्टी के अंदर ही है, बाहर निकलने और धूप में खराब होने का अब डर नहीं है. पहले हाथ से लहसुन निकालने पर पूरे दिन में 1 लेबर 5 क्यारियों से लहसुन निकाल पाता था. गौरतलब है कि 1 बीघे में 100 क्यारियां होती हैं. इस मशीन के नतीजे चौंकाने वाले हैं. इसे ट्रैक्टर से जोड़ कर 1 बीघे का लहसुन महज 15 मिनट में उखाड़ लिया जाता है.

हाथ से लहसुन उखाड़ने के दौरान करीब 3 से 4 फीसदी लहसुन जमीन में ही रह जाता था. किसान या मजदूर चाहे कितना भी अनुभवी क्यों न हो, लहसुन टूट कर जमीन में रह ही जाता था. इस के अलावा पत्तों समेत उखाड़े जाने वाले लहसुन की कुलियों (गांठों) को खराब होने से बचाने के लिए तुरंत ही इकट्ठा कर के छाया में सुखाना पड़ता था. इस काम की मजदूरी भी देनी पड़ती थी. अब 1 लेबर 1 दिन में 1 बीघे यानी 100 क्यारियों में से लहसुन उखाड़ सकता है. इस मशीन से वक्त की बचत हुई है और दाम भी अच्छे मिलने लगे हैं. राजस्थान के कोटा में लहसुन ज्यादा होता है, इसलिए वहां इस मशीन की मांग ज्यादा है.

पहले हाथ से लहसुन निकालने पर उसे खराब होने से बचाने के लिए बोरी से ढक कर रखना पड़ता था. अब यह फायदा है कि लहसुन रहता तो जमीन में ही है, बस मिट्टी नर्म हो जाती है, इसलिए इसे जरूरत के मुताबिक निकाला जा सकता?है. इस मशीन की लागत 13000 से 15000 रुपए के बीच आती है. ज्यादा जानकारी के लिए किसान निम्न पते पर संपर्क कर सकते हैं:

मदन सांखला, मार्फत विजयलक्ष्मी इंजीनियरिंग वर्क्स, राम कुटिया के सामने, नयापुरा, मारवाड़ मथानिया 342305, जिला जोधपुर, राजस्थान. फोन : 09414671300.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें