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अलविदा 2019 : इस साल शादी के बंधन में बंधीं छोटे पर्दे की ये 6 जोड़ियां

खट्टी-मीठी यादों को संजोते हुए कब हम सभी साल के आखिर में आ गए पता ही नही चला अब सिर्फ एक दिन ही बाकी है साल 2019 को विदा होने में ऐसे में क्यों न छोटे पर्दे ही उन खूबसूरत एक्ट्रेसेज की  गोल्डन लाइफ के बारे में जाना जाए जिन्होंने पिछले साल यानी 2019 में अपनी शादी करके खूब सुर्खियां बटोरीं आइए जानते है उन हौट एक्ट्रेसेज के बारे में जिनके लिए 2019 बहुत खास रहा.

1. शीना बजाज ने रोहित बजाज

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस शीना बजाज ने रोहित बजाज के साथ  4 साल  डेट करने के बाद 22 जनवरी को शादी कर ली. शीना की शादी बहुत सुर्खियों में रही. यह रॉयल शादी जयपुर में हुई. अपनी शादी के दिन  शीना ने  रैड लहंगा के साथ शिमरी गोल्डन ब्लाउज पहना और मैचिंग ज्वेलरी कैरी की. जो लोगों को बहुत पसंद आया शीना ने शादी के हर फंक्शन में खूब मस्ती की थी.

इस शादी में शीना बजाज और रोहित पुरोहित के कुछ करीबी दोस्त और परिवार के सदस्य ही शामिल हुए शीना बजाज आखिरी बार ‘मरियम खान रिपोर्टिंग लाइव’ सीरियल में नजर आई थीं. शीना बजाज ने अपने करियर की शुरुआत साल 2003 में ‘जस्सी जैसी कोई’ नहीं सीरियल से की थी. इसके बाद कई सारे सीरियल्स में नजर आईं. इन सीरियल्स में ‘बेस्ट ऑफ लक लक्की’, ‘कुछ तो लोग कहेंगे’, ‘थपकी प्यार की’, ‘सावित्री देवी कॉलेज एंड हॉस्पिटल’, ‘तुझसे है राबता’ और ‘लाल इश्क’ सीरियल शामिल है.

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सीना के पति रोहित पुरोहित आखिरी बार ‘पोरस’ सीरियल में नजर आए थे. इस सीरियल में रोहित पुरोहित ने ‘अलेक्जेंडर द ग्रेट’ का किरदार निभाया था. करियर की बात करें तो रोहित ने सीरियल ‘शौर्य और सुहानी’ से टीवी सफर की शुरुआत की. सोशल मीडिया पर शादी के फंक्शन की तस्वीरों को शीना बजाज ने शेयर किया है. इसके साथ ही खूबसूरत कैप्शन भी लिखा है. शीना बजाज ने लिखा- ‘लो कर दी जिंदगी तेरे नाम.’

2. लवलीन कौर सासन की शादी

लवलीन ने 10 फरवरी को वसंत पंचमी के दिन बंगलुरु के बिजनेसमैन कौशिक कृष्णमूर्ति से शादी कर ली. पंजाब में अमृतसर जिले के एक गुरुद्वारे में शादी कर रस्में निभाई गईं. लवलीन ने पंजाबी रीति रिवाज से विवाह किया. इसके बाद बेंगलुरु में साउथ इंडियन रीति-रिवाज से शादी की. फेरों के समय लवलीन ने हल्के गुलाबी रंग का लहंगा पहना था और कौशिक ने क्रीम और गोल्डन रंग के शेरवानी पहनी थी. दुल्हन ने लहंगे के साथ हैवी नेकलेस, ईयरिंग्स, मांग टीका और लाल रंग का जूड़ा भी किया था, जिसमें वे बेहद खूबसूरत लग रही थीं. बता दें कि इस शादी में दोनों के करीबी लोग ही शामिल हुए थे. लवलीन सीरियल ‘साथ निभाना साथिया’ में परिधि के रोल में नज़र आईं थीं. इनके अलावा लवलीन ने ‘बड़े अच्छे लगते हैं’, ‘कितनी मोहब्बत है’, ‘सावधान इंडिया’, ‘अनामिका’, ‘क्या हुआ तेरा वादा’, ‘कैसा ये इश्क है’ जैसी टीवी शो में भी काम किया है.

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3. पलक जैन और तपस्वी मेहता

सीरियल लाडो 2 की एक्ट्रेस पलक जैन ने अपने ब्वॉयफ्रेंड और एक्टर तपस्वी मेहता से  इंदौर के द एग्जोटिका होटल में 10 फरवरी को शादी की. अपनी शादी के वक्त पलक जैन ने रेड क्रीम और गोल्डन कलर का हैवी लंहगा कैरी किया हुआ था. वहीं, बात करें तपस्वी की तो वो क्रीम और गोल्डन कलर की शेरवानी में अच्छे लग रहे थे.  दोनों स्टार्स की शादी की तस्वीरें  सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी.

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4. मोहिना कुमारी और सुयश महाराज

स्टार प्लस के फेमस सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में नायरा की नंद का किरदार निभाने वाली टीवी एक्ट्रेस मोहिना कुमारी  ने उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री और आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज के बेटे सुयश महाराज के साथ शादी कर ली.  सुर्ख लाल जोड़े में  वह बेहद ही खूबसूरत लग रही थी.

मोहिना कुमारी ने सब्यसाची के डिजाइन किए हुए कपड़े पहने. उनके कपड़ों को खास राजपूती टच दिया गया है. पारंपरिक राजस्थानी रंग का लाल लहंगा, जिसमें भारी रजवाड़ा डिजाइन-आभूषण और सुनहरे रंग का दुपट्टा था. इस पहनावे में, वह किसी शाही राजपूत दुल्हन से कम नहीं लग रही थी. वहीं लंबा गोटेदार घूंघट उनकी सुंदरता में चार चांद लगा रहा था. वहीं दूसरी तरफ मोहिना के दूल्हे राजा सुयश रावत ने कढ़ाई के काम के साथ एक ऑफ-व्हाइट शेरवानी पहने हुए थे और शहरे की जगह सर पर राजस्थानी पगड़ी को लगाया हुआ था.  मोहिना कुमारी के शादी के दिन खूब डांस किया था उनकी शादी के खूबसूरत पलों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे.

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5. आरती छाबड़िया और विशारद

रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ के चौथे सीजन की भी विनर रह चुकी एक्ट्रेस आरती छाबड़िया ने विशारद से मार्च में शादी की है. विशारद औस्ट्रेलिया में टैक्स कंसल्टंट की जौब करते हैं. दोनों की शादी की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर खूब वायरल हो रही हैं. लाल जोड़े में सजी आरती बेहद खूबसूरत नजर आ रही हैं.
आरती ने साल 200 में मिस इंडिया वर्ल्ड वाइड का खिताब जीता था. आरती ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत फिल्म ‘तुमसे अच्छा कौन है’ से की थी. इसके अलावा वह ‘लज्जा’, ‘शादी नंबर वन’, ‘पार्टनर’ और ‘हे बेबी’ में काम कर चुकी हैं. इसके अलावा आरती ने साउथ की फिल्मों में भी काम किया है.

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6. सोन्या अयोद्धया और हर्ष

एकता कपूर का फेमस टीवी शो ‘कसौटी जिंदगी की 2’ की एक्ट्रेस सोन्या अयोद्धया को सभी जानते है और इनकी एक्टिंग को सभी पसंद भी करते है सोन्या ने अक्टूबर 2019 में अपने ब्वॉयफ्रेंड और एक्टर हर्ष सिमोर के साथ जयपुर में शादी की. सोन्या ने भी अपनी शादी के दिन पीच कलर का लहंगा पहना जिसके साथ उन्होंने हैवी नेकलेस और मिनिमम मेकअप किया.  राजस्थानी लुक में सोन्या बेहद खूबसूरत दिखाई दीं.  पालकी में बैठे उनकी एंट्री हुई. वहीं उनके पति हर्ष ने व्हाइट कलर की शेरवानी कैरी की थी.  सोन्या की शादी की तस्वीरें व वीडियोज भी इंटरनेट पर खूब वायरल हुए थे, और सोन्या के ब्राइडल लुक ने खूब सुर्खियां बटोरी थी.

मकड़जाल में फंसी जुलेखा : भाग 2

जुलेखा का संपर्क रियल एस्टेट कंपनी में प्लौट की बुकिंग कराने वाले कमीशन एजेंटों से भी होता था. ज्यादा काम होने की वजह से जुलेखा को आए दिन देर रात तक रुकना पड़ता था, जो उसे पसंद नहीं था.

मनमाफिक माहौल न पा कर वहां से जुलेखा का मन ऊबने लगा. देर रात तक कंपनी के औफिस के काम को निपटाना और रोजाना देर से घर पहुंचना उस की आदत सी हो गई थी. इस दिनचर्या से वह तंग आ चुकी थी.

जुलेखा की परेशानी अवधेश यादव से छिपी न रह सकी. एक दिन अवधेश ने संजय यादव के साले गुड्डू से जुलेखा को एकांत में बुलवा कर समझाया, ‘‘जुलेखा, तुम यहां कंप्यूटर टाइपिंग का जो काम करती हो, इस से तुम्हारा कैरियर नहीं बन पाएगा. तुम्हें बंधीबंधाई जो सैलरी मिलती है, उस से तुम क्याक्या कर सकती हो. यह बात तो तुम जानती ही हो कि रियल एस्टेट के काम में अच्छा पैसा है. तुम यहां कंपनी के प्लौट बुक कराने शुरू कर दोगी तो अच्छा कमीशन मिलेगा. साथ ही देर रात तक चलने वाले कंप्यूटर के काम से निजात भी मिल जाएगी.’’

इस के बाद कंपनी के मालिक संजय यादव ने भी जुलेखा को प्लौट बुकिंग से मिलने वाले कमीशन के बारे में बताया. संजय यादव की बात जुलेखा की समझ में आ गई. उस ने कंपनी के कई प्लौट बुक कराए. जब एक महीने पहले की अपेक्षा ज्यादा कमाई हुई तो जुलेखा और ज्यादा मेहनत करने लगी.

जुलेखा ने काफी मेहनत से काम किया. वह हर महीने 2-3 प्लौट बिकवा देती थी, जिस से उस का अच्छा कमीशन बन जाता था. जुलेखा को संजय यादव की रियल एस्टेट कंपनी में काम करते हुए लगभग एक साल हो चुका था.

इसी बीच अगस्त, 2019 में फेसबुक के माध्यम से उस की दोस्ती श्रेयांश त्रिपाठी से हुई. बाद में दोस्ती बढ़ी तो मिलनाजुलना भी शुरू हो गया. इस के बाद श्रेयांश भी जुलेखा के काम में हाथ बंटाने लगा.

वह भी प्लौट खरीदने वाले को जुलेखा के पास लाता था. इस काम में संजय यादव भी उस की काफी मदद करता था. धीरेधीरे संजय यादव से जुलेखा के घनिष्ठ संबंध हो गए, जो अवैध संबंधों तक पहुंचे.

संजय यादव पर जुलेखा के कमीशन के करीब 25 लाख रुपए एकत्र हो गए थे. यह रकम प्लौट की कमीशन की थी. जुलेखा जब भी उस से पैसे मांगती, वह टाल देता था. आशनाई की आड़ में वह जुलेखा की कमीशन की रकम हड़पना चाहता था.

संजय यादव के इरादे भांप कर जुलेखा अपने 25 लाख रुपए जल्द देने की जिद पर अड़ गई तो संजय परेशान हो गया. उस ने साफ कह दिया कि अभी उस के पास पैसे नहीं हैं. इस बात को ले कर उस का संजय से काफी विवाद हुआ.

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उसी समय अवधेश यादव वहां आ गया. उस के कहने पर संजय यादव ने 3 लाख रुपए का चैक बना कर जुलेखा को दे दिया. उस के 22 लाख रुपए बाकी रह गए थे. विरोध जताते हुए जुलेखा ने वह चैक लौटा दिया और उस से पूरी रकम देने को कहा.

संजय यादव से हुए इस विवाद के बाद जुलेखा ने दूसरी कंपनी जौइन करने का मन बना लिया. उस ने संजय को धमकी दी कि वह कोर्ट के माध्यम से अपने पैसे ले कर रहेगी.

जुलेखा की इस धमकी से संजय यादव परेशान हो गया. उस ने अवधेश यादव, अजय यादव और अपने साले गुड्डू यादव के साथ मिल कर इस समस्या पर विचारविमर्श किया. इन लोगों ने फैसला लिया कि जुलेखा को हमेशा के लिए ही निपटाना सही रहेगा, वरना आगे चल कर वह परेशानी खड़ी करती रहेगी.

योजना के अनुसार 3 अगस्त, 2019 को अवधेश यादव ने जुलेखा से कहा, ‘‘संजय पर तुम्हारे जो 25 लाख रुपए बकाया हैं, वह मैं तुम्हें दिलवा दूंगा. लेकिन तुम यहां से नौकरी छोड़ कर मत जाओ.’’

अवधेश यादव के बुलाने पर जुलेखा घर से कंपनी के औफिस जाने को निकली. उस ने रास्ते में अपने दोस्त श्रेयांश त्रिपाठी को फोन कर के बाइक से बारह विरवा बुला लिया. उस की बाइक पर बैठ कर जुलेखा अमित इंफ्रा हाइट्स प्रा.लि. कंपनी के औफिस जाने के लिए नहर से नीचे मुड़ी ही थी, तभी कार से अजय यादव आता दिखाई दिया. कार अजय यादव चला रहा था और पीछे की सीट पर अवधेश यादव बैठा था.

उसे देखते ही संजय ने कार रोक दी. अवधेश ने बाइक पर बैठी जुलेखा से कहा कि वह कार में बैठ जाए, जिस से वह संजय से उस का हिसाब करा सके.

लालच में जुलेखा कार में पीछे वाली सीट पर बैठ गई. उस ने अपने दोस्त श्रेयांश से कह दिया कि इन लोगों से बात करने के बाद वह बड़ी बहन रूबी के पास चली जाएगी. कुछ दूर तक श्रेयांश बाइक से कार के पीछेपीछे गया, तभी कार में बैठी जुलेखा ने उसे जाने का इशारा किया तो श्रेयांश अपने घर लौट गया.

कार में बैठी जुलेखा अवधेश से बात कर रही थी. उसी समय रास्ते में अचानक बंगला बाजार पकरी के पास संजय यादव का साला गुड्डू यादव मिल गया. कार रुकते ही वह भी कार में बैठ गया. उसे देख कर जुलेखा भड़क गई. वह कार से उतर रही थी, तभी अवधेश ने उसे समझा कर रोक लिया. फिर गुड्डू भी जुलेखा की बगल में बैठ गया. वह अवधेश से अपने पैसों के बारे में बातें कर रही थी.

उन की बातों में गुड्डू भी कूद पड़ा. बातों के दौरान गुड्डू और जुलेखा का वाकयुद्ध शुरू हो गया. अजय ने कार रोक दी, फिर अजय और गुड्डू ने जुलेखा के बाल पकड़ कर सीट पर झुका दिया और जुलेखा के ही दुपट्टे से उस का गला घोंट दिया, जिस से उस की मृत्यु हो गई.

जुलेखा की लाश को ले कर वे तीनों रायबरेली के निकट हरचंद्रपुर में साई नदी के पास पहुंचे. उस समय रात के करीब 8 बज चुके थे. गुड्डू यादव और अजय यादव ने अवधेश के सहयोग से जुलेखा की लाश नदी में फेंक दी. उस के बाद ये लोग टोल प्लाजा होते हुए लखनऊ लौट आए.

जुलेखा की हत्या के बाद गुड्डू यादव, अवधेश यादव व अजय यादव पूरी तरह से निश्चिंत थे कि पुलिस उन तक नहीं पहुंचेगी. लेकिन वे पुलिस की गिरफ्त में आ ही गए.

गुड्डू यादव का कहना था कि जुलेखा ने उस के बहनोई संजय यादव से अवैध संबंध बना लिए थे, जिस की वजह से उस की बहन का घरपरिवार उजड़ रहा था.

अभियुक्त गुड्डू यादव और अजय यादव से पूछताछ के बाद उन्हें भादंवि की धारा 147, 364, 302, 201, 376, 34 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. इस के बाद पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई.

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थानाप्रभारी त्रिलोकी सिंह को एसआई सुभाष सिंह के द्वारा सूचना मिली कि मुख्य आरोपी संजय यादव न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के लिए पहुंचा है, तो थानाप्रभारी के नेतृत्व में गठित टीम ने 13 अगस्त, 2019 को संजय यादव को न्यायालय परिसर से गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में संजय ने भी अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. उसे भी पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. अब एक अभियुक्त अवधेश यादव शेष बचा था. जब वह 28 अगस्त को कोर्ट में आत्मसमर्पण करने जा रहा था, पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उसे भी जेल भेज दिया गया.

माध्यम : भाग 1

दुर्घटनाग्रस्त सास का पत्र पाते ही मीना को अपने साथ किए उन के दुर्व्यवहार की याद ताजा हो आई. वह दुविधा में घिरी थी कि क्या करे और क्या न करे. एक ओर सास को सबक सिखाने की कवायद तो दूसरी ओर मानवीय रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश.

बंबई से आए इस पत्र ने मेरा दिमाग खराब कर दिया है. दोपहर को पत्र आया था, तब प्रदीप दफ्तर में थे. अब रात के 9 बज गए हैं. मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए.

फाड़ कर फेंक दूं इसे? डाक विभाग पर दोष लगाना बड़ा सरल है. बाद में कभी प्रदीप या उन की मां ने इस विषय को उठाया तो मैं कह दूंगी कि वह पत्र मुझे कभी मिला ही नहीं.

या फिर प्रदीप से सीधी बात कर ली जाए. जैसेतैसे उन्हें छुट्टी मिली है. छुट्टी यात्रा भत्ता ले कर वह दक्षिण भारत की यात्रा पर जा रहे हैं. सिर्फ हम दोनों. बंगलौर, ऊटी, त्रिवेंद्रम, कोवलम और कन्याकुमारी. पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं और परसों सुबह की गाड़ी से हमें रवाना हो जाना है. प्रदीप को इस पत्र के बारे में बताया तो संभव है कि हमारे पिछले 2 वर्ष के वैवाहिक जीवन में प्रथम बार यह यात्रा कार्यक्रम स्थगित हो जाए.

फिर मन इस मानवीय आधार पर पूरे प्रसंग की विवेचना करने लगा. प्रदीप की मां मेरी सास हैं. सास और मां में क्या अंतर है? कुछ भी तो नहीं. उन की बाईं टांग में प्लास्टर चढ़ा है. स्नानागार में फिसल गईं. टखने और घुटने की हड्डियों में दरार आ गई है. गनीमत हुई कि वे टूटी नहीं. उन्हें 3 सप्ताह तक बिस्तर पर विश्राम करने की सलाह दी गई है.

घर पर कौन है? प्रदीप के पिता, छोटा भाई और सीमा. अरे, सीमा कहां है? उस का तो पिछले वर्ष विवाह हो गया. पत्र में लिखा है कि सीमा को बुलाने के लिए दिल्ली फोन किया था पर उस की सास ने अनुमति नहीं दी. सीमा की ननद अपना पहला जापा करने मायके आई हुई है. सास का गठिया परेशान कर रहा है. उधर सीमा का पति किसी विभागीय परीक्षा के लिए तैयारी कर रहा है.

प्रदीप के भाई ने पत्र लिखा है. मांजी ने ही लिखवाया है. यह भी लिखा है कि घर के कामकाज में बड़ी दिक्कत हो रही है. नौकरानी भी छुट्टी कर गई है.

घर की इस दुर्दशा का वर्णन पढ़ कर मेरा अंतर द्रवित हो गया. मैं ने सोचा, संकट के समय अपने बच्चे ही तो काम आते हैं. मांजी चाहती हैं कि मैं उन की सेवा के लिए औरंगाबाद से बंबई आ जाऊं. पर शालीनता या संकोचवश उन्होंने लिखवाया नहीं. उन्हें पता है कि हम लोग 2 सप्ताह की छुट्टी ले कर घूमने जा रहे हैं.

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एक मन किया, छुट्टी का सदुपयोग दक्षिण भारत की यात्रा नहीं, संकटग्रस्त परिवार की सेवा कर के किया जाए. पर तभी मन कसैला सा हो गया. शादी के पहले वर्ष में मेरे साथ मांजी ने जो व्यवहार किया था उस की कटु स्मृति आज तक मुझे छटपटाती है.

तब प्रदीप बंबई में ही नियुक्त थे. मैं अपने सासससुर के साथ ही रह रही थी. एक दिन नासिक से पिताजी का पत्र आया था. लिखा था कि कौशल्या बीमार है. उसे टायफाइड हुआ और बाद में पीलिया. डाक्टरों ने 4 हफ्ते पूर्ण विश्राम की सलाह दी है. वह बेहद परेशान है. पर मैं और तेरा छोटा भाई उस की देखभाल कर लेते हैं. खाना पकाने में दिक्कत होती है. पर पेट भरने के लिए कुछ कच्चापक्का बना ही लेते हैं. कभी दूध, डबलरोटी ले लेते हैं, कभी बाजार से छोलेभठूरे ले आते हैं.

पत्र पढ़ कर मेरी आंखों में आंसू आ गए. घर की ऐसी दुर्दशा. मेरा दिल किया कि मैं उड़ कर नासिक पहुंच जाऊं. शादी के बाद, पूरे 1 वर्ष में केवल रक्षाबंधन पर मैं 1 दिन के लिए अपने घर गई थी. प्रदीप साथ में थे.

मैं ने मांजी से घर जाने के लिए कहा तो वह संवेदनशून्य स्वर में बोलीं, ‘शादी के बाद लड़की को बातबेबात मायके जाना शोभा नहीं देता. उसे तो सिर्फ एक बार, और वह भी किसी त्योहार पर ही मां के घर जाना चाहिए.’

‘मांजी, मां को पीलिया हो गया है. घर में…’

‘बहू, घर में यह मामूली हारीबीमारी तो चलती रहती है. इस तरह छोटेमोटे बहाने से मायके की तरफ लपकना अच्छा लगता है?’ मांजी ने विद्रूप स्वर में ताना कसा.

‘पर भाई और पिताजी को ठीक से खाना नहीं मिल रहा है…’

‘देखो बहू, उस घर को भूल जाओ. अब तो तुम्हारा घर यह है. तुम्हारा पहला फर्ज बनता है हम लोगों की सेवा.’

‘मांजी, यह तो ठीक है पर जरा सोचिए, जिन मांबाप ने जन्म दिया, जिन्होंने पालपोस कर इतना बड़ा किया, शादीब्याह किया, क्या कोई लड़की उन्हें एकदम भुला सकती है? यह तो खून का अटूट संबंध है. इसे भुलाना संभव नहीं,’ मैं भावावेश में कह गई.

‘बहू, हमारे भी मांबाप थे. हमारे भी खून के संबंध थे. पर एक बार इस घर की चौखट के अंदर कदम रखा नहीं कि एक झटके से मायके को भूल गए. यह तो जग की रीति है. शादी होती है. सात फेरों के साथ लड़की का नया रिश्ता जुड़ता है. पुराना रिश्ता टूट जाता है. ऐसा ही होता आया है.’

‘वह तो ठीक है, मांजी. लड़की का कर्तव्य है कि वह सासससुर, पति, बच्चों की सेवा करे पर इस का यह अर्थ नहीं कि वह अपने जन्मदाताओं के सुखदुख में भी काम न आए. यह कैसी एकांगी विचारधारा है?’

‘जो शादीशुदा लड़कियां हर समय मायके वालों के चक्कर में पड़ी रहती हैं वे ससुराल में किसी को सुखी नहीं रख सकतीं. 2 घरों की एकसाथ देखभाल असंभव है.’

‘मांजी, क्या दोनों के बीच कोई संतुलन…’

‘मीना, तुम बहुत बहस करती हो, मानती हूं, तुम पढ़ीलिखी हो पर इस का यह मतलब नहीं कि…’

‘मैं बहस नहीं कर रही हूं. मैं 1 हफ्ते के लिए नासिक जाने की आज्ञा मांग रही हूं.’

‘मैं कुछ नहीं जानती. तुम जानो और तुम्हारा पति.’

मांजी का उखड़ा स्वर, फूला मुंह और मटकती हुई गरदन क्या मेरी प्रार्थना की अस्वीकृति के साक्षी नहीं थे? मेरा मन बुझ गया. क्या यह क्रूरता और हृदयहीनता नहीं? अपने स्वार्थ के लिए संबंधियों के सुखदुख में भागीदारी न करना क्या उचित है?

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उद्विग्न और निराश मैं चुप लगा गई. जी में तो आया कि मांजी के इस अनुचित व्यवहार के विरुद्ध विरोध का झंडा खड़ा कर दूं.

कहूं, ‘कल को आप की बेटी का विवाह होगा. आप को कोई तकलीफ हो और आप उसे बुलाएं और उस के ससुराल वाले न भेजें तो आप को कैसा महसूस होगा, जरा सोचिए.’

मैं ने आगे बहस नहीं की. उस से कुछ नहीं होना था. केवल धैर्य, सहिष्णुता तथा उदारता के आधार पर ही हम पारिवारिक शांति स्थापित कर सकते हैं. वही मैं ने किया.

पर मेरे अंदर की घुटन को अभिव्यक्ति मिली रात में. जब हम दोनों बिस्तर पर अकेले थे तब प्रदीप ने मेरी उदासी का कारण पूछा था. मैं ने पूरा किस्सा उन्हें सुना दिया. सुन कर वह हंसे और बोले, ‘मांजी के इन विचारों का मैं स्वागत करता हूं.’

‘आप क्यों नहीं करेंगे? अरे, घुटना पेट की तरफ मुड़ता है. एक ही थैली के चट्टेबट्टे हैं आप दोनों.’

‘नहीं श्रीमतीजी, मांजी की बात में सार है. विवाह के बाद इतनी जल्दी पतिपत्नी विरह की अग्नि में जलें, कोई मां ऐसा चाहेगी.’

‘आप सोचते हैं, किसी लड़की के मांबाप. भाईबहन भूखे रहें और वह मिलन के गीत तू मेरा चांद, मैं तेरी चांदनी… गाती रहे.’

इस बार प्रदीप गंभीर हो गए. बोले, ‘भई, नाराज क्यों होती हो? अगर जाना चाहती हो तो ठीक है. कल सुबह मांजी को पटाने की कोशिश करेंगे.’

‘मैं जाऊं या न जाऊं, इस से कोई खास अंतर नहीं पड़ता पर मांजी का यह व्यवहार, संवेदनाशून्य, क्रूर और एकांगी नहीं है क्या? आप ही बताइए?’

‘हर व्यक्ति अपने हिसाब से काम करता है. मां ने जो कुछ कहा और किया वह उन का दृष्टिकोण है, जीवनदर्शन है. और यह दर्शन बनता है हमारी अतीत की अनुभूतियों से. मीना, शायद तुम्हें विश्वास न हो पर यह सच है कि मां एक ऐसे परिवार से आईं जहां लड़की का विवाह एक मुक्ति का एहसास माना जाता था और दोबारा मायके आना अभिशाप.’

‘वह क्यों?’ मैं ने उत्सुक हो कर पूछा.

‘इसलिए कि मां के मायके में 11 बहनभाई थे. 8 बहनें और 3 भाई. नानानानी एकएक लड़की की शादी करते और दोबारा उस का नाम नहीं लेते. मां भी इस घर में आईं. भीड़, अभाव और विपन्नता से शांति, समृद्धि और सुख के माहौल में एक बार इस घर में आईं तो फिर मुड़ कर उस घर को नहीं देखा. बस, शादीब्याह के मौके पर गईं या न गईं.’

‘वह तो ठीक है, पर…’

‘सच कहूं,’ प्रदीप ने कहा, ‘हम लोग ननिहाल जाते तो वहां पर मां का कोई खास स्वागत नहीं होता. हम लोग एक तरह से उन पर बोझ बन जाते. ज्यादा काम, मेहमानदारी पर खर्चा और लौटने पर बेटी और बच्चों को उपहार देने का संकट.’

‘ठीक है, प्रदीप, मैं मांजी की मनोदशा समझ गई. पर वह यह क्यों नहीं सोचतीं कि उन की और मेरी स्थिति में आकाशपाताल का अंतर है. उन के मायके में संकट में घर का काम करने के लिए और बहनें थीं. मैं अकेली हूं. उन को पीहर में एक बोझ समझा जाता था पर मेरा मेरे घर में अभूतपूर्व स्वागत होता है, आप स्वयं देख चुके हैं.’

‘ठीक है. मैं कल सुबह मांजी से बात करूंगा,’ कह कर प्रदीप ने मुझे अपने अंक में समेट लिया. शारीरिक उत्तेजना और रासरंग की बाढ़ में मेरे अंतर की समस्त कड़वाहट डूब गई.

अगले दिन सुबह मैं तो रसोईघर में नाश्ता बनाने में व्यस्त थी और मांबेटा बाहर मेरे नासिक जाने के प्रश्न पर ऐसी गंभीरता से विचार कर रहे थे जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ में निरस्त्रीकरण पर बहस.

मैं नाश्ता ले कर बाहर आई तो महसूस किया जैसे प्रदीप विजय के द्वार पर पहुंच गए हैं. मां उन से कह रही थीं, ‘बीवी का गुलाम हो गया है. उसी के स्वर में बोलने लगा है.’

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मुझे देख, उन्होंने बनावटी गुस्से से कहा, ‘बहू, तू 2 हफ्ते के लिए नासिक चली जाएगी तो इस घर और प्रदीप की देखभाल कौन करेगा?’

‘आप जो हैं, मांजी,’ मेरे मुंह से अनायास निकल गया.

मैं नासिक गई. पहुंच कर देखा, मां पीली पड़ गई थीं. एकदम अशक्त और असहाय. पिताजी कैसे उलझे और अस्तव्यस्त से लग रहे थे…और भाई क्लांत. मुझे देखते ही तीनों के चेहरे खिल गए. एक मुक्ति, निश्चिंतता का भाव उन के मुख पर उभर आया.

अलविदा 2019 : जन-जन को लाभान्वित करने वाली कुछ अनूठी योजना

केंद्र सरकार की कई कारगर योजना जहां एक तरफ जन -जन तक पहुंच रही है. वही विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा चलाई जाने वाली कई कारगर योजना है. जो अपने क्षेत्र की अनूठी योजना होने के साथ साथ जन-जन को लाभान्वित कर रही है. तो आइये जानते है 2019 में लागू हुए इन योजनाओं के बारे में …

 * वन फैमिली वन जौब:- सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने सिक्किम के युवाओं के लिए “वन फैमिली वन जौब” की घोषणा की है. इस योजना के अनुसार सिक्किम के प्रत्येक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को रोज़गार दिया जायेगा. एक रोज़गार मेले के दौरान मुख्यमंत्री चामलिंग ने 12,000 बेरोजगार युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे. इस योजना के अनुसार जिस परिवार लोग सरकारी नौकरी के योग्य हैं और उनके पास सरकारी नौकरी नहीं है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. इस प्रकार के कर्मचारियों को 5 वर्ष बाद नियमित किया जायेगा.  सिक्किम इस प्रकार की योजना शुरू करने वाला देश का पहला राज्य है..

* अरुंधती योजना :- असम सरकार इस योजना के तहत विवाह के समय लड़कियों को 1 तोला सोना देगी . इस योजना का विवाह उन सभी समुदायों की लड़कियों को होगा जिनमे विवाह के समय सोना देने का रिवाज़ है. अरुंधती योजना के लिए असम सरकार ने 300 करोड़ रुपये आबंटित किये हैं. इस योजना का लाभ उठाने के लिए विवाह का पंजीकरण विशेष विवाह (असम) नियम, 1954 के तहत करवाना होगा. यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ही है, जिनकी वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कमक है.

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* मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना :- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘ मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ लांच की. इस योजना के अंतर्गत,सरकार बेटी के पैदा होने के बाद उसकी पढ़ाई का खर्च उठाएगी .कन्या सुमंगला योजना के लिए सरकार का 1200 करोड़ का खर्चा होगा .

* टिक्की मौसी :- बच्चों तथा महिलाओं में पोषण के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार के महिला व बाल विकास विभाग ने यूनिसेफ के साथ मिलकर ‘टिक्की मौसी’ नामक शुभंकर का अनावरण किया है.  इस शुभंकर के द्वारा ओडिशा के प्रत्येक घर तक पोषण के महत्व की जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी. यह शुभंकर महिलाओं व बच्चों के लिए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी प्रदान करेगी.

* मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना :- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हाल ही में ‘मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना’ लांच की, इस योजना के तहत राशन कार्ड धारकों को प्रति माह दो प्रकार की  दाल सस्ती दरों पर प्रदान की जाएगी. राज्य सरकार 15 रुपये की दर से दालें उपलब्ध करवाएगी. इससे लोगों की प्रोटीन की आवश्यकता पूरी होगी. इस योजना से उत्तराखंड के 23.32 लाख राशन कार्ड धारकों को फायदा मिलेगा.

* फिट इंडिया मूवमेंट :- श्री नरेन्द्र मोदी ने  राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर “फिट इंडिया मूवमेंट” 29 अगस्त, 2019 को लांच किया. फिट इंडिया मूवमेंट का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करना है तथा उन्हें व्यायाम इत्यादि करने के लिए प्रेरित करना है.  इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल अति आवश्यक है, इससे देश वासियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा.  कम शारीरिक सक्रियता तथा जीवनशैली के कारण रक्तचाप तथा मधुमेह जैसे कई रोग हो सकते हैं, इन रोगों से जीवनशैली में बदलाव करके तथा शारीरिक क्रिया व व्यायाम द्वारा बचा जा सकता है.

* वाक टू वर्क वेडनेसडेज’ :- मेघालय के मुख्यमंत्री कौनराड के. संगमा ने राज्य में वाक टू वर्क ऑन वेडनेसडेजनमक पहल शुरू की है, यह राष्ट्रव्यापी फिट इंडिया मूवमेंट का हिस्सा है. इस पहल के कई लाभ है, इससे इंधन की बचत होगी, कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आयेगी, शहर में ट्रैफिक भी कम होगा तथा इसके अलावा यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक सिद्ध होगा.

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* महात्मा गांधी सरबत बीमा योजना :- पंजाब सरकार की यह स्वास्थ्य बीमा योजना है. पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के साथ अपनी योजना को जोड़ दिया है. इस योजना को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जन्म वर्षगांठ पर लांच किया है.

* विलेज वालंटियर सिस्टम :- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने सरकार का फ्लैगशिप कार्यक्रम “विलेज वालंटियर सिस्टम” लांच किया है. इसका उद्देश्य लोगों के घर तक सरकारी सेवा उपलब्ध करवाना है. इस सन्दर्भ में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने विजयवाड़ा  में घोषणा की.

* 75% नौकरियां स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित :- आंध्र प्रदेश भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसे सभी निजी उद्योगों में 75% नौकरियां स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित की हैं. राज्य विधानसभा ने हाल ही में Andhra Pradesh Employment of Local Candidates in Industries/Factories Act of 2019 पारित किया.

* चूल्हा :- महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं को धुंए से मुक्त रसोई का माहौल प्रदान करने के लिए “चूल्हा” नामक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया है. इस योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलेगा जिन्हें उज्ज्वला योजना के तहत कवर नहीं किया गया है. इस योजना का क्रियान्वयन नक्सल प्रभावित इलाकों तथा उन जिलों में लागू किया जायेगा जहाँ पर किसानों की आत्महत्या दर अधिक है.

* आपकी बेटी :- राजस्थान सरकार ने हाल ही में “आपकी बेटी” योजना के तहत स्कूली छात्राओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ा दिया है. इस योजना के तहत जो बालिकाएं निर्धनता रेखा के नीचे हैं तथा उनकी माता अथवा पिता या दोनों की मौत हो चुकी है, उन्हें राज्य में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.

* अरोमा मिशन :- मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने राज्य के री-भोई जिले के बिरवा में अरोमा मिशन लांच किया, इस मिशन की लागत लगभग 18 करोड़ रुपये है. इसका उद्देश्य किसानों की आजीविका की स्थिति में सुधार करना है तथा राज्य में रोज़गार के अवसरों का सृजन करना है.

* आँचल अमृत योजना :- उत्तराखंड सरकार ने आंगनवाड़ी केन्द्रों में दूध उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री आँचल अमृत योजना लांच की है. मुख्यमंत्री आँचल अमृत योजना के तहत उत्तराखंड सरकार राज्य में 20,000 आंगनवाड़ी केन्द्रों में सप्ताह में दो बार 2.5 बच्चों के लिए 100 ml दूध उपलब्ध करवाएगी.

*कृषक बन्धु योजना :- पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में कृषक बन्धु योजना की घोषणा की, इसका उद्देश्य राज्य में किसानों की समस्याओं का समाधान करना है. इस योजना के तहत पंजीकरण करवाने वाले लाभार्थियों को दो प्रकार के लाभ मिलेंगे.इस योजना के तहत किसानों को फसल बीमा मिलेगा. राज्य सरकार फसल बीमा के प्रीमियम का भुगतान करेगी. दो किस्तों में 5,000 रुपये प्रति एकड़ एक खरीफ में और दूसरा रबी सीजन में. 18 से 60 वर्ष के बीच के किसान की मृत्यु के मामले में 2 लाख रुपये का मुआवजा. आत्महत्या के कारण क्षतिपूर्ति भी किसान की मृत्यु को कवर किया जाएगा.

* युवाश्री अर्पण योजना  :- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में युवाश्री योजना II अथवा युवाश्री अर्पण योजना को लांच किया, इसका उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन देना है. युवाश्री अर्पण योजना के तहत राज्य के 50 हज़ार ITI तथा बहुतकनीकी संस्थानों के पास आउट्स को अपना व्यापार शुरू करने के लिए राज्य के सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग विभाग द्वारा 1 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी.

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* कालिया :- ओडिशा सरकार ने “कालिया छात्रवृत्ति योजना” लांच की. इस योजना का लाभ “कालिया” (KALIA – Krishak Assistance for Livelihood and Income Augmentation) योजना से लाभान्वित होने वाले किसानों के बच्चों को होगा. इस छात्रवृत्ति योजना के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को प्रोफेशनल शिक्षा निशुल्क उपलब्ध करवाई जायेगी. कृषकों के जिन बच्चों ने सरकारी प्रोफेशनल महाविद्यालयों में प्रवेश लिया है, वे मेरिट के आधार पर इस योजना से लाभान्वित हो सकते हैं.

अमा घरे LED :- ओडिशा सरकार ने राज्य के 95 लाख परिवारों के लिए निशुल्क LED बल्ब प्रदान करने के लिए “अमा घरे LED” योजना शुरू की है.

* जीवन संपर्क परियोजना :- जीवन संपर्क परियोजना को यूनिसेफ की सहायता से लागू किया जायेगा. इस परियोजना के माध्यम से ओडिशा के जनजातीय लोगों को राज्य सरकार द्वारा बच्चों तथा महिलाओं के कल्याण के लिए चलायी जा रही योजनाओं से अवगत करवाया जायेगा. इस परियोजना के फोकस क्षेत्र हैं : कौशल विकास, समुदायों का सशक्तिकरण, समुहों के बीच आपसी सहयोग.

* सीता राम सिंचाई परियोजना :- केन्द्रीय पर्यावरण,वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाल ही में तेलंगाना के सीता राम सिंचाई परियोजना को मंज़ूरी दे दी है. इस परियोजना को तीन वर्षों में पूरा कर लिया जायेगा.  इस परियोजना का उद्देश्य गोदावरी नदी के जल को डाइवर्ट करके तेलंगाना के भाद्रदारी कोठागुदेम, खम्मम तथा महबूबाबाद जिले के 2.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करवाना है.  इस परियोजना से गाँवों व कस्बों के सिंचाई आवश्यकताओं को पूर्ण किया जा सकेगा.

* चैंपियंस कैंपेन :- दिल्ली सरकार ने डेंगू की रोकथाम के लिए ‘चैंपियंस कैंपेन’ लांच किया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लोगों से आग्रह किया है कि अपने दोस्त को अपने घर में मच्छर के लार्वा इत्यादि का निरीक्षण करने के लिए प्रेरित करें. इस अभियान के तहत व्यक्ति को कम से कम अपने 10 दोस्तों को यह कार्य करने के लिए प्रेरित करना है.

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने 1 सितम्बर से 10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनटहर रविवार, डेंगू पर वार नामक पहल शुरू किया था . इस पहल का उद्देश्य डेंगू तथा चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए कार्य करना है. इस कार्यक्रम के तहत दिल्ली सरकार ने सभी लोगो को प्रत्येक रविवार को सुबह 10 बजे 10 मिनट तक अपने घर में तथा आस पास रुके हुए पानी के स्त्रोत ढूँढने का आग्रह किया है, क्योंकि डेंगू के मच्छर रुके हुए  साफ पानी में पनपते हैं.

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प्रेम ऋण : भाग 1

सगी बहनें होते हुए भी पारुल और अंशुल के रंगरूप के अलावा विचारों में भी कहीं एकरूपता नहीं थी. खूबसूरत, मनमौजी, पैसे की चाह रखने वाली अंशुल पारुल को भी अपनी तरह जिंदगी जीने की राह पर चलाना चाहती थी, लेकिन पारुल को क्या यह मंजूर हुआ?

‘‘दी  दी, आप की बात पूरी हो गई हो तो कुछ देर के लिए फोन मुझे दे दो. मुझे तानिया से बात करनी है,’’ घड़ी में 10 बजते देख कर पारुल धैर्य खो बैठी.

‘‘लो, पकड़ो फोन, तुम्हें हमेशा आवश्यक फोन करने होते हैं. यह भी नहीं सोचा कि प्रशांत क्या सोचेंगे,’’ कुछ देर बाद अंशुल पारुल की ओर फोन फेंकते हुए तीखे स्वर में बोली.

‘‘कौन क्या सोचेगा, इस की चिंता तुम कब से करने लगीं, दीदी? वैसे मैं याद दिला दूं कि कल मेरा पहला पेपर है. तानिया को बताना है कि कल मुझे अपने स्कूटर पर साथ ले जाए,’’ पारुल फोन उठा कर तानिया का नंबर मिलाने लगी थी.

‘‘लो, मेरी बात हो गई, अब चाहे जितनी देर बातें करो, मुझे फर्क नहीं पड़ता,’’ पारुल पुन: अपनी पुस्तक में खो गई.

‘‘पर मुझे फर्क पड़ता है. मैं मम्मी से कह कर नया मोबाइल खरीदूंगी,’’ अंशुल ने फोन लौटाते हुए कहा और कमरे से बाहर चली गई.

पारुल किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहती थी. फिर भी अंशुल के क्रोध का कारण उस की समझ में नहीं आ रहा था. पिछले आधे घंटे से वह प्रशांत से बातें कर रही थी. उसे तानिया को फोन नहीं करना होता तो वह कभी उन की बातचीत में खलल नहीं डालती.

अंशुल ने कमरे से बाहर आ कर मां को पुकारा तो पाया कि वह उस के विवाह समारोह के हिसाबकिताब में लगी हुई थीं.

‘‘मां, मुझे नया फोन चाहिए. मैं अब अपना फोन पारुल और नवीन को नहीं दे सकती,’’ वह अपनी मां सुजाता के पास जा कर बैठ गई थी.

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‘‘क्या हुआ? आज फिर झगड़ने लगे तुम लोग? तेरे सामने फोन क्या चीज है. फिर भी बेटी, 1 माह भी नहीं बचा है तेरे विवाह में. क्यों व्यर्थ लड़तेझगड़ते रहते हो तुम लोग? बाद में एकदूसरे की सूरत देखने को तरस जाओगे,’’ सुजाता ने अंशुल को शांत करने की कोशिश की.

‘‘मां, आप तो मेरा स्वभाव भली प्रकार जानती हैं. मैं तो अपनी ओर से शांत रहने का प्रयत्न करती हूं पर पारुल तो लड़ने के बहाने ढूंढ़ती रहती है,’’ अंशुल रोंआसी हो उठी.

‘‘ऐसा क्या हो गया, अंशुल? मैं तेरी आंखों में आंसू नहीं देख सकती, बेटी.’’

‘‘मां, जब भी देखो पारुल मुझे ताने देती रहती है. मेरा प्रशांत से फोन पर बातें करना तो वह सहन ही नहीं कर सकती. आज प्रशांत ने कह ही दिया कि वह मुझे नया फोन खरीद कर दे देंगे.’’

‘‘क्या कह रही है, अंशुल. लड़के वालों के समाने हमारी नाक कटवाएगी क्या? पारुल, इधर आओ,’’ उन्होंने क्रोधित स्वर में पारुल को पुकारा.

‘‘क्या है, मां? मेरी कल परीक्षा है, आप कृपया मुझे अकेला छोड़ दें,’’ पारुल झुंझला गई थी.

‘‘इतनी ही व्यस्त हो तो बारबार फोन मांग कर अंशुल को क्यों सता रही हो,’’ सुजाताजी क्रोधित स्वर में बोलीं.

‘‘मां, मुझे तानिया को जरूरी फोन करना था. मेरा और उस का परीक्षा केंद्र एक ही स्थान पर है. वह जाते समय मुझे अपने स्कूटर पर ले जाएगी,’’ पारुल ने सफाई दी.

‘‘मैं सब समझती हूं, अंशुल को अच्छा घरवर मिला है यह तुम से सहन नहीं हो रहा. ईर्ष्या से जलभुन गई हो तुम.’’

‘‘मां, यही बात आप के स्थान पर किसी और ने कही होती तो पता नहीं मैं क्या कर बैठती. फिर भी मैं एक बात साफ कर देना चाहती हूं कि मुझे प्रशांत तनिक भी पसंद नहीं आए. पता नहीं अंशुल दीदी को वह कैसे पसंद आ गए.’’

‘‘यह तुम नहीं, तुम्हारी ईर्ष्या बोल रही है. यह तो अंशुल का अप्रतिम सौंदर्य है जिस पर वह रीझ गए, वरना हमारी क्या औकात थी जो उस ओर आंख उठा कर भी देखते. तुम्हें तो वैसा सौंदर्य भी नहीं मिला है. यह साधारण रूपरंग ले कर आई हो तो घरवर भी साधारण ही मिलेगा, शायद इसी विचार ने तुम्हें परेशान कर रखा है.’’

मां का तर्क सुन कर पारुल चित्रलिखित सी खड़ी रह गई थी कि एक मां अपनी बेटी से कैसे कह सकी ये सारी बातें. वह उन की आशा के अनुरूप अनुपम सुंदरी न सही पर है तो वह उन्हीं का अंश, उसे इस प्रकार आहत करने की बात वह सोच भी कैसे सकीं.

किसी प्रकार लड़खड़ाती हुई वह अपने कमरे में लौटी. वह अपनी ही बहन से ईर्ष्या करेगी यह अंशुल और मां ने सोच भी कैसे लिया. मेज पर सिर टिका कर कुछ क्षण बैठी रही वह. न चाहते हुए भी आंखों में आंसू आ गए. तभी अपने कंधे पर किसी का स्पर्श पा कर चौंक उठी वह.

‘‘नवीन भैया? कब आए आप? आजकल तो आप प्रतिदिन देर से आते हैं. रहते कहां हैं आप?’’

‘‘मैं, अशोक और राजन एकसाथ पढ़ाई करते हैं अशोक के यहां. वैसे भी घर में इतना तनाव रहता है कि घर में घुसने के लिए बड़ा साहस जुटाना पड़ता है,’’ नवीन ने एक सांस में ही पारुल के हर प्रश्न का उत्तर दे दिया.

‘‘भूख लगी होगी, कुछ खाने को लाऊं क्या?’’

‘‘नहीं, मैं खुद ले लूंगा. तुम्हारी कल परीक्षा है, पढ़ाई करो. पर पहले मेरी एक बात सुन लो. तुम्हारे पास अद्भुत सौंदर्य न सही, पर जो है वह रेगिस्तान की तपती रेत में भी ठंडी हवा के स्पर्श जैसा आभास दे जाता है. इन सब जलीकटी बातों को एक कान से सुनो और दूसरे से निकाल दो और सबकुछ भूल कर परीक्षा की तैयारी में जुट जाओ,’’ पारुल के सिर पर हाथ फेर कर नवीन कमरे से बाहर निकल गया.

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अगले दिन परीक्षा के बाद पारुल तानिया के साथ लौट रही थी तो अंशुल को अशीम के साथ उस की बाइक पर आते देख हैरान रह गई.

‘‘अशीम के पीछे अंशुल ही बैठी थी न,’’ तानिया ने पूछ लिया.

‘‘हां, शायद…’’

‘‘शायद क्या, शतप्रतिशत वही थी. जीवन का आनंद उठाना तो कोई तुम्हारी बहन अंशुल से सीखे. एक से विवाह कर रही है तो दूसरे से प्रेम की पींगें बढ़ा रही है. क्या किस्मत है भौंरे उस के चारों ओर मंडराते ही रहते हैं,’’ तानिया हंसी थी.

‘‘तानिया, वह मेरी बहन है. उस के बारे में यह अनर्गल प्रलाप मैं सह नहीं सकती.’’

‘‘तो फिर समझाती क्यों नहीं अपनी बहन को? कहीं लड़के वालों को भनक लग गई तो पता नहीं क्या कर बैठें,’’ तानिया सपाट स्वर में बोल पारुल को उस के घर पर छोड़ कर फुर्र हो गई थी.

पारुल घर में घुसी तो विचारमग्न थी. तानिया उस की घनिष्ठ मित्र है अत: अंशुल के बारे में अपनी बात उस के मुंह पर कहने का साहस जुटा सकी. पर उस के जैसे न जाने कितने यही बातें पीठ पीछे करते होंगे. चिंता की रेखाएं उस के माथे पर उभर आईं.

सुजाता बैठक में श्रीमती प्रसाद के साथ बातचीत में व्यस्त थीं.

‘‘कैसा हुआ पेपर?’’ उन्होंने पारुल को देखते ही पूछा.

‘‘ठीक ही हुआ, मां,’’ पारुल अनमने स्वर में बोली.

‘‘ठीक मतलब? अच्छा नहीं हुआ क्या?’’

‘‘बहुत अच्छा हुआ, मां. आप तो व्यर्थ ही चिंता करने लगती हैं.’’

‘‘यह मेरी छोटी बेटी है पारुल. इसे भी याद रखिएगा. अंशुल के बाद इस का भी विवाह करना है,’’ सुजाता ने श्रीमती प्रसाद से कहा.

‘‘मैं जानती हूं,’’ श्रीमती प्रसाद मुसकराई थीं.

‘‘पारुल, 2 कप चाय तो बना ला बेटी,’’ सुजाताजी ने आदेश दिया था.

‘‘हां, यह ठीक है. एक बात बताऊं सुजाता?’’ श्रीमती प्रसाद रहस्यमय अंदाज में बोली थीं.

‘‘हां, बताइए न.’’

‘‘मैं तो लड़की के हाथ की चाय पी कर ही उस के गुणों को परख लेती हूं.’’

‘‘क्यों नहीं, यदि कोई लड़की चाय भी ठीक से न बना सके तो और कोई कार्य ठीक से करने की क्षमता उस में क्या ही होगी,’’ सुजाताजी ने उन की हां में हां मिलाई थी.

‘ओफ, जाने कहां से चले आते हैं यह बिचौलिए. स्वयं को बड़ा गुणों का पारखी समझते हैं,’ पारुल चाय देने के बाद अपने कक्ष में जा कर बड़बड़ा रही थी.

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‘‘माना कि लड़के वालों की कोई मांग नहीं है पर आप को तो उन के स्तर के अनुरूप ही विवाह करना पड़ेगा. अंशुल के भविष्य का प्रश्न है यह तो,’’ उधर श्रीमती प्रसाद सुजाताजी से कह रही थीं.

‘‘कैसी बातें करती हैं आप? हम क्या अपनी तरफ से कोई कोरकसर छोड़ेंगे? आप ने हर वस्तु और व्यक्ति के बारे में सूचना दे ही दी है. सारा कार्य आप की इच्छानुसार ही होगा,’’ सुजाताजी ने आश्वासन दिया.

श्रीमती प्रसाद कुछ देर में चली गई थीं. केवल सुजाताजी अकेली बैठी रह गईं.

10 टिप्स : ऐसे पाएं ब्राउन स्पाट से राहत

ब्राउन स्पाट का चेहरे पर उभरना किसी भी महिला की खूबसूरती को प्रभावित कर सकता है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आइए हम आपको बताते हैं कुछ घरेलू उपाय और स्किन केयर टिप्स, जिससे आप चेहरे के ब्राउन स्पाट और काले धब्बे से प्राकृतिक रूप से छुटकारा पा सकती हैं.

1 नींबू का रस

चेहरे पर होने वाले ब्राउन स्पाट के लिए आप नींबू के रस का इस्तेमाल कर सकती हैं. दरअसल नींबू का रस ब्राउन एज स्पाट, झाई और फ्रेकल से निजात दिलाने का बेहद असरकारी उपाय है. आप रूई से इसे ब्राउन स्पाट पर लगाएं और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. इससे डार्क स्पाट धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा. साथ ही ब्लैक स्किन का रंग भी प्राकृतिक रूप से हल्का होने लगेगा.

2 टमाटर का रस

नींबू के रस और टमाटर के रस का मिश्रण हर दिन लगाने से भी चेहरे के दाग-धब्बे, डार्क स्किन, फ्रेकल और डार्क पिग्मेंटेशन से छुटकारा मिलता है. चेहरे के ब्राउन स्पाट को हटाने में यह काफी प्रभावी तरीके से काम करता है.

3 प्‍याज का रस

एक चम्मच प्याज के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर दाग-धब्बों पर 15 मिनट तक लगाएं. ब्राउन एज स्पाट से जल्दी निजात दिलाने में यह एक बेहतरीन घरेलू उपाय है.

4 दूध और क्रीम

चेहरे के ब्राउन स्पाट से छुटकारा पाने के लिए आप फटे हुए दूध, क्रीम और शहद का एक मास्क तैयार कर सकती हैं. इसे चेहरे, गर्दन, हाथ और पैर में लगाएं. यह डार्क स्पाट और ब्राउन एज स्पाट से प्राकृतिक रूप से निजात दिलाने का एक प्रभावी जरिया है.

5 संतरे का रस

अजवायन के रस के साथ बराबर मात्रा में नींबू के रस, करंट (लाल व काले रंग की बैरी) के रस और संतरे के रस को मिला लें. अब इस मिश्रण को चेहरे और गले पर मौजूद ब्राउन स्पाट पर लगाएं और 30 मिनट बाद चेहरा धो लें. ब्राउन स्पाट, एज स्पाट और फ्रेकल से छुटाकारा पाने का यह एक अच्छा घरेलू नुस्खा है.

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6 पीला सरसों

डार्क स्पाट से छुटकारा पाने का एक और प्रभावी तरीका यह है कि चेहरे पर पीले सरसों का लेप लगाएं. इसके लिए पीले सरसों को पीस लें और उसे दूध में मिलाकर फेसियल मास्क बनाएं. अब इसे चेहरे के ब्राउन स्पाट पर लगाएं और इसे 20 मिनट तक रहने दें.

7 चंदन की लकड़ी

चेहरे, गले और हाथों के ब्राउन स्पाट से छुटकारा पाने के लिए घरेलू स्क्रब भी काफी फायदेमंद होता है. फेसियल स्क्रब बनाने के लिए लाल और सफेद सैंडलवुड (चंदन की लकड़ी) का एक कप पाउडर, आधा कप ओट्मील और थोड़े से दूध व गुलाब जल को आपस में मिला लें. सप्ताह में तीन बार उस जगह पर स्क्रब करें, जहां पर स्पाट है. धीरे-धीरे चेहरे, गले और हाथ का डार्क व ब्राउन स्पाट हल्का पड़ने लगेगा.

.8 आलू

कच्चे आलू का रस भी चेहरे के डार्क स्पाट को प्राकृतिक तौर पर खत्म करता है. आलू के रस को प्रभावित जगह पर लगाएं और 15-20 के लिए छोड़ दें.

9 एलोवेरा

अपने चेहरे के दाग-धब्बों को हटाने के लिए आप एलोवेरा की भी मदद ले सकती हैं. ताजे एलोवेरा के रस को दिन में दो बार डार्क स्पाट पर लगाएं. यह सिलसिला तब तक जारी रखें जब तक आपको परिणाम दिखाई न देने लगे. ब्राउन स्पाट को हटाने में यह घरेलू नुस्खा काफी कारगर है.

एक चौथाई कप दही में एक-एक चम्मच नींबू का रस, एलोवेरा का रस और सिरका मिलाकर मिश्रण तैयार करें. इसे चेहरे के ब्राउन स्पाट पर लगाएं और 30 मिनट बाद चेहरे को धो लें. इससे चेहरे के ब्राउन स्पाट और त्वचा के सन स्पाट धीरे-धीरे हल्के पड़ने लगेंगे.

10 विटामिन ई तेल

डार्क स्पाट से निजात पाने के लिए आप कुछ विटामिन ई तेल को भी चेहरे पर लगा सकते हैं. डार्क स्पाट के रंग को हल्का करने के लिए विटामिन ई तेल से मसाज करें. यह नेचुरल ट्रीटमेंट चेहरे के कील-मुहांसे, एज स्पाट, लीवर स्पाट और ब्राउन स्पाट को हटाने में काफी उपयोगी है.

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अलविदा 2019: दुनिया से रुखसत हुए राजनीति के ये 8 बड़े नाम

“वक्त रहता नहीं कहीं टिक कर, इसकी आदत भी आदमी सी है. “गीतकार गुलजार की गजल की यह पंक्तियां  2019 पर बहुत सटीक बैठती है. इस साल कई राजनेता, पूर्व मंत्री  एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री  हम लोगों के बीच से सदा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गये.  तो चलिए याद करते हैं, उन सभी शक्सियत को एक साथ…

* अरुण जेटली : देश के पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता नेता अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त 2019 को हुआ. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. अरुण जेटली का निधन हो गया है. खराब स्वास्थ्य के कारण अरुण जेटली ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कोई पद न संभालने की इच्छा जाहिर करते हुए एक तरह से राजनीति से संन्यास ले लिया था. अरुण जेटली दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ डीडीसीए के अध्यक्ष भी रहे. सरकार ने यह हल में ही घोषणा किया है कि  दिल्ली का फिरोजशाह कोटला स्टेडियम अब पूर्व वित्त मंत्री  के नाम से जाना जाएगा.

* सुषमा स्वराज :  भाजपा की नेत्री सुषमा स्वराज जिनके दमदार भाषण का हर कोई प्रशंसक था. 6 अगस्त 2019 को हमेशा के लिए खामोश हो गई.   कुशल वक्ता  पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हार्ट अटैक से हुआ था . विदेश मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल आज भी हर कोई याद करता है. उन्होंने विदेशों में फंसे कई ऐसे लोगों को स्वदेश लाया, जिन्होंने सोशल मीडिया पर उनसे अपील की थी.

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* मनोहर पर्रिकर : अपनी सादगी और ईमानदारी की वजह से लोगों के पसंदीदा बने, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर इस साल सबको अलविदा दिया .  लंबी बीमारी के बाद मनोहर पर्रिकर का 17 मार्च 2019 को निधन हो गया. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह रक्षा मंत्री भी रहे थे.मुख्यमंत्री रहते हुए भी गोवा की जनता के बीच ऐसे जाते थे, जैसे उनसे पुरानी पहचान है.

* शीला दीक्षित – दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित  20 जुलाई 2019 को 81 वर्ष की आयु में हमेशा के लिए चिर निंदा में सो गई . शीला दीक्षित ने लगातार 15 साल (1998 से 2013 ) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. वह पहली बार साल 1984 में उत्तर प्रदेश के कन्नौज से सांसद चुनी गईं. बाद में वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुई.

* राम जेठमलानी : अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कानून, न्‍याय और कंपनी अफेयर मंत्री रहे थे राम जेठमलानी का निधन 8 सितंबर 2019 में हो गया . देश के मशहूर वकील जेठमलानी अपनी बेबाक राय के कारण जेठमलानी हमेशा सूर्खियों में रहते थे.

* जगन्नाथ मिश्रा – बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा का 19,अगस्त  2019  को निधन हो गया. पिछले कई दिनों से जगन्नाथ मिश्रा का दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. 82 साल के जगन्नाथ मिश्रा तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे.

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* बाबू लाल गौर :  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल गौर का 21 अगस्त 2019 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ. वह वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और कुछ समय से अस्पताल में भर्ती थे.

* कैलाश जोशी : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का 24,नवंबर  2019 सुबह निधन हो गया. जोशी करीब तीन साल से बीमार थे, उन्होंने भोपाल के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली.

अलविदा 2019 : जानें, राजनीतिक गलियारों में क्यों खास रहा यह साल

राजनीतिक गलियारों में यह साल कुछ खास रहा. लोकसभा से विधानसभा तक तस्वीर बदले दिखा, वही सरकार ने अपने फैसले से चौंकाया  तो कोर्ट ने वर्षो का विवाद पर फैसला सुनाया. आइए जानते हैं, राजनीति के क्षेत्र में यह साल क्यों खास रहा ?

* 10 प्रतिशत आरक्षण : साल के शुरुआत में सामान्य जाति के लोगों के लिए आय के आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रदान कर एक नया अध्याय को भारतीय सविधान में जोड़ा गया

* चुनाव परिणाम के बाद बहुत कुछ बदला :- आम चुनाव के परिणामों के बाद 303 सीटों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. वही देश पर पांच दशक से अधिक शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस महज 52 सीटें ही जीत पायी.  ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी लोकसभा की तीन सीटों और अन्नाद्रमुक पार्टी एक सीट पर सिमट गयी. वही राज्य में द्रमुक ने शानदार प्रदर्शन किया. इस बार 23 सीटें हासिल किया, आंध्रप्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी 16 सीट मिली . बीजू जनता दल (बीजद) के इस बार 12 सीटों पर संतोष करना पड़ा . देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मायावती की बसपा को 10 सीट मिली . वही बिहार में तक भाजपा के साथ जुड़े  नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने 16 जीती. महाराष्ट्र में शिव सेना को इस बार भी 18 सीटें मिली.

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* संसद का नया रूप देखने को मिला :- साल के मध्य में देश में आम चुनाव समाप्त हुआ और 17 वीं लोकसभा का गठन हुआ. एक बार फिर सत्ता की चाबी भाजपा के पास आई और फिर मोदी जी ही प्रधानमंत्री बने.  पहली बार  नव निर्वाचित संसद में बहुत पुराना कुछ बदला दिखा. कई दिग्गज नेता नहीं दिखें. कई दशक से जिनकी आवाज संसद में गूंजती थी वही नहीं देखे. इनमें  बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे, ज्योतिरादित्य सिंधिया है . पहली लोकसभा में 5 फीसदी महिलाएं थीं, जो अब बढ़कर 14 फीसदी हो गयी हैं. इस बार 78 महिलाएं चुनकर संसद पहुंची हैं. 16वीं संसद में 62 महिलाओं को लोगों ने संसद पहुंचाया था.

* विधान सभा चुनाव में सिकत :-  लोकसभा चुनाव में आपार सफलता के उपरांत तीन राज्यों में हुए विधान सभा का चुनाव केंद्रीय सत्ता के लिए कुछ खास नहीं रहा.  महाराष्ट्र और झारखण्ड की सत्ता  हाथ से खिसक गया , वही हरियाणा में भी बैसाखी के सहारे सत्ता बची हुई है .

* तीन तलाक के खिलाफ बिल  – मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019′ को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया गया. राज्यसभा में बहुमत न होने के बाद भी मोदी सरकार इस कानून को अमलीजामा पहनाने में कामयाब रही.

* धारा 370  का अंत – मोदी सरकार ने अपना चुनावी घोषणा पत्र का वादा पूरा करते हुए  05 अगस्त को संसद में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में घोषण कर खुद कश्मीर से धारा 370 के हटने का ऐलान किया. साथ ही राज्य पुनर्गठन बिल ला कर  कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बाटने का प्रस्ताव रखा और दोनों सदन में पास कर इसे क़ानूनी रूप प्रदान कर दिया .

* मंदिर- मस्जिद विवाद पर फैसला –  नवंबर महीने में  माननीय सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि पर   रामलला के हक में फैसला सुनाया. जिसके बाद अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारियों पर चर्चा चल पड़ी .वही मुस्लिम समाज को 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए देनी की बात कही गई .

* नागरिकता बिल पर विवाद :-  साल के आखिरी महीने में सरकार को नागरिकता संशोधन बिल को लेकर कई विवाद को सहना पड़ा. दिल्ली के जामिया से लगी आग जल्दी ही पुरे देश में फ़ैल गई , कई राज्यों में विरोध हिंसा का रूप ले लिया . कई लोग मरे गए , तो कई हिरासत में ले लिये गए. इतना कुछ हुआ लेकिन सत्तापक्ष ना नरम हुई और ना की विपक्ष शांत हुआ. अभी भी यह विवाद शांति रूप से चल ही रहा है.

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* अर्थव्यवस्था  पर धीमी रफ्तार –  ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत पर रह गई. जो 6 साल का न्यूनतम स्तर है. देश के कई व्यापर क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था के धीमी होती रफ्तार को  देखा जा सकता है.  साथ ही युवा छात्रों के बीच रोजगार का प्रश्न बिकराल बनता जा रहा है. सरकार को जल्द ही कुछ बड़े सुधार गत कार्य करना होगा.

दादासाहेब फाल्के अवार्ड से नवाजे गए बौलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन

बौलीवुड के एंग्री यंग मैन, शहंशाह, बिग बी और मेगास्टार अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को राष्ट्रपति भवन में खिताब प्रदान किया. इस कार्यक्रम में 77 वर्षीय अमिताभ बच्चन के साथ उनकी पत्नी जया बच्चन और बेटा अभिषेक बच्चन भी मौजूद थे.

आपको बता दें कि 25 सितंबर को अमिताभ बच्चन को यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी. घोषणा के दो महीने बाद 23 दिसंबर को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए गए. तबियत नासाज़ होने के कारण अमिताभ बच्चन सोमवार को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो पाए थे. उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य की जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी. इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया था कि अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के सम्मान से 29 दिसंबर को नवाजा जाएगा.

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अमिताभ बच्चन ने पुरस्कार लेने के बाद सभी का शुक्रिया अदा किया और कहा कि दादा साहब फाल्के पुरस्कार को देने की शुरुआत करीब 50 साल पहले हुई और मुझे इंडस्‍ट्री में काम करते हुए भी करीब 50 साल हो गए हैं. उन्होंने कहा, ‘जब इस पुरस्कार की घोषणा हुई तो मेरे मन में एक संदेह उठा कि क्या कहीं ये संकेत है मेरे लिए कि भाई साहब आपने बहुत काम कर लिया है, अब घर बैठ के आराम कीजिए. क्योंकि अभी भी थोड़ा काम बाकी है, जिसे मुझे पूरा करना है और आगे भी कुछ ऐसी संभावनाएं बन रही हैं जहां मुझे काम करने का अवसर मिलेगा, यदि इसकी पुष्टि हो जाए तो बड़ी कृपा होगी.’

अमिताभ बच्चन को पुरस्कार मिलने के बाद उनके बेटे अभिषेक बच्चन ने सोशल मीडिया पर एक बधाई दी और अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पिता अमिताभ बच्चन की तस्वीर साझा की. इसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा, ‘मेरे प्रेरणास्रोत. मेरे हीरो. दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने पर आपको बधाई. हम सभी को आप पर गर्व है. लव यू.’

अमिताभ ने फिल्‍मों में अपने करियर की शुरुआत 1969 में वाइस नैरेटर के रूप में की थी. उन्‍होंने मृणाल सेन की फिल्‍म ‘भुवन शोम’ में अपनी आवाज दी थी. अमिताभ ने एक्‍टर के रूप में अपना डेब्‍यू फिल्‍म ‘सात हिंदुस्‍तानी’ से किया था. उन्हें अग्निपथ, ब्लैक, पा और पीकू सहित 4 नैशनल अवार्ड्स मिल चुके हैं. उन्होंने 1969 में सात हिंदुस्तानी फिल्म से अपना ऐक्टिंग डेब्यू किया था. उन्हें 2015 में देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण भी मिल चुका है.

अमिताभ बच्चन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने से पहले कई अवार्ड मिल चुके हैं. वर्कफ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन की अपकमिंग फिल्मो में ‘गुलाबो सिताबो’, ‘चेहरे’, ‘झुंड’ और ‘ब्रह्मास्त्र’ शामिल हैं.

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आपको बता दे दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारत सरकार की ओर से दिया जाने वाला पुरस्कार है, जो किसी व्यक्ति विशेष को भारतीय सिनेमा में उसके आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है. इसकी शुरुआत दादा साहब फाल्के के जन्म शताब्दी-वर्ष 1969 से हुई थी. पहली बार ये सम्मान अभिनेत्री देविका रानी को प्रदान किया गया था. इसके बाद से अब तक यह पुरस्कार ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ के लिए आयोजित समारोह में प्रदान किया जाता है. इस पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, एक शौल और 10 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं.

राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में आयुष्मान खुराना को ‘अंधाधुन’ और विक्की कौशल को ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ में दमदार परफार्मेंस के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड दिया गया.

अलविदा 2019 : खय्याम से लेकर विद्या सिन्हा तक, इस साल बौलीवुड ने खोए ये 10 एक्टर

बौलीवुड में हजारों टैलेंटेड सेलिब्रिटीज हैं. हर  सेलिब्रिटी की फिल्म इंडस्ट्री में एक खास टैलेंट के लिए जाना जाता है. जी हां, ये सेलिब्रिटी अपने फैंस के लिए वो सबकुछ करते हैं, जिससे उनके फैंस का ज्यादा से ज्यादा मनोरंजन हो सके.  पर जैसे ही किसी सेलिब्रिटी की मौत की खबरे आती है तो आपको एक झटका सा महसूस होता है.  हर साल सेलिब्रिटी की मौत की खबरें आती है.  तो चलिए 2019 में जिन मशहूर सेलिब्रिटीज की मौत हो चुकी हैं, उनका  नाम जानते हैं.

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  1. श्रीराम लागू

फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर श्रीराम लागू का पुणे में 92 साल की उम्र में 17 दिसंबर को मृत्यु हो गईं. श्रीराम लागू ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों हिंदी और 40 से ज्यादा मराठी फिल्मों में काम किया था. श्रीराम लागू ने वो आहट: एक अजीब कहानी, पिंजरा, मेरे साथ चल, सामना, दौलत जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया था.

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  1. वीरू कृष्णन 

1996 में आई फिल्म ‘राजा हिंदूस्तानीमें अपनी जबरदस्त एक्टिंग से मशहूर होने वाले अभिनेता वीरू कृष्णन ने 7 सितम्बर  को अंतिम सांस ली. एक्टर होने के साथ साथ वीरू कृष्णन एक बेहतरीन कथक डांसर भी थे. अपने इस टैलेंट से उन्होंने प्रियंका चोपड़ा कैटरीना कैफ, करणवीर बोहरा और कई स्टार्स को भी कथक डांस सिखाया था. उन्होंने ‘मेला’, ‘दूल्हे राजा’, ‘अकेले हम अकेले तुम’ और ‘इश्क’ जैसी फिल्मों में भी अहम किरदार निभाया था.

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  1. विजू खोटे

फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता विजू खोटे 30 सितंबर को 78 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने कई मराठी और हिंदी फिल्मों में काम किया. बता दें कि विजू खोटे ने फिल्म शोले में कालिया का आइकौनिक कैरेक्टर प्ले किया था. विजू खोटे के कालिया के किरदार ने लोगों के दिलों पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि आज भी उन्हें कालिया के कैरेक्टर के लिए जाना जाता है.

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  1. खय्याम

दिग्गज संगीतकार खय्याम की मृत्यु  19 अगस्त  को हुई. ‘कभी कभी’ और ‘उमराव जान’ जैसी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवार्ड पा चुके ख़य्याम ने अपने करियर की शुरुआत 1947 में की थी. ‘वो सुबह कभी तो आएगी’, ‘जाने क्या ढूंढती रहती हैं ये आंखें मुझमें’, ‘बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों, ‘ठहरिए होश में आ लूं’, ‘तुम अपना रंजो गम अपनी परेशानी मुझे दे दो’, ‘शामे गम की कसम’, ‘बहारों मेरा जीवन भी संवारो’ जैसे अनेकों गीत में अपने संगीत से चार चांद लगा चुके हैं.

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  1. विद्या सिन्हा

‘‘रजनीगंधा’’, छोटी सी बात’, ‘इंकार’, ‘मुक्ति’, ‘पति पत्नी और वो’ जैसी कई सफलतम फिल्मों और ‘काव्यांजली’, ‘जारा’,‘हारजीत’,‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ जैसे हिट सीरियलों की अदाकारा विद्या सिन्हा का 71 वर्ष की उम्र में 15 अगस्त को अंतिम सांस ली. वह फेफड़े की बीमारी से पीड़ित थी. विद्या सिन्हा को 18 साल की उम्र में ही ‘मिस बांबे’ का खिताब मिला था.

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  1. गिरीश कर्नाड

सिनेमा जगत के जाने-माने सितारे गिरीश कर्नाड की मृत्यु 10 जून  को हुई. ये अभिनेता और लेखक थे. 81 साल की उम्र में इनका निधन हो गया. इनके मौत की वजह मल्टीपल और्गन फेलियर बताया गया. गिरीश कर्नाड ने सलमान खान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर जिंदा है’ में भी काम किया था.

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  1. वीरू देवगन

बौलीवुड के फेमस एक्टर अजय देवगन के पिता वीरु देवगन 27 मई  को इस दुनिया को अलविदा कह गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्डिक अरेस्ट की वजह से उनकी मौत हुई थी. वीरु देवगन को एक्शन फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. उनकी फेमस फिल्मों में से है 1994 दिलवाले, हिम्मतवाला 1983, 1988 शहंशाह.

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  1. राजकुमार बड़जात्या

बौलीवुड के मशहूर फिल्म प्रोड्सूर राजकुमार बड़जात्या 21 फरवरी को अंतिम सांस ली.  राजश्री प्रोडक्शन के मालिक, फिल्म मेकर सूरज बड़जात्या के पिता राजकुमार बड़जात्या ने फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक योगदान दिया. उनकी लेटेस्ट प्रोड्यूस फिल्मों पर नजर डालें तो 2015 में प्रेम रतन धन पायो, 1999 में हम आपके हैं कौन, 1994 में मैंने प्यार किया जैसे ब्लौकबस्टर फिल्में दी.

  1. महेश आनंद

बौलीवुड के मशहूर खलनायक महेश आनंद 9 फरवरी को अपने घर पर मृत पाए गए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेचुरल डेथ थी, उन्होंने सुसाइड नहीं की थी. उन्होंने कई फिल्मों में मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई थी.  एक्टर के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी थे. उन्हें बौलीवुड की चर्चित फिल्में ‘थानेदार’, ‘आया तूफान’ और ‘प्यार किया नहीं जाता’ में उनके द्वारा निभाए गए किरदार के लिए जाना जाता है.

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  1. रमेश भाटकर

मराठी और हिंदी भाषा के अभिनेता रमेश भाटकर का कैंसर के कारण 4 फरवरी को अंतिम सांस ली. इत्तेफाक से कैंसर डे के दिन ही वे इस बीमारी से जंग हार गए. उन्हें पुलिस के किरदार निभाने के लिए जाना जाता था. सिर्फ फिल्मों ही नहीं वे रंगमंच की दुनिया का भी जाना पहचाना नाम थे.

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