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पेड़ पर कैसे होती है लाख की अदभूत खेती ?

हम में से बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि एक ऐसी भी खेती होती हैं, जो ना समतल जमीन पर ना पर्वतीय सीढ़ीनुमा खेती पर और ना ही पठारी भूमि पर यह खेती होती हैं प्रकृति के सबसे अनोखे पादप पेड़ पर. जी हां वृक्ष पर होती हैं अद्भूत खेती जहां उगता हैं लाख.

भारत के छोटानागपुर का इलाके में लाख की खेती सबसे अधिक होती हैं. इसके अलावा भारत के कई जगंलो में पोषक पेड़ पर इसकी खेती होती है.

 लाख की दो प्रजातियां भारत में सदियों से पाई जाती हैं-

1.कुसुम लाख

2.रंगीन लाख

इन दोनों प्रजातियों में कुसुम लाख को उतम माना जाता हैं.

लाख के कीड़े नरम एवं नये डालियो पर बैठना पसंद करते हैं. करीबन 34 हजार लाख कीट मिल कर एक किलो रंगीन लाख उत्पन्न करते हैं और करीबन 14 हजार 4 सौ लाख कीट मिलकर कुसुम लाख उत्पन्न करते हैं. लेकिन लगभग 40 प्रतिशत लाख के कीडों को उनके शत्रु कीडे खा जाते हैं. जिससे लाख उत्पादन की क्षमता पर प्रभाव पड़ता हैं साथ ही लाख के गुणों पर भी प्रभाव पड़ता हैं. इसलिए लाख के कीडों को उसके शत्रु कीट से बचाने के लिए कारगर कदम उठाया जाता हैं.

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वैज्ञानिक भाषा में इसे लेसिफर लाख  कहा जाता हैं. लाख शब्द की उत्पति प्राचीन भाषा संस्कृत से हुई हैं संस्कृत के लक्ष शब्द से उत्पन्न हुआ हैं लाख. आयुवैदिक ग्रंथो में भी लाख के बारे में जिक्र मिलता हैं. इसके साथ ही हमारे कई धार्मिक ग्रंथो में भी इसकी चर्चा मिलती हैं, जैसे महाभारत में लक्षागृह की बात .

कहा जाता हैं कि इस पूरे संसार में लाख ही प्रकृतिक का एक मात्र राल हैं, बाकि सभी राल कृत्रिम हैं . इस प्रकृतिक राल को प्रकृति का वरदान भी कहा जाता हैं. लाख की खेती और लाख संबधित उद्योगो का अतीत प्रचीन काल से ही काफी स्र्वाणिक रहा, लेकिन आज के समय में इस क्षेत्र में बहुत कम लोगो लगे हैं. फिर भी हमारे देश से हजारो किलो टन लाख का निर्यात अमेरिका इंगलैण्ड रुस अरब देशो के साथ कई यूरोपिय देशो में किया जाता हैं.

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घटते कृषि भूमि एवम् बडते जनसंख्या के लिए रोजगार के घटते अवसरों की कमी को लाख के खेती को बढावा देकर काफी हद तक पूरा किया जा सकता है. इसके लिए सरकार को लाख आधारित छोटे.बडे उद्योगो के लिए विशेष योजना बनाकर उसे बढावा देना होगा और जगंलो के वृक्षो पर इसके खेती को बढावा देना होगा. जिससे भविष्य में हम लाख निर्यात देश में पहले स्थान पर आ सकें.

कड़वे स्वाद वाले करेला में है कई औषधीय गुण

करेले का स्वाद भले ही कड़वा हो, लेकिन सेहत के लिहाज से यह बहुत फायदेमंद होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि करेला  कुपोषण और कई बीमारियों से बचाव में बेहद कारगर है. करेले में अन्य सब्जी या फल की तुलना में ज्यादा औषधीय गुण पाये जाते हैं. करेला खुश्क तासीर वाली सब्जी‍ है. यह खाने के बाद आसानी से पच जाता है. करेले में फास्फोरस पाया जाता है जिससे कफ की शिकायत दूर होती है. करेले में प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस और विटामिन पाया जाता है. आइए हम आपको कड़वे करेले के गुणों के बारे में बताते हैं.

  • कफ की शिकायत होने पर करेले का सेवन करना चाहिए. करेले में फास्फोरस होता है जिसके कारण कफ की शिकायत दूर होती है.
  • करेला हमारी पाचन शक्ति को बढाता है जिसके कारण भूख बढती है. करेले ठंडा होता है, इसलिए यह गर्मी से पैदा हुई बीमारियों के उपचार के‍ लिए फायदेमंद है.
  • दमा होने पर बिना मसाले की छौंकी हुई करेले की सब्जी खाने से फायदा होता है.
  • लकवे के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद होता है. इसलिए लकवे के मरीज को कच्चा करेला खाना चाहिए.
  • उल्टी-दस्त या हैजा होने पर करेले के रस में थोड़ा पानी और काला नमक मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है.

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  • लीवर से संबंधित बीमारियों के लिए तो करेला रामबाण औषधि है. जलोदर रोग होने पर आधा कप पानी में 2 चम्मच करेले का रस मिलाकर ठीक होने तक रोजाना तीन-चार बार सेवन करने से फायदा होता है.
  • पीलिया के मरीजों के लिए करेला बहुत फायदेमंद है. पीलिया के मरीजों को पानी में करेला पीसकर खाना चाहिए.
  • डायबिटीज के लिए करेला रामबाण इलाज है. करेला खाने से शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है.
  • करेला खून साफ करता है. करेला खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है.
  • बवासीर होने पर एक चम्मच करेले के रस में आधा चम्मखच शक्कर मिलाकर एक महीने तक प्रयोग करने से बवासीर की शिकायत समाप्त हो जाती है.

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  • गठिया रोग होने पर या हाथ-पैर में जलन होने पर करेले के रस से मालिश करना चाहिए. इससे गठिया के रोगी को फायदा होगा.
  • दमा होने पर बिना मसाले की करेले की सब्जी खाना चाहिए. इससे दमा रोग में फायदा होगा.
  • उल्टी, दस्त और हैजा होने पर करेले के रस में थोडा पानी और काला नमक डालकर पीने से फायदा होता है.
  • करेले के रस को नींबू के रस के साथ पानी में मिलाकर पीने से वजन कम किया जा सकता है.

सवाधानी बरते  : वैसे तो करेला सेहत की दृष्टि से बेहद लाभकारी है. लेकिन जिन्हें अल्सर की समस्या है उन्हें इससे परहेज करना चाहिए. इसके अधिक सेवन से सीने में जलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

ब्लैकमेलिंग का साइड इफेक्ट : हैरान कर देगी ये कहानी

‘‘रजनी, क्या बात है आजकल तुम कुछ बदलीबदली सी लग रही हो. पहले की तरह बात भी नहीं करती.

मिलने की बात करो तो बहाने बनाती हो. फोन करो तो ठीक से बात भी नहीं करतीं. कहीं हमारे बीच कोई और तो नहीं आ गया.’’ कमल ने अपनी प्रेमिका रजनी से शिकायती लहजे में कहा तो रजनी ने जवाब दिया, ‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मेरे जीवन में तुम्हारे अलावा कोई और आ भी नहीं सकता.’’

रजनी और कमल लखनऊ जिले के थाना निगोहां क्षेत्र के गांव अहिनवार के रहने वाले थे. दोनों का काफी दिनों से प्रेम संबंध चल रहा था.

‘‘रजनी, फिर भी मुझे लग रहा है कि तुम मुझ से कुछ छिपा रही हो. देखो, तुम्हें किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है. कोई बात हो तो मुझे बताओ. हो सकता है, मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकूं.’’ कमल ने रजनी को भरोसा देते हुए कहा.

‘‘कमल, मैं ने तुम्हें बताया नहीं, पर एक दिन हम दोनों को हमारे फूफा गंगासागर ने देख लिया था.’’ रजनी ने बताया.

‘‘अच्छा, उन्होंने घर वालों को तो नहीं बताया?’’ कमल ने चिंतित होते हुए कहा.

‘‘अभी तो उन्होंने नहीं बताया, पर बात छिपाने की कीमत मांग रहे हैं.’’ रजनी बोली.

‘‘कितने पैसे चाहिए उन्हें?’’ कमल ने पूछा.

‘‘नहीं, पैसे नहीं बल्कि एक बार मेरे साथ सोना चाहते हैं. वह धमकी दे रहे हैं कि अगर उन की बात नहीं मानी तो वह मेरे घर में पूरी बात बता कर मुझे घर से निकलवा देंगे.’’ रजनी के चेहरे पर चिंता के बादल छाए हुए थे.

‘‘तुम चिंता मत करो, बस एक बार तुम मुझ से मिलवा दो. हम उस की ऐसी हालत कर देंगे कि वह बताने लायक ही नहीं रहेगा. वह तुम्हारा सगा रिश्तेदार है तो यह बात कहते उसे शरम नहीं आई?’’ रजनी को चिंता में देख कमल गुस्से से भर गया.

‘‘अरे नहीं, मारना नहीं है. ऐसा करने पर तो हम ही फंस जाएंगे. जो बात हम छिपाना चाह रहे हैं, वही फैल जाएगी.’’ रजनी ने कमल को समझाते हुए कहा.

‘‘पर जो बात मैं तुम से नहीं कह पाया, वह उस ने तुम से कैसे कह दी. उसे कुछ तो शरम आनी चाहिए थी. आखिर वह तुम्हारे सगे फूफा हैं.’’ कमल ने कहा.

‘‘तुम्हारी बात सही है. मैं उन की बेटी की तरह हूं. वह शादीशुदा और बालबच्चेदार हैं. फिर भी वह मेरी मजबूरी का फायदा उठाना चाहते हैं.’’ रजनी बोली.

‘‘तुम चिंता मत करो, अगर वह फिर कोई बात करे तो बताना. हम उसे ठिकाने लगा देंगे.’’ कमल गुस्से में बोला.  इस के बाद रजनी अपने घर आ गई पर रजनी को इस बात की चिंता होने लगी थी.

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ब्लैकमेलिंग में अवांछित मांग

38 साल के गंगासागर यादव का अपना भरापूरा परिवार था. वह लखनऊ जिले के ही सरोजनीनगर थाने के गांव रहीमाबाद में रहता था. वह ठेकेदारी करता था. रजनी उस की पत्नी रेखा के भाई की बेटी थी.

उस से उम्र में 15 साल छोटी रजनी को एक दिन गंगासागर ने कमल के साथ घूमते देख लिया था. कमल के साथ ही वह मोटरसाइकिल से अपने घर आई थी. यह देख कर गंगासागर को लगा कि अगर रजनी को ब्लैकमेल किया जाए तो वह चुपचाप उस की बात मान लेगी. चूंकि वह खुद ही ऐसी है, इसलिए यह बात किसी से बताएगी भी नहीं. गंगासागर ने जब यह बात रजनी से कही तो वह सन्न रह गई. वह कुछ नहीं बोली.

गंगासागर ने रजनी से एक दिन फिर कहा, ‘‘रजनी, तुम्हें मैं सोचने का मौका दे रहा हूं. अगर तुम ने मेरी बात नहीं मानी तो घर में तुम्हारा भंडाफोड़ कर दूंगा. तुम तो जानती ही हो कि तुम्हारे मांबाप कितने गुस्से वाले हैं. मैं उन से यह बात कहूंगा तो मेरी बात पर उन्हें पक्का यकीन हो जाएगा और बिना कुछ सोचेसमझे ही वे तुम्हें घर से निकाल देंगे.’’

रजनी को धमकी दे कर गंगासागर चला गया. समस्या गंभीर होती जा रही थी. रजनी सोच रही थी कि हो सकता है उस के फूफा के मन से यह भूत उतर गया हो और दोबारा वह उस से यह बात न कहें.

यह सोच कर वह चुप थी, पर गंगासागर यह बात भूला नहीं था. एक दिन रजनी के घर पहुंच गया. अकेला पा कर उस ने रजनी से पूछा, ‘‘रजनी, तुम ने मेरे प्रस्ताव पर क्या विचार किया?’’

‘‘अभी तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं. देखिए फूफाजी, आप मुझ से बहुत बड़े हैं. मैं आप के बच्चे की तरह हूं. मुझ पर दया कीजिए.’’ रजनी ने गंगासागर को समझाने की कोशिश की.

‘‘इस में बड़ेछोटे जैसी कोई बात नहीं है. मैं अपनी बात पर अडिग हूं. इतना समझ लो कि मेरी बात नहीं मानी तो भंडाफोड़ दूंगा. इसे कोरी धमकी मत समझना. आखिरी बार समझा रहा हूं.’’ गंगासागर की बात सुन कर रजनी कुछ नहीं बोली. उसे यकीन हो गया था कि वह मानने वाला नहीं है.

रजनी ने यह बात कमल को बताई. कमल ने कहा, ‘‘ठीक है, किसी दिन उसे बुला लो.’’

इस के बाद रजनी और कमल ने एक योजना बना ली कि अगर वह अब भी नहीं माना तो उसे सबक सिखा देंगे. दूसरी ओर गंगासागर पर तो किशोर रजनी से संबंध बनाने का भूत सवार था.

सुबह होते ही उस का फोन आ गया. फूफा का फोन देखते ही रजनी समझ गई कि अब वह मानेगा नहीं. कमल की योजना पर काम करने की सोच कर उस ने फोन रिसीव करते हुए कहा, ‘‘फूफाजी, आप कल रात आइए. आप जैसा कहेंगे, मैं करने को तैयार हूं.’’

रजनी इतनी जल्दी मान जाएगी, गंगासागर को यह उम्मीद नहीं थी. अगले दिन शाम को उस ने रजनी को फोन कर पूछा कि वह कहां मिलेगी. रजनी ने उसे मिलने की जगह बता दी.

अपने आप बुलाई मौत

18 जुलाई, 2018 को रात गंगासागर ने 8 बजे अपनी पत्नी को बताया कि पिपरसंड गांव में दोस्त के घर बर्थडे पार्टी है. अपने साथी ठेकेदार विपिन के साथ वह वहीं जा रहा है.

गंगासागर रात 11 बजे तक भी घर नहीं लौटा तो पत्नी रेखा ने उसे फोन किया. लेकिन उस का फोन बंद था. रेखा ने सोचा कि हो सकता है ज्यादा रात होने की वजह से वह वहीं रुक गए होंगे, सुबह आ जाएंगे.

अगली सुबह किसी ने फोन कर के रेखा को बताया कि गंगासागर का शव हरिहरपुर पटसा गांव के पास फार्महाउस के नजदीक पड़ा है. यह खबर मिलते ही वह मोहल्ले के लोगों के साथ वहां पहुंची तो वहां उस के पति की चाकू से गुदी लाश पड़ी थी. सूचना मिलने पर पुलिस भी वहां पहुंच गई. पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और गंगासागर के पिता श्रीकृष्ण यादव की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

कुछ देर बाद पुलिस को सूचना मिली कि गंगासागर की लाल रंग की बाइक घटनास्थल से 22 किलोमीटर दूर असोहा थाना क्षेत्र के भावलिया गांव के पास सड़क किनारे एक गड्ढे में पड़ी है. पुलिस ने वह बरामद कर ली.

जिस क्रूरता से गंगासागर की हत्या की गई थी, उसे देखते हुए सीओ (मोहनलाल गंज) बीना सिंह को लगा कि हत्यारे की मृतक से कोई गहरी खुंदक थी, इसीलिए उस ने चाकू से उस का शरीर गोद डाला था ताकि वह जीवित न बच सके.

पुलिस ने मृतक के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर उस का अध्ययन किया. इस के अलावा पुलिस ने उस की सालियों, साले, पत्नी सहित कुछ साथी ठेकेदारों से भी बात की. एसएसआई रामफल मिश्रा ने काल डिटेल्स खंगालनी शुरू की तो उस में कुछ नंबर संदिग्ध लगे.

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लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने घटना के खुलासे के लिए एसपी (क्राइम) दिनेश कुमार सिंह के निर्देशन में एक टीम का गठन किया, जिस में थानाप्रभारी अजय कुमार राय के साथ अपराध शाखा के ओमवीर सिंह, सर्विलांस सेल के सुधीर कुमार त्यागी, एसएसआई रामफल मिश्रा, एसआई प्रमोद कुमार, सिपाही सरताज अहमद, वीर सिंह, अभिजीत कुमार, अनिल कुमार, राजीव कुमार, चंद्रपाल सिंह राठौर, विशाल सिंह, सूरज सिंह, राजेश पांडेय, जगसेन सोनकर और महिला सिपाही सुनीता को शामिल किया गया.

काल डिटेल्स से पता चला कि घटना की रात गंगासागर की रजनी, कमल और कमल के दोस्त बबलू से बातचीत हुई थी. पुलिस ने रजनी से पूछताछ शुरू की और उसे बताया, ‘‘हमें सब पता है कि गंगासागर की हत्या किस ने की थी. तुम हमें सिर्फ यह बता दो कि आखिर उस की हत्या करने की वजह क्या थी?’’

रजनी सीधीसादी थी. वह पुलिस की घुड़की में आ गई और उस ने स्वीकार कर लिया कि उस की हत्या उस ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर की थी.

उस ने बताया कि उस के फूफा गंगासागर ने उस का जीना दूभर कर दिया था, जिस की वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ा. रजनी ने पुलिस को हत्या की पूरी कहानी बता दी.

गंगासागर की ब्लैकमेलिंग से परेशान रजनी ने उसे फार्महाउस के पास मिलने को बुलाया था. वहां कमल और उस का साथी बबलू पहले से मौजूद थे. गंगासागर को लगा कि रजनी उस की बात मान कर समर्पण के लिए तैयार है और वह रात साढ़े 8 बजे फार्महाउस के पीछे पहुंच गया.

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रजनी उस के साथ ही थी. गंगासागर के मन में लड्डू फूट रहे थे. जैसे ही उस ने रजनी से प्यारमोहब्बत भरी बात करनी शुरू की, वहां पहले से मौजूद कमल ने अंधेरे का लाभ उठा कर उस पर लोहे की रौड से हमला बोल दिया. गंगासागर वहीं गिर गया तो चाकू से उस की गरदन पर कई वार किए. जब वह मर गया तो कमल और बबलू ने खून से सने अपने कपड़े, चाकू और रौड वहां से कुछ दूरी पर झाड़ के किनारे जमीन में दबा दिया.

दोनों अपने कपड़े साथ ले कर आए थे. उन्हें पहन कर कमल गंगासागर की बाइक ले कर उन्नाव की ओर भाग गया. बबलू रजनी को अपनी बाइक पर बैठा कर गांव ले आया और उसे उस के घर छोड़ दिया. कमल ने गंगासागर की बाइक भावलिया गांव के पास सड़क किनारे गड्ढे में डाल दी, जिस से लोग गुमराह हो जाएं. पुलिस ने बड़ी तत्परता से केस की छानबीन की और हत्या का 4 दिन में ही खुलासा कर दिया. एसएसपी कलानिधि नैथानी और एसपी (क्राइम) दिनेश कुमार सिंह ने केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की तारीफ की.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में रजनी परिवर्तित नाम है.

टेस्टी कुलचे बनाने की आसान रेसिपी

कुलचा खाने में खाने काफी स्वादिष्ट लगता है. यह  मैदे और खट्टी दही से तैयार किया जाता है. तो आइए बताते है आपको इसकी रेसिपी.

सामग्री

1/2 टी स्पून चीनी

1/2 टी स्पून नमक

1 टी स्पून तेल

1/2 कप खट्टी दही

ग्रीस बेकिंग ट्रे

2 कप मैदा

1 टी स्पून यीस्ट

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बनाने की वि​धि

आधा कप गर्म पानी में चीनी घोल लें और इस में यीस्ट डालें.

इसे एक जगह पर रख दें ताकि यह फूल जाए.

जब यह फूल जाए तो मैदे में नमक, तेल, दही और यीस्ट मिश्रण डालकर मिला लें और गुनगुने पानी से इसे गूंथ लें और इसे एक जगह पर गीले कपड़े से ढककर रख दें.

जब यह  फूल जाए तो इसमें से थोड़ा आटा लेकर लोई बना लें और इसे आधे घंटे के छोड़ दें.

ओवन को प्रीहीट कर लें और लोई को पतला बेल लें.

कुलचे को बेकिंग ट्रे में लगाएं.

प्रीहीट ओवन में इसे 5 से 7 मिनट के लिए बेक करें, अब आप  कुलचे के सर्व कर सकते हैं.

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शुभारंभ: रानी ने शादी में पहना 18 किलो का लहंगा

कलर्स के शो, ‘शुभारंभ’ में राजा और रानी की शादी हो गई है. इन दिनों शो में राजा-रानी की शादी की रस्मों के बीच राजा-रानी की नज़दीकियां भी बढ़ रही हैं. भले ही इस शादी में अड़चनों की कमी नहीं थी, लेकिन प्यार की भी कमी नही दिखी राजा-रानी के बीच. रानी एक बहुत ही खूबसूरत दुल्हन के रूप में नज़र आयी. आज हम बात करेंगे रानी के शादी के लुक की. शादी में रानी बेहद खूबसूरत घरचोला लहंगे में नज़र आयी, जिसमें रानी का लुक देखने लायक था. आइए आपको बताते हैं रानी के खूबसूरत लहंगे की खास बातें…

जोर्जेट और रेशमी कपड़ों से बना रानी का लहंगा

घरचोला दुल्हनों की एक खास गुजराती पोशाक है, जो उनकी संस्कृति में बहुत महत्व रखती है. गुजराती परिवार से ताल्लुक रखने वाली रानी का लहंगा भी सफेद और हरे रंग से बना था. लहंगा जोर्जेट और रेशमी कपड़ों से बना था, जिस पर हाथ की कढ़ाई की गई थी.

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72 घंटे में हुई लहंगे की कढ़ाई

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रानी के इस खूबसूरत लहंगे को बनने में 3 से 4 दिन का समय लगा. सबसे पहले लहंगे की 72 घंटे में कढ़ाई हुई, जिसके बाद दर्जी को 22 घंटे लहंगे में 48 कली का घेरा डालने में लगा. 16 मीटर लंबे घेरे होने के कारण इस लहंगे का वजन लगभग 18 किलो था, जो पोशाक की भव्यता को दर्शाता है. इस लहंगे को बनाने में 6 कारीगर और एक्सपर्ट लगे थे.

रानी की ज्वैलरी भी थी खूबसूरत 

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खूबसूरत लहंगे के साथ रानी ने हरे रत्नों से बना कुंदन का एक नक्काशीदार सेट पहना था, जो रानी की सुंदरता में चार चाँद लगा रहा था. रानी ने शादी में नेचुरल लुक रखा था, जिसमें वह बेहद प्यारी लग रही थी.

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शुभारंभ की कहानी गुजरात के एक छोटे से शहर, सिद्धपुर की है. अलग-अलग प्रतिभा रखने वाले राजा और रानी की किस्मत ऐसी जुड़ जाती है कि दोनों शादी के बंधन में बंध जाते हैं. अब देखना ये है कि शादी के बाद राजा-रानी की जिंदगी में कौनसा नया मोड़ आता है. जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ, सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

भाजपा सरकार और संघ की मंशा

नागरिकता कानून 1955 में जो संशोधन किया गया है वह क्या फर्क डालेगा इस से ज्यादा महत्त्व की बात है उस होहल्ले की जिस के साथ यह कानून लाया गया है और जिस तरह से इस पर जानबूझ कर विवाद का हौआ खड़ा किया गया है. भाजपा सरकार और संघ की मंशा सीधेसीधे हिंदूमुसलिम अलगाव की आग को जलाए रखना ही नहीं उस पर पैट्रोल छिड़कना भी है ताकि वह आसपास की चीजों को भी लपेटे में ले ले.

इस संशोधन कानून के होहल्ले में क्षणिक स्मरणशक्ति रखने वाली जनता 3 तलाक कानून, पुलवामा, कश्मीर से 370 धारा के बेमतलब का होने आदि को भी भूल गई है और बेरोजगारी, महंगाई, मंदी, जीएसटी, नोटबंदी के बारे में भी. यह हमारे देश के पंडेपुजारियों की पुरानी चाल है और पुराण भी इन्हीं कहानियों से भरे पड़े हैं. जब भी कोई संकट आए तो पीडि़त का ध्यान बंटा दो. देवता इंद्र की ओर दौड़ते थे, आज का नागरिक मंदिर की ओर दौड़ता है. समस्या का हल करने की जगह हम किसी अन्य नकली उपाय में इस तरह लग जाते हैं कि समस्या चाहे विकराल रूप ले ले, सब उस के दर्द को भूल जाते हैं.

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अगर इस से समस्या का हल हो जाता तो बात दूसरी थी. नोटबंदी से कालाधन समाप्त नहीं हुआ. 3 तलाक कानून से मुसलिम औरतों के जीवन में उजाला नहीं आया, जीएसटी से कर संग्रह नहीं बढ़ा, कश्मीर में देश के बाकी लोगों ने प्लौट लेने शुरू नहीं किए, तो ध्यान तो बंटाना ही था ताकि पूजापाठ का धंधा कम न हो जाए. भाजपा सरकार में लाभ सब से ज्यादा मंदिर धंधे को हुआ है और वह तभी पनपेगा जब हिंदूमुसलिम वैमनस्य को बढ़ावा दिया जाएगा.

यह संशोधन कानून जानबू झ कर अफगानिस्तान, बंगलादेश और पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों के धर्म का नाम लेता है ताकि नए भारत में पुराने मुसलिम पराए ही हैं, यह कानूनों में आने लगे. व्यावहारिक रूप से हिंदूमुसलिम भेद हर रोज बढ़ाया जा रहा है.

पहले केवल ऊंचे परिवारों की बस्तियों से मुसलमानों को धीरेधीरे निकाला जाता था, अब पिछड़ों ने भी गांवोंकसबों में अदृश्य दीवारें खींचनी शुरू कर दी हैं. इस कानून का असर कितनों पर पड़ेगा यह तो किसी को नहीं पता पर यह सब को पता चल गया कि सरकार के लिए सभी मुसलिम पराए हैं.

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जो सरकार आज मुसलिमों को पराया कह रही है चाहे वे धर्म परिवर्तन कर के ही मुसलिम बने थे, अरब देशों से नहीं आए थे, वह सरकार कब पौराणिक व्यवस्था में शूद्र जो भारत के ओबीसी (अदर बैकवर्ड कास्ट-पिछड़े) हैं और दलितों को अलग मान लें, भरोसा नहीं. इन सब ने आरक्षण पाने के लिए प्रमाणपत्र तो ले ही लिए हैं. इन के लिए भेदभाव वाले कानून बनाना अब और आसान हो गया है. एक  झुग्गी में रंजिश की वजह से आग लगाई जाए तो पता नहीं रहता कि वह कब पूरी बस्ती को लील जाए.

AAP ने मनोज तिवारी से कहा, ‘तुम से न हो पाएगा’

8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव को ले कर सभी पार्टी जहां कमर कस चुके हैं, वहीं एकदूसरे पर कटाक्ष और आरोप लगाने का काम भी जोरों पर चल रहा है.

आम आदमी पार्टी ने भाजपा नेता मनोज तिवारी के दावे पर चुटकी लेते हुए तिवारी से कहा, ‘‘तुम से न हो पाएगा.’’

दरअसल, मनोज तिवारी ने दावा किया था कि अगर दिल्ली में भाजपा सत्ता में आई तो दिल्ली के लोगों को 5 गुना ज्यादा फायदा मिलेगा.

फिल्म का लोकप्रिय संवाद है

‘तुमसे न हो पाएगा’ फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर-भाग 2 के मुख्य किरदारों में शुमार एक किरदार का लोकप्रिय संवाद है. फिल्म के इस किरदार को जब यह पता चलता है कि उस का बेटा रोमांटिक फिल्में देख रहा है और वह उस की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए अब तक तैयार नहीं है, तो इस से निराश होकर वह अपने बेटे से कहता है, ‘‘बेटा, तुम से न हो पाएगा.’’

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संजय सिंह ने चुटकी ली

आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के गठबंधन सहयोगी दुष्यंत चौटाला के पोस्ट को रिट्वीट करते हुए भी चुटकी ली. इस ट्वीट में वह अपने कार्यालय में बिजली के बगैर काम करते दिख रहे हैं.

आप नेता संजय सिंह ने तिवारी से कहा कि दिल्ली में 1,000 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा करने से पहले अपनी पार्टी के शासन वाले राज्यों को बिजली दें.

संजय सिंह ने ट्वीट किया, ‘‘भाई मनोज तिवारीजी, हरियाणा में उपमुख्यमंत्री को बिना बिजली के काम करना पड़ता है, दिल्ली में आप 1000 यूनिट फ्री देने की क्यों फेंक रहे हैं? कम से कम अपने राज्यों में तो बिजली पूरी दे दो. भाजपाईयों फ्री का सपना मत देखो ‘तुमसे न हो पायेगा'”.

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कथनी और करनी में फर्क

दिल्ली की आप सरकार इस वक्त हर महीने घरों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है. तिवारी ने सोमवार को वादा किया था कि दिल्ली में 8 फरवरी के विधानसभा चुनाव में अगर उन की पार्टी चुन कर आती है तो यहां के निवासियों को आप की छूट से 5 गुना अधिक फायदा मिलेगा.
सिंह ने चौटाला के पोस्ट को भी टैग किया जिस में उपमुख्यमंत्री कहते हैं, ‘‘जब आप रात साढ़े 11 बजे काम कर रहे हों और कार्यालय के कर्मचारी सारी फाइलों को उसी दिन पूरा करना चाहते हों और बिजली चली जाए… हम इसी तरह काम करते हैं.’’

दिल्ली जीतना भाजपा के लिए कितना आसान

एक के बाद एक राज्य में सत्ता खोती भाजपा के लिए दिल्ली में चुनाव जीतना कितना आसान होता है यह तो वक्त ही बताएगा पर विपक्षी पार्टियों के इस दावे में दम लगता है कि इस चुनाव में भाजपा के पास कोई मुद्दा ही नहीं है और न ही कोई मुख्यमंत्री का दमदार चेहरा.

दूसरी ओर भाजपा दिल्ली चुनाव को नाक की लङाई बनाने वाली है और इस बार वह हर हाल में जीतना चाहेगी, क्योंकि साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं.पार्टी वहां जदयू के साथ गठबंधन की सरकार चला रही है.

शालीनता से अश्लीलता तक

क्या आप अकेले हैं , तो बाते करें रीना ,गीता ,सीमा से…. इस तरह का सन्देश आपके पास भी आता है . तो आप अपने विवेक से इस तरह का सेवा चुनने के लिए स्वतंत्र है.  निजी मोबाईल कंपनी फ्रैंड जोन एवं वाईस चैट के नाम से सर्विस चलती है. जहां मोबाईल ग्राहकों को अपने अकेलेपन दूर करने की बात कही जाती है, लेकिन सर्विस की सेवा लेने के बाद बात ही कुछ और होती है. इस सुविधा के लिए ग्राहकों को चंद रकम अदा करना पड़ता है, फिर वह दोस्ती के नाम पर रची एक अनोखी दुनिया में प्रवेश कर जाते हैं, जहां दूर- दूर तक अपनत्व का एक ऐसा संसार रचा बसा है कि  आप कब शालीनता से  अश्लीलता में आ जाएंगे , आपको भी पत्ता नहीं चलेगा  एवं  अभद्रता का भंडार आपका स्वागत करेगा.

निजी कंपनियों के इस दोस्ती सर्विस की सच्चाई जानने के लिए हमने वोडाफोन, आइडिया एवं एयरटेल के फ्रैंड ज़ोन पर बात करने वाली लड़कियों से बात किया और जो बात सामने आई ,वह कई मोबाईल ग्राहकों कों नही मालूम होगा.

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मोबाईल कम्पनी के फ्रैंड जोन पर काम करने वाली लड़किया आप से बात करते वक्त अपना नौकरी करती है, इन लड़कियों का काम ही है , ग्राहकों से बात करना. एयरटेल में वाईस चैट में काम करने वाली मोनिका (बदला हुआ नाम ) बताती है – मै इस सर्विस में 16 महीने से काम कर रही हूं , जितने लोगों से बात करती हूं , उसी के हिसाब से पैसा बनता है . मोनिका आगे बताती है कि,  इस सविर्स में काम करने के लिए आपको अपना टारगेट पूरा करना पड़ता है. जो प्रतिदिन 5 – 7 घंटो का होता है, अर्थात आपको प्रतिदिन 5 – 7 घंटे बात करना पड़ता है. इस क्षेत्र में काम करने वाली रीना (बदला हुआ नाम ) बताती है कि – अश्लीलता में लिप्त  ये चैट सर्विस मोबाईल कंपनियों के लिए मोटी कमाई का जरिया बनता जा रही है.

उनसे जब हमने पूछा कि अश्लील होते हुए आप ये कम क्यों करती हो और दोस्ती के लिए चलने वाले इस सर्विस में अश्लीलता कैसे आ जाती है ? तों जबाव थोडा नरम आवाज में आयी, रीना ( बदला हुआ नाम ) बताती है , कि मैंने जब वोडाफोन के  वाईस चैट में काम करना  शुरू किया था,तों यह सब मेरे सर के ऊपर से जाता था. लेकिन धीरे-धीरे मै सब समझ गई .  जहां तक बात है अश्लीलता का तो यह टारगेट के दबाव से आया है. लखनऊ की तृष्णा ( बदला हुआ नाम ) कहती है कि ऐसा नहीं है कि यह पूरी चैट सर्विस गलत है, कई बार मुझे उस तरह के दुखी दिल से गुफ्तगु होता है,जो कहीं न कहीं अपने अकेलेपन और बेवफाई से परेशान है , तभी यहां आते है है हमसे घंटों बाते करते है .

रीना  (बदला हुआ नाम ) बताती है कि किसी का मन नही करता अश्लीलतायों से लिप्त इस सर्विस में काम करने का लेकिन नौकरी बचाने और अधिक पैसा कमाने के लिए यह सब करना पड़ता है .

यह बात हैल्लो से शुरू होती है और फिर अगले पल आप जो उस समय चाहते है , उसे  के बातों के द्वारा आप तक पहुंचा कर के ही  ख़त्म होती है. यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक आप अकेलेपन के शिकार में फोन पर दोस्त खोजते हो और आपका मोबाईल में पैसों हो , जहां ही किसी एक में कमी आती है यह सिलसिला थम जाता है.

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इस सर्विस में बात करने वाले ग्राहक प्रति मिनट 3 से  4 रूपया प्रति मिनट  के दर से बात करते है , तों जरा सोचिये अकेलापन के गम और वाईस चैट की मस्ती उनके  लिए कितना महँगी  पड़ती  होगी और मोबाईल कंपनियों के लिए कितनी फायदेमंद.

आपके कुछ पल की वार्तालाप वाली खुशी के लिए आपका मोबाईल का रिचार्ज उड़ा देगी या आपका मोबाईल बिल बढ़ जाएगा. तो सावधान रहिए.

इटली में हनीमून मना रही है ‘कसौटी जिंदगी की-2’ की ये एक्ट्रेस, जयपुर में हुई थी शादी

हाल ही में मशहूर  टीवी एक्ट्रेस  सोन्या अयोध्या ने अपने बायफ्रेंड हर्ष समोरे से शादी के बंधन में बंधी थी. आपको बता दें कि शादी के बाद एक्ट्रेस इटली में हनीमून मनाने गईं है और वहां से लगातार अपने हनीमून की तस्वीरें शेयर कर रही है. तो चलिए आपको दिखाते हैं, सोन्या अयोध्या की लेटेस्ट तस्वीर…

आइफिल टावर के पास पोज में नजर आई सोन्या अयोध्या.

 

ब्लैक ड्रेस में सोन्या अयोध्या का खूबसूरत अंदाज.

 

सोन्या ने विश मांगने वाले ताले के साथ भी  क्लिक करवाई  तस्वीर.

https://www.instagram.com/p/B67hAm6AJuK/?utm_source=ig_web_copy_link

सोन्या  का हर पल को खूबसूरत बनाने का मनमोहक अंदाज.

 

वैसे सोन्या किसी भी तस्वीर में पति के साथ नजर नहीं आ रही है. वैसे उनकी इन खूबसूरत तस्वीरों के लिए उनके पति को ही शुक्रिया अदा करना चाहिए.

सुबह की किरण : भाग 1

‘‘आओ, तुम यहां बैठ जाओ,’’ समीर ने प्रीति को अपने बगल में खड़ा देखा तो अपनी सीट से उठते हुए कहा.

‘‘नहीं, तुम बैठो, मुझे अगले स्टैंड पर उतरना है.’’

‘‘तुम बैठो, तुम्हें खड़ा होने में तकलीफ हो रही है,’’ उस ने फिर आग्रह किया तो प्रीति उस की सीट पर बैठ गई.

बस में खचाखच भीड़ थी. तिल भर भी पैर रखने की जगह नहीं थी. प्रीति का एक पैर जन्मजात खराब था. इसलिए थोड़ा लंगड़ा कर चलती थी. नीलम ठीक उस के पीछे खड़ी थी. मुसकराती हुई बोली, ‘‘चलो तुम्हारी तकलीफ समझने वाला कोई

तो मिला.’’

अगले स्टैंड पर दोनों सहेलियां उतर गईं. समीर भी उन के पीछेपीछे उतरा.

‘‘तुम्हारी सहेली के साथ मैं ने अन्याय किया,’’ वह प्रीति को देखते हुए मुसकरा कर बोला, ‘‘लेकिन क्या करूं, सीट एक थी और तुम दो.’’

‘‘कोई बात नहीं, अगली बार तुम मुझे लिफ्ट दे देना,’’ नीलम भी मुसकराते हुए बोली तो समीर ने पूछा, ‘‘वैसे, तुम दोनों यहां कहां रहती हो?’’

‘‘बगल में ही, गौरव गर्ल्स होस्टल में,’’ नीलम ने बताया.

‘‘अच्छा है, अब तो हमारा इसी स्टैंड से कालेज आनाजाना होता रहेगा. मैं भी थोड़ी दूर पर ही रहता हूं. मेरे बाबूजी एक कंपनी में जौब करते हैं और यहीं उन्होंने एक अपार्टमैंट खरीदा हुआ है.’’

समीर, प्रीति और नीलम एक ही कालेज में थे. आज कालेज में उन का पहला दिन था.

प्रीति आगरा की रहने वाली थी और नीलम लखनऊ की. दोनों गौरव गर्ल्स होस्टल में एक रूम में रहती थीं. प्रीति के पिताजी एक अच्छे ओहदे वाली सर्विस में थे, किंतु असमय उन का देहांत हो गया था जिस के कारण उस की मां को अनुकंपा के आधार पर उसी औफिस में क्लर्क की नौकरी मिल गई थी.

प्रीति के बाबूजी बहुत पहले अपना गांव छोड़ कर आगरा में आ गए थे और यहीं उन्होंने एक छोटा सा मकान बना लिया था. गांव की जमीन और मकान उन्होंने बेच दिया था. प्रीति की मां चाहती थीं कि वह आईएएस की तैयारी करे ताकि एक ऊंची पोस्ट पर जा कर अपनी विकलांगता के दर्द को भुला सके, इसलिए उन्होंने उसे दिल्ली में एमए करने के लिए भेजा था. प्रीति को शुरू से ही साइकोलौजी में गहरी रुचि थी और बीए में भी उस का यह फेवरेट सब्जैक्ट था इसलिए उस ने इसी सब्जैक्ट से एमए करने का विचार किया. प्रीति को शुरू से ही कुछ सीखने और अधिकाधिक ज्ञानार्जन करने की इच्छा थी. वह साइकोलौजी में शोध कार्य करना चाहती थी और भविष्य में किसी कालेज में लैक्चरर बनने की ख्वाहिश पाले हुए थी.

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नीलम एक बड़े बिजनैसमैन की बेटी थी. उस के पिताजी चाहते थे कि उन की बेटी दिल्ली के किसी कालेज से एमए कर ले और उस की सोसायटी मौडर्न हो जाए क्योंकि आजकल बिजनैसमैन के लड़के भी एक पढ़ीलिखी और मौडर्न लड़की को शादी के लिए प्रेफर करते थे. इसलिए उस ने दिल्ली के इसी कालेज में ऐडमिशन ले लिया था और ईजी सब्जैक्ट होने के कारण साइकोलौजी से एमए करना चाहती थी. समीर के पिताजी उसे आईएएस बनाना चाहते थे और समीर भी इस के लिए इच्छुक था, इसलिए वह भी साइकोलौजी से एमए करने के लिए कालेज में ऐडमिशन लिए हुए था.

प्रीति एक साधारण परिवार की थी और स्वभाव से भी बहुत ही सरल, इसलिए उस की वेशभूषा और पोशाकें भी साधारण थीं. पर वह सुंदर व स्मार्ट थी. उसे बनावशृंगार और मेकअप पसंद नहीं था किंतु दूसरी ओर नीलम सुंदर और छरहरे बदन की गोरी लड़की थी और अपने शरीर की सुंदरता पर उस का सब से ज्यादा ध्यान था. वह मेकअप करती और प्रतिदिन नईनई ड्रैस पहनती. कालेज में जहां प्रीति अपनी किताबों में उलझी रहती वहीं नीलम अपनी सहेलियों के साथ गपें मारती और मस्ती करती.

एक दिन प्रीति लंच के समय कालेज की लाइब्रेरी में कुछ किताबों से कुछ नोट्स तैयार कर रही थी. तभी नीलम उस के पास आई और बोली, ‘‘अरे पढ़ाकू, यह लंच का समय है और तुम किताबों से माथापच्ची कर रही हो जैसे रिसर्च कर रही हो. चलो चल कर कैफेटेरिया में चाय पीते हैं.’’

‘‘तुम जाओ, मैं थोड़ी देर बाद आऊंगी,’’ प्रीति ने कहा तो नीलम चली गई.

तभी उस ने महसूस किया कि उस के पीछे कोई खड़ा है. उस ने पलट कर पीछे की ओर देखा तो समीर था.

बस में मिलने के बाद समीर आज पहली बार उस के पास आ कर खड़ा हुआ था. क्लास में कभीकभी उस की ओर देख लिया करता था, किंतु बात नहीं करता था.

‘‘प्रीति सभी लोग कैफेटेरिया में चाय पी रहे हैं और तुम यहां बैठ कर नोट्स बना रही हो? अभी तो परीक्षा होने में काफी देर है. चलो, चाय पीते हैं.’’

‘‘बाद में आऊंगी समीर, थोड़े से नोट्स बनाने बाकी हैं, पूरा कर लेती हूं.’’

‘‘अब बंद भी करो,’’ समीर ने उस की नोटबुक को समेटते हुए कहा.

‘‘अच्छा चलो,’’ प्रीति भी किताबों को नोटबुक के साथ हाथ में उठाते हुए उठ खड़ी हुई.

जब समीर और प्रीति कैफेटेरिया में पहुंचे तो वहां पहले से ही नीलम अपनी कुछ क्लासमेट्स के साथ बैठ कर चाय पी रही थी. अगलबगल और भी कई लड़केलड़कियां थीं.

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‘‘आ गई पढ़ाकू,’’ सविता ने उस को देखते हुए चुटकी ली.

‘‘मैं ने कहा, तो मेरे साथ नहीं आई. अब समीर के एक बार कहने पर आ गई. हां भई, उस दिन बस में उठ कर अपनी सीट जो तुम्हें औफर की थी. अब उस का कुछ खयाल तो रखना ही पड़ेगा न.’’ नीलम की बात सुन कर उस की सहेलियां हंसने लगीं.

अगले भाग में पढ़ें- सहेलियों की मजाक पर प्रिती ने क्या प्रतिक्रिया दी ?

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