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कही अनकही: भाग 1- तन्वी की हरकतों से मां क्यों परेशान थी

Writer- Reeta Kumari

सूर्योदय से पहले उठ जाने की मेरी आदत नौकरी से अवकाश प्राप्त   करने के बाद भी नहीं बदली थी. लालिमा के बीच धीरेधीरे निकलता सूर्य का सुर्ख गोला मुझे बहुत भाता था. पक्षियों का कलरव और हवा की सरसराहट में जैसे रात का रहस्यमय मौन घुलने लगता. तन को छूती ठंडी हवा मेरे मनप्राण को शांति और सुकून से भर देती.

हर दिन की तरह मैं लौन में बैठी इस अद्भुत अनुभूति में खोई आम के उस पौधे को निहार रही थी जिस का बिरवा आदित्य ने लगाया था. उसे भी मेरी तरह भिन्नभिन्न प्रकार के पौधे लगाने का शौक है. जब आदित्य को 1 वर्ष के लिए आफिस की तरफ से न्यूयार्क जाना पड़ा तो जाने से पहले वह मुझे हिदायतें देता रहा, ‘मां, 1 साल के लिए अब मेरे इन सारे पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी आप पर है. खयाल रखिएगा, एक भी पौधा मुरझाने न पाए.’

सिर्फ 6 महीने अमेरिका में व्यतीत करने के बाद उस ने वहीं रहने का मन बना लिया. पौधे तो पौधे उसे तो अपनी मां तक की चिंता न हुई कि उस के बिना कैसे उस के दिन गुजरेंगे. अब यह सब सोचने की उसे फुरसत ही कहां थी. वह तो सात समंदर पार बैठा अपने भौतिक सुख तलाश रहा था. बस, दिल को इसी बात से सुकून मिलता कि बेटा जहां भी है सुखी है, खुश है, अपने सपनों को पूरा कर रहा है.

मेरे पति समीर भी अपने व्यापार के काम में व्यस्त हो कर अपना ज्यादातर समय शहर से बाहर ही बिताते जिस से मेरा अकेलापन दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा था.

तभी ऊपर के कमरे से आती तेज आवाज के कारण मेरी तंद्रा भंग हो गई. लगा था तन्वी आज किसी बात को ले कर एक बार फिर अपनी मम्मी नेहा से उलझ गई. तन्वी का इस तरह अपनी मां से उलझना मुझे अचंभित कर जाता है. न जाने इस नई पीढ़ी को क्या होता जा रहा है. न बड़ों के मानसम्मान का खयाल रहता है न बात करने की तमीज.

नेहाजी मेरे मकान के ऊपर वाले हिस्से में बतौर किराएदार रहती थीं. इस से पहले मैं ने कभी अपना मकान किराए पर नहीं दिया था, लेकिन पति और बेटे दोनों के अपनीअपनी दुनिया में व्यस्त हो जाने के कारण मैं काफी अकेली पड़ गई थी. जीवन में फैले इस एकाकीपन को दूर करने के लिए मैं ने घर के ऊपर का हिस्सा किराए पर दे दिया.

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नेहा और उन की बेटी तन्वी ये 2 ही लोग रहने आए. नेहा किसी मल्टीनैशनल कंपनी में उच्च अधिकारी थीं और तन्वी बी.ए. द्वितीय वर्र्ष की छात्रा. मेरी सोच के विपरीत नेहा इतनी नापतौल कर बातें करतीं कि चाह कर भी मैं उन के साथ बातों का सिलसिला बढ़ा नहीं पाती. न जाने क्यों दोनों मांबेटी गाहेबगाहे उलझती रहतीं, जो कभीकभी तो गहन युद्ध का रूप ले लेता.

तभी उन की बेटी तन्वी कंधे पर बैग टांगे दनदनाती हुई सीढि़यां उतरी और गेट खोल कर सड़क की तरफ बढ़ गई. पीछेपीछे उस की मां उसे रोकने की कोशिश करती गेट तक आ गईं. पर तब तक वह आटोरिकशा में बैठ वहां से जा चुकी थी.

नेहा का सामना करने से बचने के लिए मैं क्यारियों में लगे फूलों को संवारने में व्यस्त हो गई, जैसे वहां जो घटित हो रहा था, उस से मैं पूरी तरह अनजान थी. लाख कोशिशों के बावजूद हम दोनों की नजरें टकरा ही गईं. नेहा एक खिसियाई सी हंसी के साथ जाने क्या सोच कर मेरे बगल में पड़ी कुरसी पर आ बैठीं. धीरे से मुझे लक्ष्य कर के बोलीं, ‘‘क्या बताऊं, आजकल के बच्चे छोटीछोटी बातों में भी आवेश में आ जाते हैं. इन लोगों के बड़ों से बात करने के तौरतरीके इतने बदल गए हैं कि इन के द्वारा दिया गया सम्मान भी, सम्मान कम अपमान ज्यादा लगता है. हमारे समय भी जेनेरेशन गैप था, मतभेद थे पर ऐसी उच्छृंखलता नहीं थी.’’

मैं भी उन के साथ हां में हां मिलाती हंसने की नाकाम कोशिशें करती रही. हंसी के बीच भी नेहा की भर आई आंखें और चेहरे पर फैली विषाद की रेखाएं, स्पष्ट बता रही थीं कि बात को हंसी में उड़ा देने की उन की चेष्टा निरर्थक थी. लड़की के अभद्र आचरण की अवहेलना से मां को गहरा सदमा लगा था.

तभी सुमन 2 कप कौफी रख गई. हम दोनों चुपचाप बैठे कौफी पीते रहे. कभीकभी निस्तब्ध चुप्पी भी वह सारी अनकही कह जाती है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल होता है. हम दोनों के बीच भी कुछ वैसी ही मौन संवेदनाओं का आदानप्रदान हो रहा था.

उस दिन के बाद नेहाजी आतेजाते कुछ देर के लिए मेरे पास बैठ जाती थीं. धीरेधीरे वे अपनी निजी बातें भी मुझ से शेयर करने लगीं. टुकड़ोंटुकड़ों में उन्हीं से पता चला कि उन का अपने पति रंधीर के साथ तलाक तो नहीं हुआ है, लेकिन वह इसी शहर में अलग रहता है. 8 वर्ष की तन्वी को छोड़ कर जाने के बाद से न कभी उस से मिलने आया और न ही उस ने उस की कोई जिम्मेदारी उठाई.

तन्वी की बढ़ती उद्दंडता और स्वच्छंदता नेहाजी के लिए चिंता, तनाव और भय का कारण बन गई थी. दिनोदिन तन्वी के दोस्तों में बढ़ते लड़कों की संख्या और सिनेमा तथा पार्टियों का बढ़ता शौक देख नेहा का सर्वांग सिहर उठता लेकिन वे तन्वी के सामने असहाय थीं. अपनी ढेरों कोशिशों के बावजूद तन्वी पर नियंत्रण रखना उन के लिए संभव नहीं था.

मैं भी उन की कोई मदद नहीं कर पा रही थी. उस उद्दंड, घमंडी और निरंकुश लड़की के चढ़े तेवर देख कर ही मेरा मन कुंठित हो उठता. एक दिन सुबह से ही बिजली गायब थी. दोपहर तक टंकी का पानी समाप्त हो गया. मैं यों ही बैठी एक पत्रिका के पन्ने पलट रही थी कि तभी दस्तक की आवाज सुन दरवाजा खोलते ही मैं अचंभित रह गई, सामने पानी का जग लिए तन्वी खड़ी थी.

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‘‘क्या थोड़ा सा पानी…’’

मैं बीच में ही उस की बात काटते हुए बोली, ‘‘क्यों नहीं, मैं हमेशा कुछ पानी टब में जमा कर के रखती हूं.’’  मैं जब पानी ले कर लौटी तो अचानक ही मेरा ध्यान उस की अंगारों सी दहकती आंखों और क्लांत शरीर की तरफ गया. पानी लेते समय जैसे ही उस का हाथ मेरे हाथों से सटा, उस के हाथों की तपन से मुझे आभास हो गया कि इसे तेज बुखार है.

अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया, ‘‘अरे, तुम्हें तो तेज बुखार है,’’ और खुदबखुद मेरा हाथ उस के सिर पर चला गया. अचानक ही जैसे उसे बिजली का झटका लगा. वह तेजी से दरवाजे की तरफ पलटते हुए बोली, ‘‘आप चिंता न करें, मैं अपना खयाल खुद रख सकती हूं. मुझे इस की आदत है.’’

जैसे तेजी से धूमकेतु सी प्रकट हुई थी वैसे ही तेजी से वह गायब हो गई.

तेज बुखार में तन्वी का अकेले रहना ठीक नहीं था, पर जिस तरह वह उद्दंड लड़की अपने तेवर दिखा गई, मेरा मन नहीं कर रहा था कि उस के पास जाऊं. थोड़ी देर के अंतर्द्वंद्व के बाद मैं 1 कप तुलसी की चाय बना कर उस के पास जा पहुंची. दरवाजा खुला था. सामने ही पलंग पर वह मुंह तक चादर खींचे लेटी अपने कांपते शरीर का संतुलन बनाने की कोशिश कर रही थी. उस के पास ही पड़े एक दूसरे कंबल से मैं ने उस का शरीर अच्छी तरह ढक, उस से गरम चाय पी लेने का अनुरोध किया तो उस ने चुपचाप चाय पी ली.

इस बीच बिजली भी आ गई थी. मैं फ्रिज से ठंडा पानी ला कर उस के सिर पर पट्टियां रखने लगी. थोड़ी ही देर में उस का बुखार उतरने लगा और वह पहले से काफी स्वस्थ नजर आने लगी. नेहाजी को सूचित करना जरूरी था, इसलिए मैं ने सामने पड़ा फोन उठा कर उन का नंबर जानना चाहा तो एकाएक उठ कर उस ने मेरे हाथों से फोन झपट लिया.

‘‘नहीं, मिसेज मीनू…आप ऐसा नहीं कर सकतीं.’’

मैं हतप्रभ खड़ी रह गई.

‘‘क्यों…वे तुम्हारी मां…’’

वह बीच में ही मेरी बात काटती हुई बोली, ‘‘मानती हूं, आज आप ने मेरे लिए बहुत कुछ किया फिर भी आप से अनुरोध है कि आप हमारे निजी मामलों में दखलंदाजी न करें.’’

कही अनकही: तन्वी की हरकतों से मां क्यों परेशान रहती थी

तन्वी ऐसी हरकतें करती कि मां नेहा को दुख पहुंचता. वहीं, मकान मालकिन मीनू हमदर्दी जतातीं तो तन्वी उन्हें भी डपट देती. फिर भी मीनू डटी रहीं और एक दिन उन्होंने ऐसा स्नेह जताया कि तन्वी कहीअनकही सब कह गई.

दूसरी औरत के सुबूत, पति से छूट जाते हैं करतूतों के संकेत

Writer- सुनीता कोतवाल

पतिपत्नी के बीच किसी तीसरी की एंट्री शादीशुदा जीवन में खलल डालती है. ऐसे में सुखशांति को बनाए रखने के लिए पत्नी को उस तीसरी का पता लगाना चाहिए. पत्नियां जानें पति में उन बदलावों को जिन से तीसरे का पता लगाया जा सके.

पति की जिंदगी में दूसरी औरत का आना पत्नी की खुशियों के लिए बहुत बड़ा खतरा है. पति अपनी बेवफाई को पत्नी की नजरों से कितना भी छिपा कर रखने की कोशिश करे, उस के द्वारा अनजाने में अपने अवैध प्रेम संबंध की तरफ इशारा करने वाले कुछ न कुछ सुबूत जरूर छूट जाते हैं.

इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने को पत्नी के लिए इन सुबूतों को जल्दी से जल्दी पकड़ना बहुत जरूरी है. जिन लोगों ने गांवों और कसबों में अपने दादाओंपिताओं को चकलेवालियों के यहां जाते देखा है और छिछोरेपन की बातें करते देखा है, उन्हें फिसलते देर नहीं लगती. हर पत्नी को अपने पति पर लगाम लगा कर रखनी चाहिए.

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क्यों छूट जाते हैं सुबूत

आज बेवफा पति समाज में अपनी छवि अच्छी रखना चाहता है. किसी भी अवैध रिश्ते को जगजाहिर कर वह अपनी पत्नी के आक्रोश का शिकार भी नहीं बनना चाहता. दूसरी तरफ अपनी नई बनी प्रेमिका को भी खुश रखना होता है उसे.

एक तरफ प्रेमिका की मौजूदगी उस के मन में गुदगुदी और उत्तेजना पैदा करती है तो दूसरी तरफ छवि खराब होने व पत्नी के गुस्से से फट पड़ने का भय उसे सताता है. इन 2 पाटों के बीच में फंस उस के मन में गुस्से, चिड़चिड़ाहट, बेचैनी और अपराधबोध के भाव बढ़ते जाते हैं. अब जमाना नहीं रह गया कि पत्नी का मुंह 2-4 तमाचे जड़ कर बंद किया जा सके.

दैनिक दिनचर्या में अचानक बदलाव

पति ऊपर से कितना भी सामान्य और सहज दिखने की कोशिश करे पर मन की उथलपुथल उस के व्यवहार और दिनचर्या में बदलाव ले ही आते हैं. यही बदलाव उन सुबूतों को जन्म देता है जिन्हें पहचान कर पत्नी उस की बेवफाई को बेनकाब कर सकती है.

पहले किसानी करते लोग हफ्तों के लिए तीर्थयात्रा या फसल बेचने के बहाने घरों से दूर रहने चले जाते थे और पत्नियां घर का काम करतेकरते इतना उकता जाती थीं कि वे पति के गुलछर्रों का ध्यान नहीं रख पाती थीं.

अब पति को अपनी नई प्रेमिका से मिलने व उस के साथ घूमने जाने के लिए मौके ढूंढ़ने पड़ते हैं और मुलाकातों के लिए समय भी निकालना पड़ता है. अपनी पुरानी दिनचर्या में फेरबदल किए बिना वह ऐसा नहीं कर सकता.

हमेशा देर तक सोने का शौकीन पति सुबहशाम घूमने जाने के बहाने अपनी प्रेमिका से मिलने पार्क में जाना शुरू कर दिया है. औफिस से लौटने में देर होने पर तो मीटिंग में देर तक फंसे रहने और काम ज्यादा होने के कारण ओवरटाइम शुरू करने के ?ाठे बहाने पत्नी को अकसर सुनने को मिलते हैं.

छुट्टी के दिन प्रेमिका भी उस के साथ ज्यादा समय बिताने की मांग करनी है. ऐसी स्थिति में पत्नी को साफ महसूस हो जाता है कि अचानक पति की बच्चों व उस के साथ छुट्टी का दिन बिताने में दिलचस्पी कम हो गई है. परिवार को छोड़ कर पति हर छुट्टी के दिन किसी जरूरी काम से अकेले जाने लगे तो पत्नी को होशियार हो जाना चाहिए.

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घर देर से पहुंचने के लिए वह रास्ते में दोस्तों के मिल जाने का बहाना बना सकता है. ध्यान में रखने वाली बात यह है कि ये अचानक मिल जाने वाले दोस्त पत्नी के परिचित नहीं होते हैं. दोस्त कहां मिले और कहां गए थे, इस का सीधा जवाब पति से कभी नहीं मिलेगा. उसे ज्यादा ब्योरा देने में दिलचस्पी नहीं होगी क्योंकि उस का ?ाठ बाद में पकड़ा जा सकता है.

रूपरंग को निखार कर युवा दिखने की कोशिश

नई प्रेमिका के ऊपर अच्छा प्रभाव बनाए रखने के लिए पति अपने व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के प्रयास करता है. बाहर निकला पेट कम करने और शरीर को शेप में लाने के लिए वह जिम जाना शुरू कर देता है.

पति का टेस्ट अचानक बदलने पर वह नए व अच्छे ब्रैंड के कपड़े खरीदेगा. नाई से बाल कटवाने के साथसाथ वह फेशियल करा कर लौटेगा. सैंट ओर डिओ की खपत बढ़ जाएगी. अपने को एकाएक ही ज्यादा स्मार्ट, फिट और युवा दिखाने की कोशिश पति की जिंदगी में दूसरी औरत की मौजूदगी की तरफ इशारा कर सकती है.

छिप कर प्रेमिका से वार्त्तालाप

पत्नी की पकड़ में आए बिना प्रेमिका से वार्त्तालाप करने में पति के मोबाइल और कंप्यूटर की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है. फोन पर बातें करते समय पत्नी पास आ गई तो फौरन वार्त्तालाप ‘हूं…हां’ में बदल जाता है. पत्नी के सुनने की पहुंच से दूर पति छत पर या घर के बाहर घूमते हुए मोबाइल पर बातें करता नजर आता है.

पत्नी प्रेमिका के मैसेज न पढ़ सके, इसलिए वे फोन लौक करना शुरू कर सकता है. कौल रजिस्टर में से प्रेमिका की कौल आने या उसे कौल करने के सुबूत मिटाने लगेगा. पत्नी यह न देख ले कि किस का फोन या मैसेज आया है, इसलिए फोन हर वक्त पति के पास रहता है.

कंप्यूटर से प्रेमिका को मेल भेजी जाती है. फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसी सोशल साइट्स पर संदेशों का आदानप्रदान होता है. पत्नी को मालूम पुराना पासवर्ड वे बदल देता है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की दुहाई देते हुए नया पासवर्ड उसे नहीं बताता. पत्नी गलत समय पर अगर एकाएक कंप्यूटर के पास आ गई तो वह बेचैन अंदाज में स्क्रीन औफ कर देता है या साइट्स बदल देता है.

पत्नी से बढ़ती दूरियां

प्रेमिका के साथ खुल कर बातें करने व ज्यादा से ज्यादा समय उस के साथ बिताने की राह में पति के लिए पत्नी सब से बड़ी रुकावट होती है. इस कारण दूसरी औरत के चक्कर में फंसे पति को वह जहर लगने लगती है.

पत्नी ने औफिस से घर देर से आने का कारण पूछा तो मन में चोर होने के कारण वे एकदम से गुर्रा पड़ता है, ‘मु?ो अपनी मरजी और अपने ढंग से जीने के लिए भी समय चाहिए. मैं कहां जाता हूं और किस से मिलता हूं, घर में घुसते ही इस तरह के वाहियात सवाल पूछ कर मेरा दिमाग खराब करना बंद कर दो. तुम्हें मालूम है न, बाबूजी के सामने मां कैसे थरथर कांपती थीं. गुस्सैल नहीं हूं तो सिर पर मत चढ़ो.’

पति के मन में पत्नी के विश्वास को तोड़ कर कुछ गलत करने का अपराधबोध भी मौजूद होता है. इसलिए बेवफा पति अपनी पत्नी से नजरें चुराने लगता है. पत्नी से वार्त्तालाप करना ही न पड़े, इसलिए वह उस के साथ अकारण गुस्सैल अंदाज में तीखा और कड़वा ही बोलता है. जब उस के साथ संबंध खराब होंगे, तभी तो वह अपने अवैध प्रेम संबंध को अपनी नजरों में उचित ठहरा सकेगा.

पत्नी का शक कुछ यकीन में बदल रहा हो तो उसे अपने बेवफा पति से दूसरी औरत के साथ चल रहे अवैध प्रेम संबंध के बारे में बिना कोई भूमिका बांधे सीधा सवाल पूछ लेना चाहिए. बिना तैयारी किए सहजता से ?ाठ बोलना आसान नहीं होता. अगर पति एकदम से सकपका उठे, जवाब देते हुए हकलाने लगे और चेहरे का रंग उड़ जाए तो यह दाल में कुछ काला होने का सुबूत सम?ा जाएगा.

अब अगर पति सफाई देते हुए कहे कि दूसरी औरत उस की प्रेमिका नहीं बल्कि सिर्फ अच्छी दोस्त है तो पत्नी उस के इस ?ाठ को बिलकुल न स्वीकारे. शादीशुदा पुरुष किसी स्त्री का सिर्फ अच्छा दोस्त मजबूरी में और तभी होता है जब वह स्त्री ही उसे इस से आगे बढ़ने की इजाजत न दे. जिस औरत को ले कर उसे अपने घर में क्लेश करना मंजूर है, वह पति की सिर्फ अच्छी दोस्त नहीं हो सकती.

पत्नी के हिस्से में अचानक आलोचनाएं और शिकायतें आने लगेंगी. उसे साफ महसूस होगा कि अब दोनों के संबंध पहले जैसे प्रेमपूर्ण नहीं रहे हैं. आपस में हंसनेबोलने व शरारती छेड़छाड़ करने के मौके आने कम होतेहोते बंद से हो जाएंगे. पति के मुंह से ‘आई लव यू’ सुने एक लंबा समय बीत जाएगा.

यौन संबंधों में पहले सा जोश और उत्साह नहीं रहेगा. वैसे इस का उलटा भी हो सकता है. प्रेमिका के साथ सैक्स संबंध बनाने की सुविधा न हो तो पत्नी के साथ सैक्स संबंध बढ़ भी सकते हैं. हां, यह फर्क पत्नी को जरूर महसूस होगा कि पति की बांहों में होते हुए भी वह उस की आंखों में अपने लिए प्रेमभाव नहीं देख पा रही है.

पति एक और कारण से भी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने से कतराता है. प्रेमिका के नाखूनों से बनी खरोंचें और दांत से काटे जाने के निशान कौन सा पति अपनी पत्नी को दिखाना चाहेगा. पति के कपड़ों में से आ रही प्रेमिका के सैंट की महक भी पति की बेवफाई की पोल खोल सकती है.

अचानक बढ़ते खर्चे

प्रेमिका को खुश रखने के लिए अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च करना हर प्रेमी की मजबूरी है. वह उसे महंगे होटल में डिनर के लिए ले जाएगा. मौकेबेमौके प्रेमिका को महंगा गिफ्ट देगा. क्रैडिट कार्ड के स्टेटमैंट में उन जगहों पर किए खर्च का ब्योरा होगा जहां पति के जाने की जानकारी पत्नी को होगी ही नहीं. उन दुकानों पर शौपिंग भी दिखाई देगी जहां से घर में कुछ नहीं आया है.

इन सब फालतू खर्र्चों के कारण घर के बजट पर बुरा असर पड़ना अनिवार्य है. जब भी घर में कुछ खर्चा करने की बात उठेगी तो आर्थिक तंगी से जू?ा रहे पति को गुस्सा आएगा. उसे पैसों की कमी को ले कर हर महीने नए बहाने बनाने पड़ेंगे. उस के बताए बहाने की अगर पत्नी गहराई में जा कर जांच करे तो देरसवेर सचाई उस की पकड़ में आ ही जाएगी.

कुछ अन्य सुबूत

प्रेमिका और पत्नी पहले से परिचित हों तो बेवफा पति उन्हें आपस में मिलाना अचानक बंद कर देगा. पत्नी नोट कर सकती है कि किसी महिला सहयोगी के प्रति पति का व्यवहार बदल गया है. पहले वह खुल कर उस के साथ सहज अंदाज में बात कर लेता था पर अब उस से कटाकटा सा नजर आएगा. छानबीन से यह मालूम करना कठिन नहीं होगा कि वह रूखे व्यवहार का नाटक पत्नी को धोखे में रखने के लिए कर रहा है.

वह उन जगहों पर पत्नी को नहीं ले जाएगा जहां कोई जानकार प्रेमिका के वजूद की बात उस के कान में डाल सके. दोस्तों को अगर उस के अवैध प्रेम संबंध की जानकारी होगी तो पति उन से मिलनजुलना कम कर देगा.

असावधानी में पति के मुंह से निकल सकता है कि उस ने नई रिलीज हुई फिल्म देख ली है. किसी होटल में खाना खाने की बात उस के मुंह से ?ाटके में निकल सकती है जहां उस के जाने की पत्नी को कोई जानकारी नहीं है. ऐसी गलतियां बारबार होने लगें तो यह इस बात का सुबूत होगा कि पति किसी और के साथ मनोरंजन करता घूम रहा है.

मन की चेतावनी को अनसुना न करें

पति के व्यवहार और दिनचर्या में अचानक आ रहे बदलावों को देख कर जब पत्नी का मन कहे कि मामला कुछ गड़बड़ है तो वह उस की ऐसी चेतावनी को अनसुना न करे.

ऊपर जिन बदलावों का उल्लेख किया गया है, अगर वे अचानक, बारबार और ज्यादा मात्रा में महसूस हो रहे हैं तो सारे मामले की एक बार गहराई से छानबीन कर लेना सही रहेगा. जो सचाई है उस का सामने आना जरूरी है. अपने मन की सुखशांति और विवाहित जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पत्नी को अपने मन में पैदा हुए शक को दूर करना ही होगा. तहकीकात के लिए जरूरी कदम उठाने में वह भावनाओं को रुकावट न बनने दे.

तहकीकात के बाद अगर पति बेकुसूर निकले तो मन ही मन उन से माफी मांग कर वह हंसीखुशी के साथ अपने विवाहित जीवन का आंनद उठाए और अगर पति दूसरी औरत के जाल में फंस चुका है तो पकड़ में आए सुबूतों के बल पर जल्दी से सचाई जान लेना इस समस्या का निर्णायक हल करने में बहुत सहायक सिद्ध होगा.

यह याद रखें कि तलाक की सोचना या पुलिस कंप्लेंट करना आसान तो लगता है पर इस से हासिल कुछ नहीं होता. पत्नी के पास तो कोई और ठोस रास्ता नहीं है जबकि पति अपनी आय और प्रेमिका के बल पर और ज्यादा खुश रह सकता है. पत्नी के मांबाप शुरू में तो साथ देंगे पर बाद में सम?ातेकी बात करने लगेंगे. इसलिए कोशिश करें कि काम निकल जाए अपनेआप.

Satyakatha: इशिका का खूनी इश्क

सौजन्य-सत्यकथा

बाराबंकी जिले के थाना कोतवाली नगर अंतर्गत मोहल्ला नई बस्ती पीरबटान में रहता था 28 वर्षीय भरत वर्मा. वह अपने घर में बिजली से संबंधित उपकरणों इनवर्टर और स्टेबलाइजर बनाने का काम करता था.

उस के पिता पुजारीलाल वर्मा ने एक नामी माचिस कंपनी और एक बीड़ी कंपनी की एजेंसी ले रखी थी, जिस से उन्हें अच्छी कमाई होती थी. संपन्न होने के कारण उन्होंने अपने बच्चों की अच्छी परवरिश की थी. सन 2000 में पुजारीलाल की मृत्यु हो गई. भरत की 3 बहनें और 3 भाई थे. बहनें विवाह के बाद अपनी ससुराल में रह रही थीं. भरत से 2 बडे़ भाई थे राम, लक्ष्मण और एक छोटा भाई था शत्रोहन. बड़े भाई राम की भी सन 2009 में कैंसर के कारण मृत्यु हो गई थी.

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भरत को छोड़ कर दोनों भाई विवाहित थे. जवान बेटे राम की मृत्यु के बाद मां अन्नपूर्णा भी बीमार रहने लगीं और सन 2016 में उन का भी देहांत हो गया था. तीनों भाई अपनेअपने कामधंधे में व्यस्त थे.

22 अक्तूबर, 2020 को भरत घर पर था. किसी का फोन आया तो रात साढ़े 8 बजे वह घर से निकल गया. शत्रोहन और लक्ष्मण घर लौटे तो भरत घर पर नहीं था. घर के सदस्यों से पूछा तो पता चला कि किसी का फोन आया था, उस के बाद भरत चला गया था. लक्ष्मण ने भरत का फोन मिलाया तो वह बंद था.

23 अक्तूबर की सुबह यंग स्ट्रीम स्कूल के पीछे नाले के किनारे एक युवक की लाश पड़ी मिली. वहां पहुंचे राहगीरों ने लाश देखी तो किसी ने नगर कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी.

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इंसपेक्टर पंकज सिंह अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए. मृतक की उम्र लगभग 28-30 वर्ष थी. उस के सिर व गले पर किसी तेज धारदार हथियार से वार किए गए थे. गला आधा कटा हुआ था. इंसपेक्टर सिंह इस से पहले कि लाश की शिनाख्त कराते, मृतक के घरवाले वहां पहुंच गए.

वह लाश भरत वर्मा की थी, जिस की शिनाख्त मौके पर पहुंचे उस के छोटे भाई शत्रोहन ने की.

इंसपेक्टर सिंह ने उस से आवश्यक पूछताछ की. शत्रोहन ने किसी पर शक नहीं जताया. उस ने कहा कि भरत शराब पीता था. शराब के नशे में किसी से विवाद हो गया होगा, जिस की वजह से यह घटना हुई होगी. फिलहाल इंसपेक्टर सिंह ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया और शत्रोहन को साथ ले कर कोतवाली आ गए.

शत्रोहन की तहरीर पर इंसपेक्टर सिंह ने अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. इस के बाद उन्होंने भरत वर्मा के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स में घटना से पहले जिस नंबर से काल आई थी, वह नंबर भी था.

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उस नंबर की पड़ताल की गई तो नंबर कोतवाली नगर के ही आनंद नगर, लखपेड़ाबाग निवासी शिवम उर्फ शंभूनाथ शुक्ला का निकला. शिवम का पुलिस रिकौर्ड भी था. वह वाहन चोरी के मामले में कई बार जेल जा चुका था.

इंसपेक्टर पंकज सिंह ने 24 अक्तूबर, 2020 को शिवम को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. उस से पूछताछ के बाद उस की प्रेमिका इशिका कश्यप उर्फ नैंसी को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया गया.

इशिका भरत के घर के पास ही रहती थी. दोनों से पूछताछ के बाद जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी—

उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी के नगर कोतवाली क्षेत्र की नई बस्ती पीरबटान मोहल्ले में प्रेमा कश्यप रहती थीं. वह नगर पालिका में नौकरी करती थीं. उन के 4 बेटे थे अशोक, संतोष, राजेश व नन्हकू और एक बेटी थी पिंकी. सभी विवाहित थे.

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करीब 25 साल पहले पिंकी का विवाह ब्रजेश कश्यप से हुआ था. दोनों की एक बेटी थी पिंकी. घर में उसे सब नैंसी नाम से बुलाते थे.

इशिका के जन्म के बाद पतिपत्नी में कुछ विवाद हुआ. यह विवाद इस नतीजे पर पहुंचा कि पिंकी पति का घर छोड़ कर अपनी मां प्रेमा के घर आ गई.

समय के साथ पिंकी की बेटी इशिका जवान हो गई. यौवन की दहलीज पर कदम रखा तो उस की काया में काफी खूबसूरत बदलाव आ गए, जिन की वजह से वह काफी सुंदर दिखती थी. विवाह योग्य होने पर पिंकी ने उस का विवाह फतेहपुर के गांव फय्याजपुरवा निवासी सुमित कश्यप से कर दिया. लेकिन विवाह के कुछ समय बाद ही इशिका भी अपनी मां की तरह पति को छोड़ कर हमेशा के लिए मायके में आ कर रहने लगी थी.

बाराबंकी के मोहल्ला आनंदनगर, लखपेड़ाबाग में शिवम उर्फ शंभूनाथ शुक्ला रहता था. 28 वर्षीय शिवम अविवाहित था. उस के पिता का नाम गंगाचरण शुक्ला था. शिवम के 4 भाई थे, वह सब से बड़ा था.

शिवम आपराधिक प्रवृत्ति का था. उस पर वाहन चोरी के कई मामले दर्ज थे. ऐसे ही एक मामले में वह इसी साल लौकडाउन के बाद जेल से छूट कर आया था.

एक दिन शिवम अपने एक परिचित के यहां गया हुआ था, वहीं इशिका भी आई हुई थी. परिचित ने दोनों का परिचय कराया. परिचय हुआ तो दोनों में बातें होने लगीं. दोनों को एकदूसरे से बात कर के काफी अच्छा लगा. बात करने के बाद इशिका फिर मिलने के वादे के साथ वहां से चली गई.

इशिका के तीखे नैननक्श और बात करने के अंदाज ने शिवम का चैन छीन लिया था. इशिका से मिलने के बाद उस के दिमाग में हर समय इशिका के ही खयाल उमड़उमड़ कर आ रहे थे. वह बारबार सिर झटकता, दिमाग से कुछ और सोचने की कोशिश करता, लेकिन सब व्यर्थ ही जाता. इशिका उस के दिलोदिमाग पर इस कदर छा गई थी कि लाख जतन के बाद भी वह उस का खयाल दिमाग से नहीं निकाल पा रहा था.

दूसरी ओर इशिका को भी शिवम पसंद आ गया था. वह स्मार्ट तो था ही, साथ ही अपनी बातों से किसी का भी दिल जीत सकता था. उस की इसी खासियत के कारण इशिका भी उसे दिल दे बैठी थी. वह जितनी बार उस के बारे में सोचती, उतनी ही बार चेहरे पर हया के बादल छा जाते और होंठों पर मुसकान सज जाती थी.

जल्द ही दोनों ने एक रेस्टोरेंट में मुलाकात की. फिर अनगिनत मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया. दोनों एकदूसरे के नजदीक आने लगे. मुलाकातों के दौरान दोनों को एकदूसरे को समझने का मौका मिला.

एक दिन मौका देख कर शिवम ने इशिका से अपने प्यार का इजहार करने का फैसला कर लिया. दोनों एकदूसरे की आंखों में झांक कर दिल का हाल जान चुके थे, देर थी तो बस जुबां से इजहार करने की.

एक मुलाकात के दौरान शिवम ने इशिका का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘इशिका, हम दोनों काफी समय से मिल रहे हैं. एकदूसरे को ठीक से जान गए हैं. हमारी सोच और विचार भी बहुत मिलते हैं. हम दोनों को एकदूसरे का साथ भी बहुत पसंद है. हमारी आंखों में भी एकदूसरे के लिए प्यार दिखता है.

चुपकेचुपके प्यार करने से क्या फायदा, जब प्यार करते है तो जुबां पर लाएं भी. आज मैं तुम से प्यार का इजहार करता हूं. आई लव यू… आई लव यू इशिका.’’ कह कर शिवम बडे़ प्यार से इशिका की तरफ देखने लगा.

इशिका उस के इजहार से काफी खुश हुई और बोली, ‘‘आई लव यू टू शिवम. मैं भी तुम्हें बहुत चाहती हूं. लेकिन इजहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. आज तुम ने मुझे बहुत बड़ी खुशी दी है.’’ कह कर इशिका शिवम के सीने से लग गई.

शिवम ने भी उसे अपनी बांहों में भर लिया. इस तरह दोनों के बीच प्यार की शुरुआत हो गई.

शिवम अकसर इशिका के घर से कुछ दूरी पर आ कर उसे फोन करता और इशिका उस से मिलने चली आती. इशिका के घर के पास ही भरत रहता था. वह इशिका की खूबसूरती पर मर मिटा था. उसे इशिका बेहद पसंद थी. वह उस के आगेपीछे मंडराता रहता था. लेकिन इशिका उसे पसंद नहीं करती थी. फिर भी भरत उस के पीछे पड़ा था.

एक दिन भरत ने रास्ते में रोक कर इशिका को फूल दे कर अपने प्यार का इजहार किया, ‘‘इशिका, मैं तुम से बेइंतहा प्यार करता हूं. तुम मेरा प्यार स्वीकार कर लो, मैं तुम्हें जीवन भर खुश रखूंगा, किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा.’’

‘‘पागल हो गए हो तुम. मैं तुम्हें पसंद नहीं करती, प्यार करना तो दूर की बात है. मेरे रास्ते में भी न आया करो, न आगेपीछे घूमा करो. मैं किसी और को चाहती हूं, उसी के साथ अपनी जिंदगी बिताऊंगी.’’ कह कर इशिका वहां से चल दी.

इशिका को जाते देख कर भरत बड़बड़ाया, ‘‘मैं भी देखता हूं कि तुम मुझे ठुकरा कर किसी और को कैसे अपनाती हो.’’

इस के बाद वह इशिका पर नजर रखने लगा. जब भी इशिका शिवम से मिलने घर के पास जाती तो भरत वहां पहुंच जाता और किसी बात पर शिवम से झगड़ने लगता.

 

इशिका ने भरत द्वारा बदतमीजी किए जाने की बात भरत के घरवालों को बताई. इस पर भरत ने दोबारा ऐसी हरकत न करने का वादा लिया.

लेकिन भरत इशिका को दूसरे की होते हुए भी नहीं देखना चाहता था. इसलिए वह शिवम से भिड़ जाता था. जब भरत बारबार परेशान करने लगा तो इशिका ने शिवम से कहा कि भरत को रास्ते से हटा दो. भरत उस के साथ पहले भी बदतमीजी कर चुका है.

शिवम तो वैसे भी आपराधिक प्रवृत्ति का था. उस ने इशिका की बात सहर्ष मान ली.

22 अक्तूबर, 2020 की रात करीब साढ़े 8 बजे शिवम ने भरत को फोन कर के मिलने के लिए बुलाया. भरत उस से मिलने यंग स्ट्रीम स्कूल के पीछे पहुंच गया. शिवम ने भरत को फिर से समझाया कि वह इशिका पर गलत नजर न रखे, इसी में उस की भलाई है.

भरत भी तेवर दिखाते हुए बोला, ‘‘इशिका क्या तेरी बहन लगती है जो तू उस का इतना पक्ष ले रहा है.’’

 

इस बात पर शिवम को गुस्सा आ गया और उन दोनों के बीच झगड़ा बढ़ गया. तभी शिवम ने पास रखे लोहे के चापड़ से भरत के सिर व गले पर ताबड़तोड़ कई वार कर किए, जिस से भरत की मौत हो गई.

इस के बाद शिवम ने लोहे का चापड़ और भरत का मोबाइल फोन कुछ दूरी पर नाले के किनारे फेंक दिया. जिस बजाज सुपर स्कूटर पर बैठ कर वह वहां आया था, उसी से वापस चला गया.

पूछताछ के बाद इंसपेक्टर पंकज सिंह ने शिवम की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की चापड़ और स्कूटर नंबर यूपी32जे 6395 बरामद कर लिया. गिरफ्तारी के समय शिवम के पास से 315 बोर का एक तमंचा और एक कारतूस भी बरामद हुआ.

आवश्यक कानूनी कागजात तैयार करने के बाद पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

 

अलसी खाने से होते हैं ये 9 फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

अलसी को अंगरेजी में फ्लैक्स सीड्स कहते हैं. छोटेछोटे कत्थई से अलसी के दानों में सेहत का खजाना छिपा होता है. ये ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा जरीया हैं, जो सेहत को चमकाने में भरपूर मदद करता है. अलसी में अल्फा लिनोलेयिक एसिड के रूप में 50 फीसदी तक ओमेगा फैटी एसिड पाया जाता है. इस में एंटीआक्सीडेंट्स, विटामिन बी व डाइटरी फाइबर भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद कारगर हैं.

अलसी का सेवन कैसे करें

  1. अलसी को साबूत, भून कर या सूखी चटनी बना कर खा सकते हैं.
  2. अलसी का तेल निकाल कर भी इसे खाने में इस्तेमाल किया जाता है.
  3. इसे पीस कर सूखे मेवों के साथ मिला कर इस के लड्डू बना कर भी इसे खाया जाता है.
  4. अलसी के दानों का पाउडर 1 चम्मच रोज सुबह कुनकुने पानी के साथ भी लिया जा सकता है या इसे अपने एनर्जी ड्रिंक में भी मिला कर पी सकते हैं.
  5. इसे किसी भी पकवान में मिला कर खाया जा सकता है.
  6. अलसी के पाउडर को कभी भी सीधे गरम तेल में नहीं डालना चाहिए, क्योंकि ज्यादा गरमी में इस की पौष्टिकता खत्म हो जाती है और इस का स्वाद भी कड़वा हो जाता है.
  7. अलसी का पाउडर रोजाना 2 चम्मच से ज्यादा नहीं खाना चाहिए. शुरुआत हमेशा कम मात्रा से करें और यदि इस से कोई दिक्कत न हो तो मात्रा बढ़ा सकते हैं.

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अलसी के फायदे

कैंसर का खतरा कम करना :

अलसी खाने से कैंसर होने का खतरा कम होता है, यह सूजन को कम करती है. यह दिल की बीमारियों को रोकने में मदद करती है.

उच्च रक्तचाप को कम करना :

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 33 फीसदी शहरी व 25 फीसदी ग्रामीण आबादी उच्च रक्तचाप की समस्या से परेशान है. अलसी को अपने भोजन में शामिल करने से यह रक्तचाप के स्तर को कम करती है. इस के सही मात्रा में इस्तेमाल से यह उच्च रक्तचाप व इस से होने वाले सिरदर्द को भी दूर करती है.

स्किन की देखभाल :

एक शोध के मुताबिक तेज धूप सीधे पड़ने से हमारी स्किन यानी त्वचा झुलस जाती है. अलसी के दानों के नियमित इस्तेमाल से त्वचा को नुकसान से बचाया जा सकता है.

डिप्रेशन ठीक करती है :

एक जापानी अध्ययन के मुताबिक अलसी के इस्तेमाल से डिप्रेशन की समस्या ठीक हो जाती है. जो लोग डिप्रेशन से घिरे होते हैं, उन में एक तरह के एसिड की कमी हो जाती है, जो अलसी के इस्तेमाल से पूरी हो सकती है.

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लीवर कैंसर के खतरे को कम करना :

आधुनिक रहनसहन और दिनचर्या ने स्वस्थ जीवन जीना मुश्किल कर दिया है. दिनचर्या में असंतुलन, जंक फूड और शारीरिक क्रियाकलापों में कमी की वजह से लीवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ गया है. लेकिन हाल ही में किए गए एक शोध के मुताबिक अलसी के नियमित इस्तेमाल से हम लीवर से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी कम कर सकते हैं.

कोलेस्ट्राल घटाती है :

आजकल लोगों में कोलेस्ट्रोल बढ़ने की समस्या आम है. इस का इलाज न होने पर यह धमनियों को जाम कर सकता है, जिस से दिल का दौरा पड़ सकता है. अलसी के दाने कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करने में मददगार होते हैं.

गठिया में लाभकारी :

अलसी के दानों के रोजाना इस्तेमाल से गठिया से जुड़ी समस्याओं जैसे दर्द, जकड़न से नजात मिलती है.

डायबिटीज काबू करती है :

अलसी के दाने टाइप 2 डायबिटीज में ब्लडशुगर लेवल को सही करते हैं. अपनी खुराक में नियमित रूप से अलसी का इस्तेमाल कर के ब्लडशुगर लेवल को ठीक रखा जा सकता है.

हारमोनों को  सही करती है :

मोनोपाज के बाद महिलाओं में होने वाली हारमोन से जुड़ी बीमारियां अलसी के दानों के नियमित इस्तेमाल से दूर हो सकती हैं.

– सरस्वती

चुनाव: पूर्व अनुमानों का सच!

चुनाव पूर्व सर्वेक्षण या अनुमानों का प्रचलन हमारे देश में 1957 से प्रारंभ हुआ जो आज अपने पूरे सबाब पर है. सच्चाई यह है कि बारंबार यह सिद्ध हुआ है कि जो गंभीरता चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में होनी चाहिए वह नदारद पाई गई है.

अन्यथा सीधी सी बात यह है कि विज्ञानिक फॉर्मूला भी है की दो और दो चार होता है मगर चुनाव सर्वेक्षणों में दो और दो पांच भी हो जाता है और कभी-कभी 3 भी. ऐसे में इनका कोई औचित्य नहीं रह गया है. सिर्फ एक समय पास शगल बन करके यह हमारे सामने मुंह चिढ़ाता खड़ा है.

अब जैसा की संपूर्ण उत्तर प्रदेश से एक आवाज उठ रही हमने देखी कि कैसे वहां समाजवादी पार्टी का वर्चस्व दिखाई दिया है. चुनाव में योगी आदित्यनाथ के विधायकों मंत्रियों पर लोगों ने चुनाव प्रचार के दौरान हमले किए इसके बावजूद लगभग सभी सर्वेक्षणों में भाजपा की सरकार बनती दिखाई दे रही है.

अब चंद घंटे ही रह गए हैं परिणाम सामने आएंगे मगर अनुमानों पर एक प्रश्न तो लग ही गया है.

हम चुनावी सर्वेक्षणों को देखें तो उत्तर प्रदेश में साल 2012 में हुए चुनाव नतीजा पूर्व सर्वेक्षण में समाजवादी पार्टी को उनके विरोधियों से बेहतर प्रदर्शन के साथ ही “त्रिशंकु विधानसभा” की बात थम ठोक कर  की गई थी. मगर हम जानते हैं चुनाव परिणाम आने के बाद समाजवादी पार्टी ने 403 विधानसभा में 224 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी.

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इस चुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी को 80 सीटें मिली थीं. वहीं, भाजपा और कांग्रेस क्रमशः केवल 47 और 28 सीटें ही जीतने में कामयाब हो सके थे.

यह सच है कि विगत  2017 के विधानसभा चुनाव में अधिकतर नतीजा पूर्व सर्वेक्षण सच साबित हुए थे.  नतीजा पूर्व सर्वेक्षणों अनुमानों में भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत की भविष्यवाणी की गई थी जो सही पाई गई थी.

मगर हमें यह भी याद रखना होगा कि 2017 में “मोदी लहर” स्पष्ट रूप से देखी जा रही थी और समाजवादी पार्टी अपने ही संक्रमण में फंसकर खत्म होने की कगार पर साफ दिखाई दे रही थी. इसलिए 2017 के सर्वेक्षण अनुमान बहुत ही सहज थे.

2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस गठबंधन और बसपा कहीं टिके नहीं ,403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा ने ऐतिहासिक 312 सीटे हासिल कर सरकार बनाई . वहीं, सपा ने 47 और कांग्रेस ने सात सीटें जीती थीं. बसपा ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

इस दफा सभी बड़ी कंपनियों ने, जो चुनाव सर्वेक्षण प्रस्तुत करती हैं की साख दांव पर लगी साफ दिखाई दे रही है.

कई दफा झूठे सिद्ध हुए हैं अनुमान

ऐसा कई कई दफा हो चुका है जब हमारे देश में चुनाव पूर्व सर्वेक्षण अनुमान एकदम “डब्बा” साबित हुए हैं . इसके बावजूद इस परिपाटी के खत्म होने की बजाय या इसमें सुधार होने की बजाय यह अपना रूटीन काम करते हुए हमारा मुंह चिढ़ा रहे  हैं.

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अगर हम इतिहास में जाएं तो 1996 में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने का अनुमान था और ऐसा ही हुआ. परिणाम स्वरूप अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिन की सरकार चली और अटल बिहारी वाजपेई सदन में बहुमत नहीं जुटा पाए. इसके बाद एचडी देवेगोड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के नेतृत्व में सरकारें चलीं.वर्ष 1998 में लोकसभा चुनाव के दौरान भी नतीजा पूर्व सर्वेक्षण सही साबित हुए थे.इन सर्वेक्षणों में भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 200 से अधिक सीटो का अनुमान लगाया गया था. परिणाम आए तो राजग को 252 सीटें प्राप्त हुईं थीं. कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को इस चुनाव 119 सीटें मिलीं.

इस सब के बावजूद अगर हम दृष्टिपात करें तो यह सच है कि हमारे देश में हर चुनाव में लगभग सर्वेक्षण गलत ही सिद्ध होते हैं. अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत चुनाव सर्वेक्षणों में मिल गई था मगर जब प्रणाम आए तो तृणमूल कांग्रेस की सरकार बन गई.

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत दिखाया जा रहा था मगर उसका चुनाव में सूपड़ा ही साफ हो गया था.

रियल शादी में शूट हुआ ‘इंडियन आयडल 12’ फेम पवनदीप राजन-अरूनिता कांजीलाल का नया सॉन्ग

उन्नीस वर्षीया बाणगांव, पश्चिम बंगाल निवासी क्लासिकल व सेमी क्लासिकल गायिका अरूनिता कांजीलाल दस वर्ष की उम्र से ही गा रही हैं. दस वर्ष की उम्र में ही अरूनिता कांजीलाल ने ‘सारेगामापा बंगाली’की विजेता बनी थी. उसके बाद उन्होंने कई हिंदी व गुजराती भाषा में भी गीत गाए.अयनिता ने 2021 में ‘तेरे बगैर’,‘तेरी उम्मीद’सहित करीबन दस हिंदी के संगीत अलबम में अपनी आवाज दी.

वह ‘इंडियन आय़डल 12’की रनर अप रहीं,जहां उनके दोस्त पवनदीप राजन विजेता बने. दस रियालिटी शो से पहले अरूनिता कांजीलाल व पवनदीप राजन एक साथ हिंदी के छह संगीत अलबमों के लिए संगीतकार हिमेष रेशमिया के संग गा चुके थे.कुछ दिन पहले दोनों एक साथ लंदन की सड़कों पर हाथ में हाथ डाले घूमते हुए नजर आए थे.तब कहा गया था कि वह एक अलबम की शूटिंग कर रहे हैं.

बहरहाल,  अब पुनः अरूनिता कांजीलाल और पवनदीप राजन नए सिंगल संगीत अलबम ‘‘बाबुल’’ के लिए एक साथ आए हैं.संगीतकार विपीन पटवा के निर्देशन में इस नए गाने को हाल ही में अरूनिता कांजीलाल ने रिकॉर्ड किया. जबकि पवनदीप राजन ने म्यूजिक अरेंजमेंट किया. चॉकलेट पाय सिंगल ने इस गाने का निर्माण किया हैं.

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‘वायकाम 18’’ की फिल्म ‘‘लव यू सोनियो’ के अलावा मराठी फिल्म ‘कोल्हापुर डायरीज‘ के निर्देशक जो राजन ने इस विवाह गीत का वीडियो फिल्माया है. म्यूजिक वीडियो ‘बाबुल’ अपने आप में अनूठा है.क्योंकि इसे शादी का कृत्रिम माहौल बनाकर नहीं बल्कि वास्तविक शादी में फिल्माया गया. जहां रीटेक या रिहर्सल नहीं हुई. मशहूर गायक व संगीतकार विपीन पटवा कहते हैं-‘‘मैं और जो राजन पिछले 10 साल से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.उनकी फिल्म ‘लव यु सोनियो’ से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ था.

हाल ही में जो राजन ने मुझे इस गाने का कॉन्सेप्ट बताया. तो ऐसे अनुठे गाने के लिए उनके साथ काम करने के लिए मैं काफी उत्साहित था.” निर्देशक जो राजन कहते हैं- ‘‘शायद यह पहली बार हैं कि एक गाने को रिकॉर्ड करके उसे एक विवाह समारोह में फिल्माया गया हो.यह निजी तौर पर देखने के लिए नहीं होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर रिलीज होने के लिए भी तैयार है. ट्रैक की रचना करने वाले के लिए विपिन और संगीतमय रूप से रचना करने के लिए बहु-प्रतिभाशाली पवनदीप राजन के साथ हमें जुड़ने का मौका मिला. अरूनिता भी एक प्रतिभाशाली गायिका हैं.”

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अरूनिता कहती है-” जो राजन सर और विपीन पटवा जी के साथ पहली बार काम किया. उनके साथ काम करने का अनुभव काफी बेहतरीन रहा. यह मेरा पहला बिदाई गीत है. गाने की कई सारी बारीकियां मुझे जो राजन सर ने समझायी.गाना काफी सुरीला बना है.”

शादी से पहले ही अक्षू और अभिमन्यु के रिश्ते में आएगी दरार, देखें Video

स्टार प्लस का सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में लगातार महाट्विस्ट दिखाया जा रहा है. शो की कहानी का ट्रैक फैंस का दिल जीत रहा है. शो से जुड़ा एक लेटेस्ट वीडियो सामने आया है. अक्षू और अभिमन्यु के रिश्ते में दरार देखने को मिल रहा है. आइए बताते हैं इस वीडियो के बारे में.

शो में अभिमन्यु और अक्षरा  की शादी होने जा रही है. शो में दिखाया जा रहा है कि उनकी शादी की रस्में भी शुरू हो चुकी है और खास बात तो यह है कि तिलक पर अभिमन्यु ने ग्रैंड एंट्री भी की थी.

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लेकिन शो का एक प्रोमो सामने आया है,  जिसमें आप देख सकते हैं कि अक्षरा और अभिमन्यु में शादी से पहले ही दरार आ जाएगी. वीडियो के मुताबिक, अक्षरा अभि से उसके पापा को शादी में लाने की बात कहेगी, जिससे वह नाराज हो जाएगा और अक्षू को इन सबसे दूर रहने की सलाह देगा.

 

वीडियो में ये भी दिखाया गया कि दोनों के रास्ते अलग-अलग हो जाते हैं. तभी आरोही आ जाती है और कहती है, ‘शादी की शुभ शुरुआत तो हो गई. आप आइयेगा जरूर, साल की सबसे बड़ी शादी में.

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शो में अक्षरा और अभिमन्यु की जोड़ी लोगों के दिलों राज करती है, फैंस को भी दोनों की शादी का बेसब्री से इंतजार था. हाल ही में दिखाया गया कि तिलक के लिए दोनों परिवार राजी हो जाते हैं और उनकी तैयारियां भी जोरों-शोरों से चलती हैं. लेकिन हर्ष गोयनका के कारण नई मुसीबत खड़ी हो जाती है.

शो में दिखाया गया कि अक्षरा तिलक के लिए तैयार होती है, वह प्रार्थना करती है कि तिलक पर कुछ भी बुरा न होने दें. लेकिन तभी उसे हेयर ड्रायर से चिंगारी निकलती नजर आती है  जिसे देखकर वह घबरा जाती है और कहती है, ये अच्छा साइन नहीं है.

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विराट के घर में जबरदस्ती रहेगी सई, भवानी निकालेगी बाहर?

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी एक नया मोड़ ले चुकी है. शो की कहानी में दिलचस्प ट्रैक देखने को मिल रहा है. शो में अब तक आपने देखा कि विराट की अस्पताल से छुट्टी हो चुकी है. अब वह ठीक हो चुका है. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

शो में दिखाया गया कि सई ने विराट से माफी मांगने की पूरी कोशिश की. लेकिन विराट ने किसी को माफ नहीं करने का बड़ा फैसला किया है. शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि विराट की मां उससे माफी मांगेगी और घर में आने के लिए कहेगी. वह अपनी मां की बात मान जाएगा लेकिन एक शर्त रखेगा.

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विराट अपनी मां से कहेगा कि वह घर में बेटा बनकर नहीं रहेगा. वह अपने घर में एक अजनबी की तरह रहेगा. तो दूसरी तरफ अश्विनी को झटका लगेगा. लेकिन वह मान जाएगी क्योंकि विराट कम से कम उसके घर के अंदर होगा.

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तो दूसरी तरफ होलिका दहन के मौके पर सई चौहान हाउस में एंट्री मारेगी. तो वहीं भवानी उसे घर से निकालने की कोशिश करेगी. सई कहेगी कि उसने विराट को कभी तलाक नहीं दिया और कागजात असली नहीं थे. सई नकली तलाक के कागजात को आग में फेंक देगी. इस तरह सई चौहान हाउस में वापस आ जाएगी. वह विराट के साथ रहने का ऐलान करेगी. सई बैग और सामान लेकर घर में एंट्री मारेगी.

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सिंदूरी मूर्ति- भाग 3: जाति का बंधन जब आया राघव और रम्या के प्यार के बीच

राघव ने जब बताया था कि वह बाराबंकी के कुंभकार परिवार से है और उस का बचपन मूर्ति में रंग भरने में ही बीता है, तो मैं ने कहा था कि वह मूर्ति बना कर दिखाए. तब उस ने रंगीन क्ले ला कर बहुत सुंदर मूर्ति बनाई जो संभाल कर रख ली.

‘रम्या भी तो एक बेजान मूर्ति में परिवर्तित हो गई थी उन दिनों,’ राघव ने सोचा. वह हर शनिवाररविवार जब मिलने जाता तब उसे रम्या में वही स्वरूप दिखाई देता जैसा उस के बाबा दीवाली में लक्ष्मी का रूप बनाते थे. काली मिट्टी से बनी सौम्य मूर्ति. उस मूर्ति में जब वह लाल, गुलाबी, पीले और चमकीले रंगों में ब्रश डुबोडुबो कर रंग भरता, तो उस मूर्ति से बातें भी करता.

यही स्थिति अभी भी हो गई है. रम्या के बेजान मूर्तिवत स्वरूप से तो वह कितनी बातें करता था. लकवाग्रस्त होने के कारण शुरूशुरू में वह कुछ बोल भी नहीं पाती थी, केवल अपने होंठ फड़फड़ा कर या पलकें झपका कर रह जाती. बाद में तो वह भी कितनी बातें करने लगी थी. उस की जिंदगी में भी रंग भरने लगे थे. वह समझ ही नहीं पाया कि रंग भर कौन रहा है? वह रम्या की जिंदगी में या रम्या उस की जिंदगी में? अब रम्या जीवन के रंगों से भरपूर है. अपने अम्मांअप्पा के संरक्षण में गांव लौट गई है, उस की पहुंच से दूर. अब उस की सेवा की रम्या को क्या आवश्यकता? अब वह भी यहां से चला जाएगा. रम्या से फेसबुक और व्हाट्सऐप के माध्यम से जुड़ा रहेगा वैसे ही जैसे पंडाल में सजी मूर्तियों से मन ही मन जुड़ा रहता था.

‘‘चलो, सब आज सब का लंच साथ हैं याद है न?’’ रमन ने मेज थपथपाई.

सभी एकसाथ लंच करने बैठ गए तो रम्या ने कहा, ‘‘धन्यवाद तो मुझे तुम सब का देना चाहिए जो रक्तदान कर मेरे प्राण बचाए…’’

‘‘सौरी, मैं तुम्हें रोक रहा हूं. मगर सब से पहले तुम्हें राघव को धन्यवाद करना चाहिए. इस ने सर्वप्रथम खून दे कर तुम्हें जीवनदान दिया है,’’ मुरली मोहन बोला.

‘‘ठीक है, उसे मैं अलग से धन्यवाद दे दूंगी,’’ कह रम्या हंस रही थी. राघव ने देखा आज उस ने काले की जगह लाल रंग की बिंदी लगाई थी.

‘‘वैसे वह तेरा वनसाइड लवर भी बड़ा खतरनाक था… तुझे अपने इस पड़ोसी पर पहले कभी शक नहीं हुआ?’’ सुभ्रा ने पूछा.

‘‘अरे वह तो उम्र में भी 2 साल छोटा है मुझ से. कई बार कुछ न कुछ पूछने को किसी न किसी विषय की किताब ले कर घर आ धमकता था. मगर मैं नहीं जानती थी कि वह क्या सोचता है मेरे बारे में,’’ रम्या अपना सिर पकड़ कर बैठ गई.

लगभग सभी खापी कर उठ चुके थे. राघव अपने कौफी के कप को घूरने में लगा था मानो उस में उस का भविष्य दिख रहा हो.

‘‘तुम्हारा क्या खयाल है उस लड़के के बारे में?’’ रम्या ने पास आ कर उस से पूछा.

‘‘प्यार मेरी नजर में कुछ पाने का नहीं, बल्कि दूसरे को खुशियां देने का नाम है. अगर हम प्रतिदान चाहते हैं, तो वह प्यार नहीं स्वार्थ है और मेरी नजर में प्यार स्वार्थ से बहुत ऊपर की भावना है.’’

‘‘इस के अलावा भी कुछ और कहना है तुम्हें?’’ रम्या ने शरारत से राघव से पूछा.

‘‘हां, तुम हमेशा इसी तरह हंसतीमुसकराती रहना और अपनी फ्रैंड लिस्ट में मुझे भी ऐड कर लेना. अब वही एक माध्यम रह जाएगा एकदूसरे की जानकारी लेने का.’’

‘‘ठीक है, मगर तुम ने मुझ से नहीं पूछा?’’

‘‘क्या?’’

‘‘यही कि मुझे कुछ कहना है कि नहीं?’’ रम्या ने कहा तो राघव सोच में पड़ गया.

‘‘क्या सोचते रहते हो मन ही मन? राघव, अब मेरे मन की सुनो. अगले महीने अप्पा बाराबंकी जाएंगे तुम्हारे घर मेरे रिश्ते की बात करने.’’

‘‘उन्हें मेरी जाति के बारे में नहीं पता शायद,’’ राघव को अप्पा का कौफी पीना याद आ गया.

‘‘यह देखो इन रगों में तुम्हारे खून की

लाली ही तो दौड़ रही है और जो जिंदगी के पढ़ाए पाठ से भी सबक न सीख सके वह इनसान ही क्या… मेरे अप्पा इनसानियत का पाठ पढ़ चुके हैं. अब उन्हें किसी बाह्य आडंबर की जरूरत नहीं है,’’ रम्या ने अपना हाथ उस की हथेलियों में रख कर कहा, ‘‘अब अप्पा भी चाह कर मेरे और तुम्हारे खून को अलगअलग नहीं कर सकते.’’

‘‘तुम ने आज लाल बिंदी लगई है,’’ राघव अपने को कहने से न रोक सका.

‘‘नोटिस कर लिया तुम ने? यह तुम्हारा ही दिया रंग है, जो मेरी बिंदी में झलक आया है और जल्द ही सिंदूर बन मेरे वजूद में छा जाएगा,’’ रम्या बोली और फिर दोनों एकदूसरे का हाथ थामें जिंदगी के कैनवास में नए रंग भरने निकल पड़े.

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