मध्य प्रदेश के कुंडम व कटनी जिले के आदिवासी बच्चे बैगन के पौधे में टमाटर उगा रहे हैं. पर यह इतना आसान भी नहीं होता है. ऐसा ड्राफ्टिंग विधि से होता है, पर इन 2 जिलों के 30 गांवों के 498 बच्चे ग्राफ्टिंग के हुनर में काफी माहिर हो चुके हैं और अपना कमाल दिखा रहे हैं. बच्चों ने लिया प्रशिक्षण मध्य प्रदेश के दोनों जिले कुंडम और कटनी के ये बच्चे आदिवासी बहुल वाले इलाके ढीमरखेड़ा में उद्यानिकी की बारीकियां सीख रहे हैं. एक संस्था की तरफ से इन बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया है. कृषि के क्षेत्र में बच्चों के आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि संबंधी उपकरण दिए गए हैं.

बच्चों को अपने घर पर कचरे से खाद बनाने की जानकारी दी गई है. बच्चे खाद बना कर इस का उपयोग भी करते हैं. इस के साथ ही बच्चों की पढ़ाईलिखाई का भी खयाल रखा जाता है. सभी बच्चे बागबानी को प्रोत्साहित करने की योजना से जुड़ कर बैगन के पौधे में टमाटर को जोड़ दे रहे हैं. इसे ग्राफ्टिंग कहा जाता है. इस तकनीक में पौधे 2 महीने में फल देने लगते हैं. साथ ही, सामान्य टमाटर के पौधों की तुलना में इन की पैदावार भी अधिक होती है. ड्राफ्टिंग करने वाले सभी बच्चों की उम्र 10 साल से 15 साल की है. ग्राफ्टिंग तकनीक का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि इस तकनीक द्वारा उगाए गए पौधे काफी मजबूत होते हैं और लंबे समय तक उलट हालात में भी जिंदा रहते हैं.

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