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Manohar Kahaniya: जब जीजा पर चढ़ा साली का नशा

सौजन्य: मनोहर कहानियां

हंसीमजाक के रिश्ते में रंगीनमिजाजी जब नशा बन जाता है, तब इस में किसी भी तरह की रुकावट बरदाश्त नहीं होती. ऐसा ही नागपुर के एक कारोबारी के साथ हुआ, जिस ने अपनी साली के रिश्ते को न केवल नापाक कर दिया, बल्कि विरोध होने पर 5 लोगों को मौत के घाट भी उतार दिया…
भरी दोपहर का वक्त था. आलोक की दुकान में मटकतीलचकती अमिषा घुसते ही बोली, ‘‘क्यों जीजाजी, अब लेडीज का भी सामान बेचने लगे?’’

‘‘आप के लिए ही तो लाए हैं,’’ आलोक मुसकराते हुए बोला. ‘‘मेरे लिए! क्या मतलब है आप का?’’ अमिषा बोली.‘‘मतलब यह कि अब आप को अंडरगारमेंट्स के लिए दूसरी दुकान पर नहीं जाना पड़ेगा. ब्रांडेड आइटम लाया हूं. एकदम आप की फिटिंग के लायक.’’ आलोक दुकान के एक कोने की ओर इशारा करते हुए बोला, जहां मौडलों की बड़ी फोटो लगी थी. ‘‘जीजाजी, तब तो आप को सेल्सगर्ल रखनी पड़ेगी,’’ अमिषा झट से बोल पड़ी.

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‘‘सेल्सगर्ल क्यों, ग्राहक को मैं नहीं दिखा सकता क्या?’’ आलोक बोला.
‘‘अच्छा चलो, मैं ट्रायल करती हूं. मेरे लिए दिखाइए.’’ ‘‘तुम्हारा साइज तो मुझे पता है,’’ आलोक चुटकी लेते हुआ बोला. ‘‘धत्त! बड़े बेशर्म हो.’’ यह कहती अमिषा शरमाती हुई जैसे मटकती आई थी, वैसी ही तेज कदमों से चली गई. आलोक देर तक उसे जाते देखता रहा. यह बात 2 साल पहले की है. अधेड़ उम्र के आलोक माथुरकर नागपुर में गारमेंट की दुकान चलाता था. दुकान से मात्र 10 मीटर की दूरी पर ही बोबडे परिवार रहता था. बोबडे परिवार से उस का गहरा रिश्ता था, कारण वह उस की ससुराल थी.परिवार में उस के 60 वर्षीय ससुर देवीदास बोबडे, 55 वर्षीया सास लक्ष्मी बाई और 22 वर्षीया अविवाहित साली अमिषा बोबड़े रहते थे. ससुर देवीदास एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे. देवीदास की बड़ी बेटी विजया से आलोक ने प्रेम विवाह किया था. विजया भी विवाह से पहले अकसर आलोक की दुकान पर आती थी, वहीं वह आलोक से प्रेम करने लगी थी. अमिषा विजया से करीब 10 साल छोटी थी.

मिट गईं दूरियां आलोक के पिता उपेंद्र माथुरकर सालों पहले रोजीरोटी के लिए नागपुर शहर आ कर बस गए थे. उन्होंने पांचपावली इलाके में कपड़ों की सिलाई का काम शुरू किया था. आलोक उन का इकलौता बेटा था. उस का पढ़ाई में मन नहीं लगा. इस कारण वह पिता के पुश्तैनी काम में लग गया था. कपड़े की सिलाई के अलावा कपड़े की अच्छी जानकारी थी, सो उस ने अच्छीखासी गारमेंट की दुकान खोल ली थी, जिस से परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हो गई थी. आलोक का अपना सुखीसंपन्न परिवार था. उस के 2 बच्चे थे, जिन में बेटी परी 14 साल की और बेटा साहिल 11 साल का था. विजया आलोक के साथ खुश रहते हुए दांपत्य जीवन का निर्वाह कर रही थी, लेकिन आलोक रंगीनमिजाज किस्म का आदमी था.
दूसरी लड़कियों पर नजरें रखना और फूहड़ मजाक करना उस की आदत में शामिल था. साली को देखते ही उस के मन में तरहतरह के रोमांटिक विचार उमड़ने लगते थे.

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जब भी मौका लगता, दुकान से ससुराल चला जाता था, साली के साथ हंसीमजाक कर समय बिताया करता था. उस की सास न चाहते हुए भी चुप रहती थी. मजाकमजाक में एक दिन आलोक ने साली को अकेला पा कर बांहों में भर लिया. अमिषा उस दिन किसी तरह से उस की बाहों से छूटी, लेकिन जल्द ही जीजा के आगे आत्मसमर्पण कर दिया. आलोक ने इस बारे में किसी को नहीं बताने की हिदायत दी.
अमिषा भी एक बार सैक्स का स्वाद लगने पर बेचैन रहने लगी. दूसरी तरफ आलोक उस के साथ अंतरंग संबंध बनाने के लिए मौके की तलाश में रहने लगा. साली की सुंदरता और सैक्स का काकटेल उस के दिमाग में नशे की तरह छा गया था. और फिर उन्होंने अनैतिक संबंध को ही जीवन का एक हिस्सा बना लिया. दोनों इस रिश्ते को ज्यादा दिनों तक छिपा कर नहीं रख पाए. पहले आलोक की पत्नी विजया ने जीजासाली को अंतरंग रिश्ते बनाते रंगेहाथों पकड़ा. उस ने अपने पति की जम कर झाड़ लगाई. बहन को भी समझाया. फिर भी दोनों अपनी मस्ती में डूबे रहे.

.जल्द ही इस की भनक अमिषा की मां और पिता को भी लग गई. उन्होंने अमिषा को तो आडे़ हाथों लिया ही, साथ में आलोक माथुरकर को भी नहीं छोड़ा. हालांकि बेटी की इस हरकत पर उन्हें गहरा धक्का लगा था.उन्होंने अमिषा को प्यार से समझाया अपनी रिश्तेदारी, समाज में बदनामी और उस की बहन के घर की बरबादी का वास्ता दिया. मांबाप के समझानेबुझाने का असर अमिषा पर सिर्फ इतना हुआ कि उस ने आलोक से दूरियां बना लीं. यह बात जनवरी, 2021 की थी.

सिर से पांव तक अमिषा के रंग में डूबे आलोक को उस की दूरियां बरदाश्त नहीं हो रही थीं. वह जितना ही अमिषा के पास जाने की कोशिश कर रहा था, वह उस से उतनी दूर होती जा रही थी.कई बार मौका देख कर अपनी ससुराल भी गया, लेकिन सासससुर के मौजूद रहने के कारण अमिषा से बात तक नहीं कर पाया. वह जब भी ससुराल जाता, उसे नसीहत सुनने को मिलती.बेटी और दामाद का रिश्ता न खराब हो, इस के लिए उन्होंने अमिषा के योग्य कोई अच्छा सा लड़का ढूंढ कर उस की शादी कर देने में ही भलाई समझी.
इस बात की जानकारी जब आलोक को लगी तो उस का खून खौल उठा. उस ने मन ही मन यह तय किया कि अगर अमिषा उस की नहीं तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा. इसी बात को ले कर वह अमिषा को फोन पर तरहतरह की धमकियां भी देने लगा था.

अप्रैल, 2021 के महीने में लौकडाउन के समय तो आलोक ने हद ही कर दी. एक दिन दोपहर को मौका देख कर वह अपनी ससुराल गया. जाते ही अमिषा के साथ जोरजबरदस्ती करने लगा. वह अपनी हरकत में कामयाब होता, इस के पहले वहां अमिषा के मांबाप आ गए.उन्होंने आलोक को न केवल डांटाफटकारा, बल्कि उस के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत भी दर्ज करवा दी. पुलिस ने परिवारिक मामले को ध्यान में रखते हुए आलोक पर फौरी तौर पर काररवाई की. उस से माफीनामा लिखवाया और चेतावनी दे कर छोड़ दिया. बदले की आग

बात आईगई हो गई, किंतु आलोक अमिषा के साथ वासना पूर्ति की आग में तपता रहा. वह मौके की ताक में रहते हुए बदले की भावना से भी भर चुका था.पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अमिषा के घर वालों को थोड़ी राहत जरूर मिली थी, जबकि आलोक ने पुलिस की काररवाई और माफीनामे को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था. अब उसे अपनी ससुराल और अमिषा से नफरत हो गई थी. उन्हें सबक सिखाने के लिए उस ने एक खतरनाक योजना बना ली थी.उस ने मई महीने में औनलाइन कुछ घरेलू सामान मंगाया. उस में उस ने एक लंबा मटन काटने का चाकू भी मंगवा लिया.

23 जून की रात 10 बजे के करीब आलोक अपनी ससुराल जा पहुंचा. घर पर अमिषा अकेली थी. पिता देवीदास अपनी ड्यूटी पर चले गए थे. मां लक्ष्मीबाई पड़ोस के बच्चे के नामकरण कार्यक्रम में गई हुई थी.
अमिषा अपने कमरे में बैठी अपनी दोस्त के साथ मोबाइल पर चैट कर रही थी. अचानक अपने कमरे में आलोक को देख वह चौंक गई. हड़बड़ाते हुए पूछा, ‘‘जीजाजी आप?’’उस ने मोबाइल को वैसे ही छोड़ दिया. जिस में उन के बीच की बातें रिकौर्ड होने लगीं.‘‘हां मैं, तुम किस से बातें कर रही थीं?’’ आलोक ने कहा.
‘‘आप से मतलब, मैं अपने मन की मालकिन हूं, जिस से चाहूंगी बात करूंगी.’’ अमिषा ने कड़क शब्दों में कहा.आलोक जलभुन गया. वह बोला, ‘‘तुम ने मेरी शिकायत पुलिस में क्यों की थी?’’
‘‘आप की हरकत से घर वाले सब परेशान हो गए थे. बेशर्मी की हद होती है. सब के सामने मुझे जलील कर दिया.’’ अमिषा ने सख्ती से कहा.

इस बात पर आलोक का गुस्सा फूट पड़ा था. उस ने कहा, ‘‘अब मैं तुम्हें इस लायक ही नहीं छोड़ूंगा कि तुम पुलिस थाने जा सको.’’यह कहते हुए आलोक ने अमिषा को पकड़ लिया था. अमिषा खुद को आलोक से छुड़ाने की कोशिश करने लगी. काफी कोशिशें कीं मगर सफल नहीं हुई. सैक्स का उन्माद उतर जाने के बाद ही अमिषा उस के चंगुल से आजाद हो पाई. आलोक द्वारा हाथ से मुंह बंद किए जाने के कारण शोर नहीं मचा पाई. घर से बाहर जाने की कोशिश करने लगी. मगर आलोक ने उसे इस का मौका नहीं दिया. छिपा कर लाए चाकू से एक झटके में अमिषा का गला रेत दिया. वह जमीन पर गिर पड़ी.

खून से लथपथ अमिषा तड़पती रही और आलोक बुत बना उसे देख रहा. इस के पहले कि अमिषा के प्राणपखेरू उड़ते, कमरे में अमिषा की मां लक्ष्मीबाई आ गई. बेटी अमिषा की हालत देख कर चीखते हुए बोली, ‘‘आलोक, यह तुम ने क्या किया?’’आलोक ने लक्ष्मीबाई के गले पर चाकू फिराते हुए कहा, ‘‘चिल्लाओ मत, पड़ोसी आ जाएंगे.’’और फिर उस ने लक्ष्मीबाई का गला भी एक झटके में रेत डाला. आधे घंटे तक वहीं रहने के बाद वह अपने घर आ गया था. बताते हैं कि अपनी ससुराल से वापस घर आने के बाद भी आलोक का क्रोध शांत नहीं हुआ. उसी क्रोध में उस ने पहले अपनी पत्नी की हत्या कर दी. फिर मासूम बेटे साहिल और बाद में बेटी परी को भी मौत की नींद सुला दिया.

अपने पूरे परिवार की हत्या के बाद आलोक का मन शांत हुआ, लेकिन वह विक्षिप्तावस्था में आ चुका था. उस ने कमरे के पंखे से लटक कर अपनी जीवनलीला भी समाप्त कर ली. इस तरह से एक घंटे के भीतर 6 हत्या- आत्महत्या की वारदात की जानकारी अगले रोज हुई.जून महीने की 24 तारीख को दिन के करीब 11 बज चुके थे, नागपुर में में पाचपावली के रहने वाले आलोक माथुरकर का दरवाजा नहीं खुला था. उन के पड़ोस में रहने वाले भोसले परिवार को हैरानी हुई.

रोज सुबह 8 बजे फ्रैश हो कर अपने काम में लग जाने वाले का घर बंद होने पर भोसले परिवार के लोगों ने मकान की कालबेल दबाई. दरवाजा खटखटाया, आवाज दी.कई बार ऐसा करने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला और न मकान के भीतर से कोई आवाज आई, तब वह किसी अनहोनी की आशंका से घबरा गए.
मकान के पीछे लगी खिड़की के पास गए. हलके से धक्के के साथ खिड़की खुल गई. भीतर का मंजर देख कर भोसले परिवार के होश उड़ गए. उन की आंखों के सामने आलोक का सब से छोटा बेटा खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था.उन्होंने मामले की खबर पहले मकान मालिक प्रमोद भिभिकर और फिर थानाप्रभारी जयेश भंडारकर को दी.

कई हत्याओं से सहमा शहर

थाने की ड्यूटी पर तैनात एसआई राज राठौर को मामले की डायरी बनाने का आदेश मिला. जबकि इस की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को देने के बाद एएसआई संदीप बागुल, एसआई राज राठौर, हैडकांस्टेबल रवि पाटिल कुछ समय में ही घटनास्थल पर पहुंच गए. इस बीच यह खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई थी.पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़ कर मकान में प्रवेश किया. अंदर 3 लाशें जमीन पर खून से सनी हुई थीं, जबकि एक पंखे से झूल रही थी. पंखे से झूलती लाश की पहचान आलोक माथुरकर के रूप में हुई और बाकी लाशें उस की पत्नी विजया और उस के बच्चों परी एवं साहिल की थीं.

थानाप्रभारी जयेश भंडारकर अपने सहायकों के साथ अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि तभी पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार, एडिशनल पुलिस कमिश्नर सुनील फुलारी के साथ फोटोग्राफर और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट भी मौकाएवारदात पर पहुंच गए.
उसी समय उन्हें पास में ही एक दूसरे हत्याकांड की सूचना मिली. थानाप्रभारी ने पुलिस की दूसरी टीम को दूसरे घटनास्थल पर भेज दिया.

दोनों घटनास्थल महज 10 मीटर की दूरी पर ही थे. दूसरा स्थान आलोक की ससुराल था, जहां उस की सास लक्ष्मीबाई और साली अमिषा मृत पड़ी थीं. दोनों घटनाओं में सभी की गरदन भी चाकू से रेती गई थी.
परिवार के मुखिया देवीदास ने पुलिस को बताया कि सभी हत्याओं के पीछे उस के दामाद आलोक का ही हाथ है.दोनों घटनास्थल की तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लाशों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए नागपुर मैडिकल कालेज भेज दिया गया. उस के एकमात्र गवाह के तौर पर देवीदास से थाने में पूछताछ की गई.

मौके पर बरामद मोबाइल की रिकौर्डिंग से आलोक और अमिषा के बीच संबंधों का खुलासा हो गया. फिंगरप्रिंट से भी आलोक द्वारा हत्याओं को अंजाम दिए जाने की पुष्टि हो गई.
एक ही दिन में 6 लोगों की हत्या और आत्महत्या के मामले की गुत्थी को कुछ घंटों में ही सुलझा लिया गया और जांच एडिशनल पुलिस कमिश्नर सुशील फुलारी को सौंप दी गई. 2 परिवारों में अगर कोई बचा था तो वह थे आलोक के ससुर देवीदास. उन की किस्मत थी जो उस रात अपनी ड्यूटी पर थे. किंतु वे उस किस्मत का क्या करते, जब उन्हें कोई अपना कहने वाला ही नहीं रहा.

प्याज व लहसुन फसल: रोग और कीटों से रहें सावधान

Writer- प्रो. रवि प्रकाश मौर्य

लगातार मौसम में बदलाव होने से इस समय प्याज और लहसुन की फसल में कई तरह के रोग लगने की संभावना बनी रहती है. अगर समय रहते इन का प्रबंधन नहीं किया गया, तो प्याज व लहसुन की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इस बारे में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के सेवानिवृत्त वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और अध्यक्ष, प्रोफैसर रवि प्रकाश मौर्य ने प्याज व लहसुन की खेती करने वाले किसानों को सलाह दी है कि मौसम की अनुकूलता के आधार पर दोनों फसलों में ?ालसा, मृदुरोमिल फफूंदी, बैगनी धब्बा रोग और थ्रिप्स कीट से सावधान रहने की आवश्यकता है.

वे कहते हैं कि अलसा रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियां एक तरफ पीली और दूसरी तरफ हरी रहती हैं, वहीं मृदुरोमिल रोग में पत्तियों की सतह पर बैगनी रोएंदार बढ़वार दिखाई पड़ती है, जो बाद में हरा रंग लिए पीली हो जाती हैं.

दोनों रोगों की रोकथाम के लिए मैंकोजेब 75 डब्ल्यूपी 2.5 ग्राम प्रति लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें, वहीं बैगनी धब्बा रोग में प्रभावित पत्तियों और तनों पर छोटेछोटे गुलाबी रंग के धब्बे पड़ जाते हैं, जो बाद में भूरे हो कर आंख के आकार के हो जाते हैं और इन का रंग बैगनी हो जाता है. इस रोग के प्रबंधन के लिए डिफेनोकोनाजोल 2.5 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें.

प्याज व लहसुन में थ्रिप्स कीट का प्रकोप भी ऐसे मौसम में अधिक होता है. ये कीट छोटे पीले रंग के होते हैं. इन के शिशु व प्रौढ़ दोनों ही पत्तियों का रस चूसते हैं, जिस के कारण पत्तियों पर हलके हरे रंग के लंबेलंबे धब्बे दिखाई पड़ते हैं, जो बाद में सफेद रंग के हो जाते हैं. इस के प्रबंधन के लिए साइपरमेथ्रिन 1 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करें.

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ध्यान रहे कि प्याज व लहसुन की पत्तियां चिकनी होती हैं. यही वजह है कि उस पर दवा चिपक नहीं पाती है, इसलिए चिपचिपा पदार्थ ट्राइटोन या सेंडोविट 1 मिलीलिटर प्रति लिटर  पानी में घोल कर छिड़काव करें.

दवाओं के छिड़काव के कम से कम

2 हफ्ते बाद ही प्याज व लहसुन को खाने में प्रयोग करें. दवा के छिड़काव के बाद नहाएं और कपड़ों को अच्छी तरह साबुन से धो लें.

जैव उर्वरक उपयोग करने से पहले जानें कुछ बातें हमारे यहां खेती में जैव उर्वरकों में राइजोबियम बैक्टीरिया, एजोटोबैक्टर, फास्फोरस  घोलक जीवाणु, पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया, एजोस्पिरिलम के साथ ही माइक्रोराइजा का इस्तेमाल किया जाता है.

ऐसे करें इस्तेमाल

* बीज या जड़ों को शोधित किया जाता है.

* भूमि शोधन में इस्तेमाल किया जाता है.

* शोधन करने के लिए बीजोपचार

200 ग्राम प्रति 10 किलोग्राम बीज की दर से करें या फिर 50 से 100 ग्राम गुड़ के घोल में मिला कर शोधन करते हैं.

* भूमि शोधन के लिए जड़ या कंद के उपचार के लिए 15 से 20 लिटर पानी में

1 किलोग्राम जैव उर्वरक का घोल बना कर पौधे की जड़ों या कंदों को 10 से 20 मिनट तक शोधित कर के खेत में रोपाई करें.

* मिट्टी के उपचार के लिए 5 से 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से जैव उर्वरक को 200 से 300 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद में मिला कर आखिरी जुताई के समय खेत में इस्तेमाल करना चाहिए.

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इस्तेमाल से पहले कुछ खास सावधानियां

* जैव उर्वरक खरीदने और इस्तेमाल करने से पहले उस की ऐक्सपायरी डेट जरूर देख लें.

* जैव उर्वरक का इस्तेमाल कड़ी धूप में कभी भी न करें. हमेशा सुबह या शाम के समय इस का इस्तेमाल करना चाहिए.

* खेत में सही नमी होना बहुत ही जरूरी है.

* किसी भी कैमिकल के साथ इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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कोर्ट मैरिज करने के लिए किन किन डौक्यूमैंट्स की जरूरत होती है?

सवाल

मैं एक लड़के से प्यार करती हूं. यह बात हम दोनों के घर वालों को मालूम है. हम शादी करना चाहते हैं. मेरे घर वालों की सहमति है, पर लड़के के माता पिता इस रिश्ते के लिए राजी नहीं हैं. इसीलिए हम दोनों ने कोर्ट मैरिज करने का फैसला किया है. जानना चाहती हूं कि इस के लिए किन किन डौक्यूमैंट्स की आवश्यकता होती है?

जवाब

आप ने स्पष्ट नहीं किया कि लड़के के माता पिता इस रिश्ते के खिलाफ क्यों हैं? यदि लड़के में कोई ऐब नहीं है, उस के माता पिता के एतराज के पीछे कोई ठोस वजह नहीं है और आप इस रिश्ते के प्रति पूरी तरह गंभीर हैं, खासकर लड़का, तभी विवाह का फैसला लें.

भरसक प्रयत्न करें कि घर वालों को राजी कर लिया जाए. परिवार के किसी सदस्य, रिश्तेदार या किसी पारिवारिक मित्र से उन पर दबाव बनवाया जा सकता है.

यदि वे किसी भी तरह विवाह के लिए तैयार नहीं होते तभी कोर्ट मैरिज के विषय में सोचें. इस के लिए आप दोनों को जन्म प्रमाण पत्र और आवासीय प्रमाण पत्र की आवश्यकता होगी. इन के अलावा दोनों की ओर से 2-2 गवाहों की दरकार होगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

आखिरी मुलाकात: भाग 2

Writer- Shivi Goswami

सुमेधा मुझे देखे जा रही थी और मेरी घबराहट उस की नजरों को देख कर बढ़ती जा रही थी. वह धीमी आवाज में बोली, ‘मैं तुम से नाराज हूं…’

मैं उस की तरफ एकटक देखे जा रहा था.

‘मैं तुम से नाराज हूं इसलिए क्योंकि तुम ने यह बात कहने में इतना समय लगा दिया और मुझे लगता था कि मुझे ही प्रपोज करना पड़ेगा.’

उस की बात को सुन कर मुझे लगा कि कहीं मेरे कानों ने कुछ गलत तो नहीं सुन लिया था. कहीं यह सपना तो नहीं? लेकिन वह कोई सपना नहीं हकीकत थी.

मैं ने लंबी सांस लेते हुए कहा, ‘तुम ने मुझे डरा दिया था सुमेधा. मुझे लगा कहीं प्यार की बात बोल कर मैं अपनी दोस्ती न खो दूं.’

‘अच्छा… और अगर न बताते तो शायद अपने प्यार को खो देते,’ सुमेधा ने कहा.

उस दिन से ज्यादा खुश शायद मैं पहले कभी नहीं हुआ था. जब एम.ए. में फर्स्ट क्लास आया था तब भी और जब नौकरी मिली थी तब भी. एक अजीब सी खुशी थी उस दिन.

सुमेधा और मैं घंटों मोबाइल पर बात किया करते थे और मौका मिलते ही एकदूसरे के साथ वक्त बिताते थे.

उस दिन के बाद एक दिन सुमेधा ने मुझे बहुत खूबसूरत सा हार दिखाते हुए बाजार में कहा, ‘देखो समीर, कितना प्यारा लग रहा है.’

मैं ने कहा, ‘तुम से ज्यादा नहीं.’

वह बोली, ‘जनाब, यह मेरी खूबसूरती को और बढ़ा सकता है.’

उस वक्त मन तो था कि मैं उस को वह हार दिलवा कर उस की खूबसूरती में चार चांद लगा दूं, लेकिन मेरी सैलरी इतनी नहीं थी कि उस को वह हार दिलवा सकता.

सुमेधा समझ गई थी. उस ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, ‘इतना भी खूबसूरत नहीं है कि इस हार की इतनी कीमत दी जाए. लगता है अपने शोरूम के पैसे भी जोड़ दिए हैं. चलो समीर चाय पीते हैं.’

मुझे सुमेधा की वह बात अच्छी लगी. वह खूबसूरत तो थी ही, समझदार भी थी.

वक्त बीतता गया. सुमेधा चाहती थी कि मैं शादी से पहले अपने पैरों पर अच्छे से खड़ा हो जाऊं ताकि शादी के बाद बढ़ती हुई जिम्मेदारियों से कोई परेशानी न आए. बात भी सही थी. अभी मेरी सैलरी इतनी नहीं थी कि मैं शादी जैसी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभा सकूं.

हमारे प्यार को 1 साल से ज्यादा हो गया था. वक्त कैसे बीत गया पता ही नहीं चला.

आज सुमेधा औफिस नहीं आई थी. मैं ने सुमेधा को फोन किया, लेकिन पूरी रिंग जाने के बाद भी उस ने मोबाइल नहीं उठाया.

हो सकता है वह व्यस्त हो किसी काम में. क्या हुआ होगा, जो सुमेधा ने मुझे नहीं बताया कि आज वह छुट्टी पर है. पूरा दिन बीत गया लेकिन सुमेधा का कोई फोन नहीं आया. मुझे बहुत अजीब लग रहा था. क्या आज वह इतनी व्यस्त है कि एक बार भी फोन या मैसेज करना जरूरी नहीं समझा?

अगले दिन भी वही सब. न मेरा फोन उठाया और न खुद फोन या मैसेज किया. बस अपने सर को उस ने अपनी छुट्टी के लिए एक मेल भेजा था, जिस में बस यह लिखा था कि कोई जरूरी काम है.

क्या जरूरी काम हो सकता है? मैं सोच नहीं पा रहा था.

नीलेश ने कहा, ‘तुम उस के घर के फोन पर बात करने की कोशिश क्यों नहीं करते?’

‘अगर किसी और ने फोन उठाया तो?’ मैं ने उस के सवाल पर अपना सवाल किया.

‘तो तुम बोल देना कि तुम उस के औफिस से बोल रहे हो और यह जानना चाहते हो कि कब तक छुट्टी पर है वह.’

हिम्मत कर के मैं ने उस के घर के फोन पर काल किया. पहली बार किसी ने फोन नहीं उठाया. नीलेश के कहने पर मैं ने दोबारा कोशिश की. इस बार फोन पर आवाज आई जो मैं सुनना चाहता था.

‘हैलो सुमेधा, मैं समीर बोल रहा हूं. कहां हो, कैसी हो? और तुम औफिस क्यों नहीं आ रही हो? मैं ने तुम्हारा मोबाइल नंबर कितनी बार मिलाया, लेकिन तुम ने फोन नहीं उठाया. सब ठीक तो है?’

सुमेधा चुपचाप मेरी बातों को बस सुने जा रही थी.

‘सुमेधा कुछ तो बोलो.’

‘अब मुझे कभी फोन मत करना समीर…’ सुमेधा ने धीमी आवाज में कहा.

‘क्या, पर हुआ क्या यह तो बताओ?’ मैं ने बेचैन हो कर पूछा.

‘पापा को माइनर हार्ट अटैक आया था. अब उन की हालत ठीक है. मेरे लिए एक रिश्ता आया था पापा ने वह रिश्ता तय कर दिया है और उन की हालत को ध्यान में रखते हुए मैं न नहीं कर पाई.’

‘तुम्हें उन्हें मेरे बारे में तो बताना चाहिए था,’ मैं ने कहा.

‘समीर वह लड़का बिजनैसमैन है,’ सुमेधा ने एकदम से कहा.

‘ओह, तो शायद इसीलिए तुम्हारी उस से शादी हो रही है,’ मैं ने कहा.

‘तुम जो भी समझो मैं मना नहीं करूंगी. अगले महीने मेरी शादी है. मैं ने आज ही अपना रिजाइनिंग लैटर अपने सर को मेल कर दिया है. बाय समीर.’

TMKOC: फिर आया पोपटलाल के लिए शादी का रिश्ता, देखें Video

सोनी सब का मशहूर कॉमेडियन शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को दर्शक काफी पसंद करते हैं. इस शो के हर किरदार घर-घर में मशहूर है. हाल ही में शो में दिखाया गया था कि पोपटलाल का रिश्ता टूट गया था जिसके बाद पोपटलाल ने खूब हंगामा किया था. आइए बताते हैं शो के नए ट्विस्ट एंड टर्न के बारे में.

शो में दिखाया गया था कि पोपटलाल का रिश्ता बिल्ली की वजह से टूटा था. दरअसल बिल्ली ने लड़की वालों का रास्ता काट दिया था. जिसके बाद रिश्तेवाले लौट गए थे तो वहीं अब बिल्ली ने सोसायटी छोड़ दी है. दूसरी तरफ अब्दुल ने झूठ बोला कि बिल्ली सोसायटी से भाग गई थी जिसके बाद पोपटलाल ने फिर से लड़की वालों को फोन कर रिश्ते की बात की. और लड़की वाले भी राजी हो गए.

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अब फिर से पोपटलाल के लिए शादी का रिश्ता आने वाला है. अब शो में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या पोपटलाल का रिश्ता पक्का हो जाएगा या फिर से कोई बवाल होगा.

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शो में आपने देखा कि पोपटलाल ने रिश्ते टूटने की वजह से बौखला गए थे. पोपटलाल ने भिड़े को काफी भला बुरा कह दिया था और उनसे इस्तीफा तक मांग लिया था. अब पोपटलाल को अपनी गलती का अहसास हो गया है और उन्होंने सबके सामने भिड़े से माफी मांगने की ठान ली है.

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भारती सिंह की डिलिवरी डेट आई सामने, इस दिन बनेंगी मां

मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिंबाचिया अक्सर सुर्खियों में छाये रहते हैं. दोनों जल्द ही पेरेंट्स बनने वाले हैं. भारती आए दिन फैंस के साथ मां बनने को लेकर अनुभव शेयर करती रहती हैं. इसी बीच अब भारती सिंह ने बताया है कि वह अप्रैल के पहले सप्ताह में मां बनेंगी.

हाल ही में भारती सिंह का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह पैपराजी से बात करती नजर आ रही है ढोल की थाप पर थिरक रही है. भारती के इस वीडियो को विरल भयानी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है.

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वीडियो में आप देख सकते हैं कि भारती एक व्यक्ति को मास्क पहनने के लिए भी कहती हैं. इसके बाद पैपराजी इशारों में ही उनसे उनकी डिलीवरी डेट के बारे में पूछते हैं. इस पर भारती कहती हैं भाई अप्रैल के पहले हफ्ते में आप सब कभी भी मामा बन सकते हैं.

 

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आपको बता दें कि भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया ने दिसंबर में अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में शायर किया था. भारती ने अपने यूट्यूब चैनल एलओएल लाइफ ऑफ लिंबाचिया पर वीडियो शेयर करते हुए अपनी प्रेग्नेंसी की खबर शेयर की थी.

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हाल ही में भारती सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें एक शख्स ने भारती से पूछा कि आपको खट्टा खाने का मन करता है तो इस पर उन्होंने कहा,  इमली का टाइम गया. अब तो मैं पूरा खाना खाती हूं. चलिए, आप सब लोग मामा हैं, बच्चे का स्वागत करने के लिए रेडी रहें. इसके बाद भारती ने ही पैपराजी से सवाल किया कि आपको क्या चाहिए लड़का या लड़की. इस पर वहां मौजूद सभी लोगों ने लड़की कहा. ये सुनकर भारती ने कहा, ओ हाऊ स्वीट.

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अधूरी रह गई फैशन ब्लॉगर की मोहब्बत- भाग 2

रितिका के पैर जल गए थे. इस बीच आकाश का भाई वहां से भाग गया. लेकिन घर उजड़ने के डर से रितिका की मां ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं की. आकाश बाद में  रितिका को अपने घर टूंडला ले आया. दोनों स्टूडेंट के लिए कंसलटेंसी सर्विस का काम करने लगे.

लेकिन काम नहीं चला, तब दोनों आगरा रहने लगे. यहां रितिका एक कंपनी में काम करने लगी. नौकरी के दौरान दोस्तों से बात करने से आकाश उस पर शक करने लगा. इस के चलते रितिका को नौकरी छोड़नी पड़ी.

सन 2018 में उस की मुलाकात फेसबुक के माध्यम से विपुल अग्रवाल से हुई, जो फिरोजाबाद में रहता था. वह बड़ा बाजार शिकोहाबाद का मूल निवासी था. लेकिन अब तक आकाश बेरोजगार था. वह कुछ नहीं करता था, बल्कि रितिका की कमाई पर ही ऐश करता था.

विपुल से मुलाकात होने पर रितिका ने उसे अपनी समस्या बताई. तब रितिका फिरोजाबाद स्थित एक स्कूल में नौकरी करने लगी.

इस स्कूल में विपुल पार्टनर था. इस बीच विपुल और रितिका के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. इस की जानकारी रितिका के पति आकाश गौतम को हो गई. वह अकसर स्कूल आता और सब के सामने रितिका के साथ दुर्व्यवहार करता.

पति की ज्यादती के चलते रितिका ने पति का घर छोड़ दिया. दोनों अलग रहने लगे. लेकिन आकाश लगातार रितिका को परेशान करने लगा.

इस के चलते विपुल और रितिका का एकदूसरे के प्रति झुकाव बढ़ता गया. 2020 में विपुल और रितिका आगरा आ गए. वे पिछले लगभग ढाई साल से लिवइन में रह रहे थे.

विपुल अग्रवाल की पत्नी डा. दीपाली अग्रवाल दंत चिकित्सक है. उस के 10 साल का एक बेटा भी है.  दीपाली  फिरोजाबाद में रहती है. जब उसे पति के रितिका से संबंधों की जानकारी हुई तो उस ने इस रिश्ते का विरोध किया. दोनों में दूरियां बढ़ने लगीं. लेकिन विपुल तो रितिका का दीवाना हो चुका था. वह उसे छोड़ने को तैयार नहीं हुआ.

आगरा में विपुल और रितिका किराए पर फ्लैट ले कर रहने लगे. रितिका अपने पति आकाश से अब दूर रहने लगी. पति से कानूनी तौर पर भी अलग होने के लिए उस ने कोर्ट में तलाक की अरजी लगा दी. इस में रितिका ने आकाश से करीब 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी.

उधर रितिका का पति आकाश गौतम काफी समय से रितिका की रेकी करवा रहा था. मगर रितिका के बारबार मकान बदलने से वह उस तक पहुंच नहीं पा रहा था. किसी तरह इस की भनक विपुल अग्रवाल और रितिका सिंह को लग गई थी. इसलिए दोनों अपने रहने के ठिकाने बदल रहे थे.

3 महीने पहले ही विपुल ने इस फ्लैट को 13 हजार रुपए महीने किराए पर लिया था. इस फ्लैट में रितिका और विपुल लिवइन में रह रहे थे. विपुल और उस की पत्नी दीपाली का भी तलाक का मामला कोर्ट में पहुंच चुका था.

मृतका की मां मंजू का आरोप है कि बेटी काफी परेशान थी. एक साल से रितिका उस से मिलने के लिए गाजियाबाद आना चाहती थी, लेकिन विपुल उसे जाने नहीं देता था. क्योंकि उसे आकाश से रितिका की जान का खतरा था.

मां से मिलना चाहती थी रितिका

घटना से 2 दिन पहले रितिका ने मोबाइल से 15 मिनट तक मां से बात की थी. मां से मिलने के लिए उस ने गाजियाबाद आने की बात की थी. उस ने बताया कि उसे आकाश से अपनी जान का खतरा है. लेकिन दूसरे दिन ही आने से मना कर दिया था, वह डरी हुई लग रही थी.

पकड़ा गया शख्स मृतका का पति आकाश गौतम था. पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा. लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने सच्चाई उजागर कर दी थी. सख्ती करने पर उस ने रितिका की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. जिन महिलाओं को आकाश बहनें बता रहा था, वे भाड़े व नौकरी के लालच में लाई गई थीं.

पकड़ी गई दोनों महिलाओं ने बताया कि आकाश तो उन्हें यह कह कर लाया था कि वह पत्नी को लेने जा रहा है. जरूरत पड़ने पर महिला होने के नाते वह उस का सहयोग कर देंगी. कुसुमा और काजल को इस बात का अंदेशा नहीं था कि आकाश अपनी पत्नी की हत्या कर देगा.

रितिका सिंह खूबसूरत थी. वह फूड और फैशन पर वीडियो बनाती थी, सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहती थी. इंस्टाग्राम पर उस के 44 हजार से अधिक फालोअर्स हैं. तमाम वीडियो में खुशीखुशी हंस कर फैशन और फूड ब्लागिंग करने वाली रितिका की आवाज को अचानक उस के पति ने खामोश कर दिया गया.

इस के पीछे की वजह उस के पति आकाश गौतम का सनकीपन, एकतरफा दीवानगी, बेरोजगारी और पत्नी पर शक करना था. लेकिन अब पत्नी द्वारा तलाक लेने व 50 लाख का मुआवजा मांगने पर वह कोर्ट में सबूत देना चाहता था कि उस की पत्नी रितिका अपने दोस्त विपुल के साथ लिवइन पार्टनर के तौर पर रह रही है.

उस ने सोचा उस का वीडियो बना कर कोर्ट में पेश कर दिया तो शायद उसे 50 लाख रुपए का मुआवजा नहीं देना पड़ेगा, क्योंकि उस की पत्नी अपनी मरजी से उसे छोड़ कर गई थी.

गेटमैन को फ्लैट का नंबर बताया गलत

इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आकाश ने अपने दोस्त चेतन के साथ मिल कर षडयंत्र रचा. योजना के तहत, चेतन ने अपने परिचित अनवर के साथ मिल कर 2 महिलाओं को भाड़े पर साथ लिया. फ्लैट में घुसने के लिए महिलाओं ने गेटमैन को दूसरे फ्लैट का नंबर 601 बताया ताकि किसी को शक न हो. जबकि घटना उन्हें फ्लैट नंबर 404 में अंजाम देनी थी.

लिफ्ट से पांचों लोग फ्लैट नंबर 404 पर पहुंच गए. आकाश ने दोनों महिलाओं से घंटी बजाने को कहा, क्योंकि रितिका व विपुल उसे देख कर दरवाजा नहीं खोलते. महिलाओं के फ्लैट की घंटी बजाने पर जैसे ही विपुल ने दरवाजा खोला, महिलाओं के साथ आकाश व उस के दोनों साथी भी अंदर घुस आए. आते ही आकाश से विपुल और रितिका की कहासुनी होने लगी.

इसी बीच दोनों महिलाओं ने रितिका को पकड़ लिया, जबकि आकाश व उस के दोनों साथियों ने मारपीट कर विपुल अग्रवाल के हाथ बांध कर बाथरूम में बंद कर दिया. तब विपुल शोर मचाने लगा. आकाश जिस उद्देश्य से आया था, उसे पूरा न होते देख उस के सिर पर खून सवार हो गया.

आकाश व उस के चारों साथियों ने रितिका की पिटाई करने के साथ ही उस के हाथ अपने साथ लाई रस्सी से तथा मुंह कपड़े से बांध दिया और उसे उठा कर फ्लैट के पीछे की बालकनी से नीचे फेंक दिया.

बालकनी से नीचे फेंकने के दौरान रितिका ने संघर्ष भी किया, जिस से वहां रखे गमले गिर गए. नीचे गिरते समय भी रितिका लगातार चीख रही थी. लेकिन इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद वह हमेशा के लिए खामोश हो गई.

मधुर मिलन: भाग 4

Writer- रेणु गुप्ता

उस के और इनाया आंटी के जाने के बाद उन सब की हैल्थ और खानेपीने का कौन ध्यान रखेगा, यह सोचसोच वह हलकान हुआ जा रहा था.

उस दिन पापा औफिस से आए तो  अचानक चक्कर आने की शिकायत करने लगे. ब्लडप्रैशर  चैक करने पर उन का ब्लडप्रैशर बहुत हाई आया. शुगर लैवल भी बहुत हाई आया. इनाया  आंटी ने फौरन उन के फैमिली डाक्टर को फोन कर बुलाया. डाक्टर ने पापा को इंजैक्शन लगाए और तब पापा का ब्लडप्रैशर और शुगर लैवल सामान्य हुए.

पापा का यह हाल देख रिदान का पापा और अनाया आंटी को  वैवाहिक बंधन में बांधने का निश्चय और पुख्ता हुआ.

अमायरा से फ़ौरन इस मुद्दे पर बात करने की सोच कर उस ने घरभर में अमायरा को ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली. तभी उस ने खिड़की से देखा, वह बाहर बगीचे में पेड़पौधों को पानी दे रही थी.

वहां जा कर उस ने उस से कहा, “अमायरा, मैं सोच रहा हूं, मेरे नौकरी पर जाने के बाद पापा का ध्यान कौन रखेगा? आंटी पापा और दादूदादी का ध्यान बिलकुल मम्मा की तरह रखती  हैं. मेरे पीछे इन लोगों  की केयर कौन करेगा, यह सोचसोच कर मुझे बहुत चिंता  हो  रही  है. क्यों न मेरे बेंगलुरु जाने से पहले हम  इन दोनों की शादी करवा दें?”

“बात तो तुम पते की कर  रहे हो. मैं ने भी औब्जर्व किया है कि मम्मा तपन अंकल और तुम सब के साथ बहुत रिलैक्स्ड रहती हैं और यहां तुम सब के सामने  मुझ पर भी बहुत कम चिल्लाती  हैं. घर पर तो हरदम किसी न किसी बात को ले कर झींकतीझल्लाती  रहती हैं.  उन का ब्लडप्रैशर भी हरदम हाई रहता है. लेकिन  तुम सब के साथ रहने से एकदम नौर्मल आ जाता है. तुम लोगों के यहां वे बेहद  खुश भी दिखती हैं. इन दोनों की जल्दी से जल्दी शादी करवाना बेस्ट आइडिया है. लेकिन, यह तो हमारी सोच है.  खुद उन दोनों को  शादी के लिए तैयार कौन करेगा? मुझे नहीं लगता मम्मा या तपन अंकल इस के लिए आसानी से हां कर देंगे.”

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“हां, आसानी से तो राजी नहीं होंगे लेकिन इस के लिए हमें कुछ करना होगा. चलो, अब इस प्लान को ऐक्शन में बदलने का समय आ गया है.”

उस दिन सुबहसवेरे तपन इनाया और दादादादी चाय की चुस्कियां ले रहे थे, कि रिदान, रुद्र  और अमायरा वहां आ गए और सब से  पहले रिदान  ने  बात छेड़ी, “पापा, आंटी, हम तीनों और दादूदादी ने एक डिसीज़न लिया है और आप दोनों को यह मानना ही पड़ेगा.”

“डिसीज़न, कैसा डिसीज़न भई?  हमें भी तो बताओ, हमारे होते हुए तुम लोगों को  डिसीज़न लेने की क्या जरूरत आन पड़ी, बरखुरदार?”

इस पर इस बार रुद्र बोला, “हमने डिसाइड किया है कि इनाया आंटी हमारी मम्मा बनेंगी और आप अमायरा के पापा?”

तभी रिदान बोल पड़ा, “हम तीनों और दादूदादी ने आप दोनों की शादी करवाने का डिसीज़न लिया है.”

इस पर इनाया बुरी तरह चिंहुक कर लगभग उछलते हुए बोली, “यह कैसा बेहूदा मज़ाक है रिदान?

मेरी  और तपन की  शादी? पागल तो नहीं हो गए हो  तुम तीनों. यह कैसी ऊलजलूल बातें कर रहे हो? अमायरा चलो, हम घर चल रहे हैं. तुम बच्चों की अक्ल तो घास चरने चली गई है.”

“नहीं मम्मा, मैं यहां से कहीं नहीं जा रही, न ही मैं अभी आप को यहां से कहीं जाने दूंगी. घर पर आप बेहद डिप्रैस्ड रहती हो. हंसना तो जैसे भूल ही जाती हो. आप को हरदम कहीं न कहीं  दर्द होता  रहता है. लेकिन यहां सब के साथ आप बहुत खुश रहती हो. मेरा भी यही मानना है कि आप दोनों को शादी कर लेनी चाहिए.”

“व्हाट नौनसैंस,  तुम बच्चे जो मुंह में आए बोलते जा रहे हो. मैं जा रही हूं यहां से,” इनाया ने घोर  आवेश में वहां से उठते हुए कहा.

इस पर दादू ने धीरगंभीर स्वरों में उस से  कहा, “इनाया बेटा, बैठ जाओ प्लीज़, और मेरी बात सुनो. हम दोनों की भी यही  इच्छा है कि तुम दोनों एक हो जाओ. यह जिंदगी एक बार ही मिलती है और इसे हर हाल में खुशीखुशी बिताना हमारी मौरल  ड्यूटी बनती है.  तुम दोनों के शादी करने से 2 घर बस जाएंगे, बेटा. रिदान, रुद्र  को मां मिल जाएगी और अमायरा को पिता. अपनी नहीं तो इन बच्चों की तो सोचो, बेटा. तुम दोनों के इन की जिंदगी में आने से इन की जिंदगी का अधूरापन खत्म हो जाएगा.  प्लीज़  बेटा, मान जाओ.”

ये बातें सुन तपन तो मौन हो गया  लेकिन इनाया की आंखों से आंसू बहने लगे. वह बोली, “अंकल, इस  भरी दुनिया में तपन और आप लोग ही तो मेरे अपने हैं.  प्लीज़ अंकल, तपन से  शादी करने की मैं सोच भी नहीं सकती.  वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और ताज़िंदगी रहेगा.  उस से शादी कर के मैं इस खूबसूरत रिश्ते को हमेशा के लिए नहीं खोना चाहती. फिर  अब मेरी  क्या उम्र है  शादी की, दुनिया क्या कहेगी? लोग तरहतरह की बातें बनाएंगे. मुझ पर  और अमायरा पर तंज़  कसेंगे.  रुद्र  और रिदान को भी सब के ताने सुनने पड़ेंगे. नहींनहीं, मेरी खातिर इन बच्चों को कुछ सुनना पड़े, यह मुझे गवारा नहीं. फिर हम दोनों के धर्म भी जुदा हैं.   मैं मुसलमान, आप लोग हिंदू. नहींनहीं, यह आइडिया कतई प्रैक्टिकल नहीं. यह नामुमकिन  है.”

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इस बार  दादी उस के पास आईं  और उस के आंसू पोंछते  हुए उस के दोनों हाथ थाम उस से स्नेहविगलित  स्वरों में बोलीं, “इनाया, मनों का मेल किसी भी शादी की पहली शर्त होती है. तुम दोनों के मन मिले हुए हैं.  बस, इस से ज्यादा और क्या चाहिए? दिलों  के मेल के सामने धर्म, जाति और बिरादरी कुछ माने नहीं रखतीं. मेरी बात गांठ बांध ले, बेटा, इस शादी से तुम दोनों बहुत खुश रहोगे. तुम दोनों शादी कर रहे हो, आखिर इस में गलत क्या है? दुनिया की क्या परवा करनी?  उस का तो काम ही कुछ न कुछ कहना होता है.”

कही अनकही: भाग 1- तन्वी की हरकतों से मां क्यों परेशान थी

Writer- Reeta Kumari

सूर्योदय से पहले उठ जाने की मेरी आदत नौकरी से अवकाश प्राप्त   करने के बाद भी नहीं बदली थी. लालिमा के बीच धीरेधीरे निकलता सूर्य का सुर्ख गोला मुझे बहुत भाता था. पक्षियों का कलरव और हवा की सरसराहट में जैसे रात का रहस्यमय मौन घुलने लगता. तन को छूती ठंडी हवा मेरे मनप्राण को शांति और सुकून से भर देती.

हर दिन की तरह मैं लौन में बैठी इस अद्भुत अनुभूति में खोई आम के उस पौधे को निहार रही थी जिस का बिरवा आदित्य ने लगाया था. उसे भी मेरी तरह भिन्नभिन्न प्रकार के पौधे लगाने का शौक है. जब आदित्य को 1 वर्ष के लिए आफिस की तरफ से न्यूयार्क जाना पड़ा तो जाने से पहले वह मुझे हिदायतें देता रहा, ‘मां, 1 साल के लिए अब मेरे इन सारे पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी आप पर है. खयाल रखिएगा, एक भी पौधा मुरझाने न पाए.’

सिर्फ 6 महीने अमेरिका में व्यतीत करने के बाद उस ने वहीं रहने का मन बना लिया. पौधे तो पौधे उसे तो अपनी मां तक की चिंता न हुई कि उस के बिना कैसे उस के दिन गुजरेंगे. अब यह सब सोचने की उसे फुरसत ही कहां थी. वह तो सात समंदर पार बैठा अपने भौतिक सुख तलाश रहा था. बस, दिल को इसी बात से सुकून मिलता कि बेटा जहां भी है सुखी है, खुश है, अपने सपनों को पूरा कर रहा है.

मेरे पति समीर भी अपने व्यापार के काम में व्यस्त हो कर अपना ज्यादातर समय शहर से बाहर ही बिताते जिस से मेरा अकेलापन दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा था.

तभी ऊपर के कमरे से आती तेज आवाज के कारण मेरी तंद्रा भंग हो गई. लगा था तन्वी आज किसी बात को ले कर एक बार फिर अपनी मम्मी नेहा से उलझ गई. तन्वी का इस तरह अपनी मां से उलझना मुझे अचंभित कर जाता है. न जाने इस नई पीढ़ी को क्या होता जा रहा है. न बड़ों के मानसम्मान का खयाल रहता है न बात करने की तमीज.

नेहाजी मेरे मकान के ऊपर वाले हिस्से में बतौर किराएदार रहती थीं. इस से पहले मैं ने कभी अपना मकान किराए पर नहीं दिया था, लेकिन पति और बेटे दोनों के अपनीअपनी दुनिया में व्यस्त हो जाने के कारण मैं काफी अकेली पड़ गई थी. जीवन में फैले इस एकाकीपन को दूर करने के लिए मैं ने घर के ऊपर का हिस्सा किराए पर दे दिया.

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नेहा और उन की बेटी तन्वी ये 2 ही लोग रहने आए. नेहा किसी मल्टीनैशनल कंपनी में उच्च अधिकारी थीं और तन्वी बी.ए. द्वितीय वर्र्ष की छात्रा. मेरी सोच के विपरीत नेहा इतनी नापतौल कर बातें करतीं कि चाह कर भी मैं उन के साथ बातों का सिलसिला बढ़ा नहीं पाती. न जाने क्यों दोनों मांबेटी गाहेबगाहे उलझती रहतीं, जो कभीकभी तो गहन युद्ध का रूप ले लेता.

तभी उन की बेटी तन्वी कंधे पर बैग टांगे दनदनाती हुई सीढि़यां उतरी और गेट खोल कर सड़क की तरफ बढ़ गई. पीछेपीछे उस की मां उसे रोकने की कोशिश करती गेट तक आ गईं. पर तब तक वह आटोरिकशा में बैठ वहां से जा चुकी थी.

नेहा का सामना करने से बचने के लिए मैं क्यारियों में लगे फूलों को संवारने में व्यस्त हो गई, जैसे वहां जो घटित हो रहा था, उस से मैं पूरी तरह अनजान थी. लाख कोशिशों के बावजूद हम दोनों की नजरें टकरा ही गईं. नेहा एक खिसियाई सी हंसी के साथ जाने क्या सोच कर मेरे बगल में पड़ी कुरसी पर आ बैठीं. धीरे से मुझे लक्ष्य कर के बोलीं, ‘‘क्या बताऊं, आजकल के बच्चे छोटीछोटी बातों में भी आवेश में आ जाते हैं. इन लोगों के बड़ों से बात करने के तौरतरीके इतने बदल गए हैं कि इन के द्वारा दिया गया सम्मान भी, सम्मान कम अपमान ज्यादा लगता है. हमारे समय भी जेनेरेशन गैप था, मतभेद थे पर ऐसी उच्छृंखलता नहीं थी.’’

मैं भी उन के साथ हां में हां मिलाती हंसने की नाकाम कोशिशें करती रही. हंसी के बीच भी नेहा की भर आई आंखें और चेहरे पर फैली विषाद की रेखाएं, स्पष्ट बता रही थीं कि बात को हंसी में उड़ा देने की उन की चेष्टा निरर्थक थी. लड़की के अभद्र आचरण की अवहेलना से मां को गहरा सदमा लगा था.

तभी सुमन 2 कप कौफी रख गई. हम दोनों चुपचाप बैठे कौफी पीते रहे. कभीकभी निस्तब्ध चुप्पी भी वह सारी अनकही कह जाती है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल होता है. हम दोनों के बीच भी कुछ वैसी ही मौन संवेदनाओं का आदानप्रदान हो रहा था.

उस दिन के बाद नेहाजी आतेजाते कुछ देर के लिए मेरे पास बैठ जाती थीं. धीरेधीरे वे अपनी निजी बातें भी मुझ से शेयर करने लगीं. टुकड़ोंटुकड़ों में उन्हीं से पता चला कि उन का अपने पति रंधीर के साथ तलाक तो नहीं हुआ है, लेकिन वह इसी शहर में अलग रहता है. 8 वर्ष की तन्वी को छोड़ कर जाने के बाद से न कभी उस से मिलने आया और न ही उस ने उस की कोई जिम्मेदारी उठाई.

तन्वी की बढ़ती उद्दंडता और स्वच्छंदता नेहाजी के लिए चिंता, तनाव और भय का कारण बन गई थी. दिनोदिन तन्वी के दोस्तों में बढ़ते लड़कों की संख्या और सिनेमा तथा पार्टियों का बढ़ता शौक देख नेहा का सर्वांग सिहर उठता लेकिन वे तन्वी के सामने असहाय थीं. अपनी ढेरों कोशिशों के बावजूद तन्वी पर नियंत्रण रखना उन के लिए संभव नहीं था.

मैं भी उन की कोई मदद नहीं कर पा रही थी. उस उद्दंड, घमंडी और निरंकुश लड़की के चढ़े तेवर देख कर ही मेरा मन कुंठित हो उठता. एक दिन सुबह से ही बिजली गायब थी. दोपहर तक टंकी का पानी समाप्त हो गया. मैं यों ही बैठी एक पत्रिका के पन्ने पलट रही थी कि तभी दस्तक की आवाज सुन दरवाजा खोलते ही मैं अचंभित रह गई, सामने पानी का जग लिए तन्वी खड़ी थी.

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‘‘क्या थोड़ा सा पानी…’’

मैं बीच में ही उस की बात काटते हुए बोली, ‘‘क्यों नहीं, मैं हमेशा कुछ पानी टब में जमा कर के रखती हूं.’’  मैं जब पानी ले कर लौटी तो अचानक ही मेरा ध्यान उस की अंगारों सी दहकती आंखों और क्लांत शरीर की तरफ गया. पानी लेते समय जैसे ही उस का हाथ मेरे हाथों से सटा, उस के हाथों की तपन से मुझे आभास हो गया कि इसे तेज बुखार है.

अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया, ‘‘अरे, तुम्हें तो तेज बुखार है,’’ और खुदबखुद मेरा हाथ उस के सिर पर चला गया. अचानक ही जैसे उसे बिजली का झटका लगा. वह तेजी से दरवाजे की तरफ पलटते हुए बोली, ‘‘आप चिंता न करें, मैं अपना खयाल खुद रख सकती हूं. मुझे इस की आदत है.’’

जैसे तेजी से धूमकेतु सी प्रकट हुई थी वैसे ही तेजी से वह गायब हो गई.

तेज बुखार में तन्वी का अकेले रहना ठीक नहीं था, पर जिस तरह वह उद्दंड लड़की अपने तेवर दिखा गई, मेरा मन नहीं कर रहा था कि उस के पास जाऊं. थोड़ी देर के अंतर्द्वंद्व के बाद मैं 1 कप तुलसी की चाय बना कर उस के पास जा पहुंची. दरवाजा खुला था. सामने ही पलंग पर वह मुंह तक चादर खींचे लेटी अपने कांपते शरीर का संतुलन बनाने की कोशिश कर रही थी. उस के पास ही पड़े एक दूसरे कंबल से मैं ने उस का शरीर अच्छी तरह ढक, उस से गरम चाय पी लेने का अनुरोध किया तो उस ने चुपचाप चाय पी ली.

इस बीच बिजली भी आ गई थी. मैं फ्रिज से ठंडा पानी ला कर उस के सिर पर पट्टियां रखने लगी. थोड़ी ही देर में उस का बुखार उतरने लगा और वह पहले से काफी स्वस्थ नजर आने लगी. नेहाजी को सूचित करना जरूरी था, इसलिए मैं ने सामने पड़ा फोन उठा कर उन का नंबर जानना चाहा तो एकाएक उठ कर उस ने मेरे हाथों से फोन झपट लिया.

‘‘नहीं, मिसेज मीनू…आप ऐसा नहीं कर सकतीं.’’

मैं हतप्रभ खड़ी रह गई.

‘‘क्यों…वे तुम्हारी मां…’’

वह बीच में ही मेरी बात काटती हुई बोली, ‘‘मानती हूं, आज आप ने मेरे लिए बहुत कुछ किया फिर भी आप से अनुरोध है कि आप हमारे निजी मामलों में दखलंदाजी न करें.’’

कही अनकही: तन्वी की हरकतों से मां क्यों परेशान रहती थी

तन्वी ऐसी हरकतें करती कि मां नेहा को दुख पहुंचता. वहीं, मकान मालकिन मीनू हमदर्दी जतातीं तो तन्वी उन्हें भी डपट देती. फिर भी मीनू डटी रहीं और एक दिन उन्होंने ऐसा स्नेह जताया कि तन्वी कहीअनकही सब कह गई.

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