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पनीर ढोकला रेसिपी

 सामग्री

–  बेसन 2 कप

–  ताज़ा दही (1/4 कप)

– शक्कर (1 टेबलस्पून)

– आधे नींबू का रस

–  चुटकीभर हींग

– सोडा (1/4 टीस्पून)

–  तेल (3 टेबलस्पून)

– हल्दी पाउडर (1/4 टीस्पून)

–  नमक (स्वादानुसार)

सजाने के लिए

–  शक्कर का पानी (4 टेबलस्पून)

– शक्कर (2 टेबलस्पून)

– पानी  (3 टेबलस्पून)

– कद्दूकस किया हुआ नारियल

– कद्दूकस किया हुआ पनीर (200 ग्राम)

छौंक के लिए:

– 3 टेबलस्पून तेल

– आधा टीस्पून राई

– 4-6 हरी मिर्च बीच में से चीरी हुई

– कुछ सुखी हुई लाल मिर्च.

 पनीर ढोकला बनाने की विधि

– बेसन में दही, नमक, शक्कर, निंबू का रस, हींग, 2 टेबलस्पून तेल व हल्दी डालकर गाढ़ा घोल तैयार करें.

– 15-20 मिनट तक ऐसे ही रहने दें, एक पैन में 1 टेबलस्पून तेल और 2 टेबलस्पून पानी डालकर गरम   करें.

– उबलने पर सोडा बाईकार्बोनेट डालें और तैयार किए हुए मिश्रण में डालें.

– चिकनाई लगे बर्तन में मिश्रण उड़ेलकर भाप से पका लें, ठंडा करके शक्कर का पानी डालें.

– छोटे-छोटे आकार में काट लें, ढोकले के दो टुकड़ों के बीच एक पनीर स्लाइस रखें.

– एक पैन में तेल गरम करें, राई, हरी व लाल मिर्च डालकर छौंक तैयार करें और ढोकले पर उड़ेल दें.

– कद्दूकस किए हुए नारियल और कटी हुई हरी धनिया से सजाएं.

मुक्केबाज अमित पंघाल की अनोखी श्रद्धांजलि

छोटे कद के माहिर मुक्केबाज अमित पंघाल ने पिछले एशियन खेलों में सोने का तमगा जीत कर अपने फौलादी इरादे जाहिर कर दिए थे. अब उन्होंने एक और कारनामे को अंजाम दिया है.

दरअसल, अमित पंघाल ने बुल्गारिया के सोफिया में मंगलवार, 19 फरवरी की रात को हुए स्ट्रैंडजा मैमोरियल टूर्नामैंट के फाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान के तेमिरतास जुसुपोव को हरा कर यूरोप के इस सब से पुराने मुक्केबाजी के टूर्नामैंट में लगातार दूसरा गोल्ड मैडल जीता.

आप को बता दें कि अमित पंघाल सेना से भी जुड़े हैं. लिहाजा, इस गोल्ड मैडल को उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को समर्पित किया. उन्होंने बताया कि चूंकि वे खुद सेना से जुड़े हैं इसलिए उन्हें इस घटना से ज्यादा दुख पहुंचा है.

भारतीय सेना के इस 23 साल के मुक्केबाज ने बुधवार, 20 फरवरी को बताया कि इस टूर्नामैंट के दौरान पुलवामा हमला उन के दिमाग में घूमता रहा था. यह हमला 14 फरवरी को उस दिन हुआ था जिस दिन भारतीय मुक्केबाजी टीम इस टूर्नामैंट में भाग लेने के लिए बुल्गारिया रवाना हुई थी.

अमित पंघाल ने फोन पर बताया, ‘मैं खुद सेना से हूं, दर्द इसलिए थोड़ा ज्यादा था. मैं मैडल जीतने के लिए बेताब था, क्योंकि मैं इसे पुलवामा में अपनी जान गंवाने वाले नायकों को समर्पित करना चाहता था.’

अमित पंघाल ने अपने खेल को ले कर एक और अहम जानकारी दी कि 49 किलोग्राम भारवर्ग में यह उन का आखिरी टूर्नामेंट था. उन्होंने बताया, ‘मेरे पास 49 किलोग्राम भारवर्ग के बजाय 52 किलोग्राम भारवर्ग में भाग लेने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है क्योंकि तोक्यो ओलंपिक, 2020 में 49 किलोग्राम भारवर्ग नहीं है और मैं ओलिंपिक में खेलना चाहता हूं.

‘49 किलोग्राम भारवर्ग में यह मेरा आखिरी टूर्नामैंट था और अगर मुझे मुक्केबाजी की एशियाई चैंपियनशिप के लिए चुना जाता है तो मैं 52 किलोग्राम भारवर्ग में भाग लूंगा.

‘इस के लिए मुझे ज्यादा  ताकत हासिल करने की जरूरत है और यह आसान नहीं होगा लेकिन मुझे यकीन है कि मैं इसे हासिल करने में कामयाब रहूंगा.’

भारत ने सोफिया में 3 गोल्ड, एक सिल्वर और 3 ब्रौंज मैडल समेत कुल 7 मैडल जीते. महिलाओं में गोल्ड मैडल जीतने वाली निखत जरीन (51 किलोग्राम भारवर्ग) ने भी अपना पदक पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को समर्पित किया.

मुस्कुराने लिए लखनऊ जाने की नहीं जरूरत

आज से कई साल पहले की बात है. अपने औफिस के किसी काम से मैं दिल्ली में बने अमेरिकी दूतावास में गया था. भीतर जा कर मैंने देखा कि वहां जिस के साथ भी मेरी निगाहें मिलीं वह मुझे देख कर मुसकुराया. पहले-पहल तो मैं हैरान हुआ कि माजरा क्या है? कहीं मेरे चेहरे पर तो कुछ नहीं लगा है? लेकिन बाद में जब वहां की एक भारतीय सफाई कर्मचारी ने मुसकराते हुए मुझे ‘गुड मौर्निंग’ कहा तो मेरे दिमाग की बत्ती जली कि भई यहां का तो रिवाज ही ऐसा है. जब भी किसी अजनबी से मिलो तो अपनेपन के साथ मुस्कुरा कर.

एक सुबह मैट्रो से औफिस जाते समय मुझे जब यह बात याद आई तो मैं ने सोचा कि क्यों न मैं आज मैट्रो में सवारी कर रहे इन अनजान लोगों को देख कर मुस्कुराऊं? देखते हैं कि मुझे कैसा रिस्पौन्स मिलता है? क्या वे मेरी मुस्कुराहट का जवाब का मुस्कुरा कर देंगे?
सही कहूं तो मेरा ऐसा करना पहले तो मुझे ही बड़ा मुश्किल लगा. मन में एक अनजान डर था कि कहीं किसी की डांट न खानी पड़ जाए सुबह-सुबह खासकर किसी महिला या लड़की से.

फिर भी मैं ने हिम्मत कर के 4-5 लोगों पर यह बात आजमाई. पर जैसा सोचा था वैसा कोई नतीजा मिला नहीं. किसी ने भी मेरी मुस्कुराहट को संजीदगी से नहीं लिया. लड़कियों ने तो एकदम से इग्नोर कर दिया. एक ने तो अपनी खूबसूरत आंखों से सवाल किया कि क्या परेशानी है?

तो फिर अमेरिकन दूतावास में वहां काम करने वालों को ऐसा निर्देश क्यों दिया गया था कि वे जिस किसी से निगाहें मिलाएं तो मुस्कुरा दें?

जहां तक मेरी समझ कहती है कि किसी को बिना वजह अपनी मुस्कुराहट देना कुदरत का सब से बड़ा उपहार है. अच्छा, अब इसी मुस्कुराहट को अपने घर पर आजमाते हैं. वैसे तो आजमाने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि आप अपने दिमाग पर जोर डालेंगे तो यकीनन पाएंगे कि जब भी आप किसी अपने को देखते हैं तो आप के चेहरे पर मुसकान तैर ही जाती है.

शाम को औफिस से थकेहारे घर पहुंचते ही सामने आप का बेटा या बेटी आ जाए तो आप उस के सिर पर हाथ फेरते हुए मुसकुरा देते हैं. गोद में ले कर प्यार भी जता देते हैं. ऐसा ही आप घर के दूसरे सदस्यों के साथ भी करते हैं. घर के बाहर भी आप का अपनों के साथ तकरीबन ऐसा ही रवैया रहता है. तो फिर हम किसी अनजान के साथ ऐसा करने से क्यों कतराते हैं, उस से निगाहें मिलने के बावजूद? वैसे भी हम सब को तो देख भी नहीं पाते हैं या ऐसा करना हमारे लिए मुमकिन भी नहीं है.

दरअसल, किसी अनजान को देख कर मुसकराने की कला कोई राकेट साइंस नहीं है और किसी अनजान से भी मिल कर बिना किसी सोचविचार के मुसकराया जा सकता है. और सच मानिए कि एक छोटी सी मुस्कान से सिर्फ चेहरे के भाव नहीं, बल्कि आसपास की दुनिया भी बदल जाती है.

मुस्कुराने के फायदें

आप की छोटी सी मुसकराहट आप को ही सब से ज्यादा फायदा पहुंचाती है. इस से आप की शख्सीयत निखरती है और आप उदासी, तनाव, चिंता जलन, गुस्से जैसी अपनी कमियों पर काबू पा सकते हैं.

साल 2016 में विनय पाठक की एक हिंदी फिल्म ‘आईलैंड सिटी’ आई थी जिस में औफिस के तनाव को दूर करने के लिए एक बहुत बड़ी कंपनी अपने किसी एक चुने गए मुलाजिम को मौजमस्ती करने का मौका देती है. हालांकि उस फिल्म में इस मुद्दे को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया था पर यह सच है कि आज के भागदौड़ के इस दौर में दफ्तरों में खासकर मल्टीनेशनल कंपिनयों में भी खुशनुमा माहौल बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों को रखा जाता है जो वर्कप्लेस में आई गंभीरता को दूर कर सकें. ऐसे लोगों को ‘ह्यूमर कंसल्टेंट’ कहा जाता है. ये लोग दाम दे कर खरीदे जाते हैं पर हकीकत तो यह है कि रोजमर्रा की जिंदगी में मुसकराने के कोई दाम नहीं देने होते हैं. यह सेवा तो एकदम फ्री है.

ये हैं मुस्कुराने के गुण

–  मुसकराने या हंसने से हमारी आंखों में एक ऐसी पौजिटिव चमक पैदा होती है जो दूसरों को भी ऐसा          करने के लिए प्रेरित करती है.

– मुसकराने से तनाव आप के नजदीक नहीं आता है. दिन अच्छा बीतता है तो रात को नींद भी बढ़िया     आती है.

–  खुद पर भरोसा बढ़ता है.

–  छोटी-मोटी समस्याएं तो पास भी नहीं फटकती हैं.

–  भीतर से मन खुश रहता है तो चेहरे पर भी उस का अच्छा असर दिखता है.

देखा, आप की एक छोटी सी मुसकुराहट कितने बड़े-बड़े काम करती है पर साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आप की मुसकराहट फूहड़ न हो जाए. सामने वाले को ख़ुशी देने के लिए मुस्कुराइए, उस का मजाक बनाने के लिए नही.

तो फिर देर किस बात की. बांटिए लोगों में खुशियां और मजे की बात तो यह है कि मुसकराने के लिए आप को लखनऊ जाने की भी जरूरत नहीं है.

राफेल पर सरकार का झूठ

राफेल हवाई जहाजों की बढ़ी कीमतों के बारे में एक बहाना जो मोदी सरकार दे रही है कि वे पूरी तरह सुसज्जित हैं. भाजपा समर्थक वैबसाइटों और ग्रुपों पर फोटो प्रचारित किए जा रहे हैं कि पहले जो राफेल खरीदे जा रहे थे वेबस चेसिस की तरह के थे और अब जो आएंगे वे लक्जरी टूरिस्ट बस की तरह के हैं. अगर यह तथ्य सच है तो सरकार बनाने में क्यों हिचक रही है कि क्या बदलाव लाए गए हैं और क्या खर्चा हुआ है.

रक्षा मामलों को गुप्त रखा जाना चाहिए पर इस का मतलब यह तो नहीं कि रक्षा खरीद और सैनिक मामलों में कुछ लोग मनमानी कर सकें. सेना की कौन सी ऐसी बात है जो दूसरे देश की सेना को नहीं मालूम होती. हर देश भारी पैसा और लोहो लगाता है कि दुश्मन की हर जानकारी मिलती रहे. आम जनता से छिपा कर रखने से तो लाभ तब हो जब वही एकमात्र जानकारी स्रोत हो.

भारत ये जहाज खुद नहीं बना रहा. फ्रांस की कंपनी डोसा बना रही है. वह यह जहाज किसी को भी बेच सकती है. पाकिसतान, चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश और यहां तक कि चाहे तो भूटान भी इन्हें खरीद सकता है. ये सब देश जब खरीदने जाएंगे तो कंपनी निश्चित रूप से अपनी नई से नई तकनीक बनाएगी और कहेगी कि भारत ने भी इसे खरीदा है और यदि भारत की तकनीक की मार या ….. उन के पास होगी तो वे क्यों न बेचेंगी.

ऐसे मामले में हमारी सुरक्षा धरी की धरी नहीं रह जाएगी क्या, फ्रांस और इंजिप्स ने राफेल हवाई जहाज खरीद ही रखे हैं. इंजिप्स से उन की जानकारी दूसरे मुसलिम  देश पाकिस्तान को न देगा इस की गारंटी क्या है?

वैसे भी आजकल जो इलैक्ट्रौनिक्स इन हवाई जहाहों की तो छोडि़ए आप की महंगी गाडि़यों तक में लग रही है वह दूर बैठे बनाने वाले के हाथों में पलपल में पहुंच रही है. हमारे मोबाइल की हर गतिविधि चाहे तो बनाने वाली कंपनी कभी भी खोल सकती है, यहां तक कि हम ने क्या बात की.

राफेल विमानों में गुप्त बातों का बहाना तो बेमतलब की बात है क्योंकि ये बातें हर खरीदार या संभावित खरीदार देश को बनानी ही होगी और इस तरह के लड़ाकू विमानों के हर समय दुनिया में 20-25 देश ग्राहक होते हैं. कतार और ब्रूनेई जैसे छोटे अमीर देश भी हवाई बेड़े रखते हैं. कतार भी राफेल के खरीदारों में से एक है.

अगर यह विवाद नहीं उठता, अगर 15 दिन पुरानी कंपनीको औफसेट पार्टनर नहीं बनाया जाता जिस के मालिक अनिल अंबानी हैं, अगर फैसला नरेंद्र मोदी की जगह रक्षा मंत्री और रक्षा अधिकारी करते तो बात दूसरी थी. अब जब लग रहा है कि घड़े में पानी के साथ कुछ और तो सिर्फ अमृत कहने से बला नहीं टल जाएगी. उस में गंगाजल नहीं यह गारंटी कहां है, नरेंद्र मोदी को इस को निबटाना होगा ही. उन के आराध्य विष्णु और शिव कहीं मोहिनी अवतार और विष पीने वाले बन कर आएं तो बात बने.

सरकार को जाननी है डाक्टरों की धर्म और जाति

दिल्ली के औल इंडिया इंस्टीट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज ने हाल में डाक्टरों का डाटाबेस बनाने के लिए एक फार्म बंटवाया ताकि डाक्टरों के सही नाम, पते, फोन नंबर आदि जमा करे जा सकें. इस में धर्म और जाति के भी कालम थे और इस पर जम कर हंगामा खड़ा हो गया. प्रशासकीय विभाग ने इन कालमों को डालने का खेद जताया पर जो नुकसान होना था, वह हो चुका था.

सारी शिक्षा, शैक्षणिक जानकारी, तकनीकी ज्ञान के बावजूद देश आज भी धर्म और जाति के इर्दगिर्द घूम रहा है. इस से इंकार नहीं किया जा सकता. धर्म और जाति हमारे सामाजिक के अभिन्न अंग हैं. सदियों पुरानी विभाजक रेखाएं आज भी उतनी ही गहरी हैं और स्कूलों में साथ पढ़ने, दफ्तरों में साथ काम करने वालों में साथ चलने के बावजूद लोग अपने धर्म और जाति को सिर पर कलगी की तरह पहने रहते हैं.

चुनावी मौसम में विश्लेषक सब से बड़ी बात यह नहीं कर रहे कि नरेंद्र मोदी को कौन क्यों वोट देगा बल्कि यह कर रहा है कि कौन सी जाति या धर्म के लोग किसे वोट देंगे. 2014 के चुनावों में अगर कुछ हिंदुओं ने जाति का सवाल भुला कर वोट दिया भी था तो अब यह सवाल फिर से उभर आया है. यह ऐसा फोड़ा है जो मंत्रों और पंडितजी की दवाओं के कारण बारबार उभर आता है.

इस देश में कहीं 20 जने इकट्ठे हो जाएं, वे अपनी जाति के लोगों को ढूंढ़ने लगते हैं और जैसे ही एक जाति के लोग मिलते हैं, अनजान भी रिश्तेदार बन जाते हैं. नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी और जीएसटी ने सारे व्यापारियों को कालाबाजारी, करचोर, बेइमान, समाज का गुनाहगार घोषित कर दिया और लाखों का व्यापार ठप्प कर दिया पर वे जाति एक पार्टी को ही वोट देंगे, ऐसा लगता है. भारतीय जनता पार्टी यदि मायावती, अखिलेश, लालू यादव से ज्यादा राहुल और ममता बनर्जी से डरी हुई है तो इसीलिए उन्हें चुनने में जाति का सवाल नहीं खड़ा होता.

आरक्षण से उम्मीद थी कि निचले तबकों के कुछ लाख लोग ऊंचों के बराबर हो जाएंगे और उन में सामाजिक भेदभाव कम होने लगेगा पर जमीनी हालत वहीं के वहीं हैं. वैवाहिक विज्ञापन चाहे समाचारपत्रों में छपे हों या वैबसाइटों में हों, जाति, गोत्र पूछे बिना आगे नहीं बढ़ते. आंकड़े तो उपलब्ध नहीं हैं पर 90% से ज्यादा विवाह निर्धारित गोत्रों, जाति भी छोडि़ए, के हिसाब से होते होंगे.

ऐसे में प्रशासनिक अफसर जिन्हें हर समय पता रखना होता है कि किस डाक्टर को कब, कहां, क्या देना है. जाति न पूछें, ऐसा कैसे हो सकता है. जाति से देश का समाज हमेशा टुकड़ेटुकड़े रहा है और बेचारा संविधान भी उस से हार माने हुआ है.

आलू कचौड़ी रेसिपी

सामग्री :

– मैदा /आटा

– नमक

– तेल

– गरम पानी

– उबला हुआ आलू – 2

– जीरा

– अजवाइन

– हरी मिर्च

– अदरख पेस्ट

– धनिया पत्ता

– मिर्ची पाउडर

– हल्दी पाउडर

बनाने की विधि :-

– पहले मैदा में नमक मिलाये.

– उसके बाद गरम पानी थोड़ा-थोड़ा डालकर उसे मिलाये.

– उसके बाद थोड़ा तेल डालकर मिलाये.

– फिर पैन को गैस पे रखे और तब तक उस आलू को मिस कर पेस्ट बना ले.

– फिर पैन में तेल डाल दे और उसमे ज़ीरा और अजवाइन डाल दें.

– फिर हरी मिर्च, अदरक पेस्ट डाल दे.

– फिर आलू डाल दे और उसे मिलाये.

– फिर हल्का हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर डाल दे.

– और नमक डाल कर मिलाये और फिर किसी बर्तन में निकाल दे.

– फिर अब कढ़ाई / पैन चढ़ाये और उसमे तेल डाले इतना तेल डाले जिससे कि आपकी कचौड़ी अच्छी  तरह से तेल के अंदर हो.

– फिर आटे को फिर से एक बार मिला ले उसके बाद उसकी छोटी छोटी लोई काट लें.

– फिर उसे थोड़ा बेल दे और उसके बीच में थोड़ा सा आलू का वो रखें.

– और उसे अच्छी तरह से बंद कर दें.

– और ऐसे तेल में डाले और उसे धीमी आंच पे पकाये.

– जब वह हल्का गोल्ड कलर की हो जाये तो उसे निकाल दें.

– और वैसे ही पूरी कचौड़ी को बना लें और हरी चटनी के साथ सर्व करें.

सोयाबिन फ्राइड राइस

सामग्री :-

– बासमती चावल(250 ग्राम)

– सोयाबीन (100 ग्राम)

– प्याज (2)

– हरी प्याज

– धनिया पत्ता

– हरी मिर्च( 4-5)

– बीन्स (1/2 कप)

– नीबू

– जीरा

– अजवायन

– सोया सौस, टोमेटो सौस

– अदरक लहसुन पेस्ट(2 टेबलस्पून)

– काली मिर्च (1 टेबलस्पून)

– मिर्च पाउडर (1 टेबलस्पून)

–  हल्दी पाउडर (1 /2 टेबलस्पून)

– सब्जी मसाला (1 टेबलस्पून)

– बिरयानी मसाला (1 पैकेट)

– नमक

– बटर

– तेल

बनाने की विधि :-

– सबसे पहले गरम पानी में सोयाबिन को 15 मिनट दाल दे.

– और तब तक प्याज को पेस्ट बना लें.

– फिर हरी प्याज,मिर्च , गाजरऔर बिन्स को छोटे छोटे भागो में काट लें.

– फिर सोयाबीन को निचोड़कर निकल लें.

– और उसमे प्याज का पेस्ट,अदरक लहसुन का पेस्ट, मिर्च पाउडर,अजवाइन, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, सब्जी मसाला और स्वाद अनुसार नमक डालकर मिला देऔर उसे एक तरफ रख दें.

– अब राइस को गैस पे चढ़ा दे और दूसरी तरफ पैन चढ़ा दें.

– गरम हो जाने पे उसमे तेल और थोड़ा बटर डालें.

– और उसमे जीरा डाले और उसके बाद बीन्स , मिर्च डालकर अच्छी तरह से फ्राई करें.

– फिर उसमे सोयाबीन डाल दे और अच्छी तरह से फ्राई करें.

– फिर हरी प्याज दाल देऔर उसके बाद पकी हुई राइस को डाल दें.

– और उसमे सोया सौस और टोमैटो सौस डालकर उसे मिलाये.

– फिर उसमे बिरयानी मसाला और धनिया पत्ता डाल दे और आपकी सोया फ्राइड राइस तैयार है अब उसे गरमा-गरम परोसे.

पेट की परेशानियों को ऐसे करें दूर

जिस तरह की लोगों की खानपान हो गई है पेट से जुड़ी शिकायतें लोगों में बेहद आम हैं. खराब खाने के कारण लोगों को पेट संबंधित बहुत सी परेशानियां होने लगी हैं. डाइजेशन के खराब होने से लोग अधिकतर वक्त तनाव में रहते हैं. अगर डाइजेशन ठीक रहे तो पेट की आधी परेशानियां, जैसे अपच, और पेट का भारीपन नहीं रहेगा और आप पूरे दिन बिल्कुल फ्रेश रहेंगे. पर सवाल है कि ये सब होगा कैसे. इस सवाल के जवाब में हम आपके लिए लाए हैं ये खबर. इस खबर में हम आपको ऐसी 4 एक्सरसाइजेज के बारे में बताएंगे जिन्हें अपना कर आप पेट की बीमारियों को दूर कर सकते हैं.

गहरी सांस लें

आपका सांस लेने का तरीका आपके पाचन तंत्र पर खासा असर डालता है. अगर आपके सीने में हमेशा भारीपन रहता है तो ये एक्सरसाइज आपके लिए बेहद लाभकारी होगी. इससे आपका तनाव कम रहेगा और आप रिलैक्स्ड महसूस करेंगे.

तेज गति से चलें

तेज गति से चलना अपने आप में एक अच्छा एक्सरसाइज है. अगर आप रोजाना दिन में 35 से 40 मिनट पैदल चलते हैं तो आपका पाचन तंत्र ठीक रहेगा. तेज चलने से आपका वजन भी संतुलित रहता है.

क्रंचेस

गैस की परेशानी में ये एक्सरसाइज बेहद कामगर है. इसे करने से आपके पेट के मांसपेशियों पर काफी जोर पड़ता है और आपका डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतर ढंग से काम करता है. आप कई तरह के क्रचेंस कर सकते हैं, जैसे कि लेग क्रंच, लान्ग आर्म क्रंच आदि. बता दें, क्रंचेस करने से आप एब्स भी बना सकते हैं.

साइकिलिंग करें

साइकिलिंग का प्रयोग केवल आवागमन के लिए नहीं होता, बल्कि हमारे सेहत के लिए भी ये बेहद फायदेमंद होता है. साइकिलिंग से शरीर के बहुत से रोग दूर होते हैं. इससे डाइजेशन प्रक्रिया बेहतर होती है.

जीरो फिगर पाना है आसान

सभी लोगों को पतला होना और सुंदर दिखना अच्छा लगता है. यह जनून पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बहुत ही ज्यादा देखने को मिलता है. ना जाने किसकिस तरह की डाइट चार्ट के मुताबिक खानपान कर महिलाएं अपनेआप को पतला रखना चाहती हैं. पतला होना महिलाओं की एक हैबिट सा बन गया है. यह बुरी बात भी नहीं है, बल्कि बहुत ही अच्छी बात है. वजन के कम होने से बहुत सी बीमारियों से बचाव होता है, शरीर पर हर ड्रैस अच्छी लगती है, अपनेआप में कौन्फिडैंस बढ़ता है और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है.

बौलीवुड स्टार करीना कपूर खान ने जीरो फिगर में महारत हासिल कर रखी है. वे बहुत सुंदर दिखती हैं. इस के लिए उन्होंने बहुत मेहनत भी की थी. बैलेंस डाइट के साथ ऐक्सरसाइज का सहारा ले कर करीना ने अपनेआप को जीरो फिगर के लायक बनाया था. डिलीवरी के बाद अब वे फिर से जीरो फिगर में आने की तैयारी कर रही हैं.

आज उन की नकल कर कुछ महिलाएं जीरो फिगर की चाह में अपने जिस्म को नुकसान ही पहुंचाती हैं. सही तरीके से डाइट का न पता होना हार्मोनल इंबैलेंस को बुलावा देता है. इस से आप की मैंस्ट्रुअल साइकिल में गड़बड़ी, चक्कर आना, हड्डियां कमजोर होना, थाइरौइड, लो ब्लडप्रैशर आदि बीमारियां देखने को मिल सकती हैं और फिर लंबे समय तक बीमारियां पीछा नहीं छोड़तीं.

जीरो फिगर क्या होता है

जीरो फिगर को पाना आसान है मगर ज्यादा आसान भी नहीं. इस के लिए कड़ी मेहनत यानी हार्ड डाइट, ऐक्सरसाइज और हर समय खानेपीने में ध्यान व परहेज कररने के बाद ही आप को जीरो फिगर मिलता है. जीरो फिगर का मतलब है 31-24-32, मतलब कि आप का ऊपरी हिस्सा (ब्रेस्ट) 31 इंच, बीच का हिस्सा (कमर) 24 इंच और नीचे का हिस्सा (हिप) 32 इंच. यह 30-22-32 भी हो सकता है. जीरो फिगर में आप की कमर बहुत ही पतली हो जाती है और आप को कमर के साथसाथ पूरी बौडी पर भी पूरा ध्यान देना होता है. मतलब, आप को सभी अंगों के लिए अलगअलग वर्कआउट करना जरूरी होता है. तभी, आप की बौडी एक परफैक्ट शेप में यानी कि जीरो फिगर में दखती है.

क्या करें और क्या न करें

जीरो फिगर पाने के लिए नियमित ऐक्सरसाइज करें. जी हां, अगर आप चाहती हैं कि आप जीरो फिगर शेप में आएं तो इस के लिए आप को करनी पड़ेगी बेजोड़ मेहनत यानी कि ऐक्सरसाइज. आप एरोबिक्स जुम्बा, स्ट्रैंथ ऐक्सरसाइज इत्यादि अपनी दिनचर्या में जोड़ें. ध्यान रहे, किसी भी दिन आप का वर्कआउट मिस न हो. इस से शरीर को एक नई ऊर्जा मिलती है. ऐक्सरसाइज पूरे शरीर को लचीला और टोंड बनाती है, बहुत सी बीमारियों को ठीक करती है और तनाव से भी काफी मुक्ति मिलती है.

चुने बैलेंस्ड डाइट

जीरो फिगर पाना आप के लिए आसान तब होगा जब आप डाइट को बहुत ही तरीके से खाना शुरू करें. खाने में कैलोरी कम लेकिन हाई न्यूट्रीशन ज्यादा हो, तभी आप जीरो फिगर पा सकती हैं. इस के लिए आप अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में लें. अपनी डाइट में सही मात्रा में प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट को शामिल करें. साथ ही, मल्टी विटामिंस, मिनरल्स भी लेते रहें. अगर आप इन में से किसी एक चीज को भी कम करती हैं या बिलकुल नहीं खातीं तो आप जीरो फिगर नहीं पा सकतीं. इस से आप का वजन तो कम हो जाएगा लेकिन चेहरे का ग्लो और शरीर में जान कम होगी. आप को थकाथका फील होगा.

जीरो फिगर पाने के लिए आप अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा कच्चे फल, हरी सब्जियां, उबली हुई सब्जियां, उबली हुई दालें, ऊबली हुई बींस, अंकुरित दालें आदि को शामिल कर सकते हैं. कुछ फलों में 100 ग्राम के एक फल में 50 से कम कैलोरीज होती हैं और सब्जियों में 20 या 25 से कम कैलोरीज होती हैं. इन को खाने से शरीर में कमजोरी नहीं आती, चेहरे पर ग्लो बना रहता है. इन में से मिलने वाले विटामिंस और मिनरल्स जैसे कि विटामिन ए, ई, के, बी 12, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम आदि सभी तत्त्व आप के शरीर को अंदर से एनर्जेटिक बनाते हैं और साथ ही, आप के वजन को कम करते हैं व आप की कमर को दुबलापतला कर देते हैं.

डाइट में प्रोटीन इसलिए जरूरी है क्योंकि इस से आप की मसल्स व टिश्यूज रिपेयर होते हैं और शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ने से वजन को आसानी से कम किया जा सकता है. ध्यान रहे कि प्रोटीन की मात्रा 0.8 ग्राम प्रतिकिलो बौडी वेट के हिसाब से ही होनी चाहिए, यह एक बेसिक तरीका है.

जीरो फिगर बनाने के लिए बाजार के खाद्य पदार्थों से परहेज करना पड़ता है. इसलिए जीरो फिगर को ध्यान में रखते हुए ब्रोकली, गाजर, मूली व इस के पत्ते, सोयाबीन या पनीर, गोभी टमाटर ले कर या फिर अपनी पसंदीदा सब्जियों का गर्मागर्म सूप बना कर पिएं. सूप पीने से शरीर पर कोई फैट नहीं जमता है और यह शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्त्व भी प्रदान करता है जो जीरो फिगर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जंक फूड का सेवन न करें

जंक फूड, जैसे कि बर्गर, पिज्जा, चिली पोटैटो, चाउमिन, मैदायुक्त खाद्य पदार्थों आदि से दूर रहें. कैफीन, कोल्ड रिंग आदि का सेवन भी न करें. अपने मन को न मारें अगर कुछ चटपटा या मीठा खाने का मन है तो आप खा तो सकते हैं लेकिन उस की मात्रा बहुत ही कम होनी चाहिए और पूरे दिन उस कैलोरी को बैलेंस करने के लिए वर्कआउट करें व एक टाइम का खाना छोड़ दें. दिन में कम से कम 4 से 5 लिटर पानी पिएं.

अपनी डाइट में हैल्दी फैट्स को शामिल करें. इस से आप को भूख कम लगेगी और न्यूट्रीशन ज्यादा मिलेंगे. आप घी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. मीठे से परहेज करें. कैंडिस, पेस्ट्री, केक, चौकलेट आदि को अपनी डाइट से हटा दें. अगर मीठा खाने का मन है तो आप एकाध चौकलेट खा सकती हैं, बेहतर है कि गुड़ को अपनी डाइट में शामिल करें. ऐसा कर आप जीरो फिगर पा सकती हैं.

क्रिकेट के मैदान पर घूसे बाजी नहीं चलेगी

क्रिकेट को भद्रजनों का खेल कहा जाता है. इस के बावजूद इस खेल में कभीकभार खिलाड़ियों में आपस में उलझ जाने, हाथापाई करने या गालीगलौच करने की खबरें भी आती ही रहती हैं, फिर चाहे वह इंटनेशनल लेवल का कोई मैच हो या क्लब लेवल पर खेला जाने वाला कोई मैच ही सही.

कुछ मामलों में तो बात इतनी बिगड़ जाती है कि खिलाड़ी गलीमहल्ले के बदमाश लड़कों की तरह मैदान पर खूनखराबा तक कर देते हैं. अभी हाल ही में रविवार, 17 फरवरी को न्यूजीलैंड में एक क्लब मैच के दौरान एक अंपायर के साथ ही गलत बरताव किया गया.

दरअसल, होरोवहेनुआ कपिती के क्लब पारापारौमु और वेरारोआ के बीच मुकाबले के दौरान अंपायर के एक फैसले पर विरोध जताया तो उन के साथ ही मारपीट की गई. इस हमले अंपायर की नाक टूट गई. हालांकि, बाद में आपसी रजामंदी से मामला सुलझा लिया गया. लेकिन यह चिंता की बात है कि क्रिकेट में इस तरह मुक्केबाजी से मामले निबटाने की कोशिश होती है.

इसी तरह दिल्ली की अंडर 23 टीम के सिलेक्शन ट्रायल के दौरान हाल ही में सिलेक्टर अमित भंडारी पर हमला किया गया. इस से अमित भंडारी को सिर और कान में गंभीर चोटें आईं.

अंडर 23 के मैनेजर शंकर सैनी ने इस मामले में बताया, ”मैं टेंट के भीतर एक साथी के साथ खाना खा रहा था. भंडारी और दूसरे चयनकर्ता सीनियर टीम के कोच मिथुन मन्हास के साथ ट्रायल मैच देख रहे थे. 2 लोग आए और भंडारी के पास गए. उन की भंडारी से तीखी बहस हुई और वे तुरंत चले गए. इस के बाद 15 लोग हॉकी स्टिक, लोहे की छड़ें और साइकिल की चेन ले कर आए.

”ट्रायल में भाग ले रहे लड़के और हम भंडारी को बचाने दौड़े. उन्होंने हम को भी धमकी दी और कहा कि इस में न पड़ो, वरना गोली मार देंगे. इस के बाद उन्होंने भंडारी को हॉकी स्टिक और छड़ों से मारा.”इस घटना का दुखद पहलू यह था कि सिलेक्शन में रिजेक्ट होने वाले खिलाड़ी ने अपने कुछ साथियों की मदद से इस हरकत को अंजाम दिया. बाद में उस खिलाड़ी पर लाइफ बैन लगा दिया गया.

यह ठीक है कि उस खिलाड़ी ने बहुत बड़ी गलती और उस का नतीजा भी भुगत लिया लेकिन क्या गारंटी है कि ऐसी घटना फिर नहीं होगी?सच तो यह है कि जब से क्रिकेट में बेतहाशा पैसा आया है तब से इस में कैरियर बनाने वालों की बाढ़ सी आ गई है. अगर इंटरनेशनल लेवल पर चांस न भी मिले तो कोई बात नहीं, बस किसी तरह आईपीएल में ही नंबर आ जाए तो वारेन्यारे हो जाएंगे. और अगर कहीं वहां अच्छा प्रदर्शन कर दिया तो पैसों की बरसात हो जाएगी.

आईपीएल में जब किसी अनजान खिलाड़ी को करोड़ों में बोली लगा कर खरीदा जाता है तो छोटे क्लबों में खेलने वाले औसत खिलाड़ी भी ग्लैमर के समंदर में गोता लगाने के सपने देखने लगते हैं. अपने इलाके के सचिन तेंदुलकर कहलाने वाले ऐसे खिलाड़ी जब शुरू में ही सिलेक्टरों द्वारा नकार दिए जाते हैं तो कभीकभार इस तरह की वारदातें भी हो जाती हैं.

इस के अलावा आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सभी जल्दी से जल्दी रिजल्ट की चाह रखते हैं. तभी तो टेस्ट क्रिकेट से ज्यादा मशहूर अब ट्वेंटी20 हो गया है. छोटे लेवल पर हर औसत खिलाड़ी खुद को महारथी समझता है. हो सकता है कि वह एक हद तक अच्छा भी खेलता हो पर इंटरनेशनल लेवल पर तो क्रीम ही छांटी जाती है. लंबी रेस का घोडा तो वही बनता है जिस में खेल के हुनर के साथ सब्र भी होता है. साथ है, वह खेल की तकनीकियों से भी वाकिफ होता है. बहुत से ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने काफी जद्दोजेहद के बाद इस फील्ड में नाम कमाया है. अजय शर्मा और वसीम जाफर रणजी के लेवल तक क्रिकेट के बादशाह रहे पर इंटरनेशनल लेवल पर वे ज्यादा नाम नहीं कमा पाए. हालांकि उन्हें मौका भी मिला था.

कहने का मतलब यह है कि क्रिकेट के मैदान को मुक्केबाजी का रिंग बनाने से समस्या का हल नहीं होगा. अगर खिलाड़ियों को किसी बात से दिक्कत है तो वे प्रॉपर चैनल से उस का समाधान निकालने की ही कोशिश करे.

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