छोटे कद के माहिर मुक्केबाज अमित पंघाल ने पिछले एशियन खेलों में सोने का तमगा जीत कर अपने फौलादी इरादे जाहिर कर दिए थे. अब उन्होंने एक और कारनामे को अंजाम दिया है.

दरअसल, अमित पंघाल ने बुल्गारिया के सोफिया में मंगलवार, 19 फरवरी की रात को हुए स्ट्रैंडजा मैमोरियल टूर्नामैंट के फाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान के तेमिरतास जुसुपोव को हरा कर यूरोप के इस सब से पुराने मुक्केबाजी के टूर्नामैंट में लगातार दूसरा गोल्ड मैडल जीता.

आप को बता दें कि अमित पंघाल सेना से भी जुड़े हैं. लिहाजा, इस गोल्ड मैडल को उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को समर्पित किया. उन्होंने बताया कि चूंकि वे खुद सेना से जुड़े हैं इसलिए उन्हें इस घटना से ज्यादा दुख पहुंचा है.

भारतीय सेना के इस 23 साल के मुक्केबाज ने बुधवार, 20 फरवरी को बताया कि इस टूर्नामैंट के दौरान पुलवामा हमला उन के दिमाग में घूमता रहा था. यह हमला 14 फरवरी को उस दिन हुआ था जिस दिन भारतीय मुक्केबाजी टीम इस टूर्नामैंट में भाग लेने के लिए बुल्गारिया रवाना हुई थी.

अमित पंघाल ने फोन पर बताया, ‘मैं खुद सेना से हूं, दर्द इसलिए थोड़ा ज्यादा था. मैं मैडल जीतने के लिए बेताब था, क्योंकि मैं इसे पुलवामा में अपनी जान गंवाने वाले नायकों को समर्पित करना चाहता था.’

अमित पंघाल ने अपने खेल को ले कर एक और अहम जानकारी दी कि 49 किलोग्राम भारवर्ग में यह उन का आखिरी टूर्नामेंट था. उन्होंने बताया, ‘मेरे पास 49 किलोग्राम भारवर्ग के बजाय 52 किलोग्राम भारवर्ग में भाग लेने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है क्योंकि तोक्यो ओलंपिक, 2020 में 49 किलोग्राम भारवर्ग नहीं है और मैं ओलिंपिक में खेलना चाहता हूं.

‘49 किलोग्राम भारवर्ग में यह मेरा आखिरी टूर्नामैंट था और अगर मुझे मुक्केबाजी की एशियाई चैंपियनशिप के लिए चुना जाता है तो मैं 52 किलोग्राम भारवर्ग में भाग लूंगा.

‘इस के लिए मुझे ज्यादा  ताकत हासिल करने की जरूरत है और यह आसान नहीं होगा लेकिन मुझे यकीन है कि मैं इसे हासिल करने में कामयाब रहूंगा.’

भारत ने सोफिया में 3 गोल्ड, एक सिल्वर और 3 ब्रौंज मैडल समेत कुल 7 मैडल जीते. महिलाओं में गोल्ड मैडल जीतने वाली निखत जरीन (51 किलोग्राम भारवर्ग) ने भी अपना पदक पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों को समर्पित किया.

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