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खामोश : अयोध्या के मंदिरों में दुष्कर्म जारी है

उत्तरप्रदेश के जिस अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग का होहल्ला लगातार उठ रहा है, वहां के मंदिर में महंत द्वारा एक औरत की अस्मत लूटने पर खामोशी दिख रही है. राजनीतिक दल, धार्मिक संगठन चुप्पी साधे बैठे हैं. मंदिरों, मठों में बैठे लंपटों, दुष्कर्मियों के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठती सुनाई पड़ रही.

अयोध्या में आध्यात्म का ज्ञान लेने मुगलसराय से आई एक महिला के साथ चंद्रहरि महादेव मंदिर के महंत कृष्णकांताचार्य ने दुष्कर्म किया और महिला को मंदिर में बंधक बना लिया.

पुलिस के अनुसार महिला मुगलसराय की रहने वाली है. पति ने उसे छोड़ दिया था. इस से वह डिप्रेशन में थी. इसी बीच किसी ने उसे अयोध्या जा कर अध्यात्म में मन लगाने की सलाह दी. इस पर वह 24 दिसंबर को अयोध्या आई थी.

स्टेशन पर उस ने आटोरिक्शा वाले से किसी मंदिर में अच्छे साधु से मिलाने और रहनेखाने के बारे में पूछताछ की तो उसे चंद्रहरि मंदिर में पहुंचा दिया गया. महिला यहां रहने लगी और उस ने महंत को अपनी परेशानियां बताई. महंत ने महिला के रहने और खाने का इंतजाम कर दिया.

अयोध्या में इस दौैरान मोरारी बापू की 9 दिवसीय रामकथा मानस गणिका चल रही थी. महिला मोरारी बापू की यह रामकथा सुनने भी दो दिन गई थी. इसी बीच महंत ने उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया.

महिला ने महंत के चंगुल से भागने की कोशिश की पर उसे कमरे में बंद कर दिया गया. मौका देख कर उस ने 100 नंबर पर पुलिस को फोन किया. पुलिस जब चंद्रहरि मंदिर में पहुंची तो महिला कमरे के अंदर थी और बाहर से ताला लगा हुआ था. पुलिस ने बंधक महिला को छुड़ाया और दबिश दे कर महंत कृष्णकांताचार्र्य को गिरफ्तार किया.

अयोध्या में यह पहली बार नहीं है जब मंदिर में किसी बाबा ने बलात्कार किया हो, 2017 में जानकी निवास मंदिर में रह रही एक महिला और उस की बेटी के साथ 5 साधुओं द्वारा बलात्कार की घटना सुर्खियों में रही थी.

आमतौर पर धर्मस्थलों को सब से सुरक्षित जगह समझा जाता है और मंदिरों, मठों में रहने वाले साधुसंतों को सब से शरीफ पर अब यही जगह और धर्म का चोला पहने ढोंगी महिलाओं का यौनशोषण करने में सब से अधिक कुख्यात हो रहे हैं. महिलाएं न घर में सुरक्षित हैं, न बाहर और न ही धर्मस्थलों में.

आसाराम, रामरहीम, रामपाल जैसे ढोंगी जेलों में होने के बावजूद महिलाओं की आंखें नहीं खुल रहीं. साधुओं, बाबाओं की शरण में अपनी अस्मतें गंवा रही हैं. धर्म को सब से सुरक्षित शरणस्थली और धर्मगुरुओं, बाबाओं को मोक्ष, पुण्य का जरिया मान बैठीं महिलाओं को ही सोचना होगा कि वह ऐसी जगह जाए ही क्यो

गाय के सहारे पार नहीं होगी ‘चुनावी वैतरणी’

जीवन के अंतिम समय पर गौदान के सहारे सारे पाप धो कर नये जन्म के लिये तैयार होने की परंपरा पुरानी है. हिन्दू धर्म में इसका अपना बड़ा महत्व है. अब उत्तर प्रदेश सरकार गाय को ही केन्द्र में रखकर चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है. गाय और दूसरे छुट्टा जानवरों को लेकर गांव और शहर में व्यापक अंसतोष है. ऐसे में केवल गाय के संरक्षण केन्द्र खोलने से परेशानी का हल नहीं होगा. जिस स्तर पर गाय के ‘संरक्षण केन्द्र’ खोलने की जरूरत है वह ‘कांजी हाउस’ का नाम बदलने से पूरा नहीं होगा.

भारतीय जनता पार्टी आम चुनाव की तैयारी में ‘राम’ नहीं तो ‘गाय’ सही के मुद्दे पर आगे बढ़ रही है. भाजपा के लिये सबसे कठिन चुनौती उत्तर प्रदेश है. यहां लोकसभा की 80 सीटें है. इनमें से 73 सीटे 2014 के चुनाव में भाजपा को मिली थी. तीन राज्यों की चुनावी हार ने यह साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनावों में वहां भाजपा के पहले जैसे हालात नहीं हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश पर भाजपा की उम्मीदों का बोझ बढ़ गया है. उत्तर प्रदेश में उम्मीदों को पूरा करने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सबसे बड़ा दांव लगाया गया है. लोकसभा चुनावों में भाजपा की सफलता से ही योगी का राजनीतिक भविष्य तय होगा.

भाजपा ने जब राम मंदिर पर अपने पैर वापस खीचें तो प्रदेश में हिन्दुत्व को धार देने के लिये गौरक्षा और संरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाया जाने लगा. ‘छुट्टा जानवर’ गांव और शहर दोनों ही जगहों पर परेशानी बन चुके हैं. यह बात हर आदमी को पता है. सरकार भी इस बात को समझ रही है. असल में अब उत्तर प्रदेश सरकार को भी समझ नहीं आ रहा है कि वह इस समस्या से कैसे निपटे? ऐसे जानवरों के लिये गौ संरक्षण केन्द्र खोलने की योजना योगी सरकार बनने के पहले दिन से चल रही है. 2 साल में इस योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है.

सरकारी अफसरों ने कागज पर जो खाका खींच मुख्यमंत्री को गांव गांव संरक्षण केन्द्र खोलने का सपना दिखाया था वह पूरा नही हुआ. अब आम चुनाव में 100 दिन का समय बचा है. सरकार इस समस्या के समाधन के लिये फिर खुद को मुस्तैद दिखा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 जनवरी तक की समय सीमा तय की है. एक सप्ताह में सरकारी अफसर कागजों पर ही गौ संरक्षण केन्द्र खोल सकते हैं. उत्तर प्रदेश की सरकार ने कांजी हाउस का नाम बदल कर गौ संरक्षण केन्द्र रखने का फैसला किया है. इसके साथ ही साथ शराब की बिक्री और दूसरे माध्यमों पर सेस टैक्स लगाकर वसूली से गाय के संरक्षण पर खर्च किया जायेगा.

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती कहती हैं ‘आबकारी और टोल टैक्स पर सेस लगाना भाजपा और आरएसएस की सोच है. अगर इससे गाय का संरक्षण संभव है तो भाजपा की केन्द्र सरकार को इसे राष्ट्रीय स्तर पर लगाना चाहिये. राष्ट्रीय कानून बना कर स्थाई समाधान करना चाहिये.’ मायावती को पता है कि गाय का यह मुद्दा केवल हिन्दी बोली वाले राज्यों में ही प्रभावी हो सकता है. भाजपा इसे पूरे देश में लागू नहीं करेगी. हिंदी बोली वाले राज्य ही इस बार के आम चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं. गाय के नाम पर राजनीति से चुनाव में वोट मिलने मुश्किल हैं. ऐसे में गाय भाजपा को चुनावी वैतरणी पार नहीं करा पायेगी.

विराट के बाएं हाथ में काली पट्टी

औस्ट्रेलिया में चल रही 4 मैचों की मौजूदा टैस्ट सीरीज में 2-1 से आगे भारतीय टीम जब सिडनी में होने वाले अपने आखिरी मैच के लिए मैदान पर उतरी तो कप्तान विराट कोहली समेत हर भारतीय खिलाड़ी के बाएं हाथ पर एक काली पट्टी बंधी थी.

अमूमन ऐसा तभी किया जाता है जब टीम किसी बात का शोक मानती है. भारतीय क्रिकेट टीम इसलिए शोक में डूबी थी, क्योंकि 2 जनवरी, 2019 को क्रिकेट के महान कोच रमाकांत आचरेकर की मुंबई में मौत हो गई थी. वे 87 साल के थे और लंबे समय से बीमार थे.

रमाकांत आचरेकर को क्रिकेट में दिए गए उन के योगदान के लिए साल 2010 में ‘पद्मश्री’ और साल 1990 में ‘द्रोणाचार्य’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था. उन्होंने अपनी कोचिंग से देश को सचिन तेंदुलकर, विनोद कांबली, समीर दीघे, प्रवीण आमरे, चंद्रकांत पंडित और बलविंदर सिंह संधू जैसे कई दिग्गज क्रिकेटर दिए थे.

सचिन तेंदुलकर तो रमाकांत आचरेकर के लाडले शिष्य रहे थे. उनके साथ बिताए कुछ खास पलों में से एक के बारे में सचिन तेंदुलकर ने भावुक हो कर बताया, “ऐसे ही एक दिन मैच खेलने के बजाय मै वानखेड़े स्टेडियम में शारदाश्रम इंग्लिश मीडियम और शारदाश्रम मराठी मीडियम के बीच हैरिस शील्ड का फाइनल मैच देखने चला गया था. मैं वहां अपनी टीम का हौसला बढ़ाने गया था. मैंने वहां सर को देखा और उन्हें मिलने चला गया. उन्हें पता था कि मैं मैच खेलने नहीं गया, लेकिन उन्होंने फिर भी पूछा कि मैंने कैसा प्रदर्शन किया? मैंने उन्हें बताया कि मैं मैच छोड़ कर अपनी टीम का हौसला बढ़ाने यहां आया हूं.

इतना सुनना था कि उन्होंने मुझे एक जोरदार थप्पड़ लगाया. मेरे हाथ का लंच बौक्स छूट कर दूर जा गिरा. सारा सामान फैल गया.

“उस समय सर ने मुझे कहा था, ‘तुम्हें दूसरों के लिए तालियां नहीं बजानी हैं. ऐसा खेलो कि लोग तुम्हारे लिए तालियां बजाएं.’ “उस दिन के बाद मैंने काफी मेहनत की और घंटों प्रैक्टिस करता रहा. अगर उस दिन ऐसा नहीं होता तो शायद मैं स्टैंड में बैठ कर लोगों की हौसलाअफजाई ही करता रहता.”

रमाकांत आचरेकर की मौत से क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है इस की झलक सिडनी के क्रिकेट मैदान पर भी दिखी. इतना ही नहीं, रमाकांत आचरेकर को श्रद्धांजलि देते हुए बीसीसीआई ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘उन्होंने भारत को सिर्फ महान क्रिकेटर ही नहीं दिए, बल्कि अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने खिलाड़ियों को अच्छा इंसान भी बनाया. भारतीय क्रिकेट में उन का योगदान अमिट है.’

मैंने अपने जीवन को हमेशा बैलेंस किया है : टीना दत्ता

धारावाहिक ‘उतरन’ में इच्छा भारती की भूमिका निभाकर चर्चित हुई अभिनेत्री टीना दत्ता कोलकाता के बंगाली परिवार की हैं. उन्होंने साढ़े चार साल की उम्र में ‘सिस्टर निवेदिता’ धारावाहिक में काम किया, इसके अलावा उन्होंने कई बांग्ला फिल्मों में भी काम किया है. उन्हें बचपन से अभिनय की कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन 12 साल की उम्र में बांग्ला फिल्म ‘खेला’ ने उनकी जिंदगी बदल दी और वह अभिनय की ओर मुड़ी. शांत, स्पष्टभाषी और विनम्र स्वभाव की टीना को हर नयी और अलग भूमिका निभाना अच्छा लगता है. अभी वह एंड टीवी पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक ‘डायन’ में मुख्य भूमिका निभा रही हैं. उनसे मिलकर बात करना रोचक था. पेश है कुछ अंश.

प्र. इस तरह की भूत प्रेत और डायन जैसी चीजों पर कितना विश्वास रखती हैं?

असल जिंदगी में कभी विश्वास नहीं करती, पर लगता है कि कोई ऐसी शक्ति मनुष्य में ही है, जिसमें से कुछ लोग अच्छे काम करना चाहते हैं, तो कुछ बुरे काम कर खुश रहते हैं. मुझे ऐसा किसी प्रकार का अनुभव नहीं हुआ.

प्र. असल जिंदगी में आपको किसी से डर लगा?

मुझे किसी से कोई डर नहीं लगता. पहले मैं सांप से बहुत डरती थी, पर ‘खतरों के खिलाड़ी’ शो में मेरे उपर 4 से 5 पाईथन सांप छोड़ दिए गए थे, जिससे वह डर भी निकल गया.

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प्र. कई बार ऐसा देखा जाता है कि किसी महिला को डायन कहकर घर से निकाल दिया जाता है या मार दिया जाता है, इस बारे में आपकी राय क्या है?

ऐसा कभी भी नहीं हो सकता और अगर लोग ऐसा करते हैं तो गलत करते है, क्योंकि अगर कोई महिला किसी बात से डर कर या मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने पर कुछ करती है, तो उसे सही इलाज की जरुरत है. झाड़-फूंक से बीमारी ठीक नहीं हो सकती. गांव में अभी भी इस पर लोग विश्वास करते हैं, क्योंकि उन्हें सही ज्ञान नहीं है और शिक्षा का अभाव है. मुझे दुःख होता है जब मैं मीडिया में पढ़ती हूं कि किसी महिला को भूत-प्रेत कहकर उसे जला दिया गया.

प्र. क्या इस तरीके के शो अन्धविश्वास को बढ़ावा नहीं देते?

मैं इस शो के जरिये अन्धविश्वास को फैलाना नहीं चाहती. यह एक फिक्शन शो है और सास बहू के धारावाहिक से अलग हटकर है. मेरा मकसद यह है कि जब आप पूरा दिन काम करने के बाद घर जाएं, तो कुछ अलग मनोरंजक शो को देखने का मौका मिले. सास बहू के नोक-झोंक जिसे आप हर रोज घर में देखते हैं, उसे ही टीवी पर देखना अच्छा नहीं लगता. इसके अलावा आज के दर्शक काफी समझदार हैं और वे ऐसे मनोरंजक शो को अवश्य पसंद करेंगे.

प्र. आप अपनी जर्नी को कैसे लेती हैं?

मैं अपनी जर्नी से बहुत खुश हूं, क्योंकि बहुत कम लोगों को इतने कम समय में यहां तक पहुंचने का मौका मिलता है. मेरा पहला शो ‘कोई आने को है’ भी हिट रहा. उसके बाद ‘उतरन’ मेरा एक सुपरहिट शो था. इस तरह मुझे अच्छे काम मिलते गए और मैं करती गयी. इसमें मेहनत और लगन मेरी 100 प्रतिशत हुआ करती है. इसके अलावा मैंने कई बांग्ला धारावाहिक और फिल्में की हैं, मैंने उसे भी एन्जौय किया है, क्योंकि वहां मेरा घर है, लेकिन अब मैं मुंबई में भी अपने काम को एन्जौय कर रही हूं. अभी भी अगर कोई मौका मिलेगा, तो अवश्य बांग्ला फिल्म करना चाहूंगी.

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प्र. धारावाहिक ‘उतरन’ से आपका अलग ब्रांड बना, इसे आप कैसे लेती हैं?

‘इच्छा’ की भूमिका मेरे दिल के बहुत करीब है. वह मेरे बच्चे की तरह है. मैंने साढ़े पांच साल उसके लिए काम किया है. मैंने दो-दो भूमिका एक साथ निभाई है. कहीं भी अगर मैं जाती हूं तो लोग मुझे ‘इच्छा’ कहकर बुलाते हैं, जो मुझे बहुत अच्छा लगता है. मुझे उस भूमिका से बहुत प्यार मिला. कुछ लोगों ने अपने बेटी का नाम तक इच्छा रख लिया, जो बहुत खुशी की बात है. आज बहुत कम ऐसे किरदार किसी धारावाहिक में हैं, जिसमें वे खुद घुल जाते हैं. आज भी मैं उस शो को याद करती हूं, लेकिन ऐसे ब्रांड स्थापित करने से कई बार समस्या भी आती है, क्योंकि कलाकार उसमें इतना घुस जाता है कि उससे निकल कर दूसरा अभिनय करना उसके लिए मुश्किल हो जाता है.

प्र. आप के यहां तक पहुंचने में आपके परिवार का कितना सहयोग रहा है?

मेरी कामयाबी में मेरे पेरेंट्स का बहुत सहयोग रहा है. मैंने कोलकाता में साढ़े चार साल की उम्र से काम शुरू किया था. मेरे पिता औफिस जाने से पहले मुझे शूट पर छोड़कर जाते थे और बीच में औफिस से मुझे देखने भी आते थे, क्योंकि मैं छोटी थी और घर जाने के लिए रोती थी. मेरी मां की बहुत इच्छा थी कि मैं अभिनय करूं. जब मैं ‘उतरन’ शो के लिए मुंबई आई, तो मेरी मां मेरे साथ आई थी और रही. उनके लिए ये बहुत मुश्किल था, क्योंकि वह अपने पति और बेटे को छोड़कर यहां आई थी. उस समय मुझे यहां सेटल होने में समय लगा, क्योंकि मैं इस शहर और इंडस्ट्री में नई थी.

प्र. सोशल मीडिया पर आप कितनी एक्टिव हैं?

मैं सोशल मीडिया को अपने जीवन में कही स्थान नहीं देती, मेरे हिसाब से जो लोग अंदर से खुश नहीं होते या अपने आपको सबकी नजर में रखना चाहते हैं, उन्हें ही वह पसंद आती है. एक स्माइल भरे चित्र पोस्ट कर देने से कोई अपने आप को खुश नहीं रख सकता. उसके लिए उसे अंदर से खुश होना पड़ता है.

प्र. इंडस्ट्री में आपके दोस्त कौन हैं?

इंडस्ट्री में कोई आपका दोस्त नहीं बन सकता. मैं स्पष्टभाषी हूं, इसलिए लोग मुझे इग्नोर भी करते हैं. यहां सामने सब अच्छी बातें करते हैं, पर पीठ पीछे आपकी बुराई करने से नहीं कतराते. इसलिए मैंने लोगों की बातों का विश्वास करना छोड़ दिया है. मेरे अधिकतर दोस्त इंडस्ट्री के बाहर हैं.

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प्र. स्टारडम को कैसे मेनेज करती हैं?

ये सही है, इसे बनाये रखना मुश्किल होता है, क्योंकि डेली शो के कलाकार का ग्राफ कभी एक जैसा नहीं होता. उतार-चढ़ाव होता रहता है. मुझे बीच में दो साल तक अच्छी भूमिका के लिए बैठने भी पड़ा. उस दौरान मैं डिप्रेशन में नहीं गयी. मैंने अपने जीवन को हमेशा बैलेंस किया है.

प्र. अभिनय के अलावा आप क्या पसंद करती हैं?

मुझे दोस्तों के साथ समय बिताना, घूमना और फिल्में देखना पसंद है.

प्र. अगर अभिनेत्री न होती तो क्या बनना पसंद करती?

मैं एयर होस्टेज बनना पसंद करती.

प्र. नए साल में क्या परिवर्तन चाहती हैं?

मैं चाहती हूं कि प्रदूषण हमारे देश से दूर हो जाये. जो लोग कूड़े-कचरे को इधर-उधर फेंकते हैं, उन्हें सजा मिले. सबको ताजी हवा में सांस लेने का मौका मिले. ये सही है कि अगर प्रदूषण का स्तर कम होगा, तो लोग कम बीमार पड़ेंगे.

पति की कारगुजारियां कर गईं परेशान

अपनी शोख अदाओं से दर्शकों का दिल जीतने वाली डांसर व सिंगर एनी बी उर्फ अनामिका बावा परेशान हो कर इतना टूट गईं कि उन्हें जहर खाने को मजबूर होना पड़ा.

हरियाणा में एनी बी के नाम से मशहूर अनामिका ने आरोप लगाया कि उन्होंने यह कदम अपने पति के अफेयर के चलते उठाया है. दरअसल, उन के पति का एक महिला से अफेयर चल रहा है. वह महिला अनामिका को कई बार फोन कर के पति को तलाक देने की बात कहती रहती है.

यही वजह है कि वे अपने पति की माशूका से काफी परेशान थीं और उन्होंने जहर खा कर अपनी इहलीला खत्म करनी चाही. उन्हें आननफानन सिविल अस्पताल में भरती कराया गया.

हिसार की नवदीप कालोनी की रहने वाली हरियाणवी कलाकार एनी बी उर्फ अनामिका बावा का कहना है कि तकरीबन 5 साल पहले यानी साल 2013 में उन की शादी शेखर खन्ना के साथ हुई थी. वीडियो अलबम डायरेेक्टिंग के दौरान ही उन की मुलाकात हुई थी. शादी के बाद इन को एक बेटा भी हुआ जो अब 4 साल का है.

पति शेखर खन्ना की लाइफ में 2 साल पहले दिल्ली की एक महिला आ गई जो शादीशुदा है. आरोप है कि उस महिला के कारण ही उन की लाइफ बरबाद हुई है.

कुछ दिन पहले महिला ने अनामिका बावा को पति के साथ जन्मदिन का केक काटते हुए एक वीडियो भी भेजा था. उन्होंने बताया कि पति शेखर से जिस महिला का अफेयर चल रहा है वह बैंगलरु में बार डांसर है और इन दोनों की दोस्ती फेसबुक के जरीए हुई है. इस के बाद चैटिंग करतेकरते ये दोनों नजदीक आ गए.

इस महिला को ले कर पति शेखर के साथ उन का विवाद काफी बढ़ गया तो वे अपने मायके हिसार में रहने लगीं और पति रोहतक में. जब उन्होंने अपना घर संभालने की कोशिश की तो महिला ने हमेशा पति शेखर को मेरे खिलाफ भड़का कर दूर करने का काम किया. इसी के चलते वे डेढ़ साल पहले अपने मायके हिसार में आ कर रहने लगीं.

अनामिका का आरोप है कि अब मेरा एक दोस्त है जिसे वह महिला भड़का रही है ताकि हमारी दोस्ती टूट जाए. मनमुटाव के चलते पति शेखर पिछले 3-4 दिन से लापता हैं. वह महिला लगातार मुझे और मेरे दोस्त को फोन कर के परेशान कर रही है. वह फोन पर यह पूछ रही है कि शेखर को कहां छुपा रखा है.

एनी बी का आरोप है कि यह महिला उन से फोन पर यह भी कहने लगी कि उस का पति उन के पास आया हुआ है और वह उस के साथ जन्मदिन मना रही है. इस के बाद इस महिला ने उन्हें गालियां दीं और प्रताड़ित किया.

एनी बी को 29 दिसंबर, 2018 को पूरे दिन महिला ने फोन कर के परेशान किया. इसी परेशानी से तंग आ कर उन्होंने चूहे मारने की दवा निगल ली. पर समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया गया तो उन की जान बच गई और उन्हें छुट्टी दे दी गई.

कौन हैं अनामिका…

अनामिका बावा हरियाणा की डांसर और सिंगर हैं. एनी बी के नाम से जाने वाली अनामिका बावा ने 2,500 से अधिक गानों पर परफौर्म किया है. उन्हें हरियाणा की दूसरी सपना चौधरी के नाम से जाना जाता है.

कब दें बालों को नया हेयरकट, यहां जानिए

आज कल लोगों की जिंदगी में इतना काम है कि लोग अपने बालों पर ध्‍यान ही नहीं देते. बालों को कब कटवाना है, इसका उन्‍हें पता ही नहीं चल पाता. हममें से कई लड़कियां जब कभी अपने बालों को दोमुंहा देखती हैं तभी उन्हें अपने बालों को कटवाने और नया हेयरकट देने की याद आती है. यहां पर कुछ संकेत दिये जा रहे हैं, जिसकी मदद से आपको पता चलेगा कि अब आपके बालों को कटवाने का समय आ चुका है.

जब बाल चेहरे की शोभा न बढाएं : अच्‍छा हेयरकट चेहरे के लुक से मिलता हुआ होना चाहिये. अगर इन दिनों कोई भी आपके बालों की हेयरस्‍टाइल की तरीफ नहीं करता या फिर बाल आपके चेहरे कि शोभा न बढा रहे हों तो, समझ जाइये कि अब आपके बालों को कटवाने का समय आ चुका है. अगर आपके बाल देखने में बिल्‍कुल भी अच्‍छे नहीं लग रहे तो, तुरंत ही नया हेयरकट लें.

जब इसके बारे में कई बार सोचा हो : अगर आपकी अंतर आत्‍मा कई बार आपसे बोल चुकी है कि अब आपको नया हेयरकट लेना चाहिये तो, देर न करें. क्योंकि अब आपके बालों की हेयरकट बेहद पुरानी हो चुकी है. और आपको खुद को नया लुत देने की जरूरत है.

जब जिंदगी में नया पड़ाव शुरु करने जा रही हों : जब आप नए कौलेज में, नए जौब के लिये या फिर जिंदगी में कुछ भी नया करने जा रही हों तो, खुद को नया लुक दीजिये जो आपके चेहरे पर फबे और आप आकर्षक दिखें. इससे आपको नया अनुभव प्राप्‍त होगा और खुशी भी मिलेगी.

जब आप डिप्रेशन में हों : जब भी अवसाद में हो तो एक नया हेयरकट करवाएं और खुद को बार बार शीशे में देख कर खुशी का अनुभव प्राप्‍त करें. ये डिप्रेशन दूर करने और खुद को खुश रखने का बढ़िया विकल्प है.

अब घर पर ही करें गोल्ड फेशियल

कई बार त्योहारों, इवेंट्स और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों में घर की महिलाएं दूसरों से हटकर और खूबसूरत दिखना पसंद करती हैं. अगर आपको सुंदर और ग्लोइंग दिखना है तो आप घर पर ही गोल्ड फेशियल कर सकती हैं, इसके लिए आपको पार्लर जाने की बिल्कुल भी जरूरत नही है. गोल्ड फेशियल करवाने के कई लाभ भी हैं, ये फेशियल सभी प्रकार की स्किनटोन को सूट करता है. इस फेशियल को अपने चेहरे पर एक बार एप्लाई जरूर करें. हमें उम्मीद है कि इसका रिजल्ट आपको निराश नहीं करेगा. तो जानिए कि घर पर गोल्ड फेशियल करने के टिप्स.

सामग्री

क्लीन्जर, गोल्ड क्लीन्जर, गोल्ड फेशियल स्क्रब, गोल्ड फेशियल मास्क, मौश्चराइजिंग लोशन

प्रयोग विधि

चेहरे को साफ करें

पहले अपने चेहरे को पानी से धोएं. फिर गोल्ड फेशियल करने से पहले अपने चेहरे को क्लीन्जर की मदद से साफ करें. अब अपने चेहरे और गले पर सर्कुलेशन मोशन में उंगलियां चलाएं. लगभग 5 से 8 मिनट तक चेहरे की मसाज करें. एक बार ऐसा करने के बाद रुई लेकर गुनगुने पानी से चेहरे को अच्छे से साफ कर लें.

भांप

इससे आपके चेहरे और गले में जमी हुई गंदगी और डेडस्किन साफ हो जाएगी. इसको करने के लिये एक बड़े बर्तन में गर्म पानी लें और उसे थोड़ा ठंडा होने दें. इसके बाद अपने सिर को एक बड़े तौलिये से ढकें और अपने चेहरे पर स्टीम को लगने दें. जब पानी ठंडा हो जाए तो तौलिया हटा लें. फिर वाइप्स से अपने चेहरे को साफ कर लें.

गोल्ड क्लीन्जर

गोल्ड फेशियल किट को खोलें और क्लीन्जर को अपने चेहरे और गले पर लगाएं और चेहरे की मसाज करें. इस प्रक्रिया के बाद रुई से अपना चेहरा साफ कर लें.

स्क्रबिंग

इसके लिये आप किट के स्क्रब का सहारा लें. स्क्रब को चेहरे और गले पर लगाएं और थोड़ा गर्म पानी लेते हुए उंगलियों को ऊपर की ओर चलाते रहें. 2 से 3 मिनट के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धोकर पोछ लें. इस स्टेप को करने से आपके चेहरे के सभी छिद्र खुल जाएंगे. बता दें कि स्क्रबिंग चेहरे की डेडसेल्स को हटाने में मदद करता है.

मसाज गोल्ड क्रीम से फेशियल

गोल्ड क्रीम से चेहरे पर चमक आती है. गोल्ड क्रीम को चेहरे और गले पर लगाएं और चेहरे की मसाज करें, कम से कम 15 से 20 मिनट तक इसे अपने चेहरे पर लगाए रखें. उसके बाद ठंडे पानी से धो लें और अच्छे से पोछ लें. मसाज क्रीम में एलोवेरा, चंदन, केसर और गोल्ड पाउडर के गुण होते हैं जो आपकी स्किन को ग्लो करने में मदद करते हैं.

गोल्ड मास्क

गोल्ड मास्क को अपने चेहरे और गले पर लगाएं और सूखने दें. जब एक बार मास्क पूरी तरह से सूख जाए तो उसे धीरे-धीरे करके हटा दें. मास्क हटाकर चेहरे को ठंडे पानी से धो लें और अच्छे से पोछ लें. साथ ही आप अपनी त्वचा को टोन करने के लिये खीरे का रस या पसंदीदा टोनर भी लगा सकती हैं.

मौइश्चराइजिंग

मास्क के बाद चेहरे पर मौइश्चराइजर लगाना जरूरी होता है. अगर आपकी किट में मौइश्चराइजर नहीं है तो आप सामान्य सीरम का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. मौइश्चराइजर को चेहरे और गले पर गोलाकार मुद्राओं में लगाएं. इसके बिना गोल्ड फेशियल अधूरा ही रहता है.

सावधान : ‘सौरी गैंग’ की अजब गजब ट्रिक्स, निगाहें आप की जेब पर

पाकेटमार अब नई ट्रिक के साथ सिर्फ भीड़भाड़ वाले बाजार में घूम रहे हैं. बाजार में जानबूझ कर टकराना, सौरी बोलना, ध्यान भटकाना जैसे काम में वे माहिर हैं. वारदात करते समय वे एक से ज्यादा होते हैं. ज्यादातर लोगों को इन पर शक भी नहीं होता क्योंकि वे नाबालिग होते हैं.

इन पाकेटमार के टारगेट पर महंगा मोबाइल फोन व नोटों भरा पर्स होता है. इन का एरिया जानापहचाना होता है. आनेजाने व भागने के सारे रास्ते इन्हें बखूबी मालूम होते हैं. कई बार सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से वे पहचाने गए और पकड़े गए.

दरअसल, पुलिसिया जांच में कुछ सुराग हाथ लगे हैं, मसलन नाबालिगों को दिहाड़ी पर रखा जा रहा है. उन्हें नई ट्रिक के साथ भीड़ भरे बाजार में उतारा जा रहा है. भीकाजी कामा प्लेस, दरियागंज, कनाट प्लेस में हनुमान मंदिर, शिवाजी स्टेडियम के अलावा पहाडग़ंज थाने के पास, करोल बाग इलाके में अजमल खां रोड, राजेंद्र प्लेस के अलावा तमाम ऐसी जगहें शामिल हैं जहां शाम होते ही भीड़ जुटती हो.

खचाखच भरी बस हो और नोटों से भरा पर्स साथ में हो, ये पाकेटमार बखूबी जान जाते हैं कि इस शख्स के पास पैसा मिलने की उम्मीद है तो किसी न किसी तरह वारदात को अंजाम देने में कोताही नहीं बरतते हैं.

अगर आप से भीड़भाड़ भरे बाजार में अचानक कोई जानबूझ कर जबरन टकरा जाए और पलट कर सौरी बोलते हुए लिपटने की कोशिश करे तो सतर्क हो जाएं. मुमकिन है कि आप को पाकेटमार ने अपना निशाना बना लिया है क्योंकि पाकेटमारों का भी गैंग होता है. आजकल दिल्ली के आसपास ‘सौरी गैंग’ काफी सक्रिय है.

यह गैंग दिल्ली के करोल बाग, पहाडग़ंज, चांदनी चौक, सदर बाजार, कमला नगर, दरियागंज सहित दूसरे मार्केट एरिया में ज्यादा ऐक्टिव है. इस गैंग में ज्यादातर नाबालिग ही हैं. इस से पहले साल 2015 में यह गैंग कुछ समय के लिए ही सक्रिय हुआ था.

ताजा मामला नबी करीम, दिल्ली का है. 2 दिन में 4 लोगों को ‘सौरी गैंग’ ने अपना शिकार बनाया. इन में केरल, पंजाब और तमिलनाडु के बिजनसमैन शामिल हैं, वहीं चौथी वारदात को अंजाम देते ही गैंग के 4 नाबालिगों को रंगे हाथों पुलिस ने पीछा कर के धरदबोचा.

दरअसल हुआ यों कि पंजाब से दिल्ली आए एक शख्स दयाल चंद से बड़े ही शातिराना तरीके से पहाडगंज इलाके में लूटपाट हुई. वह पहाडगंज के एक होटल में ठहरे हुए थे. 13 दिसंबर की शाम वह होटल से बाहर घूमने निकले. रास्ते में उन से एक शख्स जानबूझ कर टकराया और फिर यह कहते हुए उलझ पड़ा कि तुम ने चलते हुए उसे बूट मारा है.

दयाल चंद कुछ समझ पाते, इस से पहले वह दयाल चंद के पैरों पर गिर गया और झटके से पैर खींच दिया. जोर का झटका लगने पर दयाल चंद गिर गए. उस के बाद आरोपी ने धक्कामुक्की करते हुए दयाल चंद से हाथापाई की. हाथापाई करने के कुछ देर बाद ही आरोपी वहां से भाग गया.

तभी दयाल चंद के पास खड़े नज़ारा देख रहे एक शख्स ने बताया कि आप की जेब से कुछ निकाल कर ले भागा है. जब दयाल चंद ने अपनी पैंट की जेब को खंगाला तो उस में 25,000 नकदी व दूसरे जरूरी कागजात गायब थे.

दयाल चंद उसे पकडने के लिए भागे, तभी आरोपी शख्स के पास एक स्कूटी आई और उस पर बैठ कर वह पाकेटमार भाग गया. इस मामले की शिकायत थाने में दी गई. जिस जगह वारदात को अंजाम दिया गया, पुलिस ने मौके पर जा कर एक होटल की सीसीटीवी फुटेज चैक की. उस फुटेज में एक शख्स व उस के 2 साथी स्कूटी पर जाते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं.

वहीं दूसरी घटना धनबाद के दुर्गा कुमार के साथ हुई. इन दिनों दिल्ली में किसी काम के सिलसिले में धनबाद के दुर्गा कुमार आए हुए थे. रात को वह पहाडगंज में एक रेस्तरां में खाना खाने गए. इसी दौरान 4 लड़के उन के सामने से आए और उन में से एक लड़के ने चलते हुए जानबूझ कर कंधा टकराया.

दुर्गा कुमार ने उस लड़के की तरफ देखा, वह पलट कर तुरंत सौरी बोलने लगा. दुर्गा कुमार चुप रहे. इस के बाद उस लड़के ने सौरी बोलते हुए ऐसी ऐक्टिंग की जैसे उसे बहुत अफसोस हो रहा हो. उस ने दुर्गा कुमार से लिपट कर फिर से सौरी कहा. इस के बाद चारों लड़के वहां से चल दिए.

ऐसा देख दुर्गा कुमार को बड़ा अजीब लगा. तभी उन्हें पता चला कि उन का मोबाइल फोन गायब है. दुर्गा कुमार ने दौड़ कर एक आरोपी को पकड़ लिया और बाकी तीनों भागने लगे. गश्त कर रहे पुलिस वाले ने शोर सुना तो उस ने लोगों की मदद से पीछा कर के 2 लड़कों को पकड़ लिया. पूछताछ के बाद चौथे शख्स को भी पकड़ लिया गया. आरोपियों ने बताया कि कुछ घंटे पहले 3 और वारदातों को अंजाम दिया है.

पुलिस के मुताबिक, बाकी पीड़ित भी थाने में शिकायत ले कर आ गए. इन में से एक केरल के रहने वाले थे, जो किसी काम से आए हुए थे. एक पंजाब के बिजनसमैन और एक तमिलनाडु के शख्स को सौरी बोल कर टारगेट किया गया.

पूछताछ में पता चला कि उन के निशाने पर विदेशी सैलानी और बाहरी राज्यों के लोग होते हैं. पुलिस के मुताबिक, इसी तर्ज पर कुछ समय पहले करोल बाग इलाके में कोलकाता से दिल्ली आए एक कारोबारी को लूटा गया था.

ऐसे गिरोहों के बदमाशों पर नजर रखने के लिए मुख्य ठिकानों की पहचान कर वहां सादा कपड़ों में पुलिस वाले तैनात किए जाते हैं. सीसीटीवी फुटेज व लोकल मुखबिरों की समयसमय मदद पर ली जाती है.

राम मंदिर को लेकर ‘बैकफुट’ पर आई भाजपा

विकास के वादे पर सरकार बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 साल में ही धर्म की राजनीति का सहारा लेने लगे थे. 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार ने यह बता दिया है कि देश अभी भी विकास को केन्द्र में रखकर ही आगे बढ़ना चाहता है.

चुनावों में हार के बाद भाजपा नेताओं का बड़बोलापन कम नहीं हो रहा है. भाजपा को लग रहा है कि हर बात के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराकर केन्द्र सरकार की 5 साल की नाकामियों को छिपाया जा सकता है. भाजपा ने विधानसभा चुनावों में नोटबंदी, जी.एस.टी., कालाधन और सर्जिकल स्ट्राइक को मुद्दा नही बनाया.

भाजपा ने 2019 के आम चुनावों का सेमीफाइनल कहे जाने वाले चुनावों में धर्म की राजनीति को मुद्दा बना, राम मंदिर को लेकर आदित्यनाथ को चुनावी प्रचार का सबसे बडा ब्रांड अम्बेसडर बनाया.

जनता ने भाजपा के इन मुद्दों को नकार दिया और उस कांग्रेस की सरकार बनवा दी जिसको राजनीति के हाशिये पर मान लिया गया था. असल में यह जीत कांग्रेस की नहीं थी, यह भाजपा और उसके हिंदुत्व की हार थी.

अपने सबसे प्रमुख मुद्दे को पिटा हुआ देखकर भाजपा ‘बैकफुट’ पर है. भजभज मंडली के बहुत सारे दबाव के बाद भी केन्द्र सरकार राम मंदिर मुद्दे पर ‘अध्यादेश’ लाने को तैयार नहीं है.

इस बात की सफाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने ‘इंटरव्यु’ में यह बात स्वीकार करनी पड़ी. इंटरव्यु के जरिये अपनी बात वहां रखी जाती है जहां पर तर्क-वितर्क न हो सके. राम मंदिर के लिए प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से कांग्रेस को जिम्मेदार मानकर ऐसा संदेश दिया जैसे वह कांग्रेस से मदद मांग रहे हों. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 5 साल के काम को कांग्रेस के 70 साल से अधिक बताया और इस मुद्दे पर चुनाव मैदान में जाने की बात कही. इसके बाद भी राम मंदिर मुद्दे पर ‘अध्यादेश’ के सवाल पर कांग्रेस से ही मदद मांग ली.

प्रधानमंत्री हिन्दुत्व को मन में बैठा चुकी जनता को यह नहीं बता पा रहे हैं कि जिस कांग्रेस ने 70 साल तक कोई काम नहीं किया, राम मंदिर मुद्दे के ‘अध्यादेश’ पर उससे मदद मांगने का क्या लाभ?

भाजपा के वोटर को हमेशा हिन्दुत्व का पाठ पढाया गया है. वह आज यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि जब अयोध्या में सभासद से लेकर देश के सर्वोच्च पद पर राष्ट्रपति तक भाजपा की ताकत है तो कांग्रेस से मदद मांगने की जरूरत क्या है?

केवल भाजपा के कार्यकर्ता ही नही उससे जुड़े तमाम संगठन यह मानते हैं कि अगर मोदी के कार्यकाल में भाजपा राम मंदिर नहीं बनवा पा रही तो कब बना पाएगी?

संघ से जुड़े कई पदाधिकारियों ने अयोध्या में कहा कि ‘अब राम टेंट में नहीं रहेंगे’. इससे लोगों को लगा कि 2019 के आम चुनाव से पहले राममंदिर को लेकर सरकार कोई बडा कदम उठाएगी. प्रधानमंत्री के बयान ने यह साबित कर दिया है कि केन्द्र सरकार इस मुद्दे पर कोर्ट के फैसले और कांग्रेस के सहयोग का इंतजार कर रही है. ऐसे में चुनाव में हिन्दुत्व के मुद्दे को हवा देने के लिये भाजपा ‘राम’ के बजाय  ‘गाय’ को ही मुददा बना सकती है.

अब पुरुष खाएंगे गर्भनिरोधक गोलियां

काफी लंबे वक्त से बाजारों में महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियां बिक रही हैं. पर अब पुरुषों के लिए भी गर्भनिरोधक गोलियां आ गई हैं. शोधकर्ताओं ने ऐसे यौगिक की खोज की है जो शुक्राणु की गतिशीलता पर नियंत्रण रख सकता है. यह निषेचन की क्षमता को कम कर सकता है. इसका अर्थ है कि अब पुरुषों के लिए भी जल्दी ही बाजारों में गर्भनिरोधक गोलियां मिलेंगी, जो आबादी नियंत्रण के लिए कारगर होंगी.

शोधार्थियों ने ईपी055 नाम के यौगिक की खोज की है. ये शुक्राणु की गतिशीलता को शिथिल कर देता है और इससे हार्मोन पर भी कोई असर नहीं होता है. एक जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक इस यौगिक से ‘पुरुष-गोली’ बनाई जा सकती है जो जन्म दर को नियंत्रित करने में कारगर साबित होगा और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होगा.

आपको बता दें कि वर्तमान में पुरुषों के लिए कंडोम और नसबंदी के उपाय उपलब्ध हैं. परीक्षण के तौर पर इसका उपयोग नर बंदरों पर किया गया, जिसमें कोई दुष्प्रभाव नहीं पाया गया. उपयोग के 18 दिन बाद सभी लंगूरों में पूरी तरह से सुधार के लक्षण पाए गए.

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