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क्या आप जानते हैं, फेस पाउडर लगाने का सही तरीका

चेहरे पर स्‍टेप बाई स्‍टेप फेस पाउडर लगाना चाहिये जिससे वह आर्टिफीशियल ना लगे. फेस पाउडर लगाने से चेहरा रूखा और खुरदुरा लगने लगता है. ज्‍यादा फेस पाउडर के प्रयोग से चेहरे पर पिंपल आदि निकल आते हैं. आइये जानते हैं कि फेस पाउडर को किस प्रकार से चेहरे पर लगाया जाना चाहिए.

कैसे लगाएं फेस पाउडर

फेस पाउडर के सही रंग का चुनाव करें. फेस पाउडर भूरे और सफेद रंग में आते हैं. आपको फेस पाउडर अपनी स्‍किन टोन के रंग के हिसाब से चुनना चाहिये. अगर आप गोरी हैं और आपने सफेद रंग का फेस पाउडर चुन लिया तो आपका चेहरा काला दिखने लगेगा.

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मेकअप से पहले कैसे लगाएं सही बेस कंसीलर

अगर आप फेस पाउडर का प्रयोग कर रही हैं, तो कंसीलर का प्रयोग करना ना भूलें. हमेशा लूज पाउडर का प्रयोग करें और कम्‍पैक पाउडर का यूज ना करें.

नेचुरल लुक पाएं

ज्‍यादा मेकअप चेहरे का प्राकृतिकपन खो देता है. फेस पाउडर लगाने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि आप उसे कम से कम ही लगाएं. पाउडर को हल्‍का सा गाल पर, थोड़ा सा ठुड्डी पर और चेहरे के टी जान पर लगाएं.

ब्‍लोटिंग पेपर का प्रयोग

चेहरे पर अगर ज्‍यादा पाउडर लग गया हो, तो उसे ब्‍लोटिंग पेपर से साफ करें. इससे आपक चेहरा मेकअप से भरा हुआ नहीं दिखेगा.

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सरसों की फसल: समय पर बोआई भरपूर कमाई

रबी फसलों में सरसों का खास स्थान है. देश के कई राज्य जैसे राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में यह फसल प्रमुखता से की जाती है, लेकिन राजस्थान में प्रमुख रूप से भरतपुर, सवाई माधोपुर, अलवर, करौली, कोटा, जयपुर, धौलपुर वगैरह जिलों में सरसों की खेती की जाती है. सरसों के बीज में तेल की मात्रा 30 से 48 फीसदी तक पाई जाती है.

जलवायु : सरसों की खेती शरद ऋतु में की जाती है. अच्छे उत्पादन के लिए 15 से 25 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान की जरूरत होती है.

मिट्टी: वैसे तो इस की खेती सभी तरह की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त होती है. यह फसल हलकी क्षारीयता को सहन कर सकती है, लेकिन अम्लीय मिट्टी नहीं होनी चाहिए.

सरसों की उन्नत किस्में : हर साल किसानों को बीज खरीदने की जरूरत नहीं?है क्योंकि बीज काफी महंगे आते हैं इसलिए जो बीज पिछले साल बोया था, अगर उस का उत्पादन या किसी किसान का उत्पादन बेहतरीन हो तो आप उस बीज की सफाई और ग्रेडिंग कर के उस में से रोगमुक्त और मोटे दानों को अलग करें और उसे बीजोपचार कर के बोएं तो भी अच्छे नतीजे मिलेंगे, लेकिन जिन के पास ऐसा बीज नहीं है, वो निम्न किस्मों के बीज बो सकते?हैं:

आरएच 30 : यह किस्म सिंचित व असिंचित दोनों ही हालात में गेहूं, चना व जौ के साथ खेती के लिए सही है.

टी 59 (वरुणा) : इस की उपज असिंचित हालात में 15 से 18 दिन प्रति हेक्टेयर होती है. इस में तेल की मात्रा 36 फीसदी होती है.

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पूसा बोल्ड : आशीर्वाद (आरके 01 से 03) : यह किस्म देरी से पकती है. यह किस्म बोआई के लिए 25 अक्तूबर से 15 नवंबर तक सही पाई गई है.

अरावली (आरएन 393) : यह किस्म सफेद रोली के लिए मध्यम प्रतिरोधी है.

एनआरसी एचबी 101 : भरतपुर से विकसित उन्नत किस्म है. इस का उत्पादन बहुत शानदार रहा है. सिंचित क्षेत्र के लिए यह बेहद उपयोगी किस्म है. इस किस्म का 20-22 क्विंटल उत्पादन प्रति हेक्टेयर तक दर्ज किया गया है.

एनआरसी डीआर 2 : इस का उत्पादन अपेक्षाकृत अच्छा है. इस का उत्पादन 22-26 क्विंटल तक दर्ज किया गया है.

आरएच 749 : इस का उत्पादन 24-26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज किया गया है.

खेत की तैयारी

सरसों के लिए भुरभुरी मिट्टी की जरूरत होती?है. इसे खरीफ की कटाई के बाद एक गहरी जुताई करनी चाहिए और इस के बाद 3-4 बार देशी हल से जुताई करना लाभदायक होता है. नमी संरक्षण के लिए हमें पाटा लगाना चाहिए.

कीटों की रोकथाम

खेत में दीमक, चितकबरा व अन्य कीटों का प्रकोप अधिक हो तो नियंत्रण के लिए आखिरी जुताई के समय क्विनालफास 1.5 फीसदी चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में मिला देना चाहिए. साथ ही, उत्पादन बढ़ाने के लिए 2 से 3 किलोग्राम एजोटोबैक्टर व पीएसबी कल्चर की 50 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कल्चर में मिला कर अंतिम जुताई से पहले मिला दें.

सरसों की बोआई का समय

सरसों की बोआई के लिए सही तापमान 25 से 26 डिगरी सैंटीग्रेड तक रहता है. बारानी इलाकों में सरसों की बोआई  5 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक कर देनी चाहिए. सरसों की बोआई कतारों में करनी चाहिए. कतार से कतार की दूरी 45 सैंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सैंटीमीटर रखनी चाहिए. इस के लिए सीड ड्रिल मशीन का इस्तेमाल करना चाहिए. सिंचित इलाकों में बीज की गहराई 5 सैंटीमीटर तक रखी जाती है.

बीज दर : शुष्क क्षेत्र में 4 से 5 किलोग्राम और सिंचित क्षेत्र में 3-4 किलोग्राम बीज बोआई के लिए प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहता है.

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बीजोपचार

* जड़ सड़न रोग से बचाव के लिए बीज को बोने के पहले फफूंदनाशक वीटावैक्स, कैप्टान, सिक्सर, थिरम, प्रोवेक्स में से कोई एक 3 से 5 ग्राम दवा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें.

* कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यूपी 10 मिलीलिटर प्रति किलोग्राम बीज की दर से उचारित करें.

* कीटनाशक उपचार के बाद एजोटोबैक्टर व फास्फोरस घोलक जीवाणु खाद दोनों की 5 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित कर के बोएं.

खाद उर्वरक प्रबंधन

सिंचित फसल के लिए 7 से 12 टन सड़ी गोबर की खाद, 175 किलोग्राम यूरिया, 250 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 50 किलोग्राम म्यूरेट औफ पोटाश और 200 किलोग्राम जिप्सम बोआई से पहले खेत में मिलाना चाहिए. यूरिया की आधी मात्रा बोआई के समय और बाकी आधी मात्रा पहली सिंचाई के फौरन बाद खेत में छिड़कनी चाहिए.

असिंचित इलाकों में बरसात से पहले 4 से 5 टन सड़ी गोबर की खाद, 87 किलोग्राम यूरिया, 125 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 33 किलोग्राम म्यूरेट औफ पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से बोआई के समय खेत में डालें.

सिंचाई : पहली सिंचाई बोआई के 35 से 40 दिन बाद और दूसरी सिंचाई दाने बनने की अवस्था में करें.

खरपतवार नियंत्रण : सरसों के साथ अनेक प्रकार के खरपतवार उग आते हैं. इन के नियंत्रण के लिए फसल बोने के तीसरे हफ्ते के बाद से नियमित अंतराल पर 2 से 3 निराई करनी जरूरी हैं.

रासायनिक नियंत्रण के लिए अंकुरण पूर्व बोआई के तुरंत बाद खरपतवारनाशी पेंडीमिथेलीन 30 ईसी की 3.3 लिटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1,000 लिटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए.

उत्पादन : अगर जलवायु अच्छी हो तो फसल रोग, कीट व खरपतवार मुक्त रहे और पूरी तरह से वैज्ञानिक दिशानिर्देशों के साथ खेती करें तो 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज ली जा सकती है. अधिक जानकारी के लिए किसान नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क करें.

कैसे करें जिद्दी बच्चे को कंट्रोल  

पेरेंट्स के लिये छोटे बच्चों को संभालना बहुत बड़ी बात होती है और उसमे भी अगर बच्चा जिद्दी हो तो सोने पे सुहागा हो जाता है.  हर मां बाप यही सोचते हैं की उनका बच्चा बहुत समझदार हो, संस्कारी हो और सभी का आदर सत्कार करने वाला हो लेकिन कुछ पेरेंट्स की यह इच्छा दबी की दबी रह जाती है जब उन्हें एहसास होता है कि उनका बच्चा बहुत जिद्दी है. ऐसे बच्चों को वश मे कर पाना मील का पत्थर साबित होता है और जैसे जैसे वो बड़े होते जाते है, वैसे वैसे उनके व्यवहार में और भी बदलाव होता चला जाता है. कभी कभी यही जिद्द उन्हें  मानसिक रोग से पीड़ित तक बना देती है. कभी कभी तो उनके चक्कर में पेरेंट्स को ही लोगों की तीखी व कड़वी बातें सुनने को मिलती है. जैसे कि मां बाप ने जैसे संस्कार दिए हैं बच्चा वैसे ही तो सिख रहा है, मां बाप से बच्चे की परवरिश ठीक से नहीं की जा रही तभी बच्चा ऐसा है’. ऐसी बातों को सुनकर माता पिता और भी दुखी हो जाते हैं. अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा जिद्दी है तो जरूरी है की आप अपनी रोजमर्रा की लाइफ में ये टिप्स अपनाएं. कुछ ही दिनों में आपको अपने बच्चे के अंदर बदलाव नजर आने लगेगा.

कैसे समझाए जिद्दी बच्चे को

गुस्सा न करें

जब बच्चा बहुत ज्यादा जिद्द करता है तो पेरेंट्स को गुस्सा आ ही जाता है ऐसे में उसको एक दो थप्पड़  भी लग जाते हैं. लेकिन यह बिल्कुल गलत है उस पर गुस्सा न करें बल्कि उसे प्यार से समझाएं क्योंकि जब किसी चीज के लिये मना किया जाता है तो उस काम को करने की इच्छा अधिक होती है.

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बात बात पर टोकें नहीं

हर छोटी छोटी बात पर टोकना पबन्दियां लगाना  बच्चो में हताशा  और असंतोष को जन्म देता है लेकिन इससे बचने के लिये उन्हें मन मुताबिक छूट भी नहीं दी जा सकती. इसलिए इससे बचने के लिये प्यार और अनुसासन की सीमा को तय करें.

बच्चे पर अपनी जिद न चलाएं

अगर आप अपनी बात मनवाने के लिए बच्चे से जिद करते हैं तो बच्चे मे जिद्दी होने की आदत आप ही से आती है. बच्चे पर अपनी पसंद नापसंद न थोपे. यदि आप उसे अपनी बात मनवाने के लिये मजबूर करते हैं तो उसमे नकारात्मकता बढ़ेगी और उसका बर्ताव अधिक उग्र व जिद्दी हो जाएगा.

बच्चे की हर बात न मानें

अगर आप बच्चे के बोलते  ही हर बात मान जाते हैं तो इससे वो आदी हो जाता है जिस कारन उसे लगता है कि जो वो मांगेगा वो उसे मिल ही जायेगा इसलिए बच्चे को न कहना भी सीखें. अपने बच्चे को एहसास कराएं कि हमेशा उसकी मनमर्जी नहीं चलेगी .

उसका ध्यान हटाएं

अगर आपका बच्चा किसी बात की ज़िद्द करता है तो उसका ध्यान उस चीज से हटा कर किसी और चीज में लगाए इससे उसकी ज़िद्द भी पूरी नहीं होगी और उसे नई चीज भी मिल जाएगी.

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फेस्टिवल 2019: ऐसे बनाएं लजीज मटर कुलचे

सामग्री:

सूखी मटर- 2 कप,

हरी मिर्च- 2 ,

प्याज- 1 कप,

टमाटर- 1 कप,

नींबू का रस- 1 टेबलस्पून,

अमचूर पाउडर- 1/2 टीस्पून,

चाट मसाला- 2 टेबलस्पून,

मीठा सोडा पाउडर- 3 चुटकी,

हल्दी पाउडर- 1/4 टीस्पून

नमक- स्वादानुसार

हरा धनिया- 1/2 कप

मैदा- 200 ग्राम

दही- 1/4 कप

बेकिंग सोडा- 1/4 टीस्पून

चीनी- 1 टीस्पून

कसूरी मेथी- 1 टीस्पून

हरा धनिया- 1 टीस्पून

नमक- स्वादानुसार

तेल- आवश्यकता अनुसार

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बनाने की विधि 

1- मटर कुलचा बनाने के लिए सबसे पहले दो कप सूखी मटर को पानी में डालकर 6-7 घंटों के लिए छोड़ दें. अब प्रेशर कुकर में पानी डाल कर इसमें मटर, तीन चुटकी में मीठा सोडा, आधा चम्मच हल्दी पाउडर व थोड़ा सा नमक मिलाकर उबाल लें.

2- अब मटर को चम्मच की मदद से मैश करें. अब इसमें एक कप कटा प्याज, कटी हरी मिर्च, एक कप टमाटर, दो टेबलस्पून चाट मसाला, आमचूर पाउडर व स्वादानुसार नमक डालकर अच्छे से मिक्स करें. अब इसमें नींबू का रस डालकर 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं.

3- अब इसे एक कटोरी में निकाल कर इसमें हरा धनिया मनाए मिलाएं.

4- कुलचा बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में 200 ग्राम मैदा ले ले. अब इसमें आधा कप दही, एक चम्मच चीनी, एक चम्मच बेकिंग सोडा, स्वादानुसार नमक व औयल डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह मिक्स करें.

5- अब गुनगुने पानी से मैदे को मुलायम आटे की तरह गूंथ ले. अब इसे मोटे तौलिये से कवर करके 5 घंटों के लिए रख दें.

6- अब आपको जितने कुलचे बनाने हैं मैदे कि उतनी बराबर लोई बनाकर बेलन से गोल गोल मोटा बेल लें. अब उसके ऊपर कसूरी मेथी व हरा धनिया डालकर हाथों से दबाए.

7- अब तवे को गैस पर रखकर गर्म करें . अब तवे पर औयल लगाकर कुलचे को तवे पर रख कर सेकें . जैसे ही कुल्चा फूलने लगे तो इसे दूसरी तरफ पलट कर सेक लें. इसी तरह सभी कुल्छे तैयार करें व एक कैस्ट्रोल में किचन पेपर बिछाकर रखते जाए.

8- लीजिए आपके मटर कुलचे बनकर तैयार है अब आप इसे गर्मागर्म सर्व करें.

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अजब गजब: यहां पर व्हेल मछलियां गाती भी है!

वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तरी ध्रुवीय इलाके जैसे ग्रीनलैंड आदि के आसपास के समंदर में रहने वाली धनुषाकार सिर वाली व्‍हेल्‍स मछलियां समंदर में रहने वाली बाकी दूसरे जीवों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा समय यानि करीब 200 साल तक जिंदा रहती हैं. ये मछलियां सभी समुद्री जीवों में सबसे ज्‍यादा सामाजिक होती हैं, तभी तो ये आपस में खूब बतियाती हैं. वैज्ञानिकों ने 2010 से लेकर 2014 तक समंदर में माइक्रोफोन लगाकर बकायदा इन मछलियों की तमाम आवाजें रिकार्ड की हैं. इस रिकौर्डिंग के दौरान ही वैज्ञानिकों ने जाना कि ये मछलियां तो सिर्फ बातें ही नहीं करतीं, बल्कि तरह तरह के गाने भी गाती हैं.

साल 2010 से लेकर 2014 के बीच वैज्ञानिकों के एक दल ने ग्रीनलैंड के आसपास के समुद्री इलाके में करीब 300 बोहेड व्‍हेल मछलियों पर रिसर्च की. इस दौरान अंडरवाटर माइक्रोफोन के द्वारा मछलियों की आवाजें भी रिकॉर्ड की गईं. पहले तो वैज्ञानिक सोच रहे थे, ये सिर्फ आपस में बातें कर रही हैं, लेकिन जैसे जैसे मछलियों की आवाजों का संग्रह बढ़ता गया, समझ आया कि ये मछलियों की बातचीत नहीं बल्कि उनकी गायकी की आवाजें हैं. वैज्ञानिकों ने नोटिस किया कि व्‍हेल की इन आवाजों में गायकी जैसे उतार चढ़ाव बहुत जबरदस्‍त के सुर हैं. समंदर में मछलियों की आवाजों की रिकॉर्डिंग के दौरान वैज्ञानिकों ने कुल 184 गाने रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में नायाब खोज है.

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जर्नल बायोलॉजी में छपी रिसर्च के मुताबिक समंदर के भीतर ज्‍यादातर नर व्‍हेल ही ये गाने गाते हैं. कभी अपने नर साथियों को आवाज लगाने के लिए तो कभी मादा व्‍हेल को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए. गानों का ये संगीत बंसत से लेकर हल्‍की गर्मियों तक के मौसम में समंदर के भीतर हमेशा ही सुनाई देता है. इनमें से कुछ मछलियां गाती हैं शास्‍त्रीय तो कुछ गाती हैं जैज स्‍टाइल में. वॉशिंगटन यूनीवर्सिटी के ओशीनोग्राफर केट स्‍टैफोर्ड इस बारे में बताते हैं कि 12 से 16 मीटर आकार वाली हंपबैक व्‍हेल मछलियां समंदर के भीतर क्‍लासिकल म्‍यूजिक गाती हैं, वहीं उनसे कड़ी अधिक बड़ी यानि 18 मीटर तक आकार वाली बोहेड व्‍हेल जैज म्‍यूजिक गुनगुनाती हैं.

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खूबसूरत लमहे – भाग 1 : दो प्रेमियों के प्यार की कहानी

इंसान की जिंदगी के कुछ लमहे ऐसे भी होते हैं जिन्हें आजीवन भुला पाना संभव नहीं होता. शेखर ने कड़ी मेहनत कर के एक अच्छा मुकाम तो हासिल कर लिया, पर उस का प्यार उसे न मिल सका. शेखर इस नए शहर में जिंदगी की नई शुरुआत करने आ पहुंचा था. आईएएस पूरी करने के बाद उस की पत्नी की पोस्टिंग इसी शहर में हुई. वैसे भी अमृतसर आ कर वह काफी खुश था. इस शहर में वह पहली बार आया था, पर उसे ऐसा लगता कि वह अरसे से इस शहर को जानता है. आज वह बाजार की तरफ निकला ताकि अपनी जरूरत का सामान खरीद सके. अचानक एक डिपार्टमैंटल स्टोर में शेखर को एक जानापहचाना चेहरा नजर आया. हां, वह संगीता थी और साथ में था शायद उस का पति. शेखर गौर से उसे देखता रहा. संगीता शायद उसे देख नहीं पाई या फिर जानबूझ कर उस ने देख कर भी अनदेखी कर दी. वह जब तक संगीता के करीब पहुंचा, संगीता स्टोर से निकल कर अपनी कार में जा बैठी और चली गई. शेखर उसे देख कर अतीत में खो गया.

नयानया शहर, नया कालेज, शेखर के लिए सबकुछ अपरिचित और अजनबी था. वह क्लास में पीछे वाली बैंच पर बैठ गया. कालेज की चहलपहल उसे काफी अच्छी लगी. यहां तो पुस्तकें ही उस की साथी थीं. वह बस, मन में उठे भावों को कागज पर उतारता और स्वयं ही उन्हें पढ़ कर काफी खुश होता. कालेज के वार्षिक सम्मेलन में जब उस की कविता को प्रथम पुरस्कार मिला तो वह सब का चहेता बन गया. प्रोग्राम खत्म होते ही एक लड़की उस से आ कर बोली, ‘‘बधाई हो, तुम तो छिपे रुस्तम निकले… इतना अच्छा लिख लेते हो. तुम्हारी रचना काफी अच्छी लगी… इस की एक कौपी दोगे.’’

शेखर तब उस के आग्रह को टाल न सका. उस ने पहली बार गौर से उस की खूबसूरती को निहारा. गोरा रंग, गुलाबी गाल, मदभरे तथा मुसकराते अधर और सब से खूबसूरत लगीं उस की आंखें. उस की आंखें बिना काजल के ही कजरारी लगीं. आंखें शोख और शरारत भरी थीं. शेखर ने तो उस की खूबसूरती को शब्दों में कैद कर गीत का रूप दे डाला और संगीता की खिलखिलाहट ने उस के गीत को संगीत का रूप दे डाला, पर ये सब तो कालेज के सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा था. संगीता के स्वर में एक अजीब सी कशिश, एक अजीब सा जादू दिखा.

शेखर जीवन में हमेशा बहुत बड़े और सुनहरे सपने देखता रहता. पढ़ाई और लेखन बस 2 ही तो उस के साथी हैं. मध्यवर्गीय परिवार में पलाबढ़ा शेखर हमेशा यही सोचता कि खूब पढ़लिख कर एक काबिल इंसान बनूं और सब की झोली खुशियों से भर दूं. शेखर कालेज की लाइब्रेरी में बैठा अध्ययन कर रहा था. तभी संगीता उस के सामने आ कर बैठ गई. शेखर को यह ठीक नहीं लगा. उसे पढ़ाई के दौरान किसी का डिस्टर्ब करना अच्छा नहीं लगता था. संगीता का धीरेधीरे गुनगुनाना उसे अच्छा नहीं लगा. वह गुस्से से उठा और जोर से पुस्तक बंद कर चल पड़ा. तभी एक मधुर खिलखिलाहट उसे सुनाई पड़ी. पीछे मुड़ कर देखा तो संगीता शरारत भरी मुसकान हंस रही थी. गुस्सा तो कम हो गया पर अपने अहंकार में डूबा शेखर चला गया.

दूसरे दिन भी वह लाइब्रेरी में बैठा अपनी पढ़ाई कर रहा था, पर आज उस के मन में अजीब हलचल मची थी. उसे बारबार ऐसा आभास होता कि संगीता आ कर बैठेगी, बारबार उस की निगाहें दरवाजे की तरफ उठ जातीं. थोड़ी देर बाद संगीता आती दिखाई पड़ी पर आज वह किसी और टेबल पर बैठी. तब शेखर चाह कर भी कुछ न कर पाया, पर आज उस का मन पढ़ने में नहीं लगा. फिर उस ने उठ कर गुस्से में पुस्तक बंद कर दी.

वह लाइबे्ररी से उठ कर जाने लगा, लेकिन तभी संगीता उठ कर सामने आ गई और उसे घूरघूर कर ऊपर से नीचे तक निहारती रही और मुसकराती रही. यह देख कर शेखर का पारा चढ़ने लगा. संगीता तब बहुत ही सहज भाव से बोली, ‘‘सरस्वती का अपमान करना ठीक नहीं. जब पुस्तक की कद्र करोगे तभी तो मंजिल मिलेगी. मैं ईर्ष्या से नहीं मुसकराई बल्कि तुम्हारी नादानी पर मुझे हंसी आ जाती है. वैसे सदा मुसकराते रहना ही मेरी फितरत है.’’

फिर थोड़ा सीरियस हो कर उस ने आंखों में आंखें डाल कर इस कदर देखा कि शेखर चुपचाप पीछे खिसकता चला गया और संगीता आगे बढ़ती रही.

अंतत: शेखर दोबारा उसी बैंच पर बैठ गया और संगीता भी सामने बैठ गई. दोनों बस खामोश रहे. शेखर संगीता के इशारे पर पुस्तक खोल कर पढ़ने लगा और संगीता पुस्तक खोल कर मुसकराने लगी.

शेखर संगीता की समीपता भी चाहता और उसे उस से बात करने में घबराहट भी होती. कालेज के कुछ लोग संगीता की सुंदरता के इस कदर दीवाने थे कि शेखर उन्हें खटकने लगा. शेखर को उन की नफरत भरी नजरों से डर लगने लगा. वह कभीकभी सोचता कि क्या वह संगीता को कभी पा सकेगा या नहीं.

शेखर कालेज के गार्डन में अकेला बैठा विचारों में खोया था, तभी वहां संगीता आ पहुंची. वह एकदम करीब बैठ गई और उलाहने भरे स्वर में बोली, ‘‘मैं लाइबे्ररी का चक्कर लगा कर आ रही हूं, लगता है आज पढ़ने का नहीं लिखने का मूड है तभी गार्डन में आ कर बैठे हो.’’

शेखर जिस की याद में खोया था. उस का करीब आना उसे अच्छा लगा. संगीता ने तब बैग खोल कर टिफिन बौक्स निकाला और शरारती अंदाज में बोली, ‘‘आ मुंडे, आलू दे परांठे खाएं, तेरी तबीयत चंगी हो जाएगी.’’

जब मूड होता तो संगीता अपनी मातृभाषा पंजाबी बोलती. तब शेखर वाकई में खुल कर हंस पड़ा. उस के सामने जब संगीता ने टिफिन बौक्स खोला तो परांठों की महक सूंघ कर ही शेखर खुश हो गया.

दोनों ने जी भर कर परांठे खाए. परांठे खाने के बाद संगीता बोली, ‘‘चलो, अब लस्सी पिलाओ.’’

शेखर सकुचाते हुए बोला, ‘‘अभी क्लास शुरू होने वाली है, लस्सी कल पी लेंगे.’’

संगीता बेधड़क बोली, ‘‘बड़े कंजूस बाप के बेटे हो यार, लस्सी पीने का मन आज है और तुम अगले जन्म में पिलाने की बात करते हो. मेरी कुछ कद्र है कि नहीं. अभी यदि एक आवाज दूं तो लस्सी की दुकान से ले कर यहां तक लस्सी लिए लड़कों की लाइन लग जाए.’’

शेखर फिर मुसकरा कर रह गया. संगीता टिफिन बौक्स समेटती हुई बोली, ‘‘ठीक है, चलो मैं ही पिलाती हूं. मेरा बाप बड़े दिल वाला है. मिलिट्री औफिसर है. एक बार पर्स में हाथ डालते हैं और जितने नोट निकल आते हैं, वे मुझे दे देते हैं. किसी की इच्छा पूरी करना सीखो शेखर, बस किताबी कीड़ा बने रहते हो. लाइफ औलवेज नीड्स सम चेंज.’’

‘‘ठीक है, चलो पिलाता हूं लस्सी, अब भाषण देना बंद करो,’’ शेखर आग्रह भरे स्वर में बोला.

‘‘मुझे नहीं पीनी है अब लस्सी,’’ संगीता मुसकराते हुए बोली, ‘‘जिस ने पी तेरी लस्सी वह समझो फंसी, मैं तो नहीं ऐसी.’’

फिर कालेज कंपाउंड से निकल कर दोनों बाजार की ओर चल पड़े. चौक पर ही लस्सी की दुकान थी. कुरसी पर बैठते ही संगीता ने एक लस्सी का और्डर दिया. शेखर तब कुतुहल भरी दृष्टि से संगीता को निहारने लगा. संगीता ने टेबल पर सर्व किए गए लस्सी के गिलास को देख कर शेखर की तरफ देखा और जोर से हंस पड़ी.

शेखर धीरेधीरे उस की शोखी और शरारत से वाकिफ हो गया था. अत: वह लस्सी के गिलास को न देख कर दुकान की छत की ओर निहारने लगा. संगीता ने उस से चुटकी बजाते हुए कहा, ‘‘शेखर, लस्सी इधर टेबल पर है आसमान में नहीं है, ऊपर क्या देख रहे हो.’’

उस ने आवाज दे कर मैनेजर को बुलाया. उस के करीब आते ही वह उस पर बरस पड़ी, ‘‘इस टेबल पर कितने लोग बैठे हैं?’’

‘‘2,’’ मैनेजर ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया.

‘‘फिर लस्सी एक ही क्यों भेजी, तुम्हारे आदमी को समझ में नहीं आता है,’’ संगीता के तेवर गरम हो गए.

मैनेजर गरजते हुए बोला, ‘‘अरे, ओ मंजीते, तेरा ध्यान किधर है, कुड़ी द खयाल कर और एक लस्सी ला.’’

मंजीत कहना चाहता था कि मैडम ने एक ही और्डर दिया था, पर कह न सका और उसे काफी डांट पड़ी.

गैस चैम्बर बन रही दिल्ली

राजधानी दिल्ली और एनसीआर की हवा में लगातार जहर घुलता जा रहा है. एयर क्वॉलिटी इंडेक्स में पीएम 2.5 का स्तर 500 के पार पहुंच चुका है. इसका मतलब स्थिति बेहद गंभीर और आपातकाल वाली है. प्रदूषण की वजह से पूरे दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत के नीले आसमान पर कालिख पुत गयी है. उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित पैनल ने दिल्ली में जन स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करते हुए तमाम निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. पर्यावरण प्रदूषण प्राधिकरण ने प्रदूषण की गम्भीर श्रेणी को देखते हुए पूरे ठंड के दौरान पटाखे फोड़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. दिल्ली के स्कूल 5 नवम्बर तक बंद रहेंगे. इस बात की घोषणा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कर दी है. जहरीली हवा की वजह से जहां कई जगह ऑफिस की भी टाइमिंग बदल दी गयी हैं. वहीं, अन्य संस्थानों में उपस्थिति लगातार गिर रही है. अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तीस फीसदी का इजाफा हुआ है, जिसमें से ज्यादातर सांस की तकलीफ, घुटन, आंखों में जलन और पानी आने जैसी समस्या से ग्रस्त हैं. एक हालिया रिसर्च यह बताती है कि हालात इतने खतरनाक हैं कि यह प्रदूषण आम आदमी की जिन्दगी के दस साल कम कर रहा है. सबसे बुरी हालत दिल्ली से सटे गाजियाबाद की है.

गाजियाबाद देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से एक है और सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की मानें तो ट्रैफिक जाम, धुआं और जमी हुई धूल वहां वायु प्रदूषण की मुख्य वजह है. शहर के 20 इलाके को चिह्नित किया है जहां धूल भरे प्रदूषण की स्थिति सबसे गंभीर है. लोगों का सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं स्कूल जाने वाले नन्हें-नन्हें बच्चे खांसी और आंख में जलन के चलते परेशान हो रहे हैं. खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका यह प्रदूषण मां बनने वाली महिलाओं और उनकी कोख में पल रहे शिशु के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो रहा है.

ग्रेडेड रिस्पौन्स ऐक्शन प्लान के रफ्तार पकड़ते ही विभिन्न एजेंसियों और विभागों को पानी का छिड़काव करने को कहा गया है. गाजियाबाद नगर निगम अपने 90 किलोमीटर के दायरे में पानी का छिड़काव करने के लिए जिम्मेदार है और साथ ही इसे 106 किलोमीटर के दायरे में मशीन से सफाई करानी है. लेकिन सरकारी सुस्ती ऐसी है कि कहीं भी ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है. कच्चे इलाके जैसे – नंदग्राम, लोनी के राशिद नगर, सिकरोड में भट्टा नंबर-5 रोड, विजय नगर बायपास और सिद्धार्थ विहार में पूरे दिन धूल उड़ती रहती है. ये इलाके धूल भरे प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन कालोनी के भीतर की सड़केंं होने के कारण सरकारी महकमे की नजर इधर कभी नहीं जाती है. वहीं, इंदिरापुरम और शास्त्री नगर के कुछ इलाकों में जहां कोई ग्रीन पेविंग नहीं हैं वहां धूल को किसी भी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता है.

इरफान खान की फिल्म “मदारी” चाइना में होगी रिलीज 

चीन के फिल्म बाजार में बौलीवुड फिल्मों के प्रशंसक बढ़ते जा रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में चीन में लोगों ने बौलीवुड फिल्मों को बहुत पसंद किया और सराहा  है. दंगल, पैडमैन, टौयलेट- एक प्रेम कथा, अंधाधुंध और भी कई ऐसी फ़िल्में चीन के मार्केट में अपना दबदबा बना चुकी हैं. अब इरफान खान अभिनीत फिल्म मदारी जल्द ही चीनी सिनेमाघरों में धूम मचाने के लिए तैयार है.

मदन पालीवाल (मिराज ग्रुप के चेयरमैन), ब्राजील के उद्यमी धीरज मोरे, और मिराज ग्रुप के सोनल देशपांडे – सीओओ अपने पड़ोसी देश चीन में मदारी रिलीज़ करने जा रहे हैं. सोशल थ्रिलर फिल्म मदारी का निर्देशन निशिकांत कामत ने किया है और मदन पालीवाल, शैलेश सिंह, सुतापा सिकदार और शैलजा केजरीवाल इसके निर्माता रहे. फिल्म में मुख्य भूमिका में इरफान खान, विशेष बंसल, जिमी शेरगिल, तुषार डालवी और नितेश पांडे हैं.

मदन पालीवाल (मिराज ग्रुप के चेयरमैन) ने कहा, “मदारी एक वैश्विक मुद्दे पर बनाई गयी दिलचस्प कहानी है और ये कहीं-न-कहीं दुनिया-भर के आम आदमियों से जुड़ी है. हम बहुत खुश हैं कि चीन में बौलीवुड फिल्मों के लिए प्यार बढ़ रहा है और जल्द ही मदारी चीन के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.”

चीन में मदारी के रिलीज पर मदन पालीवाल, चेयरमैन मिराज समूह ने कहा कि ” फिल्म मदारी एक आम आदमी के बहुत ही रोचक कहानी है, ग्लोबल सब्जेक्ट पर आधारित है. हमें खुशी है कि यह चीन के अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रिलीज हो रही है.”

फिल्म मदारी एक सामाजिक थ्रिलर है. जब निर्मल (इरफान खान) अपने परिवार को सरकार के भ्रष्टाचार की वजह से एक आपदा में खो देता है, तो अपने सवालों के जवाब और बदला लेने निकल पड़ता है. फिल्म की शूटिंग नई दिल्ली, राजस्थान, देहरादून, शिमला और मुंबई में की गयी थी. काप एंटरटेनमेंट्स मदारी को चीन के सिनेमाघरों में रिलीज करने में प्रमुख भूमिका निभाई है.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ : कार्तिक से दूर भागते हुए कैरव का हुआ एक्सिडेंट

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला मशहूर सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’  में लगातार दर्शकों को टर्न एंड ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. इस सीरियल से दर्शक काफी एंटरटेन कर रहे हैं.  शो के ट्रैक में कार्तिक का बर्थडे सेलिब्रेशन चल रहा है. इसी सब के बीच कार्तिक और नायरा के जिंदगी में एक नई घटना घटने वाली है. जी हां इस घटना से सीरीयल की कहानी एक नई मोड़ लेने वाली है.

दरअसल कैरव कार्तिक से दूर भागने की कोशिश करेगा. भागने के सीलसीले में ही कैरव रोड पर पहुंच जाएगा. ऐसे में उसका एक्सिडेंट हो जाएगा. तो इधर कार्तिक और नायरा उसके पास पहुंचेंगे. और कैरव को आईसीयू में भर्ती कराया जाएगा. कैरव के एक्सिडेंट से कार्तिक और नायरा बेहद दुखी होंगे. कार्तिक और नायारा के लाइफ में काफी सारी परेशानियां आ रही है. इन सब परेशानियों से दोनों कैसे बाहर निकलते हैं. अब ये तो अपकमिंग एपिसोड में ही पता चलेगा.

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वैसे कैरव को गलतफहमी हो गई है कि उसके मम्मी औप पापा हमेशा लड़ते रहते है, उनके बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है. उसे लगता है कि कैरव यानी उसके पापा बहुत गंदे हैं, यहां तक की वह अपने पापा को आई हेट यू भी कह देगा और इसी के साथ तेजी से वहां भाग जाएगा. इसी बीच कैरव का एक्सिडेंट होगा.

इस शो के अपकमिंग एपिसोड में देखना ये दिलचस्प होगा कि कैरव के एक्सिडेंट के बाद कार्तिक और नायरा के लाईफ में कैसे बदलाव आएंगे है और वो कैसे सामना करेंगे.

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‘छोटी सरदारनी’: क्या परम गेम का लास्ट राउंड जीत पाएगा ?

कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाला  पौपुलर सीरियल ‘छोटी सरदारनी’ में दर्शकों को लगातार धमाकेदार ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. जिससे दर्शक इस शो को बेहद पसंद कर रहे हैं. फिलहाल इस शो में काफी इंटरेस्टिंग ट्विस्ट एंड टर्न दिखाया जा रहा है. तो देर किस बात की झट से बताते हैं आपको इस शो के ट्विस्ट एंड टर्न को.

हाल ही में इस शो में ये दिखाया गया कि परम और आहिल की फैमिली के बीच कम्पटिशन चल रहा है. कम्पटिशन का पहला राउंड तो परम क्लियर कर लेता है. पर दूसरे राउंड में बच्चों को चलना होता है. तभी मेहर परम को केयरफुल रहने को कहती है.

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परम सुरंग पार करता है, मेहर उसे निशाना पार करने के लिए भी कहती है. तभी परम निशाना पार करने की कोशिश करता है. सब परम को प्रोत्साहित करते हैं.

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इसी बीच कम्पटिशन में ऐलान किया जाता है कि  परम और आहिल कम्पटिशन के लास्ट राउंड की ओर बढ़ रहे हैं. यह एक वार लाइन है. तभी खुशी कहती है आहिल काफी हेल्दी है. परम इस खेल में हार जाएगा. अब देखना इस शो में देखना ये दिलचस्प होगा कि इस कम्पटिशन को  परम जीतेगा या आहिल ?

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