दीवारें भी अब बोलती हैं. हर दीवार का अपना महत्त्व होता है. इन का रंगरोगन इन के महत्त्व को देखते हुए किया जाता है. दीवारें तब बोलती हैं जब इन को पेंट्स के जरिए पेंटिंंग सा सजाया जाता है. एक जमाना था जब दीवारों को सफेद चूने से रंगा जाता था. समय के साथ बदलाव हुए तो चूने में रंग मिलाया जाने लगा. बाद में चूने की जगह डिस्टैंपर और सीमेंट मिक्स कलर आने लगे. अब तरहतरह के रंग आने लगे हैं. इन में औयल बेस्ड कलर प्रमुख हैं. दीवारों पर टैक्स्चर पेंट का दौर है. रंगों द्वारा दीवारों को एंटीक, इनफिनिटैक्स, स्टुडो, ड्यून, टैक्सटाइल, मैटेलिक, स्पैशल इफैक्ट और सफारी इफैक्ट्स भी दिए जा सकते हैं. ऐसे में लोग एक ही कमरे में अलगअलग इफैक्ट्स देने के लिए दीवारों पर अलगअलग रंग भी करने लगे हैं.

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