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Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin के करेंट ट्रैक से ऊबे फैंस, मेकर्स को किया ट्रोल

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ इन  लगातार सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. फैंस कई महीनों से सोशल मीडिया पर शो को लेकर मेकर्स को ट्रोल कर रहे हैं. आइए बताते हैं, क्या है पूरा मामला.

दरअसल हाल ही में शो में दिखाया कि सम्राट की मौत हो गई. इसके कहानी का ट्रैक पूरी तरह बदल गई है. सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ की कहानी में सेरोगेसी ट्रैक शुरू हो चुका है.

शो में दिखाया जा रहा है कि सई और विराट ने गीता को अपने बच्चे की सेरोगेट मदर के तौर पर चुना है. हालांकि भवानी इस बात से खुश नहीं है. वह जल्द ही भपाखी को सई के बच्चे की सेरोगेट मदर बना देगी

कहानी में यह बदलाव फैंस को हजम नहीं हो रहा है. फैंस का कहना है कि मेकर्स पाखी को बीच में लाकर विराट और सई की लव स्टोरी को बर्बाद कर रहे हैं.

 

शो के इस ट्रैक के कारण फैंस मेकर्स को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं. फैंस लगातार सोशल मीडिया पर ‘गुम है किसी के प्यार में’ को बंद करने की गुहार लगा रहे हैं. फैंस मेकर्स को खूब सुना रहे हैं. फैंस का कहना है कि विराट और सई के बीच पाखी को लाकर कहानी को बर्बाद किया जा रहा है.

 

पुलिस के गले की फांस बनी गैंगस्टर पप्पू देव की मौत

सौजन्य- मनोहर कहानियां

संजय कुमार उर्फ पप्पूदेव सहरसा का डौन था. उस के खिलाफ डेढ़ सौ से अधिक केस दर्ज थे. लोग उस के नाम से ही कांपते थे, लेकिन पुलिस हिरासत में जिस तरह उस की संदिग्ध मौत हुई, उस से पुलिस पर अंगुली उठना स्वाभाविक है. अब देखना यह है कि क्या इस मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी?

बिहार में उत्तरी सहरसा, मधेपुरा और सुपौर इन तीनों जिलों के इलाके को कोसी डिवीजन के रूप में

जाना जाता है. कोसी नदी का यह इलाका यानी पौराणिक मिथिला राज्य. राजा जनक की नगरी मिथिला यहीं थी. भारत में सब से अधिक मखाना की पैदावार कोसी डिवीजन में ही होती है. इस डिवीजन का मुख्य केंद्र सहरसा शहर है.

बिहार की पृष्ठभूमि को ले कर जो फिल्में बनी हैं, उन में गुंडागर्दी जम कर दिखाई गई है. सन 2005 में प्रकाश झा ने ‘अपहरण’ फिल्म बनाई थी, जिस में अपहरण को एक फलतेफूलते उद्योग के रूप में दिखाया गया था. तबरेज आलम नामक विधायक को इस उद्योग का संचालक बताया गया था. पूरे बिहार में जिस किसी का अपहरण होता था, वह तबरेज आलम के इशारे पर ही होता था.

फिल्म की कहानी भले ही काल्पनिक थी, पर इस की प्रेरणा कोसी के डौन के रूप में मशहूर संजय कुमार उर्फ पप्पूदेव नामक खूंखार डौन से ली गई थी. खेतीकिसानी से जुड़े ब्राह्मणों को बिहार में भूमिहार ब्राह्मण के रूप में जाना जाता है.

बिहार के बिहरा गांव के रहने वाले दुर्गानंद देव राज्य के विद्युत बोर्ड के पूर्णिया में स्थित औफिस में नौकरी करते थे. उन के बेटे संजय कुमार उर्फ पप्पूदेव ने पूर्णिया के एक इंटर कालेज से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की. उस के बाद उस का पढ़ने का मन नहीं हुआ तो पढ़ाई छोड़ कर वह दोस्तों के साथ आवारागर्दी करने लगा.

उस का गठा पहलवानों जैसा शरीर था, साथ ही जो होगा देखा जाएगा, वाली बिंदास सोच थी. इसलिए वह कुछ कर दिखाने के लिए तत्पर था. उस के मन में फिल्म ‘धूम’ की तरह बाइक चलाने की चाह थी, पर आर्थिक मजबूरी की वजह से उस की यह इच्छा पूरी नहीं हो रही थी.

खुद कमाता नहीं था और पिता के पास पैसे नहीं थे कि वह बेटे के लिए बाइक खरीद देते. फिर आवारा बेटे को पैसा होने पर भी कोई बाप बाइक खरीद कर नहीं देगा.

जब कहीं से बाइक मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दी तो अपनी इच्छा पूरी करने के लिए पप्पूदेव ने कछार गांव के पास हाईवे पर एक व्यक्ति की बाइक छीन ली. अपराध की दुनिया में संजय कुमार उर्फ पप्पूदेव का यह पहला कदम था.

उसी दौरान सहरसा में पप्पूदेव के चचेरे भाई का कुंवर सिंह नामक एक गुंडे से झगड़ा हो गया. मारपीट में पप्पूदेव के चचेरे भाई की हत्या हो गई. भाई की हत्या से युवा संजय कुमार उर्फ पप्पूदेव का खून खौल उठा.

पप्पूदेव ने सहरसा जा कर एक दिन मौका पा कर भरे बाजार में कुंवर सिंह की गरदन काट दी और फरार हो गया.

उन दिनों बिहार में अपराधियों का स्वर्णयुग चल रहा था. अलगअलग इलाकों में अलगअलग गैंगों का साम्राज्य था. जोगमनी में भोला तिवारी और मनोजदेव, खगडि़या में बुलेट सिंह, बेगूसराय में फंटूस सिंह, बाढ़ में टुन्नू सिंह. इन सभी में सब से अधिक शक्तिशाली डौन के रूप में सूरजभान सिंह को जाना जाता था. कुंवर सिंह की हत्या करने के बाद पप्पूदेव पूर्णिया जा कर बूटन सिंह गैंग में शामिल हो गया.

जबरदस्त हिम्मत, लापरवाह स्वभाव तो उस का था ही. इस में बूटन सिंह के साथ आने के बाद हाथ में हथियार आया तो पप्पूदेव तेजी से आगे बढ़ने लगा.

हथियार मिलने के बाद तेजी से बढ़ा गैंग

मोकामा में रजिस्ट्रार का अपहरण कर के रकम वसूल लेने के बाद उस की हत्या कर दी गई थी. उस समय पप्पूदेव को एक वाहन की सख्त जरूरत थी, इसलिए हाथीदह के पास उस ने पूर्व मुख्यमंत्री के समधी की कार छीन ली. जोगमनी में भगवान यादव की हत्या, मुजफ्फरपुर के पास भगवानपुर में टोलबा सिंह की हत्या में उस का नाम उछला.

इस सिलसिले के बाद पप्पूदेव आधुनिक हथियार खरीदने के लिए बूटन सिंह के साथ सीवान गया. वहां हथियार बेचने वाले से पैसों को ले कर कुछ कहासुनी हो गई तो गोली चला कर दोनों ने 4 लोगों की हत्या कर दी और हथियार लूट कर वापस आ गए.

सहरसा में अनुराग वस्त्रालय पर एके-47 से गोली चला कर पप्पूदेव ने 3 लोगों की हत्या कर दी थी. इस के बाद बिहार की सरकार ने उस पर 50 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर दिया था.

उसे जीवित या मुर्दा पकड़ने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाने वाले इंसपेक्टर मेराज हुसैन और कांस्टेबल राजकिशोर की हत्या हो गई. इस में भी पप्पूदेव का नाम सामने आया. इस तरह 1990-95 के बीच कोसी डौन के रूप में पप्पूदेव की पकड़ बन गई.

उन दिनों बिहार में गैगस्टरों की खासियत अलगअलग थी. 13 जुलाई, 1998 को लालू सरकार के मंत्री बृजबिहारी वीआईपी सुरक्षा के साथ पटना के सरकारी अस्पताल इलाज के लिए गए थे. तभी मोकामा के महारथी सूरजभान सिंह के दाहिने हाथ निरजेश उर्फ नागा सिंह ने एके-47 से बृजबिहारी की हत्या कर दी थी. इस के बाद गैंग में नागा सिंह का रुतबा बढ़ गया था. उसी बीच पप्पूदेव के मन में मोकामा आ कर अपना वर्चस्व जमाने का विचार आया. पर उस के पास आधुनिक हथियार नहीं थे.

बूटन सिंह अपनी अमेरिकन कारबाइन जान की तरह संभाल कर रखता था. इस के अलावा उस के पास 2 एके-47 भी थीं. एक रात को तीनों हथियार चोरी कर के पप्पूदेव मोकामा आ गया. मोकामा आ कर उस ने नागा सिंह से दोस्ती कर ली. सहरसा आ कर पप्पूदेव ने अपहरण का धंधा शुरू किया.

बड़े व्यापारी, डाक्टर और वकीलों की लिस्ट बना कर उस ने धड़ाधड़ शिकार पकड़ने शुरू कर दिए. उस की गैंग काफी सशक्त थी. हथियारों की भी कमी नहीं थी. इसलिए बहुत थोड़े समय में ही पूरे बिहार में उस के नाम का सिक्का चलने लगा.

मात्र बिहार ही नहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश तक उस का अपहरण का कारोबार फैल गया था. सहरसा नेपाल की सीमा मात्र 170 किलोमीटर ही दूर है. इसलिए यहां पुलिस का दबाव बढ़ता तो वह भाग कर नेपाल चला जाता. वहां उस ने अपने रहने की बढि़या व्यवस्था कर रखी थी.

नेपाल में संबंध बन जाने के बाद उस ने नकली नोटों का कारोबार शुरू कर दिया. सन 2003 में 60 लाख नकली नोटों के साथ वह नेपाल में पकड़ा गया तो उसे वहां की जेल में रहना पड़ा.

उस के बाद पप्पूदेव ने नेपाल के विराटनगर के रहने वाले व्यापारी तुलसीदास अग्रवाल का अपहरण कर लिया तो इस में नेपाल और भारत सरकार के बीच तनाव पैदा हो गया था.

तुलसीदास को छुड़ाने के लिए मध्यस्थ के रूप में राज्यसभा के एक सांसद ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. कहा जाता है कि इस अपहरण में पप्पूदेव ने 11 करोड़ रुपए की फिरौती वसूली थी, जिस में से सांसद ने भी अपना हिस्सा लिया था.

बिहार ही नहीं, यूपी और नेपाल में भी चलने लगा पप्पूदेव का सिक्का

सूरजभान सिंह को राजनीति का चस्का लग चुका था. जेल में रहते हुए सन 2000 के बिहार विधानसभा के चुनाव में निर्दलीय के रूप में सूरजभान सिंह ने चुनाव लड़ा. चुनाव तक उन्होंने गैंग के सदस्यों से शांत रहने के लिए कहा था.

बिहार के इतिहास में कोई भी निर्दलीय उम्मीदवार इतने जबरदस्त बहुमत से नहीं जीता था, जितने बहुमत से सूरजभान ने यह चुनाव जीता था. तब तक पप्पूदेव ने अपहरण के धंधे में नेपाल तक अपना शासन जमा लिया था.

जिन दिनों सहरसा में पप्पूदेव का उदय हो रहा था, उस समय तक वहां आनंदमोहन सिंह गैंग का वर्चस्व था. 7 साल पहले दोनों एक साथ जब जेल में थे, उस समय दोनों के बीच लुकाछिपी का खेल चलता रहा था.

गैंगस्टर आनंदमोहन सिंह जल्दी ही जाग गया और राजनीति में जा कर समाज में रुतबे वाला स्थान प्राप्त कर लिया. यह देख कर पप्पूदेव की भी समझ में आ गया कि आज के समय में अपहरण के धंधे की अपेक्षा राजनीति अधिक मलाईदार और इज्जत वाला धंधा है.

अकेले सहरसा में ही पप्पूदेव पर 38 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे और पूरे बिहार की बात की जाए तो डेढ़ सौ से भी अधिक आपराधिक मामले पप्पूदेव पर दर्ज थे. कुल 19 साल जेल में रहने के बाद पप्पूदेव ने धंधा बदल दिया.

धाक तो जमी ही थी, इसलिए विवादास्पद या बखेड़ेवाली जमीनों की सौदेबाजी में वह कूद पड़ा. सरकार या बैंक द्वारा जब्त की गई प्रौपर्टी पप्पूदेव खरीदने लगा. पप्पूदेव के इस आदेश के बाद जल्दी कोई आगे आने की हिम्मत नहीं कर रहा था.

जिन जमीनों पर मुकदमा चल रहा होता, उस तरह की जमीनों को पप्पूदेव पानी के भाव खरीद लेता था. दादागिरी की बदौलत मामला सुलटा कर मलाई काटने में पप्पूदेव को मजा आ गया.

इस के अलावा जुलाई, 2022 में होने वाले विधान परिषद के चुनाव में खड़े होने के लिए उस ने जनसंपर्क बढ़ा दिया, साथ ही अनेक राजनीतिक पार्टियों को भी अपने इरादे से अवगत करा दिया.

राजनीति में जाने के लिए वह तत्पर था. इस समय सहरसा की इस सीट पर बिहार के वन पर्यावरण और जल मंत्री नीरज कुमार बबलू की पत्नी नूतन सिंह एमएलसी हैं. ये दोनों इस समय भाजपा में हैं.

बंपरचौक में रहने वाले राकेशदास की सराही रोड पर एक मौके की जमीन पर अनेक बिल्डरों की नजर थी. लोगों की नजरों में चढ़ चुकी यह जमीन लगभग 20 करोड़ रुपए की थी. इसलिए उस जमीन के लिए पप्पूदेव ने राकेशदास को बयाना दे दिया.

संदिग्ध अवस्था में हो गई पप्पूदेव की मौत

18 दिसंबर, 2021 को उस जमीन की लेवलिंग करने के लिए पप्पूदेव के आदमी काम पर लग गए. किसी तरह का बवाल न हो, इस के लिए मजदूरों के साथ पप्पूदेव के आदमी हथियारों के साथ वहां मौजूद थे.

उसी शाम को लगभग 50 पुलिस वालों की टीम वहां पहुंची. ‘यह जमीन तो उमेश शाह की है, इस पर पप्पूदेव जबरदस्ती कब्जा कर रहा है.’ यह कह पुलिस ने पप्पूदेव के 3 सहयोगियों को पकड़ कर उन के रिवौल्वर और 14 कारतूस जब्त कर लिए.

बाकी के सहयोगी कार में सवार हो कर भाग निकले. उस के बाद यह पुलिस टीम पप्पूदेव के घर बिहरा पहुंची. 2 सहयोगियों को घर से खींच कर बाहर लाया गया और 2 रायफलों के साथ 50 कारतूस जब्त कर के उन का मुंह खुलवाया गया. पता चला कि उस समय थोड़ी दूर पर ही रहने वाले उमेश ठाकुर के घर पप्पूदेव खाना खाने गया हुआ था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस वालों की वह टीम उमेश ठाकुर के घर पहुंची और उमेश ठाकुर के घर को घेर लिया. आमनेसामने गोलियां चलने लगीं. हाथ में रायफल ले कर पप्पूदेव ने दीवार फांद कर भागने की कोशिश की, पर पुलिस वालों ने दौड़ कर उसे पकड़ लिया.

रात 9 बजे गिरफ्तार कर उसे सहरसा थाने लाया गया. वहां इंसपेक्टर के अलावा डीएसपी निशिकांत भारती ने उस से पूछताछ शुरू की. उसी दौरान एसपी लिपि सिंह ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर के जो बताया, उस के अनुसार, पप्पूदेव ने छाती में दर्द की शिकायत की थी. इसलिए उसे सहरसा के अस्पताल ले जाया गया था.

रात 3 बज कर 10 मिनट पर डाक्टर ने बताया कि यह हार्टअटैक का मामला है, इसलिए इसे पटना अथवा दरभंगा ले जाना पड़ेगा. उसी बीच पुलिस की व्यवस्था की जा रही थी कि 4 बजे पप्पूदेव की सांसें थम गईं.

सुबहसुबह ही पुलिस पप्पूदेव की लाश का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रही थी कि उसी बीच अस्पताल के बाहर पप्पूदेव के लगभग 5 सौ समर्थकों की भीड़ इकट्ठा हो गई. पप्पूदेव की लाश की हालत देख कर इकट्ठा भीड़ उग्र हो उठी और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने पप्पूदेव की हत्या कर दी है.

एसपी लिपि सिंह ने प्रैस कौन्फ्रैंस में हार्टअटैक की बात बताई थी. पप्पूदेव के समर्थन में उमड़ी भीड़ में पप्पूदेव जैसे लोग भी शामिल हो गए थे, जिस से मामला और उग्र हो गया.

हाईवे पर चक्काजाम कर के समर्थकों ने टायर जलाए और 4 घंटे तक रोड को बंद रखा. भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जनजन पार्टी के अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने पूरी ताकत से समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया और एसपी लिपि सिंह पर तमाम गंभीर आरोप लगा डाले.

जन अधिकार पार्टी (जपा) के अध्यक्ष पप्पू यादव ने भी प्रैस कौन्फ्रैंस कर के कहा कि पप्पूदेव विधान परिषद का चुनाव न लड़ सके, इसलिए पूरी योजना बना कर उस की हत्या कर दी गई है.

बिहार  के पूर्व परिवहन मंत्री अजीत कुमार ने पत्रकारों को जानकारी दी कि जिस विवादास्पद जमीन के लिए यह बखेड़ा खड़ा किया गया है, उस में उमेश शाह की मात्र एक सादे कागज की अरजी पर पुलिस ने कैसे मान लिया कि वह जमीन उमेश शाह की ही है.

अस्पताल में संजय कुमार उर्फ पप्पूदेव के बदले पुलिस ने संजय वर्मा नाम क्यों लिखाया? जरा भी झिझके बगैर उन्होंने कहा कि थाने में ही डीएसपी निशिकांत भारती ने पप्पूदेव की हत्या कर दी थी. उस के बाद लाश को अस्पताल ले जाया गया था. उस के बाद हार्टअटैक की कहानी बनाई गई है.

पत्रकारों से उन्होंने सवाल किया कि कृष्ण कुमार नामक एक अपराधी लंबे समय से सर्किट हाउस में रह रहा है. पप्पूदेव को थाने लाया गया तो वह किस हैसियत से वहां मौजूद था.

राज्य के पूर्व डीआईजी सुधीर कुमार सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखित रूप में पूछा कि किस कारण से बिना वारंट के पुलिस पप्पूदेव के घर गई? आमनेसामने गोली चली है तो उन हथियारों पर फिंगरप्रिंट की जांच क्यों नहीं कराई गई?

थाना इंचार्ज, डीएसपी निशिकांत भारती और एसपी लिपि सिंह, इन तीनों को इस हत्या के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए. अगर इस तरह पुलिस ही न्याय तोड़ने का काम करती है तो राज्य में अदालतों की क्या जरूरत है.

पुलिस आई शक के दायरे में

इस उग्रता के बीच अंत में पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल टीम का गठन किया गया और वीडियोग्राफी का भी आदेश दिया गया.

डा. एस.पी. बिस्वास, डा. के.के. मधुप, डा. अखिलेश प्रसाद और डा. एस.के. आजाद की टीम ने जब पोस्टमार्टम कर के रिपोर्ट दी तो रिपोर्ट कुछ और ही कह रही थी. पप्पूदेव की लाश पर कुल 40 चोटों के निशान थे. इन में से 30 निशान अति गंभीर थे.

सख्त और भारी चीज से किए गए प्रहार किसकिस अंग पर थे, इस पूरी लिस्ट के साथ प्लास जैसे किसी चीज से नाखून उखाड़ने का भी उल्लेख किया गया था पोस्टमार्टम रिपोर्ट में.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महत्त्वपूर्ण मुद्दा सब से भयानक प्रहार सिर के बाएं हिस्से पर था. 2 इंच लंबा और 2 इंच चौड़ा यह प्रहार सिर पर इतने जोर से किया गया था कि इस के कारण दिमाग के अंदर की नसें फट जाने से ही ब्रेन हेमरेज हुआ था और उसी से हार्ट और श्वसन क्रिया बंद हो गई थी और उस की मौत हो गई थी.

जिन अखबारों ने पहले लिपि सिंह के कहने पर हार्टअटैक की कहानी छापी थी, उन्हीं अखबारों ने पोस्टमार्टम की यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से छापी. जिस से ग्रामीण इलाके में ‘पुलिसिया गुंडा’ शब्द प्रचलित हो गया.

कोसी डिवीजन में उठे आक्रोश को दबाने के लिए डीआईजी के रूप में सुपरकौप आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे को भेजा गया. इसी के साथ राज्य के अन्य

21 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया.

सहरसा एसपी लिपि सिंह के खिलाफ पहले भी निकलने वाली शोभा यात्रा में लापरवाही का आरोप था. उस के बाद यह दूसरा गंभीर आरोप लगा. इस के बावजूद भी उन का तबादला नहीं किया गया.

दरअसल, लिपि सिंह के पिता आर.सी.पी. सिंह केंद्र सरकार में मंत्री हैं और नीतीश कुमार के खास मित्र हैं. नीतीश कुमार ने ही उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया था. लिपि सिंह के पति सुहर्ष भगत भी बिहार में ही आईएएस अधिकारी हैं.

पप्पूदेव को न्याय मिल सके, इस के लिए भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच और अन्य संगठनों द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है. बाबूलाल शौर्य नामक ग्रामीण नेता अनशन पर बैठे हैं. अनेक पार्टियों के नेता पप्पूदेव के परिवार वालों को सांत्वना देने आ रहे हैं.

पप्पूदेव की पत्नी पूनमदेव के पास जिला पंचायत का चुनाव लड़ने का अनुभव है. इसलिए राजनीतिक पार्टियां उन्हें आगामी चुनाव में उम्मीदवार बनाने की फिराक में हैं. द्य

कैसे ये दिल के रिश्ते: क्या वाकई तन्वी के मन में धवल के प्रति सच्चा प्रेम था?

कैसे ये दिल के रिश्ते- भाग 1: क्या वाकई तन्वी के मन में धवल के प्रति सच्चा प्रेम था?

रात के सन्नाटे में घड़ी की हलकी सी टिकटिक हथौड़े की चोट सी प्रतीत हो रही थी. मैं अंधेरे में बहुत देर से इधरउधर ताक रही थी. रोज का क्रम बन गया है अब यह. धवल इस दुनिया से क्या गया हमारी दुनिया ही वीरान हो गई. मैं ने प्रणव की ओर देखा, वह गहरी नींद सोए हुए थे.

प्रणव को जवान बेटे की मौत का गम न हो, ऐसी बात नहीं है. वे भी मेरी तरह भीतर से पूरी तरह टूट चुके हैं पर उन्हें अनिद्रा के रोग ने नहीं सताया है. वे रात को ठीक से सो लेते हैं, पर मुझे न दिन में चैन है न रात में. रहरह कर धवल की स्मृतियां विह्वल कर जाती हैं. बूढ़े मांबाप के लिए जवान बेटे की मौत से बढ़ कर दारुण दुख शायद ही कोई दूसरा हो.

एक साल पूरा हो चुका है धवल को गुजरे, पर अब तक हम सदमे से उबर नहीं सके हैं. पलंग के पास ही हमारी अटैचियां रखी हैं. सुबह हमें मुंबई चले जाना है हमेशा के लिए. वहां हमारा बड़ा बेटा वत्सल नौकरी करता है. वही हमें अपने साथ लिए जा रहा है.

अपना शहर छूटने के खयाल से जी न जाने कैसा होने लगा है. नया शहर, नए लोग, न जाने हम मुंबई के माहौल में ढल पाएंगे या नहीं. मुंबई ही क्या, वत्सल हमें किसी भी शहर में ले जाए, धवल की यादें हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगी.

बेटे की असामयिक मौत ने तो हमें तोड़ा ही, उस की मौत से भी अधिक दुखदायी थीं वे घटनाएं जिन के कारण हमें इस बुढ़ापे में खासी बदनामी और थूथू झेलनी पड़ी. बेटे का प्रेमविवाह इतना महंगा पड़ेगा, हम नहीं जानते थे. हम ही क्या, स्वयं धवल भी नहीं जानता होगा कि उस का प्यार हमें किन मुसीबतों में डालने वाला है.

धवल की आंखें मींचते ही तन्वी अपना यह रूप दिखाएगी, किस ने सोचा था. ?प्यार के इस घृणित रूप को देख कर हम व्यथित हैं. प्यार में बेवफाई और धोखाधड़ी के किस्से तो कई सुने थे पर जबरन गले पड़ी बेटे की प्रेमिका हमें इस तरह सताएगी, यह कल्पना नहीं कर सके.

तन्वी हमें शुरू से ही पसंद नहीं थी. सुंदर तो खैर वह बहुत थी पर उस के चेहरे पर कुंआरियों का सा भोलापन और लुनाई नहीं थी. चेहरा पकापका सा लगता था. यद्यपि मैं ने उस के बारे में ऐसीवैसी कोई बात नहीं सुनी थी पर मेरी अनुभवी निगाहें पहली मुलाकात में ही ताड़ गई थीं कि यह बहता पानी है.

धवल को समझाने में हमें खास मेहनत नहीं करनी पड़ी थी. तन्वी विजातीय थी. आर्थिक दृष्टि से भी उस का परिवार हमारे समकक्ष नहीं था. तन्वी के पिता मामूली से वकील थे. हम ने धवल को ऊंचनीच समझाई तो वह सरलता से मान गया और उस ने तन्वी से संबंध सीमित कर लिए थे.

उस समय तक मामला ज्यादा बढ़ा भी नहीं था. कालेज में ही पढ़ रहे थे वे दोनों. हम ने चैन की सांस ली थी कि चलो, बला टली, मगर बला इतनी आसानी से कहां टलनी थी.

तृप्त मन- भाग 2: राजन ने कैसे बचाया बहन का घर

सास की बात सुन कर वह चौंक गई. उस ने मना करना चाहा लेकिन फिर कल रात परिवार में हुई अनबन को याद कर बात को और आगे न बढ़ाने के लिए वह पंडितजी से कुछ दूरी बना कर उन के पास बैठ गई. पंडितजी ने मुसकरा कर उस की तरफ देखा और उसे अपना सीधा हाथ आगे बढ़ाने को कहा. उस ने झिझकते हुए अपने सीधे हाथ की हथेली उन के आगे कर दी. पंडितजी ने उस की हथेली को छूते हुए उस पर हलका सा दबाव डाला. उस ने अपनी हथेली पीछे करनी चाही पर उस के ऐसा करने से पहले ही पंडित उस की हथेली पर अपनी उंगलिया फेरते हुए उस की सास से पूछने लगे, “तो यह आप की बहू है?”

“जी पंडितजी,” उस की सास हां में सिर हिलाते हुए जवाब दिया तो पंडितजी आगे बोले, “समय की बहुत बलवान है आप की बहू. इस के हाथ की रेखाएं बता रही हैं कि इसे अपने पिता की संपत्ति से बहुत बड़ी धनराशि प्राप्त हुई है और उसी धनराशि से आप सब के समय संवरने वाले हैं.”

उस ने पंडित पर एक नजर डाली. पंडितजी बड़े ही ध्यान से उस की हथेली की रेखाओं को देख कर उस का वर्तमान बता रहे थे.

“जी पंडितजी. आप तो ज्ञानी हैं. गांव में इस के पिता की कई एकड़ जमीन बुलेट ट्रेन के प्रोजैक्ट में सरकार ने ले ली है. इस का कोई भाई या बहन तो है नहीं, तो उसी के पैसे से इस के पिता ने इस के नाम 20 लाख रुपए की एफडी कर दी है,” उस की सास ने पंडितजी की बात का जवाब दिया तो उस ने अपनी सास की तरफ देखा. उसे अपनी सास का पंडितजी के सामने इस तरह अपनी निजी बातें शेयर करना पसंद नहीं आया लेकिन वह उन की उम्र का लिहाज कर कुछ भी न बोल पाई.

तभी पंडितजी ने कहा, “यह अपने पिता की इकलौती संतान है, इसी से इस के हाथ की रेखाएं बता रही हैं कि भविष्य में इसे अपने पिता से और भी बड़ी रकम मिलने की उम्मीद है.”

पंडितजी की बात सुन कर उस की सास के चेहरे पर मुसकान तैर गई और वह खुश होते हुए बोली, “यह तो बड़ी अच्छी बात बताई पंडितजी आप ने, लेकिन अब मैं ने जो समस्या आप से कही थी उस का समाधान भी तो बताइए.”

“समाधान तो एक ही है. उन पैसों को मिला कर जो घर आप का बेटा ले रहा है वह आप के बेटे की राशि और ग्रहों को देखते हुए आप के नाम ही होना चाहिए. अगर वह घर आप के बेटे के नाम हुआ तो उसे भविष्य में बहुत ज्यादा ही आर्थिक नुकसान होगा. यह सब साफसाफ मैं आप की बहू के हाथ की लकीरों में देख पा रहा हूं.”

पंडितजी की कही यह बात उस के लिए असहनीय थी. वह नहीं चाहती थी कि घर के निजी मामलों में बाहर का कोई भी इंसान दखलंदाजी करे. उस ने पंडितजी की बात सुन कर एक झटके से अपनी हथेली उन की पकड़ से छुड़ाई और गुस्से से बोली, “यह हमारे घर का निजी मामला है और इस में आप को कोई भी सलाहसूचन करने का कोई अधिकार नहीं है. मैं बिलकुल भी नहीं विश्वास करती हाथ की लकीरों पर.”

अपनी बहू का यह रवैया देख कर सास गुस्से से लाल हो गई और उस ने उसे डांटते हुए कहा, “बहू, माफी मांग पंडितजी से. मेरे कहने पर राकेश ने ही इन को घर आने का निमंत्रण दिया था.”

“मैं माफी चाहती हूं पंडितजी आप से. आप से मुझे कोई शिकायत नहीं है लेकिन मेरे पिता से मिली संपत्ति पर सिर्फ मेरा अधिकार है और उस के बारे में कोई भी फैसला लेने का हक़ सिर्फ मेरा ही है. आप तो क्या, घर के किसी भी सदस्य को इस बारे में बहस करने का कोई अधिकार नहीं है,” उस ने बड़े ही तीखे मिजाज से पंडितजी की तरफ देखते हुए कहा और फिर गुस्से से अंदर रसोई में आ कर वापस अपना काम करने लग गई.

उस की सास को अपनी बहू का इस तरह पंडितजी का अपमान करना और उन्हें पंडितजी की निगाहों में नीचा दिखाना बिलकुल भी पसंद न आया. पंडितजी के सामने तो वह उसे कुछ न बोल पाई लेकिन कुछ देर पंडितजी से बातें कर उन्हें तगड़ी फीस दे कर विदा करने के बाद वह खुद रसोई में आ गई.

“यह तूने ठीक नहीं किया बहू. पैसों की गरमी से अपनी धाक जमाना बंद कर दे, वरना बहुत पछताना पड़ेगा.”

अपनी सास की धमकीभरी आवाज सुन कर उस ने अपनी आंखों से बह रहे आंसुओं को पोंछते हुए जवाब दिया, “अपने हक की बात ही तो कर रही हूं. क्या बुरा कह दिया मैं ने जो नया मकान अपने नाम पर करवाने की बात कह दी तो? पैसा भी तो मेरा ही ज्यादा लग रहा है उसे खरीदने में. राकेश तो केवल 10 लाख ही दे रहे है और वह भी लोन ले कर.”

“हमारे खानदान में जमीनजायदाद पति के जीतेजी औरत के नाम नहीं की जाती है. जिस पैसे की तू बात कर रही है उस पर तेरा पति होने के नाते राकेश का भी बराबर का हक है तो एक तरह से वह पैसा भी राकेश का ही हुआ,” सास ने सख्ताई से जवाब देते हुए उस से कहा.

“यह तो किसी कानून में नहीं लिखा है कि पत्नी की संपत्ति पर पति का हक बिना कोई कानूनी कार्यवाही के होता है. पर फिर भी मैं ऐसा नहीं कह रही हूं कि मेरे पापा के दिए पैसों पर राकेश का कोई हक नहीं है. मैं, बस, नया मकान अपने नाम करवाना चाहती हूं क्योंकि इस में ज्यादा पैसा मेरा लग रहा है. शादी से पहले नौकरी का जो पैसा जमा किया था वह भी तो राकेश ने निकलवा कर नया मकान लेने में डलवा दिया. इस तरह तो मेरे नाम कोई आर्थिक संबल रहेगा ही नहीं,” उस ने अपनी बातों से सास को समझाने का यत्न किया.

उस की बात सुन कर सास ने मुंह बिगाड़ते हुए कहा, “उस रमा सहाय ने जाने क्या पट्टी पढ़ा दी तुझे जो मुझे कानूनी धौंस देने चली है. तेरी वकील चाहे जो कुछ कहे पर नया मकान तो तेरे नाम न ही होगा बहू.”

“ठीक है, आप अपने मन की कीजिए. मुझे जो ठीक लगेगा मैं वही करूंगी,” उस ने जवाब दिया और ज्यादा बहस में न पड़ते हुए चुपचाप सब्जी काटने लगी.

शाम को राकेश के औफिस से आने तक सासबहू के बीच कोई भी बातचीत न हुई लेकिन उस ने अपनी वकील रमा सहाय से फोन पर बात कर इस मामले में कानूनी सलाह ले कर मन ही मन एक फैसला ले लिया था.

शाम को राकेश के आने पर चायनाश्ता करते हुए नया मकान अपने नाम लेने के मुद्दे पर फिर उन तीनों के बीच बहस शुरू हो गई.

“आखिर तुम्हें मकान मेरे नाम पर लेने में परेशानी क्या है राकेश?” उस ने झुंझलाते हुए चाय का खाली कप टेबल पर रखते हुए राकेश से पूछा.

“बात परेशानी की नहीं है नेहा. आज तक हमारे खानदान में कभी भी पुरुष के रहते औरत के नाम पर जमीनजायदाद नहीं हुई है. यह परंपरा रही है हमारे खानदान की. पति के रहते पत्नी के नाम जमीनजायदाद करना शुभ नहीं माना जाता,” राकेश ने साफ शब्दों में न कहते हुए उसे जवाब दिया.

आकाश में मचान- भाग 2: आखिर क्यों नहीं उसने दूसरी शादी की?

इन्हीं तनावों से घिरी होने के कारण आज मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था, क्योंकि कपड़े बदलते समय रुपयों का पुलिंदा वहीं कमरे में ही छूट गया था और जो छूट गया सो गया. बस, गलती यह  हुई कि चाय बनाने की जल्दी में वह रुपयों का पुलिंदा उठाना भूल गई. यद्यपि मुझे याद आया, मैं वह पुलिंदा लेने भागी, मेरे कपड़े तो वैसे ही पडे़ थे पर वह पुलिंदा नहीं था. मुझे काटो तो खून नहीं. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं चक्कर खा कर गिर जाऊंगी. ये ड्राइंगरूम में बैठे टैलीविजन देख रहे थे, पर उस समय मैं ने इन से कुछ नहीं कहा.

टहलने के लिए जब बाहर निकले तो मुझे गुमसुम देख कर इन्होंने पूछा, ‘‘क्या बात है?’’ मैं चुप रही. कैसे कहूं. समझ में नहीं आ रहा था. मैं चक्कर खा कर गिरने ही वाली थी कि इन्होंने संभाल लिया और समझाने के लहजे से कहा, ‘‘देखो, तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है, घर में आराम करो, मैं घूमफिर कर आ जाऊंगा.’’

इस बात से इन्हें भी तो धक्का लगेगा, यह सोच कर मेरी आंखों में आंसू आ गए.

‘‘अरे, क्या हुआ, सचमुच तुम बहुत थक गई हो, मेरी देखभाल के साथ घर का सारा काम तुम्हें ही करना पड़

रहा है.’’

‘‘नहीं, यह बात नहीं है.’’

‘‘तो क्या बात है?’’

‘‘चलो, वहीं पार्क में बैठ कर बताती हूं.’’

फिर सारी बात मैं ने इन्हें बता दी. ये बोले, ‘‘चिंता मत करो, जो नहीं होना था वह हो गया. अब समस्या यह है कि आगे क्या करें और कैसे करें. भैया से उधार मांगने पर पूछेंगे कि तुम तैयारी से क्यों नहीं आए? यदि सही बात बताई तो बात का बतंगड़ बनेगा.’’

फिर ये चुप हो गए. गहरी चिंता की रेखाएं इन के चेहरे से साफ झलक रही थीं. मुझे धैर्य तो दिया पर स्वयं विचलित हो गए.

संतोषजी भी हर दिन की तरह चेहरे पर मुसकान लिए अपने समय पर आ गए. हम लोगों ने झिझकते हुए उन्हें अपनी समस्या बताई तथा मदद करने के लिए कहा.

वे कुछ देर खामोश सोचते रहे, फिर बोले, ‘‘मैं मदद करने को तैयार हूं, आप परदेसी हैं, इसलिए एकदम से भरोसा भी तो नहीं कर सकता. आप अपनी कोईर् चीज गिरवी रख दें. जब 3 माह बाद आप लोग यहां दोबारा दिखाने के लिए आएंगे, तब पैसे दे कर अपनी चीज ले जाना. हां, इन पैसों का मैं कोई ब्याज नहीं लूंगा.’’

मरता क्या न करता. हम लोग तैयार हो गए. मेरे गले में डेढ़ तोले की चेन थी, उसे दे कर रुपया उधार लेना तय हो गया.

संतोषजी अपने घर गए और 5 हजार रुपए ला कर इन की हथेली पर रख दिए. मैं ने उन का उपकार माना और सोने की चेन उन्हें दे दी.

इस घटना के बाद इन की आंखों में उदासीनता गहरा गई. मुझे भलाबुरा कहते, डांटते. मेरी इस लापरवाही के लिए आगबबूला होते तो शायद इन का मन हलका हो जाता, पर भाई के संरक्षण में यह धोखा इन्हें पच नहीं रहा था. संतोषजी दुनियादारी की बातें, रिश्तेनातों के खट्टेमीठे अनुभव सुनाते रहे, समझाते रहे पर इन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा.

घर जा कर मैं ने रात में इन को समझाया, ‘‘समझ लो चेन कहीं गिर गई या रुपयों का पुलिंदा ही कहीं बाहर गिर गया. इस तरह मन उदास करोगे तो इलाज ठीक से नहीं हो पाएगा. तनाव मत लो, बेकार अपनेआप को परेशान कर रहे हो. अब यह गलती मुझ से हुई है, मुझे ही भुगतना पड़ेगा.’’

कुछ दिन और बीत गए. संतोषजी उसी तरह मिलते, बातें करते, हंसतेहंसाते रहे. बातोंबातों में मैं ने उन्हें बताया कि कल डाक्टर ने एक्सरे लेने को कहा है. रिपोर्ट ठीक रही तो 5वें दिन छुट्टी कर देंगे. संतोषजी को अचानक जैसे कुछ याद आ गया, बोले, ‘‘आज से 5वें दिन तो मेरा जन्मदिन

है. जन्मदिन, भाभी, जन्मदिन.’’ उन

का इस तरह चहकना मुझे बहुत

अच्छा लगा.

‘‘उस दिन 16 तारीख है न, आप लोगों को मेरे घर भोजन करना पड़ेगा,’’ फिर गंभीरता से इन का हाथ अपने हाथ में ले कर बोले, ‘‘पत्नी की मृत्यु के बाद पहली बार मेरे मुंह से जन्मदिन की तारीख निकली है.’’

16 तारीख, यह जान कर मैं भी चौंक पड़ी, ‘‘अरे, उस दिन तो हमारी शादी की सालगिरह है.’’

‘‘अरे वाह, कितना अच्छा संयोग है. संतोषजी, उस दिन यदि रिपोर्ट अच्छी रही तो आप और आप की बेटी हमारे साथ बाहर किसी अच्छे रैस्टोरैंट में खाना खाएंगे,’’ हंसते हुए इन्होंने कहा.

‘‘मेरा मन कहता है कि आप की रिपोर्ट अच्छी ही आएगी, पर भोजन तो आप लोगों को मेरे घर पर ही करना पड़ेगा. इसी बहाने आप लोग हमारे घर तो आएंगे.’’

मैं ने इन की ओर देखा, तो ये बोले, ‘‘ठीक है’’, फिर बात तय हो गई. संतोषजी खिल उठे. अब तक की मुलाकातों से उन के प्रति एक अपनापन जाग उठा था. अच्छा संबंध बने तो मनुष्य अपने दुख भूलने लगता है. हम लोग भी खुश थे.

समय बीता. एक्सरे की रिपोर्ट के अनुसार हड्डी में पहले जितना झुकाव था, उस से अब कम था. डाक्टर का कहना था कि ऐसी ही प्रगति रही तो औपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी. नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन जरूरी है. इन्हीं 2 उपायों से अपनेआप को ठीक से दुरुस्त करना होगा. मुझे अंदर ही अंदर बड़ी खुशी हुई. औपरेशन का बड़ा संकट जो टला था. डाक्टर ने दवाइयां लिख दी थीं, 3 माह बाद एक्सरे द्वारा जांच करानी पड़ेगी. डाक्टर का कहना था, हड्डी को झुकने से बचाना है. मैं ने बिल चुकाया और डाक्टर को धन्यवाद दिया.

कुछ दवाइयां खरीदीं और फिर वहीं एक नजदीकी दुकान से संतोषजी को जन्मदिन का उपहार देने के लिए कुरतापाजामा और मिठाई का डब्बा खरीदा. फिर हमेशा की तरह सब्जी वगैरह ले कर हम घर आ गए.

मेरा होने वाला पति बेरोजगार है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 23 साल की कुंआरी लड़की हूं. मेरे परिवार में दूर के रिश्ते का एक लड़का मुझसे शादी करना चाहता है, पर वह अभी बेरोजगार है और मुझे नहीं लगता कि उस का काम करने का कोई इरादा है. हालांकि इस सब के बावजूद मैं उसे पसंद करती हूं, पर उसे नौकरी या कोई कामधंधा करने के लिए मना नहीं पा रही हूं. मैं बड़ी अजीब सी समस्या से जूझ रही हूं. क्या करूं?

जवाब

यह चूंकि जिंदगीभर का सवाल है, इसलिए अक्ल और सब्र से काम लें. अगर उस लड़के का कोई कामधंधा या नौकरी करने का इरादा नहीं है, तो शादी के बाद आप को काफी परेशानियां उठानी पड़ेंगी.
अगर आप उसे वाकई इतना चाहती हैं कि उस के बगैर रहना मुमकिन न लग रहा हो, तो खुद कोई नौकरी या कामधंधा शुरू करिए, जिस से अपने जानू और बाबू का पेट भर सकें.

दूर की रिश्तेदारी शादी में कोई अड़ंगा नहीं है, पर यह भी सोचें कि आशिक प्यार में क्याकुछ नहीं करगुजर जाते हैं और यह बंदा तो अपनी माशूका की जरा सी ख्वाहिश ही पूरी नहीं कर पा रहा है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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Monsoon Special: बारिश के मौसम में भी खूबसूरती बरकरार रखेंगे ये टिप्स

बरसात में त्वचा संबंधी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं. आर्द्रता के चलते त्वचा पर कई तरह के बैक्टीरिया, फंगस तथा अन्य संक्रमण पनपते हैं. साथ ही बरसात की पहली फुहारों में अम्ल की भी बहुत ज्यादा मात्रा होती है, जिस से त्वचा और बालों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है. ऐसे में इस मौसम में कुछ बातों का ध्यान रख कर त्वचा और बालों की समस्याओं से बचा जा सकता है.

मौनसून में त्वचा की देखभाल

सफाई या क्लिंजिंग: बरसात के पानी में ढेर सारे रसायन होते हैं, इसलिए मौनसून में त्वचा की सही तरीके से सफाई बहुत जरूरी है. मेकअप हटाने के लिए मिल्क क्लींजर या मेकअप रिमूवर का उपयोग किया जाना चाहिए. त्वचा से अशुद्धताओं को धो देने से त्वचा के रोम खुल जाते हैं. साबुन के प्रयोग के बजाय फेशियल, फेश वाश, फोम आदि ज्यादा कारगर माने जाते हैं.

टोनिंग: क्लिंजिंग के बाद इस का प्रयोग करना चाहिए. मौनसून के दौरान बहुत सारे वायुजनित तथा जलजनित माइक्रोब्स पैदा हो जाते हैं. इसलिए स्किन इन्फैक्शन होने तथा त्वचा फटने से बचाने के लिए ऐंटी बैक्टीरियल टोनर ज्यादा उपयोगी होता है. कौटन बड का प्रयोग कर त्वचा पर धीरे से टोनर लगा लें. यदि त्वचा ज्यादा शुष्क हो तो टोनर का प्रयोग नहीं करना चाहिए. हां, बहुत सौम्य टोनर का प्रयोग किया जा सकता है. यह तैलीय तथा मुंहांसों वाली त्वचा पर अच्छा काम करता है.

मौइश्चराइजर: गरमी की तरह बरसात में भी मौइश्चराइजिंग जरूरी है. मौनसून के कारण सूखी त्वचा पर डिमौइश्चराइजिंग प्रभाव पड़ सकता है तथा तैलीय त्वचा पर इस का ओवर हाइड्रेटिंग प्रभाव पड़ता है. बरसात में हवा में आर्द्रता के बावजूद त्वचा पूरी तरह से डिहाइड्रेटेड हो सकती है. परिणामस्वरूप त्वचा बेजान हो कर अपनी चमक खो देती है.

सभी तरह की त्वचा के लिए रोजाना रात को मौइश्चराइज करना बहुत जरूरी है. यदि ऐसा न किया जाए तो त्वचा में खुजली होने लगती है. यदि आप बारबार भीग जाती हैं तो नौनवाटर बेस्ड मौइश्चराइजर का प्रयोग करें. याद रखें यदि आप की त्वचा तैलीय हो तो भी आप को रात में त्वचा पर वाटर आधारित लोशन की पतली फिल्म का प्रयोग करना चाहिए.

सनस्क्रीन: सनस्क्रीन का प्रयोग किए बिना घर से न निकलें. जब तक धूप होगी आप की त्वचा को यूवीए तथा यूवीबी किरणों से बचाव की जरूरत होगी. घर से बाहर निकलने से 20 मिनट पहले त्वचा पर कम से कम 25 एसपीएफ वाला सनस्क्रीन लगाएं. और हर 3-4 घंटों में इसे लगाती रहें. आमतौर पर यह गलत धारणा बन जाती है कि सनस्क्रीन का उपयोग केवल तब किया जाना चाहिए जब धूप निकली हो. बादलों/बरसात के दिनों में वातावरण में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणों को कम न आंकें.

सूखी रहें: बरसात में भीगने के बाद शरीर को सूखा रखने की कोशिश करें. शरीर पर नम तथा आर्द्रता वाले मौसम में कई तरह के कीटाणु पनपने लगते हैं. यदि आप बरसात के पानी में भीग गई हों तो साफ पानी से स्नान करें. जब बाहर जाएं तो बरसात के पानी को पोंछने के लिए अपने साथ कुछ टिशूज/छोटा टौवेल रखें. बौडी फोल्ड्स पर डस्टिंग पाउडर का प्रयोग भी एक अच्छा विकल्प है.

रखरखाव: चमकती तथा दागरहित त्वचा के लिए त्वचारोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्किन ट्रीटमैंट अपनाती रहें. पील्स तथा लेजर्स ट्रीटमैंट के लिए मौनसून का मौसम बहुत अच्छा होता है, क्योंकि अधिकांश समय सूर्य की किरणें न होने से उपचार के बाद की देखभाल करने की बहुत कम जरूरत पड़ती है.

मौनसून में बालों की देखभाल

– यदि बरसात में बाल भीग जाएं तो जितनी जल्दी हो सके उन्हें माइल्ड शैंपू से धो लें. बालों को ज्यादा देर बरसात के पानी से गीला न रखें, क्योंकि इस में रसायनों की मात्रा ज्यादा होती है, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है.

– सिर की सूखी मालिश करें ताकि रक्तसंचालन ठीक हो जाए. कुनकुने तेल से सप्ताह में 1 बार सिर की मालिश करना अच्छा रहता है. लेकिन बालों में तेल ज्यादा देर तक न रहने दें यानी कुछ घंटों के बाद उन्हें धो लें.

– हर दूसरे दिन बालों को धोएं. यदि बाल छोटे हैं, तो रोजाना धो सकती हैं. उन्हें धोने के लिए अल्ट्राजैंटल/बेबी शैंपू का प्रयोग करना अच्छा रहता है. हेयर शौफ्ट्स पर कंडीशनर लगाने से बाल मजबूत होंगे.

– मौनसून में हेयर स्प्रे या जैल का प्रयोग न करें क्योंकि ये स्कैल्प पर चिपक जाएंगे जिस से रूसी हो सकती है. ब्लो ड्रायर के प्रयोग से भी बचें. यदि बाल रात में गीले हैं तो उन में कंडीशनर लगाएं और ब्लोअर की ठंडी हवा से सुखा लें.

– पतले, लहरदार तथा घुंघराले बालों में नमी ज्यादा अवशोषित होती है. इस का सब से अच्छा उपाय यह है कि स्टाइलिंग से पहले ह्यूमिडिटी प्रोटैक्टिव जैल का प्रयोग करें.

– अपने बालों की किस्म के आधार पर हेयर केयर उत्पादों का चयन करें. आमतौर पर उलझे, सूखे तथा रफ बालों के लिए हेयर क्रीम आदि का प्रयोग कर उन्हें सीधा किया जाता है.

– अधिक आर्द्रता तथा नम हवा के कारण मौनसून में रूसी एक आम समस्या है. इसलिए सप्ताह में 1 बार अच्छे ऐंटीडैंड्रफ शैंपू का प्रयोग करें.

– मौनसून के दौरान पानी में मौजूद क्लोरीन के अंश भी बहुत ज्यादा होते हैं, जो बालों को ब्लीच कर खराब कर सकते हैं. इसलिए यदि संभव हो तो बालों को बरसात के पानी के संपर्क में आने से बचाने के लिए कैप या कैप/हुड वाले रेनकोट का प्रयोग करें.

– बालों में जूंएं पनपने के लिए भी बरसात का मौसम अनुकूल समय है. यदि सिर में जूंएं हैं तो परमाइट लोशन का प्रयोग करें. 1 घंटे सिर में लगाए रखने के बाद धो लें. 3-4 सप्ताह तक दोहराएं.

मौनसून में अपने हैंडबैग में इन्हें जरूर रखें

– सब से पहले तो लैदर के बैग का प्रयोग करने से बचें. वाटर रिजिस्टैंट स्टफ का प्रयोग करें.

– वाटर रिजिस्टैंट मेकअप स्टफ खासकर लूज पाउडर, ट्रांसफर रिजिस्टैंट लिपस्टिक तथा आइलाइनर.

– 20 एसपीएफ वाली वाटर रिजिस्टैंट सनस्क्रीन.

– एक छोटा दर्पण तथा हेयरब्रश.

– पौकेट हेयर ड्रायर.

– त्वचा को साफ करने के लिए गीले वाइप्स.

– ऐंटीफंगल डस्टिंग पाउडर.

– एक फोल्डेड प्लास्टिक बैग.

– परफ्यूम/डियोड्रैंट.

– ऐंटी फ्रिंज हेयर स्प्रे.

– हैंड टौवेल.

Monsoon Special: बारिश के मौसम में बेसन से बनाएं ये 2 मजेदार डिश

बेसन लगभग हर किसी के किचन में मौजूद होता है, ऐसे में आप चाहे तो बेसन से कई तरह की डिश बना सकती हैं. तो आइए जानते हैं बेसन से बरसात में क्या स्पेशल बना सकते हैं.

  1. मसाला बेसनी रोटी

सामग्री :

1 कप फौर्च्यून बेसन, 1/4 कप आटा, 1 छोटा प्याज, 1/4 कप पुदीने के पत्ते, 1 छोटा चम्मच अदरक व हरीमिर्च का पेस्ट, 1/2 छोटा चम्मच नमक, चुटकीभर हींग पाउडर और रोटी पर लगाने के लिए थोड़ा सा देसी घी या मक्खन.

विधि :

फौर्च्यून बेसन और आटे को छान लें. प्याज व पुदीने के पत्तों को बारीक काट लें.

आटे में उपरोक्त लिखी सभी चीजें मिक्स करें और मुलायम आटा गूंध लें.

आधा घंटा ढक कर रखें और फिर छोटीछोटी रोटी बना लें.

यह रोटी सेहत के लिए बहुत अच्छी रहती है. आलू की सब्जी के साथ सर्व करें.

2. बेसन की सब्जी

सामग्री :

1 कप फौर्च्यून बेसन, 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर, 2 छोटा चम्मच अदरक व हरीमिर्च का पेस्ट, 1 छोटा चम्मच जीरा, चुटकीभर हींग पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच नमक और 1 बड़ा चम्मच सरसों का तेल.

मसाले के लिए :

1/4  कप प्याज का पेस्ट, 1 छोटा चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट, 1 बड़ा चम्मच मोटा कुटा धनिया, जीरा, सौंफ पाउडर, 1/2 छोेटा चम्मच हलदी पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच पिसी लालमिर्च, 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला, स्वादानुसार नमक और 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल.

विधि :

फौर्च्यून बेसन में 3 कप पानी डाल कर मिक्स करें और 10 मिनट ढक कर रखें.

एक नौनस्टिक कड़ाही में तेल गरम कर के हींग व जीरे का तड़का लगाएं,

फिर हलदी पाउडर डाल कर बेसन का घोल डाल दें.

इस में अदरक व हरीमिर्च का पेस्ट और नमक भी डालें. मध्यम आंच पर बराबर चलाती रहें.

जब बेसन का मिश्रण एक गोले के आकार की तरह हो जाए तब कटोरी के पीछे वाली तली से एक थाली में डाल कर फैलाएं.

जब ठंडा हो जाए तब छोटे चौकोर टुकड़े काट लें. फिर कड़ाही में तेल गरम कर के टुकड़ों को डाल कर हलका सुनहरा तल लें.

बचे तेल में प्याज, अदरक, लहसुन का पेस्ट भूनें. सभी सूखे मसाले भी डाल दें.

जब मसाला भुन जाए तब बेसन के टुकड़े डालें और साथ ही, 1 बड़ा चम्मच पानी.

जब मसाले में बेसन के टुकड़े अच्छी तरह लिपट जाएं तब हरा धनिया बुरक कर रोटीपंराठे के साथ या स्टार्टर की तरह सर्व करें.

Deepika Padukone ने आलिया की प्रेग्नेंसी पर दिया ये रिएक्शन

आलिया भट्ट अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर सुर्खियों में छायी हुई है. फैंस से लेकर सेलिब्रिटी तक उन्हें बधाईयां एवं शुभकामनाएं दे रहे हैं. कपूर फैमिली में जल्द किलकारियां गूंजने वाली हैं. आलिया ने इस खुशखबरी को सोशल मीडिया पर शेयर किया. एक्ट्रेस की की प्रेग्नेंसी न्यूज सुनते ही अनुष्का शर्मा से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक बॉलीवुड सेलेब्स ने एक्ट्रेस को बधाई देने शुरू कर दी. बता दें कि रणबीर कपूर की एक्स-गर्लफ्रेंड ने भी कपल के जल्द पेरेंट्स बनने की अनाउंसमेंट पर अपना रिएक्शन दिया है. आइए बताते हैं, क्या कहा है दीपिका पादुकोण ने…

दीपिका पादुकोण का आलिया भट्ट के साथ भी अच्छी बॉन्डिंग है. बल्कि रणबीर कपूर के साथ भी अच्छी बॉन्डिंग है. दीपिका पादुकोण ने इंस्टाग्राम पर कपल की तस्वीर शेयर कर बधाई दी है तो वहीं आलियी भट्ट के एक्स बॉयफ्रेंड सिद्धार्थ मल्होत्रा ने भी सोशल मीडिया पर फोटो शेयर कर कपल को बधाई दी है.

 

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शादी के लगभग 2 महीने बाद आलिया और रणबीर ने जल्द पेरेंट्स बनने की घोषणा की है. आलिया भट्ट ने एक फोटो शेयर करते हुए कैप्शन दिया था, ‘हमारा बच्चा जल्द आ रहा है.’

 

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वर्कफ्रंट की बात करें तो आलिया भट्ट और रणबीर कपूर दोनों ही जल्द अयान मुखर्जी की फिल्म ‘ब्रहमास्त्र’ में दिखाई देंगे. इस फिल्म में आलिया और रणबीर ऑनस्क्रीन रोमांस करते दिखाई देंगे.

 

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