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विद्या बालन ने टेके घुटने, अब लेंगी सिर्फ दो करोड़ रुपये

2012 में प्रदर्शित सुजाय घोष निर्देशित नायिका प्रधान फिल्म ‘‘कहानी’’ को मिली अपार सफलता के बाद विद्या बालन हवा में उड़ने लगी थी. सूत्रों की माने तो विद्या बालन ने फिल्म ‘‘कहानी’’ के लिए एक करोड़ रूपए पारिश्रमिक राशि ली थी. उसके बाद वह सुजाय घोष के साथ तीन फिल्में करेन वाली थीं. मगर ‘कहानी’ को मिली सफलता के बाद विद्या बालन ने सुजाय घोष से पारिश्रमिक राशि के रूप में प्रति फिल्म पांच करोड़ रूपए की मांग कर दी.

इसी बात पर सुजाय घोष और विद्या बालन के बीच अनबन हो गयी थी. सुजाय घोष ने कंगना रनौट और ऐश्वर्या राय बच्चन सहित कई कुछ दूसरी अभिनेत्रियों के साथ ‘‘दुर्गारानी सिंह’’ बनाने का असफल प्रयास किया. उधर विद्या बालन ने शादी कर ली. तथा ‘कहानी’ के बाद विद्या बालन ने ‘घनचक्कर’, ‘‘षादी के साइड इफेक्ट्स’, ‘बाबी जासूस’’, ‘हमारी अधूरी कहानी’ सहित जिन फिल्मों में भी अभिनय किया, वह सभी फिल्में बाक्स आफिस पर मुंह के बल गिरती चली गयी. आज हालात यह हैं कि विद्या बालन के पास एक भी फिल्म नही है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि अपने करियर को समाप्त होते देख विद्या बालन ने न सिर्फफिल्म निर्देशक सुजाय घोष के साथ समझौता किया है, बल्कि अब अपनी पारिश्रमिक राशि को पांच करोड़ रूपए से घटाकर दो करोड़ रूपए कर दिया है. विद्या बालन फिल्म के लाभ में 25 प्रतिशत की हिस्सेदार भी होंगी. सूत्रों के अनुसार सुजाय घोष ने भी विद्या बालन के संग अपने सारे गिले शिकवे भूल कर अब अपनी फिल्म ‘‘दुर्गारानी सिंह’’ को विद्या बालन के साथ बनाने का निर्णय ले लिया है.

रितेश के लिए “क्या कूल हैं हम-3” की स्पेशल स्क्रीनिंग

क्या कूल हैं हम-3 22 जनवरी को रिलीज होने के लिए तैयार है. फिल्म का प्रोमोशन भी तगड़े तरीके से जारी है. फिल्म में रितेश देशमुख तो नहीं हैं पर वो क्या कूल हैं हम टीम का काफी अहम हिस्सा हैं. सूत्रों की मानें तो क्या कूल हैं हम के मेकर्स रितेश देशमुख के लिए फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखने की योजना बना रहे हैं. 

आप को बता दें कि क्या कूल हैं हम के पहले के दोनों पार्ट में रितेश ने शानदार भूमिका निभाई थी. क्या कूल हैं हम फ्रेंजाइजी के लिए रितेश लकी चार्म रहे हैं. वो रितेश को हमेशा से ही अपने साथ रखे हुए हैं. फिल्म के तीसरे कड़ी में रितेश के रोल को जबरजस्ती नहीं डाला गया है. स्क्रिप्ट जैसी बनी उसके हिसाब से फिल्म फ्लोर पर आई. मेकर्स चाहते तो डाल सकते थे पर उनकी और रितेश की बांडिंग बुहत ज्यादा स्ट्रांग हैं. फिल्म में होने न होने को लेकर रितेश और मेकर्स भी संतुष्ट हैं. ऑन स्क्रीन तो नहीं लेकिन बिहाइंड द स्क्रीन रितेश के पास क्या कूल हैं हम के तीसरे डोज की जिम्मेदारी है. सिनेमाघरों में आने से पहले रितेश के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग यानी रितेश की टीम के लिए वैल्यू और सीनसियरिटी को बताता है.

टीम के सूत्रों से मिली जानकरी के अनुसार क्या कूल हैं के तीसरे सीजन की शूटिंग के दौरान टीम ने रितेश देशमुख को काफी मिस किया. लेकिन जैसे ही उनको पता चला कि बिहाइंड द सीन में रितेश हैं ही तो सभी की बांछे खिल गई.

खैर फिल्म को फ्लोर में आने सप्ताहभर का समय बचा हुआ है. क्या कूल हैं हम-3 की प्रमोशन एक्टिविटी धुंआधार चल रही है. ट्वीटर से लेकर अन्य सोशल मीडिया में क्या कूल हैं हम-3 हिट, ट्वीट, रिट्वीट और शेयर हो रहा है. 26 जनवरी वाले वीक में रिलीज हो रही इस फिल्म ने अभी से कई शो हाउसफुल हो चुके हैं.

अक्षय ने ऐसा क्या कहा कि शरमा गईं दिव्या कुमार

अगर आप तस्वीर से भी ज़्यादा खूबसूरत हों और इंडस्ट्री के जाने माने शक्तिशाली शख्स की पत्नी हों, तो यूं ही कोई आपके चेहरे पर सुर्खी ले आए यह आसान नहीं. लेकिन हाल ही में खूबसूरत दिव्या कुमार के गुलाबी गालों को और सुर्खी देने का सेहरा बंधा खिलाड़ी अक्षय कुमार के माथे.

जी हाँ विषम परिस्थितियों में भी अपनी पहचान बनाकर कामयाबी का परचम लहराने वाले अक्षय कुमार. दरअसल हाल ही में हुए एक अवार्ड फंक्शन में अक्की, टी सीरीज़ के मालिक भूषण कुमार की खूबसूरत पत्नी दिव्या कुमार के बगल में बैठे थे. मज़े की बात है कि दिव्या ने अपने अभिनय करियर की शुरूआत अक्षय कुमार के साथ ही फ़िल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों से की थी. 

तो क्या आप सोच सकते हैं कि इस मौके पर अक्की ने दिव्या से क्या कहा होगा ? भूषण की भौंहें टेढ़ी हो उससे पहले हम आपको जल्दी से बता दें कि उनके बीच हुई बातचीत पूरी तरह से प्रोफेशनल थी, जहां चतुर अक्षय ने बतौर निर्देशक दिव्या की युवा पसन्द फिल्मों को तरजीह देते हुए उनकी प्रशंसा की. सिर्फ यही नहीं दिव्या की पहली सुपरहिट फ़िल्म यारियां के बाद पुल्कित सम्राट और यामी गौतम की दिलकश अदाकारी से सजी फ़िल्म सनम रे की भी अक्षय ने खूब तारीफ़ की. उन्होंने बताया कि सनम रे की ताज़गी ने उन्हें अचंभित कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि इसका प्रोमो देखने के बाद अब वह इस फ़िल्म को देखना चाहते हैं क्योंकि अक्षय को पूरा यकीन हो चला है कि टी सीरीज़ के बैनर तले जल्द ही एक और हिट फ़िल्म का शुमार होनेवाला है.

अक्षय के इन शब्दों को सुनकर ना सिर्फ कोमल दिव्या के गाल सुर्ख हो गए बल्कि उन्होंने इसके लिए प्रार्थना भी की. सच पूछिए तो यह सुनकर हमें भी बहुत अच्छा लगा लेकिन ईमानदारी से कहें तो हमारे लिए सबसे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि जो कभी अपने काम की तारीफ़ नहीं करते उसी बहादुर ने आज दिव्या की तारीफ़ की जो काबिले गौर बात है. सच पूछिए तो इस इंडस्ट्री में जहाँ लोग अपने काम से काम रखना पसन्द करते हैं वहां इस तरह की वास्तविकता बहुत अच्छी लगती है. वह भी एक सुपरस्टार के मुख से. अब हम समझे कि आखिर वो क्या बात थी जिसने दिव्या के गालों को सुर्खी से भर दी. हम समझते हैं इसी को प्रशंसा और सफलता का रंग कहते हैं.

मैच फिक्सिंग के लिए मुझसे संपर्क किया गया: मैथ्यूस

श्रीलंका के कप्तान एंजलो मैथ्यूस ने जांच सदस्यों से मैच बुकी के संपर्क किए जाने की बात स्वीकार की है. श्रीलंका के लिए 56 टेस्ट में 4 हजार से ज्यादा रन बना चुके मैथ्यूस को वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ मैच हारने के लिए भारी रकम की पेशकश की गई थी.

मैथ्यूस ने मैच फिक्सिंग की जांच कर रही श्रीलंकाई पुलिस के सामने स्वीकार किया है कि उन्हें मैच फिक्स करने को कहा गया था. मैथ्यूस ने कहा, 'जांच दल के सदस्य किसी एक खिलाड़ी के बारे में जांच नहीं कर रहे हैं बल्कि खिलाड़ी से मैच फिक्सिंग के बारे में पूछताछ कर रहे हैं.' मैथ्यूस से श्रीलंकाई पुलिस ने करीब पांच घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की. मैथ्यूस से पुलिस ने कुशल परेरा और रंगना हैराथ से मैच फिक्स करने के ऑफर के बारे में भी पूछा.

गॉल टेस्ट में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ मैच में परेरा और हैराथ ने मैच फिक्स करने के ऑफर को ठुकरा दिया था. बाद में यह मैच श्रीलंका ने पारी और छह रन से जीता जिसमें हैराथ ने 10 विकेट लिए थे. मैथ्यूस ने साफ किया कि खिलाड़ियों ने खुद फिक्सिंग के बारे में बताया है. हालांकि श्रीलंका के खेल मंत्री दयाश्री जयासेकरा ने पुलिस में केस दर्ज किया जिसके बाद मामले में कार्रवाई शुरू हुई है.

सोमवार को श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने मैच फिक्सिंग के लिए एक घरेलू खिलाड़ी को उकसाने के आरोप में गेंदबाजी कोच अनुषा समारनायके को 4 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है. फिक्सिंग को लेकर क्रिकेट में लगातार सवाल उठते रहे हैं और आईसीसी भी फिक्सिंग को लेकर सख्त हो गई है.

अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के लिए चुने गए ये 15 खिलाड़ी

अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप की शुरुआत 27 जनवरी से होने वाली है. ऐसे में भारतीय अंडर-19 टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने मंगलवार को कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती 30 संभावित खिलाड़ियों में से 15 खिलाड़ियों को चुनने की थी.

बांग्लादेश की मेजबानी में होने वाले अंडर-19 विश्व कप में भारत का पहला मुकाबला आयरलैंड से 28 जनवरी को होना है. आस्ट्रेलिया ने इस विश्व कप में से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद आईसीसी ने आयरलैंड को इस विश्व कप में शामिल किया.

द्रविड़ ने बांग्लादेश रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, 'मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती 30 संभावित खिलाड़ियों में से सर्वश्रेष्ठ 15 खिलाड़ियों को चुनने की थी. सारे ही खिलाड़ी प्रतिभाशाली हैं और उनमें किसी को बाहर रखना मेरे लिए काफी मुश्किल था. हमने खिलाड़ियों को देखा और उसके बाद अंतिम 15 की घोषणा की.' उन्होंने कहा, 'मैंने खिलाड़ियों को उनका स्वाभविक खेल खेलने की बात कही थी. हमारे लिए फायदे की बात यह है कि सभी खिलाड़ी लंबे शॉट्स खेल सकते हैं.'

विश्व कप की तैयारियों के सवाल का जबाव देते हुए राहुल ने कहा कि बल्लेबाज, गेंदबाज, और हरफनमौला खिलाड़ी सभी अच्छे फॉर्म में हैं. झारखंड के विकेटकीपर बल्लेबाज इशान किशन को टीम का कप्तान बनाया गया है. द्रविड़ ने किशन की तारीफ करते हुए कहा, 'हमने कई कप्तानों को अजमाया, जिनमें सबसे बेहतर किशन साबित हुए.'

द्रविड़ ने कहा कि टीम के उप-कप्तान ऋषभ पंत विकेटकीपर की जिम्मेदारी निभाएंगे और किशन कप्तानी पर ध्यान देंगे. द्रविड़ ने कहा कि यह विश्व कप खिलाड़ियों के मुख्य टीम में शामिल होने के लक्ष्य का एक हिस्सा है.

उन्होंने कहा, 'यह विश्व कप युवा खिलाड़ियों के लिए अपने आप को साबित करने का एक मौका है. खिलाड़ियों का पहला लक्ष्य मुख्य टीम में शामिल होने का होना चाहिए. यह टूर्नामेंट उन्हें यह अवसर प्रदान करता है.'

बरिंदर के शॉट से घायल अंपायर वार्ड ने शुरू की नई परंपरा

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का चौथा वनडे जब कैनबरा में शुरू हुआ, तो मैच की शुरुआत में बल्लेबाज डेविड वॉर्नर और एरॉन फिंच के अलावा एक और शख्स था, जो मैदान पर हेलमेट पहने खड़ा था. वो थे अंपायर जॉन वार्ड. वार्ड के इस कदम के साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हेलमेट पहनकर अंपायरिंग की परंपरा भी शुरू हो गई.

वार्ड के इस फैसले से हैरानी नहीं हुई, क्योंकि कुछ ही महीने पहले जब वो भारत के घरेलू क्रिकेट में एक मैच में अंपायरिंग कर रहे थे, तो एक गेंद उनके सिर पर लगी थी और उन्हें कुछ दिनों तक अस्पताल में बिताने पड़े थे.

पंजाब और तमिलनाडु के बीच खेले गए इस मैच में वार्ड के सिर के पिछले हिस्से में गेंद लगी थी और वे दर्द से कराहते हुए गिर पड़े थे. दरअसल पंजाब के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज बरिंदर सरां उस समय बैटिंग कर रहे थे. उनका ही एक करारा शॉट वार्ड के सिर में जा लगा था. वॉर्ड पिछले कुछ दिनों से बिग बैश मुकाबले में हेलमेट पहनकर अंपायरिंग का अभ्यास भी कर रहे थे.

IPL: पुणे ने धोनी के हाथ सौंपी टीम की कमान

हाल ही में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के नौवें संस्करण में शामिल दो नई टीमें पुणे और राजकोट ने ड्रॉफ्ट के जरिए चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ा था और अब राइसिंग पुणे सुपरजिआंट्स ने एक बड़ा ऐलान करते हुए भारतीय टीम के वनडे और टी20 कप्तान एमएस धोनी को टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया है.

सोमवार को राइसिंग पुणे सुपरजिआंट्स टीम के मालिक संजीव गोयनका ने ये बड़ा ऐलान करते हुए खुशी ज़ाहिर की. संजीव गोयनका ने कहा, मैं साल 2016 में बतौर कप्तान धोनी का पुणे की टीम में स्वागत करता हूं.”

15 दिसंबर को जहां पुणे की टीम ने पहली बोली लगाते हुए कप्तान धोनी, अजिंक्ये रहाणे, आर अश्विन, स्टीव स्मिथ और दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज़ फाफ डू प्लेसी को चुना था.

वहीं राजकोट की टीम ने सुरेश रैना, रविन्द्र जडेजा, ब्रैंडन मैक्कुलम, जेम्स फॉक्नर और ड्वेन ब्रावो को चुना था. जहां पुणे ने धोनी को बतौर अपने पहले खिलाड़ी 12.5 करोड़ रूपये की कीमत में खरीदा था. वहीं राजकोट ने रैना को अपना पहला खिलाड़ी चुना था. जिसके बाद रैना ने ट्वीट कर कहा था,‘‘ राजकोट के लिये आईपीएल में खेलने को लेकर रोमांचित हूं. नये साथी खिलाड़ियों और गुजरात के लोगों के सहयोग का इंतजार है.’’

धोनी के बाद अजिंक्ये रहाणे को पुणे ने अपना दूसरा खिलाड़ी बनाते हुए 9.5 करोड़ की बोली लगाई. वहीं राजकोट ने रविन्द्र जडेजा को अपनी दूसरी पसंद बनाया है. रहाणे-जडेजा के बाद पुणे ने अश्विन तो राजकोट ने न्यूज़ीलैंड के कप्तान और चेन्नई के विस्फोटक बल्लेबाज़ को अपना तीसरी पसंद बनाते हुए 7.5 करोड़ में खरीदा है.

बतौर चौथी पसंद पुणे ने ऑस्ट्रेलियाई और राजस्थान रॉयल्स के कप्तान स्टीव स्मिथ को 5.5 करोड़ में वहीं राजकोट ने चौथी पसंद के रूप में ऑस्ट्रेलियाई ऑल-राउंडर जेम्स फॉक्नर को खरीदा. आखिरी और पांचवी खिलाड़ी के रूप में पुणे ने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज़ फाफ डू प्लेसी को वहीं राजकोट ने ड्वेन ब्रावो को 4 करोड़ में खरीदा.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह निविदा प्रणाली के जरिए कोलकाता के कारोबारी संजीव गोयनका की कंपनी ‘न्यू राइजिंग’ ने जहां पुणे फ्रेंचाइजी के अधिकार हासिल किए, वहीं स्मार्टफोन निर्माता इंटेक्स ने राजकोट फ्रेंचाइजी का मालिकाना हासिल किया.यह दोनों नई टीमें आईपीएल-9/10 में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स की जगह लेंगी, जिन्हें आईपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में दो वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया है. सुपर किंग्स और रॉयल्स में रहे 50 खिलाड़ियों में से ड्राफ्टिंग में आज कुल 10 खिलाड़ियों का चयन हुआ. पुणे और राजकोट दोनों टीमें पांच-पांच खिलाड़ियों का चयन किया. सबसे कम बोली लगाने वाली टीम पुणे को आज सबसे पहला खिलाड़ी चुनने का मौका मिला. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में खेली जा रही 5 वनडे मैचों की सीरीज़ की कप्तानी भी धोनी ही कर रहे हैं. जिसमें भारतीय टीम 3-0 से सीरीज़ गंवा चुकी है.

टेनिस में मैच फिक्सिंग: जोकोविक को मिला था ऑफर

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टेनिस में पिछले 10 साल में फिक्सिंग के कई मामले सामने आए, लेकिन किसी पर कोई एक्शन नहीं लिया गया. अब वर्ल्ड नंबर वन नोवाक जोकोविक ने फिक्सिंग पर एक तरह से मुहर लगाते हुए कहा है कि उन्हें भी फिक्सिंग के लिए अप्रोच किया गया था.

जोकोविक के मुताबिक, कॅरियर की शुरुआत में उन्हें भी मैच फिक्सिंग का ऑफर मिला था. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जोकोविक को मैच फिक्सिंग के लिए 2 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपए) ऑफर किए गए थे. उन्होंने कहा कि “मुझे डायरेक्ट अप्रोच नहीं किया गया. 2007 में मेरे साथ जो लोग काम करते थे उनके जरिए अप्रोच किया गया. मैंने फौरन इनकार कर दिया. वो लोग मेरे पास आना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका.”

 “पिछले छह या सात साल में मैंने फिर कभी फिक्सिंग के बारे में नहीं सुना. कुछ लोगों के बारे में बातें होती रही हैं लेकिन इनसे उन्हीं लोगों को निपटना है. इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता.” “इस अप्रोच से मैं कुछ डर गया था. क्योंकि मैं इसे किसी गलत काम में शामिल नहीं होना चाहता था.”

किसने किया मैच फिक्सिंग का दावा

बीबीसी और बजफीड ने रविवार शाम को मैच फिक्सिंग से जुड़ी सीक्रेट फाइलें देखने का दावा किया. दावे के मुताबिक, बीते 10 साल में 50 टॉप रैंकिंग प्लेयर्स में 16 ऐसे हैं, जो कथित तौर पर मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हैं. बीबीसी के मुताबिक, इन 16 प्लेयर्स ने कई मैच पैसे लेकर हारे. इसकी जानकारी टेनिस इंटेग्रिटी यूनिट (टीआईयू) को भी है.

रिपोर्ट में कहा गया है, जिन प्लेयर्स पर आरोप लगे, उनमें ग्रैंड स्लैम जीतने वाले भी शामिल हैं. लेकिन इनमें से किसी को भी खेलने से रोका नहीं गया. यह रिपोर्ट इसलिए और अहम हो जाती है, क्योंकि सोमवार से ही ग्रैंड स्लैम सीजन का पहला टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलियन ओपन शुरू हो रहा है.

और क्या है दावा?

रिपोर्ट के मुताबिक, टेनिस की गवर्निंग बॉडी एटीपी ने 2007 में इस मामले की जांच भी की थी. एटीपी की जांच में पता लगा कि मैच फिक्सिंग सिंडिकेट रूस, इटली और सिसली से ऑपरेट होता है. इसमें हजारों लाखों डॉलर का हेर-फेर होता है. रिपोर्ट के मुताबिक, विम्बलडन के भी तीन मैच फिक्स किए जा चुके हैं. हालांकि, इनकी डिटेल नहीं दी गई है. 2008 में एटीपी ने 28 प्लेयर्स की जांच के ऑर्डर दिए थे, लेकिन इसके बाद कोई एक्शन नहीं लिया गया. 2009 में एटीपी ने एंटी-करप्शन कोड बनाया, लेकिन लीगल एडवाइस लेने के बाद पुराने मामलों को दबा दिया गया.

कैसे होती थी मैच फिक्सिंग?

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े टूर्नामेंट्स के दौरान मैच फिक्सिंग होटल रूम में होती थी. प्लेयर्स को 50 हजार डॉलर तक दिए गए. एटीपी चीफ क्रिस करमोड आरोपों को गलत बताते हुए कहते हैं, "मैं भरोसा दिला सकता हूं कि टेनिस को हल्के में नहीं लिया जाएगा."

टीम इंडिया में शामिल हुए जसप्रीत बुमराह

गुजरात के क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है. जसप्रीत टीम में चोटिल बॉलर मोहम्मद शमी की जगह लेंगे. बीसीसीआई की सिलेक्शन कमेटी ने सोमवार को ट्वीट के जरिए इसकी घोषणा की.

जसप्रीत सिंह के अलावा आशीष नेहरा, युवराज सिंह, सुरेश रैना, हरभजन सिंह और हार्दिक पंड्या भी टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का हिस्सा है. ये सभी खिलाड़ी 26 जनवरी से शुरू हो रही सीरीज के लिए 22 जनवरी को रवाना होंगे. युवराज लंबे गैप के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी कर रहे हैं.

डीडीसीए एपिसोड

नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में सब से ज्यादा बोलने वाले मंत्री अरुण जेटली को आम आदमी पार्टी ने बुरी तरह घेर लिया है. दिल्ली के क्रिकेट स्टेडियम को ले कर जो रस्साकशी चल रही है उस में अरुण जेटली सभी चैनलों, अखबारों को इंटरव्यू देने में लगे जैसे अभिनेता अभिनेत्री अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए देते रहते हैं. मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर में एक अफसर के केबिन में डाले गए छापे से शुरू हुआ था. सीबीआई चाहे जो कहे, एक मुख्यमंत्री के दफ्तर पर छापा मारा जाए तो सरकार व मुख्यमंत्री की छवि तो खराब होगी ही. शासन हो या व्यापार, सैकड़ों कागज ऐसे मिल जाएंगे जो पहली बार में गलत लगेंगे चाहे बाद में उन का औचित्य सिद्ध किया जा सके.

मायावती, मुलायम सिंह, जयललिता, शरद पवार जैसे नेता तो सीबीआई जांच से घबरा जाते हैं पर अरविंद केजरीवाल दूसरी मिट्टी के बने निकले. उन्होंने दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे अरुण जेटली के अध्यक्षीय काल में बने स्टेडियम की मिट्टी की परतें उधेड़नी शुरू कर दीं. नतीजतन, नरेंद्र मोदी के इकलौते मंत्री, जिन के पास वकालत से बहुत अच्छी, शुद्ध आय वर्षों से चली आ रही थी, खुद कठघरे में खड़े हो गए हैं.

यह मामला आंधी की तरह है जो 2-4 दिन में कुछ तोड़फोड़ कर ठंडा पड़ जाएगा जैसा मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह के व्यापमं घोटाले के मामले में हुआ या जैसा ललित मोदी के राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे या विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संबंधों को ले कर हुआ. अरुण जेटली चूंकि नरेंद्र मोदी के लिए आवश्यक हैं, वे आतेजाते तो कहीं नहीं पर उन्हें सफाई देने को मजबूर होना पड़ रहा है और इस का अपरोक्ष लाभ कांगे्रस को मिल रहा है जिस का नैशनल हैराल्ड का मामला फीका पड़ गया.

भाजपा इस मामले से इतनी चिंतित हो गई कि भाजपा सांसद कीर्ति आजाद, जो खुद क्रिकेटर रहे हैं और जिन्होंने डीडीसीए कांड का परदाफाश करने का बीड़ा उठा रखा है, को अमित शाह समझाने के लिए बुलाने को मजबूर हो गए.

डेढ़ साल में भारतीय जनता पार्टी को समझ आ गया है कि शासन चलाने में भ्रष्ट आचरण तो अपनाना ही होगा क्योंकि उलझे मामलों को हल करने के शौर्टकट अपनाने ही पड़ते हैं.

इस सारे मामले में कभी किसी पर दोष साबित होंगे, ऐसा लगता नहीं है. जो पहले दिखता है, वह साबित करना असंभव सा है. अरुण जेटली पर आरोप चाहे जितने लगें, न नरेंद्र मोदी उन्हें छोड़ने वाले हैं, न डीडीसीए. यह कांड यही साबित करेगा कि राजनीति का मतलब हमारे देश में एक कांड से दूसरे कांड में जाना है, एक निर्माण से दूसरे निर्माण में नहीं.

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