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केवल डर से डरने की जरूरत है

क्या कभी आप ने बच्चों, किशोरों, वयस्कों और बुजुर्गों तक के गले में ताबीज, काले धागे और विभिन्न देवीदेवताओं की तसवीर वाले लौकेट पहने जाने के पीछे के मनोविज्ञान और धार्मिक पाखंडों के बारे में संजीदगी से सोचा है? साथ ही क्या कभी इस प्रकार की मानवीय फितरत को पढ़ने की कोशिश की है?

इस में कोई शक नहीं कि किसी धर्म विशेष और व्यक्तिगत आस्था को दर्शाने वाले ये प्रतीक चिह्न व्यक्ति के जीवन और उस की सोच के ढंग का आईना होते हैं, जिन में उस व्यक्ति का मन और मस्तिष्क साफसाफ परिलक्षित होता है, लेकिन इस से परे इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता कि सनातन से मानव जीवन को प्रभावित करते ये सभी धार्मिक पाखंड हमारे दिल में गहरे बैठे उस डर का परिणाम होते हैं जो वास्तविक जीवन में कोई वजूद नहीं रखते और जिन की प्रामाणिकता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता.

धरती पर सभ्यता के आगाज से ही मानव कई प्रकार के भय से ग्रसित होता आ रहा है. ये मानवीय भय कई प्रकार के होते हैं, जैसे इंसान अंधेरे से डरता है, परीक्षा के परिणाम से उसे भय लगता है, रोग से भय, मृत्यु से भय, ऊंचाई से गिरने का भय, पराए तो पराए अपनों से भय, भूख और गरीबी से भय और न जाने किसकिस तरह के भय से इंसान ग्रसित नहीं होते हैं. कभीकभी तो इंसान को रोशनी से भी डर लगता है. सभी तरह के भय से बचने या मन को झूठी दिलासा देने के लिए धार्मिक पाखंड या अंधविश्वास एक छद्म रक्षाकवच का कार्य करता है और व्यक्ति खुद को आने वाले संकटों से महफूज महसूस करता है.

महान विचारक कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म जनता की अफीम होती है. सच पूछें तो यदि धर्म अफीम है तो धर्म से जुड़े विभिन्न पाखंड और दकियानूसी मान्यताएं एक नशे के रूप में काम करती हैं, जिस की रौ में इंसान जीवन की हर घटना को तर्क और विवेक की कसौटी पर नहीं तोल पाता और इस भंवर में अनियंत्रित रूप से फंसता जाता है.

अहम प्रश्न यह है कि आखिर धार्मिक पाखंडों और व्यक्तिगत आस्था के कवच के रूप में टोटकों और अंधविश्वासों के मकड़जाल से मुक्ति का रास्ता क्या है?

एक बात तो स्पष्ट है कि हमारी मानसिकता में गहराई तक जड़ें जमाए हुए इन अटूट अंधविश्वासों को एक झटके में नहीं तोड़ा जा सकता, लेकिन इन पर अनवरत प्रहार कर के इन की पकड़ को कमजोर करने में मदद मिल सकती है.

यह सत्य है कि पाखंडों और अन्य अंधविश्वासों की शुरुआत मन में बसे भय और अनिष्ट की आशंका के कारण होती है. लिहाजा, यह स्वाभाविक है कि हमें अपने दिल में बसे भय पर नियंत्रण की जरूरत है.

मन को करें नियंत्रित

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भय ही वह ताकत है, जिस से हमें डर लगता है. डर की शुरुआत मन से होती है और सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के मन में उथलपुथल कम होती है और भटकाव भी कम होता है.

संकीर्ण सोच वाला व्यक्ति अस्थिर चित्त और कमजोर मनोदशा वाला होता है. वह अनहोनी की आशंका से हकलान हो जाता है और खुद को सुरक्षित महसूस करने के लिए घबराहट में किसी भी प्रकार के पाखंड और जादूटोने का शिकार हो जाता है.

पाखंड का यह रास्ता जीवन की क्षणिक पलायन की स्थिति है जिस से हमें बच कर रहने की जरूरत है.

मन की कमजोरी एक घातक स्थिति है और इस पर नियंत्रण रखना जरूरी है. इस के लिए हमें अपनी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है, तभी हम अच्छा सोच कर आगे बढ़ पाएंगे.

नदी पर बने पुल के नीचे बहते पानी को क्या आप ने कभी गौर से देखा है? इस में निडर जीवन और मजबूत मन के अमूल्य दर्शन छिपे होते हैं. यह बहता पानी कभी भी लौट कर वापस अपनी जगह पर नहीं आता. यह हर समय नया होता है और हर समय अबाध गति से बहता रहता है, जिस से सीख लेने की जरूरत है.

इसी प्रकार जीवन में जो गुजर चुका है उस पर चिंता करने की जरूरत नहीं है. हमें पुल के नीचे बहने वाले पानी की तरह हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए. पुरानी घटनाओं के कटु अनुभवों से मन काफी मजबूत हो जाता है, फालतू बातों से मन विचलित नहीं होता.

प्रत्येक समस्या का समाधान है

यह माना जाता है कि जीवन में समस्याएं 2 तरह की होती हैं. एक प्रकार ऐसा होता है जिस का कोई समाधान नहीं होता. इसलिए ऐसी समस्याओं के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होती.

दूसरी समस्याएं प्रकृति की होती हैं जिन का कोई न कोई समाधान जरूर होता है. लिहाजा, ऐसी समस्याओं के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है. इन समस्याओं से घिरने की दशा में इंसान को चिंतित और भयभीत होने की कतई आवश्यकता नहीं है.

जीवन को इस प्रकार जीने के सलीके को यदि अपना लिया जाए तो मानव किसी भी प्रकार के भय से ग्रस्त नहीं होता और न ही वह किसी भय के निवारण और समस्या के समाधान के लिए किसी पाखंड और टोटके के झूठे सहारे की तलाश करता है.

सब के अंदर छिपा है एक मोगली

भय के बारे में एक छोटी और रोचक कहानी है. एक गांव के लोग जंगल से भटक कर आए एक शेर के आतंक से काफी परेशान थे. बड़ेबड़े सूरमा भी उस शेर के पास जाने से डरते थे.

गांव का एक छोटा सा बालक संयोग से एक दिन उस शेर के पास जा कर बड़े इतमीनान से बैठा हुआ था. ग्रामीणों ने जब इस हैरतअंगेज घटना को देखा तो वे दहशत में आ गए. आननफानन में ग्रामीणों को उस बच्चे को शेर के पास से दूर हटाने में सफलता मिल गई.

जब वह बच्चा उस शेर के पास से लौट कर आया तो ग्रामीणों ने उसे बहुत डांटा, ‘‘बेवकूफ हो तुम… अकल घास चरने गई है तुम्हारी? शेर से डर नहीं लगता है तुम्हें? वह तुम्हें कच्चा खा जाता…’’

‘‘यह डर क्या होता है? मेरी मां ने तो इस बारे में आज तक मुझे कुछ नहीं बताया. फिर मैं यह कैसे जान पाऊंगा कि डर क्या होता है?’’ बच्चे ने बिना भय जवाब दिया.

सच में डर मन की अवस्था होता है. यह हमारी पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक संस्कारों से भी प्रभावित होता है. यदि हम अपने बच्चों को डराना बंद कर दें, उन्हें संकटों से लड़ना और जूझना सिखाएं, विकट परिस्थितियों में भी अपना धैर्य टूटने न देने की कला में प्रशिक्षित करें और मोगली जैसा साहसी और निडर बनाएं, तो कोई शक नहीं कि आने वाले दशकों में लगभग 8 बिलियन की आबादी की यह धरती कई प्रकार के धार्मिक पाखंडों और अंधविश्वासों के अंधेरे से स्वत: मुक्त हो जाएगी.

 

बाघ के शिकार की कहानी वाली फिल्म को मिली सेंसर की हरी झंडी

पूरी दुनिया में बाघ लुप्त होती प्रजाति में शुमार है. देश में सन 1900 में एक लाख बाघ थे, परंतु 2018 तक केवल 2800 बाघ रह गए हैं. हाल में बाघिन अवनि (टी1) को शार्प शूटर असगर अली के पुत्र नवाब शफत अली ने महाराष्ट्र के यवतमाल स्थित बोराटी के जंगल में गोली मार दिए जाने का मामला सुर्खियों में है. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी समेत देश के वन्य प्राणियों को संरक्षण तथा सुरक्षा से जुड़े संगठनों ने इस हत्या पर गहरी नाराजगी जताई है. ऐसे में जब यह मामला राजनीतिक रूप से गर्म है, सेंसर बोर्ड ने बाघ के शिकार कथानक वाली लेखक निर्देशक रवि बुले की फिल्म ‘आखेट’ को हरी झंडी दे दी है.

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मुंबई में रहने वाले फिल्म पत्रकार रवि बुले की यह पहली फिल्म है. ‘आखेट’ एक पुराने रसूसदार-रईस परिवार के व्यक्ति, नेपाल सिंह की कहानी है, जिसके अमीर पुर्वजों ने सैकड़ों बाघों का शिकार किया था. नेपाल सिंह को दुख है कि शिकारियों के खानदान में पैदा होने के बाजवूद वह आज तक बाघ का शिकार नहीं कर पाया. अतः वह एक दिन बाघ के शिकार का फैसला करते हुए जंगल को निकल पड़ता है. फिल्म का निर्माण आशुतोष पाठक ने किया है.

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आखेट की शूटिंग इस साल मार्च में झारखंड के पलामू स्थित घने जंगलों में की गई. रवि बुले ने बताया कि ‘आखेट’ बाघ के शिकार और इसके पेशे से जुड़े लोगों की जिंदगी के रहस्यों से पर्दे उठाती है. यह उन लोगों की मानसिकता को भी सामने लाती है जो शिकार को खेल समझते हैं. उन्होंने कहा कि फिल्म बाघ से जुड़े कई रोचक तथ्यों को सामने लाने के साथ अंततः एक सकारात्मक संदेश देती है.

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क्या फिल्म में बाघ का शिकार दिखाया गया है? इस सवाल का जवाब देते हुए रवि ने बताया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को प्रदर्शन की अनुमति दे दी है और इस सवाल का जवाब फिल्म देखकर ही मिलेगा. रवि बुले ने कहा कि दर्शकों को यह फिल्म जंगल, वनस्पति और बाघ के साथ मनुष्य के रिश्ते को नए नजरिये से देखना सिखाएगी. एपी मूव्हीटोन्स बैनर तले बनी फिल्म ‘आखेट’ में आशुतोष पाठक, नरोत्तम बेन और तनिमा भट्टाचार्य मुख्य भूमिका में हैं. संगीत डा. विजय कपूर का है और गीत डा. अनुपम ओझा ने लिखे हैं. यह फिल्म कोलकाता में रहने वाले हिंदी के चर्चित युवा लेखक कुणाल सिंह की कहानी ‘आखेट’ पर आधारित है.

अंगूरी भाभी बनीं एमपी की स्टेट आईकौन, बतायेंगी वोट डालने के फायदे

एक टीवी के हास्य धारावाहिक “भाभी जी घर पर हैं” में अंगूरी भाभी का रोल निभाने वाली शुभांगी अत्रे मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं. इस धारावाहिक में वे मनमोहन तिवारी की पत्नी की भूमिका में हैं जो सीधी सादी है और उसका तकिया कलाम “सही पकड़े हैं” अब हर किसी की जुबां पर चढ़ चुका है. शुभांगी इस सीरियल में भले ही उनके पड़ोसी आशिक विभु यानि विभूति नारायण मिश्रा द्वारा बौड़म कही जाती हों पर रियल लाइफ में वे काफी होनहार और प्रतिभाशाली हैं. संगीत और खाना पकाने की शौकीन शुभांगी ने एमबीए किया है.

शुभांगी इन दिनों एक नई भूमिका में भी काफी लोकप्रिय हो रही हैं. वे मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता से वोट डालने की अपील करती नजर आ रहीं हैं. उन्हें मध्यप्रदेश सरकार और प्रदेश के मुख्य निर्वाचन कार्यालय द्वारा स्टेट आईकान मनोनीत किया गया है. एक वीडियो में शुभांगी अंगूरी भाभी बनकर ही लोगों में जागरूकता फैलाती उन्हें वोट और लोकतन्त्र का महत्व बताती मतदान के लिए प्रोत्साहित करती नजर आ रही हैं. उनका यह वीडियो भी खूब पसंद और वायरल किया जा रहा है, खासतौर से सही पकड़े हैं के बाद जब वे हाय दइया बोलती हैं तो दर्शक वोट डालने के बारे में गंभीरता से सोचने मजबूर तो हो ही जाता है.

शुभांगी मध्यप्रदेश के कई शहरों में जाकर भी लोगों से वोट डालने की अपील करेंगी और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भी उनकी यह भूमिका सरकार जारी रखेगी. इस मुहिम को लेकर उत्साहित शुभांगी बताती हैं कि मतदान का महत्व बहुत कम है और अभी भी कई लोग वोट करने नहीं जाते. स्टेट आइकान चुने जाने पर वह काफी खुश हैं और चाहती हैं कि लोगों को मतदान प्रक्रिया के बारे में जानकारियां दी जाएं. मौडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शुभांगी का अंगूरी भाभी वाला रोल कितना लोकप्रिय है यह बताने की जरूरत नहीं.

यह सुखद बात है कि निर्वाचन आयोग और सरकार छोटे लेकिन लोकप्रिय कलाकारों का सहयोग  और सेवाएं ले रहा है जिनकी पकड़ और पहुंच समाज के निचले तबके में भी है. एक बेटी की मां  शुभांगी की शादी पियूष पूरे से हुई थी. शुभांगी के पास अब पैसों की कमी नहीं लेकिन उनमें सीखने लायक कई बातें हैं. मुंबई में वह सेट पर 40 मिनट पैदल और लोकल ट्रेन से जाती हैं. अलावा इसके कसरत की अहमियत समझने वाली शुभांगी घर के ज्यादा से ज्यादा काम खुद करना पसंद करती हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि उनकी वोट डालने की अपील को कितने ज्यादा लोग सही पकड़ते हैं.

नौ मिनट की लघु फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ ने दिलाया नारी को सम्मान

राजस्थान के तमाम ग्रामीण अंचलों में पानी की कमी के चलते जन जीवन से सामाजिकता भी प्रभावित होती है. उसी पर पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने जयपुर निवासी धर्मेंद्र उपाध्याय ने एक लघु फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ का निर्माण किया है, जिसे काफी सराहा जा रहा है.

राजस्थान की एक ग्रामीण नारी जो पानी लेकर लौट रही है, रास्ते में वह छेड़खानी का शिकार हो जाती है. लेकिन घर पहुंचते ही उसके लिए नया संघर्ष शुरू हो जाता है. नारी के इसी संघर्ष को ‘‘श्री राधा गोविंद फिल्मस’’ के बैनर तले निर्मित नौ मिनट की अवधि वाली राजस्थानी भाषा की लघु फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ में चित्रित किया गया है. फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में मुद्रिका जाकियावाल, सिकंदर चैहान, मेघी देवी कृष्णा और आर्ची कुश हैं. फिल्म के कैमरामैन धरम रौक तथा सह निर्माता संजय मलिक हैं.

राजस्थानी भाषा की फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ को हाल ही दिल्ली में आयोजित ‘‘न्यू दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह’’ में विशेष सराहनीय फिल्म की श्रेणी में सम्मानित किया गया. इतना ही नही पिछले दिनों रवींद्र मंच जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान सिने अवाार्ड’ में भी ‘पानी रे पानी’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म से पुरस्कृत किया गया.

संदेश परक फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ के निर्देशक धर्मेन्द्र उपाध्याय अपनी इस फिल्म की चर्चा करते हुए कहते हैं- ‘‘राजस्थान में पानी की परेशानी के चलते ग्रामीण जनजीवन में पानी का महत्व अमृत के समान है. इस फिल्म को दिमाग में रचते समय मैने सामाजिक सरोकार और पानी की उपयोगिता पर ही खास ध्यान दिया.’’

लेखक व निर्देशक धर्मेद उपाध्याय ने अपनी इस राजस्थानी लघु फिल्म को इसी वर्ष गर्मियों के मौसम में आमेर में नारदपुरा के आसपास  फिल्माया है.

आरएसएस शाखा “बैन” पर हुआ बवाल, बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा

अपने घोषणा पत्र को वचन पत्र नाम देने वाली कांग्रेस ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात क्या कही राज्य की सियासत में मानो भूचाल आ गया. इस भूचाल जिससे भगवा खेमा तिलमिलाया हुआ है से लोगों को लगा की मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं, नहीं तो चुनाव में वो लुत्फ नहीं आ रहा था जिसकी उम्मीद आम लोग करते हैं. आमतौर पर घोषणा पत्र बेहद उबाऊ होते हैं बिलकुल बैंक कर्ज के कागजों की तरह जिन्हें कोई पढ़ता ही नहीं बस मोटे तौर पर समझ लेता है कि जो राशि ली है उसके एवज में कितना और कैसे चुकाना है.

कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में किसानों, युवाओं, महिलाओं, छात्रों, व्यापारियों और कर्मचारियों से क्या क्या लोक लुभावन वादे कर डाले इन्हें भी कोई नहीं पढ़ता लेकिन जैसे ही आरएसएस पर प्रतिबंध के उसके वचन पर बवाल मचा तो लोग वचनपत्र ढूंढ ढूंढ कर पढ़ने लगे. कांग्रेसी कूटनीतिकारों की यह पहली कामयाबी थी कि इस बहाने उन्होने लोगों को अपने वचनपत्र पर निगाह डालने मजबूर कर दिया .

इस वचनपत्र में पूरे आत्मविश्वास से कहा यह गया है कि कांग्रेस सरकारी इमारतों में आरएसएस की शाखाएं नहीं चलने देगी और शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को शाखाओं में छूट सम्वन्धी आदेश रद्द करेगी.

बात छोटी सी ही है जिसे बड़ा बनाने का जिम्मा उठाते भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पलटवार करते हुये कहा, कांग्रेस ने संघ पर प्रतिबंध लगाने का वचन दिया है, अच्छा होता अगर कांग्रेस सिमी जैसे आतंकवादी संगठनों पर रोक लगाती. लेकिन वे वहां क्यों जाएंगे, आपकी राजनीति तुष्टिकरण और वोट बैंक की जो है. कांग्रेस को श्राप सा देते हुये विजयवर्गीय ने कहा, जनता कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी अपना एतराज जताते हुये कहा, ऐसा लगता है कि कांग्रेस का इन दिनों एक ही एजेंडा है कि मंदिर नहीं बनने देंगे और शाखाएं नहीं चलने देंगे. राहुल और सोनिया गांधी नहीं चाहते कि अयोध्या में राम मंदिर बने. आरएसएस को राजनैतिक संगठन बताने पर राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि आरएसएस सामाजिक संगठन है.

इस वचनपत्र के अनूठे वचन यानि कांग्रेस के दुस्साहस पर देश भर से जो विभिन्न प्रतिक्रियाएं आईं उनमें से एक हरियाणा के मंत्री अनिल बिज की भी है कि कांग्रेस की मति भ्रष्ट हो गई है. अपने मेनिफेस्टो में देशभक्त आरएसएस के शाखा लगाने पर वह रोक की बात करती है और देशद्रोही नक्सलवादियों को क्रांतिकारी कहती है.

अव्वल तो आरएसएस की हकीकत बयां करने भाजपा नेताओं के ये बयान ही काफी हैं जिनमें जाने अंजाने में खुद उन्होने ही आरएसएस की तुलना नक्सलवादियों और सिमी यानि इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया से कर डाली है. मध्यप्रदेश की राजनीति के नजरिए से देखें तो इस वचन के अलग सियासी माने भी हैं. कांग्रेस ने राज्य में संघ के बढ़ते दबदबे और दखल को उधेड़ते न केवल मुस्लिम, ईसाई वोटों को हिफाजत की गारंटी दी है बल्कि निचले तबके के हिंदुओं को भी भरोसा दिलाया है कि कांग्रेस वर्ण व्यवस्था के खिलाफ थी और आज भी है.

लाख टके की बात यह भी है कि आखिर क्या वजह थी जो कांग्रेस ने जानबूझकर वचनपत्र में आरएसएस को निशाने पर लेते ऊंची जाति वाले हिंदुओं को नाराज करने का जोखिम उठाना घाटे का सौदा नहीं समझा. दरअसल में कांग्रेस अपने साफ्ट हिन्दुत्व के एजेंडे पर उतारू हो आई है जिसके तहत राहुल गांधी मंदिर जाते हैं,  खुद को ब्राह्मण वह भी जनेऊधारी बताते हैं और खूब पूजा पाठ करते हैं. कांग्रेस खुद को पूरी तरह हिन्दू और हिन्दुत्व विरोधी भी नहीं दिखाना चाहती इसलिए वह गाय  गौ मूत्र और गौ संरंक्षण का भी ढिंढोरा इस चुनाव में पीट रही है .

भाजपा के हार्ड हिन्दुत्व से लोग वाकई त्रस्त हो चले हैं जो अब फिर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का राग अलाप रही है. इस मसले पर खुद हिन्दू अब दो फाड़ होते जा रहे हैं. एक वर्ग की दलील है कि मंदिर शांति से और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद बने तो दूसरा वर्ग कह रहा है कि मंदिर निर्माण में अब किसी की नहीं सुननी चाहिए . जाहिर है भाजपा और आरएसएस अभी बारीकी से इन दोनों वर्गों की प्रतिक्रियाएं देख रहे हैं जिससे आगे की रणनीति बनाई जा सके लेकिन यह सभी जानते हैं कि मंदिर का जिन्न दोबारा आरएसएस ने ही बोतल से बाहर निकाला है और उसका मकसद पहले हालिया विधानसभाओं और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका असर देखना है.

दूसरे मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में जिस तेजी से आरएसएस का दखल बढ़ा है उससे वे कर्मचारी अधिकारी परेशान हैं जिन्हें उससे कोई वास्ता नहीं. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की आरएसएस के प्रति निष्ठा कभी किसी सबूत की मोहताज नहीं रही नतीजतन उनके तीसरे कार्यकाल में आरएसएस समर्थित सरकारी मुलाजिम खूब मौज कर रहे हैं उनकी पोस्टिंग और तबादले मनचाही जगह होते हैं जिसका खामियाजा उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है जिनकी कोई पहुंच या पकड़ नहीं है.

पर तीसरी बात ज्यादा अहम है कि सरकारी भवनों में आरएसएस की शाखाएं क्यों लगती हैं और इसका क्या प्रभाव पड़ता है. सरकारी कर्मचारियों को शाखाओं में जाने की छूट क्यों दी गई है. अघोषित तौर पर तो आरएसएस ही सरकार हांकता है लेकिन घोषित तौर पर अगर कांग्रेस ऐसा होने पर रोक लगाने की बात कर रही है तो तय है उसे इसमें अपना राजनैतिक फायदा कहीं न कहीं दिख रहा है जिसे वह छोड़ना नहीं चाहती.

जिस तरह राम मंदिर निर्माण का मुद्दा भगवा प्रयोगशाला में शोध और अनुसंधान का विषय बना हुआ है उसी तरह एक छोटा सा प्रयोग कांग्रेस भी कर रही है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम को मध्यप्रदेश के कांग्रेसी वचनपत्र में कोई खोट नजर नहीं आती. उन्होने कहा, आरएसएस एक राजनैतिक संस्था है इसलिए उसकी सरकारी इमारतों में लगने वाली शाखाओं को बंद करना कोई गलत बात नहीं. बक़ौल चिदंबरम सरकारी कर्मचारी जब तक नौकरी कर रहे हैं तब तक उन्हें खुले तौर पर किसी भी राजनैतिक दल के साथ नहीं जाना चाहिए.

तूल पकड़ते इस विवाद में संबित पात्रा जैसे भाजपा नेताओं की इस आपत्ति के कोई माने नहीं हैं कि आरएसएस राजनैतिक दल नहीं हैं वजह वह मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में खुलकर हिस्सा ले रहा है. आए दिन के अखबारी समाचार इस बात की पुष्टि भी करते हैं. भोपाल के एक प्रमुख दैनिक ने उसके सूत्रों के हवाले से 9 नवम्बर के अंक में स्पष्ट लिखा है कि संघ ने चुनावी मैदान संभाल लिया है और आरएसएस के विभाग प्रचारक योगेश शर्मा का भाजपा कार्यकर्ताओं की मीटिंग को सम्बोधित करना इसी की एक कड़ी है.

इस खबर के मुताबिक योगेश शर्मा ने नोटा से लेकर एससी एसटी एक्ट के चलते सवर्ण व पिछड़े वर्ग में छा रही नाराजी को दूर करने के कई मंत्र उदाहरणों के साथ भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिये. दिलचस्प लेकिन चिंताजनक बात यह भी इस खबर में है कि इस बार प्रत्येक बूथ पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ स्वसंसेवक भी रहेंगे. मतदान के दिन भी ये स्वसंसेवक 15 – 15 घरों में जाकर एससी एसटी एक्ट के कारण भाजपा से नाराज लोगों को नोटा का बटन न दबाने के लिए मनाएंगे .

भाजपा की इस चिंता और दहशत को कांग्रेस ने प्रतिबंध की बात कर और बढ़ा दिया है और आरएसएस की गैर राजनतिक इमेज के चिथड़े भी उड़ा दिये हैं. वैसे भी आरएसएस हर जगह कट्टर हिन्दुत्व फैलाता रहता है यह अगर राष्ट्र भक्ति या राष्ट्र प्रेम है तो देश संविधान और लोकतन्त्र के लिए घातक होकर पंडा पुजारीवाद को बढ़ावा और शह देने वाला ही है जिस पर प्रतिबंध की बात कर कांग्रेस ने कोई गुनाह नहीं किया है बल्कि अपने हितों को साधा है और सरकारी महकमों में पसरती धार्मिक और जातिगत छूआछूत पर लगाम कसने के ही बात की है. इस बाबत वह कुछ फीसदी सवर्ण वोटों का नुकसान उठाने का जोखिम भी मोल ले रही है जो कितना कामयाब या कारगर साबित होगा यह तो 11 दिसंबर को वोटों की गिनती के दिन दिखेगा.

महंगे फोन जेब पर भारी

आज फोन हमारे जीवन की जरूरत है. गांव हो या शहर फोन हमारे साथ हर वक्त रहता है. इस से जीवन आसान हो गया है. सब के पास फोन होने से हम घर के सभी सदस्यों, मित्रों तथा रिश्तेदारों से जुड़े रहते हैं. जब किसी स्थान पर बात करनासंभव न हो तो हम व्हाट्सऐप मैसेज द्वारा आसानी से बात कर सकते हैं. फोन के इस्तेमाल से हमारे समय, धन तथा ऐनर्जी की बचत होती है. उदाहरण के लिए बच्चों को होमवर्क पता करने के लिए मित्र के घर नहीं जाना पड़ता बल्कि व्हाट्सऐप द्वारा ही घर बैठेबैठे स्कूल का सारा होमवर्क पता चल जाता है.

किशोरकिशोरियां मनपसंद कपड़ों अथवा अन्य वस्तुओं का फोटो खींच कर एकदूसरे से पसंद करा लेते हैं. अब फोन केवल बात करने के लिए इस्तेमाल न हो कर, इंटरनैट के प्रयोग के लिए, मेल भेजने के लिए, फोटोग्राफी के लिए तथा अन्य कई प्रयोजनों के लिए भी इस्तेमाल होने लगा है.

लताजी की बेटी यूएसए में रहती है. उस के बेटे के जन्म पर लताजी वहां नहीं जा सकीं. उन की बेटी ने उन्हें बेटे के जन्म से ले कर नामकरण तक के सभी कार्यक्रमों के वीडियो भेज दिए तो उन्होंने यहां बैठेबैठे ही सब कुछ ऐंजौय कर लिया. मिस्टर आलम काफी बुजुर्ग हैं. वे बारबार डाक्टर के पास नहीं जा सकते इसलिए स्मार्टफोन के जरिए ही डाक्टर से वार्त्तालाप करते हैं. फोन के माध्यम से शौपिंग भी घर बैठेबैठे कर लेते हैं. उन्हें यह सब बहुत आसान लगता है.आज हमें भारी पर्स तथा कार्ड ले कर चलने की भी जरूरत नहीं. नैट बैंकिंग तथा पेटीएम जैसे ऐप्स के माध्यम से हम रुपयों का लेनदेन भी आसानी से कर सकते हैं.

कहने का तात्पर्य यह है कि एक छोटे से फोन में हमारी सारी दुनिया समाई हुई है और तो और हमें लाइब्रेरी जाने अथवा पुस्तकें खरीदने की भी आवश्यकता नहीं. अपने मनपसंद टीवी चैनल तथा फिल्में भी घर बैठे ही सुविधानुसार देखी जा सकती हैं.

आज स्मार्टफोन बच्चों से ले कर बूढ़ों तक सब की खास जरूरत बन गया है. इस की उपयोगिता तथा विशाल बाजार को देखते हुए विश्व की सैकड़ों कंपनियों ने ग्राहकों के लिए अनेक फीचर वाले सस्ते व महंगे स्मार्टफोन बाजार में उतारे हैं.

कंपनियां अपने मुनाफे के लिए अपने फोन के मौडल में दोचार महीने के भीतर ही अनेक परिवर्तन कर ग्राहकों को लुभाती रहती हैं. अपने पुराने मौडल को ही आधे से भी कम दाम पर ऐक्सचेंज औफर लाती रहती हैं. आज स्मार्टफोन 4-5 हजार रुपए से ले कर लाखों रुपयों तक में उपलब्ध हैं.

अकसर देखा गया है कि किशोर दिखावे के लिए नित नए फोन खरीदने की होड़ में लगे रहते हैं. वास्तव में गौर किया जाए तो इस दिखावे की दौड़ में शामिल न हो कर हमें अपने विवेक से काम लेना चाहिए. सभी को अपनी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ही फोन का चुनाव करना चाहिए. कोशिश यही करें कि महंगे फोन न खरीदें. युवा मेहनत से जो धन अर्जन कर रहे हैं उस का अधिकांश हिस्सा नएनए फोन खरीदने तथा उन का बिल चुकाने में ही खर्च कर देते हैं.

मोहित अभी ईको औनर्स करने के बाद एक प्राइवेट स्टार्टअप में डाटा एनलिस्ट के पद पर कार्यरत है.

उस के घर में उस के मातापिता तथा 2 छोटी बहनें हैं. पिता एक प्राइवेट कंपनी में 30 हजार रुपए मासिक की नौकरी करते हैं. उस के पास पहले ही एक फोन था. दोस्तों को दिखाने के चक्कर में उस ने पहली सैलरी मिलते ही 50 हजार रुपए का महंगा फोन खरीद लिया. सारे पैसे फोन पर लगा दिए और 10 दिन बाद ही औफिस आते वक्त उस का फोन कहीं खो गया. समझदारी इसी में थी कि मोहित अपना पुराना फोन ही इस्तेमाल करता और घर के अन्य जरूरी खर्चों में पिता की मदद करता. फोन पर पैसे खर्चना उस की जेब पर भारी पड़ा.

यह कहानी केवल मोहित की ही नहीं है बल्कि अधिकांश युवा छात्रछात्राएं अपनी कक्षा के अमीर बच्चों की देखादेखी अपने मातापिता को महंगे फोन दिलाने की जिद करते हैं और मातापिता भी उन्हें समझने में असमर्थ होते हैं. इतना ही नहीं, महंगे फोन को युवा ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करते बल्कि नया फोन लौंच होते ही अपने फोन की जगह नए फोन को देना चाहते हैं. ये महंगे फोन जेब पर भारी पड़ते हैं. यदि सोचसमझ कर चला जाए तो महंगे फोन रखने के शौक को बायबाय कर किशोर अपने धन को दूसरी जगह इस्तेमाल कर सकते हैं. जीवन के अगले पड़ाव में जब उन के पास धन नहीं रहेगा तो मानसिक अवसाद बढ़ता जाएगा. अत: जेब खाली करने वाले महंगे फोन रखने की आदत से सभी को बचना चाहिए.

नौन-स्मार्ट टीवी से ज्यादा बिक रहे स्मार्ट टीवी

स्मार्ट सिटी, स्मार्ट होम, स्मार्ट फोन, स्मार्ट प्रोफेशन, काम करने का स्मार्ट तरीका यानी सबकुछ स्मार्ट…..ऐसे में देशदुनिया के नज़ारों से रूबरू कराने वाला टेलीविजन भी तो स्मार्ट हो. कुछ यही सोच देशवासियों को घर में रखे टेलीविजन को बदलने को प्रेरित कर रही है. इतना ही नहीं, लोग अपने घरों के टेलीविजन बदलने भी लगे हैं. सिंपल टेलीविजन को बदल कर, बेच कर या दान कर लोग स्मार्ट टेलीविजन खरीद रहे हैं.

स्मार्ट टेलीविजन का मतलब दीवार से सटे सिंपल एलईडी टीवी से नहीं है. स्मार्ट का मतलब आजकल इन्टरनेट से हो गया है, यानी इन्टरनेट की सुविधा हो तो वह स्मार्ट टेलीविजन है.

टेलीविजन में अब स्मार्ट टेक्नोलौजी पसंद करने वालों की संख्या बढ़ रही है. गुजरे सितम्बर महीने में स्मार्ट टेलीविजन की बिक्री पहली बार नौन-समार्ट टेलीविजन से ज्यादा रही. मेट्रो शहरों व दूसरे बड़े शहरों में टेलीविजन की बिक्री में स्मार्ट टेलीविजन की हिस्सेदारी 65 फीसदी रही, जो पिछले वर्ष से इस अवधि में तकरीबन 45 फीसदी थी.

स्मार्ट टेलीविजन इन्टरनेट से सीधे कनेक्ट हो सकते हैं.  इन में ऐप्स होते हैं. ये स्ट्रीमिंग या नेटफ्लिक्स, एमेजोन प्राइम और हौटस्टार जैसी ओवर-द-टौप (ओटीटी) मीडिया सर्विसेज़ को भी सपोर्ट करते हैं.

एलजी, सोनी जैसी इलेक्ट्रौनिक्स कंपनियों और रिलायंस, क्रोमा जैसी रिटेल चेन्स से जुड़े प्रोफेशनल्स का कहना है कि ब्राडबैंड के सस्ता होने, स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ की बढ़ती लोकप्रियता और स्मार्ट व नौन-स्मार्ट टेलीविज़न की कीमतों के  बीच अंतर काफी कम हो जाने से स्मार्ट टेलीविज़न खरीदने वालों की संख्या बढ़ रही है.

औनलाइन मार्केटिंग कम्पनियां एमेजोन और फ्लिप्कार्ट द्वारा फेस्टिव सीजन सेल्स के दौरान भारी डिस्काउंट दिए जाने से भी स्मार्ट टेलीविज़न की बिक्री में तेजी आई है. देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीविज़न बनाने वाली कंपनी एलजी इलेक्ट्रौनिक्स के एक उच्च अधिकारी का कहना है कि स्मार्ट टीवी की बिक्री बढ़ने के पीछे इन्टरनेट की पहुंच में बढ़ोतरी और कई ऐप्स के अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होने जैसे कारण हैं.

सोनी इंडिया कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि शहरों में बहुत से युवा अब अपने टेलीविज़न पर केवल स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ का इस्तेमाल करते हैं. पिछले महीने की टीवी बिक्री में सोनी कंपनी के स्मार्ट टीवी की हिस्सेदारी 65 फीसदी रही जबकि उस के नौन-स्मार्ट टीवी 35 फीसदी ही बिके.

वू टेलीविज़न्स कंपनी के अधिकारी ने बताया कि स्मार्ट और नौन-स्मार्ट टीवी की कीमतों के बीच फर्क पहले 7-8 हज़ार रुपए का था जो अब घट कर 2 से 3 हज़ार रुपए ही रह गया है. यह फर्क भी लोगों को स्मार्ट टीवी खरीदने के लिए उकसाता है.

भारतीय महिला क्रिकेट कप्तान ने रचा इतिहास

अगर मिताली राज क्रिकेट की सचिन तेंदुलकर हैं तो भारत की कप्तान हरमनप्रीत कौर को क्रिकेट की विराट कोहली कहना गलत न होगा. वजह, उन्होंने कारनामा ही ऐसा किया है कि भारत ने गयाना के प्रोविडेंस में हो रहे आईसीसी महिला ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप के अपने पहले मुकाबले में शुक्रवार को न्यूजीलैंड को 34 रनों से शिकस्त दे दी.

इस मैच में हरमनप्रीत कौर ने 103 रनों की तूफानी पारी खेली थी. उन का साथ जेमिमा रोड्रिग्ज ने दिया था. उन्होंने शानदार 59 रन बनाए. इस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट पर 194 रनों का बड़ा स्कोर बनाया था जिस के जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 20 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 160 रन ही बना सकी.

भारत ने टौस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था पर टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. एक समय भारत के 40 रन के अंदर ही 3 विकेट गिर चुके थे, लेकिन इस के बाद हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रोड्रिग्ज ने चौथे विकेट के लिए 134 रन की बेहतरीन साझेदारी कर भारतीय टीम का स्कोर तय 20 ओवर में 5 विकेट पर 194 रन तक पहुंचा दिया.

8 मार्च, 1989 को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के दिन जन्मी कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पहले 50 रन 33 गेंदों में और अगले 50 रन महज 16 गेंदों में ही पूरे कर दिए. उन्होंने 51 गेंदों पर अपनी इस ताबड़तोड़ पारी के दौरान 7 चौके और 8 छक्के जड़े. हरमनप्रीत कौर का यह पहला ट्वेंटी -20 शतक है. वे भारत की ओर से ट्वेंटी-20 में शतक लगाने वाली पहली महिला भी बनी हैं.

दिग्गजों ने दी बधाई

हरमनप्रीत कौर की इस ऐतिहासिक पारी की सराहना क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों ने भी की. वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी रह चुके विवियन रिचर्ड्स ने सोशल मीडिया पर हरमन की तारीफ करते हुए कहा कि हरमन ने खेली उम्दा पारी. ऐसा ही हम वर्ल्ड टी-20 से उम्मीद करते हैं.

भारत के विस्फोटक बल्लेबाज रह चुके वीरेंद्र सहवाग ने लिखा, ‘जीत से शुरुआत. हरमनप्रीत कौर की तरफ से दीवाली धमाका और भारत के लिए वर्ल्ड टी20 के पहले मैच में आरामदायक जीत. बधाई हो लड़कियों.’

भारत के स्टाइलिश बल्लेबाज रह चुके वीवीएस लक्ष्मण ने लिखा, ‘टी20 वर्ल्ड कप में उम्दा शुरुआत के लिए बधाई टीम इंडिया. कप्तान हरमनप्रीत कौर की ओर से यह लाजवाब शतक था और मैं टीम को आने वाले मैचों के लिए भी शुभकामनाएं देता हूं.’

खेल आंकड़ों का

हरमनप्रीत कौर ट्वेंटी-20 में शतक बनाने वाली भारत की पहली और दुनिया की 9वीं बल्लेबाज बन गई हैं.

29 साल की हरमनप्रीत कौर ऐसी तीसरी कप्तान बनी हैं जिन्होंने कप्तान के तौर पर ट्वेंटी-20 में शतक लगाया है. साथ ही वे ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में शतक लगाने वाली तीसरी खिलाड़ी भी बन गई हैं.

जेमिमा रोड्रिग्ज ने ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में 18 साल और 65 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाया है. ऐसा कर वह वर्ल्ड कप में सब से कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाली महिला बन गई हैं.

 

ट्वेंटी-20 में शतक लगाने वाली अब तक की महिला क्रिकेटर

 

नाम देश रन बनाम वर्ष
मेग लेनिंग्स ऑस्ट्रेलिया 126 आयरलैंड 2014
सूजी बेटस न्यूजीलैंड 124 दक्षिण अफ्रीका 2018
डेनियल वियाट इंगलैंड 124 भारत 2018
बेथ मूनी ऑस्ट्रेलिया 117 इंग्लैंड 2017
शेंद्रे फ्रिटज दक्षिण अफ्रीका 116 नीदरलैंड्स 2010
टैमी बियामाउंट इंगलैंड 116 दक्षिण अफ्रीका 2018
डिएंड्रा डोटिन वैस्टइंडीज 112 दक्षिण अफ्रीका 2010
डिएंड्रा डोटिन वैस्टइंडीज 112 श्रीलंका 2017
हरमनप्रीत कौर भारत 103 न्यूजीलैंड 2018

 

भारत की ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप में सब से बड़ी साझेदारी

 

साल जोड़ी रन बनाम स्थान
2018 हरमनप्रीत कौर-जेमिमा रोड्रिग्ज 134 न्यूजीलैंड प्रोविंडेस
2014 मिताली राज-पूनम राउत 117 वैस्टइंडीज सिलहट
2014 हरमनप्रीत कौर-मिताली राज 107 बंगलादेश सिलहट

 

फेसबुक पर भी मैसेज भेजने के बाद, कर सकेंगे डिलीट

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक अब अपने यूजर्स को एक नया फीचर देने वाला है. जल्द ही फेसबुक पर यूजर्स अपने मैसेज डिलीट कर सकेंगे. मैसेज डिलीट करने की सीमा 10 मिनट तय की गई है. ये फीचर सबसे पहले iOS मैसेंजर के 191.0 वर्जन पर उपलब्ध होगा.

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक बहुत जल्द ही यह फीचर फेसबुक अपने यूजर्स को देने वाला है, जब आप अपनी चैट में से मैसेज डिलीट कर सकेंगे. अगर आपने मैसेज किसी को भेज दिया है और आप डिलिट करना चाहते हैं तो ये फीचर आपकी मदद कर सकता है. आप आसानी से मैसेज डिलीट कर सकते हैं.

अक्टूबर में, ये फीचर सबसे पहले जेन मनचुन वोंग नामक इंजीनियर ने ट्वीट किया था, जब ये फीचर टेस्ट पर था. अप्रैल में डेटा चोरी और अन्य मामलों के बीच कंपनी ने फेसबुक सीईओ मार्क ज़करबर्ग के मैसेज डिलीट कर दिए थे, जिसे उन्होंने मैसेंजर के द्वारा शेयर किया था. इसके बाद कंपनी ने कहा था कि मैसेज वापस लेने की क्षमता सभी यूजर्स को उपलब्ध कराई जाएगी.

वहीं, इससे पहले फेसबुक ने व्हाट्सऐप पर ‘डिलीट फौर एवरीवन’ जारी किया था. इसमें आप कभी भी अपने व्हाट्सऐप पर भेजे हुए मैसेज डिलीट कर सकते हैं.

शादी के लिए इटली रवाना हुए दीपिका-रणवीर

बौलीवुड की सबसे रोमांटिक जोड़ी रणवीर-दीपिका के फैन्स को जिस खास मौके का बेसब्री से इंतजार था वो मौका करीब आ गया है. जी हां, रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण 14-15 नवंबर को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं. दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह सफेद रंग की पोशाक में मुंबई एयरपोर्ट पर नजर आए. दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं.

आपको बता दें, शुक्रवार रात यह जोड़ी इटली के लिए रवाना हो गई. दोनों सफेद रंग की पोशाक में मुंबई एयरपोर्ट पर नजर आए. रणवीर जहां खुद गाड़ी ड्राइव करके यहां तक पहुंचे वहीं दीपिका पादुकोण ने भी रणवीर के स्वैग में उनका पूरा साथ दिया. दोनों का स्टाइल काफी हद तक मिलता-जुलता था. दोनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी. एयरपोर्ट पर भी दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे नजर आए. खबरों के मुताबिक दोनों इटली के लेक कोमो में शादी करेंगे.

दीपिका का आउटफिट काफी सिंपल था और रणवीर भी सिंपल व्हाइट कलर के आउटफिट में थे. दोनों ने इस बात का ख्याल रखा था कि उनका गेटअप मिलता जुलता हो. मीडिया और फैन्स का हुजूम एयरपोर्ट पर मौजूद था. रणवीर के चेहरे पर भी लगातार मुस्कान थी. रणवीर ने हालांकि इस मौके पर मीडिया से कोई खास बातचीत नहीं की. रिपोर्ट्स के मुताबिक शादी के बाद दोनों मुंबई में एक ग्रांड रिसेप्शन रखेंगे जिसमें बौलीवुड सितारे और तमाम अन्य सेलेब्स शामिल होंगे.

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