राजस्थान के तमाम ग्रामीण अंचलों में पानी की कमी के चलते जन जीवन से सामाजिकता भी प्रभावित होती है. उसी पर पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने जयपुर निवासी धर्मेंद्र उपाध्याय ने एक लघु फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ का निर्माण किया है, जिसे काफी सराहा जा रहा है.

राजस्थान की एक ग्रामीण नारी जो पानी लेकर लौट रही है, रास्ते में वह छेड़खानी का शिकार हो जाती है. लेकिन घर पहुंचते ही उसके लिए नया संघर्ष शुरू हो जाता है. नारी के इसी संघर्ष को ‘‘श्री राधा गोविंद फिल्मस’’ के बैनर तले निर्मित नौ मिनट की अवधि वाली राजस्थानी भाषा की लघु फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ में चित्रित किया गया है. फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में मुद्रिका जाकियावाल, सिकंदर चैहान, मेघी देवी कृष्णा और आर्ची कुश हैं. फिल्म के कैमरामैन धरम रौक तथा सह निर्माता संजय मलिक हैं.

राजस्थानी भाषा की फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ को हाल ही दिल्ली में आयोजित ‘‘न्यू दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह’’ में विशेष सराहनीय फिल्म की श्रेणी में सम्मानित किया गया. इतना ही नही पिछले दिनों रवींद्र मंच जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान सिने अवाार्ड’ में भी ‘पानी रे पानी’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म से पुरस्कृत किया गया.

संदेश परक फिल्म ‘‘पानी रे पानी’’ के निर्देशक धर्मेन्द्र उपाध्याय अपनी इस फिल्म की चर्चा करते हुए कहते हैं- ‘‘राजस्थान में पानी की परेशानी के चलते ग्रामीण जनजीवन में पानी का महत्व अमृत के समान है. इस फिल्म को दिमाग में रचते समय मैने सामाजिक सरोकार और पानी की उपयोगिता पर ही खास ध्यान दिया.’’

लेखक व निर्देशक धर्मेद उपाध्याय ने अपनी इस राजस्थानी लघु फिल्म को इसी वर्ष गर्मियों के मौसम में आमेर में नारदपुरा के आसपास  फिल्माया है.

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