Download App

सहवाग ने कहा सचिन का ये रिकौर्ड कभी नहीं तोड़ पाएंगे कोहली

अपने करियर के बेहतरीन मुकाम पर विराट कोहली के लिए वीरेंद्र सहवाग ने बड़ी बात कह दी है. एक ओर जहां कोहली लगातार नए नए रिकार्ड्स अपने नाम किए जा रहे हैं. वहीं सहवाग का ये बयान उनके लिए एक नई चुनौती बन गया है.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के लिए सहवाग ने कहा कि विराट कोहली तेजी से कई रिकौर्ड्स अपने नाम करते जा रहे हैं लेकिन वो सचिन के एक रिकौर्ड को नहीं तोड़ पाएंगे. उन्होंने कहा कि सचिन ने अपने क्रिकेट करियर में 200 टेस्ट मैच खेले थे और विराट के लिए इतने टेस्ट खेलना आसान नहीं होगा.

सहवाग देश के इकलौते बल्लेबाज हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरा शतक जड़ा है. सहवाग ने कहा कि सचिन के 200 टेस्ट क्रिकेट का रिकौर्ड तोड़ना कोहली के लिए काफी मुश्किल होगा क्योंकि उसके लिए उन्हें 24 वर्ष के आसपास क्रिकेट खेलना होगा. सचिन और कोहली की तुलना पर सहवाग ने कहा कि दोनों की तुलना सही नहीं होगी. जाहिर तौर पर कोहली ने ज्यादा खतरनाक गेंदबाजों का सामना किया है. पर दोनों के खेलने का काल अलग अलग है. ऐसे में दोनों की तुलना करना सही नहीं है.

बता दें कि सचिन के वक्त वक्त ब्रेट ली, शोएब अख्तर, शेन वौर्न, मुथैया मुरलीधरन जैसे गेंदबाज थे. उस वक्त गेंदबाजों की तुलना में बल्लेबाजों का ज्यादा बोलबाला था. सचिन तेंदुलकर खुद भी एक बार कह चुके हैं कि मेरे रिकौर्ड विराट कोहली तोड़ सकते हैं. इसके अलावा विश्व क्रिकेट में लगातार रन बनाने के मामले में कोई अन्य बल्लेबाज उनके आस-पास भी नहीं है.

सदियों में एक बार पैदा होता है कोहली जैसा खिलाड़ी: सिद्धू

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही थी, जिसमें टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने एक फैन को देश छोड़ने की सलाह दे रहे थे. अब इस फूटेज पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पंजाब कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी प्रतिक्रया दी है.

आजतक के खास कार्यक्रम ‘सीधी बात’ में नवजोत सिंह सिद्धू ने विराट कोहली द्वारा अपने फैन को एंटी नेशनल कहे जाने पर कहा कि विराट कोहली देश की शान है, कोहली जैसा खिलाड़ी शताब्दियों में एक बार पैदा होता है. मैं विराट कोहली का फैन हूं. विराट बनने के लिए आपको तपस्वी बनना पड़ेगा. जब सिद्धु से क्रिकेट को मिस करने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैंने कभी कुछ भी मिस नहीं किया. मैं क्रिकेट छोड़ने के अगले दिन कमेंट्री करने लगा था. मुझे वरिष्ठ टीम में आने के लिए कहा गया तो मैंने कहा कि अभी तो मैं जवान हूं.

आपको बता दें, इस वीडियो में विराट कोहली कह रहे हैं कि जो लोग अंग्रेज और औस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को पसंद करते हैं, उन्हें भारत में नहीं रहना चाहिए. अपने नए ऐप पर उपलब्ध वीडियो में ट्वीट्स और इंस्टाग्राम संदेशों को पढ़ने के दौरान कोहली को एक फैन ने लिखा,  वह एक ओवरेटेड बल्लेबाज हैं. उनकी बल्लेबाजी में कुछ भी खास नहीं लगता है. मैं इंग्लिश और औस्ट्रेलियन बल्लेबाजों को भारतीय बल्लेबाज से ज्यादा देखना पसंद करता हूं.’

इस पर विराट जवाब देते हैं, मुझे नहीं लगता है कि आपको भारत में रहना चाहिए. जाओ और कहीं दूसरी जगह रहो. मुझे फर्क नहीं पड़ता है कि आप मुझे पसंद नहीं करते हैं. मुझे नहीं लगता कि आपको हमारे देश में रहना चाहिए और दूसरों की तरह सोचना चाहिए. आप अपनी प्राथमिकताओं को तय करें. इस वीडियो के वायरल होने के बाद से कई प्रशंसकों ने कोहली को घमंडी और अप्रिय तक कह डाला.

ब्रांड “मोदी” बना बीजेपी का चुनावी एजेंडा

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और राजस्थान में भले ही विधानसभा के चुनाव लड़े जा रहे हों पर भारतीय जनता पार्टी अपने 3 मुख्यमंत्रियों शिवराज सिंह चौहान, डाक्टर रमन सिंह और वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम पर चुनाव लड़ने की जगह पर प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम का ही सहारा ले रही है. केवल प्रचार अभियान में ही नहीं नाराज भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने के लिये भी ‘मोदी नाम’ का सहारा लिया जा रहा है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और डाक्टर रमन सिंह लगातार 3 बार से चुनाव जीतते आ रहे है. इसके बाद भी इन चुनावों में जनता को प्रभावित करने में असफल हो रहे है. राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को लेकर पार्टी में गुटबाजी कायम है.

ऐसे में केवल ‘मोदी नाम’ पर ही भाजपा वोट मांग रही है. प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यहां स्टार प्रचारक की भूमिका में रखा गया है. ‘मोदी नाम’ पर चुनाव लड़ रही भाजपा यह बात खुलकर बोल नहीं रही है. इसकी वजह यह है कि खुद प्रधनमंत्री मोदी की चमक 2014 वाली नहीं रह गई है. ऐसे में अगर भाजपा इन राज्यों में चुनाव हारती है तो हार की जिम्मेदारी प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी की जगह सत्ता विरोधी मत और यहां के मुख्यमंत्रियों के उपर डाल दी जायेगी. 5 राज्यों के विधनसभा चुनाव में मणिपुर और तेलंगाना कम चर्चा में हैं पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सबसे अहम है.

इन राज्यों में भाजपा की सरकार है. मध्य प्रदेश और छत्तसीगढ़ में 15 सालों से भाजपा के मुख्यमंत्री सरकार चला रहे है. यहां पर सत्ता के विरोध में जनता है. स्थानीय नेताओं का कोई खास आकर्षण नहीं है. स्थानीय स्तर पर कोई चुनावी मुददा नहीं है. पार्टी के बडे नेता भी स्थानीय मुददों पर भाषण नहीं दे रहे है. ऐसे में हवा के रूख का उनको अंदाजा नहीं लग रहा है. भाजपा वोट के धर्मिक ध्रुव्रीकरण के लिये अयोध्या के राम मंदिर मुददे को उछाल रही है. इसके लिये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रचार मैदान में सबसे अधिक जगह दी जा रही है. भाजपा ने योगी को ‘धर्म का ब्रांड एम्बेसडर’ बना दिया है.

15 सालों से सत्ता में बैठे बासी चेहरों से ऊब चुकी जनता को अब परिवर्तन चाहिये. यही भाजपा के लिये चिंता का विषय है. भाजपा की हार का असर 2019 के लोकसभा चुनाव पर पडेगा. यही वजह है कि भाजपा मोदी नाम का खुलकर प्रयोग नहीं कर रही. उसे लगता है कि हार का ठीकरा मोदी नाम पर फूटेगा तो 2019 की लड़ाई पर असर पड़ेगा. राजस्थान में भी मोदी के नाम पर ही वोट मांगे जा रहे हैं. राजस्थान का मतदाता हर बार नया प्रयोग करता है. ऐसे में अब भाजपा के बाद कांग्रेस की बारी दिख रही है. यह 2019 के लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल हैं. अगर भाजपा ने 5 राज्यों में 3 राज्य खो दिये तो ‘मोदी नाम’ का जाप कमजोर पड़ जाएगा और कांग्रेस आत्मविश्वास के साथ 2019 के लोकसभा चुनाव में आगे बढ़ जायेगी.

जब करें घर से काम

वर्क फ्रौम होम यानी घर से काम करना. आजकल वर्क फ्रौम होम का कौन्सैप्ट तेजी से बढ़ रहा है. कंपनियां भी फ्लैक्सिबल वर्क औप्शन दे रही हैं, जिस से आप अपनी सुविधानुसार काम कर सकती हैं. लेकिन जब बात घर से काम करने की आती है, तो हमारे दिमाग में सब से पहले एक ही खयाल आता है कि जब मन करे तब काम करो, जैसे मन करे वैसे काम करो, यहां कोई रोकनेटोकने वाला नहीं है. माना कि यहां कोई रोकनेटोकने वाला नहीं होता, लेकिन यहां भी काम करने के कुछ ऐटिकेट्स होते हैं. अगर आप उन का ध्यान नहीं रखेंगी, तो स्ट्रैस फ्री हो कर सही तरीके से काम नहीं कर पाएंगी.

जब भी घर से काम करें तो इन वर्क ऐटिकेट्स का जरूर ध्यान रखें:

वर्क शैड्यूल है जरूरी: घर से काम करते समय हम कोईर् भी चीज लिख कर कहीं भी रख देते हैं और बाद में खोजने में अपना समय बरबाद करते हैं, इसलिए जरूरी है कि वर्क शैड्यूल बनाया जाए ताकि आप को पता रहे कि कौन सा काम कब खत्म करना है, आप ने क्याक्या पूरा कर लिया और क्या अभी पूरा करना है. ऐसा कर के आप कम समय में ज्यादा काम कर सकती हैं.

नियमित वर्किंग आवर्स: ऐसा न करें कि आप कभी भी उठ कर काम करने बैठ जाएं. इस से आप की हैल्थ तो बिगड़ती ही है, आप का काम भी प्रभावित होता है. इसलिए काम के साथसाथ फिट व हैल्दी भी रहने के लिए काम का समय तय कर लें और फिर उसी के अनुसार काम करें. ऐसा करने से आप सही तरीके से काम

पूरा करने के साथसाथ फैमिली के साथ मस्ती भी कर पाएंगी.

अनुशासन बनाए रखें: ऐसा न करें कि काम के दौरान चैटिंग व फोन पर बातें करती रहें, बल्कि अनुशासन बना कर रखें, क्योंकि आप जब तक काम में अनुशासन नहीं बनाएंगी तब तक अपना बैस्ट नहीं दे पाएंगी. इस बारे में अपने दोस्तों व रिश्तेदारों को भी बताएं ताकि वे आप को फ्री समझ कर काम के समय आ कर डिस्टर्ब न करें.

काम समय पर पूरा करें: ऐसा न करें कि बहाने बना कर काम को टालती रहें. ऐसा करने से आप की छवि खराब होती है. अत: समय पर काम पूरा करने की कोशिश करें. इस से वर्क स्पीड भी बनी रहती है और आप टैंशन फ्री भी रहती हैं.

फील्ड के लोगों से जुड़ी रहें: आप घर से काम करती हैं, आप को औफिस जाने की जरूरत नहीं पड़ती है, तो इस का मतलब यह नहीं कि आप लोगों से मिलनाजुलना छोड़ दें, बल्कि अपनी फील्ड के लोगों से कौंटैक्ट बनाए रखें ताकि आप को उन से नईनई चीजें सीखने का मौका मिलता रहे.

जरूरी बातें

– लक्ष्य निर्धारित करें कि आप को नई चीजें सीखनी हैं. इस से आप में काम को ले कर जोश बना रहेगा.

– ईमेल मैनर्स का भी रखें ध्यान. सिर्फ ओके, थैंक्यू में रिप्लाई न करें.

– काम के प्रैशर का फ्रस्ट्रेशन फैमिली पर न निकालें.

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो रखें इन बातों का ख्याल, नहीं होगी परेशानी

रिजर्व बैंक के हालिया आंकड़ों की माने तो नोटबंदी के बाद देश में क्रेडिट कार्ड धारकों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला है. मौजूदा समय में देश भर में करीब तीन करोड़ साठ लाख क्रेडिट कार्ड उपभोक्ता हैं. पर क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल को ले कर लोगों के मन में खासा भ्रम होता है. पूरी जानकारी के अभाव में क्रेडिट कार्ड लोगों के लिए गले का फांस बन जाता है और लोगों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ता है. पर अपने उपयोग और जरूरतों के बारे में आपकी समझ आपको ऐसी परेशानियों से बचाए रखेगी. जब आपको पैसों की जरूरत हो और आपके पास पैसे न हो तो ऐसे समय में क्रेडिट कार्ड बहुत उपयोगी साबित होता है. अगर आप क्रेडिट कार्ड के उपयोगकर्ता हैं तो आपके लिए ये खबर बेहद जरूरी है क्योकि हम आपको बताएंगे वो जरूरी बातें जो क्रेडिट कार्ड रखते वक्त आपको पता होनी चहिए.

  • दिए गए वक्त में करें भुगतान

क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी है कि वो किसी भी तरह के बिल भुगतान तय समय से पहले करें. ऐसा ना करना आपके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है. समय पर बिल ना भुगतान करने से आपको ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है.

  • 30 फिसदी से ज्यादा ना करें खर्च

कोशिश करें कि आप अपने क्रेडिट कार्ड के लिमिट का 30 फीसदी ही इस्तेमाल करें. ये कोई मानक तो नहीं है, पर हां, ऐसा करने से आप पर ज्यादा भार आता नहीं है और आपको अपने क्रेडिट्स चूकाने में भी आसानी होगी. मान लिजिए कि आपके क्रेडिट कार्ड की मंथली लिमिट एक लाख है. ऐसे में कोशिश करें कि आप क्रेडिट कार्ड पर एक महीने में तीस हजार की खर्च करें.

  • लें क्रेडिट कार्ड की पूरी जानकारी

क्रेडिट कार्ड लेने से पहले आप कस्टमर केयर से कार्ड से मिलने वाली सारी सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी इक्कठ्ठा कर लें. अगर आपको क्रेडिट कार्ड से संबंधित कोई समस्या होती है और कस्टमर सर्विस अच्छी नहीं है तो फिर आपको परेशानी हो सकती है.

  • कस्टमर केयर सर्विस

क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करने से पहले हमेशा बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी की ग्राहक सेवा के बारे में पूछताछ कर लें। भविष्य में, अगर आपको क्रेडिट कार्ड से संबंधित कोई समस्या होती है और कस्टमर सर्विस अच्छी नहीं है तो फिर आपको परेशानी हो सकती है। क्योंकि आज-कल क्रेडिट कार्ड को लेकर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए बेहतर कस्टमर सर्विस होना जरूरी है।

  • चार्जेज के बारे में रखें पूरी जानकारी

जब भी क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करें तो इससे जुड़े और चार्ज के बारे में पता लगा लें। कई सारे क्रेडिट कार्ड जौइनिंग फी, लेट फी के साथ मिलते हैं। इसलिए आप ऐसी कार्ड लें जिसपर आपको कोई चार्ज नहीं देना पड़ता हो।

सावधान : क्या आप भी करते हैं औनलाइन पैसे ट्रांसफर

आजकल ज्यादातर लोग पैसे ट्रांसफर करने के लिए इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई लोग तो ऐसे भी होंगे जिन्हें याद ही नहीं होगा कि वे आखिरी बार कब अपने बैंक में गए थे. अगर आप भी अक्सर ही  इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर पैसे ट्रांसफर करते हैं तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इसतरह से पैसे ट्रांसफर करने के खतरे कम नहीं हैं इसलिए आपको इससे होने वाली किसी भी समस्या से बचने के लिए बेहद सावधान रहने की जरूरत है. तो आइए जानते हैं कि इंटरनेट बैंकिंग के दौरान आपको क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए.

पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल न करें

बैंक से संबंधित काम के लिए गलती से भी पब्लिक या फ्री वाई-फाई का यूज ना करें. इसके अलावा फ्री वाई-फाई के यूज से किसी भी प्रकार का औनलाइन पेमेंट ना करें, क्योंकि अधिकतर फ्री वाई-फाई सिक्योर नहीं होते हैं और इन पर हैकर्स की कड़ी नजर रहती है.

नियमित रूप से पासवर्ड चेंज करें

इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहें, क्योंकि हो सकता है कि आपके फोन और लैपटाप के जरिए आपको कोई ट्रैक कर रहा हो. पासवर्ड में नंबर, स्पेशल कैरेक्ट जरूर शामिल करें और पासवर्ड लंबा रखें. अलग-अलग बैंकों के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखें.

ई-मेल के जरिए कभी भी साइन इन ना करें

कभी मेल पर आए किसी लिंक के जरिए इंटरनेट बैंकिंग के लिए साइन ना करें, क्योंकि अक्सर ई-मेल के जरिए लोगों को ठगा जाता है. कई बार ऐसे मेल आते हैं कि अपने अकाउंट को सिक्योर करने के लिए लौगिन करें, जबकि बैंक ऐसे मेल नहीं भेजते हैं. बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से ही लौगिन करें.

वेबसाइट के यूआरएल में ‘S’ चेक करें

अगर आप किसी वेबसाइट पर लौगिन कर रहे हैं तो सबसे पहले उसका यूआरएल चेक करें. यूआरएल की शुरुआत ‘https’, से होनी चाहिए. इसमें ‘s’ ही वेबसाइट के सिक्योर होने का सबूत है.

क्या आपके स्मार्ट फोन की बैटरी जल्द खत्म हो जाती है?

स्मार्टफोन में जैसे-जैसे एडवांस स्पेसिफिकेशन बेहतर होते जा रहे हैं, लोगों की चिंता इसकी बैटरी लाइफ को लेकर बढ़ती जा रही है. स्मार्टफोन डिस्प्ले बैटरी पावर की बहुत ज्यादा खपत करता है और हल्की थीम से देर तक बैटरी बनी रहती है. यही वजह है कि डार्क मोड लोकप्रिय हो रहा है.

लेकिन गूगल ने कई वर्षों तक अपनी मटेरियल थीम में सफेद कलर पर जोर दिया. लेकिन अब गूगल ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है. रिपोर्ट में पुष्टि किया गया है कि एंड्रायड फोन्स को डार्क मोड में रखने पर कम ऊर्जा खर्च होती है और बैटरी लाइफ बचती है. गूगल ने खुलासा किया है कि किस प्रकार आपका फोन बैटरी की खपत करता है. उन्होंने इसका खुलासा इस हफ्ते हुए एंड्रायड डेव समित में किया और डेवलपरों को बताया कि वे बैटरी की अधिक खपत रोकने के लिए अपने ऐप्स में क्या कर सकते हैं.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, बैटरी की खपत करनेवाला सबसे बड़ा कारन स्क्रीन की ब्राइटनेस है, और स्क्रीन का कलर भी है. डार्क मोड कुल मिलाकर औपरेटिंग सिस्टम या एप्लिकेशनों के कलर को बदलकर ब्लैक कर देता है. इंटरनेट दिग्गज ने प्रजेन्टेशन में दिखाया कि किस प्रकार से डार्क मोड फुल ब्राइटनेस स्तर पर ‘सामान्य मोड’ की तुलना में 43 फीसदी कम बैटरी की खपत करता है, जबकि पारंपरिक रूप से बहुत ज्यादा व्हाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है.

ऐसे बनाए अपने स्मार्टफोन को सैटेलाइट फोन

हम कई बार ऐसी जगहों पर जातें हैं जहां फोन का नेटवर्क नहीं आता. ऐसे में लाख कोशिशों के बावजूद भी आप अपने फोन का इस्तेमाल बात करने के लिए नहीं कर पाते हैं. तो क्या आपको भी कभी ऐसा लगा कि शायद आपके पास सैटेलाइट फोन होता तो आप अपने यादगार लम्हें को अपनों से शेयर कर सकते. आपके इसी ख्वाइश को पूरा करने के लिए सैटस्लीव आ गया है.

दरअसल सैटस्लीव एक कवर है जिसकी मदद से आप हिमालय पर भी अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल किसी से बात करने के लिए कर सकते हैं. स्मार्टफोन पर कवर लगाने के बाद आपके डिवाइस में नेटवर्क आने लगेगा और आप इंटरनेट का भी इस्तेमाल कर पाएंगे.

technology

सैटस्लीव एक मोबाइल कवर है जो एक सैटेलाइट की तरह काम करता है. इसकी मदद से आप मैसेज, ई-मेल और इंटरनेट ब्राउजिंग आसानी से कर सकते हैं. कवर को स्मार्टफोन पर लगाने के बाद फोन में नेटवर्क पकड़ने लगेगा. अगर आप एक ट्रैवलर हैं और आपको घूमना पसंद है तो ये कवर आपके काम का हो सकता है.

कवर आईफोन 4/4S से लेकर आईफोन 6/6S तक को स्पोर्ट करता है. वहीं बात करें एंड्रौयड मोबाइल की तो ये अभी सैमसंग गैलेक्सी S3,S4 और S5 को स्पोर्ट करता है.

सैटस्लीव में रीचार्जेबल बैटरी के साथ सोलर चार्जर भी मिलता है. बात करें इसकी कीमत की तो ये आपको थोड़ा निराश कर सकता है. सैटस्लीव की कीमत 499 डौलर है, भारतीय करेंसी के मुताबिक इसकी कीमत करीब 31,841 रुपये है.

सकारात्मक सोच सफलता के लिए जरूरी

भ्रम उलझन पैदा करता है. कैरियर के चयन में यह अवरोधक का काम करता है. इस की वजह से व्यक्ति अपना लक्ष्य तय नहीं कर पाता. यह व्यक्ति को डरपोक व लापरवाह बना देता है. आज बहुत से युवा कैरियर चयन के मामले में खुद को एकाग्रचित्त नहीं कर पाते. ‘यह करूं या वह करूं, नौकरी करूं या व्यापार करूं, यह कोर्स करूं या वह करूं’ जैसी भ्रम वाली स्थिति में फंसे रहते हैं.

भ्रम के अनेक कारणों में मुख्य कारण नकारात्मक सोच का होना है. नकारात्मक सोच संकीर्ण मानसिकता को जन्म देती है. इस से युवाओं को फायदा कम, नुकसान ज्यादा हो रहा है. इस भ्रम की स्थिति से कैसे उबरा जाए, प्रस्तुत हैं कुछ टिप्स :

यदि आप चाहते हैं कि भ्रम की स्थिति पैदा न हो, तो इस के लिए सकारात्मक सोच का होना बहुत जरूरी है. स्वयं में आत्मविश्वास पैदा करें. साथ ही परिस्थितियों से डट कर मुकाबला करने की हिम्मत जुटाएं. चुनौतियों का सामना करना सीखें. दृष्टिकोण सकारात्मक रखें. नकारात्मक विचारों को अपने पास न आने दें. अपने निर्णय के प्रति दृढ़ रहें.

अपना लक्ष्य निर्धारित करें

वही व्यक्ति ऊंचाइयों को छूते हैं, जो शुरू से ही अपना लक्ष्य तय कर लेते हैं. काम को सिर्फ पसंद न बनाएं बल्कि उपयोगिता को समझते हुए उसे करें. केवल आदर्श काम की ही तलाश में न रहें, जो सामने हो, उसे ही पहले करने की कोशिश करें.

यह सच है कि कभीकभी तय किए गए लक्ष्य को प्राप्त करना आसान नहीं होता, पर थोड़ी लगन, सूझबूझ और मेहनत से काम किया जाए, तो कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है. पंडित श्यामसुंदर द्विवेदी गांधीजी से मिलना चाहते थे, इस के लिए उन्हें केवल 4 मिनट का समय मिला. जब वे निर्धारित समय पर गांधीजी से मिलने साबरमती आश्रम पहुंचे तो 3 मिनट लेट थे. गांधीजी ने उन्हें देखा और मुसकरा कर कहा, ‘‘पंडितजी, आप आ गए, कुशल तो हैं?’’

गांधीजी ने घड़ी पर दृष्टि डाली, फिर कुछ लिखने में व्यस्त हो गए. द्विवेदीजी चुपचाप एक ओर बैठ गए. गांधीजी ने लिखना समाप्त किया, फिर बैठे हुए लोगों से कुछ बात की और उठ गए. उन्होंने द्विवेदीजी को बुलाया और कहा, ‘‘पंडितजी, क्षमा करें. जब आप आए थे तो आप के नियत 4 मिनट में से केवल एक मिनट ही बचा था और उस एक मिनट में केवल कुशलक्षेम पूछी जा सकती थी. आशा है भविष्य में आप समय का ध्यान रखेंगे.’’

कहने का तात्पर्य यह है कि जीवन का प्रत्येक क्षण कीमती है, जो एक अवसर है. जीवन के सभी कामों को उचित समय देना भी बेहद जरूरी है और तब यह अतिआवश्यक हो जाता है, जब आप अपने कैरियर से जुड़े 2 प्रमुख रास्तों पर चल रहे हों.

कैरियर विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि जो समय व अपना लक्ष्य निर्धारित करते हैं, वही कामयाब होते हैं. भ्रम उन से कोसों दूर भागता है. सोचने में ही समय बरबाद न करें. जहां तक संभव हो अपने को व्यवस्थित करना सीखें. खासकर कैरियर के मामले में दुविधा में न पड़ें. एक नए जोश के साथ खुद में ऊर्जा का संचार करें.

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन का प्रत्येक क्षण बहुत महत्त्वपूर्ण है. समय का सदुपयोग व सही निर्णय आप की दिशा बदल सकता है.

अपने में आत्मविश्वास बढ़ाएं

आत्मविश्वास सफलता का वह अचूक मंत्र है, जो व्यक्ति को सफल बनाने के साथसाथ उस में स्पष्ट एवं सकारात्मक दृष्टिकोण का समावेश करता है. आत्मविश्वास जीवनशैली में भी परिवर्तन लाता है. कार्यक्षमता को बढ़ाता है. आत्मविश्वास के साथ किए गए कामों का परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है.

धैर्य बनाए रखें

कोई भी काम करने से पहले आप में धैर्य का होना बहुत जरूरी है, खासकर जब आप कैरियर को ले कर भ्रम में पड़े हों. यह सच है कि किसी भी काम को करने के लिए पैसा जरूरी है, पर इस का मतलब यह नहीं है कि हम पैसों के अभाव में अपना धैर्य ही खो दें. सफलता के लिए धैर्य बहुत जरूरी है.

विकल्प खुले रखें

अपने मकसद में कामयाब होने के लिए विकल्पों को ध्यान में रखें. मुश्किल क्षणों में भी आप का संघर्ष बेकार नहीं जाना चाहिए. बेहतर कैरियर के लिए समस्याओं से मुकाबला करना चाहिए, तभी आप आगे बढ़ सकते हैं. आप को तय करना होगा कि आप क्याक्या कर सकते हैं. एक ही काम के इंतजार में न रहें, जो सामने हो, उसी पर ध्यान दें.

अत: भ्रमजाल से निकलने के लिए सकारात्मक सोच के साथसाथ विषम परिस्थितियों से मुकाबला करने की क्षमता पैदा करें, अपने में चुनौतीपूर्ण चाह पैदा करें, रुचि, शिक्षा, क्षमता और अनुभव के आधार पर आप अपना लक्ष्य तय कर भ्रम से बच सकते हैं.

विकास पर हावी अंधविश्वास

तुलसीदास के अनुसार ‘भय बिनु होई न प्रीत’ यानी भय इनसान को कार्य करने के लिए उकसाने का सर्वोत्तम माध्यम है. मास्टरजी की छड़ी के भय से छात्र पढ़ने बैठ जाते हैं और पिता की डांट के भय से सही आचरण करने लगते हैं. कुछ सीमा तक भय कार्य उद्दीपक एवं प्रेरणा का काम करता है, जो इनसान की प्रगति में सहायक बनता है, मगर वहीं जब इसी भय की अधिकता हो जाती है या भय को स्वार्थसिद्धि का साधन बना कर लोगों की भावनाओं से खेला जाता है, तो यह अंधविश्वास का रूप ले लेता है, जो मानव के पतन का कारण बनता है, उस की प्रगति में बाधक बनता है.

हमारा भारतीय समाज इसी भय की अधिकता के कारण 21वीं सदी में भी 18वीं सदी की विचारधारा से ओतप्रोत है. जहां जापान, जरमनी, चीन जैसे देश निरंतर प्रगति कर महाशक्ति बन बैठे हैं, वहीं भारत धर्म, पूजापाठ और अंधविश्वास के चलते लगातार पीछे जा रहा है. भारत की जनता गरीबी के कारण तो किसान फसल खराब होने के कारण आत्महत्याएं कर रहे हैं, वहीं तिरुमाला, शिरडी, पद्मनाभम और सिद्धि विनायक जैसे मंदिर और उन के पुजारी करोड़ोंअरबों में खेल रहे हैं.

भगवान का भय

यहां का शिक्षक, जो देश के भावी कर्णधारों को तराशता है, लगातार शिक्षाप्रद भाषण दे कर अपना गला दुखाता है उसे तनख्वाह के रूप में कुछ हजार रुपए मिलते हैं, वहीं जो पाखंडी बाबा गीता के कुछ श्लोक रट कर और बेढंगे नृत्य और गीत से जनता को बेवकूफ बनाता है उस के गैरेज में महंगी कारों का काफिला, अरबों की इमारतें और सुंदर सेविकाएं (न जाने किसकिस सेवा हेतु) उपलब्ध रहती हैं.

हमारे देश के इन धार्मिक लुटेरों ने पूजा और धर्म की असंख्य बंदूकों के बल पर अंधविश्वासी जनता को इस तरह भयभीत किया है कि वह बेचारी बिना बंदूक दिखाए ही केवल बंदूक के खौफ से ही (देवता नाराज हो जाएंगे, नकारात्मक शक्तियां उत्पात मचाएंगी, भूतप्रेत का साया, किसी भी चूक से शक्तियों का क्रोधित होना और दंडित करना इत्यादि) अपना सब कुछ इन्हें बिना किसी प्रश्न के सहज सौंप देती है. जनता को पूजापाठ और टोटकों में इस तरह उलझा दिया गया है कि उसे यह सोचनेसमझने का अवसर ही नहीं मिलता कि ‘मुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदन’ की तर्ज पर ये पाखंडी उन की खूनपसीने की कमाई पर मौज उड़ा रहे हैं और इस के लिए ये ढोंगी कुछ भी कर सकते हैं.

सिर्फ पाखंड ही

आप को पशुओं का मूत्र पिलाया जा सकता है या उस के इस्तेमाल की सलाह दी जा सकती है और हम यह वैज्ञानिक तथ्य जानते हुए भी कि शरीर उन्हीं तत्त्वों को उत्सर्जित करता है, जो शरीर के लिए उपयोगी ही नहीं हैं, हम गौ माता की जय कह कर उस अपशिष्ट का प्रसाद लेने को तत्पर हो उठते हैं.

वास्तव में गाय की आंतों में कुछ विषैले जीवाणु होते हैं, जो मूत्र के साथ कुछ मात्रा में शरीर से बाहर निकल जाते हैं. अगर हम इन अपशिष्टों का सेवन करते हैं, तो ये जीवाणु हमारे स्वास्थ्य पर कैसी कृपा करेंगे, यह आप खुद समझ सकते हैं.

इसी तरह पीलिया होने पर नीम की डालों को तेल में घुमा कर पीलिया झाड़ने वाले के पास कई पढ़ेलिखों की लाइन लगी मिल जाएगी, जबकि आप स्वयं बिना पीलिया के तेल में नीम की डालें घुमाएंगे तो तेल को पीला होता पाएंगे.

चेचक की बीमारी को देवी के गुस्से की अभिव्यक्ति मान उसे मनाने के लिए कर्मकांड और पूजाअर्चना में भी हजारों खर्च कर दिए जाते हैं. अंत में जब ज्यादा हालत बिगड़ जाती है तब डाक्टर के पास पहुंचते हैं. अगर आप ईश्वर में और पूजापाठ में इतना ही यकीन रखते हैं, तो मैं उस यकीन की परीक्षा के लिए एक प्रयोग बताती हूं. आप पोटैशियम साइनाइड का एक इंजैक्शन लगा लो और फिर भगवान के गीत गागा कर उसे रक्षा के लिए बुलाओ या फिर अपनी खूनपसीने की कमाई जिन बाबाओं पर लुटाते आए हो उन की शरण में जाओ. अगर आप का विश्वास सच्चा है, तो फिर किस बात का डर? मुझे यकीन है आप ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि भगवान पर आप का विश्वास नहीं है. इन पाखंडियों पर भी नहीं है. आप तो बस नीलगायों की तरह एकदूसरे के पीछे भाग रहे हैं.

आप ने कोल्हू के बैल की तरह आंखों पर धर्म की पट्टी बांध रखी है. आप को पता ही नहीं है कि आप किस दिशा में जा रहे हो और क्यों? आप तो बस चले जा रहे हो, क्योंकि आप के पूर्वज भी ऐसे ही चले थे. आप इसलिए चल रहे हो, क्योंकि कुछ ग्रंथों में ऐसा लिखा है, आप चल रहे हो, क्योंकि कुछ स्वार्थी और पैसे के भूखे पंडेपुजारियों ने आप के दिमाग की प्रोग्रामिंग ऐसी कर दी है कि शोषण झेल कर भी आप खुद को शोषित मानने के बजाय भक्त मानते हो.

यह कैसा अंधविश्वास

शाहरुख अंक ज्योतिष पर यकीन करते हैं. उन की अपनी सभी गाडि़यों के नंबर ‘555’ हैं. यहां तक कि अपनी आईपीएल टीम ‘कोलकाता नाइट राइडर्स’ की हार से परेशान हो कर उन्होंने उस की जर्सी का रंग भी ज्योतिष के कहने पर बदलवा कर बैगनी करवाया.

‘सत्यमेव जयते’ जैसे सामाजिक शो करने वाले आमिर खान दिसंबर महीने को बेहद शुभ मानते हैं. इसीलिए अपनी हर फिल्म वे दिसंबर में ही रिलीज करते हैं. दीपिका पादुकोण भी अपनी फिल्म के रिलीज से पहले मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर दर्शन करने जरूर जाती हैं. एकता कपूर अपने काम से जुड़े हर मामले में ज्योतिष की राय लेती हैं, फिर चाहे वह शूटिंग की तारीख हो, शूटिंग की जगह हो या फिर उन की उंगली की अंगूठी ही क्यों न हो?

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने माना है कि वे अपनी आईपीएल टीम ‘राजस्थान रौयल्स’ के मैच के दौरान 2 घडि़यां पहनती हैं, जिस से उन की टीम को सफलता मिलती है. एक जमाने में करण जौहर की यह धारणा थी कि उन की फिल्में तभी सफल होंगी जब उन के नाम ‘क’ अक्षर से हों.

देश में ही नहीं विदेशों में भी अंधविश्वासियों की कमी नहीं है. औस्कर पुरस्कार विजेता अभिनेता मौर्गन फ्रीमैन की नातिन के प्रेमी ने अंधविश्वास के चक्कर में उस की चाकू से गोद कर हत्या कर दी. मार्क जुकरबर्ग और बराक ओबामा भारत के नीम करोरी बाबा के प्रशंसक हैं. अब क्या कहेंगे इन पढ़ेलिखे अंधविश्वासियों को?

इन सब अंधविश्वासों की जननी है पूजा. पूजा ही हमें अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसाने का प्रवेशद्वार है. हम सब से ज्यादा भयभीत पूजा करते वक्त ही होते हैं जैसेकि पूजा में हम ने नियम बनाया मंत्र जपने का. अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है या व्यस्तता है तो हम नियम टूटने और प्रभु के नाराज होने के खौफ से मरतेगिरते भी उस नियम को पूरा करने में वक्त बरबाद करेंगे. मैं उन लोगों को जो हजारों माला जपते हैं, घंटों पूजापाठ में शरीर और वक्त की बरबादी करते हैं, यह सलाह देती हूं कि एक बार इस सब को छोड़ कर देखें. आप को खुद पता चलेगा कि आप का कितना भला ये पाखंड करते थे और अब छोड़ने के बाद कितना सुकून आप महसूस कर रहे हैं? एक बार कर के जरूर देखिएगा.

ओझाओं की पौबारह

आगरा के एक दुर्गा मंदिर इंद्रपुरी में कहा जाता है कि यहां के पुजारी को दुर्गाजी की सवारी आती है. यहां भक्तों में बड़े व्यवसाइयों के साथसाथ सरकारी मुलाजिम भी आते हैं. मंदसौर में आग के शोलों पर चलना, कोलकाता में नवरात्र के दौरान जीभ पर तलवार रखना, उन्नाव में एक संन्यासी की बातों में आ कर सोना निकलने के लालच में खुदाई करवाना, पद्मनाभ मंदिर में इतना सोना है कि भारत फिर से सोने की चिडि़या बन सकता है, लेकिन उस के छठे द्वार का भय दिखा सोने को उस मंदिर के कर्ताधर्ता पुजारियों ने अपनी मुट्ठी में कर रखा है. ईसाइयों का उंगली क्रौस करना और सांपों के काटने पर ओझा के पास मंत्र से जहर उतरवाने भागना उसी भय की प्रवृत्ति का परिचायक है.

बड़े नाम भी शामिल

80 के दशक में तांत्रिक चंद्रास्वामी के भक्तों की फेहरिस्त में अपने देश के कई बड़े नेताओं सहित विश्व की अन्य हस्तियां भी शामिल थीं. वहीं नैपोलियन काली बिल्लियों से बहुत डरते थे, जबकि विंस्टन चर्चिल काली बिल्लियों को शुभ मान कर छुआ करते थे. कैटरीना कैफ अपनी हर फिल्म के रिलीज से पहले सलीम चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाती हैं, सचिन तेंदुलकर सत्य साईं बाबा के निधन पर फूटफूट कर रोते हैं और मैच के वक्त उलटा पैड पहले पहनते थे. यह उन का प्रसिद्ध टोटका था. अमिताभ बच्चन अपनी बहू के मांगलिक दोष को उतरवाने के लिए पहले उन का विवाह किसी वृक्ष से करवाते हैं. अनिल अंबानी गोवर्धन महाराज पर टनों दूध चढ़ाते हैं, तो मुकेश अंबानी भी आए दिन परिवार और निकट मित्रों के साथ धार्मिक यात्रा करते रहते हैं.

इन हस्तियों को अकसर टोनेटोटके भी करते पाया जाता है जैसेकि अमिताभ बच्चन खुद स्वीकारते हैं कि जब वे क्रिकेट मैच देखते हैं, तो भारत हार जाता है, इसलिए वे वह क्रिकेट मैच जिस में भारत खेल रहा होता है उसे नहीं देखते. ऐसे ही कई खिलाड़ी मानसिक भ्रांतियों पर निर्भर हो जाते हैं जैसेकि वे अपनी योग्यता से नहीं, बल्कि बस में किसी निश्चित सीट पर बैठने से जीतते हैं या फिर वे दस्ताने उन के लिए भाग्यशाली हैं, जिन से उन्होंने गेंद को लपका था न कि उन की बढि़या नजर, सही जगह अथवा प्रशिक्षण जो उन्होंने लिया.

संजीव कुमार ने विवाह नहीं किया, परंतु प्रेम कई बार किया था. उन्हें यह अंधविश्वास था कि उन के परिवार में बड़े बेटे के 10 वर्ष का होने पर पिता की मृत्यु हो जाती है. इन के दादा, पिता और भाई सभी के साथ यह हो चुका था. संजीव कुमार ने अपने दिवंगत भाई के बेटे को गोद लिया और उस के 10 वर्ष का होने पर उन की मृत्यु हो गई. इस से बेहतर होता कि वे विवाह कर लेते, क्योंकि न करने पर भी मृत्यु ने उन का वरण कर लिया.

जिंदगी से मजाक

ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग लोहे की गरम सलाखों से दगवा कर कई बीमारियों का उपचार करा रहे हैं. वहीं बारहसिंघे के सींघों से लोगों के शरीर से रक्त निकाल कर ये बाबा नकारात्मक ऊर्जा को बाहर करने का दावा करते हैं.

हैरानी होती है कि जय गुरुदेव और कृपालु बाबा के मंदिरों में लोट लगाने वाले, निर्मल बाबा, आसाराम और सत्य साईं की जय बोलने वाले, राधे मां और रामरहीम के साथ अश्लीलता की हद तक झूमने वाले शिक्षित भक्त एक बार इन बाबाओं की पृष्ठभूमि और काले कारनामे जानने का प्रयास क्यों नहीं करते?

कुछ बाबाओं की बायोग्राफी पर एक नजर

निर्मलजीत सिंह नरूला, जो कई व्यापार करने के बाद भी नल्ले ही साबित हुए. उस नल्ले नरूला ने अंत में विश्वास के व्यापार की बाजी खेली और उस में निर्मल बाबा के नाम से छा गया. आसाराम जो बांझ औरतों की गोद भरने का चमत्कार दिखाता था, उस के आश्रम में गोद कैसे भरी जाती थी. यह आज पूरी दुनिया जानती है.

स्वामी नित्यानंद नित्य प्रतिदिन कितनी औरतों के साथ ध्यान योग करते थे यह दक्षिण की अभिनेत्री के साथ वीडियो में वायरल हो चुका है.

ये भी कुछ कम नहीं

63 साल का बाबा रामपाल अपने आश्रम में कई महिलाओं और बच्चों को कैद कर के रखता था. अपने आश्रम से कई गैरकानूनी कामों को अंजाम देने वाला रामपाल आज पुलिस की गिरफ्त में है. एक मामूली कर्मचारी से शुरुआत कर विश्व की टौप हस्तियों में एक तांत्रिक के रूप में विख्यात चंद्रास्वामी सब से ज्यादा तब चर्चा में आया जब उस के आश्रम पर इनकम टैक्स की रेड पड़ी और वहां डीलर अदनान खागोशी के 11 मिलियन डौलर के औरिजिनल ड्राफ्ट मिले. चंदास्वामी की अभी हाल ही में मृत्यु हो गई है.

ओशो उन लोगों में शामिल थे, जिन से अमेरिका भी डरता था. अपने आश्रम में खुला व्यभिचार कराने और उसी को एकमात्र ईश्वर प्राप्ति का मार्ग मानने वाले ओशो पर अपने अमेरिकी आश्रम में समर्थकों की हत्या का प्लान रचने जैसे कई आरोप लगे.

कल्याण सिंह के करीबी भाजपा के सांसद रह चुके तांत्रिक साक्षी महाराज को कौन नहीं जानता? 27 मार्च, 2009 को साक्षी महाराज के आश्रम से एक 24 वर्षीय युवती लक्ष्मी का शव बरामद हुआ तो हड़कंप मच गया. साक्षी पर जमीन हथियाने और यौन उत्पीडन के आरोप समयसमय पर लगते रहे हैं. आश्रम के रूप में साक्षी के पास अच्छीखासी संपदा एकत्र है.

इन के लिए धंधा है धर्म

देश भर में 1 रुपए में शिक्षा देने का दावा करने वाले पायलट बाबा ने फ्रौड कर के करोड़ों रुपए कमाए. बाबा अपनी ऊंची पहुंच के कारण बचे हुए हैं. वृंदावन में एक बाबा भगवताचार्य राजेंद्र उर्फ पोर्न स्वामी को पकड़ा गया था. उस के बारे में खुलासा हुआ कि वह अश्लील फिल्में शूट करता है. उस के पास से कुछ ऐसी फिल्में भी बरामद हुईं, जिन में राजेंद्र विदेशी युवतियों के साथ स्वयं अप्राकृतिक यौनाचार करता दिखा. इतना ही नहीं राजेंद्र ने अपनी पत्नी की भी अश्लील सीडी बना कर बाजार में उतार दी थी. बाबा गुरमीत रामरहीम पर कभी आश्रम में रह रहे लोगों की नसबंदी कराने, तो कभी चरित्रहीनता के इलजाम लगते आए हैं. इन दिनों वह अपने रौकस्टार रूप के लिए मशहूर है.

विवादित संत स्वामी भीमानंद का नाम देश भर में बड़े लैवल का सैक्स रैकेट चलाने को ले कर सामने आया. 1997 में उसे लाजपत नगर से पहली बार गिरफ्तार किया गया था. कुमार स्वामी बाबा मंत्रों से रोग सही करते हैं.

धर्म की दुकानदारी

दिवंगत सत्य साईं बाबा के भक्तों, वीआईपी भक्तों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, वीएचपी के अशोक सिंघल और आरएसएस के सभी बड़े नेता उन के दरबार में जाते थे.

अगर ये लोग इतने ही चमत्कारी हैं, तो अपने लिए धन चमत्कारों से ही क्यों नहीं इकट्ठा करते हैं. लोगों से चढ़ावा क्यों लेते हैं? मंदिर बनवाने के बजाय अस्पताल और शिक्षा केंद्र क्यों नहीं बनवाते? जितने रुपए प्रेम मंदिर और जयगुरुदेव आश्रम के निर्माण में लगे अगर उतने रुपए से विश्वस्तरीय शिक्षा केंद्र और अस्पताल खोले जाते, तो जनता का कितना कल्याण होता? मगर इन्हें तो दुकान से आए पैसे दुकान में ही लगाने थे ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक कटें. ऐसी सोच एक पुजारी नहीं दुकानदारी में माहिर सयाना ही रख सकता है.

तंत्रमंत्र के नाम पर धोखा

अंधविश्वासों का दूसरा बड़ा वर्ग है मंत्रतंत्र. अकसर मुसलिम बाबा वशीकरण से विरोधी और उदासीन व्यक्ति को 24 घंटे में अपने वश में करने की गारंटी देते हैं, मगर व्यक्ति 24 घंटे इंतजार करता रह जाता है और बाबा दूसरा मुरगा फंसाने के लिए उड़न छू हो जाते हैं. जादूटोना, शकुन, मुहूर्त, मणि, ताबीज आदि इन्हीं धूर्तों के फैलाए अंधविश्वास हैं. ये लोग अदृश्य शक्तियों का भय दिखा कर और मनगढं़त कहानियां जैसेकि पृथ्वी शेषनाग के फन पर स्थित है. वर्षा, गर्जन और बिजली इंद्र की क्रियाएं हैं. भूकंप की अधिष्टात्री एक देवी है. रोगों की वजह प्रेतपिशाच हैं. औरतों के नंगा हो कर खेत जोतने और मेढकमेढकी का विवाह करवाने से पानी बरसवाने के लिए इंद्र देवता की मिन्नतें इत्यादि सुना कर लोगों से चढ़ावे और दान के रूप में उन की गाढ़ी कमाई लूटते आए हैं और लूटते रहेंगे.

किसी देश की उन्नति अंधविश्वासों के सहारे नहीं होती. उस के लिए कर्मठता की जरूरत होती है. अमीर देशों में भी अंधविश्वासी हैं पर वहां अंधविश्वास विरोधियों, तार्किकों, वैज्ञानिकों की संख्या भी काफी है, जो समाज को निरंतर आगे

ले जाते रहते हैं. भारत में तो कणकण में दकियानूसीपन घुसा है और अब धर्म को देश की बराबरी दे कर अंधविश्वास विरोध को देशद्रोह का दर्जा देने की कोशिश की जा रही है. तमिलनाडु में अध्यादेश साबित करता है कि देश 70 साल में अढाई कोस ही चला है.

– साथ में सपना मांगलिक

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें