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ये 32 मिनट वाले पैरेंट्स बच्चों के लिए खतरनाक हैं

एक नयी स्टडी बेहद निराशाजनक है. इसके मुताबिक आजकल के अभिभावक बच्चों की परवरिश को इस कदर अनदेखा कर रहे हैं कि उनके लिए दिन में मात्र 32 मिनट निकाल पाते हैं. यानी 24 घंटों में महज 32 मिनट ही अपने बच्चों के साथ खेलकूद, खानेपीने, पढ़ाई और दिनभर की बातें करने के लिए देते हैं. जबकि इस से ज्यादा समय तो 4-5 गाने सुनने, ड्राविंग करें, सिगरेट पीने या कोई कोई टीवी सीरीज देखने में गँवा देते हैं. तो क्या बच्चों की अहमियत इतनी कम हो गयी है कि उन्हें महज 32 मिनट की पैरेंटिंग दी जाए?

कोई ताज्जुब नहीं की आजकल के बच्चे कम उम्र से ही अकेलेपन, अवसाद और अपने में सिकुड़ते जाते हैं. माँ-बाप को ये समझना होगा कि बच्चों की ख़ुशी के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी आपका समय. इसलिए हर पेरेंट्स को अपने बच्चों की ख़ुशी और साथ के लिए करने ही चाहिए. जब मातापिता उन्हें समय ही नहीं देंगे तो उनका बौद्धिक और शारीरिक विकास क्या ख़ाक होगा?

बच्चों से समय की चोरी

मील डिलीवरी सर्विस फर्म मंचरी का यह सर्वे करीब 2000 से भी ज्यादा माता पिता के बीच किया गया और इसमें खुद पैरेंट्स ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे अपने लिए समय निकालने के चक्कर में सप्ताह में चार बार अपने बच्चों से समय चुराते हैं. यानी जो टाइम बच्चों को मिलना था वे खुद पर खर्च कर डालते हैं. नए आंकड़ों के मुताबिक़ इस के पीछे अहम कारण यह कि करीब 32 प्रतिशत माता-पिता दफ्तर से घर आकर 8 बजे तक अपने ही काम निबटाते रहते हैं. जबकि यह टाइम पूरी तरह से पैरेटिंग फैक्टर के लिए होता है. और जब तक वे अपने काम निबटा कर फ्री हो पाते हैं बच्चे सो चुके होते हैं या फिर अपनी दुनिया में अपने तरीके से जी रहे होते हैं.

जबकि जो मातापिता काम नहीं करते हैं वे अपने बच्चों को करीब 8-10 घंटे देते हैं. अब आप ही सोचिए कि 8 घंटे और 32 मिनट का यह फर्क बच्चों पर कितना भारी पड़ता है.

शौपिंग जरूरी या बच्चे?

सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि पैरेंट्स बच्चों को सप्ताह में करीब 2 बार भी आउटिंग एक्टिविटी के लिए नहीं ला जाते. जबकि इस से ज्यादा समय वे ऑनलाइन शॉपिंग या ग्रोसरी स्टोर्स पर बिताते हैं. इस के चलते उन्हें बच्चों से प्रतिदिन औसतन पांच बार गलत हरकत या लापरवाही के लिए

डांटना-डपटना पड़ता है. ये आंकड़े तो यह भी बताते हैं कि माता-पिता के व्यस्त कार्यक्रम के चलते उनके और बच्चों के खानपान पर भी निगेटिव असर पड़ता है. साल में करीब 227 बार प्रोपर मील स्किप की जाती है पैरेट्स द्वारा. जाहिर है इसका असर बच्चों की मील पर भी पड़ता है. वहीं करीब 8 प्रतिशत माता-पिता खाना पकाने में बहुत व्यस्त होने की बात स्वीकार करते हैं  और 9 6 प्रतिशत बाहर खाने को लेकर बच्चों को अनदेखा कर जाते हैं.

बिजी शेड्यूल के साइडइफेक्ट्स

करीब 54 प्रतिशत माता-पिता बच्चों को महज 32 मिनट देने के पीछे खुद को बिजी शेड्यूल में फंसा होना बताते हैं. लेकिन यह बात समझने एहोगी कि बिजी शेड्यूल बच्चों से बढ़कर नहीं है. आज आप उन्हें समय नहीं देंगे बाद में बुढापे में खुद इस बात का रोना रोयेंगे कि बच्चों के पास आपके लिए समय ही नहीं है. जबकि उनका आपसे कोई भावनात्मक लगाव बना ही नहीं तो वे आपसे कैसे जुड़ाव महसूस कर पायेंगे.

बेहतर तो यही कि आपको जब भी समय मिले उनके खेलों में शामिल हों. उनसे करीब हों. हर बात साझा करें. उनके मन की जिज्ञासा और बन्द गाठों को खोलें. कारण चाहे जो भी हो,  उनका अवॉयड न करें. यदि वे अकेलेपन में घुटते रहेंगे तो बच्चे का पालन-पोषण प्रभावित होगा. कई पैरेंट्स बच्चों को

डे-केयर सेंटर में भी छोड़ कर अपनी जिम्मेदारी निभा लेते हैं. यह सही नहीं है. यह वैसा ही है जैसे बच्चे बुजुर्गों को ओल्ड एज होम भेजकर अपने कर्तव्यों को इतिश्री कर लेते हैं. ऐसे पैरेंट्स को नए प्रकार की काबिलियत पैदा करनी होती है. जहाँ तमाम बिजी शेड्यूल के बाजवूद बढ़िया प्लानिंग तथा टाइम मैनेजमेन्ट के जरिये बच्चों को उनका वाजिब हक़ और टाइम देना पड़ेगा.

याद रहे, अच्छी पैरेंटिंग का एक ही उसूल है कि जब भी आप अपने नौनिहाल के पास हों हर एक पल खुल कर जिएं. ये काम और जुब है तो बच्चों के लिए ही. जब वे ही आपके पास नहीं होंगे तो आप की मेहनत किस काम की. इसलिए काम और परवरिश में में संतुलन बनाकर चलें. वर्ना बच्चे और लापरवाही बड़े होते देर नहीं लगाते.

होम मेड पिज्जा : बहुत अासान है घर में पिज्जा बनाना

सामग्री

– 200 ग्राम लो फैट मोजरेला चीज

– 2 टेबलस्पून पिज्जा सौस

 

सिजनिंग के लिए

– काली मिर्च आवश्यकतानुसार

पिज्जा बेस के लिए

– 2 ¼ टीस्पून ड्राई यीस्ट

– 2 टेबलस्पून एक्सट्रा वर्जिन औयल

– 1 ½ टीस्पून नमक

– 4 कप ब्रेड फ्लोर

– 1 ½ कप पानी

– 1 टेबलस्पून चीनी

टौपिंग्स के लिए

– 50 ग्राम टमाटर

– 50 ग्राम प्याज

– 1 मुट्ठी ब्लैक औलिव

– 50 ग्राम मशरूम

– 50 ग्राम हरी शिमलामिर्च

– 1 एलपीनो

– 200 ग्राम लो फैट मोजरेला चीज

– 2 टेबलस्पून पिज्जा सौस

विधि

– पहले पिज्जा बेस बनाने के लिए एक बड़े बोल में गर्म पानी और चीनी को मिलाएं.

– जब चीनी पानी में पूरी तरह से घुलकर गायब हो जाए, इसमें ड्राई यीस्ट डालकर 5 मिनट के लिए अलग रख लें.

– अब इसमें औलिव औयल, ब्रेड फ्लोर और थोड़ा-सा  नमक डालें.

– इस सभी सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह से मिक्स कर इसे गूंथ लें.

– यह ध्यान रखें कि पिज्जा बेस सौफ्ट होना चाहिए.

– इस गुंथे मिश्रण को नम कपड़े से ढककर 15-20 मिनट के लिए अलग रख लें.

– इसके बाद इस गुंथे मिश्रण को फ्लैट सतह पर रखें और इसपर थोड़ा-सा आटा छिड़कें.

– फिर से इसे 1-2 मिनट के लिए गूंथें. बेलन से इसे सपाट कर लें.

– पूरे मिश्रण पर बराबर मात्रा में पिज्जा सौस डालें.

– अब सावधानी से इस पिज्जा बेस को बेकिंग सीट पर रखें.

– अब ओवन को 250 डिग्री सेल्सियस पर गर्म कर लें.

– इसी बीच चौपिंग बोर्ड पर सारी सब्जियां बारीक काट लें.

– कटा प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, मशरूम, एलपीनो और औलिव से पिज्जा की टापिंग करें.

– ऊपर से ग्रेटेड मोजरेला चीज वेजिटेबल्स के ऊपर छिड़क लें.

– अब पिज्जा को ओवन में डालें और 10-15 मिनट के लिए चीज मेल्ट होने तक पिज्जा को पकायें.

– काली मिर्च से सिजन करके पिज्जा को स्लाइस में काट कर गर्मागर्म सर्व करें.

अब घर में बनाएं कश्मीर की प्रसिद्द चाय ‘कहवा’

सामग्री :

– दो छोटा चम्मच कश्मीरी चाय पत्ती ‘कहवा’
– दो कप दूध
– दो कप पानी
– चीनी स्वादानुसार
– एक छोटा चम्मच बादाम पाउडर
– एक छोटा चम्मच पिस्ता
– केसर के 7-8 रेशे
– आधा छोटा चम्मच नमक

विधि :

– सबसे पहले धीमी आंच में एक पैन में पानी में चाय की पत्ती डालकर 10 मिनट तक उबालें.

– इसके बाद चाय के बर्तन में एक कप पानी और डालकर इसे चलाते हुए अच्छी तरह से मिक्स करें.

– 2 मिनट बाद इसमें दूध और नमक डालें और धीमी आंच पर 10 मिनट तक पकाएं.

– इसके बाद चाय में केसर डालकर 2 मिनट तक ढककर उबालें और फिर आंच बंद कर दें.

– तैयार है कश्मीरी चाय. इसमें बादाम और पिस्ता डालकर गर्मागर्म सर्व करें.

किचन में समय और पैसे की बचत करना चाहती हैं तो आजमाएं ये उपाय

अगर आप किचन में समय के साथ-साथ पैसों की बचत करना चाहती हैं तो आज हम आपको इसके लिए कुछ आसान सा टिप्स लेकर आए है. इस टिप्स से आप किचन में स्मार्टनेस दिखाकर ऊर्जा की बढ़ती खपत को कम कर सकती हैं.

फ्रीज में रखे फूड को माइक्रोवेव में रखने से कुछ देर पहले फ्रीज से बाहर निकाल कर रख लें, ताकि उसका तापमान सामान्य हो जाए. इससे खाना पकने में ज्यादा टाइम और एनर्जी नहीं लगेगी.माइक्रोवेव का काम हो जाने के बाद उसे मेन स्विच से बंद कर दें.

समय और एनर्जी बचाने के लिए माइक्रोवेव ओवन का इस्तेमाल बढि़या विकल्प है.गैस ओवन के मुकाबले माइक्रोवेव ओवन में ऊर्जा का इस्तेमाल कम होता है. इसलिए माइक्रोवेव ओवन में खाना बनाते समय उसे पहले अच्छे से साफ कर लें, क्योंकि उसमें गिरा फूड, पकने वाले खाने के मुकाबले ज्यादा एनर्जी लेता है.

सेरेमिक और ग्लास के बर्तन, स्टील के बर्तनों की जगह 25 प्रतिशत कम एनर्जी लेते हैं. एक ही टाइम में ग्लास के बर्तनों का खाना स्टील के मुकाबले जल्दी बनेगा. इसलिए ओवन में हमेशा ओवन फ्रेंडली बर्तनों का ही इस्तेमाल करें. इलैक्ट्रिक ओवन यूज करते वक्त उसकी लीड को बार-बार खोल कर चेक न करें कि खाना पका या नहीं.

इन घरेलू नुस्खों से आप को मिलेगी सिर में खुजली से निजात

बदलते मौसम के दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. और अभी हम सर्दियों के मौसम में प्रवेश किए हैं. स्किन और बालों को भी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्हीं में एक है डैंड्रफ जिसके चलते हमें सिर में खुजली की शिकायत रहता है. आज हम आपको बताएंगे कैसे घरेलू चीजों को इस्तेमाल कर इससे निजात पा सकते हैं.

सिर में खुजली से निजात पाने के लिए नींबू सबसे बेस्ट इलाज है. इसके लिए आप 1 छोटा चम्मच नींबू के रस को 1 कप पानी में मिलाकर बालों में 10 से 15 मिनट तक लगाएं. इसके बाद ठंडे पानी से बालों को धो लें. ऐसा हफ्ते में दो बार करें. आपको कुछ ही दिनों में खुजली की समस्या से राहत मिलेगी.

खुजली की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए आप मेथी दाने और राई का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके लिए आपको मेथी दाने और राई का पेस्ट बनाकर 20 मिनट के लिए बालों पर लगाएं और इसके बाद नार्मल पानी से धो लें.

चम्मच अरंडी का तेल, 1 चम्मच नारियल और 1 चम्मच सरसों का तेल मिलाकर अपने बालों में मसाज कर लगाएं. इस तेल को रातभर अपने बालों में लगा रहने दे. सुबह बालों को नार्मल पानी से धो लें

2 चम्मच बेकिंग सोडे में थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इस पेस्ट को हल्के हाथों से बालों पर 15 से 20 मिनट के लिए लगाएं. इसके बाद बालों को धो लें.

ओलिव औयल को बनाएं अपनी शेविंग क्रीम, मिलेगा फायदा

ओलिव औयल (जैतून का तेल) का प्रयोग आप शेविंग के लिये भी कर सकते हैं. भले ही आपको सुनने में यह उपाय थोड़ा अटपटा सा लग रहा हो लेकिन कभी इस नई प्रक्रिया को अपना कर भी देखिये. ओलिव औयल को लगाने के बाद आपकी रूखी त्‍वचा नम तो होगी ही साथ ही इससे कटने और छिलने का खतरा भी नहीं रहता. इससे आपकी त्वचा को भी बेहद फायदा मिलता है. आइये देखते हैं कि ओलिव औयल को शेविंग के लिये कैसे उपयोग में लाया जा सकता है.

आवश्‍यक सामग्री

ओलिव औयल और एक अच्‍छा रेजर

विधि

ओलिव औयल से शेविंग करने के लिये आपको अपना चेहरा पानी से गीला करने की जरुरत नहीं है. एक कप में थोड़ा सा ओलिव औयल डालें और अंगुलियों की सहायता से उसे अपने चेहरे पर अच्‍छी तरह से लगा लें. वह जगह जहां पर ज्‍यादा बाल हैं, वहां पर ज्‍यादा तेल लगाएं.

फायदा

  1. ओलिव औयल से दाढ़ी बनाने का सबसे बढ़ियां फायदा यह है कि इसमें आपकी त्‍वचा पर पड़े पिंपल या दाग-धब्‍बे बिल्‍कुल आसानी से दिखते हैं. जिसके कारण आप दाढ़ी बनाते वक्त थोड़ा सावधान हो सकते हैं. शेविंग फोम को लगा कर त्‍वचा ठीक से दिखती नहीं, जिस कारण आप खुद को ही घाव दे बैठते हैं.
  2. देखा जाता है कि शेविंग रेजर से त्‍वचा जलने लगती है और रेजर बर्न हो जाता है. पर ओलिव औयल का इस्‍तमाल करने से त्‍वचा को नमी मिलती है, जिससे रेजर बर्न नहीं होता और न ही त्‍वचा कटती-छिलती है.
  3. ओलिव औयल पर रेजर की ब्‍लेड आसानी से फिसलती है, जिससे आराम से शेविंग हो जाती है. ओलिव औयल से त्‍वचा नर्म और मुलायम बन जाती है, जिससे आपकी त्‍वचा जंवा हो जाती है.
  4. इसके अलावा ओलिव औयल शेविंग फोम के मुकाबले बहुत सस्‍ता होता है. इसमें न तो किसी प्रकार का केमिकल पाया जाता है और न ही इसको प्रयोग करने के बाद कोई रियेक्‍शन होता है.

साबुन छोड़िये, अपनाइए शावर जैल

पुराने समय से ही लोग नहाने के लिए साबुन का इस्तेमाल करते आ रहें हैं, लेकिन अब लोगों बीच शावर जैल का क्रेज बढ़ता दिख रहा है. रोज की ये भाग-दौड़ और प्रदूषित वातावरण, हमारे शरीर को गंदा कर देता है, जिसके लिये हम रोज साबुन लगा कर नहाते हैं. लेकिन रोज-रोज साबुन का प्रयोग करना हमारे शरीर और त्‍वचा के लिये सही नहीं. चलिये जानते हैं कि शावर जैल साबुन से किस तरह ज्यादा बेहतर है.

स्‍किन इन्‍फेक्‍शन नहीं होता

कहते हैं कि हर घर में सबका साबुन अलग-अलग होना चाहिये वरना इससे त्‍वचा रोग होने की संभावना पैदा हो जाती है. लेकिन यह बात शावर जैल के मामले में गलत है. बाजार में मिलने वाला हर शावर जैल बोतल में आता है, जिसे केवल दबा कर निकालना ही पड़ता है. इसलिये स्‍किन इन्‍फेक्‍शन होने का कोई खतरा नहीं होता.

शरीर की अच्छी सफाई होती है

जब जैल को लूफा में मिला कर शरीर पर रगड़ा जाता है, तो शरीर से मैल साफ होती है. लेकिन कई लोग बस साबुन को ही अपने शरीर से मलते रह जाते हैं और सोंचते हैं कि उनका शरीर साफ हो गया. जैल में अरोमा होता है, जिससे अच्‍छी खुशबू पैदा होती है और कीटाणु दूर होते हैं.

त्‍वचा को कोमल बनाता है

हर शावर जैल में कुछ न कुछ ऐसी सामग्रियां होती हैं जो त्‍वचा को कोमल बनाने के साथ कीटाणुओं से भी लड़ती है. जैसे की मिंट, जो शरीर को जरुरी प्रोटेक्‍शन प्रदान करता करती है.

जैल शरीर को रूखा नहीं बनाता

वे लोग जो साबुन का इस्‍तमाल करते हैं, नहाने के बाद उनके शरीर पर पानी की बूंदे दिखाई पड़ती हैं बजाए उनके जो जैल का प्रयोग करते हैं. साबुन त्‍वचा के लिये कठोर होता है, लेकिन जैल स्‍किन को सौम्‍य बनाता है. इसके अलावा शावर जैल को बस जरा सा इस्‍तमाल करने पर बहुत सारा झाग होता है, लेकिन साबुन को कई बार रगड़ने से ही झाग पैदा होता है, इसलिए साबुन आपकी पाकेट पर महंगा भी पड़ता है.

बाल हो रहे हैं चिपचिप तो अपनाएं ये 6 टिप्स

बालों का चिपचिपा होना बहुत ही आम समस्‍या है. शैंपू करने के तुरंत बाद ही बालों में तेल जैसा महसूस होना हमारी सारी मेहनत पर पानी फेर देता है. अगर आप भी अपने चिपचिपे बालों से छुटकारा चाहती हैं तो अपनाएं ये  नीचे दिए गये कुछ खास टिप्स.

  1. बालों को बर बार न छुएं : अपने बालों से खेलना हर लड़की की आम आदत होती है. शायद आप भी यही करती होंगी लेकिन इससे अपके हाथों में मौजूद तेल, बालों में लग जाते हैं, जिससे वह ग्रीसी हो जाता है. इसलिये अपने बालों को बार-बार छूना बंद कर दें. साथ ही बालों की कंघी को भी साफ रखें.

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2. सही शैंपू का चुनाव : सबसे पहले तो अगर आपके बाल औयली हैं, तो उन्‍हें हर एक दिन छोड़ कर धोएं. इसके अलावा ऐसे शैंपू का चुनाव करें जिसमें मौस्‍चराइजर न हो, वरना बाल जल्‍दी-जल्‍दी औयली होंगे.

3. हेयर जैल : इस तरह के हेयर प्रोडक्‍ट बालों को जल्‍द औयली बनाते हैं. हेयर जैल भले ही बालों को सेट करने के काम आते हों पर इससे बालों में चिपचिपाहट पैदा होती है. इसलिये अगर आकपे बाल औयली हैं, तो इन प्रोडक्‍ट्स का यूज करना बिल्‍कुल बंद ही कर दें. इसके अलावा अगर आपको औयली हेयर से मुक्‍ती चाहिये, तो हमेशा बालों को साफ-सुथरा रखें. खूब सारा पानी पिएं और अपनी डाइट में हरी सब्‍जियां लेना न भूलें.

4. नींबू लगाएं : नींबू बालों को चिपचिपा होने से बचाता है. नींबू के रस को दही के साथ मिला कर बालों पर 30 मिनट तक लगाए रहें. इसके बाद बालों को शैंपू से धो लें. ऐसा करने से न तो बाल चिपचिपे ही होंगे और न ही तेलीय रूसी होगी.

हेयर कलर करने से पहलें रखें इन बातों का ध्यान

5. बाहर निकलने पर बालों को ढंके : सूरज और प्रदूषण से बाल बहुत जल्‍दी खराब होते हैं. धूल-मिट्टी से बाल गंदे और औयली हो जाते हैं. इसलिये बालों को सूरज से बचाने के लिये स्‍कार्फ या टोपी का इस्‍तमाल करें.

6. पसीना : क्‍या आप को पसीना अधिक आता है? अगर ऐसा है, तो यह भी एक कारण है जिससे बाल ग्रीसी हो जाते हैं. पसीने से बाल चिपचिपे हो जाते हैं इसलिये अपने बालों को हर रोज धोएं.

मोबाइल फोन को शरीर के पास रखना है खतरनाक

मोबाइल फोन आज हमारा अभिन्न अंग बन चुका है. इसके बिना जिवन की कल्पना मुश्किल है. लगातार हो रही तकनीकी सुधारों से मोबाइल ने हमारे जीवन को बहुत आसान बना दिया है. हालांकि इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं. जानकारों की माने तो मोबाइल फोन को पौकेट में रखना काफी खतरनाक है, इसका सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है. इस खबर में हम आपको मोबाइल फोन और इसका सेहत पर होने वाले असर से जुड़ी बातें बताएंगे.

affect of mobile on health

कई शोधार्थियों और जानकारों का मानना है कि मोबाइल को जिंस या पैंट के पौकेट में रखने से काफी बड़े नुकसान होते हैं. इससे प्रजनन क्षमता पर काफी नकरात्मक प्रभाव पड़ता है. यही कारण है कि कई लोग फोन या तो अपने बैग में या शर्ट की पौकेट में रखते हैं.

affect of mobile on health

दरअसल होता ये है कि मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन से स्पर्म पर बुरा असर पड़ता है. इससे स्पर्म के बनने की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

जानकारों की माने तो लंबे समय तक फोन को जींस या ट्राउजर की पौकेट में रखने से कई लोगों को इरेक्टाइल डिसफंक्शन की शिकायत भी होती है.

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इसके अलावा शर्ट के पौकेट में फोन रखने से भी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इससे सीधे दिल पर असर होता है और कैंसर की भी संभावना काफी बढ़ जाती है.

आपको बता दें कि मोबाइल फोन से आपकी सेहत पर कितना नुकसान पहुंचेगा ये फोन के सिग्नल स्ट्रेंथ पर निर्भर करता है. ज्यादा देर तक फोन को पास में रखने से टिश्यू पर भी काफी बुरा असर होता है.

affect of mobile on health

इन परेशानियों से बचने के लिए जरूरी है कि आप फोन से जितना हो सके दुरी बनाए रखें. कोशिश करें कि फोन आपके शरीर से जितना हो सके दुर रहे. हालांकि आज के समय में ये मुमकिन नहीं है, पर कोशिश करने में हर्ज नहीं.

ज्यादा जीना चाहते हैं तो रोज पीएं कौफी

कौफी पीना आपके लिए कितना फायदेमंद है इस खबर में हम आपको बताएंगे. हाल ही में हुए एक अध्ययन में ये बात सामने आई कि कौफी पीने वाले लोग, कौफी ना पीने वालों की तुलना में ज्यादा जीते हैं.

health benefits of coffee

दक्षिण कैलिफौर्निया विश्वविद्यालय में हुए एक शोध में ये बात सामने आई है. 1,80,000 लोगों पर हुए इस शोध से ये पता चला कि रोज एक कप रेगुलर या डिकैफिनेटेड कौफी पीने वाले लोग स्वस्थ रहते हैं. एक रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि जो लोग कौफी पीते हैं, उनकी उन लोगों की तुलना में मरने की संभावना 12 फीसदी कम हो जाती है, जो कौफी नहीं पीते. वहीं जो लोग दिन में दो कप कौफी पीते हैं उनके मरने की संभावना 18 फीसदी कम हो जाती है.

health benefits of coffee

होता कुछ यूं हो कि कौफी पीने से दिल की बीमारी. स्ट्रोक, डायबिटीज और सांस जौसी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है. हालांकि इसका असर नस्ल और भागौलिक परिवर्तन के साथ बदल सकता है, पर ये बात तो तय है कौफी पीना फायदेमंद है.

health benefits of coffee

शोधकर्ताओं की माने तो अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि आखिर कौफी में पाए जाना वाला कौन सा तत्व शरीर के लिए फायदेमंद है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कौफी एक स्वस्थ चीज है और इसे जीवन शैली में शामिल किया जा सकता है.

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