एक नयी स्टडी बेहद निराशाजनक है. इसके मुताबिक आजकल के अभिभावक बच्चों की परवरिश को इस कदर अनदेखा कर रहे हैं कि उनके लिए दिन में मात्र 32 मिनट निकाल पाते हैं. यानी 24 घंटों में महज 32 मिनट ही अपने बच्चों के साथ खेलकूद, खानेपीने, पढ़ाई और दिनभर की बातें करने के लिए देते हैं. जबकि इस से ज्यादा समय तो 4-5 गाने सुनने, ड्राविंग करें, सिगरेट पीने या कोई कोई टीवी सीरीज देखने में गँवा देते हैं. तो क्या बच्चों की अहमियत इतनी कम हो गयी है कि उन्हें महज 32 मिनट की पैरेंटिंग दी जाए?

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