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यह क्या कर डाला, विराट ने तो जोड़ा ही बदल डाला

एडिलेड में पहला टैस्ट मैच जीते तो भारतीय क्रिकेट टीम के हौसले बुलंद हो गए, पर पर्थ की कहर बरपाती पिच पर भारत दूसरा टैस्ट मैच फतह न कर पाया. इन दोनों मैचों में उस के सलामी बल्लेबाज के.एल. राहुल और मुरली विजय अपने बल्ले से कोई खास करिश्मा न कर पाए थे.

लिहाजा, कप्तान विराट कोहली ने बुधवार, 26 दिसंबर से मेलबर्न में औस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू हो रहे तीसरे टैस्ट मैच के लिए नऐ नवेले बल्लेबाजों मयंक अग्रवाल और हनुमा विहारी की सलामी जोड़ी को जिम्मेदारी सौंपी है. मतलब भारतीय टीम ने खराब फौर्म से जूझ रहे सलामी बल्लेबाजों लोकेश राहुल और मुरली विजय को इस मैच से बाहर कर दिया है.

मयंक अग्रवाल और हनुमा विहारी को यह जिम्मेदारी सौंपने के अलावा कप्तान विराट कोहली के पास औलराउंडर हार्दिक पंड्या को भी खिलाने का विकल्प था. लेकिन उन्होंने दोबारा फिट हो चुके रोहित शर्मा को एक्स्ट्रा बल्लेबाज के रूप में खिलाने का फैसला किया.

सवाल उठता है कि के.एल. राहुल और मुरली विजय पर गाज क्यों गिरी? अगर के.एल. राहुल की बात करें तो वे औस्ट्रेलिया के इस दौरे में बेहद खराब फौर्म से जूझ रहे हैं और मौजूदा सीरीज की 4 पारियों में उन्होंने केवल 48 रन ही बनाए हैं जिसमें एडिलेड टेस्ट मैच में दूसरी पारी में बनाए गए 44 रन भी शामिल हैं.
इस साल विदेशों में खेलते हुए उन का औसत 20.94 तक गिर गया है और इस दौरान वे 9 टैस्ट मैचों में सिर्फ एक बार अर्धशतक लगाने में कामयाब रहे.

दूसरी तरफ मुरली विजय भी कुछ खास नहीं कर पाए हैं. उन्होंने मौजूदा टेस्ट सीरीज की 4 पारियों में सिर्फ 49 रन ही बनाए हैं. पर्थ में खेले गए दूसरे टैस्ट मैच में उन्होंने दूसरी पारी में 20 रन बनाए थे जो मौजूदा दौरे पर उन का सर्वश्रेष्ठ स्कोर है.

कुल मिला कर साल 2018 में 8 टेस्ट मैचों में उन का औसत सिर्फ 18.80 रहा है जिस में अफगानिस्तान के खिलाफ एक शतक भी शामिल है.

भारत के लिए मुसीबत की बात तो यह भी है कि ओपनर बल्लेबाज पृथ्वी शौ भी चोट खा कर भारत लौट चुके हैं जबकि हनुमा विहारी सलामी बल्लेबाज नहीं हैं. अगर विराट कोहली रोहित शर्मा को बतौर सलामी बल्लेबाज मैदान पर उतारते हैं तो ज्यादा फायदेमंद रह सकता है. क्योंकि वे वनडे मैचों में ऐसा कर चुके हैं और तेजी से रन भी बनाते हैं. फिर उन्हें भी तो टैस्ट मैचों में अपनी जगह बनानी है.

तीसरा मैच कल से शुरू हो रहा है. अब देखते हैं कि यह सरकता साल किस टीम के चेहरे पर जीत की मुस्कान दे कर जाता है.

आप की सेक्स लाइफ से जुड़े हैं ये 50 राज

अमेरिका की राष्‍ट्रीय सर्वे कंपनी ने लोगों के यौन संबंधों पर एक बड़ा सर्वेक्षण करवाया, जिसमें कई प्रकार की बातें सामने आयीं. यही नहीं कई तथ्‍य चौंकाने वाले आये, जो लोगों के अंदर यौन क्रियाओं व यौन इच्‍छाओं के प्रति भ्रांतियों को दूर करने वाले हैं. इस सर्वेक्षण पर एक किताब भी प्रकाशित की गई है जिसका नाम ‘व्‍हॉट विमेन वॉन्‍ट्स: एडवेंचर इन साइंस ऑफ फीमेल डिजायर’ दिया गया.

यह सर्वेक्षण तीन एज ग्रुप्‍स के बीच करवाया गया. पहला 25 से 30 दूसरा 31 से 45 और तीसरा 46 के पार. इस सर्वेक्षण में कई असहज सवाल किये गये, जिनके जवाब लोगों ने खुलकर दिये. इस सर्वेक्षण में लोगों का नाम गोपनीय रखा गया. एक विदेशी अखबार की खबर के मुताबिक इस सर्वेक्षण में करीब 10 हजार लोगों ने भाग लिया. सर्वेक्षण के साथ-साथ कुछ शोधों की रिपोर्ट भी इसमें शामिल की गई है.

इस सर्वेक्षण में सिर्फ यौन संबंधों पर ही नहीं बल्कि प्रेम संबंधों पर भी सवाल किये गये. दांपत्य जीवन, लिव इन रिलेशन शिप में रहने वाले लोगों के जीवन व गर्लफ्रेंड-ब्वौयफ्रेंड के जीवन से जुड़े इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट अमेरिकी सरकार को प्रस्‍तुत की गई है. किताब के लेखक डेनियल बर्गनर ने कहा कि इसमें महिलाओं से जुड़े ऐसे तथ्‍य सामने आये हैं, जिनके बारे में लोग विपरीत ही सोचते हैं.

यौन इच्‍छाएं महिलाओं में ज्‍यादा

आम तौर पर लोग सोचते हैं कि पुरुषों के अंदर यौन इच्‍छाएं ज्‍यादा होती हैं, बल्कि शोध के अनुसार महिलाएं इसमें आगे होती हैं.

उम्र बढ़ाने के लिए शादी जरूरी

शोध के अनुसार यदि आपको ज्‍यादा समय तक जीवित रहना है, तो शादी जरूर करें. शादी के बाद नियमित रूप से यौन संबंध स्‍थापित करने की वजह से मन शांत रहता है और शारीरिक रूप से ज्‍यादा स्‍वस्‍थ्‍य रहते हैं, जिससे आयु बढ़ती है.

यौन संबंध स्‍थपित करने से पहले

शोध के अनुसार यौन संबंध स्‍थपित करने से पहले उस दौरान व उसके बाद तक अपने दिमाग पर कम से कम जोर डालना चाहिए.

आकर्षक दिखने की चाहत

सुंदर और आकर्षक दिखने की चाहत तो कमोबेश हर किसी में होती है, पर इसके लिए स्‍वास्‍थ्‍य से खिलवाड़ कर गुजरता बेहद घातक साबित हो सकता है.

जो कभी शादी नहीं करते

जो स्त्री या पुरुष कभी शादी नहीं करते, उनकी कैंसर से मौत होने की संभावना ज्यादा होती है. इन कैंसरों में फेफड़े, स्तन और प्रोस्टेट जैसे कुल तेरह तरह के सामान्य कैंसर शामिल हैं.

यौन रूप से सक्रिय

यौन रूप से सक्रिय लोगों में से कम से कम 72 प्रतिशत लोगों ने नये साथी के साथ बिना किसी सुरक्षा के यौन संबंध स्‍थापित किये.

मौत के बारे में सोच

मौत के बारे में सोचने वाले पुरुष अपनी मौत से पहले अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने की चाहत रखते हैं.

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं के मूत्र से निकलने वाले ‘ओस्ट्रोजेन’ खाद्य श्रृंखला और पेयजल को संदूषित कर सकते हैं. यह हार्मोन कुछ खास तरह के कैंसर का पोषण कर सकता है.

सबसे ज्‍यादा सेवन

दुनिया भर में गर्भनिरोधक गोलियों का सबसे ज्‍यादा सेवन 15 से 25 साल की उम्र के बीच की लड़कियां करती हैं. क्‍योंकि इस उम्र में असुरक्षित यौन संबंध ज्‍यादा होते हैं.

पति-पत्‍नी के बीच प्रेम संबंध

पति-पत्‍नी के बीच प्रेम संबंध बनाये रखने के लिये दोनों के बीच नियमित रूप से यौन संबंध स्‍थापित होना बेहद जरूरी होते हैं. इससे दोनों के बीच अच्‍छी रिलेशनशिप स्‍थापित होती है.

यौन संबंधी समस्‍या

पति-पत्‍नी में से किसी को भी यदि यौन संबंधी समस्‍या होती है, तो पत्‍नी तुरंत पति को बताती है, जबकि पति ऐसी बातों को छिपा जाते हैं. इसके पीछे मर्दानगी का तमगा सबसे बड़ा कारण है.

ज्‍यादा चिंता से ग्रसित

कुंवारे लोग शादी-शुदा लोगों की तुलना में ज्‍यादा चिंता से ग्रसित रहते हैं और जल्‍दी बीमार पड़ते हैं.

नियमित यौन संबंध

नियमित यौन संबंध स्‍थापित करने से हृदय रोग, हाईपर टेंशन, मधुमेह, आदि जैसे रोग जल्‍दी नहीं लगते हैं.

सेक्‍सुअल रिलेशनशिप

आम तौर पर सेक्‍स को लोग गलत निगाह से देखते हैं, जबकि वयस्‍कों के लिये सेक्‍सुअल रिलेशनशिप बेहद जरूरी और स्‍वस्‍थ्‍य माध्‍यम है अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का.

महिलाओं की मुश्किल

महिलाएं यौन क्रिया के दौरान बड़ी मुश्किल से अपनी चरम सीमा तक पहुंचती हैं, जबकि पुरुष बहुत जल्‍द.

गर्भनिरोधकों की जरूरत

अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में शामिल कम से कम 40 फीसद युवाओं ने कहा कि जब उन्हें गर्भनिरोधकों की जरूरत होती है तो उन्हें इन्हें प्राप्त करने में परेशानी होती है.

कंडोम के प्रति भांति

आमतौर पर लोग यौन संबंधों की चरम सीमा तक पहुंचने से पहले कंडोम का प्रयोग नहीं करते हैं, वे तभी कंडोम लगाते हैं, जब ऑरगैज्‍़म तक जाना होता है. उन्‍हें लगता है कि ऐसे लड़की गर्भवती नहीं होगी, जबकि ऐसा नहीं है. आमतौर पर स्‍खलित होने से पहले जो पानी जैसा पदार्थ आता है, उसमें भी कुछ शुक्राणु आ जाते हैं, जिनके अंडाशय तक पहुंचने की संभावना उतनी ही प्रबल होती है, जितनी की बाद के.

लिंग का टेढ़ा पन

आम तौर पर जब किसी का लिंग टेढ़ा हो जाता है, तो उन्‍हें लगता है कि वो किसी विकार से ग्रसित हैं, जबकि विकार की स्थिति तभी उत्‍पन्‍न होती है, जब टेढ़ा होने के साथ-साथ उसमें दर्द या सूजन हो.

लिंग में फ्रैक्‍चर

लोग सोचते हैं कि लिंग में हड्डी नहीं होती, इसलिये फ्रैक्‍चर हो ही नहीं सकता, बल्कि यह धारणा पूरी तरह गलत है. तनाव के वक्‍त अगर लिंग को जोर से मोड़ दें, तो उसकी मांसपेशियों के टूटने का खतरा हमेशा होता है. यह फ्रैक्‍चर ऐसा होता है, जिसका फिर से पूरी तरह ठीक होना संभव नहीं.

मैथुन से जुड़ी भ्रांति

लोगों में एक भ्रांति होती है कि मैथुन करने से नपुंसकता आती है और आगे चलकर बच्‍चे पैदा करने में वो इंसानर अक्षम हो जाता है. जबकि ऐसा कुछ नहीं है. वैज्ञानिकों के अनुसार मैथुन मा‍नसिक शांति प्रदान करता है. यह स्‍वास्‍थ्‍य के लिये तभी हानिकारक होता है, जब जरूरत से ज्‍यादा किया जाये. जरूरत से ज्‍यादा मैथुन करने से ही लिंग में टेढ़ापन आता है.

महिलाएं भी करती हैं मैथुन

यह बात बहुत लोगों को नहीं पता होती है, कि महिलाएं भी मैथुन करती हैं. हालांकि ऐसी महिलाओं की संख्‍या आम तौर पर कम होती है.

क्‍या होता है सिगरेट, शराब, तनाव से

सिगरेट, शराब, आदि के अधिक सेवन व जरूरत से ज्‍यादा तनाव लेने से पुरुषों के स्‍पर्म काउंट कम होने की आशंका बनी रहती है. यदि स्‍पर्म काउंट कम हुआ बच्‍चा पैदा करने में कठिनाई होती है. भले ही लिंग में कड़ापन आता है.

जब माहौल सुरक्षित होता है

जब माहौल सुरक्षित होता है, खाने-पीने की दिक्कत नहीं होती और परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो पुरुष अपने बच्चों और पत्नी के साथ खुश रहते हैं. हालात खराब होने पर पुरुष अल्पकालीन तरीके अपनाते हैं और अधिक संभोग करते हैं.

आलिंगनबद्ध होकर सोना

सर्वे के अनुसार 22 प्रतिशत पुरुष पूरी रात आलिंगनबद्ध होकर सोना चाहते हैं, जबकि ऐसा चाहने वाली महिलाओं की संख्या 18 प्रतिशत है.

कच्ची उम्र में

कच्ची उम्र में लापरवाही से सेक्स करने के कारण महिलाओं में सर्विकल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं.

दुबला-पतला दिखना

दुबला-पतला दिखना उनके लिए खतरनाक हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे के लिए योजना बना रही महिलाओं के लिए मोटे होने से अधिक खतरनाक पतला होना है.

विपरीत परिस्थितियों के दौरान

विपरीत परिस्थितियों के दौरान पुरुष में अधिक शारीरिक संबंध बनाने की प्रवृति देखने को मिलती है.

पूर्व योजना के गर्भधारण

36 फीसद लोगों ने कहा कि उन्हें एक ऐसे नजदीकी मित्र अथवा परिवार के सदस्य के बारे में जानकारी है, जिसे बिना पूर्व योजना के गर्भधारण हो गया.

अनियोजित गर्भधारण

अनियोजित गर्भधारण और यौन संचारित संक्रमणों पर केंद्रित सर्वे के अनुसार करीब एक-तिहाई लोगों को मित्रों से गर्भनिरोधकों के बारे में गलत सूचना मिली.

कंडोम का इस्‍तेमाल

ऐक्‍शन एड के सर्वे के एक सर्वे के अनुसार ग्रामीण इलाकों में व निचले तबकों में 80 फीसदी पुरुष कंडोम का इस्‍तेमाल नहीं करते हैं.

निगाहें सीधे उनके स्‍तनों पर

सर्वे के अनुसार सामने अगर अगर महिला खड़ी है, और उसकी ओर देख नहीं रही है, तो 83 फीसदी पुरुषों की निगाहें सीधे उनके स्‍तनों पर पड़ती है. पुरुष महिला के पीछे है, तो उसकी पहली निगाह उसके हिप्‍स की ओर जाती है.

पुरुषों को गले लगना

अध्ययन में पता चला है कि पुरुषों को गले लगना ज्यादा पसंद आता है, जबकि तीन में से एक महिला खुद को इस अवस्था में सहज महसूस नहीं करती और पुरुष साथी की नाराजगी के डर से दबाव में ऐसा करती है.

सोने के लिए

सोने के लिए जाने से पहले 55 प्रतिशत महिलाएं अपने पुरुष साथी को आलिंगन की इजाजत देती हैं.

बिस्तर पर आलिंगनबद्ध

45 प्रतिशत महिलाएं स्वीकार करती हैं कि उन्हें बिस्तर पर आलिंगनबद्ध होना पसंद नहीं है और वे अच्छी नींद लेना चाहती हैं.

बिस्तर पर अपने साथी के साथ

पांच में से एक महिला का कहना है कि वह बिस्तर पर अपने साथी के साथ लंबे समय तक शारीरिक संपर्क में नहीं रहना चाहती. क्‍योंकि वो असहज महसूस करती हैं.

इंटरनेट इस्‍तेमाल करने वाली महिला

इंटरनेट इस्‍तेमाल करने वाली महिलाओं में 10 फीसदी का कहना है कि वह बिस्तर पर अपने साथी के साथ आलिंगनबद्ध होने की बजाए फेसबुक देखना पसंद करती हैं.

केवल दो बार

सर्वे के अनुसार एक-तिहाई महिलाएं सप्ताह भर में केवल दो बार ही यौन संबंध स्‍थापित करती हैं.

झगड़े की स्थिति

करीब 36 प्रतिशत पुरुष कहते हैं कि रात के समय आलिंगन न होने से शयनकक्ष में तनाव या झगड़े की स्थिति होती है.

तीव्र दर्द महसूस हुआ

एक तिहाई महिलाओं का कहना है कि पहली बार संभोग करने पर उन्‍हें गुप्‍तांगों में तीव्र दर्द महसूस हुआ.

पुरुषों का कहना

62 फीसदी पुरुषों का कहना है कि मैथुन के बाद संभोग करने से उनके लिंग में दर्द होता है, जिस वजह से उनका मजा खराब हो जाता है.

कंडोम का प्रयोग

सर्वे के अनुसार 14 से 17 वर्ष की आयु के बीच यौन संबंध स्‍थापित करने वाले 75 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्‍होंने कंडोम का प्रयोग न के बराबर किया.

कंडोम का इस्‍तेमाल पसंद नहीं

79 फीसदी पुरुष कहते हैं कि उन्‍हें कंडोम का इस्‍तेमाल करना पसंद नहीं, लेकिन पार्टनर के गर्भवती होने व यौन संक्रमण से बचने के लिये वो मजबूरन प्रयोग करते हैं.

कंडोम पसंद नहीं

73 फीसदी महिलाएं कंडोम का प्रयोग पसंद नहीं करती हैं.

मैथुन करना पसंद

45 से ज्‍यादा उम्र के पुरुषों के बीच किये गये सर्वेक्षण के अनुसार 23 फीसदी पुरुष इस उम्र में भी हस्‍त मैथुन करना पसंद करते हैं.

असहज महसूस करती हैं

सर्वेक्षण के अनुसार 63 फीसदी महिलाएं सार्वजनिक स्‍थान पर कंडोम या अन्‍य गर्भनिरोधक से जुड़े सवाल पर असहज महसूस करती हैं.

सैनिटरी पैड

सर्वे के अनुसार 43 फीसदी लड़कियां सैनिटरी पैड खरीदने में झिझकती हैं. ऐसी लड़कियां उसी दुकान से पैड खरीदना पसंद करती हैं, काउंटर पर महिला हो.

कंडोम खरीदते वक्‍त

87 फीसदी पुरुष मेडिकल स्‍टोर या अन्‍य दुकान पर कंडोम खरीदते वक्‍त कतई नहीं झिझकते हैं.

शादी-शुदा मर्दों के साथ

11 फीसदी महिलाएं जो शादी के पहले यौन संबंध स्‍थापित कर चुकी थीं, उनके अंदर उस दौरान शादी-शुदा मर्दों के साथ सोने की इच्‍छा होती थी.

50 साल की उम्र के ऊपर

50 साल की उम्र के ऊपर के पुरुष कंडोम का इस्‍तेमाल सबसे कम करते हैं. यह एक चिंता का विषय है.

अन्‍य स्‍त्री अथवा पुरुष

सर्वेक्षण के अनुसार 89 फीसदी पुरुषों ने और 68 फीसदी महिलाओं ने यह स्‍वीकार किया कि अपने लाइफपार्टनर के साथ यौन संबंध स्‍थापित करते वक्‍त अकसर वे किसी अन्‍य स्‍त्री अथवा पुरुष के बारे में सोचते हैं.

सावधान : सेक्स की भूख कहीं आप से भी ये सब न करवा दे

किसी भी चीज की लत हमेशा गलत होती है, चाहें वो शराब की हो, जुआ खेलने की हो हो या फिर सेक्‍स की. अब आप सोच रहे होंगे कि किसी को सेक्‍स की लत भी लग सकती है. तो हम आपको बता दें कि ब्रिटेन की सेयी कोलाड नाम की एक महिला को 17 साल की कच्‍ची उम्र में ही सेक्‍स की ऐसी लत लगी कि उसने 370 अंजान मर्दों के साथ संबंध बनाया.

सेयी कोलाड अब 40 साल की हो चुकी है. उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात होती थी कि वो बार में पहुंचे, किसी अजनबी से मिले और कुछ ही घंटों के बाद वो उसके बिस्‍तर पर हो. सेयी कोलाड की उम्र जब 19 साल थी तो वो 40 अलग-अलग मर्दों के साथ हमबिस्‍तर हो चुकी थी. सेयी कोलाड सेक्‍स की इस कदर एडिक्‍ट हो गई थी कि कभी-कभी वो एक दिन में 6 या 7 मर्दों के साथ सेक्‍स करती थी. हालांकि 13 साल की उम्र में ही सेयी ने अपनी वर्जिनिटी गवां दी थी.

इस एडिक्‍शन ने सेयी की जिंदगी भी तबाह कर दी. वो कई तरह के सेक्‍स इंफेक्‍शन से पीड़ित है. उसे इन आदतों के चलते घर और परिवार छोड़ना पड़ा. उसने दो बार गर्भपात कराया. आप सुनकर हैरान हो जायेंगे कि 14 साल की उम्र में ही सेयी कोलाड ने एक बच्‍ची को जन्‍म दिया था.

सेयी कोलाड ने बताया कि सबसे कम उम्र में मां बनने के बाद उसका बचपन ही उससे छिन गया था. आखिर जब वह 16 साल की हुई तो उसने अपनी बेटी सारा के साथ घर छोड़ दिया और दोनों साथ रहने लगे. लेकिन वह बेहद अकेलापन महसूस करती थी. वह बहुत बुरी हालत में पहुंच गई थी.

सेयी एक हाउसिंग सोसाइटी में रहने लगी. उसकी उम्र तब 17 साल थी. वह अपने 31 साल के ब्वायफ्रेंड पौल से मिली. सेयी अपने अकेलेपन को मिटाने के लिए ब्वायफ्रेंड पौल के साथ सेक्स करना शुरू कर दिया. उसे लगता था कि इससे उसका अकेलापन मिटा जाएगा, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था.

अकेलापन कम नहीं होते देख सेयी पौल की नजर बचाकर हफ्ते में एक बार पब में जाती और वहां किसी अपरिचित को फांस उसके साथ हमबिस्तर होती. इसके बाद यह सिलसिला बढ़ता ही गया. सेयी ने बताया कि मुझे सेक्स की जरूरत होती थी. इसके बाद मैं राहत महसूस करती थी. जब मैं सेक्स नहीं करूं, तो मेरा आत्मविश्वास खो जाता था. मुझे बेहद बुरा फील होता था. मैं काफी अपसेट और डिप्रेस हो जाती थी. अच्छा महसूस नहीं होने पर वह फिर से जल्द से जल्द सेक्स करना चाहती थी.

सेयी 17 साल की उम्र में एंड्रयू से प्रेग्नेंट हो गई और उसने बच्चे को जन्म दिया. उसने बताया कि वफादार रहने की कोशिश कम नहीं की. लेकिन वह एक दिन में उससे चार से पांच बार सेक्स करना चाहती थी. उसके ब्वॉयफ्रेंड के लिए यह संभव नहीं था. इधर जब भी उसका सेक्शुअल फ्रस्ट्रेशन बढ़ता तो फिर वह कहीं भी जाकर अपनी प्यास बुझाती थी.

सेयी ने बताया कि सेक्स एडिक्शन उसे वहशी बना देता था. उसने कहा कि मेरे अकेलेपन का इलाज सिर्फ सेक्स था. सेयी ने बताया कि ऐसे पांच लोग थे, जिनसे वह जब चाहती थी, सेक्स के लिए मिलती थी. कई ऐसे अपरिचित लोग भी थे, जिनके साथ वह हमबिस्तर हुई. वह बार में जाती थी और जल्द ही किसी से नजदीकी बना लेती थी. वह बिस्तर में खूबसूरती के साथ सेक्स करती थी, जिससे पार्टनर के लिए वह काफी अहम बन जानती थी.

सेयी लगभग हर रात बाहर जाती थी और अपने बच्चों को घर में बंद कर जाती थी. वह सिर्फ सेक्स के बारे में ही सोचती थी. 22 से 30 साल की उम्र के बीच उसकी जिंदगी एक तरह से बदनुमा हो चुकी थी और सेक्स एडिक्शन बुरी तरह से हावी था. वह एक हफ्ते में बार में पांच से छह लोगों से मिलती थी. 26 की उम्र में वह फिर प्रेग्नेंट हो गई और फिर उसने गर्भपात करवाया. वह जब भी किसी के साथ जाती थी, पहले ड्रिंक करती और फिर सेक्स.

बस किजिये ये 5 काम, लोग खुद ब खुद हो जाएंगे आप से इंप्रैस

जब आप लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें ये लगता है कि लोगों का ध्यान सिर्फ बड़ी चीजों पर होता है, जो वे करते हैं. लेकिन वास्तविकता यह है कि छोटी चीजें सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती हैं और लोगों को इम्प्रेस कर देती हैं. आपकी बातें और व्यवहार पर निर्भर करता है कि आपका प्रभाव लोगों पर कैसा होगा.

जब हम किसी से मिलते हैं तो कुछ ही मिनटों में हम उनके बारे में अपनी राय बना लेते हैं इसलिए कुछ मिनटें भी महत्वपूर्ण हैं. आइए जानते हैं वो कौन सी चीजें हैं जो आप अनजाने में करते हैं जिनसे लोग इम्प्रेस हो जाते हैं.

दूसरों की इज्जत करना – अपने से छोटे, बड़े, परिवार का कोई सदस्य या सहकर्मी सभी की इज्जत करते हैं. चाहे आपकी कोई इज्जत करें या ना करें. इस वजह से आप दूसरों के प्रति ना अपनी राय बदलते हैं और ना ही उनके प्रति आपके में कोई इज्जत कम होती है.

समय की अहमियत – अगर आप किसी को एक निर्धारित समय देते हैं तो आप उस समय उनके साथ होते हैं, क्योंकि आपको समय की कीमत पता होती है. आपको यह बात पता होती है कि अगर आप समय पर नहीं पहुंचेंगे तो शायद आपके प्रति सामने वाले की गलत हो सकती है.

थैंक यू और प्लीज बोलना न भूलें– ये शब्द सुनने में तो बहुत छोटे लगते हैं, लेकिन अगर आप इन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो इससे आप ना चाहते हुए भी सामने वाले को इम्प्रेस कर देते हैं, क्योंकि इससे आपके स्वभाव का पता चलता है और यह भी पता चलता है कि आप अपने आस-पास के लोगों के बारे में क्या सोचते हैं.

साथी के लिए वफादार होना– अपने साथी के प्रति वफादार रहना बहुत बड़ी बात होती है. अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके साथी के मन में आपके प्रति इज्जत और प्यार दोनों बढ़ जाएगा. अगर आप अपने पार्टनर के लिए वफादारी और सच्चाई दिखाते हैं तो आप उन्हें अपनी जिंदगी में उनकी अहमियत महसूस कराते हैं और इससे आपका रिश्ता मजबूत बन सकता है.

वादा निभाना – अगर आप किसी से कोई वादा करते हैं और उसे पूरा करते हैं तो यह सामने वाले पर अच्छा प्रभाव छोड़ता है. यह बात मायने नहीं रहती है कि वो वादा छोटा है या बड़ा.

राइस डंपलिंग्स सूप

सामग्री

– 10-12 पालक के पत्ते

– 1 बड़ा टमाटर

– 1 कली लहसुन

– 1 छोटा टुकड़ा अदरक

– 1 छोटा प्याज

– 1/2 छोटा चम्मच कालीमिर्च

– 3 बड़े चम्मच चावल का आटा

– 1 छोटा चम्मच बटर

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– पैन में 1 कप पानी उबालें.

– इस में पालक के पत्ते, टमाटर, प्याज, अदरक व लहसुन डालें. चावल के आटे में 2 चुटकी नमक व एकचौथाई कप पानी मिलाएं.

– इस आटे की गोलियां रोल कर के उबलते पालक के पानी में डाल 5-6 मिनट बाद आंच से उतार लें.

– चावल की डंपलिंग्स चम्मच से बाहर निकाल लें.

– प्लेट में बाकी सामग्री को मिक्सी में पीस लें.

– पैन में मक्खन गरम कर चावल की डंपलिंग्स और पालक का सूप डालें.

– इस में नमक व कुटी कालीमिर्च डाल कर 2 मिनट पका कर गरमगरम सर्व करें.

चिक पी स्वीट पोटैटो करी

सामग्री

– 1 कप उबले छोले

– 1 छोटा प्याज

– 1-2 कलियां लहसुन

– 1 हरीमिर्च

– 1 छोटा टुकड़ा अदरक

– 2 टमाटर

– 2 उबली शकरकंदी

– 1 छोटा चम्मच छोला मसाला

– 1 छोटा चम्मच इमली का पेस्ट

– 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

– 1/4 छोटा चम्मच मिर्च पाउडर

– 1 बड़ा चम्मच तेल

– थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– प्याज, लहसुन, अदरक, हरीमिर्च व टमाटर को मिक्सी में पीस लें.

– कड़ाही में तेल गरम कर हलदी, धनिया पाउडर व मिर्च पाउडर डाल कर टमाटर का मसाला भूनें.

– स्वादानुसार नमक डाल कर 4 मिनट तक पकाएं.

– शकरकंदी, छोले व 1 कप पानी डाल कर 3-4 मिनट तक पकाएं.

– इमली का पेस्ट व छोला मसाला डाल कर पकाएं. धनियापत्ती से सजा कर सर्व करें.

इस ब्लड ग्रुप के लोगों को ज्यादा काटते हैं मच्छर, जानिए वजह

कुछ लोगों को ज्यादा ही मच्छर काटते हैं. एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि ‘ए’ ग्रुप के लोगों को ज्यादा ही मच्छर और कीट काटते हैं. इस ब्लड ग्रुप के लोगों की ओर कुछ ज्यादा ही मच्छर आकर्षित होते हैं. इसमें खटमल भी शामिल हैं. कई बार इन कीड़ों के काटने से गंभीर बीमारियां हो जाती हैं.

इस शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में एक डिश पर जीवाणुरहित फिल्टर पेपर पर ‘ए’, ‘बी’, ‘एबी’, व ‘ओ’ रक्त का एक नमूना गिराया. इसके बाद एक कीड़े को डिश में रखा गया और करीब दो मिनट तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई.

नतीजों से पता चला कि 36 फीसदी कीड़ें ने ‘ए’ रक्त वाले समूह को पसंद किया, जबकि 15 फीसदी परजीवी रक्त समूह ‘बी’ की तरफ आकर्षित हुए.

इस शोध से ये बात सामने आई कि रक्त समूह कीड़ों में खाने को तवज्‍जो देने का एक कारक हो सकता है. उन्होंने कहा, किलनियों के संभावित पंसद की जानकारी का इस्तेमाल विशेष रक्त समूह के लोगों को काटने के जोखिम को कम करने में किया जा सकता है.

रिश्तों को लेकर न करें समझौता

अच्छे रिश्तों का हमारे जीवन में काफी महत्व है. रिश्ते हमें आगे बढ़ने और सफल होने के लिये प्रेरित करते हैं और हमें बेहतर भी बनाते हैं. पर कई रिश्तें ऐसे होते हैं जिनमें रहना भी आपके लिए मुश्किल होता है. ये रिश्ते आपके व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं. ये आपके व्यक्तित्व को बदलने की कोशिश करते हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या आप चाहते हैं कि अपना व्यक्तित्व किसी रिश्ते के लिए बदल दें. आइए, इस लेख के जरिए इसका जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

आत्म विश्वास और आत्म सम्मान

कुछ रिश्ते हमें हमारे बेहतरीन छवि से मिला देते हैं तो कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनमें होकर हम खुद को कम और अयोग्य मानने लगते हैं. ऐसे रिश्तों से दूरी बनाना बेहतर होगा जो आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव डालें. किसी भी रिश्ते के लिए अपना आत्म-सम्मान और आत्म विश्वास कम कर देना बिल्कुल उचित नहीं है. अगर किसी रिश्ते की शुरुआत में ही आप नोटिस कर रहे हैं कि आपमें आत्म विश्वास कम होने लगा है तो ध्यान दें कि क्या आप उस रिश्ते के लिये बनें हैं.

आपके सपने

अच्छा रिश्ता एक साथी की तरह होता है. ऐसे रिश्ते में लोग एक-दूसरे का समर्थन करते हैं और हर कदम पर एक दूसरे का साथ देते हैं. आप दोनों के अलग सपने होना सामान्य बात है लेकिन इसके लिए आप एक-दूसरे को सपोर्ट करते हैं. आप अपनी जिंदगी से क्या चाहते हैं ये आपके लिए अहमियत रखता है और कोई भी अपने रिश्ते के लिए अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहेगा. यह जरुरी है आपका पार्टनर आपको आपके सपनों के साथ स्वीकार करें और उन्हें पूरा करने में आपकी मदद करें.

दूसरे रिश्ते

किसी एक विशेष इंसान के साथ आपके रिश्ते के चलते आपके बाकी रिश्ते खराब नहीं होने चाहिए. आपके बौयफ्रेंड, गर्लफ्रेंड, मंगेतर या पति के कारण आपके पारिवारिक रिश्ते, आपके दोस्तों के साथ रिश्ते छूटने नहीं चाहिए. आप किसी एक रिश्ते के लिए इतने सारे लोगों के साथ अपने सम्बंध नहीं तोड़ सकते. आपका साथी ऐसा होना चाहिए जिसे आपके बाकी रिश्तों से कोई दिक्कत ना हो और आपके किसी और के साथ समय बिताने से उसे जलन या संदेह ना हो.

आखिर क्यों नहीं आ रहे देश की राजनीति में युवा

भारत में युवाओं की आबादी सर्वाधिक होते हुए भी राजनीति में बुजुर्ग और प्रौढ नेताओं का वर्चस्व कायम है. हाल में हुए 5 राज्यों के चुनावों में युवाओं की अपेक्षा ज्यादातर अधिक उम्र के नेता चुन कर आए हैं. राज्यों में गिनेचुने युवा ही विधानसभाओं में पहुंचे हैं.

इन राज्यों में जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो युवाओं की बजाय बुजुर्ग नेताओं को तरजीह दी गई. मध्यप्रदेश में 72 साल के कमलनाथ, राजस्थान में 68 वर्षीय अशोक गहलोत, तेलंगाना में 64 साल के के चंद्रशेखर राव, छत्तीसगढ में 58 वर्षीय भूपेश बघेल और मिजोरम में 74 सा के जोरामथंगा के हाथों बागडोर सौंपी गई.

मध्यप्रदेश के 230 विधानसभा सदस्यों में से 41 से 55 साल के 46 प्रतिशत, 56 से 70 के बीच 35 प्रतिशत उम्र के नेता आए हैं. युवा केवल 17 फीसदी हैं यानी ये 25 से 40 साल के बीच के हैं. इन के अलावा 71 से ऊपर 2 प्रतिशत हैं.

90 सदस्यों वाली छत्तीसगढ विधानसभा में 82 प्रतिशत विधायक प्रौढ और बूढे हैं. इन में 41 से 55 उम्र क नेता 42 प्रतिशत हैं तो 56 से 70 के बीच के 33 प्रतिशत हैं. युवा केवल 18 प्रतिशत ही आए हैं. 71 से अधिक उम्र के 7 प्रतिशत नेता हैं.

तेलंगाना में युवा केवल 4 प्रतिशत ही हैं. सब से ज्यादा 41 से 55 की उम्र के 56 प्रतिशत हैं. 38 प्रतिशत की उम्र 56 से 70 के बीच है. यहां कुल 119 सदस्य हैं. मिजोरम के कुल 40 विधायकों में से 8 युवा हैं जो 25 से 40 के बीच के हैं.

राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में दोनों पार्टियों की ओर से युवा दहाई का आंकड़ा भी पूरा नहीं कर पाए. कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों में बुजुर्ग और मध्यम आयु वर्ग के विधायकों का बाहुल्य है. कहने को प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व युवा सचिन पायलट के हाथों में था पर कांग्रेस में वह अधिक से अधिक युवाओं को टिकट ही नहीं दिला पाए.

कांग्रेस ने इस बार केवल 4 युवा छात्र नेताओं को टिकट दिए. एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष रहे मुकेश भाकर, लाडनूं से मनीष यादव, शाहपुरा और राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष रहे रामनिवास परबतसर से जरूर जीते लेकिन अन्य कई दावेदारों की अनदेखी की गई. जयपुर की सांगानेर विधानसभा से राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंद्र भारद्वाज को टिकट मिला पर वह हार गए.

भाजपा ने युवाओं को ज्यादा महत्व ही नहीं दिया. भाजपा ने इस बार युवा छात्र नेताओं को टिकट नहीं दिए. एमडीएस यूनविर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष विकास चौधरी को किशनगढ से खड़ा किया गया. पार्टी से टिकट के प्रबल युवा दावेदार जीतेंद्र मीणा, अमित शर्मा, महेंद्र शेखावत, अखिलेश पारीक, शंकर गोरा, राजकुमार बिवाल, राजेश मीणा को टिकट ही नहीं दिया गया. ये सब छात्र राजनीति से हुए रहे हैं.

पिछली बार जमींदारा पार्टी की ओर से चुनी गईर्ं सब से कम उम्र की विधायक कामिनी जिंदल इस बार हार गईं.

राजस्थान में 2013 में कुल 14 युवा विधायक आए थे. 2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की ओर से अनूपगढ से शिमला बावरी, पीलीबंगा से द्रोपदी मेघवाल, जालौर से अमृता मेघवाल विधायक बनी थीं पर इस बार तीनों को टिकट नहीं दिया गया. सागवाड़ा से अनीता कटारा को टिकट काट दिया गया.

दूसरे राज्यों में भी देखें तो आंध्रप्रदेश में चंद्रबाबू नायडु, अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू, असम में सर्बानंद सोनोवाल, ओडिसा में नवीन पटनायक, उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह, कर्नाटक में सिद्घारमैया, केरल में पिनाराई विजयन, गुजरात में विजय रूपाणी, गोवा मनोहर पर्रीकर, झारखंड रघुवरदास, तमिलनाडु के पलानीस्वामी, पंजाब अमरिंदर सिंह, बिहार नीतीश कुमार, हरियाणा मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल प्रदेश जयराम ठाकुर, पश्चिम बंगाल ममता बैनर्जी जैसे मुख्यमंत्री प्रौढ नहीं, बूढों की गिनती में हैं. इन में अधिकतर 60 साल से ऊपर के हैं.

कहने को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस युवा हैं लेकिन उन की सोच अभी पांच हजार साल पुराने विचारों पर टिकी हुई है. इन्हें आज भी विज्ञान की बजाय प्राचीन धार्मिक मिथकों पर ज्यादा भरोसा है. बातबात में ये नेता अपना धार्मिक ज्ञान जनता को देते रहते हैं. यह किसी से छुपा हुआ नहीं है इसलिए ये दोनों नेता युवा होते हुए भी वृद्घों के विचारों से अलग राय नहीं रखते.

केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री और उन का मंत्रिमंडल भी बूढों से भरा हुआ हैं.

देश और राज्यों का नेतृत्व जब इन उम्र के नेताओं के हाथों में है तो नए विचार, नया विकास कहां से आएगा? यह वो पीढी है जो राम का नाम जपने, मंत्र पढने, हवनयज्ञ कराने, ब्राह्मणों को दानदक्षिणा देने, गौ सेवा करने, स्वर्गनरक में विश्वास जैसे धार्मिक पाखंडों के जरिए समस्याओं के समाधान पर भरोसा करती आई है.

देश और राज्यों की तरक्की के लिए यह नेतृत्व अपने राज्यों में तीर्थयात्राएं, हवनयज्ञ, मंदिर दर्शन, धर्मस्थलों का निर्माण, दानदक्षिणा जैसे धार्मिक कर्मकांडों में उलझा रहता हैं. कई राज्यों में तो धार्मिक मंत्री तक बनाए गए हैं.

भारत एक युवा समाज है. 1.25 अरब की आबादी में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं. दूसरे देशों की अपेक्षा भारत में इन की जनसंख्या सब से अधिक है. इस लिहाज से युवा भारत होते हुए देश में एक भी युवा विधानसभा नहीं है.

राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य, सचिन पायलट जैसे युवा कहलाने वाले नेता भी पैतृक विरासत से आए हुए हैं. जो युवा चुन कर आए हैं उन में भी ज्यादातर युवा नेता राजनीतिक परिवारों से जुड़े हुए हैं.

राजनीति में आज ऐसे युवा नेता नहीं जो युवाओं में क्रांति का संचार कर सके इसलिए मतदाताओं को पुराने बूढे और युवा नेताओं में कोई फर्क नजर नहीं आता.

कहने को हर राजनीतिक दल में अपनेअपने युवा विंग हैं. भारतीय युवा कांग्रेस, अखिल भारतीय विद्यार्र्थी परिषद, स्टूडेंट फैडरेशन औफ इंडिया जैसी राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर युवा राजनीतिक शाखाएं काम कर रही हैं.

सवाल यह है कि क्या राजनीतिक नजरिए से हमारे युवा नेताओ के विचार मौजूदा नेताओं से अलग है? जवाब है नहीं. हमारे युवा नेताओं के विचार किसी भी तरह से नए, क्रांतिकारी और बदलाव के वाहक नहीं हैं. युवाओं को परिवर्तन, क्रांति की राजनीति की उम्मीद है पर वह उस पर उतरते दिखाईर् नहीं देते.

युवा राजनीति से इसलिए उदासीन हैं और राजनीति की बजाय वह दूसरे क्षेत्रों में अपना भविष्य अधिक चमकीला समझते हैं.

युवा नेता राजनीति में किसी भी लिहाज से अलग नहीं हैं. वे पुरानी पीढी के नेताओं से अलग विचार नहीं रखते. वे न तो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते सुनाईर् पड़ते, न नशाखोरी और न ही सामाजिक बुराइयों के खिलाफ. ऐसे युवा नेता नहीं आ रहे जो खुल कर धर्म, जातिवादी राजनीति का विरोध पर सड़कों पर उतरते हों. जो युवा राजनीति में आ रहे हैं यह मौजूद हैं, वे ज्यादातर पारिवारिक राजनीतिक विरासत को जारी रखने और शासन व सत्ता का सुख भोगने के लिए हैं.

यही वजह है कि देश के युवा राजनीतिक नेतृत्व के अभाव में युवा पुराने विचारों से हांके जा रहे हैं. मंदिर निर्माण, रथयात्राओं के पीछे, गौ रक्षा की गुहार लगाते हुए हिंसा पर उतारू दिखाईर् दे रहे हैं. हिंदुत्व संस्कृति के पहरेदार बने हुए हैं.

दरअसल भारतीय राजनीति लकीर की फकीर बने रहना चाहती है. यह यों ही नहीं है. भाजपा में संघ नहीं चाहता कि ऐसे नए युवा आगे आए जो जाति, धर्म की प्राचीन व्यवस्था को नकारे और पुराणों के मिथकों की जगह विज्ञान की सचाई को वरीयता दे. संघ हिंदुत्व की राह पर चलने वाले युवाओं को ही परख कर राजनीति में आगे बढाती है. पौराणिक कथाओं को विज्ञान के आविष्कारों से जोड़ बताने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस युवा राजनीति की संघीभाजपाई मिसाल हैं.

उधर कांग्रेस भी इस मामले में भाजपा की ही बहन है. वह भी पार्टी में संस्कारी ब्राह्मणवादी युवाओं को ही आगे लाती है. दोनों ही पार्टियों में युवा चाहे किसी भी जाति को हो, तिलक लगाए, बातबात में धर्म, ईश्वर, अवतारों के किस्से जुबान पर रखे. हिंदू संस्कृति, संस्कारों का जप करता हो.

राजनीति में प्रगतिशील, परिवर्तनकारी विचारों के अगुआ कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल, जिग्नेश, चंद्रशेखर रावण जैसे युवा नेताओं को पीछे धकेलने में कांग्रेस और भाजपा पूरी ताकत से मिल कर जुटी नजर आती हैं.

यह इसलिए है क्योंकि युवाओं को शिक्षा, दीक्षा धर्म के बुजुर्ग नेता ही दे रहे हैं. यही वजह है कि राजनीति में पुराने नेताओं का वर्चस्व कायम है.

जब सानिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया बेटे का फोटो

पाकिस्तान के विस्फोटक बल्लेबाज क्रिकेटर शोएब मलिक ने साल 2010 में भारतीय टेनिस गर्ल सानिया मिर्जा से निकाह किया. सानिया मिर्जा ने 8 साल बाद 30 अक्टूबर 2018 को एक बेटे को जन्म दिया है. इन्होंने अपने  बेटे का नाम इजान मिर्जा मलिक रखा है.

बता दें, साल 2013 में लौन टेनिस के एकल फौर्मेट से रिटायरमेंट ले चुकीं सानिया मिर्जा अब अपने परिवार को ज्यादा समय देती हैं और साथ ही वे सोशल मीडिया पर भी काफी ऐक्टिव रहती हैं.

हाल ही में जब दिग्गज टेनिस स्टार सानिया मिर्जा भारत आई  तब उन के बच्चे की झलक पाने के लिए मीडिया उतावला हो गया. इसी के चलते सानिया ने अपने बेटे इजान का एक फोटो सोशल मीडिया वेबसाइट इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है.

इस फोटो को पोस्ट करते हुए सानिया मिर्जा ने लिखा, ‘यह दुनिया से हेलो बोलने का समय है.’ इंस्टाग्राम पर सानिया द्वारा पोस्ट किया गया यह फोटो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है.

इस फोटो में मुस्कुराते  हुए इजान ने टोपी और टीशर्ट पहनी हुई है. सानिया मिर्जा ने इस फोटो के साथ एक कैप्शन भी पोस्ट किया है जिस में उन्होंने लिखा, ‘फास्ट लेन में रह कर जिंदगी जीना आनंददायक हो सकता है. यह समय दुनिया को हेलो कहने का है.’

इस से कुछ दिन पहले सानिया मिर्जा अपने बेटे के साथ मुंबई एयरपोर्ट पर दिखी थीं. तब उन्होंने इजान को गोद में ले रखा था और उसे गर्म कपड़ों से कवर किया हुआ था.

जब से करीना और सैफ के बेटे तैमूर ने सोशल मीडिया पर धूम मचाई है तब से दूसरे सेलेब्रेटी भी अपने और अपनों के फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहते हैं, जिस में कोई बुराई नहीं बल्कि इस से आम लोगों को उन की जिंदगी को नजदीक से जानने का मौका मिलता है.

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