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अब आप के कंप्यूटर और गजैट्स पर सरकार की खुफिया निगाहें

केंद्र सरकार ने किसी भी नागरिक के कंप्यूटर और इलेक्ट्रोनिक गजैट्स की जासूसी करने का आदेश जारी कर दिया है. इस से आप की प्राइवेसी पर खतरा हो गया है. 20 दिसंबर को गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर देश की 10 प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों को देश में मौजूद किसी भी कंप्यूटर की निगरानी का अधिकार दे दिया है.

सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 की धारा 69 सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को किसी कंप्यूटर सिस्टम द्वारा निर्मित, नियोजित, प्राप्त या भंडारित किसी भी प्रकार की सूचना के इंटरसेप्शन, मौनिटरिंग और डिक्रिप्शन के लिए प्राधिकृत करता है.

सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69 किसी भी कंप्यूटर के जरिए किसी सूचना पर नजर रखने या उन्हें देखने के लिए निर्देश जारी करने की शक्तियों से जुड़ी है. सूचना प्रौद्योगिकी नियमावली 2009 के नियम 4 में यह प्रावधान है कि सक्षम अधिकारी किसी सरकारी एजेंसी को किसी कंप्यूटर संसाधन में सृजित, पारेषित, प्राप्त अथवा संरक्षित सूचना को अधिनियम की धारा 69 की उपधारा [1] में उल्लेखित उद्देश्यों के लिए खंगालने, निगरानी करने अथवा जांच करने के लिए अधिकृत कर सकता है.

इस से पहले भी इस तरह के आदेश पारित हो चुके हैं. करीब 100 साल से पहले बने भारतीय टेलीग्राफ कानून के प्रावधानों के तहत फोन काल्स की टेपिंग और उन के विश्लेषण के लिए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को अधिकृत करने या मंजूरी देने का अधिकार  पहले से ही प्राप्त है.

यह कानून पिछली सरकारों के समय से चलता रहा है. जब कभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल आया, सरकार इस कानून के तहत कुछ एजेंसियों को निगरानी का अधिकार सौंपती रही है. कहने को सरकार ने यह आदेश राष्ट्रीय सुरक्षा के मकसद से किया है लेकिन इस से एक महत्वपूर्ण सवाल आम लोगों की निजता के अधिकार से जुड़ा है.

कंडोम में डाल कर फेंका गया नवजात, मगर वह जिंदा था और फिर…

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना जान कर रूह कांप उठेगी आप का. यह सनसनीखेज घटना हावड़ा से अमृतसर पहुंची हावड़ा मेल की है, जहां ट्रेन के एक कोच में टौयलेट की सफाई करने के दौरान एक नवजात शिशु पड़ा मिला.

पसीने छूट गए कर्मचारियों के

नवजात शिशु को दुपट्टे से लपेट कर कंडोम में डाल कर फेंका गया था.

हावड़ा से अमृतसर पहुंची इस ट्रेन की सफाई होनी थी. सफाई के दौरान जब सफाई कर्मचारियों ने एसी कोच डी-3 के टौयलेट का दरवाजा खोला तो वहां दुपट्टे का एक छोर दिखाई दिया. अंदर जा कर देखा तो सफाई कर्मचारियों के ठंढ के महीने में भी पसीने छूट गए. वहां फ्लश में एक नवजात शिशु पड़ा था. आननफानन में उसे बाहर निकाला गया.

वह जिंदा था

सफाई कर्मचारी इंचार्ज, गुमनाम सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया,”कंडोम के अंदर दुपट्टे से लिपटे नवजात शिशु को जब बाहर निकाला गया तो उस की सांसें चल रही थीं. हम ने तुरंत इस की सूचना देते हुए नवजात को इलाज के लिए अस्पताल में भरती करा दिया है.”

अस्पताल के डाक्टरों का कहना है कि नवजात को गला दबा कर मारने की पहले कोशिश की गई और फिर उसे मरा समझ फेंक दिया गया. मगर अब वह खतरे से बाहर है.

जांच में जुटी पुलिस

घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धारा 317 लगा कर तफ्तीश में जुटी है.

नवजात शिशु को किस ने फेंका, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा पर इतना तो तय है कि इतने क्रूर तरीके से फेंका गया नवजात अवैध संबंधों से भी पैदा हुआ हो सकता है, जिसे बदनामी के डर से पैदा होने के बाद फेंक दिया गया होगा.

एसी कोच में आमतौर पर उच्च तबके के और पढेलिखे लोग ही यात्रा करते हैं. ऐसे में जब नवजात शिशु अस्पताल में है और खतरे से बाहर है तो पुलिस जांच के बाद सचाई सामने आ ही जाएगी. पर वह कैसी मां होगी जिस ने इंसानियत को शर्मसार करते हुए इस तरह का कदम उठाया, जो पकङे जाने पर अब कानून और समाज दोनों की नजरों में दोषी हो जाएगी, यह तय है.

सहरा में गुल खिलाओ तो कुछ बात बनेगी

सहरा में गुल खिलाओ तो कुछ बात बनेगी
गर्दिश में मुस्कुराओ तो कुछ बात बनेगी
ये क्या हुआ के जिस्म तक आ कर पलट गए
दिल तक उतर के आओ तो कुछ बात बनेगी
हर मोड़ पर हमने ही तुम्हें दी हैं सदायें
तुम भी कभी बुलाओ तो कुछ बात बनेगी
यूँ दूर से शिकवे-गिले मिटते नहीं सनम
आकर गले लगाओ तो कुछ बात बनेगी
इक मेरे चाहने से ना हल होगा मसअला
तुम भी कदम बढ़ाओ तो कुछ बात बनेगी
रूहे-ग़ज़ल को ढूंढना आसान नहीं है
लफ्ज़ो में डूब जाओ तो कुछ बात बनेगी

बेक्ड रैवीओली इन सौस

सामग्री

– 1 कप मैदा

– 1 बड़ा चम्मच मक्खन

– 3 बड़े चम्मच पनीर कसा

– 1 प्याज

– 1 टमाटर

– 2 हरीमिर्चें

– 1 बड़ा चम्मच क्रीम

– 1 कली लहसुन

– 1 छोटा चम्मच मक्खन

– 2 बड़े चम्मच चीज कसा

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– मैदा में 1 छोटा चम्मच मक्खन व एकचौथाई चम्मच नमक डाल कर आटा गूंध कर छोटीछोटी गोलियां बना कर पतला गोल बेल लें.

– कसे पनीर में बारीक कटा प्याज व नमक मिलाएं. इस मिश्रण को पतली गोल पूरी के बीच रख कर किनारों पर पानी लगा कर दूसरी से बंद करें.

– इसी तरह सभी तैयार कर लें फिर एक पैन में पानी उबाल कर उस में इन सभी तैयार रैवीओली को 2-3 मिनट तक उबालें.

– प्याज, टमाटर, लहसुन व हरीमिर्चों को एकसाथ मिक्सी में पीस लें.

– कड़ाही में मक्खन गरम कर टमाटर के इस मिश्रण को हलका पकाएं.

– फिर इस में नमक व क्रीम डालें.

– बेकिंग डिश में नीचे सौस उस पर रैवीओली व कसा चीज डाल कर चीज के पिघलने तक ओवन में बेक करें.

  • व्यंजन सहयोग: अनुपमा गुप्ता

नौकी वैज

सामग्री

– 1 बड़ा आलू उबला

– 2 छोटे चम्मच मैदा

– 2 छोटे चम्मच बेसन

– 2 बडे़ चम्मच शिमलामिर्च कटी

– 2 बड़े चम्मच प्याज कटी

– 2 बड़े चम्मच बींस कटी

– 2 बड़े चम्मच गाजर ग्रेटेड

– 1 शकरकंदी के जूलियंस बारीक कटे

– तलने के लिए तेल

– 1-2 हरीमिर्चें

– 1 बड़ा चम्मच बटर

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– उबले आलू को छील कर कद्दूकस करें.

– इस में मैदा बेसन व नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लें.

– इस की छोटीछोटी गोलियां बना कर फोर्क पर हलका दबा कर रोल करें.

– इसी तरह सभी गोलियों को रोल करें और गरम तेल में सुनहरा होने तक तलें.

– एक कड़ाही में मक्खन गरम करें.

– इस में प्याज, बींस, शिमलामिर्च, शकरकंदी व गाजर सौते करें.

– फिर इस में नमक और हरीमिर्च काट कर डाल 2-4 मिनट तक ढक कर पकाएं.

– पकने पर तली नौकी डाल कर मिक्स कर गरमगरम सर्व करें.

‘योगी राज’ में मूर्तियों का दौर

योगी राज में उत्तर प्रदेश में मूर्तियों का दौर वापस आता दिख रहा रहा है. अयोध्या में राम की मूर्ति लगाने की घोषणा के बाद ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ में पूर्व प्रधनमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वामी विवेकानंद की मूर्ति लगाने के साथ ही साथ गोरखपुर में महंत दिग्विजय नाथ और मंहत अवैद्य नाथ और प्रयागराज में अकबर किले में सरस्वती प्रतिमा लगाने की घोषणा की है. इनमें सरयू किनारे लगने वाली राम की मूर्ति सबसे ऊंची होगी. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा 25 फीट की होगी. विवेकानंद, मंहत दिग्विजय नाथ और मंहत अवैद्य नाथ की प्रतिमायें 12.5 फीट की होगी.

राम की प्रतिमा अयोध्या में सरयू के किनारे लगेगी. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा उत्तर प्रदेश के लोकभवन में लगेगी जहां विधानसभा है. विवेकानंद की प्रतिमा राजभवन में लगेगी. महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्य नाथ की प्रतिमा गोरखपुर में लगाई जायेगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा ‘प्रयागराज में संगम के किनारे अकबर के किले के अंदर अक्षय वट और सरस्वती कूप रहे हैं. अकबर ने जब किला बनवाया तब से सरस्वती के दर्शन बंद हो गये. अब आम लोगों के दर्शन के लिये इसे खोला जायेगा. यहां सरस्वती की प्रतिमा लगाई जायेगी और यही पर भारद्वाज आश्रम में ऋषि भारद्वाज की प्रतिमा भी लगाई जायेगी.

इसके पहले योगी सरकार फैजाबाद का नाम बदल का अयोध्या और इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज कर चुकी है. योगी सरकार पूजापाठ और मूर्तियों की स्थापना से प्रदेश की जनता को हिन्दूराज और वर्ण व्यवस्था में उलझाना चाहती है. हिन्दू राज में भी राजा हमेशा पूजापाठ और मूर्ति स्थापना के काम करते थे. हर राजा की कहानी इससे भरी पड़ी है. नागपुर के कहने पर योगी भी यही काम करने में लगे है. 2 साल के कार्यकाल में योगी सरकार ने प्रदेश के विकास के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. कभी शहरों का नाम बदलती है तो कभी मूर्ति लगवाने की घोषणा करती है.

शहरों का नाम बदलने के चलते तमाम तरह के मैसेज सोशल मीडिया पर चलने लगे हैं. जिनमे नाम बदलने के काम को हंसी मजाक में ले लिया गया. अब योगी सरकार ने मूर्तियों को लगवाने का काम भी शुरू कर दिया है. प्रदेश के लोग विकास की बात न करें, इसके लिये मूर्तियों के साथ देवी देवताओं की जाति को लेकर भी अपने विवादित बयान देते रहते हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमान को दलित जाति का बताया तो पार्टी में भेड़चाल सी चल गई. किसी नेता ने उनको आदिवासी, किसी ने जाट तो किसी ने मुसिलम तक बता दिया.

हनुमान को दलित कहने पर कई शहरों में दलितों की अगुवाई करने वाली भीम आर्मी के लोगों ने हनुमान के मंदिरों में कब्जा करके वहां पूजापाठ शुरू करके मांग करनी शुरू कर दी कि हनुमान दलित थे तो हनुमान मंदिरों पर दलितों का कब्जा होगा. सांसद सावित्री बाई फूले कहती हैं ‘देश में बनने वाले मंदिरों का लाभ केवल पुजारी वर्ग को ही होता है’. योगी सरकार मूर्तियों की स्थापना करके प्रदेश में मंदिरों की सरकार बनाना चाहती है. मजेदार बात यह है कि यही पार्टी तब कटाक्ष करती है जब दूसरे दलों के लोग मूर्तियां लगवाते हैं.

न मिले तो कयामत नहीं है

न मिले तो क़यामत नहीं है
ये न कहना मोहब्बत नहीं है
मुझको रखना सदा अपने दिल में
दूरियों से शिकायत नहीं है
दिल की बातें जुबां तक भी लाएं
अपने घर की रवायत नहीं है
क्यों परेशां हो मेरे लिए तुम
मेरी किस्मत में जन्नत नहीं है
रोज़ी रोटी की है फ़िक्र इतनी
मुझको रोने की फुर्सत नहीं है
चढ़ गये इतने चेहरे पे चेहरे
जो दिखे वो हकीकत नहीं है

मोदी और शाह के लिए समस्या बनते गडकरी

तीन हिंदी भाषी राज्यों की हार से सकते और सदमे में आ गए नरेंद्र मोदी और अमित शाह के जले पर नमक छिड़क रहे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आखिरकार क्या चाहते हैं यह अंदाजा लगाना आसान काम नहीं. महाराष्ट्र और खासतौर से विदर्भ की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले इस कद्दावर मराठी नेता के पांच दिन में दिये गए चार बयान बेमानी और बेमतलब तो कतई नहीं कहे जा सकते, लेकिन गडकरी की मंशा क्या है, क्या वे केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं या फिर उनकी चिंता भी 2019 का लोकसभा चुनाव है जिसमें भाजपा की दुर्दशा अभी से दिखने लगी है. तमाम विश्लेषक और समीक्षक यह मानकर चल रहे हैं कि महाराष्ट्र में भाजपा अपने अकेले के दम पर कुछ खास नहीं कर पाएगी. बढ़त के लिए उसे शिवसेना का साथ तो चाहिए ही रहेगा.

उलट इसके शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुद्दत से भाजपा को घेरने का कोई मौका नहीं चूक रहे. वे राम मंदिर निर्माण को लेकर भी भाजपा पर तंज कसते हैं और बिहार में नितीश कुमार और रामविलास पासवान के सामने अमित शाह के घुटने टेकने पर भी उन्हें बख्शते नहीं. शिवसेना भाजपा की खटास अगर वक्त रहते दूर नहीं हुई तो तय है महाराष्ट्र में एनसीपी कांग्रेस गठबंधन को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी.

ऐसी कई वजहों के चलते नितिन गडकरी का बौखलाने की हद तक चिंतित होना हैरानी की बात नहीं है लेकिन जिस ढंग से वे अपनी पीड़ा, व्यथा और दुख व्यक्त कर रहे हैं वह जरूर चर्चा का विषय बना हुआ है जिससे साफ लगता है कि उनके और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं है. हालांकि गडकरी के ताजे बयानों के पहले से ही अफवाहों का बाजार गर्म था. कोई 2 महीने पहले उन्होंने एक मराठी चैनल को दिये गए बेबाक इंटरव्यू में अच्छे दिनों के बारे में कहा था कि, 2014 में हवा हमारे (भाजपा) माफिक थी लेकिन इतने भारी भरकम की उम्मीद हमें नहीं थी इसलिए हम प्रचार के दौरान ऐसे वादे भी कर बैठे जिनका पूरा होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था. हर एक के खाते में 15 लाख रुपये आने की बात इनमें से एक थी.

देखा जाये तो नितिन गडकरी एक तरह से स्पष्टीकरण ही दे रहे थे जो शाह मोदी को रास नहीं आया तो अचानक ही खटपट की खबरें आने लगीं मगर इनकी तल्ख तसल्ली गडकरी के इन हालिया बयानों से होती है –

1 – तीन राज्यों की अप्रत्याशित हार पर 24 दिसंबर को नितिन गडकरी ने साफ साफ कहा कि, यदि मैं पार्टी अध्यक्ष हूं और मेरे सांसद और विधायक अच्छा नहीं करते हैं तो कौन जिम्मेदार होगा?

बड़बोले अमित शाह को कटघरे में उन्होंने खड़ा कर कोई संगीन गुनाह नहीं कर दिया है जो गुरूर में डूबे जाने किस बिना पर यह दावा करते रहते थे कि अभी तो हम 50 साल और राज करेंगे.

बात को विस्तार देते उन्होंने दार्शनिकों की सी भाषा में यह भी कहा कि सफलता के कई दावेदार होते हैं लेकिन विफलता में कोई साथ नहीं होता सब दूसरे की तरफ उंगली उठाते रहते हैं.

2 – एक मीटिंग में उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू की तारीफ करने का गुनाह यह कहते किया कि उन्हें नेहरू का वह भाषण पसंद है जिसमें उन्होंने कहा था कि, सिस्टम को सुधारने को दूसरे की तरफ उंगली क्यों करते हो अपनी तरफ क्यों नहीं करते, जवाहर लाल नेहरू कहते थे कि इंडिया इस नौट ए नेशन , इट इज ए पापुलेशन. इस देश का हर व्यक्ति देश के लिए प्रश्न है, समस्या है. तो मैं इतना तो कर सकता हूं कि मैं देश के सामने समस्या नहीं बनूंगा.

इशारा सीधे नरेंद्र मोदी की तरफ था जो बात बात में नेहरू गांधी परिवार और कांग्रेस के 60 साल के राज को भी पानी पी पी कर कोसते रहते हैं. नरेंद्र मोदी को अपने गिरहबान में झांकने की विनम्र और निहायत ही शिष्ट सलाह देने के जुर्म पर भाजपा क्या करेगी यह देखना बेहद दिलचस्पी की बात होगी क्योंकि नितिन गडकरी कोई यशवंत या शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़बोले नेता नहीं हैं जो उन्हें नजरंदाज कर काम चल जाये इसका नोटिस तो भाजपा आलाकमान को आज नहीं तो कल लेना ही पड़ेगा.

3 – पीएम पद की दौड़ में शामिल होने न होने को लेकर भी उन्होंने साफ कहा कि वे जहां हैं खुश हैं और उन्हें गंगा प्रोजेक्ट पूरा करना है, हाइवे बनाना है और महत्वाकांक्षी चार धाम प्रोजेक्ट पूरा करना है.

इस बयान के निहितार्थ ये भी निकाले जा रहे हैं कि उन्होंने सीधे यह नहीं कहा कि वे पीएम पद के रेस में नहीं हैं और जो काम उन्हें करना है वे कम से कम लोकसभा चुनाव तक तो पूरे होने से रहे .

4 – कुछ लोगों के मुंह में कपड़ा डाल कर मुंह बंद करने की जरूरत है, जैसे ही नितिन गडकरी ने यह कहा तो लोगों का ध्यान सीधे योगी आदित्य नाथ के हनुमान को दलित बताने बाले बयान पर गया जिसे लेकर भाजपा की खासी किरकिरी हो रही है और हनुमान जी मजाक के पात्र बन गए हैं कोई उन्हें दलित कोई आदिवासी कोई ब्राह्मण कोई राजपूत कोई जाट कोई मुसलमान बताने लग गया है और तो और अब उन्हें चीनी तक कहा जाने लगा है.

मगर जैसा कि अंदाजा लगाया जा रहा है कि गडकरी का इशारा अगर आदित्यनाथ की तरफ ही है तो शायद ही कोई उनके मुंह में कपड़ा ठूंस पाये.

नितिन गडकरी के ऐसे कई बयान भाजपा के गले की हड्डी बनते जा रहे हैं. साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तब देश के लोगों को कई उम्मीदें सरकार से थीं जिनकी एक बड़ी वजह भाजपा की दूसरी पंक्ति के तजुर्बेकार नेता भी थे जिनमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, वैंकेया नायडू, सुषमा स्वराज और उमा भारती वगैरह के नाम शुमार थे.

साल 2018 के उत्तरार्द्ध तक स्पष्ट हो गया है कि भाजपा का मतलब मोदी शाह होता है बाकी सब मिथ्या है जिसका नतीजा पार्टी भुगत भी रही है. सब खामोशी से डूबते सूरज को सन सेट पौइंट से देख रहे हैं लेकिन नितिन गडकरी कोई बगावत नहीं कर रहे, बल्कि यह इशारा कर रहे हैं कि सावधान हो जाओ नहीं तो, बुरे दिन आने वाले हैं.

बौक्सिंग डे पर मयंक अग्रवाल का कारनामा

औस्ट्रेलिया में हुई लंबी छुट्टियों का असर मेलबर्न में चल रहे तीसरे क्रिकेट मैच पर भी दिखा. जब भारत ने टास जीत कर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया और सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल मैदान पर उतरे तो स्टेडियम में आई भारी भीड़ देख कर उन का तो मानो दिन ही बन गया.

क्रिसमस डे के अगले दिन 26 दिसंबर को शुरू हुए इस बौक्सिंग डे मैच में मयंक अग्रवाल अपना डेब्यू मैच खेल रहे थे. दरअसल, दुनिया के तमाम देशों में 25 दिसंबर क्रिसमस डे के अगले दिन यानी 26 दिसंबर को बौक्सिंग डे मनाया जाता है. इस दिन जब लोग अपने दोस्तों व परिवार वालों से मिलते हैं तो उन्हें बौक्स में गिफ्ट पैक कर के देते हैं.

दुनिया के कुछ हिस्सों में इसे शौपिंग से जोड़ कर भी देखा जाता है और क्रिसमस के अगले दिन लोग शौपिंग करते हैं. औस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड में लोग इस दिन छुट्टी का लुत्फ उठाते हैं और अपने दोस्तों व परिवार के साथ समय बिताते हैं.

स्टेडियम में आई इतनी भीड़ के सामने मयंक अग्रवाल ने अपनी टीम को निराश नहीं किया और उन्हें टीम में शामिल करने के फैसले को भी जायज ठहरा दिया.

मयंक अग्रवाल ने मेलबर्न टेस्ट मैच में हनुमा विहारी के साथ पारी की शुरुआत की. हनुमा विहारी के जल्दी आउट होने पर भी उन्होंने अपना आपा नहीं खोया और 161 गेंद खेल कर 76 रन बनाए. उन्होंने लंच के बाद नाथन लायन की गेंद पर चौका लगा कर अपनी हाफ सेंचुरी पूरी करने के साथ ही एक इतिहास रच दिया.

वजह, मयंक अग्रवाल अपने डेब्यू पर औस्ट्रेलिया में हाफ सेंचुरी लगाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए. उन से पहले सिर्फ दत्तात्रेय गजानन (दत्तू) फाडकर ने भारत के 1947-48 के औस्ट्रेलिया दौरे पर सिडनी में अपने डेब्यू पर 51 रनों की पारी खेली थी.

डेब्यू टेस्ट की पहली पारी में हाफ सेंचुरी लगाने वाले मयंक अग्रवाल दूसरे भारतीय हैं. पृथ्वी शौ वेस्टइंडीज के खिलाफ 50 से ज्यादा के स्कोर पर पहुंचे थे.

16 फरवरी, 1991 को बेंगलुरु, कर्नाटक में जन्मे मयंक अग्रवाल ने अपने खेले गए 46 फर्स्ट क्लास मैचों में 49.98 की औसत से 3599 रन बनाए हैं. उन्होंने जिस तरह से अपने पहले टैस्ट मैच में अच्छी शुरुआत की है, उसे आगे भी बरकरार रखें, ताकि टीम में परमानेंट जगह बना सकें.

शुभारंभ: क्या कीर्तिदा रोक पाएगी राजा-रानी का प्री वेडिंग फोटोशूट?

कलर्स के शो शुभारंभ में राजा रानी की शादी की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं. राजा ने रानी को अपनी प्री वेडिंग फोटोशूट करवाने के लिए तो मना लिया है, लेकिन क्या राजा की बड़ी मम्मी, कीर्तिदा इस फोटोशूट को रोकने में कामयाब हो पाएगी? आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

अब तक आपने देखा कि जहाँ एक तरफ राजा और रानी एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ गुणवंत रानी के भाई उत्सव का छिपा राज़ जानने में लगा है.

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प्री वेडिंग फोटोशूट रोकने की कोशिश करेगी कीर्तिदा

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राजा और रानी अपने प्री वेडिंग शूट की तैयारी में लगे हुए होते हैं. वहीं कीर्तिदा चालाकी से दोनों का फोन लेकर उन्हें स्टोर रूम में बंद कर देती है, जिसके बाद राजा और रानी को एहसास होता है कि दोनों फंस चुके हैं और उनके पास किसी से भी मदद मांगने का सहारा नही है.

क्या हो पाएगा राजा रानी का प्री वेडिंग फोटोशूट

आज रात आप देखेंगे कि राजा-रानी स्टोर रूम से बाहर निकलने की कोशिश करते हुए नजर आएंगे. इसी के साथ प्री वेडिंग फोटोशूट की चिंता में दोनों साथ में कुछ खास पल भी शेयर करते दिखेंगे.

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अब देखना ये है कि  क्या कीर्तिदा, राजा और रानी के प्री वेडिंग फोटोशूट को रोकने में कामयाब हो पाएगी? जानने के लिए देखते रहिए ‘शुभारंभ’, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सिर्फ कलर्स पर.

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