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तीज 2022: त्यौहार में बनाएं ये हेल्दी मल्टीग्रेन थाली पीठ

त्योहार के दिनों में अगर आप स्पेशल थाली बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो इस मल्टीग्रेन थाली से स्पेशल आपके लिए कुछ हो ही नहीं सकता है. ऐसे में आप नीचे दिए हुए रेसिपी पर ट्राई कर सकती हैं.

  1. मल्टीग्रेन थाली पीठ

सामग्री

– 11/2 कप आटा

– 1/2 कप बाजरा

– 1/2 कप ज्वार

– 300 ग्राम खीरा कसा

– 50 ग्राम दही

– 2 बड़े चम्मच अलसी के बीज

– 1/4 बड़ा चम्मच हलदी पाउडर

– 2 बड़े चम्मच सरसों दाना

– चुटकी भर हींग

– थोड़ा सा भुना जीरा

– 1/4 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा

– 10 ग्राम कसा अदरक

– 30 एमएल तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

आटे में बेकिंग सोडा, अलसी व सरसों के बीज, हलदी पाउडर, हरीमिर्च, नमक, हींग, जीरा और अदरक मिलाएं. फिर दही में खीरा मिलाएं. अब इस मिश्रण को आटे के मिश्रण में धीरे से मिलाएं और अच्छी तरह आटा गूंध लें. गुंधे आटे को 15 मिनट के लिए अलग रख दें. अब एक पैन में तेल गरम करें. आटे का लगभग 30 ग्राम हिस्सा ले कर हथेली से गोल आकार दें और तेल में दोनों तरफ से सेंकें. फिर थाली पीठ को धीमी आंच पर ही सेंकें. इसे धनिए की चटनी, मराठी लहसुन की चटनी या फिर रायते के साथ परोसें.

2. स्टिर फ्राइड टोफू विद विंटर वैजिटेबल ऐंड स्पिनैच

सामग्री

– 400 ग्राम टोफू

– 100 ग्राम पालक

– 150 ग्राम बींस कटी

– 50 ग्राम गाजर कटी

– 50 ग्राम लालमिर्च कटी

– 15 ग्राम ऐस्परैगस

– 5 ग्राम लालमिर्च कटी

– 30 एमएल तिल का तेल

– 50 ग्राम स्प्रिंग ओनियन

– 20 एमएल डार्क सोया सौस

– 10 ग्राम अदरक कसा

– 10 ग्राम लहसुन कटा

– 25 ग्राम कौर्नस्टार्च पानी में मिला.

विधि

टोफू को क्यूब्स में काटें. टोफू को बटरपेपर पर रखें और 15 मिनट के लिए ओवन में बेक करें. फिर एक बरतन में तिल के तेल को धीमी आंच पर गरम कर उस में अदरकलहसुन डालें. इस के बाद सब्जियां डालें और 2-3 मिनट तक पकने दें. अब सोया सौस और थोड़ा पानी डालें. सौस में उबाल आने पर कौर्नस्टार्च डालें. फिर इस मिश्रण में टोफू डालें. मिश्रण को 1 मिनट तक पकने दें. जरूरतानुसार सीजनिंग, नमक और पैपर डालें. मिश्रण को ज्यादा न चलाएं वरना टोफू टूटने की संभावना बन सकती है. पकने के बाद गरमगरम सर्व करें.

3. एग ऐंड पोरिज भुरजी

सामग्री

– 6 अंडे

– 1 कप पका दलिया

– 1/2 हरीमिर्च कटी

– 1/4 कप लो फैट मिल्क

– 2 प्याज कटे

– 2 बड़े चम्मच घी या मक्खन

– 1/2 इंच ताजा अदरक कटा

– 4 हरीमिर्चें कटी

– थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

– 1/2 छोटा चम्मच जीरा

– 2 छोटे टमाटर मिंस्ड

– 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– नमक स्वादानुसार.

विधि

एक बड़े बाउल में अंडे फोडें. अब इन में नमक और दूध डालें और हलका सा फेंट लें. अब एक फ्राइंगपैन में घी गरम कर प्याज को सुनहरा होने तक फ्राई करें. अब इस में अदरक डालें और फ्राई करें. इस मिश्रण में हरीमिर्चें, टमाटर, जीरा, धनियापत्ती और हलदी पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें और 5 मिनट तक पकाएं. फिर इस में दलिया मिलाएं. अब मिश्रण को आंच से उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें. अब इस मिश्रण में अंडे का मिश्रण मिला दें और धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि अंडे की भुरजी न बन जाए. गरमगरम परोसें.

व्यंजन सहयोग : शैफ अपूर्व भट्ट कौरपोरेट शैफ, बरगरन होटल्स

तीज 2022: खुली छत- कैसे पति-पत्नी को करीब ले आई घर की छत

काम की व्यस्तता अधिक होने के कारण रमेश और नीना की दुनिया घर की चारदीवारी तक सिमट गई थी. उन के पास अपने घर की छत पर जाने का समय नहीं था जहां पर उन के प्रकृति प्रेमी पापा ने एक बढि़या सा बगीचा बनाया था.

रमेश का घर ऐसे इलाके में था जहां हमेशा ही बिजली रहती थी. इसी इलाके में राजनीति से जुड़े बड़ेबड़े नेताओं के घर जो थे. पिछले 20 सालों से रमेश अपने इसी फ्लैट में रह रहा है. 15 वर्ष मातापिता साथ थे और अब 5 वर्षों से वह अपनी पत्नी नीना के साथ था. उन का फ्लैट बड़ा था और साथ ही 1 हजार फुट का खुला क्षेत्र भी उन के पास था.

7वीं मंजिल पर उन के पास इतनी खुली जगह थी कि लोग ईर्ष्या कर उठते थे कि उन के पास इतनी ज्यादा जगह है.

रमेश के पिता का बचपन गांव में बीता था और उन्हें खुली जगह बहुत अच्छी लगती थी. रिटायर होने से पहले उन्होंने इसी फ्लैट को चुना था, क्योंकि इस में उन के हिस्से इतना बड़ा खुला क्षेत्र भी था. दोस्तों और रिश्तेदारों ने उन्हें समझाया था कि इस उम्र में 7वीं मंजिल पर घर लेना ठीक नहीं है. यदि कहीं लिफ्ट खराब हो गई तो बुढ़ापे में क्या करोगे पर उन्होंने किसी की भी नहीं सुनी थी और 1 लाख रुपए अधिक दे कर यह फ्लैट खरीद लिया था.

पत्नी ने भी शिकायत की थी कि अब बुढ़ापे में इतनी बड़ी जगह की सफाई करना उन के बस की बात नहीं है. नौकरानियां तो उस जगह को देख कर ही सीधेसीधे 100 रुपए पगार बढ़ा देतीं. पर गोपाल प्रसाद बहुत प्रसन्न रहते. उन की सुबह और शामें उसी खुली छत पर बीततीं. सुबह का सूर्योदय, शाम का पहला तारा, पूर्णिमा का पूरा चांद, अमावस्या की घनेरी रात और बरसात की रिमझिम फुहारें उन्हें रोमांचित कर जातीं.

उस छत पर उन्होंने एक छोटा सा बगीचा भी बना लिया था. उन के पास 50 के करीब गमले थे, जिस में  तुलसी, पुदीना, हरी मिर्च, टमाटर, रजनीगंधा, बेला, गुलाब और गेंदा आदि सभी तरह के पौधे लगा रखे थे. हर पेड़पौधे से उन की दोस्ती थी. जब वह उन को पानी देते तो उन से मन ही मन बातें भी करते जाते थे. यदि किसी पौधे को मुरझाया हुआ देखते तो बड़े प्यार से उसे सहलाते और दूसरे दिन ही वह पौधा लहलहा उठता था. वह जानते थे कि प्यार की भाषा को सब जानते हैं.

मातापिता के गुजर जाने के बाद से घर की वह छत उपेक्षित हो गई थी. रमेश और नीना दोनों ही नौकरी करते थे. सुबह घर से निकलते तो रात को ही घर लौटते. ऐसे में उन के पास समय की इतनी कमी थी कि उन्होंने कभी छत वाला दरवाजा भी नहीं खोला. गमलों के पेड़पौधे सभी समाप्त हो चुके थे. साल में एक बार ही छत की ठीक से सफाई होती. उन का जीवन तो ड्राइंगरूम तक ही सिमट चुका था. छुट्टी वाले दिन यदि यारदोस्त आते तो बस, ड्राइंगरूम तक ही सीमित रहते. छत वाले दरवाजे पर भी इतना मोटा परदा लटका दिया था कि किसी को भी पता नहीं चलता कि इस परदे के पीछे कितनी खुली जगह है.

नीना भी पूरी तरह से शहरी माहौल में पली थी, इसलिए उसे कभी इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि उस के ससुर उन के लिए कितना अमूल्य खजाना छोड़ गए हैं. काम की व्यस्तता में दोनों ने परिवार को बढ़ाने की बात भी नहीं सोची थी पर अब जब रमेश को 40वां साल लगा और उसे अपने बालों में सफेदी झलकती दिखाई देने लगी तो उस ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया. अब नीना भी उस से सहमत थी, पर अब वक्त उन का साथ नहीं दे रहा था. नीना को गर्भ ठहर ही नहीं रहा था. डाक्टरों के भी दोनों ने बहुत चक्कर लगा लिए. काफी दवाएं खाईं. डी.एम.सी. कराई. स्पर्म काउंट कराया. काम के टेंशन के साथ अब एक नया टेंशन और जुड़ गया था. दोनों की मेडिकल रिपोर्ट ठीक थी फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी. अब उन के डाक्टरों की एक ही सलाह थी कि आप दोनों तनाव में रहना छोड़ दें. आप दोनों के दिमाग में बच्चे की बात को ले कर जो तनाव चल रहा है वह भी एक मुख्य कारण हो सकता है आप की इच्छा पूरी न होने का.

इस मानसिक तनाव को दूर कैसे किया जाए? इस सवाल पर सब ओर से सलाह आती कि मशीनी जिंदगी से बाहर निकल कर प्रकृति की ओर जाओ. अपनी रोजमर्रा की पाबंदियों से निकल कर मुक्त सांस लेना सीखो. कुछ व्यायाम करो, प्रकृति के नजदीक जाओ आदि. लोगों की सलाह सुन कर भी उन दोनों की समझ में नहीं आता था कि इन पर अमल कैसे किया जाए.

इसी तरह की तनाव भरी जिंदगी में वह रात उन के लिए एक नया संदेश ले कर आई. हुआ यों कि रात को 1 बजे अचानक ही बिजली चली गई. ऐसा पहली बार हुआ था. ऐसी स्थिति से निबटने के लिए वे दोनों पतिपत्नी तैयार नहीं थे, अब बिना ए.सी. और पंखे के बंद कमरे में दोनों का दम घुटने लगा. रमेश उठा और अपने मोबाइल फोन की रोशनी के सहारे छत के दरवाजे के ताले की चाबी ढूंढ़ी और दरवाजा खोला. छत पर आते ही जैसे सबकुछ बदल गया.

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खुली छत पर मंदमंद हवा के बीच चांदनी छिटकी हुई थी. आधा चंद्रमा आकाश के बीचोंबीच मुसकरा रहा था. रमेश अपनी दरी बिछा कर सो गया. उस ने अपनी खुली आंखों से आकाश को, चांद को और तारों को निहारा. आज 20-25 वर्षों बाद वह ऐसे खुले आकाश के नीचे लेटा था. वह तो यह भी भूल चुका था कि छिटकी हुई चांदनी में आकाश और धरती कैसे नजर आते हैं.

बिजली जाने के कारण ए.सी. और पंखों की आवाज भी बंद थी. चारों ओर खामोशी छाई हुई थी. उसे अपनी सांस भी सुनाई देने लगी थी. अपनी सांस की आवाज सुननेके लिए ही वह आतुर हो उठा. रमेश को लगा, जिन सांसों के कारण वह जीवित है उन्हीं सांसों से वह कितना अपरिचित है. इन्हीं विचारों में भटकतेभटकते उसे लगा कि शायद इसे ही ध्यान लगाना कहते हैं.

उस के अंदर आनंद का इतना विस्तार हो उठा कि उस ने नीना को पुकारा. नीना अनमने मन से बाहर आई और रमेश के साथ उसी दरी पर लेट गई. रमेश ने उस का ध्यान प्रकृति की इस सुंदरता की ओर खींचा. नीना तो आज तक खुले आकाश के नीचे लेटी ही नहीं थी. वह तो यह भी नहीं जानती थी कि चांदनी इतनी धवल भी होती है और आकाश इतना विशाल. अपने फ्लैट की खिड़की से जितना आकाश उसे नजर आता था बस, उसी परिधि से वह परिचित थी.

रात के सन्नाटे में नीना ने भी अपनी सांसों की आवाज को सुना, अपने दिल की धड़कन को सुना, बरसती शबनम को महसूस किया और रमेश के शांत चित्त वाले बदन को महसूस किया. उस ने महसूस किया कि तनाव वाले शरीर का स्पर्श कैसा अजीब होता है और शांत चित्त वाले शरीर का स्पंदन कैसा कोमल होता है. दोनों को मानो अनायास ही तनाव से छुटकारा पाने का मंत्र हाथ लग गया.

वह रात दोनों ने आंखों ही आंखों में बिताई. रमेश ने मन ही मन अपने पिता को इस अनमोल खजाने के लिए धन्यवाद दिया. आज पिता के साथ गुजारी वे सारी रातें उसे याद हो आईं जब वह गांव में अपने पिता के साथ लेट कर सुंदरता का आनंद लेता था. पिता और दादा उसे तारों की भी जानकारी देते जाते थे कि उत्तर में वह ध्रुवतारा है और वे सप्तऋषि हैं और  यह तारा जब चांद के पास होता है तो सुबह के 3 बजते हैं और भोर का तारा 4 बजे नजर आता है. आज उस ने फिर से वर्षों बाद न केवल खुद भोर का तारा देखा बल्कि पत्नी नीना को भी दिखाया.

प्रकृति का आनंद लेतेलेते कब उन की आंख लगी वे नहीं जान पाए पर सुबह सूर्यदेव की लालिमा ने उन्हें जगा दिया था. 1 घंटे की नींद ले कर ही वे ऐसे तरोताजा हो कर उठे मानो उन में नए प्राण आ गए हों.

अब तो तनावमुक्त होने की कुंजी उन के हाथ लग गई. उसी दिन उन्होंने छत को धोपोंछ कर नया जैसा बना दिया. गमलों को फिर से ठीक किया और उन में नएनए पौधे रोप दिए. बेला का एक बड़ा सा पौधा लगा दिया. रमेश तो अपने अतीत से ऐसा जुड़ा कि आफिस से 15 दिन की छुट्टी ले बैठा. अब उन की हर रात छत पर बीतने लगी. जब अमावस्या आई और रात का अंधेरा गहरा गया, उस रात को असंख्य टिमटिमाते तारों के प्रकाश में उस का मनमयूर नाच उठा.

धीरेधीरे नीना भी प्रकृति की इस छटा से परिचित हो चुकी थी और वह भी उन का आनंद उठाने लगी थी. उस ने  भी आफिस से छुट्टी ले ली थी. दोनों पतिपत्नी मानो एक नया जीवन पा गए थे. बिना एक भी शब्द बोले दोनों प्रकृति के आनंद में डूबे रहते. आफिस से छुट्टी लेने के कारण अब समय की भी कोई पाबंदी उन पर नहीं थी.

सुबह साढ़े 4 बजे ही पक्षियों का कलरव सुन कर उन की नींद खुल जाती. भोर के टिमटिमाते तारों को वे खुली आंखों से विदा करते और सूर्य की अरुण लालिमा का स्वागत करते. भोर के मदमस्त आलम में व्यायाम करते. उन के जीवन में एक नई चेतना भर गई थी.

छत के पक्के फर्श पर सोने से दोनों की पीठ का दर्द भी गायब हो चुका था अन्यथा दिन भर कंप्यूटर पर बैठ कर और रात को मुलायम गद्दों पर सोने से दोनों की पीठ में दर्द की शिकायत रहने लगी थी. अनायास ही शरीर को स्वस्थ रखने का गुर भी वे सीख गए थे.

ऐसी ही एक चांदनी रात की दूधिया चांदनी में जब उन के द्वारा रोपे गए बेला के फूल अपनी मादक गंध बिखेर रहे थे, उन दोनों के शरीर के जलतत्त्व ने ऊंची छलांग मारी और एक अनोखी मस्ती के बाद उन के शरीरों का उफान शांत हो गया तो दोनों नींद के गहरे आगोश में खो गए थे. सुबह जब वे उठे तो एक अजीब सा नशा दोनों पर छाया हुआ था. उस आनंद को वे केवल अनुभव कर सकते थे, शब्दों में उस का वर्णन हो ही नहीं सकता था.

अब उन की छुट्टियां खत्म हो गई थीं और उन्होंने अपनेअपने आफिस जाना शुरू कर दिया था. फिर से वही दिनचर्या शुरू हो गई थी पर अब आफिस से आने के बाद वे खुली छत पर टहलने जरूर जाते थे. दिन हफ्तों के बाद महीनों में बीते तो नीना ने उबकाइयां लेनी शुरू कर दीं. रमेश पत्नी को ले कर फौरन डाक्टर के पास दौड़े. परीक्षण हुआ. परिणाम जान कर वे पुलकित हो उठे थे. घर जा कर उसी खुली छत पर बैठ कर दोनों ने मन ही मन अपने पिता को धन्यवाद दिया था.

पिता की दी हुई छत ने उन्हें आज वह प्रसाद दिया था जिसे पाने के लिए वह वर्षों से तड़प रहे थे. यही छत उन्हें प्रकृति के निकट ले आई थी. इसी छत ने उन्हें तनावमुक्त होना सिखाया था. इसी छत ने उन्हें स्वयं से, अपनी सांसों से परिचित करवाया था. वह छत जैसे उन की कर्मस्थली बन गई थी. रमेश ने मन ही मन सोचा कि यदि बेटी होगी तो वह उस का नाम बेला रखेगा और नीना ने मन ही मन सोचा कि अगर बेटा हुआ तो उस का नाम अंबर रखेगी, क्योंकि खुली छत पर अंबर के नीचे उसे यह उपहार मिला था.

तीज 2022: कठपुतली- शादी के बाद मीता से क्यों दूर होने लगा निखिल

तीज 2022: पति-पत्नी के रिश्ते में कायम रखें रोमांस  

पतिपत्नी के बीच अच्छे रिश्ते का होना एक सुखद एहसास होता है, जिसे दुनिया का हर व्यक्ति पाना चाहता है.  सुमित और पूजा के विवाह को हुए 10 साल बीत चुके हैं. लेकिन दोनों के बीच का प्यार देख कर लगता है जैसे कुछ ही अरसा हुआ है. दोनों का कहना है कि आज भी दोनों अपने रिश्ते में वही ताजगी और नयापन महसूस करते हैं जैसे शुरुआती दिनों में.

दरअसल, उन्होंने अपने रिश्ते को बो िझल नहीं बनने दिया. एकदूसरे की खुशी का खयाल रखा. सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक रिश्ता इतना मजबूत बनाया हुआ है कि उस में ‘मैं’ की भावना नहीं है. लेकिन हर पतिपत्नी सुमित और पूजा की तरह खुशमिजाज नहीं होते. अकसर पतिपत्नी में विवाह के कुछ वर्षों बाद ही आपसी  झगड़े, तेरामेरा, रूठनामनाना शुरू हो जाता है. ऐसा नहीं है कि पतिपत्नी के रिश्ते के बीच में छिटपुट  झगड़े, रूठनामनाना हो ही न, लेकिन, किस तरह के हों और उन्हें कैसे खत्म किया जाए, यह माने रखता है.  खराब रिश्ते की सब से बड़ी निशानी है एकदूसरे के साथ रहने के बाद भी खुश न रह पाना. साथी को खुश करने का सिर्फ यही मतलब नहीं है कि अपने पार्टनर की सारी बात मान लें बल्कि अपने साथी के साथ हंसीमजाक करने से भी खुशी मिलती है.

देखा जाता है जिन कपल्स के बीच कुछ समय तक साथ रहने के बाद हंसीमजाक नहीं हो पाता है, उन को एकदूसरे के साथ बोरियत होने लगती है. प्यार व रोमांस की वजह से ही हर रिश्ता कामयाब होता है. आइए जानें कैसे बनते हैं पतिपत्नी के बीच मजबूत रिश्ते. बातें आसान हैं लेकिन मन को छू जाने वाली हैं.एकदूसरे को पूरा समय देना : पतिपत्नी के रिश्ते को गहरा करने के लिए एकदूसरे के साथ समय बिताएं. उन की बातें सुनें, उन्हें जानने की कोशिश करें. साथी के साथ समय बिताते समय ध्यान रखें कि आप जितना उन को सहज महसूस करवाएंगे उतना ही आप दोनों का रिश्ता करीब होगा और रिश्ते में मजबूती आएगी.  साथी की अहमियत सम झें : जिस तरह का बरताव आप अपने साथी से करेंगे वैसा ही वह भी करेगा. इसलिए एकदूसरे की रिस्पैक्ट करें.

खुद को सही साबित करने के चक्कर में अपने पाटर्नर की इंसल्ट न करें और न ही नीचा दिखाने की कोशिश करें. रिश्ते की शुरुआत में आप दोनों ने एकदूसरे को खुश रखने का वादा किया था, इसलिए दोनों को एकदूसरे की जरूरतों को पूरा करना होगा और अपने होने का एहसास कराना होगा. एकदूसरे को धोखा न देना : दांपत्य की नींव है विश्वास जिस पर पतिपत्नी का रिश्ता टिका होता है. इस में एक बार शक घर कर जाए तो नींव में ऐसा घुन लगता है कि वह चरमरा जाती है. एकदूसरे की बातों पर विश्वास करना और धोखा न देना ही रिश्ते को सफल बनाता है. रिश्ते में खुलापन रखें : पतिपत्नी के रिश्ते में खुलापन बहुत जरूरी है ताकि दोनों अपनी कोई भी बात कहने में  िझ झकें नहीं.

अगर आप की कोई फरमाइश है तो अपने पार्टनर को बताएं. यह न सोचें कि वह आप के कहे बगैर ही सम झ जाए, हर कोई अंतर्यामी नहीं होता.तारीफ जरूरी है : अपने साथी की खूबियों की तारीफ करें और इस तारीफ को हो सके तो घरवालों के सामने भी कहें. इस से आत्मविश्वास बढ़ता है. यही नहीं, उस की कमजोरियों को दूर करने में उन की मदद करें.अपशब्द न बोलें : कई बार किसी मामूली बात को ले कर भी  झगड़ा हो जाता है. ऐसे में अपने साथी को अपशब्द बोलने से बचें और बातचीत बंद न करें. इस से रिश्ता खराब होता है. इसलिए तर्कवितर्क करते समय आपा न खोएं.  माफी मांगना सीखें : ‘सौरी’ छोटा सा शब्द है. लेकिन यह बिगड़ी बात बना देता है. इसलिए, गलती होने पर माफी जरूर मांग लें. इस से  झगड़ा आगे नहीं बढ़ता.  सरप्राइज दें : अपने साथी की रुचियों को सम झें और उस में अपनी रुचि दिखाएं, इसलिए बीचबीच में पार्टनर को सरप्राइज जरूर दें. अगर आप के पार्टनर को लौंगड्राइव का शौक है तो कभीकभी उसे बिना बताए लौंगड्राइव का प्रोग्राम बना सकते हैं.

छोटे-छोटे गिफ्ट सरप्राइज भी दे सकते हैं जिस से आप का बजट भी न बिगड़े और पार्टनर भी सरप्राइज देख कर खुश हो जाए.  प्यार को कभी खत्म न होने दें : ‘आई लव यू’. 3 शब्दों का यह वाक्य सारे गुस्से को खत्म कर देता है. इसलिए, इसे कहने से न चूकें. शादी को तरोताजा, जोश से भरने के लिए डेटिंग जैसी चीज को खत्म न करें. डेटिंग आप को पुराने वाले दिन लौटा देती है. पुरानी यादें ताजा होती रहती हैं. सब परेशानी घर पर छोड़ कर रात को दोनों कभी डिनर पर जाएं. यह संभव न हो, तो दिन में दोनों कहीं साथ में वक्त गुजारें. जिंदगी में कुछ लमहे अपने लिए जीने बहुत जरूरी हैं.

बन्नी चाऊ होम डिलीवरी: मालिनी के साजिश में फंसी बन्नी! कस्टमर सुनाएंगे खरी-खोटी

टीवी सीरियल बन्नी चाऊ होम डिलीवरी काफी कम वक्त में दर्शकों का दिल जीत चुका है. शो के मेकर्स सीरियल में लोगों का इंट्रेस्ट बनाए रखने के लिए बड़ा ट्विस्ट लाते रहते हैं. इन दिनों शो की कहानी में ऐसा ही ट्विस्ट एंड टर्न दिखाया जा रहा है. जिससे दर्शकों का फुल एंटेरटेनमेंट हो रहा है. आइए बताते हैं, शो के नए अपडेट्स के बारे में…

शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि बन्नी (उलका गुप्ता) और युवान (प्रवीश मिश्रा) की शादी के बाद कहानी एक नया मोड़ ले चुकी है. तो वहीं दूसरी ओर मालिनी (पार्वती सहगल) युवान और बन्नी के काफी करीब हो रही हैं. ऐसा लगता है कि वह एक बड़े बदलाव से गुजरी है और बन्नी के लिए नया प्लान बना रही है.

 

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शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि युवान को उसकी नयी मम्मी अच्छी लगने लगेगी. ये देखकर बन्नी और बाकी परिवारवालों का बड़ा झटका लगेगा. बन्नी को लगेगा कि कहीं मालिनी कोई नई चाल चल रही है. ऐसे में बन्नी युवान से पूछेगी कि अचानक तुम्हें मालिनी क्यों अच्छी लगने लगी तभी वह बन्नी को सीक्रेट बताने जाता है वहां मालिनी आ जाती है.

 

शो में आप ये भी देखेंगे कि युवान मालिनी से कहता है कि वह बन्नी से सीक्रेट नहीं छिपा सकता है, मालिनी उसे समझाती है और कहती है कि उसे बन्नी से कुछ नहीं बताना है.

 

शो के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि जन्माष्टमी के त्यौहार में युवान और बन्नी करीब आएँगे. इसी दौरान बन्नी के कस्टमर की एंट्री होगी. कस्टमर बन्नी पर भड़केंगे और खाने की शिकायत करेंगे, कहेंगे कि इसमें जूठा खाना है. बन्नी सफाई देगी और कहेगी कि मैंने तो टिफिन में अच्छा खाना दिया था फिर ये कहां से आया? तभी युवान कहेगा कि ये सब मैंने किया है ताकि नयी मम्मी खुश हो जाये. अब शो में ये देखना होगा कि बन्नी कैसे मालिनी के साजिश का पर्दाफाश करती है..

The Kapil Sharma Show: इस दिन से ऑनएयर होगा कपिल शर्मा शो, देखें Video

कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो का फैंस को बेसब्री से इंतजार है. तो दर्शकों के लिए खुशखबरी है कि जल्द ही कपिल शर्मा शो की टीवी पर वापसी हो रही है. जी हां, सही सुना आपने… चैनल पर ‘द कपिल शर्मा’ का ऑफिशियल प्रोमो वीडियो रिलीज हो गया है. इसके साथ ही ‘द कपिल शर्मा’ कब और कैसे देखें ये सभी डिटेल भी सामने आ चुकी है

‘द कपिल शर्मा’  में इस बार सृष्टि रोड़े भी नजर आएंगी. शो के मेकर्स ने लेटेस्ट प्रोमो शेयर करते हुए बताया कि कपिल शर्मा का नया शो 10 सितंबर से टीवी पर शुरू होने जा रहा है. फैंस हर शनिवार रविवार को ‘द कपिल शर्मा’ को टीवी पर एन्जॉय कर पाएंगे. इस बार फिर सोनी चैनल पर ही कपिल शर्मा का शो प्रसारित होगा.

 

वीडियो में आप देख सकते हैं कि कपिल अस्पताल में भर्ती होते हैं. जैसे ही वह होश में आते हैं तो सभी उनके पास खड़े होते हैं. वह अपने ससुर जी को पहचानते हैं जिसका किरदार इश्तियाक खान निभा रहे हैं. कीकू शारदा गुड़िया के रूप में और चंदन प्रभाकर बतौर चंदू नजर आते हैं. हालांकि कपिल, सुमोना को देखकर कहते हैं ये बहनजी कौन है. इसके बाद सब कहते हैं कि ये तुम्हारी पत्नी है. कपिल इस बात को एक्सेप्ट नहीं करता.

 

शो के पिछले सीजन आपने देखा था कि मंजू बनकर सुमोना चक्रवर्ती ने दर्शकों को खूब हंसाया था. वह कप्पू शर्मा की पड़ोसी बनी थीं. लेकिन इस सीजन में वह उनकी पत्नी बनकर दर्शकों को हंसाने वाली है. इस प्रोमो के जरिए कन्फर्म हो गया है कि इस बार शो में कौन-कौन है. इसके साथ ही पुराने कॉमेडियन भी नए अवतार में नजर आए हैं.

 

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Best Hindi Story : एक गलत सोच – जब बहू चुनने में हुई सरला से गलती

Best Hindi Story : किचन में खड़ा हो कर खाना बनातेबनाते सरला की कमर दुखने लगी पर वे क्या करें, इतने मेहमान जो आ रहे हैं. बहू की पहली दीवाली है. कल तक उसे उपहार ले कर मायके जाना था पर अचानक बहू की मां का फोन आ गया कि अमेरिका से उन का छोटा भाई और भाभी आए हुए हैं. वे शादी पर नहीं आ सके थे इसलिए वे आप सब से मिलना चाहते हैं. उन्हीं के साथ बहू के तीनों भाई व भाभियां भी अपने बच्चों के साथ आ रहे हैं.

कुकर की सीटी बजते ही सरला ने गैस बंद कर दी और ड्राइंगरूम में आ गईं. बहू आराम से बैठ कर गिफ्ट पैक कर रही थी.

‘‘अरे, मम्मी देखो न, मैं अपने भाईभाभियों के लिए गिफ्ट लाई हूं. बस, पैक कर रही हूं…आप को दिखाना चाहती थी पर जल्दी है, वे लोग आने वाले हैं इसलिए पैक कर दिए,’’ बहू ने कुछ पैक किए गिफ्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा. तभी सरलाजी का बेटा घर में दाखिल हुआ और अपनी पत्नी से बोला, ‘‘सिमी, एक कप चाय बना लाओ. आज आफिस में काफी थक गया हूं.’’

‘‘अरे, आप देख नहीं रहे हैं कि मैं गिफ्ट पैक कर रही हूं. मां, आप ही बना दीजिए न चाय. मुझे अभी तैयार भी होना है. मेरी छोटी भाभी बहुत फैशनेबल हैं. मुझे उन की टक्कर का तैयार होना है,’’ इतना कह कर सिमी अपने गिफ्ट पैक करने में लग गई.

शाम को सरलाजी के ड्राइंगरूम में करीब 10-12 लोग बैठे हुए थे. उन में बहू के तीनों भाई, उन की बीवियां, बहू के मम्मीपापा, भाई के बच्चे और उन सब के बीच मेहमानों की तरह उन की बहू सिमी बैठी थी. सरला ने इशारे से बहू को बुलाया और रसोईघर में ले जा कर कहा, ‘‘सिमी, सब के लिए चाय बना दे तब तक मैं पकौड़े तल लेती हूं.’’

‘‘क्या मम्मी, मायके से परिवार के सारे लोग आए हैं और आप कह रही हैं कि मैं उन के साथ न बैठ कर यहां रसोई में काम करूं? मैं तो कब से कह रही हूं कि आप एक नौकर रख लो पर आप हैं कि बस…अब मुझ से कुछ मत करने को कहिए. मेरे घर वाले मुझ से मिलने आए हैं, अगर मैं यहां किचन में लगी रहूंगी तो उन के आने का क्या फायदा,’’ इतना कह कर सिमी किचन से बाहर निकल गई और सरला किचन में अकेली रह गईं. उन्होंने शांत रह कर काम करना ही उचित समझा.

सरलाजी ने जैसेतैसे चाय और पकौड़े बना कर बाहर रख दिए और वापस रसोई में खाना गरम करने चली गईं. बाहर से ठहाकों की आवाजें जबजब उन के कानों में पड़तीं उन का मन जल जाता. सरला के पति एकदो बार किचन में आए सिर्फ यह कहने के लिए कि कुछ रोटियों पर घी मत लगाना, सिमी की भाभी नहीं खाती और खिलाने में जल्दी करो, बच्चों को भूख लगी है.

सरलाजी का खून तब और जल गया जब जातेजाते सिमी की मम्मी ने उन से यह कहा, ‘‘क्या बहनजी, आप तो हमारे साथ जरा भी नहीं बैठीं. कोई नाराजगी है क्या?’’

सब के जाने के बाद सिमी तो तुरंत सोने चली गई और वे रसोई संभालने में लग गईं.

अगले दिन सरलाजी का मन हुआ कि वे पति और बेटे से बीती शाम की स्थिति पर चर्चा करें पर दोनों ही जल्दी आफिस चले गए. 2 दिन बाद फिर सिमी की एक भाभी घर आ गई और उस को अपने साथ शौपिंग पर ले गई. शादी के बाद से यह सिलसिला अनवरत चल रहा था. कभी किसी का जन्मदिन, कभी किसी की शादी की सालगिरह, कभी कुछ तो कभी कुछ…सिमी के घर वालों का काफी आनाजाना था, जिस से वे तंग आ चुकी थीं.

एक दिन मौका पा कर उन्होंने अपने पति से इस बारे में बात की, ‘‘सुनो जी, सिमी न तो अपने घर की जिम्मेदारी संभालती है और न ही समीर का खयाल रखती है. मैं चाहती हूं कि उस का अपने मायके आनाजाना कुछ कम हो. शादी को साल होने जा रहा है और बहू आज भी महीने में 7 दिन अपने मायके में रहती है और बाकी के दिन उस के घर का कोई न कोई यहां आ जाता है. सारासारा दिन फोन पर कभी अपनी मम्मी से, कभी भाभी तो कभी किसी सहेली से बात करती रहती है.’’

‘‘देखो सरला, तुम को ही शौक था कि तुम्हारी बहू भरेपूरे परिवार की हो, दिखने में ऐश्वर्या राय हो. तुम ने खुद ही तो सिमी को पसंद किया था. कितनी लड़कियां नापसंद करने के बाद अब तुम घर के मामले में हम मर्दों को न ही डालो तो अच्छा है.’’

सरलाजी सोचने लगीं कि इन की बात भी सही है, मैं ने कम से कम 25 लड़कियों को देखने के बाद अपने बेटे के लिए सिमी को चुना था. तभी पति की बातों से सरला की तंद्रा टूटी. वे कह रहे थे, ‘‘सरला, तुम कितने दिनों से कहीं बाहर नहीं गई. ऐसा करो, तुम अपनी बहन के घर हो आओ. तुम्हारा मन अच्छा हो जाएगा.’’

अपनी बहन से मिल कर अपना दिल हलका करने की सोच से ही सरला खुश हो गईं. अगले दिन ही वे तैयार हो कर अपनी बहन से मिलने चली गईं, जो पास में ही रहती थीं. पर बहन के घर पर ताला लगा देख कर उन का मन बुझ गया. तभी बहन की एक पड़ोसिन ने उन्हें पहचान लिया और बोलीं, ‘‘अरे, आप सरलाजी हैं न विभाजी की बहन.’’

‘‘जी हां, आप को पता है विभा कहां गई है?’’

‘‘विभाजी पास के बाजार तक गई हैं. आप आइए न.’’

‘‘नहींनहीं, मैं यहीं बैठ कर इंतजार कर लेती हूं,’’ सरला ने संकोच से कहा.

‘‘अरे, नहीं, सरलाजी आप अंदर आ कर इंतजार कर लीजिए. वे आती ही होंगी,’’ उन के बहुत आग्रह पर सरलाजी उन के घर चली गईं.

‘‘आप की तसवीर मैं ने विभाजी के घर पर देखी थी…आइए न, शिखा जरा पानी ले आना,’’ उन्होंने आवाज लगाई.

अंदर से एक बहुत ही प्यारी सी लड़की बाहर आई.

‘‘बेटा, देखो, यह सरलाजी हैं, विभाजी की बहन,’’ इतना सुनते ही उस लड़की ने उन के पैर छू लिए.

सरला ने उसे मन से आशीर्वाद दिया तो विभा की पड़ोसिन बोलीं, ‘‘यह मेरी बहू है, सरलाजी.’’

‘‘बहुत प्यारी बच्ची है.’’

‘‘मम्मीजी, मैं चाय रखती हूं,’’ इतना कह कर वह अंदर चली गई. सरला ने एक नजर घुमाई. इतने सलीके से हर चीज रखी हुई थी कि देख कर उन का मन खुश हो गया. कितनी संस्कारी बहू है इन की और एक सिमी है.

‘‘बहनजी, विभा दीदी आप की बहुत तारीफ करती हैं,’’ मेरा ध्यान विभा की पड़ोसिन पर चला गया. इतने में उन की बहू चायबिस्कुट के साथ पकौड़े भी बना कर ले आई और बोली, ‘‘लीजिए आंटीजी.’’

‘‘हां, बेटा…’’ तभी फोन की घंटी बज गई. पड़ोसिन की बहू ने फोन उठाया और बात करने के बाद अपनी सास से बोली, ‘‘मम्मी, पूनम दीदी का फोन था. शाम को हम सब को खाने पर बुलाया है पर मैं ने कह दिया कि आप सब यहां बहुत दिनों से नहीं आए हैं, आप और जीजाजी आज शाम खाने पर आ जाओ. ठीक कहा न.’’

‘‘हां, बेटा, बिलकुल ठीक कहा,’’ बहू किचन में चली गई तो विभा की पड़ोसिन मुझ से बोलीं, ‘‘पूनम मेरी बेटी है. शिखा और उस में बहुत प्यार है.’’

‘‘अच्छा है बहनजी, नहीं तो आजकल की लड़कियां बस, अपने रिश्तेदारों को ही पूछती हैं,’’ सरला ने यह कह कर अपने मन को थोड़ा सा हलका करना चाहा.

‘‘बिलकुल ठीक कहा बहनजी, पर मेरी बहू अपने मातापिता की अकेली संतान है. एकदम सरल और समझदार. इस ने यहां के ही रिश्तों को अपना बना लिया है. अभी शादी को 5 महीने ही हुए हैं पर पूरा घर संभाल लिया है,’’ वे गर्व से बोलीं.

‘‘बहुत अच्छा है बहनजी,’’ सरला ने थोड़ा सहज हो कर कहा, ‘‘अकेली लड़की है तो अपने मातापिता के घर भी बहुत जाती होगी. वे अकेले जो हैं.’’

‘‘नहीं जी, बहू तो शादी के बाद सिर्फ एक बार ही मायके गई है. वह भी कुछ घंटे के लिए.’’

हम बात कर ही रहे थे कि बाहर से विभा की आवाज आई, ‘‘शिखा…बेटा, घर की चाबी दे देना.’’

विभा की आवाज सुन कर शिखा किचन से निकली और उन को अंदर ले आई. शिखा ने खाने के लिए रुकने की बहुत जिद की पर दोनों बहनें रुकी नहीं. अगले ही पल सरलाजी बहन के घर आ गईं. विभा के दोनों बच्चे अमेरिका में रहते थे. वह और उस के पति अकेले ही रहते थे.

‘‘दीदी, आज मेरी याद कैसे आ गई?’’ विभा ने मेज पर सामान रखते हुए कहा.

‘‘बस, यों ही. तू बता कैसी है?’’

‘‘मैं तो ठीक हूं दीदी पर आप को क्या हुआ कि कमजोर होती जा रही हो,’’ विभा ने कहा. शायद सरला की परेशानियां उस के चेहरे पर भी झलकने लगी थीं.

‘‘आंटीजी, आज मैं ने राजमा बनाया है. आप को राजमा बहुत पसंद है न. आप तो खाने के लिए रुकी नहीं इसलिए मैं ले आई और इन्हें किचन में रख रही हूं,’’ अचानक शिखा दरवाजे से अंदर आई, किचन में राजमा रख कर मुसकराते हुए चली गई.

‘‘बहुत प्यारी लड़की है,’’ सरला के मुंह से अचानक निकल गया.

‘‘अरे, दीदी, यही वह लड़की है जिस की बात मैं ने समीर के लिए चलाई थी. याद है न आप को इन के आफिस के एक साथी की बेटी…दीदी आप को याद नहीं आया क्या…’’ विभा ने सरला की याददाश्त पर जोर डालने को कहा.

‘‘अरे, दीदी, जिस की फोटो भी मैं ने मंगवा ली थी, पर इस का कोई भाई नहीं था, अकेली बेटी थी इसलिए आप ने फोटो तक नहीं देखी थी.’’

विभा की बात से सरला को ध्यान आया कि विभा ने उन से इस लड़की के बारे में कहा था पर उन्होंने कहा था कि जिस घर में बेटा नहीं उस घर की लड़की नहीं आएगी मेरे घर में, क्योंकि मातापिता कब तक रहेंगे, भाइयों से ही तो मायका होता है. तीजत्योहार पर भाई ही तो आता है. यही कह कर उन्होंने फोटो तक नहीं देखी थी.

‘‘दीदी, इस लड़की की फोटो हमारे घर पर पड़ी थी. श्रीमती वर्मा ने देखी तो उन को लड़की पसंद आ गई और आज वह उन की बहू है. बहुत गुणी है शिखा. अपने घर के साथसाथ हम पतिपत्नी का भी खूब ध्यान रखती है. आओ, चलो दीदी, हम खाना खा लेते हैं.’’

राजमा के स्वाद में शिखा का एक और गुण झलक रहा था. घर वापस आते समय सरलाजी को अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि लड़की के गुणों को अनदेखा कर के उन्होंने भाई न होने के दकियानूसी विचार को आधार बना कर शिखा की फोटो तक देखना पसंद नहीं किया. इस एक चूक की सजा अब उन्हें ताउम्र भुगतनी होगी.

मैं अपने मौसी के लड़के से प्रेम करती हूं, क्या करूं?

सवाल

मैं 22 साल की युवती हूं और इस समय ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हूं. 5 महीने पहले मेरा अपने होमटाउन जाना हुआ. वहां मेरे बड़े भाई की शादी थी. परिवार के सभी रिश्तेदार आए थे. वहां मेरी मुलाकात मौसी के लड़के से हुई. हम एकदूसरे से पहली बार मिले थे. उस से पहले मुझे उस के बारे में पता नहीं था. शादी की हंसीमजाक, मस्ती में हम दोनों एकदूसरे के करीब आने लगे. मुझे नहीं पता यह कैसे हुआ पर एकदूसरे से लगाव या कह लें प्यार हो गया, यह जानते हुए भी कि रिश्ते में हम दोनों भाईबहन लगते हैं और यह रिश्ता कभी सफल नहीं हो सकता. अभी हम एकदूसरे को रोज मैसेज और फोन कर रहे हैं. हमारे बीच इंटिमेट बातें भी हो जाती हैं. मुझे समझ नहीं आ रहा खुद को कैसे रोकूं और यह सब जो हो रहा है उसे कैसे खत्म करूं?

जवाब

आकर्षण ऐसी चीज है जो विपरीत चीजों को एकदूसरे के करीब खींचता है. आप दोनों आकर्षण का शिकार हुए हैं. शादी में कई लोग मिलते हैं. बहुत बार ऐसे करीबी रिश्तेदार मिलते हैं जिन से कभी जिंदगी में मिले भी नहीं होते. ऐसे में वे हमारे लिए पूरी तरह अनजान ही होते हैं. जिस रिश्ते के लिए दिमाग तैयार नहीं होता वहां आकर्षण अपना काम कर रहा होता है.

आप बता रही हैं जिस से आप इन कुछ दिनों में क्लोज आई हैं, वह रिश्ते में आप का भाई लगता है, यानी आप की मम्मी की बहन का बेटा. मेरी मानिए तो इस रिश्ते को जितनी जल्दी खत्म कर लें उतना ठीक, अभी शुरुआत ही है, वरना इस से आप दोनों को आगे चल कर परेशानी उठानी पड़ सकती है.

भारतीय कल्चर, खासकर हिंदुओं, में इस तरह से क्लोज रिश्ते में शादी करना गलत माना जाता है. आगे जा कर अगर किसी को आप दोनों के बारे में जरा सी भी भनक लगी तो बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है. आप की मम्मी और मौसी के बीच रिश्ते बिगड़ सकते हैं. इस का खमियाजा आप को भी भुगतना पड़ सकता है. आप22 साल की हैं, पढ़ाई और कैरियर के लिए मन में कई सपने होंगे, उन सपनों पर इस का प्रभाव पड़ सकता है.

मेरी मानिए तो ऐसे रिश्तों से दूरी बना लें. अपने कैरियर पर फोकस करें. जिस से आप बात कर रही हैं उसे भी समझा दें, इस से कुछ दिन खराब लगेगा पर जल्दी आप अपनीअपनी पटरी पर लौट आएंगे.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

धर्म की जकड़न में कोर्ट

अमेरिका में चर्च का दबाव उसी तरह बढ़ रहा है जैसे भारत में भगवा गैंग का बढ़ रहा है. चर्च का बिजनैस तभी चलता है जब चर्च किसी न किसी मामले को ले कर अपने शिष्यों को लगातार भड़काऊ हालत में रख सकें. औरतों के गर्भपात के हक पर चर्च ने खूब हल्ला मचाया है और अपने शिष्यों को कुछ भी करने की छूट दे कर अपना धंधा बढ़ाया है. नतीजा यह है कि 1973 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जिस गर्भपात के अधिकार को संवैधानिक माना था, चर्च जाने वाले कट्टरपंथी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जून 2022 में उस फैसले को उलट दिया

और गर्भपात का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं रह गया.

राज्यों को अधिकार है कि वे चाहें तो गर्भपात को अवैध कर दें. गर्भपात पर बहस चर्च में शुरू होती है जहां धार्मिक कट्टर हर सप्ताह संडे को जमा होते हैं और बाइबिल के चुने हुए अंशों को ईश्वरवाणी मान कर प्रवचन देते पादरी के आगे नतमस्तक हो कर हां में हां मिलाते हैं. राज्यों के अधिकांश राजनीतिबाज भारत की तरह चर्च में मत्था टेके बिना जीत नहीं सकते क्योंकि धर्म के धंधे की खासीयत यह है कि इस में इकट्ठा होने की एक जगह बनवा दी जाती है और बचपन से ही धर्म का पाठ घोटघोट कर पढ़ा दिया जाता है.

चर्च की बातों में आए पोलिटीशियनों की यह हिम्मत नहीं होती कि वे काल्पनिक, अतार्किक व भ्रमित बातों, जो धर्मग्रंथों में लिखी हैं, का विरोध कर सकें. बाइबिल में सैकड़ों कहानियां ऐसी हैं जिन्हें किसी भी युग में सत्य नहीं माना जा सकता था, फिर भी उन्हें सुनने वाले मस्त हो जाते थे और उन का इस्तेमाल घर की औरतों, बच्चों, पड़ोसियों व दोस्तों के साथसाथ दुश्मनों पर भी करते रहे हैं.

इन्हीं लोगों की सेना आज चर्च का एजेंडा चला रही है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला इसी का नतीजा है. जज भी बेहद धार्मिक होते हैं क्योंकि धर्म की चाशनी में डूबे राजनीतिबाज उन्हें पहले छोटा जज बनवाते हैं, फिर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाते हैं. हमारे यहां भी ऐसे सुप्रीम कोर्ट जज रहे हैं और अभी हैं जो सत्ता में बैठे लोगों को लगभग ईश्वर सा सम्मान देते रहे हैं क्योंकि उन्होंने ही उन्हें यह पद दिलाया.

गर्भपात का हक औरत का और सिर्फ औरत का है और यह फैसला कि गर्भपात होना चाहिए या नहीं, डाक्टर और पेशेंट के बीच का है, इस में न चर्च बीच में आता है न कोई धर्म. पर अगर बच्चे नहीं हुए तो दान कौन देगा, कौन धर्म के नाम पर दूसरों की जान लेगा, अपनी जान देगा.

बच्चे औरतों को घर की गुलाम बनाने में भी बड़ा योगदान देते हैं. बच्चों की खातिर औरतें पतियों की गुलामी करती हैं, पिटती हैं, रातदिन खटती हैं और बेसमय बूढ़ी हो जाती हैं. उन्हें भी लगने लगता है कि उन को कहीं सुकून मिलेगा तो ईश्वर की दुकान पर जहां धर्म का दुकानदार, जो चिकनीचुपड़ी बातें कहने का एक्सपर्ट है, उन्हें पति या पिता के अधीन रहने का आदेश देता है और क्षणिक सुख के लिए अपने साथ सुला भी लेता है. अगर बच्चों का जबरन बो झ न हो तो औरतें स्वतंत्र रह कर अपना कैरियर बना सकती हैं, ऊंचाइयों पर जा सकती हैं.

बच्चों की चाहत हर औरत में प्राकृतिक है. वह गर्भपात तब कराती है जब उसे होने वाला बच्चा बो झ लगने लगे. जिंदा बच्चे को वह मार नहीं सकती पर जो अभी पैदा ही नहीं हुआ उस पर उस का पूरा हक है और होना चाहिए. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उलटा फैसला दे कर अमेरिका को पश्चिमी एशिया के इराक, ईरान, सऊदी अरब और अफगानिस्तान जैसे मुसलिम कट्टरपंथी देशों की कतार में ला खड़ा कर दिया है.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट अब लोगों को शांति व हक के साथ जीने की छत नहीं दे रहा, वह तो एकएक कर के पिछले 200-300 सालों में मिले मौलिक अधिकारों को छीन कर चर्च या चर्च समर्थक नेताओं के हाथों में दे रहा है. ‘रो बनाम वेड’ के फैसले को उलटना वैसा ही है जैसे भारत में आपातकाल को सही ठहराने या राममंदिर को बनाने की जगह देने के फैसले थे. ये ऐसे खंजर हैं जो पूरे समाज को गहरा घाव देते हैं, दिखते नहीं, खून नहीं बहता पर शरीर अधमरा हो जाता है.

अमेरिका अब लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक होने का दावा नहीं कर सकता. वह रूस व चीन की तरह कट्टरपंथी देश है जो फिलहाल आर्थिक तौर पर उन्नत है पर उस का पतन निश्चित है.

न्यूमैटिक प्लांटर: बोआई की आधुनिक मशीन

इस मशीन की खूबी यह है कि एक ही बार में एक से ज्यादा फसलों के बीज की बोआई कर सकती है. यह मशीन सामान्य सीड ड्रिल यंत्र से उन्नत यंत्र है. इस यंत्र से किसान सभी प्रकार के बीजों की बोआई आसानी से कर सकते हैं. अलगअलग फसलों के अनुसार बीजों का जमीन में गिरने का अंतर रखने के लिए भी सुविधा दी गई है.

इस मशीन में एक ब्लोअर लगा होता है. यह ब्लोअर हवा के दबाव से बीज को उठा कर बीज बोने की प्रकिया पूरी करता है. बीज की दर आप अपनी मनचाही मात्रा के अनुसार तय कर सकते हैं. इस न्यूमैटिक प्लांटर को ट्रैक्टर के पीछे जोड़ कर चलाया जाता है. इस मशीन को कुछ खास निर्माता ही बनाते हैं.

न्यूमैटिक प्लांटर की विशेषताएं

* एक ही समय में एक ही जगह तय दूरी पर एक ही बीज गिरता है. बीज छूटने या डबल बीज गिरने की गुंजाइश न के बराबर होती है.

* बोआई के समय बीज को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है.

* बोआई के दौरान बीजों के बीच सही दूरी होने से फसल अच्छी तरीके से होती है. नतीजतन, अच्छी पैदावार मिलती है.

* बीज की सही गहराई पर बोआई करने से फसल की बढ़वार एकसमान होती है.

* डैप्थ ह्वील व प्रैस ह्वील से बीज की गहराई को नियंत्रित किया जा सकता है.

* इस मशीन का इस्तेमाल करने से मजदूरी में कमी आती है और बोआई में होने वाला खर्च कम होता है. साथ ही, समय की बचत भी होती है.

* इस मशीन से आप 2, 4 या 6 लाइनों में अपनी सुविधा के मुताबिक बोआई कर

सकते हैं.

* इस के इस्तेमाल से कीमती बीजों की बचत होती है.

अधिक जानकारी के लिए नेशनल एग्रो इंडस्ट्रीज की वैबसाइट या उन के द्वारा दिए गए फोन नंबरों  91-161-2222041, 5087853, 4641299 और उन के मोबाइल नंबर

91-8146101101 पर संपर्क कर सकते हैं. ठ्ठ

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