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तीज 2022: पति-पत्नी के बीच क्यों होते हैं झगड़े, जानें ये 6 कारण

पति-पत्नी का रिश्ता प्यार और तकरार का रिश्ता होता हैं. जिसमें दोनों एक-दूसरे से इतना प्यार करते हैं कि उनके बीच होने वाली बहस और छोटी-मोती लड़ाई भी उनके रिश्ते पर प्रभाव नहीं डालती हैं. लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिनका सीधा असर पति-पत्नी के बीच मनमुटाव पैदा करता हैं.

आज हम आपको कुछ ऐसे कारण बताने जा रहे हैं जो झगड़े की वजह बनते है. इन्हें जानकर इनसे दूरी बनाए रखने में ही आपके रिश्ते की भलाई हैं. तो आइये जानते हैं पति-पत्नी के रिश्ते में होने वाले झगड़ों के कारणों के बारे में.

  1. सरप्राइज देना बंद

शादी के कुछ समय बाद पति अपनी पत्नी को सरप्राइज देना बंद कर देता है. ऐसे में महिलाओं को लगता है कि उनका पार्टनर बदल गया है, जोकि रिश्ते में झगड़े का कारण बनता है.

2. छुट्टी न लेना

पत्नी को अक्सर ये शिकायत रहती है कि उनके पति औफिस से छुट्टी नहीं लेते. यही छोटी-सी बात अक्सर पति-पत्नी के बीच झगड़े का कारण बन जाती है.

3. रोमांस खत्म होना

पति-पत्नी जब माता-पिता बन जाते हैं तो जाहिर है उनमें रोमांस खत्म हो जाता है. मगर आपको बता दें कि यह भी आपके बीच झगड़े पैदा करता है. रिश्ते में पहले जैसा प्यार न रहना झगड़े का कारण तो बनेगा ही.

4. दोस्तों को ज्यादा वक्त

छुट्टी के बाद दोस्तों के साथ एंजौय करना सही है लेकिन अपनी पत्नी को समय न देना गलत है. फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम न बिताना मनमुटाव की वजह बनता है.

5. गीला टौवेल, गंदे मोजे

महिलाएं घर की साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखती हैं और पार्टनर से भी यही उम्मीद करती है कि वह कम से कम अपनी चीजों को तो जगह पर रखें. अगर ऐसा न हो तो दोनों में झगड़ा होना तो लाजमी है.

6. रोज एक डिश

पुरुष रोजाना एक ही तरह की डिश खाना पसंद नहीं करते लेकिन महिलाओं को समस्या होती है कि वह रोज नया क्या बनाए. यह प्रौब्लम भी पति-पत्नी के बीच झगड़े का कारण बनती है.

सरकार किसानों को एमएसपी देना ही नहीं चाहती: डा. राजाराम त्रिपाठी

डा. राजाराम त्रिपाठी राष्ट्रीय संयोजक, अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा)

हाल ही में सरकार द्वारा एमएसपी पर कमेटी गठित की गई है. इस बारे में डा. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि 29 सदस्यीय इस कमेटी में लगभग सभी सदस्य या तो सरकार में शामिल लोग हैं या सरकार से वेतनभोगी अधिकारी हैं, या फिर सत्तारूढ़ पार्टी से जेबी संगठनों के लोग हैं. इतना ही नहीं सरकार के कृपा पात्र और लाभार्थी कंपनियों के लोग इस में शामिल हैं. इन लोगों का इतिहास हम सब को भलीभांति पता है. इन से किसान हितों के बारे में सोचने की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती.

डा. राजाराम त्रिपाठी ने आगे कहा कि इस कमेटी के अध्यक्ष संजय अग्रवाल को बनाया गया है, जिन की अगुआई में उन तीनों काले कानूनों का ड्राफ्ट तैयार किया गया था, जिस का देश के किसानों ने जम कर विरोध किया और उस के बाद उन्हें सरकार को वापस लेना पड़ा.

सही तथ्य यह है कि यह सरकार वास्तव में हमें एमएसपी देना ही नहीं चाहती, क्योंकि हम ने तो सरकार से साफसाफ कहा था कि आप तो वैसे भी दिनप्रतिदिन नएनए कानून ला ही रहे  हैं, तो किसानों पर कृपा कर एक कानून आप एमएसपी पर भी ले कर आ जाइए कि किसानों के उत्पाद को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर यदि कहीं भी कोई भी खरीदता है, तो वह कानूनन जुर्म होगा.

लेकिन यह सरकार तो पूरी तरह से बड़े व्यापारियों के लिए समर्पित प्रतीत होती है. और शायद इसीलिए यह सरकार नहीं चाहती कि सरकार के चहेते व्यापारियों की जेब ढीली हो.

अब रहा सवाल इस कमेटी के नाम पर खड़ी की गई नौटंकी का तो इस में कोई भी गैरतमंद किसान संगठन कभी शामिल नहीं होगा, क्योंकि सरकारी और सत्तारूढ़ दल के हितैषी संगठनों के लोगों से भरी हुई यह कमेटी केवल सरकार के चहेते व्यापारियों के हितों के बारे में ही सोच सकती है, किसानों के हित के बारे में कभी नहीं सोच सकती.

वैसे भी हमारे देश में यह कहा जाता है कि जिस समस्या को हल न करना हो, उस के लिए आप एक कमेटी बना दो, फिर उस कमेटी ने क्या किया, इस की जांच के लिए एक कमेटी बना दो, फिर उन दोनों कमेटियों के कार्यों के मूल्यांकन के लिए एक कमेटी बना दो. यह कमेटी केवल आगामी चुनावों में लाभ प्राप्त करने के लिए बनाई गई दिखावा सरकारी नौटंकी कमेटी है. इस नौटंकी कमेटी से किसानों को अंतत: दुख ही मिलेगा, इसलिए हम ने इसे ‘दुखांतिका नौटंकी’ कहा है.

गौरतलब है कि सरकार द्वारा वापस लिए गए तीनों कृषि कानूनों का शुरुआत में जब कुछेक भ्रमित किसान संगठन स्वागत कर रहे थे, तब सर्वप्रथम अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) ने ही तीनों कृषि कानूनों के खतरनाक प्रावधानों के बारे में देश के किसानों को सचेत करते हुए इन के व्यापक विरोध का सूत्रपात किया था और आईफा की ओर से डा. राजाराम त्रिपाठी ने ही कृषि कानूनों की एकएक परतें खोल दी थीं.

अभी विगत दिनों ही एमएसपी को ले कर आईफा के राष्ट्रीय संयोजक डा. राजाराम त्रिपाठी, देश के जानेमाने वरिष्ठ किसान नेता वीएम सिंह, महाराष्ट्र से राजू शेट्टी, राजस्थान से रामपाल जाट, पंजाब के संयोजक जसकरण सिंह, हिमाचल प्रदेश से संजय कुमार, जम्मूकश्मीर से यवर मीर, झारखंड से संजय ठाकुर, बिहार से छोटे लाल श्रीवास्तव, आंध्र प्रदेश से जगदीश रेड्डी, तमिलनाडु से पलनी अप्पन, गुजरात से सरदूल सिंह, पंजाब से जसविंदर सिंह विर्क, हरियाणा से जगबीर घसौला, दिल्ली से संदीप कुमार शास्त्री, उत्तराखंड से अवनीत पंवार, पूर्वोत्तर से कमांडर शांगपलिंग, अल्फोंड बर्थ, एथीना चोहाई समेत देश के 200 किसान नेताओं की दिल्ली में लगातार बैठकें हुईं और ‘एक सूत्रीय कार्यक्रम’  के तहत देश के सभी कृषि उत्पादों के लिए  एमएसपी कानून लाने के लिए ‘राष्ट्रीय एमएसपी गारंटी मोरचा’ का गठन किया गया.

इसी संदर्भ में आगामी 6 से 8 अक्तूबर को देश के सारे किसान नेता और किसान समूह दिल्ली में जमा होंगे. 3 दिवसीय महासम्मेलन में देश के हर राज्यों की खेती की दिशा, दशा और एमएसपी गारंटी मोरचा की राष्ट्रीय रूपरेखा तय कर दी जाएगी.

– विवेक कुमार, अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा)    

तीज 2022: बॉडी में पानी की कमी को पूरा करती हैं ये 4 चीजें

फास्ट में खाने के लिए कुछ प्लान करें या नहीं पर पानी को जरूरत को गंभीरता से लें. इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए जरूरी है कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें. अगर आपके शरीर में पानी की कमी रहती है तो आपका शरीर डिहाइड्रेट होगा और आपको चक्कर, सिर दर्द और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं. यहां हम आपको कुछ अन्य चीजों के बारे में बताने वाले हैं, जिनको अपनी डाइट में शामिल कर के आप शरीर में होने वाली पानी की कमी को दूर कर सकेंगे.

तो आइए शुरू करते हैं.

चुकंदर का जूस

गरमी में आप हमेशा पानी नहीं पी रहे तो आपकी सेहत के लिए ये हानिकारक हो सकता है. ऐसे में बौडी को हाइड्रेट रखने के लिए आप चुकंदर का जूस पी सकते हैं. जानकारों की माने तो रक्त संबंधी समस्याओं में भी ये काफी लाभकारी होता है. इसके साथ ही ये शरीर में कई आवश्यक विटामिन और खनिज जैसे बी विटामिन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, और लोहे की कमी को भी पूरा करता है.

तरबूज का जूस

तरबूज का 95 फीसदी हिस्सा पानी का होता है. गरमी में लोग इसका सेवन चाव से करते हैं. इसके अलावा इसमें कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.

नारियल पानी का सेवन

शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए नारियल पानी पीना एक अच्छा उपाय है. कई मरीजों को डाक्टर सलाह भी देते हैं कि वो नियमित रूप से इसका सेवन करते रहें. ये शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ पोटेशियम की अच्छी मात्रा भी प्रदान करता हैं.

सलाद में खीरा

गरमी में खीरे का सेवन जरूर करें. शरीर में पानी की कमी को दूर करने में ये बेहद लाभकारी होता है. खीरा गरमी का बहुत अच्छा फल है. शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ साथ ये त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होता है.

होली काउ: पूरी तरह से भ्रमित करती नीरस फिल्म, पढ़ें रिव्यू

रेटिंग: एक स्टार

निर्माताः आलिया सिद्दिकी

निर्देशक: साई कबीर

कलाकारः संजय मिश्रा,नवाजुद्दीन सिद्दिकी,तिग्मांशु धुलिया,सादिया सिद्दिकी, मुकेश भट्ट व अन्य.

अवधिः एक घंटा तीस मिनट

पिछले कुछ समय से ‘गाय’ को लेकर कई तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं.गाय की तस्करी व गाय के मांस को बेचने के आरोप में मुस्लिम युवक या कई मुसलमानों की हिंदू वादी भीड़ द्वारा पीटने की घटनाएं काफी तेजी से बढ़ी हैं.कुछ  वर्ष पहले सिवनी,मध्यप्रदेष में ‘गौ मांस’ रखने के शक में एक मुस्लिम महिला व दो पुरूषों की पेड़ में बांधकर पिटायी की गयी थी.यहां तक कि दुधारू पशुओं के व्यापारियों को भी ‘गोमांस’व्यापारी के रूप मे चिन्हित कर उनके साथ हिंसा की वारदातें आए दिन होती रहती है.इन्ही घटनाक्रमों पर कुछ वर्ष पहले फिल्मकार सूरज कुमार ने एक डाक्यमेंट्ी फिल्म ‘होली काउ’ बनायी थी.अब 2014 में कंगना रानौट को लेकर ‘‘रिवाल्वर रानी’’ जैसी फिल्म का लेखन व निर्देषन कर चुके फिल्मकार साई कबीर ब्लैक कौमेडी वाली फीचर फिल्म ‘‘होली काउ’’ लेकर आए हैं.यह नाम अंग्रेजी में है.जिसका षाब्दिक अर्थ हुआ ‘पवित्र गाय.’फिल्मकार सई कबीर ने एक संवेदनशील और सामाजिक रूप से अति चिंताजनक विषय को अपनी इस फिल्म में उठाया है,मगर फिल्मकार इस फिल्म के माध्यम से क्या कहना चाहते हैं,यह बात साफ नही हो पाती.वह कथानक के स्तर पर काफी भ्रमित नजर आते हैं.

कहानीः

कवि मिजाज के मुस्लिम इंसान सलीम अंसारी (संजय मिश्रा )  की अपनी पत्नी साफिया (सादिया सिद्दिकी )  और छोटे बेटे शाहरुख (धीरज कुमावत) के साथ बड़नगर में रहते हैं.सलीम रंग बिरंगे कपड़े पहनने वाले और बात बात में हींदी फिल्मों का उदाहरण देने वाले मस्तमौला इंसान है.स्थानीय नेता भी हैं.उन्होने रूखसार नामक गाय पाल रखी है,जिसे एक दिन अचानक रात में कोई खूॅंटा सहित चुरा ले जाता है.तब वह अपने दोस्त राम बाबू गुप्ता उर्फ रामू (मुकेश भट्ट) से मदद मांगने जाते हैं.राम बाबू के पिता कवि थे और वह भी कविताएं या गजल गुनगुनाते रहते हैं.अपने दोस्त की हर तरह से मदद करने को तैयार रहते हैं.सलीम की अगले दिन गाय के साथ गांव की पंचायत में पेशी है.उधर सलीम मुस्लिम है और गाय के गायब होने के क्या क्या अर्थ लोग लगा सकते हैं,यह समझा जा सकता है.अब सलीम को अपनी मौत का डर सताने लगता है.मरने से बचने व गाय की तलाष मंे वह अपने दोस्त रामू के साथ पूरी रात भटकते है.तरह तरह के जतन करते हैं.गाय की तलाष में सलीम व रामू हरी सिंह के खुफिया अड्डे पर पहुॅंच जाते हैं,जहां गायों को कहीं रात के अंधेरे में भेजने के लिए ट्क में लादा जा रहा है.पर वह अपने गुंडो से सलीम को धमका कर भगा देते हैं.फिर सलीम स्थानीय मुस्लिम नेता शमशुद्दीन (तिग्मांशु धुलिया )  से भी मदद मांगने जाते हैं.षमुसद्दीन का संबंध पाकिस्तान से है.उन्होंने अपने बंगले पर एक मौलवी को बैठा रखा है,जो कि बच्चों और युवकों का अल्ल्हा के लिए मर मिटकर जन्नत पाने की शिक्षा देता रहता है.षमषुद्दीन को चार लड़के तुरंत पाकिस्तान भेजना है,जिन्हे कराची में प्रशिक्षण देकर आतंकवादी बनाया जाना और फिर वह चारो युवक चार माह बाद भारत में आत्मघाती आतंकवादी हमले का हिस्सा बनेंगें.शमशुद्दीन के पास तीन युवक हैं,पर एक की कमी है,तो उन्हे मौका मिल जाता है.वह सलीम को समझाते है कि कल पेशी में उसकी मौत तय है.कोई कुछ नहीं कर सकता.पर वह उसे नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भेज देंगें,जहां चार माह की ट्रेनिंग के बाद आत्मघाती आतंकवादी के रूप मंे भारत वापस आएगा.उसके बाद उसे जन्नत नसीब होगी.इस तरह उसे चार माह की जिंदगी भी नसीब हो जाएगी.पर सलीम मना कर देता है.वह एक गाय चुराकर उसके शरीर को सफेद रंग से रंग कर सुबह पंचायत के सामने पहुॅच जाता है.मामला रफा दफा हो जाता है, तभी शमशुद्दिन वहां पहुॅचकर कहता है कि सलीम तो आतंकवादी है, यहां छिपा हुआ था. उनके पास इस बात के सबूत के रूप में कुछ फोटो हैं. और फिर खुद ही सलीम को गोली मार देते हैं.

लेखन व निर्देशनः

फिल्म की पटकथा काफी गड़बड़ व कमजोर है.फिल्म काफी धीमी गति से चलती है.कहानी में बेवजह सलीम की मदद करने के नाम पर उसे गुमराह करने वाले शमशुद्द्दीन का प्रकरण जबरन ठॅूंसा हुआ लगता है. क्या फिल्मकार का इस प्रकरण को इस कहानी में जबरन ठॅूंसने के पीछे मूल मकसद आतंकवाद से मुसलमानों के जुड़ाव को रेखांकित करना है? इसके अलावा फिल्म में पुरूष सत्ता की बात की गयी है.फिल्म देखकर यही बात उभरकर आती है कि मुस्लिम समाज में आज भी औरत को पुरूष अपनी जूती से इतर नही समझता है. क्या यह वाकई सच है?इसके अलावा भी फिल्म में हरी सहित कुछ किरदार व उनकी उप कहानियां बेवजह ठूॅंस कर फिल्म को नीरस बना दिया गया है. इतना ही नही सलीम अंसारी की दूसरे दिन पंचायत में गाय के साथ  पेशी क्यों होनी है, इस पर भी फिल्म कुछ नहीं कहती. फिल्म के संवाद भी अति साधारण हैं. सिर्फ लेख कही नही बल्कि निर्देशक के तौर पर भी साई कबीर बुरी तरह से मात खा गए हैं.

जिस समाज में गाय को लेकर मुस्लिमों पर शक किया जाता है, उसी समाज में सलीम जैसा गाय से अत्यधिक प्यार करने वाला कोई सलीम भी हो सकता है? यह बात लोगों को सोचनी पड़ेगी. फिल्म में एक दृश्य है, जिसमें चुराकर लायी गयी गाय चारा नही खा रही है.तो उसके लिए सलीम मियां रात में तीन सौ रूप किलो बिकने वला कलाकंद हजार रूपए में खरीदकर लाते हैं. फिल्मकार ने अपरोक्ष रूप से यह सवाल उठाया है कि  लोग यह क्यो नही सोचते कि एक हिंदू भी गाय की तस्करी का हिस्सा हो सकते हैं.

फिल्मकार इस फिल्म के माध्यम से क्या कहना चाहते हैं,इसे लेकर वह पूरी तरह से भ्रमित नजर आते हैं.अथवा किसी डर की वजह से वह अपनी बात को स्पष्ट रूप से कह नही पाए.पर यदि वह इतने डर रहे थे तो उन्हे फिल्म ‘होली काउ’ बनानी ही नही चाहिए थी. फिल्म में दिखाया गया है कि सलीम को हिंदुओं से डर है,मगर सलीम की हत्या भी मुस्लिम नेता षमष्ुाद्दीन ही करते हैं.तो वहीं सलीम का हिंदू दोस्त उसकी मदद के लिए अपनी पूरी रात खराब कर देता है.सलीम का हिंदू दोस्त राम गुप्ता उसकी जिंदगी बचाने के लिए महामृत्युजंय मंत्र का जाप करने की भी बात करता है.तो क्या फिल्मकार सई कबीर कहना चाहते है कि मुस्लिमों के असली दुश्मन हिंदू नहीं बल्कि मुसलमान ही हैं?वैसे लेखक व निर्देशक सई कबीर ने पूरी फिल्म में कहीं भी सिर्फ हिंदू या सिर्फ मुसलमान को अच्छा नहीं दिखाया है.

फिल्म को यथार्थ लोकेशन पर फिल्माया गया है.

फिल्म में गाने बेवजह और गलत जगहों पर रखे गए हैं.क्लायमेक्स काफी स्तरहीन है.

अभिनयः

सलीम के किरदार में संजय मिश्रा का अभिनय षानदार है.वह अकेले अपने दम पर पूरी फिल्म को ेलेकर चलते हैं.राम गुप्ता के किरदार में मुकेश भट्ट का अभिनय भी जानदार है.सलीम की पत्नी साफिया के छोटे किरदार में सादिया सिद्दकी ने फिर साबित किया है कि वह छोटे से किरदार में भी अपनी अभिनय की छाप छोड़ने में माहिर है.शमशुद्दीन के किरदार में मशहूर निर्देशक तिग्मांषु धुलिया ने बता दिया कि वह उन्हे सिर्फ दूसरे कलाकारों से अच्छा काम निकलवाना ही नहीं आता,बल्कि वह स्वयं अच्छे अभिनेता हैं.पुलिस इंस्पेक्टर के दो तीन मिनट के जबरन ठॅॅंूसे गए किरदार में नवाजुद्दीन है,पर उनका अभिनय कहीं से प्रभावित नही करता.शायद वह इस फिल्म से महज इसलिए जुड़े,क्योंकि फिल्म की निर्माता उनकी पत्नी आलिया सिद्दिकी हैं.

अंत में: जिन्हे कहानी भूलकर सिर्फ कलाकारों की बेहतरीन अदाकारी देखनी है,वह इसे देख सकते हैं.

GHKKPM: पाखी को पता चलेगी सई की सच्चाई, क्या खो देगी विनायक और विराट को?

निल भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा स्टारर सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार  में’ की कहानी में एक नया मोड़ दिखाया जा रहा है. शो के मेकर्स कहानी में नये-नये ट्विस्ट लाते रहते हैं, जिससे लोगों का इंट्रेस्ट बना रहता है. शो में दिखाया जा रहा है कि पाखी चौहान परिवार की मालकिन बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. तो दूसरी ओर सवि और सई अकेले अपनी जिंदगी गुजार रही हैं. शो में जल्द ही सई और विराट आमने-सामने आएंगे. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो में दर्शक लीप के बाद सई, सवि और विराट के मिलने का इंतजार कर रहे हैं. इसी बीच पाखी चौहान हाउस की मालकिन बन चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक शो में जल्द ही जगताप के कारण सई की जिंदगी बदलने वाली है.

 

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सवि भी अक्सर सई से अपने बाबा के बारे में पूछती है लेकिन सई उसकी बातों को टाल देती है. तो वहीं जगताप और सई की बेटी के बीच काफी अच्छी दोस्ती है. शो में आप देखेंगे कि गणेश चतुर्थी पूजा के दौरान जगताप सवि को गोद में लिए दिख रहा है.

 

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शो का एक नया प्रोमो सामने आया है, जिसमें दिखाया जा रहा है कि पाखी सई और सवि की फोटो देखकर चौंक जाती है. सई के जिंदा होने की सच्चाई सबसे पहले पाखी को पता लगेगी. विनायक और विराट को खोने के डर से क्या पाखी इस बात को छिपाएगी?

 

Anupamaa: पाखी को शादी के लिए प्रपोज करेगा अधिक, आएगा ये ट्विस्ट

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल ‘अनुपमा’ में  इन दिनों लगातार ट्विस्ट एंड टर्न दिखाया जा रहा है. जिससे शो में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि बरखा और अंकुश कपाड़िया मेंशन में रहने के लिए साजिश रचते हैं और दोनों अनुपमा को इमोशनली ब्लैकमेल करते हैं, तभी वहां अनुज आता है और वह दोनों के सामने शर्त रख देता है. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते है, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो में आप देखेंगे कि अनुज, बरखा और अंकुश से कहेगा कि अगर उन्हें घर में रहना है तो उन्हें अनुपमा के सामने घुटने टेककर हाथ जोड़कर माफी मांगनी होगी. दोनों अनुज की शर्त मान लेते हैं और अनुपमा के सामने घुटने टेक कर माफी मांगते हैं. अनुपमा को ये सब देखकर उनके लिए बुरा लगता है. तो वहीं अनुज उन्हें वनराज के पास भी माफी मांगने के लिए भेजता है.

 

बरखा और अंकुश शाह हाउस भी माफी मांगने के लिए जाते हैं लेकिन वनराज कहता है कि वह उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. वह आगे ये भी कहता है कि वह उनके साथ-साथ अधिक को भी माफ नहीं करेगा, क्योंकि अधिक भी उनके साथ मिला हुआ था. तो दूसरी तरफ पाखी को वनराज की बातें चुभ जाती हैं.

 

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शो में आप देखेंगे कि अनुज और अनुपमा छोटी अनु के साथ बैडमिंटन खेलते हैं. अनुज रैकेट पकड़ने की कोशिश करता है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाता है. तो दूसरी तरफ अधिक पाखी को शादी के लिए प्रपोज करेगा.

 

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शो में दिखाया जाएगा कि अनुज और अनुपमा घर पर गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और इस पूजा में शाह परिवर भी शामिल होता है। इसी बीच किंजल दर्द से बुरी तरह चिल्लाती है.

अनसेफ सेक्स के कितने दिनों बाद पिल लेना चाहिए?

सवाल

मेरी उम्र 28 साल है. मेरा अपनी गर्लफ्रैंड के साथ लास्ट टाइम अनसेफ सैक्स हुआ, जिस कारण 2 दिनों बाद उस ने पिल 72 ले ली. एक हफ्ते बाद उस का पीरियड शुरू होना था लेकिन वह शुरू नहीं हुआ. क्या आप बता सकती हैं कि पीरियड कब तक शुरू हो जाएगा? वरना मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

अनसेफ सैक्स करना यह बहुत बड़ी गलती है. सिर्फ इसलिए नहीं कि इस से अनवांटेड चाइल्ड होने का खतरा रहता है, बल्कि इसलिए भी कि इस से कई तरह के यौन संक्रमण होने का खतरा बना रहता है.

अगर आप ने अपनी गर्लफ्रैंड के साथ अनसेफ सैक्स किया तो अनवांटेड चाइल्ड की रोकथाम के लिए पिल्स लेनी पड़ती हैं. बाजार में कई तरह की पिल्स हैं. आप बता रहे हैं आप की गर्लफ्रैंड ने 2 दिनों बाद ही यानी 72 घंटे से पहले पिल 72 ले ली थी पर अभी तक उस का पीरियड सही क्रम में शुरू नहीं हुआ है.

देखिए, आईपिल या 72 लेने के बाद पीरियड नौर्मल होने में समय लगता है, बहुत संभावना होती है कि पीरियड का रूटीन प्रभावित हो जाए. इन पिल्स के कुछ साइड इफैक्ट्स भी हैं. इन पिल्स में बहुत मात्रा में हार्मोंस होते हैं जो बौडी में जा कर हमारे सिस्टम को गड़बड़ कर देते हैं. इस से लेट पीरियड या ब्लीडिंग की शिकायत आ सकती है.

पीरियड कब आए, यह इस पर भी निर्भर करता है कि महिला ने अनवांटेड 72 लास्ट पीरियड आने के कितने दिन बाद ली है. चिंता मत करो, अगर सैक्स के 72 घंटों से पहले दवाई ले ली तो चीजें नियंत्रण में हैं. बस पीरियड डिसबैलेंस वाली बात है.

पर जरूरी यह है कि इस तरह की गलतियां दोबारा न दोहराई जाएं क्योंकि इस तरह की इमरजैंसी पिल का बारबार सेवन लड़कियों के लिए खतरनाक हो सकता है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

वे बातें जो एक एमबीए को सीखनी चाहिए

बीस्कूल आप को जरूरी ज्ञान और कौशल दे कर कौर्पोरेट दुनिया का सामना करने के लिए तैयार करते हैं. हालांकि सौफ्ट स्किल्स भी महत्त्वपूर्ण होती हैं और आप को एक कामयाब मैनेजर एवं लीडर बनने में मदद करती हैं. ये मूल्य आप की अवधारणाओं, आप के व्यवहार, क्रियाओं और फैसलों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जो आप के नियोक्ताओं के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण होते हैं.

स्ट्राइविंग फौर एक्सीलैंस (उत्कृष्टता के लिए प्रयास) : आप के काम के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना आप के पेशे का सब से महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और जरूरी है कि इस मूल्य को आप अपने जीवन में जल्द से जल्द सीख लें. इस के लिए आप जो भी करते हैं, उस में गुणवत्तापूर्ण प्रयासों को जारी रखें जब तक यह आप की आदत में शामिल न हो जाए. फिर चाहे आप खेलों की बात करें, पाठ्येत्तर गतिविधियों की, अकादमी की, क्लब में शामिल होने की, सोसाइटी या किसी अन्य सामाजिक कार्य की, आप को अपने सभी कार्यों में गुणवत्तापूर्ण प्रयासों को जारी रखना चाहिए.

हालांकि अगर आप औसत प्रदर्शन कर रहे हैं तो हो सकता है कि आप आरामदायक महसूस करें. लेकिन अगर आप अपनेआप को इस जोन से बाहर निकाल कर नई संभावनाओं की तलाश करें तो आप अपनी प्रतिभा को पहचान सकेंगे और इस का इस्तेमाल सही दिशा में कर सकेंगे.

इंटिग्रिटी (वफादारी) : आप की प्रतिष्ठा को बनाने में सालों लग जाते हैं लेकिन इसे खोने में सिर्फ एक सैकंड लगता है. इसे मैनेजमैंट के एक क्लास में नहीं सिखाया जा सकता. इसे आप को खुद सीखना होता है. सभी परिस्थितियों में वफादारी यानी इंटिग्रिटी को बनाए रखना एक मैनेजर के लिए बहुत जरूरी है. इंटिग्रिटी का तात्पर्य है, पूरी तरह से ईमानदार, सच्चा और भरोसेमंद होना. कोई आप को देख रहा है या नहीं, आप को इन गुणों को हमेशा बनाए रखना चाहिए. ये गुण न केवल आप के कार्यस्थल पर होने चाहिए बल्कि तब भी आप में रहने चाहिए जब आप अपने परिवार, दोस्तों या किसी और के साथ हों.

शेयरिंग (सा   झेदारी) : यह सम   झना बेहद जरूरी है कि एक कंपनी में काम करने वाले सभी लोग एकदूसरे से स्वतंत्र नहीं होते, वे एकदूसरे से जुड़े होते हैं, ऐसे में शेयरिंग अपरिहार्य हो जाती है. आप से उम्मीद की जाती है कि आप अपने संसाधनों, विचारों और ज्ञान को अपने सहकर्मियों एवं सहयोगियों के साथ बांटेंगे. इसी को हम ‘टीमवर्क’ कहते हैं. इसलिए बहुत जरूरी है कि विद्यार्थी टीम में काम करना सीखे ताकि वह आसानी से सब के साथ मिल कर काम कर सके और अपने कौशल व ज्ञान को टीम के सभी सदस्यों के साथ बांट सके.

इनोवेशन : आउट औफ बौक्स एक ऐसा मुहावरा है जिस का अकसर सही अर्थ नहीं सम   झा जाता. इस का तात्पर्य किसी बड़ी खोज या बड़ी सफलता से नहीं है. इनोवेशन हमारी दैनिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हो सकते हैं. जब हम हमारी नियमित प्रक्रियाओं को चुनौती के रूप में देखते हैं, तभी हम उन चीजों को नए तरीके से करने की कोशिश करते हैं और अपने अंदर नए मूल्यों को विकसित कर पाते हैं.

ओनरशिप यानी जिम्मेदारी : मैनेजर से उम्मीद की जाती है कि वे जो काम कर रहे हैं उस की पूरी जिम्मेदारी लें. शुरू से ले कर अंत में उस काम को जिम्मेदारी से पूरा करें, क्योंकि इस के लिए आप पर भरोसा किया जाता है. इस के परिणामों के लिए आप ही जवाबदेह होते हैं. जब भी आप को कोई परियोजना या अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है तो आप से कुछ उम्मीद भी होती है. मैनेजर के रूप में किसी भी कमी का दोष आप किसी और को नहीं दे सकते.

जौब या नौकरी : आप का सकारात्मक दृष्टिकोण आप के व्यक्तित्व में    झलकता है. एक खुशमिजाज व्यक्ति अपने काम में खुशी ढूंढ़ता है, वह अपने आसपास के माहौल को भी खुशनुमा बना देता है. कार्यस्थल पर खुशी का माहौल तब बनता है जब आप अपने काम से प्यार करते हैं और 100 फीसदी आउटपुट देते हैं. आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमेशा अपनेआप को प्रोत्साहित करते रहते हैं. अपनी नौकरी को सिर्फ एक काम न मानें, बल्कि यह आप के लिए जनून होना चाहिए. तभी आप इस से प्यार कर सकेंगे और इस में मौजूद अनगिनत संभावनाओं को खोज सकेंगे.

पैशन फौर लर्निंग यानी सीखने का जनून : कुछ नया सीखने की जिज्ञासा व्यक्ति में अंत तक रहनी चाहिए. जो लोग हमेशा कुछ नया सीखने और अपनेआप में सुधार लाने की कोशिश करते हैं, उन का ग्राफ हमेशा ऊपर की ओर ही जाता है. यह जनून आप में तभी पैदा होता है जब आप अपने काम में रुचि बनाए रखते हैं. साथ ही, आप अपने आसपास की दुनिया के लिए अपने आंख और कान खुले रखते हैं. अगर आप में यह जनून है तो आप की कौशल और विशेषज्ञता में हमेशा सुधार होता है.

सहानुभूति : सहानुभूति प्रबंधन कौशल के लिए जरूरी है. एक प्रबंधक के लिए बेहद जरूरी है कि वह दूसरों के दृष्टिकोण को सम   झे. दूसरे लोगों के काम को सम   झना, उसे स्वीकार करना और उस की सराहना करना आप को आना चाहिए. लीडरशिप के बहुत से सिद्धांतों के अनुसार एंपैथी लीडरशिप का अभिन्न अंग है.

करेज यानी बहादुरी : हो सकता है कि बहादुरी को आप वीरता या बलिदान सम   झें. एक सफल प्रबंधक के लिए बहादुरी जरूरी है. यह बहादुरी मैनेजर को सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करती है. उसे अपने आइडिया को इंपलीमैंट करने में मदद करती है. कार्यस्थल पर इस बहादुरी का तात्पर्य है कि आप कुछ अलग सोचने की कोशिश करें, इनोवेट करें, कोई नया विचार रखें. इसी की मदद से एक कंपनी और इस के लोग विकसित हो सकते हैं. यह कम्युनिकेशन को बढ़ावा देती है. एक संगठन में पारदर्शिता व निष्पक्षता लाती है, इसलिए कंपनी के सभी लोगों के लिए बहादुर होना जरूरी है.

रिस्पौन्सिवनैस यानी जवाबदेही : एक मैनेजर से उम्मीद की जाती है कि वह अपने आसपास की स्थिति और अपने उपभोक्ताओं के लिए जवाबदेह हो. इस के लिए उसे तुरंत फैसला लेने में सक्षम होना चाहिए. उस में अवसरों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए. उस में समस्याओं के प्रभावी समाधान खोजने की क्षमता होनी चाहिए और उन क्षेत्रों की पहचान की क्षमता होनी चाहिए जिन में सुधार की संभावना हो.

रैशनलिस्ट होना : एक एमबीए को भावनाओं और धार्मिक प्रचार से उठ कर सोचना चाहिए क्योंकि उस के लिए देश का हर नागरिक बराबर का है और हरेक की परचेजिंग ग्रोथ है, कम या ज्यादा. उसे व्हाट्सऐप का ज्ञान तो बिलकुल दिमाग में घुसने नहीं देना चाहिए. चुनौतियों के लिए सही लोगों का चयन करें, अपने धर्म या जाति का नहीं. अपनी टीम में कभी धर्म या जाति को ले कर विवाद खड़ा न होने दें और हमेशा एकदो रैशनिलस्ट विचारकों की किताबें बैड के सिराहने रखनी चाहिए.

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