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Manohar Kahaniya: तांत्रिक की सेक्स पूजा

सौजन्य: मनोहर कहानियां

मृत्युदोष और भूत का भय दिखा कर ठगी करने वाला तथाकथित तांत्रिक अय्याश भी था. रेप करना उस की तंत्र पूजा में शामिल था. यहां तक कि इस कुकर्म में उस का बेटा अभिषेक सिरसवाल प्रचारक था.  बदहवास युवती अजमेर के थाना आदर्श नगर थानाप्रभारी सुगन सिंह के सामने जमीन पर घबराई हुई आ

कर बैठ गई. उस ने उन के पांव पकड़ लिए और गिड़गिड़ाने लगी, ‘‘साहबजी, मुझे बचा लीजिए, वह आज फिर मेरी इज्जत लूटेगा.’’

‘‘कौन इज्जत लूटेगा? मेरा पैर छोड़ो पहले. ऊपर कुरसी पर सामने बैठ कर बताओ कि क्या कहना चाहती हो?’’ सुगन सिंह बोले और एक महिला सिपाही को पानी का गिलास लाने के लिए कहा.

‘‘महिला सिपाही एक गिलास पानी ले आई. तब तक करीब 22-23 साल की दिखने वाली युवती थानाप्रभारी के सामने की कुरसी पर बैठ गई. झट से पानी का गिलास ले कर पानी तेजी से पी गई.

‘‘अब शांति से बताओ कि तुम्हारा नाम क्या है? कहां से आई हो? क्या बात है? तुम क्यों घबराई हुई हो?’’ थानाप्रभारी सुगन सिंह ने एक साथ कई सवाल

कर दिए.

‘‘मेरा नाम ललिता है साहब. मुझे बचा लो साहब, मैं अब घर नहीं जाऊंगी. क्योंकि वह फिर मेरे साथ रेप करेगा. बहुत तकलीफ होती है साहब. बुरीबुरी हरकत करता है वो,’’ युवती एक सांस में बोली.

‘‘कौन है वह? पूरी बात साफसाफ बताओ. पहले इस पन्ने पर अपना नाम और पूरा पता लिखो,’’ थानाप्रभारी ने उस की ओर सादा पन्ना लगा राइटिंग पैड और कलम बढ़ा दिया. युवती पन्ने पर अपना नामपता लिखने के बाद बताने लगी—

‘‘साहब, मैं यहीं आदर्श नगर क्षेत्र में ही रहती हूं. मैं 22 फरवरी को अपने मातापिता के साथ एक रिश्तेदार की शादी में दिल्ली गई थी. वहीं एक तथाकथित तांत्रिक राजेंद्र कुमार ने मेरे मातापिता को बताया कि उन का पूरा परिवार मृत्युदोष से ग्रसित है.

‘‘उस ने कहा कि परिवार में पहले छोटी बेटी, फिर पिता उस के बाद बड़ी बेटी की मृत्यु होने वाली है. हवन और पूजापाठ से इस बला से मुक्ति मिल सकती है.

उस ने खुद को पहुंचा हुआ तांत्रिक

बताया था.

‘‘मेरे पिता उस की बातों में आ गए और उसे अपने घर आने को कह दिया. उस के बाद  27 फरवरी, 2022 को वह तांत्रिक हमारे घर आ गया और पूजापाठ की तैयारी करने के साथ ही कहा कि विशेष पूजा सिर्फ घर की बड़ी बेटी के साथ होगी.

‘‘परिवार वाले तांत्रिक के हर आदेश को मानते हुए बड़ी बेटी के नाते मुझे घर में छत पर बने एक कमरे में तांत्रिक के साथ बंद कर दिया. तांत्रिक पूजा करने के लिए मंत्रजाप करने लगा. उस ने मुझे मंत्रपूरित पानी पीने के लिए दिया.

‘‘पानी पीते ही मेरी आंखें मुंदने लगीं. अर्द्धबेहोशी की हालत में उस ने मेरे कपड़े उतार दिए और मेरे साथ जबरदस्ती की. मैं ने उस का विरोध किया तब उस ने मेरी पिटाई कर दी. मुझे यह कह कर डरा दिया कि उस की आज्ञा का पालन नहीं किया तो मांबाप की मौत हो जाएगी.

‘‘मैं डर गई. उस ने मेरे साथ रेप किया और पिता से एक लाख रुपए भी लिए. एक सप्ताह बाद वह फिर आया और मेरे साथ एक मंदिर में पूजा करने के बहाने से वह मुझे मुरैना ले गया. वहां मुझे एक धर्मशाला में ठहराया और मेरे साथ जोरजबरदस्ती की.

‘‘उस के बाद होली से पहले घर आया और पूजापाठ के बहाने से रेप किया. फिर वही बाबा आज घर आ गया है और पूजा करने की योजना बना रहा है. वह फिर मेरी इज्जत लूटेगा. मेरे साथ जोरजबरदस्ती करेगा… मुझे बचा लीजिए साहब.’’

यह बात 19 मार्च, 2022 की है. ललिता की शिकायत पर थानाप्रभारी सुगन सिंह ने ललिता को विश्वास दिलाया कि अब तुम्हारे साथ कुछ नहीं होगा और उस तांत्रिक के खिलाफ कानूनी काररवाई की जाएगी.

मामला काफी गंभीर था, इसलिए थानाप्रभारी ने उसी वक्त यह जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी. तब अजमेर के एसपी ने एक एसआईटी का गठन किया. इस टीम में एएसपी (सिटी) विकास सांगवान, सीओ (दक्षिण) राजेंद्र बुरडक, थानाप्रभारी सुगन सिंह, एएसआई विजय कुमार, हैडकांस्टेबल संतोष कुमार, कांस्टेबल रमेश, करतार सिंह, पीयूष आदि को शामिल किया.

ललिता को साथ ले कर पुलिस टीम आदर्श नगर स्थित उस के घर पहुंच गई. उस समय घर पर वह तांत्रिक ललिता के घर वालों के साथ बातें करने में मशगूल था. ललिता के साथ पुलिस को देख कर उस के घर वाले ही नहीं, बल्कि तांत्रिक राजेंद्र भी चौंक गया.

ललिता के इशारे पर पुलिस ने तांत्रिक राजेंद्र को हिरासत में ले लिया. लेकिन उस का सहयोगी पवन वहां से भाग गया.

पुलिस ने तांत्रिक को गिरफ्तार करने की वजह ललिता के मातापिता को बताई तो उन के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई. उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिस तांत्रिक के कहने पर वह सब कुछ कर रहे थे, वह उन के घर की इज्जत से खिलवाड़ कर रहा है. घर वालों से पूछताछ करने के बाद पुलिस तांत्रिक राजेंद्र को थाने ले आई.

पूछताछ में पता चला कि उस तथाकथित तांत्रिक का नाम राजेंद्र कुमार वाल्मिकी है और वह दिल्ली के गुलाबी बाग क्षेत्र स्थित प्रताप नगर में रहता है. राजस्थान के रहने वाले ललिता के पिता की तांत्रिक के संपर्क में आने की एक अलग घटना है.

दरअसल, ललिता के पिता कोरोना काल के दौरान वायरस संक्रमण का शिकार हो गए थे. स्वस्थ होने के बाद वह अपने कामधंधे में जुट गए थे, लेकिन जब भी कुछ अनहोनी होती तो वह डर जाते थे.

इसी बीच फरवरी, 2022 में उन का दिल्ली जाना हुआ. वहां उन के एक रिश्तेदार के यहां शादी थी. उसी दौरान उन्होंने अपने रिश्तेदार से अपनी समस्या बताई. रिश्तेदार ने इस का उपाय करने के लिए एक तांत्रिक से मिलवाया.

वह तांत्रिक कोई और नहीं राजेंद्र कुमार वाल्मिकी था. तांत्रिक ने देखते ही बताया कि उस पर भूत का साया है और वह मृत्युदोष का शिकार है. उस ने छूटते ही कहा कि उस पर एक बार मृत्यु आ कर वापस लौट चुकी है, लेकिन अबकी बार आएगी तब बारीबारी से परिवार के 3 सदस्यों को अपने साथ ले जाएगी.

ललिता के पिता यह सुन कर डर गए. उन का 4 लोगों का परिवार था. पतिपत्नी और 2 बेटियां. वह चिंतित हो गए कि पता नहीं परिवार के किस सदस्य को मौत गले लगा ले. उन्होंने बाबा से तुरंत उपाय पूछा.

बाबा ने कहा कि घर में 5 दिनों का अनुष्ठान करना होगा और अनुष्ठान में घर की कुंवारी कन्या को शामिल करना जरूरी होगा. इस के साथ ही उस ने कुछ शर्तें भी रखीं, जो उस ने कान में कही थीं. इस में मोटी रकम खर्च की भी बात थी.

ललिता के पिता ने बाबा की सभी शर्तों को मान कर तांत्रिक राजेंद्र को फरवरी, 2022 महीने में अपने घर बुला लिया और तांत्रिक पूजा के लिए घर की छत का एक कमरा दे दिया. पूजा में शामिल होने के लिए उन्होंने बड़ी बेटी को सौंप दिया.

उस के बाद बाबा ने तंत्र पूजा के बहाने से वासना का खेल खेला. रेपलीला की. परिवार के बाकी सदस्यों ने बाबा की खूब आवभगत की थी.

शिक्षित ललिता समझ गई कि उस के पिता ढोंगी तांत्रिक के जाल में फंस चुके हैं. उस ने हिम्मत दिखाई और थाने जा कर उस तांत्रिक के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी.

पुलिस ने ढोंगी तांत्रिक के मोबाइल फोन की जांच की तो उस से कई राज खुले. जांच में सामने आया कि राजेंद्र कुमार वाल्मिकी खुद को भगवान बताता था. कहता था, वह भूत को बोतल में बंद कर रखता है. फिर मृत्यु दोष और भूत के साए के नाम पर लोगों को डराधमका कर उन की बहूबेटियों से रेप करता था.

तांत्रिक धंधे में जुड़ने से पहले राजेंद्र कुमार दिल्ली में आटोरिक्शा चलाता था. वह सट्टा व जुआ भी लगाता था. नौकरी का झांसा दे कर धोखाधड़ी करता था. इतना ही नहीं, वह खुद 5वीं फेल है, लेकिन बीमारियों का शर्तिया इलाज करने का झांसा दे कर लोगों से रुपए ऐंठता था. वह जिस परिवार को निशाना बनाता, उस के बारे में दूर के रिश्तेदारों से पहले ही सारी जानकारियां जुटा लेता था.

परिवार की समस्या को दूर करने के लिए तांत्रिक राजेंद्र उस के घर में आसन जमा लेता. रात के समय लोगों को उन से जुड़ी पुरानी बुरी घटनाओं को बता कर स्वयं को भगवान का अवतार बताता.

परिजनों से कहता कि आप के घर में भयानक भूत ने अड्डा जमा रखा है. भविष्य में सब से पहले आप की सब से छोटी संतान को मारेगा और उस के बाद सब की बारी आएगी.

मंत्रों से भूत को बोतल में बंद करने के लिए परिवार की सब से बड़ी बेटी को कमरे में अकेले साथ भेजने के लिए कहता. एकांत में तांत्रिक क्रिया करने का नाटक करता. डरेसहमे परिजन ढोंगी की बातों में आ कर बहूबेटियों को उस के कमरे में भेज देते थे.

वह परिजनों को दरवाजे के बाहर बैठा देता और जोरजोर से कुल देवता का मंत्र जाप करने के लिए कहता. इस दौरान तांत्रिक क्रिया के बहाने वह महिलाओं से रेप करता था.

बोतल में काले डोरे, रंग आदि लगा कर लाता और परिजनों से कहता कि तंत्रमंत्र कर भूत को बोतल में बंद कर दिया है. अब इस बोतल को दूर जंगल में फेंक आओ.

एक पीडि़त परिवार से किसी दूसरे पीडि़त परिवार के बारे में जानकारी जुटाता और फिर इस प्रकार एक चेन सिस्टम बना कर लोगों को फंसाता था.

तांत्रिक के मोबाइल फोन में औनलाइन सट्टे पर दांव लगाने के सबूत भी पुलिस को मिले. पुलिस की शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि दिल्ली निवासी विजय सोनकर ने ढोंगी बाबा को अपने तीनों बेटों की सरकारी नौकरी लगवाने के लिए 10 लाख रुपए दिए थे.

मामले में पीडि़त विजय द्वारा दिल्ली के सराय रोहिल्ला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था. साथ ही ढोंगी बाबा से कई लोगों का इलाज करने के बहाने रुपए ऐंठने की वाट्सऐप चैटिंग और पेमेंट के स्क्रीनशौट मिले.

अजमेर पुलिस ने इस ढोंगी तांत्रिक राजेंद्र को गिरफ्तार कर उस के काले कारनामों से परदा उठा दिया. बताते हैं कि यह 300 से 400 परिवारों को अपना शिकार बना चुका है.

इतना ही नहीं, जब आरोपी बाबा को गिरफ्तार किया गया, तब उस ने पुलिस पर अपने तंत्रमंत्र का भय दिखाया, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे ज्यादा देर नहीं टिक पाया.

पुलिस गिरफ्त में आने के बाद तांत्रिक राजेंद्र का कानून के चंगुल से बचना मुश्किल हो गया. उस पर अंधविश्वास, ठगी से ले कर रेप तक की धाराएं लगा कर पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इस मामले में ढोंगी बाबा राजेंद्र वाल्मिकी (49) के बेटे अभिषेक सिरसवाल उर्फ बुक्की (25 साल) को भी पुलिस ने दिल्ली की सराय रोहिल्ला मलकागंज रेलवे कालोनी से गिरफ्तार कर लिया.

वह अपने पिता की तंत्र विद्या का प्रचार करता था. लोगों को उन के चमत्कारी उपाय के बारे में बताता था. भूतप्रेत भगाने के नाम पर वसूली जाने वाली रकम को वह ही लेता था.

फरार हो चुके तांत्रिक के सहयोगी पवन कुमार को पुलिस संभावित स्थानों पर तलाश रही थी, लेकिन वह कथा संकलन तक गिरफ्तार नहीं हो सका था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में ललिता परिवर्तित नाम है.

तीज 2022: ट्राई करें ये आसान मेहंदी डिजाइन

सदियों से ही सजने-संवरने के लिए लड़कियां व महिलाएं  मेहंदी  का इस्तेमाल करती आ रही हैं. मगर आजकल वक्त और फैशन की लहर के संग मेहंदी  में भी तरह-तरह के एक्सपैरीमैंट्स हो रहे हैं और वो सभी को भा भी रहे हैं. कैसा है रूप मेहंदी  के इन नए बदलावों का. आइए जानते हैं फाउंडर औफ A.L.P.S ब्यूटी ग्रुप की डा. भारती तनेजा से…  और आप इस तीज पर इन मेहंदी डिजाइन्स को  जरूर ट्राई करें.

हरी मेहंदी – पारंपरिक हरी मेहंदी  के डिजाइनों का आकर्षण तो सदाबहार है. हरी मेहंदी  सिर्फ श्रृंगार ही नहीं बल्कि जीवन में प्यार व खुशियों का उपहार मानी जाती है. शुभता का प्रतीक होने के साथ-साथ ये ठंडक का एहसास भी देती है. हरी मेहंदी  का रंग गहरा चढ़े, इसके लिए पेस्ट बनाते समय मेहंदी  में कुछ बूंदें नींबू का रस, आठ-दस बूंदें मेहंदी का तेल और चुटकी भर कत्था भी मिला सकती हैं. फिर देखिए मेहंदी  कैसे खिलकर खिलकर आती है.

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मारवाड़ी मेहंदी – मारवाड़ी मेहंदी  भी हरी मेहंदी  का ही एक स्टाइल है. राजस्थानी व मारवाड़ी मेहंदी  भी फैशन में है. इस स्टाइल की मेहंदी  में बाजूओं पर भी कड़े के स्टाइल में डिजाइन बनाया जाता है. इसके अंतगर्त बेहद पतले कोन का इस्तेमाल किया जाता है और हाथों पर मेहंदी  के डिजाइन को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा जाता है. इसके विभिन्न प्रकार के डिजाइंस में शहनाई, ढोलक, बैंडबाजे, मोर जैसी कलाकृतियां शामिल होती हैं. इस मेहंदी  की खासियत यह है कि ये दोनों हाथों में एक जैसी होती है जिस कारण इसे लगाना भी आसान नहीं होता.

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अरेबियन मेहंदी – अरेबियन मेहंदी  में ब्लैक केमिकल से ऑउटलाइन की जाती है और फिर पारंपरिक हरी मेहंदी  से शेडिंग कर दी जाती है या फिर उसे पूरा भर दिया जाता है. इससे डिजाइन तो उभर कर आता ही है साथ ही मेहंदी  भी खूब अच्छी तरह से रचती है. काले और सुर्ख लाल रंग लिए इस मेंहदी पर आप अपने कपड़ों के रंग व डिजाइन से मैच करते रंग-बिरंगे स्टोन्स और कुंदन भी लगवा सकती हैं.

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कलरफुल फैंटेसी मेहंदी – अब डिजाइनर मेहंदी  का ट्रैंड जोर पकड़ रहा है. ड्रेस और ज्वेलरी के रंग व डिजाइन के तालमेल वाले डिजाइन बनाने के साथ महिलाएं कलरफुल मेहंदी पसंद कर रही हैं. फैंटेसी मेकअप की तरह ही फैंटेसी मेहंदी   हाथों पर लगाई जा रही है, जो विभिन्न रंगों की शेड लिए होती है, जिन्हें बाद में कुंदन,  रंग-बिरंगे नगों से सजाया जाता है. आज के इस फैशन युग में ज्वैलरी, फुटवियर, एक्सेसरीज़ जब सब कुछ ड्रेस से मैच करके खरीदे जाते हैं तो ऐसे में मेहंदी  कैसे पीछे रह सकती है. कलरफुल फैंटेसी मेहंदी  के ज़रिए आप अपने हाथों पर ड्रेस से मैच करते रंगों से मेंहदी का डिजाइन बनवा सकती हैं. यह मेंहदी देखने में काफी खूबसूरत लगती है साथ ही पारंपरिक मेहंदी  से ज्यादा स्टाइलिश होती है.

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ज्वैल मेहंदी – ज्वैल मेहंदी  शब्द ज्वेलरी और मेहंदी  दो शब्दों को मिलाकर बना है जिसका अर्थ है मेहंदी  की ज्वेलरी. यह काफी कलात्मक और सृजनात्मक होता है. इसमें एक मेकअप आर्टिस्ट को अपनी कल्पनाशीलता में उतरकर मेहंदी  से इस प्रकार का लुक देना होता है जिसे देखकर ऐसा लगे कि आपने ज्वेलरी पहन रखी है. आप अगर बार-बार एक ही डिजाइन की ज्वैलरी पहन कर बोर हो गई हैं और कुछ ऐसा चाहती हैं कि आप भीड में सबसे अलग दिखें तो ज्वैल मेहंदी  को चुन सकती हैं. इसे बनाने के लिए मेहंदी  और विभिन्न रंगों के साथ-साथ सोने व चांदी के स्पार्कल डस्ट का भी प्रयोग किया जाता है. इसे बनवाते समय ध्यान देना चाहिए कि यह आपके ड्रेस व ज्वेलरी से मैचिंग हो.

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जरदोजी मेहंदी – किसी विशेष पार्टी, फेस्टिवल या शादी के मौके पर लड़कियां या महिलाएँ इस मेहंदी  को अपने हाथ, पैर, पीठ, बाजू और यहां तक कि नाभि पर भी बनवा सकती हैं. ये मेहंदी  सिल्वर या गोल्डन शेड लिए होती है. मेहंदी  रचे हाथों में सिल्वर या गोल्डन ग्लिटर से डिजाइन बनाया जाता है. इससे मेहंदी की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है साथ ही उसमें चमक भी आ जाती है. इस मेहंदी   पर स्टड, कुंदन, जर्कन, सितारे व मोती लगाकर उसे हैवी लुक दिया जाता है.

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टैटू मेंहदी- इन दिनों लड़कियों में मेहंदी टैटू का चलन ज्यादा हो गया है. इसके अंदर बाजुओं, पेट, पीठ व बॉडी के अन्य खुले भागों पर रंग-बिरंगी तितली, एंजिल या ड्रैगन आदि टैटू बनाए  जाते हैं. ये टैटू आपको खूबसूरत लुक तो देते हैं साथ ही आपको स्टाइलिश और फैशेनिस्ता की कैटेगरी में भी ला देते हैं.

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ऐसे बनाएं मेहंदी का पेस्ट

मेहंदी पाऊडर को मलमल के बारीक कपड़े से दो-तीन बार छानें. मेहंदी में कुछ बूंदें नींबू का रस, आठ-दस बूंदें नीलगिरी का तेल और जरूरत के हिसाब से पानी मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना लें. मेहंदी गहरी रचाने के लिए कुछ बूंदें मेहंदी का तेल व चुटकी भर कत्था भी मिला सकती हैं. परफैक्ट टैक्सचर पाने के लिए कटी हुई भिंडी का पानी लें. उस पानी में मेहंदी को तकरीबन दो घंटे के लिए भिगो दें. इसे लगाएं. फिर देखिए मेहंदी कैसे खिलकर आती है. तो फिर है न इस राखी मेहंदी से अपने हाथों को खूबसूरत रंग  देने के लिए तैयार.

रणबीर ने मांगी फैंस से माफी, Pregnant आलिया की बॉडी शेमिंग पर हुए थे ट्रोल

आलिया भट्ट इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को खूब इंजॉय कर रही है. वह अक्सर अपनी बेबीबंप की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. इसी बीच रणबीर कपूर आलिया भट्ट की प्रेग्नेंसी को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के शिकार हुए. आइए बताते हैं, क्या है पूरा मामला…

दरअसल एक लाइव सेशन के दौरान रणबीर ने अपनी पत्नी आलिया के बेबी बंप की तरफ इशारा करते हुए उन्हें ‘फैलोड’ कह दिया था. लेकिन फैंस को रणबीर का यह बयान बिल्कुल भी पसंद नहीं आया. सोशल मीडिया पर यूजर्स ने एक्टर को आलिया की बॉडी शेमिंग करने के लिए खूब लताड़ लगाई.

 

हाल ही में रणबीर ने अपने बयान को लेकर फैंस से माफी मांगी है. एक रिपोर्ट के अनुसार, एक्टर अपनी अपमिंग फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ के प्रमोशन के दौरान फैंस से माफी मांगते हुए कहा है, सबसे पहले मैं ये कहना चाहता हूं कि मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूं.  इसके बाद रणबीर ने आलिया को ‘फैलोड’ कहने पर कहा,  मुझे लगता है कि वह जोक था, जो लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया.

 

एक्टर ने आगे कहा कि अगर मेरे बयान से किसी को भी ठेस पहुंची है, उसके लिए मैं माफी मांगता हूं. मेरा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था, इसलिए मैं उन लोगों से माफी मांगना चाहता हूं, जो मेरे उस बयान से नाराज हो गए थे.

 

रणबीर ने ये भी बताया कि उन्होंने इस बारे में आलिया से बात की थी और वह इस मुद्दे को लेकर हंसने लगी थीं. उन्होंने कहाकि  आलिया को वह बात बिल्कुल भी बुरी नहीं लगी. लेकिन मेरा सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत खराब है और कभी-कभी मुझे ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ जाता है. बता दें कि जल्द ही आलिया-रणबीर पेरेंट्स बनने वाले हैं.

सोनाली फोगट की मौत को लेकर भाई ने किया दावा, कहा- ‘मेरी बहन की हत्या की गई’

सोनाली फोगट की मौत को लेकर भाई रिंकु ने किया दावा, कहा- ‘मेरी बहन की हत्या की गई’’बिग बॉस 14′ फेम सोनाली फोगट (Sonali Phogat) की मौत 23 अगस्त को हार्ट अटैक आने की वजह से हो गई. इस खबर से पूरी इंडस्ट्री में में शोक की लहर छा गई. इसी बीच खबर आ रही है कि सोनाली फोगाट के के भाई रिंकू ढाका ने दावा किया है कि उनकी बहन का मर्डर किया गया है. आइए बताते है, क्या है पूरा मामला…

रिपोर्ट के अनुसार, सोनाली फोगाट के भाई ने गोवा पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है जिसमें दावा किया गया है कि उनकी बहन की हत्या उनके दो सहयोगियों ने की है. रिंकू ढाका ने आरोप लगाया कि मौत से कुछ समय पहले सोनाली फोगाट ने अपनी मां, बहन और एक अन्य रिश्तेदार से बात की थी और इस दौरान वह परेशान थी और उन्होंने अपने दो सहयोगियों के खिलाफ शिकायत की थी. उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में उनके फार्महाउस से सीसीटीवी कैमरे, लैपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण चीजें उनकी मौत के बाद गायब हो गई हैं.

 

सोनाली फोगट को हरियाणा के हिसार से मंगलवार सुबह नार्थ गोवा के अंजुना के सेंट एंथोनी अस्पताल में मृत लाया गया. बताया गया कि उनकी मौत हार्ट अटैक आने की वजह से हुई. सोनाली फोगट की फैमिली मंगलवार रात गोवा पहुंची. जहां भाई रिंकू ढाका ने गोवा में अंजुना पुलिस से दावा किया कि सोनाली की हत्या की गई है.

 

बाताया जा रहा है कि ढाका ने कहा है कि  ‘हमने उनसे दूर रहने और अगले दिन हिसार लौटने के लिए कहा था. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने दो व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा, अगर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो हम गोवा में पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे.

 

आजादी का महामहोत्सव: 75 सालों में रसातल में रिसर्च

किसी भी देश की प्रगति में वहां की टैक्नोलौजी का बड़ा महत्त्व होता है. टैक्नोलौजी के लिए रिसर्च की जरूरत होती है. भारत मे साइंस और टैक्नोलौजी की फील्ड में सब से कम रिसर्च हो रही है. नतीजतन हमारे देश में जरूरत की हर चीज विदेशों से आई. जरूरत है कि रिसर्च को बढ़ावा दिया जाए और इस को जनता के लिए उपयोगी बनाया जाए.

जब भी आविष्कार की बात होती है, भारत के लोग बेहद फख्र के साथ आर्यभट्ट का नाम ले कर कहते हैं कि जीरोष का आविष्कार हमारे देश की खोज थी. हवा में उड़ने वाले पुष्पक विमान को रामायणकाल का बताया जाता है. अगर आधुनिक युग की टैक्नोलौजी को देखें तो एक भी बड़ा आविष्कार भारत में नहीं हुआ, चाहे वह हवाई जहाज हो, सड़क पर चलने वाली गाडि़यां हों या बातचीत करने के साधन हों. सब के सब विदेशों से आए और यहां की तरक्की का आधार बने.

रिसर्च की दुनिया का सब से बड़ा पैमाना नोबेल पुरस्कार को माना जाता है. भारत को रिसर्च के क्षेत्र में केवल 3 पुरस्कार ही मिले हैं. वर्ष 1930 में सी वेकेंटरमन को भौतिक विज्ञान, 1983 में एस चंद्रशेखर को भी भौतिक विज्ञान और 2009 में वी रामकृष्णनन को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिले.

अगर सामान्य रूप से रिसर्च को सम?ाने की कोशिश करें तो एक दूसरा उदाहरण पेश है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मलिहाबाद का दशहरी आम पूरी दुनिया में मशहूर है. मलिहाबाद को इस की वजह से ही ‘फल क्षेत्र’ घोषित किया गया. यहां कृषि अनुसंधान केंद्र भी खोला गया जिस का उद्देश्य था कि वह बागबानों और ग्राहकों की पसंद के दशहरी आम की कोई नई किस्म तैयार करे जिस की आयु 10 दिन से अधिक हो. दशहरी आम की शैल्फ लाइफ 10 दिन होने के कारण इस को दशहरी कहा जाता है.

जलवायु परिर्वतन को देखते हुए इस की शैल्फ लाइफ बढ़ाने की बात उठी. कृषि अनुसंधान केंद्र ने दशहरी आम की कोई ऐसी किस्म नहीं तैयार की जो 10 दिनों से अधिक चल सके. इस के कारण दशहरी आम की डिमांड होने के बाद भी इसे विदेशों में नहीं भेजा जा सकता. जो आम विदेशों में भेजे भी जाते हैं वे आसपास के देशों तक जाते हैं और कम तादाद में भी भेजे जाते है. हवाईजहाज से भेजे जाने के कारण महंगा खर्च आता है. अगर दशहरी आम की शैल्फ लाइफ बढ़ जाए तो इस परेशानी से बचा जा सकता है. बागबान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. यह एक छोटा उदाहरण है. ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं जहां रिसर्च न होने के कारण 75 सालों में भी देश विकसित देशों की बराबरी में खड़ा नहीं हो सका है.

रिसर्च के क्षेत्र में भारत की हालत

भारत साइंटिफिक रिसर्च पेपर पब्लिश करने के मामले में अग्रणी देशों की सूची में है. आंकड़े बताते हैं कि 2018 में चीन पहले और अमेरिका दूसरे नंबर पर रहे और भारत तीसरे नंबर पर. एक साल में छपने वाले साइंटिफिक पेपर्स की संख्या की बात करें तो भारत इस मामले में काफी पीछे है. अमेरिका में 2018 में 4,22,808 जबकि चीन में सब से ज्यादा 5,28,263 और भारत में 1,35,338 वैज्ञानिक पेपर्स प्रकाशित किए गए.

आंकड़े बताते हैं कि जिन देशों में साइंटिफिक पेपर्स काफी कम छपते हैं, वहां नोबेल विजेता ज्यादा हैं. इस सूची में भी अमेरिका नंबर एक पर है. वहां 375 नोबेल विजेता हैं. ब्रिटेन में 131, जरमनी में 108, रूस में 31 नोबेल पुरस्कार विजेता हैं. चीन में 8 नोबेल पुरस्कार विजेता हैं जिन में से 5 को वैज्ञानिक क्षेत्र में सम्मानित किया गया था.

भारत की हालत यहां बेहद नाजुक है. भारत में अब तक केवल 11 नोबेल विजेता हुए हैं. इन में से 2 बार पुरस्कार विदेशियों को दिया गया था जबकि बचे 9 में 4 पुरस्कार भारत ने वैज्ञानिकी क्षेत्र में जीते हैं. पश्चिमी देश वैज्ञानिकी क्षेत्र, नवीनीकरण और प्रगति में काफी आगे हैं. इस का नतीजा है कि अमेरिका और यूरोप में दुनिया के सब से अधिक वैज्ञानिक और तकनीकी विश्वविद्यालय हैं. भारत में भले ही बड़ी संख्या में साइंटिफिक जनरल छपते हों लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च यहां उतनी नहीं होती.

यूनेस्को की 2015 की विज्ञान रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 से भारत की अनुसंधान तीव्रता में गिरावट आ रही है. इस की वजह वैज्ञानिक शोधों को मिल रहे कम फंड को माना जाता है. भारत में वैज्ञानिक शोधों के लिए कम फंडिंग काफी पुरानी समस्या है.

वर्ष 2021-22 के बजट में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को 14,793.66 करोड़ रुपए दिए गए थे. यह साल 2020-21 से 12 फीसदी और 2015-16 से 15 फीसदी अधिक था. मंत्रालय के 3 विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग हैं.

आंकड़े बताते हैं कि करीब 42 रिसर्च एंड डैवलपमैंट यानी आर एंड डी निजी क्षेत्रों द्वारा कराए जाते हैं. यह क्षेत्र रिसर्च के शुरुआती स्टेज पर बेहद कम ध्यान देता है. इसलिए वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए सार्वजनिक खर्च में वृद्धि करना जरूरी हो जाता है.

बजट और सुविधाएं न होने के कारण विश्वविद्यालयों द्वारा रिसर्च को कम ही प्रोत्साहित किया जाता है. रिसर्च करने वालों को बेहतर कैरियर बनाने का मौका भी नहीं दिया जाता है.

शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय उच्चशिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार,

70 फीसदी से अधिक कालेज प्राइवेट हैं. इन कालेजों का ध्यान मुख्यरूप से अनुसंधान को आगे बढ़ाने के बजाय शिक्षण और औद्योगिक प्लेसमैंट पर ज्यादा होता है. भारत में विश्वविद्यालयों की हालत बेहद खराब है. यही वजह है कि 100 सब से अच्छे विश्वविद्यालयों की सूची में भारत का कोई विश्वविद्यालय नहीं है. इसी सूची में चीन के 6 विश्वविद्यालय हैं.

रिसर्च पर टिकी होती है विकास की नींव

किसी भी देश का विकास वहां के लोगों के विकास के साथ जुड़ा हुआ होता है. इस के लिए यह जरूरी हो जाता है कि जीवन के हर पहलू में विज्ञान, तकनीक और शोधकार्य अहम भूमिका निभाएं. विकास के पथ पर कोई देश तभी आगे बढ़ सकता है जब उस की आने वाली पीढ़ी के लिए सूचना और ज्ञान आधारित वातावरण बने और उच्च शिक्षा के स्तर पर शोध तथा अनुसंधान के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों. हमारे देश में इन बातों को ले कर पिछले 75 सालों में भाषण और बयानबाजी तो बहुत हुई पर इस दिशा में काम बेहद कम हुआ. पंजाब के जालंधर स्थित लवली प्रोफैशनल यूनिवर्सिटी में 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस के आयोजन समारोह में ‘भविष्य का भारत : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जय जवान जय किसान जय विज्ञान’ में ‘जय अनुसंधान’ भी जोड़ दिया. इस के बाद भी रिसर्च की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया.

भारत रिसर्च के क्षेत्र में चीन, जापान जैसे देशों से पीछे है. भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों में 7वें स्थान पर है. भारत में मल्टीनैशनल कौर्पोरशन रिसर्च एंड डैवलपमैंट केंद्रों की संख्या 2010 में 721 थी. यह 2018 में 1150 तक पहुंच गई है. इस के बाद भी भारत के हाथ कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है. भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास तथा अनुसंधान की स्थिति धरातल पर उतनी मजबूत नहीं जितनी कि भारत जैसे बड़े देश की होनी चाहिए. नोबेल पुरस्कार एक विश्व प्रतिष्ठित विश्वसनीय पैमाना है जो विज्ञान और शोध के क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों के जरिए किसी देश की वैज्ञानिक ताकत को बतलाता है. इस मामले में भारत की उपलब्धि लगभग जीरो है. वर्ष 1930 में सर सी वी रमन को मिले नोबेल पुरस्कार के बाद से अब तक कोई भी भारतीय वैज्ञानिक इस उपलब्धि को हासिल नहीं कर पाया. इस का कारण है कि देश में मूलभूत अनुसंधान के लिए उपयुक्त साधन नहीं हैं.

दिनोंदिन खराब होते हालात

अगर 40-50 साल पहले की बात करें तो देश में लगभग 50 वैज्ञानिक अनुसंधान विश्वविद्यालय ही होते थे. धीरेधीरे विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के लिए धन की कमी होती चली गई. अब हालत यह है कि युवावर्ग की दिलचस्पी वैज्ञानिक शोध में कम तथा अन्य क्षेत्रों में ज्यादा होती है. सरकार ने रिसर्च करने वाले युवाओं को अच्छे अवसर नहीं दिए. एक सर्वे बताता है कि हर साल लगभग 3000 अनुसंधान शोधपत्र तैयार होते हैं लेकिन इन में कोई नया आइडिया या विचार नहीं होता. विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं पर यहां बहुत कम खर्च किया जाता है. साल 2035 तक तकनीकी और वैज्ञानिक दक्षता हासिल करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने टैक्नोलौजी विजन 2035 नाम से एक रूपरेखा तैयार की है. इस में शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य, खाद्य और कृषि, जल, ऊर्जा, पर्यावरण इत्यादि जैसे 12 विभिन्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही गई है.

इस को पूरा करने के लिए विज्ञान

तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी की जाए ताकि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का अभाव जैसी मूलभूत समस्या को दूर किया जा सके. विदेशों के साथ सा?ा कार्यक्रम हो जिस से युवाओं को रिसर्च के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकें. एक ऐसी नीति बनानी होगी जिस में समाज के सभी वर्गों में वैज्ञानिक प्रसार को बढ़ावा देने और सभी सामाजिक स्तरों से युवाओं के बीच विज्ञान के रिसर्च के लिए कौशल को बढ़ाने पर जोर दिया गया हो. पिछले साल महामारी के बीच एमफिल और पीएचडी कर रहे 530 स्टूडैंट्स पर किए एक सर्वे में रिसर्च स्टूडैंट्स का कहना था कि उन्हें अगर रिसर्च के लिए जरूरी सामग्री या लैब की सुविधा नहीं मिली तो वे रिसर्च छोड़ देंगे. इस से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में रिसर्च की हालत कैसी है.

नाकाफी हैं सुधार

उच्चशिक्षा से जुड़े एक और मामले में शिक्षा मंत्रालय ने औल इंडिया सर्वे औन हायर एजुकेशन 2019-20 की रिपोर्ट में यह बताया कि देश में पीएचडी करने वालों की संख्या 2020 में बढ़ कर 2.03 लाख हो गई है जो 2015 में 1.17 लाख थी. उच्चशिक्षा संस्थानों में सिर्फ पीएचडी करने वालों की तादाद ही नहीं बढ़ी है, दाखिलों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है. वर्ष 2019-20 के सत्र में 3.85 करोड़ छात्रों ने दाखिला लिया.

2015 से 2019 की अवधि में दाखिलों में

11 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि इसी अवधि में लड़कियों के दाखिले में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. पीएचडी करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी को देख कर लगता है कि भारत में उच्चशिक्षा का परिदृश्य बहुत अच्छा हो चुका है लेकिन जब अन्य देशों से इस की तुलना की जाती है तो इस की कमजोरियां स्पष्ट हो जाती हैं. भारत में प्रति 10 लाख लोगों में से 150 पीएचडी करते हैं जबकि चीन में यह आंकड़ा 1,071, ब्राजील में 694, मैक्सिको में 353 और सूडान में 290 प्रति दस लाख है.

भारत में रिसर्च और उच्चशिक्षा में जातीय गैरबराबरी की समस्या भी देखने को मिलती है. राज्यसभा में शिक्षा विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में विज्ञान के प्रमुख संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों से आने वाले स्टूडैंट्स की संख्या बेहद कम थी. यहां 2016 से 2020 के बीच एसटी 2 फीसदी, एससी 9 फीसदी और ओबीसी 8 फीसदी स्टूडैंट्स रिसर्च में एडमिशन पा सके. केंद्र सरकार ने इस साल उच्चशिक्षा का बजट 1116 करोड़ रुपए घटा दिया है. ऐसे में बेहतर की उम्मीद कैसे की जा सकती है. हम आजादी का जो अमृत महोत्सव मना रहे हैं उस का उत्साह फीका है.

भारत भूमि युगे युगे: सीजनल दलित

उत्तर प्रदेश के मंत्री दिनेश खटीक उन भाजपाई दलितों में से एक हैं जो कोई ज्यादती होती है तो अपनी जाति का रेनकोट पहन कर हायहाय करने लगते हैं कि देखो, मैं दलित हूं, इसलिए मेरी अनदेखी की जा रही है. अफसर मेरी सुनते नहीं, आलाकमान भी ध्यान नहीं देता वगैरहवगैरह. बात अकेले इन मंत्री महोदय की नहीं बल्कि उन लाखों दलितों की है जो दलित रेखा की सीमाएं छोड़ चुके हैं और आर्थिकरूप से संपन्न हो कर लगभग सवर्ण हो चुके हैं. जाति इन के लिए ढाल और हथियार है.

दलितों का वास्तविक अहित स्मार्ट हो गए यही दलित करते हैं. हकीकत में मनुवाद का शिकार हो कर पीडि़त-प्रताडि़त शूद्र न तो इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं और न ही शिकायत कर सकते. दिनेश की मंशा क्या थी, यह तब सम झ आया जब योगीजी से मिल कर वे शांत हो गए. मुमकिन है मंत्रिमंडल के पहले ही फेरबदल में उन्हें इस गुस्ताखी की सजा दे दी जाए.

गिरफ्तारी की बेताबी

पूरे देश सहित दिल्ली में भी शराब ‘पगपग नीर…’ वाली स्टाइल में इफरात से बिकती है. शराब से घर के घर भले ही बरबाद होते हों लेकिन राज्य सरकारें आबाद रहती हैं. दिल्ली की आबकारी नीति में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की भूमिका को ले कर एलजी वी के सक्सेना ने सवाल क्या उठाए, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर भड़क गए कि यह यानी सीबीआई जांच की सिफारिश मनीष को गिरफ्तार करने की तैयारी है. यह बात वे कई दिनों से कह रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार है कि उन की सुन ही नहीं रही.

आमतौर पर लोग गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हैं लेकिन केजरीवाल जिस शिद्दत से अपने दाएं हाथ को हथकडि़यों में लिपटे देखना चाहते हैं वह जज्बा हर किसी की सम झ नहीं आ रहा. बात धीरेधीरे अपनेअपने सियासी बापों सावरकर और भगत सिंह तक पहुंच गई तो दिल्ली वालों को मुफ्त का एक और शानदार इवैंट देखने को तैयार रहना चाहिए.

16-7=9

मध्य प्रदेश निकाय चुनावों में भाजपा पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पाई, जिस के तहत पूरे 16 नगरनिगम उस की  झोली में आए थे. हालिया चुनाव में 7 उस से छिन गए हैं. 5 कांग्रेस ले गई तो 1-1 आम आदमी पार्टी और निर्दलीय के खाते में गया. इस चुनाव में मुख्यमत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिनरात मेहनत की थी पर जब नतीजे आए तो उन का चेहरा लटका हुआ था. मामा का जादू उतर रहा है. रुकरुक कर होने वाली यह चर्चा अब जोर पकड़ रही है.

यह विश्लेषण आंकड़ों और तथ्यों के अलावा आम लोगों के अनुभवों और राजनीतिक सम झ पर आधारित है कि अगर 2023 विधानसभा चुनाव उसे जीतना है तो बासे होते मामा को हटा कर किसी नएनवेले व जोशीले युवा को लाना पड़ेगा जिस का नाम विश्वास सारंग है. बाकी बूढ़े नाम नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, कैलाश विजयवर्गीय और नरेंद्र सिंह तोमर खारिज किए जा चुके हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि हर बार कुरसी बचा ले जाने के एक्सपर्ट शिवराज कौन सा दांव चलेंगे या फिर बढ़ती उम्रजनित थकान उतारने के लिए किसी राजभवन की शोभा बढ़ाएंगे.

मार्गरेट वर्सेस धनखड़

अब बारी उपराष्ट्रपति के चुनाव की है जिस में एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राजस्थान के जाट समुदाय के धाकड़ जगदीप धनखड़ को जबकि संयुक्त विपक्ष ने पुरानी 80 वर्षीया कांग्रेसी नेत्री मार्गरेट अल्वा को मैदान में उतारा है. टक्कर लगभग बराबरी की है बशर्ते नाराज ममता बनर्जी विपक्षी एकता के नाम पर आसानी से मान जाएं.

5 राज्यों की राज्यपाल रहीं मार्गरेट ज्यादा अनुभवी हैं और गांधीनेहरू परिवार की आलोचना के लिए भी जानी जाती हैं.

धनखड़ पश्चिम बंगाल में ममता के सामने लड़खड़ाने लगे थे. वे गिरते, इस से पहले ही उन्हें सम्मानजनक तरीके से बचाने की कवायद शुरू हो गई है. वे अगर हारे तो कहा जाएगा कि कल का कांग्रेसी और समाजवादी नेता हार गया और अगर जीते, जैसा कि वोटों का मौजूदा गणित है तो सुनने को मिलेगा रामभक्त जीता.

सप्लीमेंट: आज की जिंदगी में जरूरी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत के लिए जरूरी सप्लीमैंट्स छूट जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि सही मात्रा में सप्लीमैंट्स लिए जाएं.

35 वर्षीया मनीषा अपने पति के साथ मुंबई के एक पौश इलाके में रहती है. वह कौर्पोरेट में सीनियर पोस्ट पर काम करती है. औफिस पहुंचने के लिए वह रोज अपनी गाड़ी से तकरीबन 22 किलोमीटर तय करती है, जिसे ड्राइवर ही चलाता है. एक दिन ड्राइवर की अनुपस्थिति में जब वह गाड़ी खुद ड्राइव कर औफिस जा रही थी, आधी दूरी के बाद उस की आंखों के आगे अचानक अंधेरा छाने लगा. उस ने गाड़ी को किसी तरह किनारे ले जा कर रोका और पानी निकाल कर अपने चेहरे को धो लिया. इस से उस को कुछ ठीक लगने लगा और वह फिर से ड्राइव कर औफिस पहुंच गई. औफिस पहुंचने पर सहकर्मी से मनीषा ने अपनी बात कही. उन्होंने उसे डाक्टर से जांच करवाने की सलाह दी.

मनीषा भी थोड़ी सोच में पड़ गई और डाक्टर के पास गई. डाक्टर ने जांच कर सही पोषण के न मिलने की वजह की कमजोरी बताया और कई विटामिंस की गोलियां लेने व खानपान में सुधार करने की सलाह दी. पहले तो मनीषा को यह सम झ पाना मुश्किल था कि इतनी कम उम्र में उसे पोषण की कमी हुई कैसे, लेकिन यह भी सही था कि घर और बाहर काम का बो झ उस की जिंदगी में कुछ अधिक था. इस वजह से वह समय पर भोजन नहीं ले पाती थी.

नियमित दिनचर्या है गलत

यह सही है कि आज की भागदौड़ की जिंदगी में समय पर भोजन करना, समय से सोना, 7 या 8 घंटे की नींद पूरी करना आदि किसी सपने जैसा हो चला है. ऐसे में लोग सब से अधिक खानपान को नजरअंदाज करने लगे हैं. इस में महिलाओं की संख्या अधिक है. कुछ महिलाएं तो बगैर सुबह का सही नाश्ता लिए औफिस चली जाती हैं, जबकि कुछ नहाधो कर नाश्ता लेती हैं. ऐसे में सप्लीमैंट्स ही उन की शारीरिक जरूरतों को पूरा कर पाते हैं.

इस के अलावा कई बार खुद के हिसाब से सही मात्रा में फल, सब्जियां लेने पर भी सप्लीमैंट्स की जरूरत होती है. कुछ लोग इसे पूरा करने के लिए सीधे मैडिकल शौप पर जा कर ऐसे सप्लीमैंट ले लेते हैं, जिन का प्रभाव कई बार गलत हो जाता है. यहां बता रहे हैं कि शरीर को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए सप्लीमैंट लेना कितना सही, कितना गलत है.

सप्लीमैंट है जरूरी

इस बारे में अपोलो स्पेक्ट्रा, मुंबई की डाइटीशियन जिनल पटेल कहती हैं, ‘‘डाइट ही सप्लीमैंट कहलाता है. इस में जो भोजन हम करते हैं, उस के अलावा जो सप्लीमैंट लिया जाता है उसे डाइटरी सप्लीमैंट कहते हैं. ये डाइट में न्यूट्रिएंट्स को जोड़ते हैं. अगर

ये भोजन द्वारा नहीं मिलता तो डाइटीशियन शारीरिक समस्याओं को कम करने के लिए सप्लीमैंट्स देते हैं ताकि हैल्थ प्रौब्लम का रिस्क कम हो जाए. आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस आदि बीमारियों से बचने के लिए डाइटरी सप्लीमैंट्स दिए जाते हैं, जो टेबलेट्स, कैप्सूल्स, पाउडर या लिक्विड फौर्म में होते हैं. बेसिक कंटैंट फाइबर, मिनरल्स, हर्ब्स जैसे होते हैं.

‘‘ऐसा देखा गया है कि शाकाहारी भोजन करने वालों, चाहे पुरुष हों या महिलाएं, को सप्लीमैंट्स लेना पड़ता है. महिलाओं को अधिकतर आयरन और कैल्शियम के सप्लीमैंट्स दिए जाते हैं. अगर महिला गर्भवती होना चाहती है तो उसे आयरन और फोलिक एसिड दिया जाता है, ताकि उसे जरूरत के अनुसार पोषण मिले. महिलाओं को 30 साल की उम्र के बाद ही कैल्शियम के सप्लीमैंट्स दिए जा सकते हैं.’’

मेनोपोज के बाद

सप्लीमैंट्स हैं जरूरी

डा. पटेल बताती हैं, ‘‘पहले मेनोपोज के बाद कैल्शियम दिया जाता था क्योंकि इस के बाद एस्ट्रोजन के बढ़ने से महिला का कैल्शियम कम होता जाता है. पतले हों या प्लस साइज, सभी में माल न्यूट्रीशन होते हैं. मोटापा होने से शरीर में फैट अधिक है लेकिन बाकी चीजें कम हैं. पतले दिखने वालों में कैल्शियम या आयरन की कमी हो सकती है. जरूरत के अनुसार फैट भी नहीं है. दोनों तरह से पेशेंट को मालनरिस्ट कहा जा सकता है. दोनों की जरूरतें एकजैसी हो सकती हैं.

‘‘मेनोपोज में मूड स्विंग होना, खाने को मन न करना, कुछ मानसिक समस्या का होना आदि को देखना जरूरी होता है. इस दौरान महिला के शरीर में विटामिंस और मिनरल्स की कमी हो जाती है. पेशेंट को भूख लगने की कोशिश की जाती है. इस में प्रोटीन और कैल्शियम देना पड़ता है. उम्र थोड़ी अधिक होने से उन्हें डाइट में फ्रैश फ्रूट्स थोड़ेथोड़े समय पर लेने से महिला का हार्मोनल संतुलन बना रहता है. लगातार ऐसी कोशिश और सप्लीमैंट्स से महिला का मेनोपोज भी आराम से निकल जाता है.’’

पहले करें जांच

अपने एक अनुभव के बारे में डाइटीशियन जिनल पटेल कहती हैं, ‘‘एक लड़की ने वजन घटाने के लिए डाइटिंग की जिस से उसे खाने की इच्छा खत्म हो गई. खाना हजम न होने की शिकायत हो गई, एसिडिटी अधिक होने लगी, क्योंकि उस में विटामिन बी12 की कमी हो गई थी. जब किसी को डाइट सप्लीमैंट्स के बारे में बताया जाता है तो सब से पहले उस की जरूरत शरीर में कितनी है, इस की जांच की जाती है.

किसी ने अगर सप्लीमैंट्स को नैचुरल सम झा है तो यह सही नहीं है. व्यक्ति को उस के पीछे की वैज्ञानिक बातों को भी जान लेना आवश्यक होता है. इसे जानने के लिए किसी फिजीशियन या डाइटीशियन की सलाह अवश्य लें. सप्लीमैंट्स लेने से पहले कुछ बातें जान लेना आवश्यक है.

किस ब्रैंड या कितनी मात्रा में सप्लीमैंट्स लेना है.

किस सप्लीमैंट्स के साथ कौन सा सप्लीमैंट सही रहता है.

लक्षण

जौइंट पेन का होना,

यूरिक एसिड का बढ़ना,

आंखों या हाथ का पीलापन हो जाना आदि.

डाक्टरी परामर्श जरूरी

जरूरत से अधिक सप्लीमैंट्स लेने पर कई समस्याएं हो सकती हैं. कई सप्लीमैंट्स में ऐसे तत्त्व होते हैं जिन की अधिकता शरीर के रासायनिक संतुलन को बिगाड़ सकती है. मसलन, विटामिन ‘के’ की अधिकता वाले सप्लीमैंट्स लेने से शरीर का रक्त पतला करने की क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है. अगर किसी तरह की परिवार निरोधक या डिप्रैशन की दवा ले रहे हैं तो बिना किसी डाक्टरी परामर्श के हैल्थ सप्लीमैंट्स न लें, क्योंकि किसी व्यक्ति को कैल्शियम साल में केवल 30 दिन ही लेने पर काफी होता है. विटामिन ‘डी’ के लिए सुबह की धूप लेना काफी होता है. विटामिन बी 12, बी 6 की कमी अधिकतर शाकाहारी व्यक्तियों को होती है, इसलिए उन के डाइट चार्ट बनाते समय उस व्यक्ति से बात करना जरूरी होता है.

जुड़े हैं कई मिथ

बाजार में मौजूद अकसर हैल्थ सप्लीमैंट्स के बारे में लोगों का यह मानना होता है कि प्रोटीन की अधिकता वाले सप्लीमैंट्स को जम कर खाने से मसल्स बनते हैं. असलियत यह है कि मसल्स केवल प्रोटीन से नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेटयुक्त डाइट को लेने, भोजन लेने के सही समय और सही तरीके की ऐक्सरसाइज से बनते हैं.

फैट में घी और तेल शामिल होता है, घर का बनाया घी सब से अच्छा होता है. एक दिन में 3 चम्मच घी या तेल प्रति व्यक्ति को लेना जरूरी है. इस से अधिक लेने पर फैट की मात्रा बढ़ती है. कम लेने पर सोल्यूबल तेल निकलने पर शरीर में विटामिंस की कमी हो सकती है.

चावल खाने पर मोटापा अधिक नहीं होता. इस में उस की मात्रा पर ध्यान देना है. यह जानना जरूरी है क्योंकि सीमित मात्रा में चावल अवश्य ले सकते हैं. चावल पसंद होने पर डायबिटीज के मरीज को भी थोड़ी मात्रा में चावल खाने को दिया जा सकता है. उस के साथ फाइबर कितना लेते हैं, इसे देखना पड़ता है, ताकि ग्लूकोज न बढ़े.

आज के अधिकतर यूथ डाइट पर रहते हैं और फिटनैस के लिए खानापीना कम कर देते हैं. खापी कर ही डाइटिंग की जा सकती है यानी सही समय पर सही डाइट लेने से ही आप फिट रह सकते हैं.

शाकाहारी भोजन में विटामिंस या मिनरल्स की कमी नहीं होती. उसे संतुलन के साथ लेने पर प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाती है. नौनवेज में चिकन, अंडा, फिश होता है, इसलिए प्रोटीन आसानी से मिलता रहता है. कौम्बिनेशन औफ फूड हमेशा सही होता है ताकि विटामिंस की कमी को बढ़ाया जा सके. –प्रतिनिधि द्य

मेरे घरवाले दहेज लेना चाहते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 22 साल का एक कुंआरा और बेरोजगार नौजवान हूं. मेरे घर वाले चाहते हैं कि मैं शादी कर लूंताकि शादी में जो दहेज मिलेउस से मेरा घर बस जाए.

पर आज के जमाने में यह नामुमकिन बात है कि कोई लड़की किसी बेरोजगार के साथ शादी करेगी. वैसे भी मैं खुद इस बात का हिमायती नहीं हूं और पहले अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता हूंपर मेरे घर वाले टस से मस नहीं हो रहे हैं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप समझदार हैंजो खुद ही अपनी समस्या के साथ उस का समाधान भी बता रहे हैं कि कोई लड़की बेरोजगार लड़के से शादी नहीं करेगी. तो पहले आप अपने पैरों पर खड़े हो जाएंफिर शादी करें.

घर वालों से सख्ती से कह दें कि बेरोजगार रहते आप शादी नहीं करेंगे और दहेज के नाम पर यों बिकना आप की गैरत के खिलाफ है. दहेज के पैसे से जिंदगी नहीं कटेगी.                      

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

तीज 2022: त्यौहारों के मौसम में ट्राय करें ये 4 खास स्वीट रेसिपी

त्योहार पर घर में मिठाइयों की कमी नहीं रहती. सब शौक से खाते हैं लेकिन त्योहार बीत जाने पर इन मिठाइयों को कोई खाना नहीं चाहता. ऐसे में इन मिठाइयों को दें नया ट्विस्ट, जो कर देगा सब को हैरान.

  1. स्मूदी विद जलेबी

सामग्री :

500 ग्राम बर्फी, थोड़ा सा केसर, 1 लिटर दूध, 1/4 कप पिसे मेवे, स्वादानुसार चीनी, 1/2 कप कुटी बर्फ.

विधि :

मिक्सी में बर्फी, दूध, केसर, मेवे व चीनी डाल कर अच्छी तरह घुमाएं. बर्फ मिला कर एक बार फिर से घुमाएं. लंबे पतले आकर्षक गिलासों में इस स्मूदी को जलेबी ?से सजा कर ठंडाठंडा परोसें.

2. हरीमिर्च खट्टीमीठी

सामग्री :

10-12 मोटी हरीमिर्चें, 10-12 रसगुल्ले, 1/2 कप ताजा कसा नारियल, 1 बड़ा चम्मच चाट मसाला, थोड़ा सा हरा धनिया, 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर, 1 छोटा चम्मच अमचूर, तलने के लिए तेल, नमक स्वादानुसार.

घोल बनाने के लिए :

1 कप बेसन, 3-4 पीस काजू बर्फी, 1 बड़ा चम्मच तंदूरी मसाला, 1 बड़ा चम्मच चाट मसाला, 1 छोटा चम्मच अमचूर, 1 छोटा चम्मच लालमिर्च कुटी, नमक स्वादानुसार.

विधि :

घोल बनाने की सारी सामग्री को एकसाथ मिला कर अच्छी तरह मिक्स करें तथा पानी की सहायता से पकौड़े बनाने जैसा घोल तैयार कर लें. मिर्चों के बीच में चीरा लगाएं. मिर्च की डंडी को न काटें. रसगुल्लों को 2-3 बार अच्छी तरह से घोटेंनिचोड़ें और फिर धो लें. पानी अच्छी तरह निचोड़ कर रसगुल्लों को चूरा कर लें. तेल को छोड़ कर शेष सामग्री इस में मिलाएं तथा इस मिश्रण को मिर्चों में भर लें. तेल गरम करें. एकएक मिर्च को सावधानी से उठाएं, बेसन के घोल में डुबोएं तथा सेव में लपेट कर सुनहरा होने तक तल लें. हरी चटनी के साथ सर्व करें.

3. भरवां त्रिकोण

सामग्री :

2-3 बेसन के लड्डू, 5-6 मोतीचूर के लड्डू, 1 बड़ा चम्मच बारीक पिसे मेवे, आवश्यकतानुसार देसी घी.

रोटी के लिए :

1 कटोरी मैदा, 1 कटोरी गेहूं का आटा, दूध गूंधने के लिए.

विधि :

दोनों तरह के लड्डुओं को चूरा कर के मेवे मिला लें. दोनों आटे मिला कर दूध मिला कर नरम गूंध लें. लोइयां बना कर पतला बेलें और आयताकार लंबी पट्टियां काट लें. एक पट्टी पर लड्डू का भरावन रखें. दूसरी पट्टी से भरावन को ढक कर किनारे अच्छी तरह से दबा दें ताकि मिश्रण बाहर न निकले. सारी पट्टियां इसी प्रकार से बना लें. गरम तवे पर देसी घी लगाते हुए उन पट्टियों को सुनहरा सेंक लें. काट कर गरमागरम परोसें.

4. तरबूजी-मीठा उत्तपम

सामग्री :

2 गोल आकार में कटे तरबूज के टुकड़े, 1 बड़ा चम्मच मूंगफलीदाना, 1/2 कटोरी कसी गाजर, 1 हरीमिर्च, 1 छोटा चम्मच औलिव औयल, थोड़ा सा हरा धनिया, 1 छोटा चम्मच चाट मसाला, 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर,1/2 छोटा चम्मच अमचूर, नमक स्वादानुसार.

उत्तपम के लिए सामग्री :

1/2 कटोरी सूजी, 1 कटोरी (मसली हुई) मिलीजुली मिठाई, 1 बड़ा चम्मच बारीक कटे मेवे, आवश्यकतानुसार घी.

विधि :

उत्तपम की सारी सामग्री मिला कर छाछ या पानी के साथ गाढ़ा घोल बना लें. गरम तवे पर घी लगा कर घोल से उत्तपम सुनहरे होने तक सेंक लें. तरबूज के टुकड़ों पर औलिव औयल लगा कर चाट मसाला तथा धनिया बुरक दें. मूंगफलीदानों को तल कर दरदरा कूट लें. इस में गाजर तथा सभी मसाले मिला दें. हरीमिर्च व हरा धनिया काट कर मिलाएं. एक सर्विंग डिश में उत्तपम रखें, उस पर मूंगफली वाली सलाद रखें, उस के ऊपर तरबूज के टुकड़े रखें और फिर मूंगफली से सजा कर परोसें.

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