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शोएब मलिक नहीं ये खिलाड़ी हैं सानिया के पसंदीदा क्रिकेटर

भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा की क्रिकेट के प्रति दीवानगी किसी से छिपी नहीं है. वह अकसर स्टेडियम में खिलाड़ियों को चीयर करती नजर आती हैं. वह टेनिस तो खेलती ही हैं, लेकिन क्रिकेट को भी खासा पसंद करती हैं.

पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी करने वाली सानिया मिर्जा ने अपने फैन्स के कुछ सवालों के जवाब देते हुए एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उन्हें क्रिकेट कितना पसंद है. ट्विटर के माध्यम से पूछे गए सवालों का जवाब टेनिस स्टार सानिया ने इस अंदाज में दिया है जिसे जानकर आपका दिल खुश हो जाएगा.

दरअसल उनके फैन्स ने ट्विटर पर उनसे क्रिकेट से संबंधित कुछ दिलचस्प सवाल पूछे थे, सानिया ने वक्त निकालकर उन सभी सवालों के जवाब दिए और बहुत ही उम्दा तरीके से दिए. सानिया ने अपने पसंदीदा भारतीय क्रिकेटर्स के नाम तो बताए ही, साथ ही उन्होंने फेवरेट श्रीलंकन क्रिकेटर का नाम भी लोगों को बताया. इसके अलावा फुरसत के पलों में सानिया क्या करती हैं, इसके बारे में भी उन्होंने ट्विटर के माध्यम से बताया.

भारतीय टेनिस स्टार से जब उनके एक फैन ने सवाल किया कि वह खाली समय में क्या करना पसंद करती हैं. तब सानिया ने मजाकिया जवाब देते हुए कहा, ‘कुछ भी नहीं’. इसके अलावा जब उनसे पसंदीदा इंडियन क्रिकेटर का नाम पूछा गया, तब उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी’.

हालांकि जब दूसरे यूजर ने उनसे पसंदीदा क्रिकेटर का नाम पूछा तो उन्होंने क्रिकेट के भगवान का नाम लिया. उन्होंने लिखा कि सचिन उनके सबसे फेवरेट क्रिकेटर हैं.

वहीं सानिया के एक अन्य फैन ने उनके पसंदीदा श्रीलंकाई क्रिकेटर के बारे में पूछा तो जवाब मिला, ‘कुमार सांगाकारा’. इसके बाद उनसे एक अन्य ट्विटर यूजर ने विराट कोहली के बारे में एक शब्द में कुछ बताने का आग्रह किया, तब सानिया ने ‘चैम्पियन’ लिखकर जवाब दिया.

एक फैन ने तो उनसे बिग बौस को देखने पर भी सवाल पूछ लिया, सानिया ने जवाब ‘कभी-कभी’ में दिया.

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से तकलीफ किसे है

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर आम जनता या कांग्रेसियों को आपत्तियां होती तो बात कुछ गंभीर होती, पर यहां सारी आपत्तियां भारतीय जनता पार्टी को हो रही है जो कुछ अजीब लग रहा है. यह तो ठीक है कि हिंदू धर्म की खराब परंपराओं को निभाने में दक्ष भारतीय जनता पार्टी हर दूसरे के निजी मामले में टांग अड़ाने का मौलिक हक रखती है पर चोरचोर मौसेरे भाई होते हैं और एकदूसरे को तो बख्शते हैं.

भारतीय जनता पार्टी आज देश की बड़ी नहीं बहुत बड़ी पार्टी है और उसे कांग्रेस जैसी छोटी पार्टी से डर नहीं लगना चाहिए और उसे अपने हिसाब से जीने का हक देना चाहिए पर आदत से मजबूर महान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ले कर झुमरीतलैया की कच्ची बस्ती के मंदिर के पुजारी तक राहुल पर कमेंट कर रहे हैं और लोकतंत्र की हत्या का राग अलाप रहे हैं.

कांग्रेस जेबी पार्टी है इस में शक नहीं है, पर यह फिर भी लोगों को उसी तरह मान्य है जैसे 15वीं शताब्दी के मामले सिर पर उठाए चल रही भारतीय जनता पार्टी मान्य है. जब आप के चेहरे पर खुद कालिख पुती हो तो दूसरे के चेहरे पर निशान को दिखाना बड़प्पन नहीं खीज जाहिर करता है.

राहुल गांधी से भारतीय जनता पार्टी भयभीत रही है, यह सच है और 2014 से पहले उन का आक्रमण सोनिया गांधी या मनमोहन सिंह पर इतना नहीं था जितना राहुल गांधी पर था. शायद उन की रणनीति थी कि यदि राहुल गांधी को लगातार निशाने पर रखा जाएगा तो वह घबरा कर मैदान छोड़ जाएंगे. अफसोस यह है कि हिंदू समाज के सुधारकों की तरह राहुल गांधी भी कट्टरपंथियों का मुकाबला करते रहे.

पार्टियों में लोकतंत्र एक आदर्श व्यवस्था है पर दुनिया भर में इस के नुकसान भी हुए हैं. आज अमेरिका में इस आंतरिक लोकतंत्र के कारण न डैमोक्रेटिक पार्टी में न रिपब्लिकन पार्टी में सही नेतृत्व है. इंग्लैंड की कंजर्वेटिव पार्टी व लेबर पार्टी दोनों नेताओं के अभाव से मस्त हैं. फ्रांस को एक नए नवेले राष्ट्रपति और उस की नई नवेली पार्टी से काम चलाना पड़ रहा है. जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल की धाक यूरोप व अमेरिका की राजधानियों में है पर वोटरों के दिलों में नहीं.

परिवारवाद आदर्श नहीं पर इस का पर्याय शायद कम है. राजनीतिक माहौल में बड़े हुए युवा सफल नेता बन जाते हैं, क्योंकि उन के सैकड़ों से संबंध होते हैं एवं भारतीय जनता पार्टी में दूसरी तीसरी पीढ़ी के दसियों नेता ऐसे हैं, जिन के पुरखे राजनीति में थे और राजनीति ही उन का मुख्य व्यवसाय है. लोकतंत्र तो परिवारों के सही लोगों को मान्यता देती है और उस पर आपत्ति करना निरर्थक सा है क्योंकि जब भी परिवार नहीं होता  ‘…… फैक्टर यानी ……..इज नो एल्टरनेटिव’ दिखने लगता है.

भारतीय जनता पार्टी की परेशानी यह है कि जैसे उस के पास आज नरेंद्र मोदी का पर्याय नहीं वैसे ही कांग्रेस के पास राहुल गांधी जैसा पर्याय क्यों है.

रांची देगा धोनी जैसा एक और सितारा..!

लगता है एक बार फिर रांची शहर भारतीय क्रिकेट टीम को एक और शानदार खिलाड़ी देने को तैयार है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के गृहनगर रांची से एक और क्रिकेट खिलाड़ी ने राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बना ली है. झारखंड के रहने वाले पंकज यादव को आगामी आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए चुन लिया गया है.

राष्ट्रीय टीम में चुने जाने पर पंकज ने बताया, ‘क्रिकेट मेरी जिंदगी है. वर्ल्ड कप में टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करुंगा. धोनी और शेन वार्न मेरे आदर्श हैं.

वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए टीम में शामिल किए गए पंकज यादव की बात करे तो झारखंड के स्थानीय क्रिकेट में उनका बड़ा नाम है. पंकज यादव रांची में क्रिकेट के सुपरस्टार हैं. दाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज पंकज के पिता दूध बेचने का काम करते हैं. कहा जा रहा है कि धोनी के बाद पंकज भी क्रिकेट की दुनिया में बड़ा नाम कमा सकते हैं. राष्ट्रीय टीम में चुने जाने पर पंकज के पिता चंद्रदेव यादव का कहा कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है.

बता दें कि अंडर-19 विश्व कप टूर्नामेंट अगले साल 13 जनवरी से 3 फरवरी तक खेला जाएगा. इस दिन फाइनल मैच खेला जाएगा. कहा जा रहा है कि महा मुकाबले में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं और इन सभी देशों ने विश्व के लिए अपनी टीमों की घोषणा भी कर दी है.

हालांकि इस प्रारूप में भारत के प्रदर्शन की बात करें तो यहां टीम का प्रदर्शन संतोषनजक नहीं रहा. हाल में संपन्न हुए अंडर-19 एशिया कप में भारतीय टीम को नेपाल और बांग्लादेश से हार का सामना करना पड़ा है. टीम प्लेआफ में भी अपना स्थान पक्का नहीं कर सकी. इस कारण विश्व कप को लेकर टीम की परेशानी और भी ज्यादा बढ़ती हुई नजर आ रही है.

डेबिट कार्ड से पेमेंट करना अब होगा सस्ता

डेबिट कार्ड से लेनदेन करने वाले लोगों के चेहरे पर यह खबर मुस्कन लेकर आने वाली है. ऐसा इसलिए क्योंकि रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आर.बी.आई.) ने डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शन और उसपर लगने वाले चार्जेज को लेकर एक अहम कदम उठाया है.

रिजर्व बैंक ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एम.डी.आर.) को वाजिब स्तर पर लाने के लिए डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर अलग-अलग मर्चेंट डिस्काउंट की दरें तय की हैं. इसके तहत केंद्रीय बैंक ने कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाली मर्चेंट इकाइयों के नेटवर्क का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से शुल्क स्तरों में बदलाव किया है. इसका एक लक्ष्य बैंकों को नकदी रहित या कम नकदी वाली प्रणालियों में निवेश को प्रोत्साहित करना है. इस नियम को 1 जनवरी से लागू किया जाएगा.

क्या होता है एम.डी.आर. (MDR)

कोई बैंक किसी मर्चेंट या व्यापारिक ईकाई को डेबिट और क्रेडिट कार्ड सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जो शुल्क लगाता है उसे ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एम.डी.आर. कहते हैं.

क्या हुआ है बदलाव

रिजर्व बैंक की ताजा अधिसूचना के अनुसार 20 लाख रुपए तक के सालाना कारोबार वाले छोटे मर्चेंट के लिए एम.डी.आर. शुल्क 0.40 प्रतिशत लगेगा. जिसमें प्रति सौदा शुल्क की सीमा 200 रुपए होगी. यह शुल्क डेबिट कार्ड से आनलाइन या पी.ओ.एस. के जरिए लेनदेन पर लागू होगा. वहीं अगर किसी मर्चेंट इकाई का सालाना कारोबार 20 लाख रुपए से अधिक है तो एम.डी.आर. शुल्क 0.90 प्रतिशत होगा और इसमें प्रति लेनदेन 1,000 रुपए शुल्क की सीमा होगी.

वहीं 20 लाख रुपए तक के सालाना कारोबार वाले छोटे मर्चेंट के द्वारा क्यूआर कोड आधारित लेनदेन करने पर शुल्क 0.30 प्रतिशत रहेगा और इसमें प्रति सौदा 200 रुपए शुल्क की सीमा होगी. जबकि क्यूआर कोड के जरिए 20 लाख रुपए से अधिक लेनदेन पर 0.80 प्रतिशत शुल्क व अधिकतम शुल्क राशि 1000 रुपए ही रहेगी.

एमडीआर घटने से क्या होगा

अगर आने वाले दिनों में एमडीआर चार्जेज बैंक घटाते हैं, तो इसका फायदा आम आदमी को भी मिलेगा. एमडीआर चार्जेज कम होने से जब भी आप प्वाइंट आफ सेल्स मशीन से डेबिट कार्ड से लेनदेन करेंगे, तो आपको एक्स्ट्रा फीस कम या ना के बराबर भरनी पड़ेगी.

व्हाट्सऐप ने ग्रुप एडमिन को दी ये खास पावर

व्हाट्सऐप पर लोग ग्रुप बनाकर अपने दोस्तों और परिवारों के सदस्यों के साथ बात चीत करते हैं या यूं कहे कि सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं. अगर आप भी व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए इस ऐप के बारे में यह खास बात जानना बेहद जरूरी है. फेसबुक के स्वामित्व वाला व्हाट्सऐप ग्रुप एडमिन को और ज्यादा ताकतवर बनाने जा रहा है. इससे अगर एडमिन चाहे तो वह ग्रुप के सदस्यों को ग्रुप में संदेश, फोटो, वीडियो, जीआईएफ, दस्तावेज और वायस मैसेजेज पोस्ट करने से रोक सकता है.

कई बार ऐसा होता है कि व्हाट्सऐप ग्रुप के सदस्य उल्टे-सीधे या फालतू के मैसेजेस या वीडियो भेजकर पूरे ग्रुप को परेशान करते हैं. इन सब से बचने के लिए ही व्हाट्सऐप ये नयी फिचर लेकर आ रहा है.

डब्ल्यूएबीटाइंफो के मुताबिक, वाट्स एप ने गूगल प्ले बीटा प्रोग्राम पर वर्जन 2.17.430 में ‘प्रतिबंधित समूह’ फीचर्स दिया है.

‘प्रतिबंधित समूह’ की सेटिंग केवल ग्रुप एडमिन ही सक्रिय कर सकता है. इसके बाद एडमिन तो ग्रुप में सामान्य तरीके से फोटो, वीडियो, चैट व अन्य चीजें भेज सकते हैं, लेकिन वह उस ग्रुप के अन्य सदस्यों को ऐसा करने से रोक सकते हैं. आपको बता दें कि इसके लिए आपको ‘प्रतिबंधित समूह’ की सेटिंग लागू करना होगा. ऐसा करते ही अन्य सदस्य ग्रुप में मैसेज को पढ़ तो सकेंगे, लेकिन कुछ भी भेज नहीं सकेंगे. उन्हें ‘मैसेज एडमिन’ का बटन दिया जाएगा, जिससे वे अपने संदेश को ग्रुप एडमिन को भेज सकते हैं, ताकि ग्रुप एडमिन उसके संदेश को पूरे ग्रुप के साथ साझा कर सकें.

इसका मतलब ये हुआ कि ग्रुप एडमिन द्वारा संदेश को स्वीकृति मिलने के बाद ही बाद ही उसे ग्रुप में साझा किया जा सकेगा. इसके अलावा व्हाट्सऐप ने आनेवाले अपडेट्स में उन्नत फीचर्स, बग फिक्स और सामान्य सुधार जारी करने की घोषणा की है.

जब जडेजा ने परिवार की हालत देख क्रिकेट छोड़ने का बना लिया था मन

कभी साधारण जीवन जीने वाले भारतीय टीम के स्टार स्पिनर रविन्द्र जडेजा आज क्रिकेट सेलिब्रिटी बन गएं हैं. उनके पास दो लग्जरी औडी कार हैं. 2016 में उन्हें 97 लाख रुपए की औडी Q 7 गिफ्ट में मिली थी. ये गिफ्ट उन्हें उनके ससुर ने शादी से पहले दिया था. जडेजा साधारण परिवार से आते हैं और उनका बचपन भी मुश्किलों में बीता, रविन्द्र जडेजा के पिता एक सिक्युरिटी गार्ड का काम किया करते थे जिसकी वजह से घर खर्च चलाना काफी मुश्किल था क्योंकि उनके पिता की तनख्वाह इतनी नही थी के वो अपने सपनो को पुरा कर पाएं.

रवींद्र जडेजा का जन्म गुजरात की एक छोटी सी जगह नवागाम में हुआ. उनके पिता एक प्राइवेट कंपनी में सिक्युरिटी गार्ड थे, जबकि मां नर्स थीं. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण जडेजा और उनकी फैमिली के लिए क्रिकेटर बनने तक का सफर आसान नहीं रहा.

जडेजा की मां चाहती थीं कि बेटा क्रिकेटर बने. जबिक, पिता उन्हें डिफेंस में भेजना चाहते थे. जडेजा भी मां का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे, तभी अचानक 2005 में एक एक्सीडेंट में उनकी मां का निधन हो गया. इससे जडेजा इतने टूट गए थे कि क्रिकेट छोड़ने तक का मन बना लिया था.

हालांकि, बहनों के कहने पर वो खेल में लौटे और आज टीम इंडिया के स्टार औलराउंडर हैं. जडेजा की 2 बहने हैं. एक उनका रेस्टोरेंट का बिजनेस संभालती हैं.

रखते हैं दो ऑडी कार

जडेजा के कार कलेक्शन में दो औडी कार शामिल हैं, 2016 में उन्हें उनके ससुर ने औडी Q 7 गिफ्ट की थी. इसकी कीमत करीब 97 लाख रुपए है. इससे पहले से जडेजा के पास औडी Q 3 कार थी. कार के अलावा उन्हें घोड़ों का भी शौक है. जडेजा के फौर्म हाउस में कई शानदार घोड़े हैं.

ऐसा शुरू हुआ क्रिकेट करियर

जडेजा को 2002 में पहली बार सौराष्ट्र की अंडर-14 टीम में खेलने का मौका मिला. महाराष्ट्र के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने 87 रन बनाए और 4 विकेट भी झटक लिए. 15 साल की उम्र में ही वो सौराष्ट्र की अंडर-19 टीम में आ गए थे. इसी फौर्मेट में उन्होंने अपने करियर की पहली सेन्चुरी भी लगाई थी.

विराट के साथ खेला वर्ल्ड कप

दिसंबर, 2005 में उन्होंने कई अच्छी परफौर्मेंस के बाद वर्ल्ड कप अंडर-19 टीम में जगह बना ली. यहां जडेजा ने पहले औस्ट्रेलिया (चार विकेट) और फिर पाकिस्तान (तीन विकेट) के खिलाफ जबरदस्त परफौर्मेंस दी.

2008 में भी जडेजा अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम के मेंबर थे, जिसके कप्तान विराट कोहली थे. ये टीम वर्ल्ड कप चैम्पियन रही थी, टूर्नामेंट में जडेजा ने 10 विकेट लिए थे. फरवरी, 2009 में उन्हें टीम इंडिया के लिए वनडे और फिर टी20 खेलने का मौका मिला. जडेजा ने 2012 में टेस्ट डेब्यू किया था.

ट्विटर से नहीं जनता की भावनाओं से सिद्ध होती है लोकप्रियता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्विटर पर सब से ज्यादा लोग भारत में फोलो करते हैं और सब से अधिक 10 में से बाकी 9 एक्टर और खिलाड़ी हैं. यह संयोग ही नहीं है ट्विटर जो खाली बैठे लोगों का खेल है वहां नरेंद्र मोदी एक्टरों और क्रिकेटरों की गिनती में आते हैं. ट्विटर पर फोलो करने वाले आमतौर पर वे लोग हैं जिन्हें सुबह से शाम काम की फिक्र कम और मोबाइल पर बटन दबाने की चिंता ज्यादा होती है. वे सितारों और खिलाड़ियों के साथ जुड़ कर समय बर्बाद कर फालतू में ही खुश होते हैं.

देश का प्रधानमंत्री अपनी लोकप्रियता ट्विटर से नहीं जनता की भावनाओं से सिद्ध करता है. जिस प्रधानमंत्री के फैसलों से जनता खुश होती है वहां खुदबखुद पता चल जाता है. वहां विपक्ष में बैठे लोग भी आदर व सम्मान करते हैं. शाहरूख खान और अक्षय कुमार किसी की जिंदगी पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ते, प्रधानमंत्री का हर कदम, हर फैसला, हर वक्त कभी कुछ की तो कभी पूरे देश की जिंदगी बदल देता है.

ट्विटर अगर सफलता का पैमाना होता तो 10 में से बाकी 9 के भी कुछ करने का असर पूरे देश पर पड़ता, पर सच यह है कि विराट कोहली हो या दीपिका पादुकोण, इन के कुछ भी करने से देश का एक पत्ता नहीं हिलता. ये स्क्रीन या स्टेडियम पर कुछ भी कर लें, देश में उन के कहने करने से न सड़कें बनती हैं, न न्याय मिलता है, न विकास होता है. क्या जनता 10 वें को भी ऐसा ही समझती है?

फिल्म ‘कालाकांडी’ का ट्रेलर लौंच, अजीबोगरीब लुक में हैं सैफ अली खान

सैफ अली खान की फिल्म ‘कालाकांडी’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाले 6 किरदारों की है जोकि आपको शहर के डार्क, उपेक्षित समाज से रुबरु करवाएंगे. अक्षत वर्मा के निर्देशन में बनी यह फिल्म 12 जनवरी को रिलीज होगी.

अक्षत इससे पहले डेल्ही बेली लिख चुके हैं. फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत में दिखाया जाता हैं कि सैफ एक डौक्टर के साथ बैठे हैं और वो उन्हें बताता है कि उन्हें पेट का कैंसर हो गया है. इसके बाद डौक्टर सलाह देता है कि अब अपनी जिंदगी खुलकर जियो.

सैफ को खुश करती है डौक्टर की यह बात की जो कुछ आपको खुश करता है उसे करो. इसके बाद कहानी में दीपक डोबरियाल और विजय राज की एंट्री होती है जिन्हें ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने का लालच होता है.

इसके बाद शोभिता धुलिपाला और कुणाल रौय कपूर का प्यार और अक्षय ओबरौय का लस्ट देखने को मिलता है. ट्रेलर आपको कहीं-कही पर डेल्ही बेली की याद दिलाएगा. शुरुआत के 20 सेकेंड से ही ट्रेलर आपको इसे आखिरी तक देखने के लिए बांधे रखेगा.

सेक्स वर्कर के साथ बातचीत से लेकर इमरान हाशमी की किस को लेकर बातचीत तक ट्रेलर एक एडवेंचर ट्रिप पर आपको ले जाएगा. सैफ का अजीब हेयरस्टाइल और पीले फर वाला लुक आपके मन में फिल्म के प्रति जिज्ञासा पैदा करता है. इससे पहले फिल्म को लेकर रंगून स्टार ने कहा था- मैं सच में इसे अपनी बेस्ट फिल्मों में से एक मानता हूं और मैं इसकी रिलीज का इंतजार कर रहा हूं.

सैफ अली खान की फिल्म ‘कालाकांडी’ का ट्रेलर बुधवार को रिलीज किया गया. फिल्म में सैफ का लुक बिल्कुल अलग नजर आ रहा है. सैफ के बालों में कई रबड बैंड लगे हैं और कई चोटियां भी बंधी हैं.

इस डार्क थ्रिलिंग कौमिडी फिल्म के बारे में सैफ ने कहा है कि यह काफी मजेदार फिल्म है और वह इसका हिस्सा बनकर काफी खुश हैं. वहीं, उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर अक्षत वर्मा के बारे में कहा कि अक्षत ने फिल्म को बेहतरीन तरीके से बनाया है. मुंबई बेहद खूबसूरत शहर है और उन्होंने इसे उतनी ही खूबसूरती से दिखाया है.

इससे पहले सर्टिफिकेट के लिए फिल्म को सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था जिसने इसपर 70 से ज्यादा कट्स लगाने का निर्देश दिया था.

सरकार की तानाशाही : अब बैंक में जमा खुद का पैसा नही निकाल पाएंगे आप

केंद्र सरकार एक ऐसा बिल लेकर आ रही है जो यदि पास हो गया तो आपके बैंक में जमा पैसे पर आपका हक खत्म हो सकता है. बिल के मुताबिक, बैंक के दिवालिया होने की स्थिति में उस बैंक में जमा आपकी लाखों की रकम आप खुद ही नहीं निकाल सकेंगे.

सरकार ने फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपौजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल 2017 का मसौदा तैयार कर लिया है. इसे इसी शीत सत्र में संसद में रखा जा सकता है और अगर ये बिल पास हो गया तो बैंकिंग व्यवस्था के साथ-साथ आपके लिए कई चीजें बदल जाएंगी.

क्या है एफआरडीआई बिल?

फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपौजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया है. जब भी कोई बैंक अपना कारोबार करने में सक्षम नहीं होगा और वह अपने पास जमा आम लोगों के पैसे लौटा नहीं पाएगा, तो एफआरडीआई बिल बैंक को इस संकट से उभारने में मदद करेगा. किसी भी बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और अन्य वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थिकति में उसे इस संकट से उभारने के लिए यह कानून लाया जा रहा है.

क्या है बिल को लेकर सबसे बड़ा सवाल?

फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपौजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल 2017 को लेकर सबसे बड़ा सवाल बैंकों में रखे आपके पैसे को लेकर है. यह बिल बैंक को अधिकार देता है कि वह अपनी वित्तीय स्थ‍िति बिगड़ने पर आपका जमा पैसा लौटाने से इनकार कर दे और इसके बदले आपको बौन्ड, सिक्योरिटीज और शेयर दे दे.

आम आदमी के लिए क्यों है चिंता?

एफआरडीआई कानून में ‘बेल इन’ का एक प्रस्ताव दिया गया है. अगर इस प्रस्ताव को इसी लिहाज से लागू किया जाता है, तो बैंक में रखे आपके पैसों पर आपसे ज्यादा बैंक का अधिकार होगा. बैंकों को एक खास अधिकार मिलेगा, जिसमें बैंक अगर चाहे तो खराब वित्तीय स्थ‍िति का हवाला देकर आपके पैसे लौटाने से इनकार कर सकते हैं.

क्या होता है बेल-इन?

बेल-इन का साधारण शब्दों में मतलब है कि अपने नुकसान की भरपाई कर्जदारों और जमाकर्ताओं की जेब से करना. इस बिल में यह प्रस्ताव आने से बैंकों को भी यह अधिकार मिल जाएगा. जब उन्हें लगेगा कि वे संकट में हैं और उन्हें इसकी भरपाई करने की जरूरत है, तो वह आम आदमी के जमा पैसों का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे. इस मामले में सबसे डरावनी बात यह है कि बैंक आपको ये पैसे देने से इनकार भी कर सकते हैं.

सरकार की सफाई

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह परिभाषित करने के लिए कहा है, जो फिलहाल तैयार मसौदे में नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इसमें काफी बदलाव किए जा सकते हैं. इसको लेकर आम लोगों से सुझाव भी मांगे जाएंगे. जेटली ने इस खबर के फैलने पर सफाई देते हुए ट्वीट किया कि विधेयक स्थायी समिति के समक्ष लंबित है. वित्तीय संस्थानों तथा जमाकर्ताओं के हितों का पूर्ण संरक्षण करना ही सरकार का उद्देश्य है और सरकार इसको लेकर प्रतिबद्ध है.

अभी क्या है व्यवस्था?

मौजूदा समय में जो नियम-कानून हैं, उसके मुताबिक अगर कोई बैंक या वित्तीय संस्थान दिवालिया होता है तो जनता को एक लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलता है. 1960 से ही इसके लिए रिजर्व बैंक औफ इंडिया के अधीन ‘डिपौजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कौरपोरेशन’ काम कर रहा है. एफआरडीआई बिल 2017 आने से सारे अधिकार वित्त पुनर्संरचना निगम को मिल जाएंगे. बैंक या वित्तीय संस्थान के दिवालिए होने की सूरत में निगम ही ये फैसला करेगा कि जमाकर्ता को मुआवजा दिया जाए या नहीं और अगर दिया जाए तो कितना?

ऐसे समझिए क्या है नियम

अगर किसी बैंक में आप ने 5 लाख रुपए रखे हैं. किसी वजह से वह बैंक दिवालिया हो जाता है. वह जमाकर्ताओं के पैसे चुकाने की स्थ‍िति में नहीं रहता है, तो ऐसी स्थिति में भी उसे कम से कम 1 लाख रुपए आपको देने ही होंगे. हालांकि, 1 लाख से ज्यादा जितनी भी रकम होगी, उसकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है.

फिलहाल नए बिल में नहीं है नियम

एफआरडीआई अगर कानून बनता है, तो डिपौजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कौरपोरेशन का अस्तित्व खत्म हो जाएगा. इसकी जगह रेजोल्यूशन कौरपोरेशन ले लेगी. यह समिति वित्त मंत्रालय के अधीन काम करेगी. यह समिति ही तय करेगी कि बैंकों के दिवालिया होने की स्थ‍िति में बैंक में रखी आपकी कितनी रकम सुरक्ष‍ित रहेगी.

क्या आपका इंटरनल स्टोरेज फुल हो गया है, ऐसे करें स्टोरेज फ्री

अपने स्मार्टफोन में जब आप कुछ इंस्टौल करने की कोशिश कर रहे होते हैं और उस समय आपको पता चले कि फोन की इंटरनल मैमोरी फुल हो गई है. उस वक्त आपको समझ नहीं आता कि आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं. आप मैमोरी खाली करने की सोचते हैं, लेकिन कुछ ऐसी ऐप होती हैं जिन्हें रखना आपके लिए बहुत जरूरी होता है और इंटरनल मैमोरी खाली नहीं कर पाते हैं. आइए जानते हैं कैसे आप अपने फोन में स्पेस बना सकते हैं.

कैशे को करें क्लियर

स्पेस बनाने के लिए आपको कैशे क्लियर करना होगा. कैशे क्लियर करना एक सुरक्षित और आसान तरीका है, जिसकी मदद से आप फोन में जगह बना सकते हैं. इसके लिए आपको सेटिंग्स में जाकर ऐप और फिर ऐप में जाकर उसमें दिए क्लियर कैशे पर क्लिक करना होगा. इससे आपके फोन में काफी स्पेस खाली हो जाएगा.

गूगल ड्राइव का इस्तेमाल करें

गूगल ड्राइव आपको अनलिमिटेड फोटो सेव करने में मदद करता है. जिसका मतलब यह है कि आप अपने एंड्रौयड फोन से लिए गए सब फोटो को गूगल ड्राइव में सेव कर सकते है. आप जब भी इन फोटो का बैकअप ले लेते है, तब आप अपने फोन से फोटो को डिलीट कर स्पेस फ्री कर सकते है.

औनलाइन म्यूजिक सुने

किसी भी स्मार्टफोन यूजर के मोबाइल में सबसे ज्यादा कोई चीज स्पेस लेती है, तो वो है म्यूजिक और वीडियो. इस समस्या से निपटने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप अपने स्मार्टफोन में म्यूजिक और वीडियो डाउनलोड करने के बजाय उन्हें औनलाइन सुन या देख सकते हैं. वहीं, आज कल सावन, गाना और हंगामा जैसे कई ऐप्लिकेशन हैं जो आपके लिए औफलाइन म्यूजिक स्टोर करती हैं और यह म्यूजिक फोन की मैमोरी में स्टोर नहीं होते और इससे मैमोरी खाली रहती है.

ऐप्लिकेशन अनइंस्टौल करें

आपके फोन में कई ऐसे ऐप्लिकेशन होते हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन फोन में पड़े होते हैं. ऐसे में आप उन एप्लिकेशन को अनइंस्टौल कर सकते हैं. यदि अनइंस्टौल नहीं हो रहा है तो आप उसे डिसेबल भी कर सकते हैं.

माइक्रोएसडी कार्ड का इस्तेमाल करें

सबसे आखिरी और अच्छा तरीका माइक्रोएसडी कार्ड का इस्तेमाल करना है. स्मार्टफोन यूजर्स मैमोरी की समस्या से निपटने के लिए एक माइक्रोएसडी कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आपके फोन में माइक्रोएसडी कार्ड लगाने के लिए स्लौट दिया गया है, तो आप बड़ी ही आसानी से ऐप्स को इसमें मूव कर सकते हैं. ऐप्स को मूव करने के लिए आपको सेटिंग्स में जाना होगा, फिर ऐप सेक्शन में ऐप को सिलेक्ट करना है. इसके बाद आपको अगर ऐप मूव का औप्शन मिल रहा है, तो इस पर क्लिक करें.

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