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‘अखरोट शकरकंद की टिक्की’ का स्वाद हमेशा रहेगा याद

सामग्री

– 2 बड़े शकरकंद उबाल कर कद्दूकस किए

– 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर

– 1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 2-3 हरीमिर्चें बारीक कटीं

– 1/2 छोटा चम्मच नीबू का रस

– 2 बड़े चम्मच अखरोट गिरी रोस्टेड व क्रश्ड

– 1/2 छोटा चम्मच चाटमसाला

– नमक स्वादानुसार

– तलने के लिए तेल.

विधि

– शकरकंद, हरीमिर्च, लालमिर्च, अमचूर पाउडर, नीबू का रस और नमक एकसाथ मिला कर टिकियों का मिश्रण तैयार करें.

– स्टफिंग तैयार करने के लिए अखरोट में चाटसमाला व थोड़ी सी बारीक कटी हरीमिर्च मिलाएं.

– हथेलियों पर तेल लगा कर टिकियों का मिश्रण फ्लैट कर उन में स्टफिंग भर टिकियां तैयार करें.

– पैन में तेल गरम कर टिकियों को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक भूनें और मनपसंद चटनी के साथ सर्व करें.

  • व्यंजन सहयोग : महाराज जोधाराम चौधरी
    कारपोरेट शैफ, खानदानी राजधानी

मिर्ची चाट : स्वाद ऐसा जो आप कभी नहीं भूल पाएंगे

सामग्री

– 6 मोटी मिर्चें बीज निकाल कर चीरा लगी

– 1 कप आलू उबले

– 1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला

– 1 कप बेसन

– 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– 1/4 छोटा चम्मच अजवाइन

– 1/2 छोटा चम्मच चाटमसाला

– तलने के लिए तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– स्टफिंग तैयार करने के लिए पैन में थोड़ा सा तेल गरम कर गरममसाला, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, लालमिर्च पाउडर भूनें.

– अब नमक व उबले आलुओं को मैश कर इस में मिलाएं और तैयार स्टफिंग को एक तरफ रख दें.

– स्टफिंग ठंडी हो जाए तो इसे मिर्चों में भर दें. डिप तैयार करने के लिए एक बाउल में बेसन, नमक, हलदी पाउडर व पानी मिला कर फेंटें.

– स्टफ्ड मिर्चों को डिप में लपेट कर गरम तेल में तलें और टुकड़ों में काट कर चाटमसाला बुरकें व सर्व करें.

  • व्यंजन सहयोग : महाराज जोधाराम चौधरी
    कारपोरेट शैफ, खानदानी राजधानी

ऐसे लगाएं नकली आइलैश

अगर आपको किसी शादी पार्टी के लिए तैयार होना है तो आप मेकअप के बाद अपनी आंखो को आकर्षक बनाने व नया लुक देने के लिए नकली यानी की फेक आइलैश लगा सकती हैं. नकली आइलैश से आंखों की खूबसूरती और भी ज्‍यादा निखर जाती है. लेकिन यह फेक आइलैश लगाई कैसे जाए? आइये जानते हैं कुछ टिप्‍स.

नकली लाइलैश लगाने के टिप्‍स

ट्रिम

अगर आइलैश आपकी आंखों से ज्‍यादा लंबी है तो उसे अपनी आंखों के साइज के अनुसार काट लीजिये. लेकिन ध्‍यान रहें कि आइलैश का आखिरी हिस्‍सा कुछ बाहर की ओर निकला हुआ होना चाहिये. इससे आइलैश भरी हुई और कर्ली दिखती हैं.

ग्‍लू लगाइये

आइलैश के आखिरी छोर पर ग्‍लू लगाइये. लेकिन यह इतना आसान नहीं हैं, इसलिये ग्‍लू को अपनी उंगली में लगाइये और उसी पर पलको को थोड़ी देर के लिये दबा दीजिये जिससे उस पर ग्‍लू लग जाए.

चिमटी

अब धीरे से अपनी नकली पलको को चिमटी की सहायता से पकड़े और आंखों के करीब लाएं. जब आइलैश सही जगह पर आ जाए तब उसे तुरंत ही उंगली से चिपका दें. चिपकाते वक्‍त ज्‍यादा प्रेशर ना डालें वरना वह चिपकने की बजाए बाहर निकल आएगी. अब अपनी उंगलियों को धीरे से हटा लीजिये.

मसकारा लगाइये

जब पलके सूख जाएं तब मसकारा लगाएं. मस्‍कारा पलको को और भी ज्‍यादा घना लुक देंगी और लंबा भी दिखाएंगी. जब मसकारा लगा लें तब पलको को दुबारा प्रेस करें, जिससे वह निकले नहीं. मसकारा नकली पलको को असली वाली पलको से जुड़ने में मदद भी करता है.

आइलाइनर

जब आप नकली पलको को लगाएंगी तो आंखों के नीचे थोड़ी सी खाली जगह बच जाएगी. इस जगह को आप आइलाइनर लगा कर पूरा भर सकती हैं.

लव या लस्ट : कैसे पहचानें कि ये प्यार है या सिर्फ…

रिलेशनशिप में हम अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्दों का उपयोग अधिक करते हैं. लेकिन शब्दों पर क्या पूरी तरह से भरोसा किया जा सकता है. हालांकि हमारा शरीर झूठ नहीं बोलता. जब हम किसी के सामने होते हैं तो हम कुछ बॉडी लैंगवेज का इस्तेमाल करते हैं.

बॉडी लैंगवेज किसी भी इंसान के वास्तविक इरादों को दर्शाती है. बहुत बार शब्दों से आकर्षित होकर आप समझ बैठते हैं कि जिस रिश्ते में आप है उसकी नींव प्यार है लेकिन कुछ समय बाद आपको पता चलता है कि उसमें प्यार नहीं केवल शारीरिक आकर्षण है. हालांकि आप अपने रिश्ते को परख कर फर्क जान सकती हैं कि ये प्यार हैं या केवल शारीरिक आकर्षण.

क्या आपका पार्टनर केवल शारीरिक सम्बंधो को महत्व देता है

एक स्वस्थ रिश्ते में शारीरिक सम्बंधो का होना जरुरी है. अगर आप में से कोई एक केवल और केवल सेक्स के बारे में ही सोचता है और शारीरिक सम्बंधो को ही महत्व देता हो तो आपको वास्तव में सोचने की ज़रूरत है कि क्या ये प्यार है. प्यार का अर्थ होता है विश्वास, प्रतिबद्धता और संचार लेकिन यदि आपका साथी हर वक्त ये सोचता हैं कि ‘हम अभी क्यों सेक्स नहीं कर रहे हैं?’ तो आपको एक कदम पीछे ले लेना चाहिए और उस रिश्ते को आगे बढ़ाने से पहले एक बार फिर सोचें. किसी भी रिश्ते में कमिटमेंट तभी करें जब यह केवल प्रेम के आधार पर बना हो.

अगर आपके रिश्ते में प्यार फीका पड़ने लगे

हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि जब आप किसी प्रेम सम्बंध में हैं तो उससे प्यार कभी फीका नहीं होता और अगर ये सिर्फ शारीरिक आकर्षण है तो आप एक-दूसरे से बहुत जल्दी ऊब जाते हैं. अगर आपके रिश्ते में फिजिकल इंटिमेसी की बजाय इमोशनल इंटिमेसी ज्यादा है तो आपके रिश्ते का आधार वास्तव में प्यार है. लेकिन अगर कुछ समय बाद आपके रिश्ते में प्यार फीका हो जाएं तो समझ लें कि ये रिश्ता केवल शारीरिक आकर्षण के लिए बनाया गया था.

बाहरी सुंदरता

कभी-कभी आप किसी इंसान को उसकी बाहरी सुंदरता के लिए पसंद करते हैं. अगर आपके लिए किसी इंसान की केवल बाहरी सुंदरता मायने रखती हैं तो ध्यान रखें कि आप उस इंसान से प्यार नहीं करते हैं. कुछ समय बाद आपको एहसास होगा कि आपने कभी उस इंसान स प्यार किया ही नहीं था. बल्कि आपका प्यार उसकी बाहरी और शारीरिक सुंदरता के लिए था.

आप रिश्ते के वास्तविक पहलुओं पर ध्यान देते हैं

किसी भी व्यक्ति के लिए रिश्ता निभाना आसान नहीं होता. हर एक रिश्ते में बुरा वक्त आता ही है. लेकिन आप इससे कैसे सुलझाते हैं वह आपके रिश्ते को और मजबूत बनाता है. जब आप सच्चे रिश्ते में होते हैं और एक-दूसरे से प्यार करते हैं तो आप रिश्ते के वास्तविक पहलुओं के बारे में सोचते हैं. साथ ही यह सोचते हैं कि आपके रिश्ते को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है. लेकिन जब आप केवल शारीरिक आकर्षण के लिए इस रिश्ते में होते हैं तो रिश्ते के बारे में नहीं बल्कि अपने स्वार्थ के बारे में सोचते हैं. अगर आपको लगता है कि आपका साथी ऐसा सोचता है तो उस रिश्ते में अपने समय और प्रयास ना निवेश करें.

जनता ऐसे ही जवाब देती है

नवंबर दिसंबर के 5 विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हालत पतली होगी इस का अंदाजा महीनों पहले होने लगा था जब नोटबंदी, पैट्रोल के बढ़ते दामों, जीएसटी के शिकंजों, गौभक्तों के हिंसक कारनामों, औरतों की बढ़ती असुरक्षा और भाजपा की हठधर्मी दिखने लगी थी. सरकार और पार्टी को शासन प्रशासन की नहीं केवल मूर्तियों उद्घाटनों, आरतियों, बाबाओं की कृपा मांगने, अखबारों में बड़े विज्ञापन देने की लगी रहती थी.

जनता को परेशानियां हो रही थीं पर उस की बात घुट रही थी क्योंकि मोदी और शाह की पार्टी ने ऐसा माहौल बना दिया था कि तकलीफों को नजरअंदाज कर के गुणगान की आवाज ही सुनाई दे रही थी. पहले गुजरात और फिर कर्नाटक के चुनावों ने साफ कर दिया था कि केवल हिंदू हिंदू करने से वोट नहीं मिलने वाले पर मोदी शाह और नागपुर को इस के अलावा न कुछ सूझता है न आता है.

फिर भी लग यही रहा था कि पार्टी को कम सीटों पर हर राज्य में सफलता मिल जाएगी और इसलिए भाजपा दंभ और विश्वास में भरी थी और मोदी ने बजाए विकास और आर्थिक मामलों की चर्चा करने अपनी रैलियों का इस्तेमाल जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी की खिंचाई में किया.

दूसरी तरफ राहुल ने कांग्रेस ने 1905 से क्या किया की चर्चा न के बराबर की और लोगों की तकलीफों की चर्चा ज्यादा की. उन्होंने राफेल विमान के सौदे में हुए घोटाले की बात की जिस की किसी ने सफाई नहीं दी. चौकीदार को खुले शब्दों में उन्होंने चोर कहा पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आजादी से पहले क्या किया या बाद में भारत में हिंदू मुसलिम बैर कैसे बढ़ाया की बात की ही नहीं.

जाहिर है कि कांग्रेस जनता के ज्यादा करीब रही. कांग्रेस 3 राज्यों में जीत गई. 2 राज्यों में वह नहीं जीती पर भाजपा जो पूरे जोरशोर से लड़ी थी तीसरे नंबर पर, कांग्रेस के बाद रही.

कांग्रेस में कोई लाल लगे हों ऐसा नहीं है पर कांग्रेस विभाजित नहीं करती. कांग्रेस का शासन हमेशा भ्रष्टाचारियों से भरा रहा है, छोटे बड़े घोटाले हुए हैं पर काफी ऐसे काम भी हुए हैं जो अब दिख रहे हैं. भाजपा ने पिछले साढ़े 4 साल में या तो पिछले कामों को पूरा होने पर उद्घाटन किया या नामों के शिलान्यास किए. सरदार पटेल की मूर्ति के अलावा कोई काम है ही नहीं. जिस का गुणगान करा जा सके और यह मूर्ति भी भारतीयों ने नहीं चीनियों ने बनाई.

अब 2019 के लोकसभा चुनावों का प्रचार शुरू हो गया है. कांग्रेस को लाभ है कि अभी जीते तीनों राज्यों में वह कुछ करे या न करे जनता को तो भई दिखेगा. नरेंद्र मोदी का सारा समय अब पार्टी की सीटें और साख बचाने में लगेगा. वह अब ज्यादा जोड़तोड़ भी न कर सकेंगे क्योंकि अब एनडीए छोड़ने का समय आ गया है, उस से जुड़ कर जोखिम लेने का नहीं चाहे मई 2019 में एनडीए फिर जीत जाए.

इन परिणामों से भगवा गैंगों से छुटकारा मिलेगा यह तो पक्का है. अब ये गैंग उत्तर प्रदेश में ही कुछ कर पाएंगे पर योगी आदित्यनाथ जो प्रमुख प्रचारक रहे अब मुंह छिपाते फिरेंगे और कोई जोखिम न लेंगे. उम्मीद तो करिए ऐसी. वैसे पौराणिक इतिहास ऐसी कहानियों से भरा है जिन में हिंदू राज्य और उन के पुरोहित सहायक उन से एक के बाद एक गलत काम कराते रहे हैं.

सावधान : अब किसान सुनाता है फरमान

‘किसान फैक्टर’ जिस तरह से 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपनी छाप छोड़ने में सफल हुआ है, उससे अब राजनीतिक दलों को सर्तक हो जाना चाहिये. जाति और धर्म के नाम पर जिस तरह से किसानों को अब तक धोखा दिया जाता था, अब किसान उससे बाहर आ गये हैं. बहुत सारे प्रयासों के बाद भी किसान भाजपा के धार्मिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बने. मोदी से लेकर योगी तक हर नेता ने उनको राम से लेकर हनुमान के नाम तक भरमाने की पूरी कोशिश की. किसानों की एकजुटता अब सरकारों को उनके हित में काम करने के लिये मजबूर करेगी.

किसान को यह समझ आ चुका था कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान की भाजपा सरकारों को बचाने के लिये उनको बरगलाया जा रहा है. केन्द्र सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी लागू नहीं की और किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, खर्च दोगुना हो गया. ऐसे में किसानों की बात करने वाली कांग्रेस को सत्ता सौंप दी. उसी कांग्रेस को तेलंगाना में सत्ता से दूर रखा और वहां पर नये दल को सत्ता दे दी. किसानों ने भाजपा को सबक देते हुये कांग्रेस को भी चेतावनी दी है कि अगर किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं हुआ तो यही हाल तय है.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में एक सबसे खास बात देखने को आई कि चुनाव परिणाम के बाद किसानों की भूमिका पर बातें हुई. सभी राजनीतिक जानकारों ने इस बात को माना कि किसानों ने इन चुनाव परिणामों को बेहद प्रभावित किया. किसानों ने जिस पार्टी को वोट दिया वह ही सत्ता में आई. विधानसभा चुनावों में किसानों का प्रभाव सबसे अधिक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में देखने को आया.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के किसानों ने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर किया और कांग्रेस पर भरोसा दिखाया. तेलंगाना में कांग्रेस से अधिक किसानों से टीआरएस यानि तेलंगाना राष्ट्र समिति पर भरोसा किया. टीआरएस क्षेत्रीय दल है किसानों के सबसे करीब है. ऐसे में किसानों ने सबसे अधिक भरोसा उस पर किया.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के पहले पंजाब के विधानसभा चुनावों में भी किसानों ने एकजुटता का प्रदर्शन कर भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को जितवाया था. किसान अपने मुद्दों पर तमाम बार वोट देकर सत्ता में उठापटक करता रहा है. राजनीतिक दल इससे सबक नहीं लेते और जीत हार का विश्लेषण करते समय किसानों को केन्द्र बिंदु में नहीं रखते हैं. वोट लेने के समय किसानों की बात होती है और सरकार बनाने के बाद किसानों को भूल जाते हैं. अब किसान अपने को भूलने वाले दलों को दरकिनार करने में देरी नहीं लगा रहा है.

2014 के आम चुनाव में भाजपा ने किसानों के लिये स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया. सरकार बनाने के बाद इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में वोट लेने के लिये किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया, पर उसको सही से पूरा नहीं किया. सभी किसानों का लोन माफ नहीं हुआ. मंहगाई का बढ़ता प्रभाव किसानों पर भी पड़ता है.

नोटबंदी और बैंकों की लालफीताशाही कम होने का नाम नहीं ले रही. किसानों को बैकों के ज्यादा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. बैकों की तमाम सेवाओं के लिये उनको पैसे देने पड़ रहे हैं. पहले केवल लोन लेने वाले किसान ही बैंक जाते थे, अब हर किसान को जाना पड़ता है. ऐसे में बैंको की सेवाओं के पैसे उनको परेशान करने लगे हैं. सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही. किसानों के तमाम आंदोलनों पर केन्द्र सरकार ने चुप्पी साध ली. जिसके बाद किसानों ने भाजपा की तीनों सरकारों को सत्ता से बाहर कर दिया. किसान अब जागरुक है. वादा नहीं निभाया गया तो वह वोट नहीं देगा.

खुशखबरी : बदलने वाली है आपकी जिंदगी

वैज्ञानिक रिसर्च का एक और धमाका…5जी यानी हाई स्पीड इंटरनेट. 5जी को मोबाइल इंटरनेट की 5वीं पीढ़ी कहा जा सकता है. कुछ सालों के बाद मोबाइल इंडस्ट्री बेहतरीन इंटरनेट स्पीड के लिए खुद को अपग्रेड करती रहती है.  5G नेटवर्क 1 सेकंड में 20 गीगाबाइट्स तक की स्पीड पकड़ सकेगा.  3जी और 4जी से इस में डेटा डाउनलोड और ट्रांसफर किया जा सकेगा. इस में एकसाथ कई डिवाइसेस को इंटरनेट से जोड़ा जा सकेगा.

दुनिया के कई देशों में अगले साल यानी 2019 से 5जी की सर्विस शुरू हो जाएगी.  भारत भी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने के लिए 5जी यानी फिफ्थ जेनरेशन टेक्नोलौजी लाने की तैयारी में लगा हुआ है.

5जी न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड को कई गुना बढ़ा देगा बल्कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी एक क्रांति ले आएगा.  5जी के दौर में लाखों डिवाइसेस एकदूसरे के संपर्क में रहेंगे.  5जी से लैस आप का डिवाइस घर में मौजूद हर डिवाइस यानी फ्रिज से ले कर आप के सिक्यॉरिटी सिस्टम तक से कनेक्टेड रहेगा. भारत में 5जी नेटवर्क वर्ष 2020 तक आएगा.

भारत 5जी तकनीक के मामले में तेजी से आगे बढ़ना तो चाहता है लेकिन इस तकनीक की जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है. फिलहाल,  दुनिया के कई देशों में 5जी तकनीक पर 150 प्रायोगिक परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन अभी भारत में इन में से कोई भी योजना शुरू नहीं हुई है.

5जी तकनीक पर गठित केंद्र सरकार की संचालन समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिस में 5जी तकनीक के प्रसार को बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए गए. समिति के अनुसार, देश में 5जी को सफल बनाने के लिए स्पेक्ट्रम की कीमतें कम की जाएं और वायु तरंगों की आवृति को बढ़ाया जाए. सरकार का अनुमान है कि देश में 5जी तकनीक को व्यावसायिक तौर पर 2020 में शुरू कर दिया जाएगा,  जबकि अमेरिका ने 5जी को लौन्च करने का समय वर्ष 2019 तय किया है.

देश में 5जी तकनीक के भविष्य पर बात करते हुए सेवाप्रदाताओं को लगता है कि उचित दरों पर स्पेक्ट्रम नीलामी होने से 2020 की समयसीमा को तय किया जा सकता है, हालांकि, उस परिस्थिति में भी यह देश के सभी सर्किल में पूरी तरह से लौन्च नहीं हो सकेगा.

गौरतलब है कि भले ही एयरटेल ने 2012 में ही कोलकाता में 4जी सेवा शुरू की थी लेकिन इसे पूरे देश में आने में 5-6 वर्ष लग गए.  सैद्धांतिक रूप से किसी मैट्रो शहर में परीक्षण कराया जाना चाहिए, लेकिन फिलहाल सभी स्पेक्ट्रम पूरी तरह से 4जी सेवा के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं और मामूली बैंडविड्थ 5जी परीक्षण के लिए काफी नहीं है.

उद्योग संगठन सेलुलर औपरेटर्स एसोसिएशन औफ इंडिया यानी सीओएआई के अनुसार, वित्तीय परेशानियों से घिरी दूरसंचार कंपनियों के लिए 5जी स्पेक्ट्रम की कीमत बहुत अधिक होगी. सीओएआई महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने कहा कि 3300-3600 मेगाहर्ट्ज़ के प्रस्तावित स्पेक्ट्रम बैंड में 5जी सेवाओं के लिए आरक्षित मूल्य 4.92 अरब रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज़ रखा गया है.

स्पेक्ट्रम के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना दूरसंचार कंपनियों के लिए काफी कठिन होगा. पहले से ही उन की बैलेंसशीट में काफी कर्ज शामिल है और बैंक शायद उन्हें और ज्यादा रुपया न दें. मैथ्यूज कहते हैं कि शायद भारतीय बैंक दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को स्पेक्ट्रम बोली के लिए रुपया देने से मना कर दें, इसलिए उन्हें विदेशी बैंक और वित्तीय संस्थानों से रुपया लेना होगा.

समिति की अध्यक्षता स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक ए जे पौलराज ने की थी. समिति का मानना है कि भारत में 5जी तकनीक अपनाने में कई बाधाएं हैं.  समिति ने रिपोर्ट में बताया, ‘अगर हम इस तकनीक को जल्दी अपनाते हैं तो यह काफी खर्चीली होगी और कई खामियां आएंगी.  वहीं, इसे जल्द अपनाने से देश को 5जी तकनीक से होने वाले लाभ मिलेंगे और भारत की जरूरतों के हिसाब से नए उपयोग की कई संभावनाएं विकसित होंगी.

5जी लाएगा क्रांति

स्मार्ट सिटीज : 5जी के ज़रिए स्वचालित कारें भी एकदूसरे से बेहतर संवाद कर पाएंगी और ट्रैफिक व मैप्स से जुड़ा डेटा लाइव साझा कर पाएंगी. मान लीजिए कि शहरों में अगर सेंसर लगे हैं तो फिर वे पैदल चलने वालों और वाहनों के मूवमेंट पर नज़र रख सकते हैं और औटोमैटिकली ट्रैफिक लाइट्स का संचालन कर शहर को जाम लगने की स्थिति से बचा सकते हैं.

स्मार्ट होम्स : 5जी सर्विस से लैस स्मार्टहोम्स सिक्यौरिटी सिस्टम,  बिजली और पानी की खपत को मैनेज कर पाएंगे. एक स्मार्टहोम घर के हर काम कर पाएगा और बिजली की फुजूलखर्ची भी रोकेगा. और तो और, यह आप की हेल्थ का भी ख्याल रखेगा. इमर्जेंसी होने पर इस के जरिए डौक्टर को भी बुलाया जा सकेगा.

आटोमेटिक कारें : 5जी की मदद से आटोमेटिक कारों के एआई (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) कम्पोनेंट में सुधार किया जा सकेगा. आटोमेटिक कारों में जल्दबाजी के चक्कर में उन का मार्गदर्शन नहीं हो पाता, जिस की वजह से उन्हें चलाने के लिए मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ जाती है, लेकिन 5जी के आने के बाद आटोमेटिक कारों का स्वरूप और दिशा बदल जाएगी.

हेल्थ मौनिटरिंग  :  5जी के आने के बाद स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों से सेंसर लगातार जुड़े रहेंगे जो आप के स्वास्थ्य के बारे में पलपल की जानकारी देते रहेंगे. कुल मिला कर स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं और भी बेहतर हो जाएंगी. उदाहरण के लिए, अगर आप एक डौक्टर हैं तो दूर बैठे ही मरीज की जांच कर सकते हैं. बाहर किसी देश से आप भारत के किसी अस्पताल में पड़े मरीज का इलाज या औपरेशन भी कर पाएंगे.

5जी एक तरह से टेक्नोलौजी के लिए आप के दरवाजे खोल देगा, जिस के बाद आप की लाइफ में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे. बता दें कि देश में 5जी तकनीक आने के बाद भी 2जी, 3जी, 4जी तकनीक का उपयोग लगातार जारी रहेगा और इन्हें पूरी तरह से समाप्त होने में 10 वर्ष या अधिक समय लग सकता है.

अभिनेत्री अदिति गुप्ता ने की उद्योगपति कबीर से शादी

12 दिसंबर का दिन मनोरंजन जगत के कई सितारों के लिए शादी का दिन रहा. इस दिन जहां कपिल शर्मा ने चंडीगढ़ में अपनी मंगेतर गिनी के साथ और टीवी अभिनेत्री पारूल चौहान ने मुंबई में अपने प्रेमी चिराग ठक्कर के संग विवाह रचाया, वहीं छोटे परदे की मशहूर अभिनेत्री अदिति गुप्ता ने भी 12 दिसंबर को ही उद्योगपति कबीर चोपड़ा के संग मुंबई के एक होटल में विवाह रचा लिया.

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इस अवसर पर अदिति गुप्ता ने लहंगा और शीर दुपट्टा पहन रखा था, जबकि कबीर चोपड़ा ने शेरवानी पहन रखी थी. शादी का यह समारोह पूरी तरह से पारिवारिक सदस्यों व खास दोस्तों के लिए ही था. मगर इससे एक दिन पहले ग्यारह दिसंबर को अदिति गुप्ता व कबीर चोपड़ा ने अपने दोस्तों के लिए मुंबई में कौकटेल पार्टी का आयोजन किया था. जिसमें दृष्टि धामी, अर्जुन बिजलानी, क्रिस्टल डिसूजा, पूजा गोर, राज सिंह अरोरा, कृतिका कामरा, अनीता हसंदानी, रोहित रेड्डी, करण पटेल, अंकिता भार्गव, एकता कपूर सहित कई हस्तियां शामिल हुई थीं.

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‘इश्कबाज’ सहित कई सीरियलों में अभिनय कर चुकी अभिनेत्री अदिति गुप्ता इन दिनों रवींद्र गौतम के सीरियल ‘‘काल भैरव  रहस्य 2’’ में अभिनय करते हुए नजर आ रही हैं. जबकि उद्योगपति कबीर चोपड़ा मशहूर निर्माता साकेत साहनी की पत्नी रिति के भाई हैं.

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वैसे तो अदिति गुप्ता ने दो माह पहले अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर अपने प्रेमी कबीर चोपड़ा के संग अपनी मंगनी की खबर को जग जाहिर किया था. और अब दो माह के बाद उन्होने विवाह भी कर लिया.

दीपिका पादुकोण के बाद अब ये दीपिका भी करने वाली हैं शादी

लगता है कि सारे खूबसूरत सेलेब्रिटी शादी कर के घर बसाने को उतावले हो रहे हैं. बौलीवुड के हीरोहीरोइन बड़े परदे पर प्यार करतेकरते असली जिंदगी में एकदूसरे के साथी बन रहे हैं. अभी हाल ही में रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण एक हो गए हैं. प्रियंका चोपड़ा विदेशी निक जोनस की जीवनसाथी बन गई हैं तो एक साल पहले अनुष्का शर्मा ने विराट कोहली को क्लीन बोल्ड कर दिया था.

ऐसे में दूसरे खेलों के सुपरस्टार क्यों पीछे रहें. कुछ समय पहले बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने अपनी शादी का ऐलान कर के सब को चौंका दिया था. वे 16 दिसंबर को अपने दोस्त और बैडमिंटन खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप से शादी करने वाली हैं. वे दोनों पिछले 10 सालों से एकदूसरे के साथ हैं पर मजाल है किसी को भनक भी लगने दी.

अब दीपिका की होगी शादी

ज्यादा चौंकिए मत क्योंकि यहां पर दीपिका पादुकोण की दूसरी शादी की बात नहीं हो रही है पर जिस दीपिका की हो रही है वह भी कम हुनरमंद नहीं है. हम बात कर रहे हैं सांवले रंग की तीखे नयननक्श वाली भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी की जिन्होंने रांची में एक समारोह में सगाई कर ली है.

अपने तीरों से सटीक निशाना भेदने वाली दीपिका कुमारी को जिन्होंने अपने नयनों के तीरों से घायल किया है वे भी खुद तीरंदाज अतनु दास हैं. ये दोनों अगले साल विवाह के बंधन में बंधेंगे.

रातूचट्टी में 24 साल की दीपिका की 26 साल के अतनु दास के साथ सगाई हुई. इस मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन मुंडा और उन की पत्नी मीरा मुंडा भी उपस्थित थे.

सगाई समारोह के बाद दीपिका और अतनु दास ने मीडिया से कहा कि 2019 उन का बिजी साल होगा जिस में ओलिंपिक क्वॉलिफिकेशन भी शामिल हैं. रियो ओलिंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे दीपिका और अतनु दास ने कहा कि उन्होंने अगले साल नवंबर के आसपास शादी करने का फैसला किया है.

दीपिका कुमारी दुनिया की नंबर एक तीरंदाज रह चुकी हैं और उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मैडल जीता हुआ है.  इस के अलावा वे ओलिंपिक में भी हिस्सा ले चुकी हैं और वर्ल्ड कप में 3 गोल्ड मैडल और 3 सिल्वर मैडल जीत चुकी हैं, लेकिन ओलिंपिक में वे अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही हैं. वे एशियन गेम्स में भी ब्रॉन्ज़ मैडल जीत चुकी हैं.

दुनिया के 17वें नंबर के खिलाड़ी अतनु दास भारतीय पुरुष रिकर्व टीम के सदस्य हैं लेकिन वे बड़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं. पर इन दोनों का लंबा कैरियर है और उम्मीद की जाती है कि ये अपने चाहने वालों को निराश नहीं करेंगे.

बेटी बरी, सुपारी किलर को उम्रकैद

उस दिन अमृतसर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश कर्मजीत सिंह की अदालात में सुबह से ही बहुत गहमागहमी थी. वकील और मीडियाकर्मियों के अलावा तमाम लोग भी वहां मौजूद थे. सभी के दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था कि पता नहीं अदालत आज विक्की और उस के प्रेमी गणेश को क्या सजा सुनाएगी. इन दोनों पर आरोप यह था कि विक्की ने अपने प्रेमी गणेश से अपनी मां राजिंदर कौर की हत्या कराई थी. दोनों पर यह केस करीब 3 साल से चल रहा था. पूरा मामला क्या था, जानने के लिए हमें 3 साल पीछे जाना पड़ेगा.

21 जनवरी, 2015 की बात है. नरेश नाम के एक व्यक्ति ने अमृतसर के थाना मकबूलपुरा में फोन द्वारा सूचना दी थी कि दीदार गैस एजेंसी की मालकिन 67 वर्षीय राजिंदर कौर की किसी से उन की गोल्डन एवेन्यू स्थित कोठी नंबर 5 में हत्या कर दी है.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अमरीक सिंह, एसआई कुलदीप सिंह, एएसआई बलजिंदर सिंह, सुरजीत सिंह, हवलदार प्रेम सिंह, मुख्तियार सिंह और लेडी हवलदार गुरविंदर कौर को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

पता चला कि घटना वाली रात राजिंदर कौर अपनी कोठी में अकेली थीं. उन का बेटा तजिंदर सिंह 2 दिन पहले ही डलहौजी गया था और बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की किसी रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी.

राजिंदर कौर की हत्या बहुत ही सुनियोजित तरीके से की गई थी. हत्या के वक्त वे शायद कोठी की दूसरी मंजिल पर थीं, क्योंकि उन का खून दूसरी मंजिल से बह कर घर की पहली मंजिल पर वहां तक आ गया था, जहां खून से लथपथ उन की लाश पड़ी थी. घटनास्थल को देख कर यह साफ लग रहा था कि हत्यारों को इस बात की पूरी जानकारी रही होगी कि राजिंदर कौर घर में अकेली हैं.

इतना ही नहीं वो इस घर के चप्पेचप्पे से वाकिफ रहे होंगे. क्योंकि हत्यारे गेट के पास लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ कर बड़ी सावधानी से घर में घुसे थे और अपना काम कर के चुपचाप वहां से निकल गए थे.

मौका ए वारदात पर बिखरा हुआ सामान इस बात की गवाही दे रहा था कि मरने से पहले मृतका की हत्यारों से काफी हाथापाई हुई होगी. प्राथमिक तफ्तीश में पता चला कि राजिंदर कौर की नौकरानी सुबह के लगभग 11 बजे घर में काम करने के लिए आई थी.

उस ने देखा कि घर की मालकिन राजिंदर कौर की लाश जमीन पर खून से लथपथ पड़ी थी. उस ने घबरा कर गैस एजेंसी फोन कर के यह बात नरेश को बताई और नरेश ने आ कर पुलिस के अलावा इस घटना की सूचना राजिंदर कौर की बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की को भी दी जो किसी रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी.

मां की मौत की खबर मिलते ही विक्की भी उसी दिन पंजाब लौट आई. नरेश ने पुलिस को बताया कि गैस एजेंसी का 2 दिन का कैश कोठी में ही था. छुट्टी होने के कारण कैश बैंक में जमा नहीं करवाया गया था. पुलिस को यह मामला लूट और हत्या का लग रहा था.

घटना की सूचना मिलने पर डीसीपी विक्रमपाल भट्टी, डीसीपी (क्राइम) जगजीत सिंह वालिया, एडीसीपी परमपाल सिंह, एसीपी बालकिशन सिंगला, एसीपी गौरव गर्ग, फोरैंसिक टीम सहित घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और खून के सैंपल लिए.

हत्यारे कोठी से कितना कैश और जेवर ले गए थे इस बात का कोई पता नहीं लग सका. बहरहाल पुलिस ने 21 जनवरी, 2015 इंदरराज कौर उर्फ विक्की के बयान पर राजिंदर कौर की हत्या का मुकदमा अज्ञात हत्यारों के खिलाफ दर्ज कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दी.

अमृतसर के न्यू गोल्डन एवेन्यू की कोठी नंबर-5 में मेजर दीदार सिंह औजला का परिवार रहता था. उन के परिवार में पत्नी राजिंदर कौर के अलावा बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की और बेटा तजिंदर सिंह उर्फ लाली थे.

सन 1981 में मेजर साहब की मौत के बाद सरकार ने अनुकंपा के आधार पर फौजियों की विधवाओं को पेट्रौल पंप और गैस एजेंसियां वितरित की थीं. तभी राजिंदर कौर को भी एक गैस एजेंसी आवंटित हुई थी.

राजिंदर कौर ने गैस एजेंसी का गोदाम और शोरूम सुल्तानभिंड रोड के अजीत नगर में खोला था. गैस एजेंसी को वह स्वयं ही संभालती थीं. कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बेटी विक्की भी एजेंसी पर जाने लगी थी. लाली अभी पढ़ रहा था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार राजिंदर कौर की हत्या दम घुटने से हुई थी. हालांकि उन के सिर पर चोटों के गहरे घाव थे पर उन की मौत गला घोंटे जाने के कारण ही हुई थी.

2 दिन तक पुलिस को इस केस का कोई सिरा हाथ नहीं आया था. पुलिस इस बात को मान कर चल रही थी कि हत्यारा राजिंदर कौर के परिवार का परिचित रहा होगा. लेकिन 2 दिन बाद पुलिस ने अपनी जांच की दिशा बदल दी.

पुलिस ने राजिंदर कौर, उन के बेटे तजिंदर उर्फ लाली, इंदरराज कौर उर्फ विक्की के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो विक्की की काल डिटेल से पुलिस को कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं. विक्की की काल डिटेल्स में एक ऐसा नंबर आया जिस पर विक्की की दिनरात कईकई घंटे बातें होती थीं. वह नंबर किसी गणेश नाम के व्यक्ति का था.

इस बार पुलिस के हाथ कुछ ऐसा क्लू लगा था, जिस के सहारे वह अपनी जांच को आगे बढ़ा सकती थी. इस के पहले पुलिस अंधेरी गलियों में ही भटक रही थी. पुलिस ने राजिंदर कौर के पड़ोसियों और गैस एजेंसी पर काम करने वालों से भी पूछताछ की थी.

इस पूछताछ में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे थे, यह बात तय थी कि जो कुछ भी हुआ था. वह कोठी के अंदर से ही हुआ था. बाहर के किसी व्यक्ति का इस हत्याकांड से कोई लेनादेना नहीं था. हत्यारे एक रहे हों या 2 इस से अभी कोई फर्क नहीं पड़ना था.

समझने वाली बात यह थी कि आखिर राजिंदर कौर की ही हत्या क्यों की गई थी. उन की हत्या से किसे फायदा पहुंचने वाला था. आखिर घटना के चौथे दिन 2 ऐसे गवाह खुद पुलिस के सामने आए, जिन्होंने इस केस का रुख पलट कर हत्यारों का चेहरा पुलिस के सामने रख दिया था.

28 जनवरी, 2015 को पुलिस ने राजिंदर कौर की हत्या के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. उन में से एक खुद मृतका की बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की थी और दूसरा उस का प्रेमी गणेश था, जो स्थानीय भुल्लर अस्पताल में कंपाउंडर था.

गणेश गुंदली चौगान, नूरपुर, हिमाचल प्रदेश का निवासी था और पिछले कई सालों से उस के विक्की के साथ नाजायज संबंध थे. गणेश विक्की के बीमार भाई तजिंदर की देखभाल के लिए उस के घर आता था और इसी बीच विक्की के साथ उस के अवैध संबंध बन गए थे.

बेटी ने ही सुपारी दे कर अपनी मां की हत्या करवाई थी यह बात सुन कर सभी रिश्तेदारों के होश उड़ गए. विक्की को उस के मांबाप ने बड़े लाड़प्यार से पाला था. अपनी मां की मौत का दिल दहलाने वाला मंजर देख कर उस ने घडि़याली आंसू भी बहाए थे.

इतना ही नहीं पुलिस को भी इस असमंजस में डाले रखा था कि उसे अपनी मां की मौत का बहुत दुख है. जबकि हकीकत यह थी कि विक्की शुरू से ही पुलिस को झूठ बोल कर गुमराह करती रही थी. जब असलियत का खुलासा हुआ तो पुलिस के साथ उस के सगे संबंधियों के भी होश उड़ गए.

अकसर देखा गया है कि जायदाद की खातिर इंसान अपने सभी रिश्ते भुला कर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे देता है, मगर विक्की ने तो दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं. उस ने अपने प्रेमी को 5 लाख की सुपारी दे कर जन्म देने वाली मां को ही मरवा डाला था.

पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान पुलिस ने गणेश की निशानदेही पर लोहे की रौड, खून सने कपड़े आदि बरामद कर लिए. बाद में दोनों को जेल भेज दिया गया.

पुलिस को राजिंदर कौर की हत्या की जो कहानी पता चली और जिस के आधार पर उस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की, उस में बताया गया था कि इस हत्याकांड की मूल वजह वो जायदाद थी जो मृतका राजिंदर कौर ने विक्की के नाम न कर के अपने बेटे तजिंदर उर्फ लाली के नाम कर दी थी.

दरअसल लाड़प्यार से पली विक्की बचपन से ही अपनी मनमरजी करने वाली जिद्दी और अडि़यल स्वभाव की लड़की थी. उम्र के साथ उस का यह पागलपन और भी बढ़ता गया था.

पिता की मृत्यु के समय वह मात्र 4-5 साल की रही होगी. पिता की मृत्यु के बाद मां राजिंदर कौर का सारा वक्त गैस एजेंसी संभालने में गुजरता था. ऐसे में विक्की बेलगाम होती चली गई. यहां यह कहना भी गलत न होगा कि बच्चों को सुविधाओं के साथ मातापिता के दिशानिर्देशों की भी सख्त जरूरत होती है. अन्यथा परिणाम भयानक ही निकलते हैं. इस मामले में भी यही हुआ था. कालेज तक पहुंचतेपहुंचते वह दिशाहीन, भटकी हुई युवती बन चुकी थी.

शराब के नशे और क्लबों में खुशी तलाशना उस की आदत बन चुकी थी. दूसरे सहपाठियों को नीचा दिखाना उस का मनपसंद शौक था. मां के द्वारा मेहनत से कमाया पैसा वह पानी की तरह बहाने लगी थी. उस के दोस्तों में लड़कियां कम लड़के अधिक थे. कपड़ों की तरह बौयफ्रैंड बदलना उस का स्वभाव बन गया था.

मां की किसी बात का जवाब न देना, आधीआधी रात को घर लौटना विक्की की आदतों में शुमार हो गया था. पढ़ाई पूरी कर उस ने मां के साथ गैस एजेंसी पर बैठना शुरू कर दिया, वह भी अपने स्वार्थ की खातिर.

गैस एजेंसी से पैसे उड़ा कर वह अपनी अय्याशियों में उड़ा देती थी. उस की इन हरकतों से राजिंदर कौर बहुत दुखी थीं. वह मन ही मन घुटती रहती थीं.

वे यह सोच कर मन पर पत्थर रख लेती थीं कि शादी के बाद जब वह अपनी ससुराल चली जाएगी. तभी वह चैन की सांस ले पाएंगी. पर यह उन की भूल थी. 37 साल की हो जाने के बाद भी विक्की शादी करने को तैयार नहीं थी. ऐसे में आपसी रिश्तों में जहर घुल गया था.

राजिंदर कौर विक्की को समझा- समझा कर हार चुकी थीं. लेकिन विक्की की नादानियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही थीं. इसी बीच उस के गणेश से संबंध बन गए थे. राजिंदर कौर को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने हंगामा करते हुए विक्की को बहुत कुछ समझाया पर विक्की ने इस सब की जरा भी परवाह नहीं की. वह घर में ही गणेश के साथ अय्याशी करती रही.

घटना से कुछ दिन पहले विक्की और राजिंदर कौर के बीच पैसों को ले कर जबरदस्त झगड़ा हुआ था. विक्की को सुधरता न देख राजिंदर कौर ने उस का गैस एजेंसी पर आना बंद करवा दिया. साथ ही उस के जेब खर्च पर भी पाबंदी लगा दी थी. यह सब देख विक्की तिलमिला उठी थी.

उस ने मां से इस विषय में बात की तो उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने आप को नहीं सुधारती और घर में एक शरीफ घर की बच्ची की तरह पेश नहीं आती तब तक उस का उन से कोई संबंध नहीं रहेगा.

राजिंदर कौर ने यह कदम उठाया था विक्की को सुधारने के लिए, मगर इस का उलटा ही परिणाम निकला. विक्की यारदोस्तों और अपनी जानपहचान वालों से पैसे उधार ले कर अपने शौक पूरे करने लगी. इस बात का राजिंदर कौर को और ज्यादा दुख पहुंचा. बेटी के कर्ज को ले कर उन की बड़ी बदनामी भी हो रही थी.

अंत में राजिंदर कौर ने एक और सख्त कदम उठाया जो आगे चल कर उन की जान का दुश्मन बन गया. राजिंदर कौर ने अपनी सारी चलअचल संपत्ति, बिजनैस आदि अपने बेटे तजिंदर सिंह के नाम कर दिया. विक्की के नाम उन्होंने एक पैसा भी नहीं छोड़ा था.

इस बात का पता लगने पर विक्की आगबबूला हो उठी. उसे यह उम्मीद नहीं थी कि उस की मां ऐसा भी कुछ कर सकती है. घटना से कुछ दिन पहले इसी बात को ले कर मांबेटी में जम कर झगड़ा भी हुआ था. राजिंदर कौर अब किसी भी कीमत पर विक्की को आजादी नहीं देना चाहती थीं.

गणेश और विक्की के बीच लगभग ढाई सालों से अवैध संबंध थे. गणेश पूरी तरह से विक्की के चंगुल में फंस कर उस का गुलाम बना हुआ था. दोनों को ही पैसों की सख्त जरूरत थी.

विक्की इतनी शातिर दिमाग थी कि जहां वह खुद अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए गणेश का इस्तेमाल कर रही थी, वहीं उस का खुराफाती दिमाग गणेश के हाथों अपनी ही मां की हत्या करवाने की साजिश रचने में लगा था.

जब से विक्की को पता चला था कि मां ने करोड़ों की जायदाद छोटे भाई तजिंदर सिंह के नाम कर दी है, उसी दिन से विक्की ने राजिंदर कौर की हत्या करने का मन बना लिया था. अपनी मां के खिलाफ उस के मन में जहर भर गया था. योजना बनाने के बाद उस ने अपने प्रेमी गणेश शर्मा को 5 लाख रुपए की सुपारी दे कर मां का कत्ल कराने के लिए तैयार कर लिया.

अपनी योजना के तहत विक्की ने सब से पहले अपने भाई तजिंदर को 3 दिन पहले घूमनेफिरने के लिए मनाली डलहौजी भेज दिया. इस के बाद 21 जनवरी को वह खुद भी दिल्ली जाने का बहाना कर के घर से निकल गई. इस से गणेश का रास्ता साफ हो गया था. तसल्ली करने के लिए हत्या से एक दिन पहले विक्की ने भाई को फोन कर के पूछा कि वह घर वापस कब लौट रहा है. तजिंदर ने बताया था कि वह अभी कुछ दिन और मनाली में रहेगा.

गणेश के लिए राजिंदर कौर की हत्या करने के लिए रास्ता साफ था. 20-21 जनवरी की आधी रात को वह सीसीटीवी कैमरों को तोड़ कर कोठी में दाखिल हुआ और उस ने कमरे में सो रही राजिंदर कौर के सिर पर पहले लोहे की रौड से वार कर के उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया.

उस के बाद गणेश ने बिजली की तार से उन का गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया. चुपचाप अपना काम खत्म कर के वह वहां से कुछ दूरी पर स्थित अपने कमरे पर लौट गया और फोन कर के विक्की को काम हो जाने की खबर दे दी.

राजिंदर कौर की हत्या के समय विक्की ने पुलिस को गुमराह करने के लिए यह बयान दिया था कि उस का भाई मनाली गया हुआ था और वह किसी काम से दिल्ली गई थी. जबकि वह अमृतसर के ही एक होटल में ठहरी हुई थी. हत्या के 2 दिन बाद गणेश शर्मा गायब हो गया था.

विक्की और गणेश की काल डिटेल्स देखने के बाद और गणेश के गायब हो जाने के बाद हत्या की सीधी सुई इन दोनों पर चली गई थी. इस बीच वहां के पूर्व पार्षद तरसेम भोला ने मामले को नया मोड़ दे दिया था.

हत्या के इस मामले की तहकीकात के बीच पुलिस को पूर्व पार्षद तरसेम सिंह भोला ने 27 जनवरी, 2015 को यह जानकारी दी थी कि इंदरराज कौर उर्फ विक्की उस के पास आई थी और उस ने बताया था कि उस की मम्मी ने अपनी सारी जायदाद की वसीयत उस के भाई तेजिंदर सिंह लाली के नाम कर दी है. उस की मम्मी द्वारा उसे कोई भी जायदाद न दिए जाने के कारण वह बहुत ही गुस्से में थी.

इसलिए उस ने भुल्लर अस्पताल में काम करने वाले गणेश कुमार को 5 लाख रुपए का लालच दे कर अपनी मम्मी राजिंदर कौर की हत्या करवा दी है. उस से बहुत बड़ी गलती हो गई है. किसी न किसी तरह वह उस का बचाव करवा दें.

इसी तरह मकबूलपुरा निवासी एक स्वतंत्र गवाह कश्मीर सिंह ने भी उसी दिन पुलिस को जानकारी दी थी कि भुल्लर अस्पताल में काम करने वाले गणेश कुमार ने उसे बताया था कि वह अपनी प्रेमिका इंदरराज उर्फ विक्की के कहने पर उस की मां राजिंदर कौर की हत्या कर बैठा है.

इस मामले में पुलिस उसे कभी भी गिरफ्तार कर सकती है. इसलिए वह किसी भी तरह उस का बचाव करवा दे. इन दोनों गवाहों के सामने आने पर हत्या व डकैती माने जा रहे इस मामले में एकदम नया मोड़ आ गया था.

इस केस में पुलिस ने जितने भी गवाह बनाए थे उन में से अहम गवाह पूर्व पार्षद तरसेम सिंह भोला और एक अन्य व्यक्ति था. पुलिस ने इस केस की तफ्तीश में अपनी तरफ से कोई कोरकसर नहीं छोड़ी थी और पुख्ता सबूतों के आधार पर चार्जशीट बना कर अदालत में पेश की थी.

लेकिन गवाहियों के दौरान इस केस में काफी उठापटक हुई थी. जिस कारण कई गवाह अपनी बात से मुकर गए थे. फिर भी पुलिस के पास गणेश शर्मा के खिलाफ पक्के सबूत थे, जिसे लाख कोशिशों के बाद भी अदालत में झुठलाया नहीं जा सकता था.

गवाहों के बयान और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश कर्मजीत सिंह की अदालत ने 25 मई, 2018 को मृतका की जिस बेटी इंदरराज कौर उर्फ विक्की पर सुपारी दे कर अपनी मां की हत्या करवाने के आरोप लगाए गए थे, अदालत ने उसे साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ दे कर बरी कर दिया था.

लेकिन हत्यारोपी गणेश शर्मा पर लगाए गए आरोप सही पाए जाने पर अदालत ने उसे भादंवि की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा के साथसाथ 10 हजार रुपए जुरमाने की भी सजा सुनाई.

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