‘किसान फैक्टर’ जिस तरह से 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपनी छाप छोड़ने में सफल हुआ है, उससे अब राजनीतिक दलों को सर्तक हो जाना चाहिये. जाति और धर्म के नाम पर जिस तरह से किसानों को अब तक धोखा दिया जाता था, अब किसान उससे बाहर आ गये हैं. बहुत सारे प्रयासों के बाद भी किसान भाजपा के धार्मिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बने. मोदी से लेकर योगी तक हर नेता ने उनको राम से लेकर हनुमान के नाम तक भरमाने की पूरी कोशिश की. किसानों की एकजुटता अब सरकारों को उनके हित में काम करने के लिये मजबूर करेगी.

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