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ऐसे लगाएं आंखों पर लिक्विड आई लाइनर

पेंसिल आई लाइनर की तुलना में लिक्‍विड आई लाइनर देखने में ज्‍यादा खूबसूरत लगता है. यह फैलता नहीं और ज्यादा समय तक टिका रहता है. आंखों पर अगर सही ढंग से आई लाइनर लगाया जाए तो आम चेहरा भी खास बन जाता है, वहीं कोई गलती हो जाए तो सारा रूप ही बिगड़ जाता है. इस लिहाज से आई मेकअप काफी अहम होता है. अगर आप भी लिक्‍विड आई लाइनर लगाने जा रही हैं तो यह खास टिप्स अपनाइए.

स्‍मोकी आंखों के लिये

स्‍मोकी आंखों के लिये पलक के सेंटर से लाइनर लगाना शुरु करें लेकिन इस सेंटर से आंखों के अंदररूनी कोने तक पलती लाइन खींचे. अब सेंटर से थोड़ी मोटी लाइन बाहरी कोने तक खींचे और गैप अच्‍छी तरह से भर लें. इसके बाद बाहरी कोने से आई लाइनर ब्रश से पतली लाइन नीचे वाले पलक के सेंटर तक भी लगाएं.

बिल्‍लौरी आंखों के लिये

ऊपरी पलक के बीच में लाइनर लगाना शुरु करें और लाइनर को घुमाते हुए कनपटी की तरफ लेकर जाएं. अब पलक की लाइन और लाइनर से खींची लाइन के बीच का गैप भर लें. सत्‍तर के दशक की अदाकाराएं इसी तरह से आई लाइनर लगाती थीं.

क्‍लासिक आंखों के लिये

क्‍लासिक आंखों के लिये ऊपर वाली पलक के सेंटर से लाइनर लगाना शुरु करें और ब्रश को धीरे-धीरे आंख के कौर्नर तक ले जाएं. सेंटर से पतली लाइन लगाएं और कोने पर चौड़ा कर लें. पलक की लाइन और आई लाइनर से बनाई लाइन को अच्‍छी तरह भर लें.

बड़ी आसान है आम पापड़ बनाने की रेसिपी

अमावट बनाने की सामग्री :

– आम (1 किलो पके हुए)

– शक्‍कर ( 1/4 कप)

– काली मिर्च (इच्‍छानुसार)

– छोटी इलाइची (2 से 3)

– काला नमक (1/2 छोटा चम्मच)

– घी (1/2 छोटा चम्मच)

आम पापड़ बनाने की विधि :

– सबसे पहले आम को धो कर छील लें और गूदे को काट कर एक बाउल में निकाल लें.

– साथ ही काली मिर्च और इलायची को अलग-अलग बारीक पीस लें.

– इसके बाद आम के टुकड़े और शक्‍कर को मिक्‍सर में डालें और बारीक पीस लें.

– एक फ्राई पैन आम का घोल डाल कर गैस पर रखें और मीडियम आंच पर पकायें.

– साथ ही काली मिर्च का पाउडर, छोटी इलायची का पाउडर और काला नमक भी मिला दें.

– आम के रस में उबाल आने पर उसे चम्‍मच से चलाएं.

– लगभग 10 मिनट तक या गूदा गाढ़ा होने तक पकाएं.

– फिर एक समतल प्‍लेट में घी लगाकर उसे चिकना कर लें.

– इसके बाद आम का घोल प्‍लेट में डालें और उसे चम्‍मच की मदद से बराबर फैल दें.

– अब प्लेट को धूप में सुखने के लिए रख दें.

– धूप तेज होने पर आम पापड़ आमतौर से एक दिन में सूख जाता है.

– अगर पापड़ एक दिन में न सूखे, तो धूप जाने के बाद आम की प्‍लेट को ढक कर किचन  में रख दें

– अगले दिन फिर से धूप में रख दें.

– सूखे हुए आम के पापड को प्‍लेट से निकाल लें और चाकू से उसे मनचाहे शेप में काट लें.

अब आपकी स्‍वादिष्‍ट अमावट  तैयार है. चाहें तो इसे तुरंत इस्‍तेमाल करें या फिर कांच के सूखे जार में रखकर एक महीने तक इस्‍तेमाल कर सकती हैं.

लेमन राइस बनाने की विधि

सामग्री :

चावल 1/2 कप (उबले हुए)

मूंगफली दाने  (1/2 कप)

नारियल 2 छोटे चम्मच (कद्दूकस किया हुआ)

नींबू का रस (03 छोटे चम्मच)

तेल  (02 छोटे चम्मच)

मेथी दाना (01 छोटा चम्मच)

धुली उड़द दाल (01 बड़ा चम्मच)

करी पत्ता

खड़ी लाल मिर्च

हल्दी पाउडर (1/2 चम्मच)

हींग  (चुटकी भर)

नमक ( स्वादानुसार)

लेमन राइस बनाने की विधि :

– सबसे पहले कड़ाही में तेल गर्म करें.

– तेल गर्म होने पर उसमें सरसों, हींग, मेथी और उड़द की दाल डालें और इन्हें सुनहरा होने तक भूनें.

– सारी चीजें भुनने के बाद कढ़ाई में करी पत्ता, लाल मिर्च, हल्दी पाउडर और मूंगफली के दानें डालें और चलाते हुए भूनें.

– इसके बाद कढ़ाई में चावल और नमक कड़ाही में डाल दें और चलाते हुए धीमी आंच में   5 मिनट तक पकाएं.

– इसके बाद नींबू का रस डालें और कद्दूकस किया हुआ नारियल ऊपर से छिड़क कर गैस बंद कर दें.

– लीजिये  अब आपका टेस्टी लेमन राइस तैयार है.

– इसे गर्मा-गरम निकालें और सब्जी अथवा छोले के साथ सर्व करें.

गर्दन और सिर दर्द से हैं परेशान तो बदलें अपनी ये आदत

दिनभर औफिस में कंप्यूटर के सामने बैठे रहने की वजह से सिर या गर्दन में दर्द होना अब आम बात हो गई है. इस परेशानी से बचने का एक ही रास्ता है कि आप अपने बैठने के तरीके को बदलें. आपको बता दें कि कंप्यूटर को बहुत करीब से सिर झुकाकर देखने से गर्दन पर दबाव पड़ता है, इससे थकान, सिर में दर्द, एकाग्रता में कमी, मांसपेशीय तनाव में वृद्धि व ज्यादा समय तक कार्य करने से मेरुदंड में घाव हो सकता है.

इसपर कई जानकारों और शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे सिर मोड़ने की क्षमता में कमी आ सकती है.

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक, आपके बैठने की स्थिति सीधी होती है, तो आपकी पीछे की मांसपेशियां आपके सिर व गर्दन के भार को सहारा देती हैं. जब आप सिर को 45 डिग्री के कोण पर आगे करते हैं तो आपकी गर्दन एक आधार की तरह कार्य करती है, यह एक लंबे लीवर के भारी वस्तु उठाने जैसा है. अब आपके सिर व गर्दन का वजन करीब 45 पाउंड के बराबर हो जाता है. इसलिए कंधे व पीठ में दर्द व गर्दन में अकड़न हो तो चकित होने की बात नहीं है.

क्रीमी पास्ता सलाद रेसिपी

 सामग्री :

–  पास्ता (100 ग्राम)

– मेयोनीज (200 ग्राम)

– क्रीम (100 ग्राम)

– टमाटर (2 टुकड़े)

– प्‍याज (2 टुकड़े)

– खीरा (2 टुकड़े)

– नमक  (1/2 छोटा चम्‍मच)

क्रीमी पास्ता सलाद बनाने की विधि :

– सबसे पहले एक भगोने में पानी उबालें.

– जब तक पानी उबल रहा है, प्‍याज और खीरा को छील लें.

– इसके बाद सभी चीजों को धो कर बारीक काट लें.

– जब भगोने का पानी उबलने लगे.

– इसमें पास्‍ता और नमक डालें और थोड़ा नर्म होने तक पका लें.

– पास्‍ता नर्म होने पर गैस बंद कर दें और पास्‍ता का पानी छान कर निकाल दें.

– इसके बाद पास्‍ता को ठंडा हो जाने दें.

– ठंडा होने पर पास्‍ता को एक प्याले में डालें.

– प्‍याले में कटी हुई सब्जियां, मेयोनीज़ और क्रीम डालें और अच्‍छी तरह से मिक्‍स कर       लें.

– इसके बाद बाउल को एक घंटे के लिए फ्रिज में रख दें.

–  अब आपका स्‍वादिष्‍ट पास्‍ता सलाद तैयार है. इसे फ्रिज से निकालें और सर्व करें.

कच्‍चे केले के चिप्‍स

सामग्री:

– कच्चे केले (6 से 7)

– नमक (1 छोटा चम्मच)

– हल्‍दी पाउडर (1/2 छोटा चम्‍मच)

– रिफाइंड तेल  (तलने के लिये)

केले के चिप्स बनाने की विधि :

– सबसे पहले एक बर्तन में पानी लें और उसमें नमक डाल कर घोल लें.

– अब केले धो कर उनका छिलका उतार दें, अब चिप्‍स कटर लें और छिले हुये केलों को   सीधे पानी के बर्तन में काट लीजिए.

– कटे हुए केले को पानी में 5 मिनट के लिए छोड़ दें.

– 5 मिनट बाद कतरे हुए केले को पानी से निकाल लें.

– इसे एक सूती कपड़े पर फैला कर पंखे के नीचे रख दें, जिससे कतरे हुए केले अच्छी     तरह से सूख जाएं.

–  फिर सूखे कतरे हुए केले को गर्म तेल में डालें और उलट-पलट कर अच्‍छी तरह से तल  लें.

– गरम तेल से चिप्स को  नैपकिन पेपर पर निकाल कर रख  लें, इससे चिप्‍स का   अतिरिक्‍त तेल निकल जाएगा.

–  अब इनपर चाट मसाला पाउडर डाले और चाय के साथ आनंद लें.

धर्म की बंदिशों से उकताई सऊदी युवती देश छोड़ने पर हुई मजबूर

सऊदी अरब की 18 वर्षीय राहफ मोहम्मद अल कुनन नामक युवती ने अपने कट्टर धार्मिक परिवार की बंदिशों के चलते न केवल घरपरिवार छोड़ दिया, देश भी छोड़ कर चली गई. जब वह थाईलैंड, बैंकाक हवाई अड्डे पर पहुंची तो उसे रोक लिया गया.

रहाफ का कहना है कि वह धर्म की बंदिशों से तंग थी. वह नास्तिक है और उस का परिवार कट्टर धार्मिक है. उस का परिवार कितना कट्टर है, इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज बाल छोटे रखने पर उसे 6 महीने तक कमरे में बंद कर दिया गया था.

रहाफ का कहना है कि उस ने इस्लाम छोड़ दिया है और अगर उसे वापस कुवैत भेजा गया तो उसे निश्चित तौर पर जेल में डाल दिया जाएगा और जेल से निकलते ही उस का परिवार उस की हत्या कर देगा.

रहाफ सऊदी के एक अमीर परिवार की बेटी है. वह पहले कुवैत आई, वहां से औस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुई थी. उसे बैंकाक के लिए फ्लाइट पकड़नी थी पर यहां उसे सऊदी और कुवैती अधिकारियों ने रोक लिया और उस के कागजात जब्त कर लिए गए. थाई अधिकारियों का कहना है कि रहाफ शादी से बचने के लिए कुवैत से भागी थी.

असल में रहाफ के परिवार वालों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह बिना किसी पुरुष अभिभावक के सफर कर रही है. बैंकाक के अधिकारियों का कहना था कि रहाफ के पास वापसी का टिकट नहीं था इसलिए उसे रोका गया. उसे हवाई अड्डे के पास एक होटल में रखा गया.

होटल से रहाफ ने रात 10 बजे ट्विटर पर संदेश में गुहार लगाई थी कि मैं हवाई अड्डे के ट्रांजिट एरिया में मौजूद सभी लोगों से अपील करती हूं कि वे मुझे कुवैत वापस भेजने के खिलाफ प्रदर्शन करें. मुझे आप की मदद चाहिए. मैं इंसानियत से चीखचीख कर मदद की गुहार लगा रही हूं.

मामला ज्योंही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, दुनियाभर के लोग रहाफ के समर्थन में खड़े दिखाई देने लगे. कई देशों के दूतावासों ने भी इस घटना को संज्ञान लेते हुए मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया. मानवाधिकार संगठनों ने थाई सरकार से अपील शुरू कर दी है कि वह रहाफ को वापस सऊदी न भेजें.

दरअसल सऊदी अरब ही नहीं, विश्व के हर देश में औरतें धर्म की शिकंजे में बुरी तरह जकड़ी हुई हैं. इस के चलते औरतें सब से पहले परिवार में धर्म के नाम पर थोपी गईं ज्यादतियों का शिकार हो रही हैं. औरतों की आजादी पर धर्म की परंपराओं ने पहरा लगा रखा है.

अब ज्योंज्यों औरतों में शिक्षा का प्रचारप्रसार हो रहा है, वे धर्म की थोपी अमानवीय बेड़ियों को तोड़ने की कोशिशों में जुटी है. कहीं वह घर छोड़ कर बगावती हो रही हैं तो कहीं खुलेआम धर्म की धज्जियां उड़ा रही हैं. आखिर अपनी मर्जी की शिक्षा, प्रेम, सेक्स, रहनसहन, पहनावा जैसी हर चीजों में औरतें धर्म के थोपे गए नियमकायदों का कब तक अपनी स्वतंत्रता की बलि दे कर पालन करती रहें. जबरन थोपी गई बंदिशों के खिलाफ ऐसी बगावतें वक्त बेवक्त सामने आती रहेंगी. जब तक कि कोई असरदार कानून न बन जाये.

ये क्या बोल गए पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी

भारत कुछ भी अच्छा कर ले, शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने उस काम की वाहवाही की हो. क्रिकेट के मैदान पर तो हमारा हमेशा से छत्तीस का आंकड़ा रहा है.

पर अब कुछ ऐसा हो गया है जिस की पाकिस्तान से कभी उम्मीद नहीं की गई थी. हाल ही में जब टीम इंडिया ने औस्ट्रेलिया को उसी की सरजमीं पर 4 टैस्ट मैचों की सीरीज में 2-1 से धूल चटा कर नया इतिहास रचा तो उस के बाद पाकिस्तान के कई पुराने दिग्गज खिलाड़ियों इस जीत की जम कर तारीफ की.

सब से पहले स्विंग गेंदबाजी के बादशाह रहे पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम की बात करते हैं. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, ”टीम की इस परफौरमेंस के लिए विराट कोहली की खूब तारीफ होनी चाहिए. मुझे लगता है कि इस परफौरमेंस के बाद टीम इंडिया का घरेलू क्रिकेट का ढांचा और मजबूत होगा.”

पाकिस्तान के फिलहाल प्रधानमंत्री और कभी के दिग्गज आलराउंडर क्रिकेटर रहे इमरान खान ने भी इसी सिलसिले में अपने एक ट्वीट में लिखा, ‘विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट टीम को औस्ट्रेलिया में टैस्ट सीरीज जीतने वाली भारतीय उपमहाद्वीप की पहली टीम बनने पर बधाई.’

इसी तरह कप्तान रह चुके मोइन खान ने भारत की इस जीत पर लिखा, ‘किसी भी एशियाई टीम के लिए औस्ट्रेलिया को उस के घर में जा कर हराना कभी भी आसान नहीं था. भारत इस जीत का हकदार था.’

‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर पाकिस्तान के तेज गेंदबाज रह चुके शोएब अख्तर ने लिखा, ‘टीम इंडिया को डाउन अंडर में ऐतिहासिक टैस्ट सीरीज की जीत पर बधाई. क्रिकेट की दुनिया में औस्ट्रेलिया में टैस्ट सीरीज सब से मुश्किल दौरे में शुमार है. यह एक शानदार कोशिश है और भारत ने औस्ट्रेलिया पर पूरी सीरीज में दबाव बनाए रखा.’

इतना ही नहीं, पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज रह चुके मोहसिन खान ने भी भारत की इस जीत की तारीफ में कहा, ‘भारत को यह जीत उस के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के प्रदर्शन से मिली है. मैं पुजारा, कोहली और पंत समेत दूसरे बल्लेबाजों की पारियों से प्रभावित हूं, जिन्होंने टीम इंडिया के गेंदबाजों को बिना किसी दबाव के गेंदबाजी करने के लिए भरपूर स्कोर दिया. वे सचमुच जीत के हकदार थे.’

पाकिस्तान की तरफ से ऐसी हौसला अफजाई टीम इंडिया के लिए अच्छी ही मानी जाएगी. वैसे, मजा तो तब आएगा जब भारत और पाकिस्तान के आपस में क्रिकेट मैच होंगे, वह भी इन दोनों देशों के क्रिकेट मैदानों पर.

उरी – द सर्जिकल स्ट्राइक : विक्की कौशल का जानदार अभिनय

2016 में कश्मीर के उरी क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले के बाद 29 सितंबर 2016 में पाक स्थित आतंकवादियों व उनके अड्डों को सर्जिकल स्ट्राइक करके नष्ट करने वाले भारतीय सेना के वीर जांबाज सैनिकों को फिल्म ‘‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’’ एक बेहतरीन ट्रिब्यूट है. दर्शकों को उनकी सीट से बांधे रखकर उनके अंदर उत्साह और देशभक्ति का जज्बा भी जगाती है. राजनीतिक स्तर पर भी यह एक बेहतरीन फिल्म है, जिसे कट्टर बौलीवुड फिल्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.

2016 के उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा सितंबर 2016 में पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइक के सत्य घटनाक्रम पर आधारित फिल्म ‘‘उरीः द सर्जिकल स्ट्राइक’’ की कहानी पांच अध्यायों में विभाजित कर सुनाई गयी है. पर कहानी के केंद्र में मेजर विहान शेरगिल (विक्की कौशल)हैं.

प्रथम अध्याय जून 2015 में मेजर विहान के नेतृत्व में मणिपुर क्षेत्र के आतंकवादी अड्डों को खत्म करने की कहानी है, जिसके बाद प्रधानमंत्री (रजित कपूर) व एनएसए प्रमुख गोविंद (परेश रावल) इन वीर जवानों के सम्मान में रात्रि भोज देते हैं और वहां पर अपनी मां (स्वरुप संपत) की अल्माइजर की बीमारी के चलते सेना से अवकाश लेने की बात मेजर विहान शेरगिल करते हैं, तो प्रधानमंत्री सलाह देते है कि वह दिल्ली में ही सेना मुख्ययालय में आ जाएं. इस तरह वह सेना में बने रहते हुए अपनी मां के साथ रह सकेंगे और उनकी मां की देखभाल के लिए सरकार की तरफ से एक नर्स दी जाती है.

बाद में पता चलता है कि यह नर्स वास्तव में सेना की ही अफसर पल्लवी शर्मा (यामी गौतम) है, जिसे विहान के परिवार की सुरक्षा के मद्देनजर नर्स बनाकर रखा गया था. कहानी आगे बढ़ती है और एक आतंकवादी हमले में मेजर विहान शेरगिल के बहनोई कैप्टन करण कष्यप (मोहित रैना) शहीद हो जाते हैंं. इसके बाद उरी पर सेना के उपर आतंकवादी हमला होता है और 19 भारतीय सैनिक शहीद हो जाते हैं. तब प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री व एनएसए प्रमुख मिलकर सर्जिकल स्ट्राइक करने का निर्णय लेते हैं. इस काम को अंजाम देने का नेतृत्व विहान शेरगिल को मिलता है. मेजर विहान शेरगिल, मणिपुर व आसाम की बटालियन के बीस सदस्यों के अलावा कैप्टन सरताज के साथ मिलकर चार दल बनाते हैं. वह अपने वायुसेना के विमान का पायलट, वायुसेना की ही ऐसी पायलट सीरत कौर (कीर्ति कुल्हारी) को चुनते हैं, जिस पर जांच चल रही है. पर उसे सही अर्थ में अपनी वीरता दिखाने का अवसर नही मिल पाया. अंत में सर्जिकल स्ट्राइक सफलतापूर्वक अंजाम दी जाती है.

‘हाल ए दिल’ (2008), ‘बूंद’ (2009), ‘डैडी कूल ज्वाइन द फन’ (2009), ‘‘आक्रोष’’ (2010) फिल्मों के पटकथा लेखक और ‘तेज’ (2012) फिल्म के संवाद लेखक आदित्य धर की बतौर लेखक व निर्देशक ‘‘उरी :द सर्जिकल स्ट्राइक’’ पहली फिल्म है, मगर फिल्म देखने के बाद इस बात का अहसास नहीं होता कि यह किसी नवोदित निर्देशक की फिल्म है. बल्कि बतौर निर्देशक आदित्य धर ने ‘‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’’ से कई दिग्गज निर्देशकों को भी पीछे छोड़ दिया है. तमाम निर्देशकों को इस फिल्म को देखकर काफी कुछ सीखना चाहिए. बतौर लेखक आदित्य धर ने फिल्म की पटकथा पर थोड़ी और मेहनत की होती, तो यह फिल्म सदैव के लिए एक क्लासिक फिल्म के साथ साथ एक पथप्रदर्शक या अग्रणी सिनेमा के रूप में गिनी जाती. इंटरवल से पहले फिल्म में कुछ बेहतरीन भावनात्मक दृष्य भी हैं. पर इंटरवल के बाद फिल्म की पटकथा पर मेहनत करने की जरुरत महसूस होती है. वास्तविक घटनाक्रम और वास्तविक पात्रों पर आधारित फिल्म के अंतिम हिस्से में कुछ पात्रों को कैरीकेचर बना देना भी खलता है.

लेखक व निर्देशक इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रवाद की चाशनी में नहीं रंगा. और न ही बेतुके राष्ट्भक्ति के संवाद ही रखे हैं. आदित्य धर की इस बात के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने अपनी फिल्म में इस बात पर जोर नही दिया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक से भारत सरकार को क्या हासिल हुआ, बल्कि उन्होंने देश के वीर सैनिकों के कर्तव्य निर्वाह को प्रमुखता दी.

फिल्म के तमाम दृष्य काफी सुंदर बने हैं. युद्ध पर आधारित फिल्म में जिस तरह से प्राकृतिक सौंदर्य को कैमरे ने कैद किया है, उसके लिए फिल्म के कैमरामैन मितेश मीरचंदानी की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो मेजर विहान शेरगिल के किरदार में विक्की कौशल ने काफी शानदार अभिनय किया है. वह पूरी फिल्म को अपने कंधों पर लेकर आगे बढ़ते हैं. वह सैनिक की वर्दी और आम विहान के रूप में बेहतर ढंग से अभिनय कर गए हैं. विक्की कौशल सही मायनों में देशभक्त अधिकारी और सज्जन व्यक्ति के रूप उभरते हैं. वह बेवजह सीना ताने नजर नही आते. एनएसए प्रमुख गोविंद के किरदार में परेश रावल ने भी काफी अच्छा काम किया है, वह परदे पर हूबहू वर्तमान एनएसए प्रमुख अजीत डोभाल ही नजर आते हैं. वहीं 2016 के समय के रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर के किरदार में योगेश सोमन काफी जंचे हैं. कीर्ति कुल्हारी, यामी गौतम, मोहित रैना ने भी ठीक ठाक अभिनय किया है.
गीत संगीत ठीक ठाक है.

दो घंटे 13 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’’ का निर्माण रौनी स्क्रूवाला ने किया है. 2016 कि उरी हमले पर आधारित इस फिल्म के लेखक व निर्देशक आदित्य धर हैं. संगीतकार शाश्वत सचदेव, कैमरामैन मितेश मीरचंदानी तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – विक्की कौशल, परेश रावल, यामी गौतम, कीर्ति कुल्हारी, मोति रैना, इवान रौड्रिग्स, योगेश सुमन, मानसी पारेख, रजित कपूर व अन्य.

रेटिंग : साढ़े तीन स्टार

विद्या बालन के घर में लगी चप्पलों पर रोक

अगर फिल्मी कलाकारों की सेहत पर बात करें तो पिछले साल 2018 में बहुत से दिग्गज कलाकार बड़ी से बड़ी बीमारी से जूझते दिखे. सबसे पहले इरफान खान की कैंसर बीमारी ने सब को चौंकाया. उस के बाद सोनाली बेंद्रे और नफीसा अली को भी कैंसर होने की बात सामने आई. आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप के अलावा ऋषि कपूर को भी इस ही नामुराद बीमारी ने जकड़ लिया था. प्रियंका चोपड़ा ने खुद को दमा होने की बात स्वीकारी थी तो अनुष्का शर्मा ने स्लिप डिस्क की समस्या से दोचार होने की बात कही थी.

अभी 2019 में राकेश रोशन को भी कैंसर होने की जानकारी मिली है तो हीरोइन विद्या बालन को भी एक ऐसी बीमारी होने की बात सामने आई है जो बहुत कम लोगों को होती है.

बताया जा रहा है कि विद्या बालन एक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्या से जूझ रही हैं, जिसे ओसीडी यानी औब्सेसिव कंपल्सिव डिसऔर्डर कहते हैं.

इस बीमारी में दिमाग में सेरोटोनिन नाम के एक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी हो जाती है. इस वजह से पीड़ित इंसान को किसी एक काम को करने की सनक सी सवार हो जाती है. यह सनक इतनी ज्यादा होती है कि वह इंसान बारबार एक ही चीज करता है.

विशेषज्ञ डाक्टर बताते हैं कि इस बीमारी में ज्यादातर मरीजों को सफाई करने की धुन सवार हो जाती है. मतलब, इस बीमारी के मरीज अगर कोई गंदी चीज छू लें तो वे तब तक अपने हाथ धोते रहते हैं जब तक उन का दिमाग उन्हें ऐसा करने के लिए मना न कर दे.

विद्या बालन को भी अपने आसपास साफसफाई रखना बहुत पसंद है. अगर उन्हें अपने आसपास थोड़ी सी भी धूलमिट्टी दिख जाती है तो उन के दिमाग के कुछ ऐसे हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिसके चलते उन्हें एलर्जी हो जाती है. यही नहीं, विद्या बालन को यह भी पसंद नहीं है कि उन के घर में कोई चप्पल पहन कर घूमे.

ऐसी ही एक मरीज को मैं ने अपने बचपन में देखा था जो अपनी साफसफाई को ले कर बहुत क्रेजी रहती थीं. लोगों को लगता था कि चूंकि वे बहुत गोरी थीं इसलिए ऐसा करती थीं पर वे इस गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. इतनी ज्यादा कि अगर उन के कपड़ों पर हलकी सी भी गंदगी लग जाती थी वे तुरंत नहाती थीं और उन कपड़ों को धो देती थीं. वे जब तक ऐसा नहीं कर लेती थीं तब तक बेचैन रहती थीं. वे बाहर से आने वाले हर इंसान को शक कि निगाह से देखती थीं. अपने रिश्तेदारों की साफसफाई की भी पूरी जांचपड़ताल कर के उनको घर में घुसने देती थीं.

डाक्टर बताते हैं कि इस बीमारी से पीड़ित मरीज के दिमाग में अकसर अलगअलग तरह के विचार आते रहते हैं जो उन्हें परेशान करते हैं. इससे उन की जिंदगी जीने का ढर्रा भी बिगड़ जाता है और उन्हें कई और दूसरी दिक्कतें भी होने लगती हैं. ओसीडी के मरीजों को काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत महसूस होती है.

इस बीमारी के कुछ ऐसे लक्षण जो ऐसे मरीजों में दिखाई देते हैं:

– इस बीमारी से पीड़ित मरीज को अपनी साफसफाई करने जैसे बारबार हाथ आदि धोने की सनक सवार रहती है.

– उनमें से कुछ मरीजों को निश्चित संख्या, रंग और अरेंजमेंट को ले कर अंधविश्वास हो सकता है.

– कीटाणुओं और गंदगी आदि के संपर्क में आने या दूसरों से दूषित हो जाने का डर रहता है.

– डर से जुड़ी चीजों को महसूस करना जैसे घर में कोई बाहरी इंसान घुस आया है या फिर किसी और को नुकसान पहुंचाने का डर.

– ऐसे लोग धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देने लगते हैं.

– वे चीजों को बेवजह बारबार जांचते रहते हैं, जैसे ताले, दूसरे उपकरण और स्विच आदि को बारबार चैक करते रहना.

– पुराने अखबार, खाने के खाली डिब्बे, टूटी हुई चीजें आदि को संभाल कर रखना.

यह है इलाज

बाजार में ऐसी दवाएं मौजूद हैं जो दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाती हैं, लेकिन उन्हें डाक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए, क्योंकि ये दवाएं लंबे समय तक लेनी पड़ सकती हैं. इसके अलावा कभीकभी तनाव को दूर करने वाली दवाएं भी इन के साथ दी जाती हैं. साथ ही बिहेवियर थैरेपी की मदद भी ली जाती है जिसके अंतर्गत मरीज को शांत रहने वाले व्यायाम सिखाए जाते हैं ताकि वह नकारात्मक विचारों से घिरें तो उन कसरतों की मदद से अपने जूनून पर काबू पा सकें.

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