अगर फिल्मी कलाकारों की सेहत पर बात करें तो पिछले साल 2018 में बहुत से दिग्गज कलाकार बड़ी से बड़ी बीमारी से जूझते दिखे. सबसे पहले इरफान खान की कैंसर बीमारी ने सब को चौंकाया. उस के बाद सोनाली बेंद्रे और नफीसा अली को भी कैंसर होने की बात सामने आई. आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप के अलावा ऋषि कपूर को भी इस ही नामुराद बीमारी ने जकड़ लिया था. प्रियंका चोपड़ा ने खुद को दमा होने की बात स्वीकारी थी तो अनुष्का शर्मा ने स्लिप डिस्क की समस्या से दोचार होने की बात कही थी.

अभी 2019 में राकेश रोशन को भी कैंसर होने की जानकारी मिली है तो हीरोइन विद्या बालन को भी एक ऐसी बीमारी होने की बात सामने आई है जो बहुत कम लोगों को होती है.

बताया जा रहा है कि विद्या बालन एक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्या से जूझ रही हैं, जिसे ओसीडी यानी औब्सेसिव कंपल्सिव डिसऔर्डर कहते हैं.

इस बीमारी में दिमाग में सेरोटोनिन नाम के एक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी हो जाती है. इस वजह से पीड़ित इंसान को किसी एक काम को करने की सनक सी सवार हो जाती है. यह सनक इतनी ज्यादा होती है कि वह इंसान बारबार एक ही चीज करता है.

विशेषज्ञ डाक्टर बताते हैं कि इस बीमारी में ज्यादातर मरीजों को सफाई करने की धुन सवार हो जाती है. मतलब, इस बीमारी के मरीज अगर कोई गंदी चीज छू लें तो वे तब तक अपने हाथ धोते रहते हैं जब तक उन का दिमाग उन्हें ऐसा करने के लिए मना न कर दे.

विद्या बालन को भी अपने आसपास साफसफाई रखना बहुत पसंद है. अगर उन्हें अपने आसपास थोड़ी सी भी धूलमिट्टी दिख जाती है तो उन के दिमाग के कुछ ऐसे हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिसके चलते उन्हें एलर्जी हो जाती है. यही नहीं, विद्या बालन को यह भी पसंद नहीं है कि उन के घर में कोई चप्पल पहन कर घूमे.

ऐसी ही एक मरीज को मैं ने अपने बचपन में देखा था जो अपनी साफसफाई को ले कर बहुत क्रेजी रहती थीं. लोगों को लगता था कि चूंकि वे बहुत गोरी थीं इसलिए ऐसा करती थीं पर वे इस गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. इतनी ज्यादा कि अगर उन के कपड़ों पर हलकी सी भी गंदगी लग जाती थी वे तुरंत नहाती थीं और उन कपड़ों को धो देती थीं. वे जब तक ऐसा नहीं कर लेती थीं तब तक बेचैन रहती थीं. वे बाहर से आने वाले हर इंसान को शक कि निगाह से देखती थीं. अपने रिश्तेदारों की साफसफाई की भी पूरी जांचपड़ताल कर के उनको घर में घुसने देती थीं.

डाक्टर बताते हैं कि इस बीमारी से पीड़ित मरीज के दिमाग में अकसर अलगअलग तरह के विचार आते रहते हैं जो उन्हें परेशान करते हैं. इससे उन की जिंदगी जीने का ढर्रा भी बिगड़ जाता है और उन्हें कई और दूसरी दिक्कतें भी होने लगती हैं. ओसीडी के मरीजों को काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत महसूस होती है.

इस बीमारी के कुछ ऐसे लक्षण जो ऐसे मरीजों में दिखाई देते हैं:

– इस बीमारी से पीड़ित मरीज को अपनी साफसफाई करने जैसे बारबार हाथ आदि धोने की सनक सवार रहती है.

– उनमें से कुछ मरीजों को निश्चित संख्या, रंग और अरेंजमेंट को ले कर अंधविश्वास हो सकता है.

– कीटाणुओं और गंदगी आदि के संपर्क में आने या दूसरों से दूषित हो जाने का डर रहता है.

– डर से जुड़ी चीजों को महसूस करना जैसे घर में कोई बाहरी इंसान घुस आया है या फिर किसी और को नुकसान पहुंचाने का डर.

– ऐसे लोग धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देने लगते हैं.

– वे चीजों को बेवजह बारबार जांचते रहते हैं, जैसे ताले, दूसरे उपकरण और स्विच आदि को बारबार चैक करते रहना.

– पुराने अखबार, खाने के खाली डिब्बे, टूटी हुई चीजें आदि को संभाल कर रखना.

यह है इलाज

बाजार में ऐसी दवाएं मौजूद हैं जो दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाती हैं, लेकिन उन्हें डाक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए, क्योंकि ये दवाएं लंबे समय तक लेनी पड़ सकती हैं. इसके अलावा कभीकभी तनाव को दूर करने वाली दवाएं भी इन के साथ दी जाती हैं. साथ ही बिहेवियर थैरेपी की मदद भी ली जाती है जिसके अंतर्गत मरीज को शांत रहने वाले व्यायाम सिखाए जाते हैं ताकि वह नकारात्मक विचारों से घिरें तो उन कसरतों की मदद से अपने जूनून पर काबू पा सकें.

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