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क्या आपके बाल भी हो जाते हैं बार बार औयली?

शैम्पू करने के कुछ ही दिन बाद बाल फिर से औयली हो जाते हैं. बाल का बार बार औयली हो जाना एक ऐसा सवाल है जिससे कई लड़कियां परेशान रहती हैं. इससे पहले की आप बाल औयली होने का उपाय ढूढें, अच्‍छा होगा कि आप इसके पीछे छुपे हुए कारण को जान लें. यहां पर कुछ कारण दिये हुए हैं जिसको देख कर आप उसके लिये कुछ उपाय सोंच सकती हैं.

हाथों का प्रयोग

कई लड़कियों की बुरी आदत होती है कि वे अपने बालों को अपने हाथों से सुलझाती और सहलाती रहती हैं, जिससे अक्सर हेयरफौल और औयली हेयर की समस्‍या हो जाती है. आप को नहीं याद रहता है कि आपने अपने हाथों से क्‍या काम किया है, हो सकता है कि आपने कोई औयली चीज या फिर भोजन किया हो. इस कारण से बाल औयली हो जाते हैं.

तेल ग्रंथी

यह एक आम कारण है जिसमें तेल ग्रंथी से ज्‍यादा तेल रिसने लगता है. इसे सीबम के नाम से जाना जाता है. जब यह सीबम ज्‍यादा मात्रा में निकलता है तो यह सिर और बालों को औयली बना देता है. इस समस्‍या से छुटकारा पाने के लिये आप हर दूसरे दिन शैंपू कीजिये.

औयली फूड

अगर हम अपने खाने में बहुत तेल वाली चीज खाते हैं तो वह तेल हमारे शरीर से बाहर निकलेगा. यह तेल शरीर के कई अलग-अलग भागों में जा कर इकठ्ठा हो जाता है, जैसे सिर की त्‍वचा आदि में. यह तेलिये बालों की समस्‍या बन जाते हैं. इसलिये इस समस्‍या से बचने के लिये आपको अपनी डाइट पर ध्‍यान देना होगा और ज्‍यादा औयली चीजें खाने से बचना होगा.

धुआं उत्सर्जन

सड़कों पर गा‍ड़ियों से निकलने वाले धूएं में कुछ मात्रा वेपराइजड औयल मिला होता है. ज्‍यादा प्रदूषण की वजह से यह धूआं बालों में चिपक जाता है जिससे सिर औयली हो जाता है. इससे छुटकारा पाने के लिये हर्बल शैंपू रोजना प्रयोग करें.

धूल-मिट्टी

कई बार प्रदूषण और बाहरी गंदगी बालों और सिर के जड़ो पर जमा हो जाती है. इसी बात पर हमें शक होने लगता है कि हमारे बाल कहीं औयली तो नहीं हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता. इससे डील करने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि बालों को हर दूसरे दिन या हफ्ते में दो बार शैंपू किया जाए.

ऐसे पाएं अंडर आर्म के कालेपन से छुटकारा

अगर आप अपने अंडर आर्म के कालेपन से परेशान हैं और इससे छुटकारा पाने के लिए कई उपाय करके थक चुकी हैं तो अब घर में वाइटनिंग पैक बनाएं. इस तरह के पैक से आपको काफी हद तक इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. इस पैक को बनाने के लिये आपको कोई बड़ा काम नहीं करना पड़ेगा क्‍योंकि इसमें केवल घरेलू सामग्रियों की आवश्‍यकता पड़ती है. यहां पर कुछ घरेलू नुस्‍खे दिये जा रहे हैं जिसकी मदद से आप अपने काले पड़ चुके अंडर आर्म को सफेद कर सकती हैं.

  • डार्क अंडर आर्म की समस्या के निदान के लिए चंदनपाउडर व गुलाब जल के पेस्ट को अंडर आर्म पर लगाएं. चंदन रंग को निखारता है तथा गुलाब जल ठंडक प्रदान करता है और त्‍वचा को मुलायम भी बनाता है. इस पेस्ट को चार-पांच मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो लें. कुछ ही दिनों में आपको लाभ होने लगेगा.
  • मेथी के उपयोग से आप अपने अंडरआर्म को सफेद बना सकती हैं. इसके लिये आपको 5 एम एल पिसी हुई मेथी के पत्‍ते चाहिये और थेाड़ा सा पानी. इस पेस्‍ट को अंडरआर्म पर लगाइये और काले अंडरआर्म से मुक्‍ती पाइये. ऐसा हफ्ते में एक दिन जरूर कीजिये.
  • अपने अंडरआर्म पर ऐलोवेरा के रस से मसाज कीजिये. यह काम आपको हर दो दिन पर करना पड़ेगा. इसे 1 घंटे तक छोड़ने के बाद नहा लीजिये.
  • ताजा नींबू काट कर उससे अंडर आर्म को मसाज करें. पर अगर आपकी स्‍किन संवेदनशील है तो नींबू का प्रयोग ना ही करें.
  • हल्‍दी काली पड़ चुकी त्‍वचा का रंग हल्‍का कर सकती है. आप चाहें तो हल्‍दी का पेस्‍ट बना कर अपने अंडर आर्म पर लगा सकती हैं.
  • हफ्ते में एक दिन नीम का पेस्‍ट अंडर आर्म पर लगाएं. इससे आपके अंडर आर्म सफेद हो जाएंगे.
  • दालचीनी को दूध के साथ पेस्‍ट बना कर लगाएं. जब यह सूख जाए तब अंडर आर्म को गीले कौटन से पोंछ लें.

वेज हक्का नूडल्स रेसिपी

सामग्री :

– उबला नूडल्स (चार कप)

– हरी, लाल और पीली शिमला मिर्च (एक कप)

– लंबी कटी गाजर (एक)

– मोटी कटी फ्रेंच बींस (पांच-छह)

– हरा प्याज (4)

– कद्दूकस की हुई अदरक (दो टीस्पून)

– कद्दूकस किया लहसुन (दो टीस्पून)

– सोया सौस (दो टेबलस्पून)

– विनेगर (एक टेबलस्पून)

– कुकिंग औयल (तीन टेबलस्पून)

– लाल मिर्च पाउडर (दो टीस्पून)

– नमक (स्वादानुसार)

– काली मिर्च

बनाने की विधि :

– नूडल्स को उबाल लें.

– जैसे ही नूडल्स उबल जाएं.

– उन्हें तुरंत ठंडे पानी के नीचे अच्छे से धोकर अलग एक छलनी में रखें.

– इसमें एक टेबलस्पून औयल, थोड़ा नमक, सोया सौस, काली मिर्च पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डालें.

– अच्छे से हिलाते हुए मिक्स करें और अलग रख दें.

– अब एक नौन-स्टिक पैन में बाकी तेल गर्म करें.

– इसमें अदरक लहसुन डालकर 10 सेकेंड्स तक पकाएं.

– फिर गाजर डालें और एक मिनट पकाएं.

– इसमें शिमला मिर्च एड करें और 30 सेकेंड और पकाएं.

– अब कटा हुआ हरा प्याज और नमक डालें और सब्जियों को 30 सेकेंड्स और पकाएं.

– अब नूडल्स को सब्जियों के साथ मिलाएं.

– कुछ सेकेंड्स कुक करने का बाद गैस बंद कर दें और गरमा गरम सर्व करें.

– इस रेसिपी में आप पत्ता गोभी, प्याज अपनी पसंद के अनुसार डाल सकती हैं.

क्यों राज ठाकरे ने बेटे की शादी में मोदी को नहीं बुलाया

मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित की शादी साल 2019 की पहली शाही और चर्चित शादी थी जिसमें राजनीति फिल्म खेल और कौरपोरेट की वे तमाम हस्तियां शामिल हुईं जिनके नाम ही काफी होते हैं मसलन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस एनसीपी नेता अजीत पवार, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अमिताभ बच्चन और बोलीबुड के तीनों खान सहित सचिन तेंदुलकर और मुकेश अंबानी के अलावा रतन टाटा. हस्तियों की इस सूची में वे तमाम नाम और चेहरे शामिल हैं जिनके होने भर से किसी भी महफिल में रौनक आ जाती है. इस शादी की एक और खास बात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की परिवार सहित मौजूदगी थी जिसने एहसास करा दिया कि इन दोनों ठाकरे के मतभेद राजनैतिक हैं पारिवारिक नहीं.

अमित की शादी मुंबई की उभरती फेशन डिजाइनर मिताली बोरुदे से हुई है जो उनकी दोस्त भी हैं और दोनों लंबे वक्त से डेट पर थे. लोअर परेल के एक नामी होटल में हुई इस शादी के एक और खास मेहमान बाबासाहेब पुरंदर थे जिन्हें हाल ही में पद्म विभूषण के खिताब से नवाजा गया है. गौरतलब है कि मिताली के पिता संजय बोरुदेमुंबई के जाने माने सर्जन हैं.

इस शादी और जमावड़े के अपने सियासी माने भी हैं. ठाकरे बंधुओं ने लोकसभा चुनाव के पहले अपनी ताकत, रसूख और पहुंच का भी एहसास करा दिया है कि उन्हें कमतर आंकने की भूल न की जाये. महाराष्ट्र की राजनीति का यह वह दौर जिसमें भाजपा शिवसेना के 2014 की तरह साथ लड़ने में सस्पेंस बना हुआ है. इससे कहा जा रहा है कि दोनों ही पार्टियों को नुकसान होगा और कांग्रेस – एनसीपी गठबंधन हाट लूट ले जाएगा. हालांकि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का स्मारक बनाने के फैसले से उद्धव और राज के तेवर थोड़े नर्म पड़े हैं लेकिन वे इतने नर्म नहीं कहे जा सकते कि दोनों शाह – मोदी की जोड़ी के आगे नतमस्तक हो जाएंगे. ये दोनों ही भाजपा और मोदी पर लगातार हमलावर रहे हैं.

राज ठाकरे ने अपने बेटे की शादी में लगभग सभी सियासी हस्तियों को आमंत्रित किया था. मोदी मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों सहित लाल कृष्ण आडवाणी के अलावा राहुल गांधी को हल्दी चावल देने राज ठाकरे ने अपने दो खास दूतों को भेजा था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होने आमंत्रित करना जरूरी नहीं समझा तो सहज समझा सकता है कि वे मोदी पर इतनी खार खाये बैठे हैं कि राजनैतिक शिष्टाचार निभाना भी उन्होने जरूरी नहीं समझा. जब एक पत्रकार ने उनसे यह पूछा था कि आप मोदी जी को अपने बेटे की शादी में क्यों नहीं बुला रहे तो बिना अचकचाए राज ठाकरे ने तल्ख लहजे में बड़ा दिलचस्प जबाब सवाल करने के अंदाज में यह दिया था कि क्या वे (मोदी) विवाह बंधन में विश्वास करते हैं.

राज ठाकरे की इस हाजिर जबाबी पर मौजूदा पत्रकार चौंके थे और लाजबाब भी हो गए थे जो यह मानकर चल रहे थे कि इस नाजुक सवाल पर वे घिर गए हैं. लेकिन इस जबाब से उन्हें याद आया कि मौका ताड़ते राज ठाकरे ने नरेंद्र मोदी की कमजोरी या दुखती नस जो भी कह लें पर हाथ रख दिया है जिन्होने अपनी पत्नी जसोदा बेन को शादी के कुछ दिनों बाद ही त्याग दिया था और गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कभी उनकी सुध लेने की भी मानवयीता नहीं निभाई जिसे आम बोलचाल की भाषा में इंसानियत कहा जाता है.

आमतौर पर शादी विवाह जैसे शुभ अवसरों पर विधवाओं और परित्यक्ताओं को बुलाना शुभ नहीं समझा जाता उसी रिवाज को पत्नी त्यागने बाले पति को न बुलाकर राज ठाकरे ने एक नया रिवाज गढ़ दिया है. वैसे भी राज ठाकरे जोखिम उठाने से चूकते नहीं हैं और अक्सर कामयाब भी रहते हैं. जब वे चचेरे भाई उद्धव से अलग हुये थे तो मानने बालों ने मान लिया था कि राज ठाकरे ने सियासी ख़ुदकुशी कर ली है और साथ ही शिवसेना का भी वजूद खतरे में डाल दिया है लेकिन जल्द ही उन्होने ये कयास झुठला दिये. उनकी पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना एक संतोषजनक स्थिति में है और शिवसेना का अस्तित्व भी बरकरार है और अब तो दोनों भाजपा की नाक में दम किए हुये हैं.

अमित की शादी से ठाकरे परिवार की एकता साबित हुई है और राज ठाकरे की ठसक भी कायम है जो पूरी शादी में हर किसी से विनम्रता से पेश आए. बेटे की शानदार शादी किसी भी पिता का सपना होती है जिसके जरिये वह अपनी किए धरे को दिखाता और भुनाता है यही राज ठाकरे ने किया और देश की सबसे बड़ी हस्ती को नजरंदाज करते यह भी साबित कर दिया कि कोई भी महफिल, जलसा या समारोह बिना उनके भी रंगीन हो सकता है.

राजीव गांधी के ‘शिलान्यास फामूर्ले’ पर वापस आई केन्द्र सरकार

अयोध्या में गैर विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण की पहल मोदी सरकार की कोई अपनी मूल योजना नहीं है. गैर विवादित जगह पर ‘मंदिर शिलान्यास’ के प्रयास पहले भी तमाम बार हो चुके हैं. अंतर यह है कि पहले राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद ‘रामजन्म भूमि’ के अलावा किसी जगह पर शिलान्यास को राजी नहीं थी अब वह मोदी सरकार के इस के साथ खडी नजर आ रही है. अगर विवादित स्थल से अलग मंदिर की बात पर राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद पहले तैयार होती तो यह मसला पहले हल हो गया होता.

1989 में विवादित स्थल से दूर राममंदिर शिलान्यास के लिये उस समय की केन्द्र की राजीव गांधी सरकार ने इजाजत दे दी थी. यह जगह 313 एकड विवादित भूमि से अलग थी. राम जन्मभूमि न्यास, विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा के कुछ नेता राजीव गांधी की बात से सहमत नहीं थे. उनका तर्क था कि हिन्दू समाज को राममंदिर निर्माण केवल रामजन्म भूमि की जगह पर ही स्वीकार होगा. वह चुनाव का साल था. भाजपा राममंदिर के आंदोलन को लेकर आगे चल रही थी. राजीव गांधी की चुनाव में हार हुई. सरकार के सत्ता से बाहर होने के कारण राजीव गांधी उस दिशा में आगे प्रयास नहीं कर पाये.

1989 के लोकसभा चुनाव में बाद में केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार बनी. 1991 में चन्द्रशेखर के प्रधनमंत्री कार्यकाल में भी इस योजना पर काम हुआ पर सफलता नहीं मिली. उस समय भी रामजन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद अपनी इस बात पर अडी थी कि विवादित स्थल से अलग शिलान्यास का कोई मतलब नहीं है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह ने भी गैर विवादित जगह पर ही रामकथा पार्क की परिकल्पना की थी. वह भी अयोध्या के चैमुखी विकास को आगे बढाना चाहते थे. रामजन्मभूमि न्यास, विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा के कुछ नेता इस पक्ष में नहीं थे. कल्याण सिंह पर यह आरोप भी लग रहा था कि मुख्यमंत्री रहते कल्याण सिंह कारसेवा आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे थे. वह बीच का रास्ता निकालना चाहते थे. भाजपा से अलग होने के बाद कल्याण सिंह ने विस्तार से इन मुददों पर अपनी राय बताई थी.

कारसेवा के दबाव में कल्याण सिंह के कार्यकाल में ही अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाया गया. कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त हुई. इसके बाद बहुत सारी कानूनी पेचीदगियां बढ गई. कोर्ट ने विवादित जगह के आसपास की जमीन का भी अधिग्रहण कर लिया था. अब मोदी सरकार चाहती है कि विवादित जगह को छोड कर बाकी जमीन को अधिग्रहण मुक्त कर दिया जाय. जिस जगह पर सरकार राममंदिर निर्माण को कर सके. मोदी सरकार के पक्ष में यह बात जरूर है कि अब राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद विवादित राम जन्म भूमि स्थल से ही राम मंदिर बनाने की मांग पर पीछे हटती दिख रही है. अब यह मामला कानूनी रूप से इतना पेचीदा हो गया है कि राह निकलती नहीं दिखती.

तू डाल डाल तो मैं पात पात

क्रिकेट में भारत का डंका खूब बज रहा है. न्यूजीलैंड गई भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी पुरुषों की क्रिकेट टीम की तरह कमाल कर दिया है. 3 मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में उस ने न्यूजीलैंड की महिला टीम को 8 विकेट से हरा दिया.
पहले गेंदबाजी करते हुए भारतीय महिला गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और बे ओवल मैदान पर न्यूजीलैंड को 44.2 ओवरों में 161 रनों पर ढेर कर दिया. उस के बाद बल्लेबाजी में भी रंग जमा दिया. भारतीय टीम ने 35.2 ओवर में 2 विकेट खो कर 166 रन बनाते हुए जीत दर्ज की.
स्मृति मंधाना ने सब से ज्यादा नाबाद 90 रन बनाए जबकि कप्तान मिताली राज ने भी नाबाद 63 रनों की बेहतरीन पारी खेली. इस जीत के साथ ही उस ने मेजबान टीम के खिलाफ 2-0 की अजेय बढ़त भी ले ली है.
वैसे, जब भारतीय महिला टीम 162 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी थी तो उस की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी. 2 रन के टीम स्कोर पर ओपनर जेमिमा रोड्रिगेज आउट हो गई थीं. वे अपना खाता भी नहीं खोल सकी थीं. इस के बाद तहाहू ने दीप्ति शर्मा को चलता कर दिया. उन्होंने 8 रन बनाए थे.
इस के बाद कप्तान मिताली राज और स्मृति मंधाना ने पारी को संभाला. मितली राज ने 111 गेंदों में 4 चौके और 2 छक्के लगाए थे और वे 63 रन बना कर नाबाद लौटी थीं, जबकि स्मृति मंधाना ने 83 गेंदों में 13 चौके और एक छक्के की मदद से नाबाद 90 रन की पारी खेली थी.
भारत और न्यूजीलैंड की महिला क्रिकेट टीमों के बीच तीसरा वनडे मैच शुक्रवार को खेला जाएगा. पहले दोनों मैच जीत चुकी भारत की कप्तान मिताली राज ने कहा, ‘हम यकीनी तौर पर 3-0 से जीतना चाहेंगे. इस के साथ ही हम युवा खिलाड़ियों को मौका देना चाहेंगे.’
इस से पहले भारत की पुरुषों की टीम ने 5 मैचों की सीरीज में न्यूजीलैंड को पहले 3 मैचों में हरा कर सीरीज पर 3-0 की अजेय बढ़त बना ली थी.

जानिए अधिक खाने के बाद भी क्यों नहीं बढ़ता कुछ लोगों का वजन

बहुत से ऐसे लोग हैं जो कितना भी खाना खा लें उनका वजन नहीं बढ़ता, नहीं कुथ लोग ऐसे होते हैं जो छोड़ा सा ही कुछ खा लें तो उनका वजन बढ़ जाता है. क्या कभी आपने सोचा है कि कुछ लोगों का वजन बिना अनहेल्दी चीजें खाएं ही बढ़ने लगता है, तो वहीं कुछ लोग सब कुछ खाकर भी बिल्कुल स्लिम कैसे रहते हैं?  क्या आपको पता है कि ऐसा होता क्यों है? अगर नहीं तो हम आपको इसके पीछे का कारम बताएंगे.

हाल ही में हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि जो लोग बिना कुछ मेहनत किए ही स्लिम रहते हैं, उसके लिए उनकी जींस (genes) जिम्मेदार होती हैं. स्टडी में शोधकर्ताओं ने ये दावा किया है कि कुछ लोगों में जींस की ऐसी श्रृंखला होती है जो उनके मेटाबौलिज्म को बढ़ाती है. जिसके कारण उनके शरीर का फैट तेजी से कम होता है.

स्टडी में इस जींस को करीब 1600 लोगों में देखा गया. कई लोगों में इसका असर ये भी हुआ कि उन्हें खाने में दिलचस्पी कम हो गई. ये भी एक कारण समझा गया जिससे लोग पतले हो जाते हैं.

जबकि स्टडी में शामिल 40 फीसदी लोग ऐसे थे जो खाने के काफी शौकीन थे. जो भी उनकी मर्जी होती है वो खाते हैं पर इसके बाद भी उनका वजन नहीं बढ़ता. शोधकर्ताओं का मानना है कि कुछ लोगों में खास तरह की जींस होती हैं. इन जींस की जांच करने के लिए उन्हें स्टडी करनी होगी, जिसके माध्यम से वे पता लगा पाएंगे कि ज्यादा खाने के बाद उनका शरीर किस तरह से काम करता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस स्टडी की मदद से वे ऐसी दवाई की खोज कर सकेंगे, जिससे मोटे लोग अपने वजन को कंट्रोल में रख सकेंगे.

क्यों बढ़ रहा है छोटे आंत का कैंसर? ऐसे करें बचाव

छोटी आंत में कैंसर की परेशानी पिछले कुछ दिनों में तेजी से लोगों में देखी जा रही है. इससे जुड़े एक शोध में कुछ जरूरी बातें सामने आई हैं. शोध में सामने आया है कि छोटी आंत के कैंसर के अत्यधिक जोखिम वाले मरीजों में एस्पिरिन व ओमेगा-3 का सेवन सुरक्षित व कैंसर के खतरे की संभावना को कम करने में कारगर है. इस अध्ययन में ये बात सामने आई है कि इन औषधियों से आंत के कैंसर के अत्यधिक जोखिम वाले मरीजों में प्री-कैंसर पौलिप की संख्या में कमी दिखाई दी है.

शोध के नतीजों  की माने तो जिन मरीजों ने एस्पिरिन लिया उनमें प्रायोगिक औषधि को लेने वाले मरीजों की तुलना में पौलिप  का विकास 22 फीसदी कम हुआ. वहीं जिन भी मरीजों ने ओमेगा-3 लिया, उनमें प्रायोगिक औषधि लेने वाले मरीजों की तुलना में नौ फीसदी कम पौलिप बने.

शोधकर्ताओं की माने तो एस्पिरिन व ओमेगा-3 का इस्तेमाल पोलिप की संख्या पर प्रभावकारी होने के बाद भी एस्पिरिन व ओमेगा-3 का एक साथ इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी है. इसकी वजह है कि यह कोलोनोस्कोपी के साथ रोकथाम की एक अलग परत बनाता है.

टिप्स : नाखूनों को बनाएं मजबूत और चमकदार

अगर आप अपने हाथों के नाखूनों को बढ़ाने का शौक रखती हैं तो उनपर थोड़ा ध्‍यान दीजिए. जब भी नाखून थोड़े से बढ़ने के बाद टूट जाते हैं तो इसका मतलब है कि आपके नाखून कमजोर हैं और आप उनकी देखभाल सही से नहीं कर रही हैं. अगर आप अपने नाखूनों को स्‍वस्‍थ और सुंदर देखना चाहती हैं तो यहां दी गई खबर पढ़ें, यहां नाखूनों की देखभाल के बारे में कई टिप्‍स दिए गए हैं.

पानी में ज्‍यादा समय तक हाथ न दें

पानी में ज्‍यादा समय तक हाथ देने से नाखून मुलायम हो जाते हैं और आसानी से टूट जाते हैं. ऐसे में कपड़े धोते समय और नहाते समय नाखूनों का विशेष ध्‍यान रखें और उन पर कोई जोर न दें.

नाखूनों को मसाज दें

अपने नाखूनों को समयसमय पर मसाज दें. इससे नाखूनों की ग्रोथ अच्‍छी होती है क्‍योंकि नाखूनों में रक्‍त का प्रवाह अच्‍छा हो जाता है.

सप्‍ताह में एक दिन नाखूनों पर ध्‍यान दें

सप्‍ताह में कम से कम एक बार हाथों का मैनीक्‍योर करें और नाखूनों पर ध्‍यान दें. उन्‍हे क्‍लीन करें, फाइल करें, पेंट लगाएं आदि.

नाखूनों को चबाना बंद करें

नाखूनों को चबाना गलत आदत है, इससे नाखून खराब होते हैं, उनमें खरोंच आती है और वह कमजोर हो जाते है. अपने नाखूनों को रगड़े भी नहीं. कुछ महिलाएं नर्वस होने पर नाखूनों को चबाती या रगड़ती हैं.

हाथों में मौश्‍चराइजर क्रीम लगाएं

हाथों को धुलने के बाद उन पर तुंरत मौश्‍चराइजर क्रीम लगाएं, इससे वह मुलायम बने रहेगे. और नाखून भी ड्राई होने से बचेगे.

नेल फाइलर को हमेशा साथ में रखें

आप अपने पर्स में हमेशा नेल फाइलर को रखें ताकि जरूरत पड़ने पर उन्‍हे फाइल किया जा सकें. इससे आपको कोई दिक्‍कत नहीं होगी.

प्रोटीनयुक्‍त आहार लें

नाखूनों को स्‍वस्‍थ बनाने के लिए प्रोटीन युक्‍त भोजन लें. बैलेंस डायट लें. प्रोटीन, नाखूनों को स्‍वस्‍थ बनाने में सबसे महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है.

पुरानी नेलपालिश हटा दें

मैनीक्‍योर करने के दौरान पुरानी नेलपालिश हटा दें. यह नाखूनों को कमजोर और गंदा बना देती है. सप्‍ताह में एक बार नेलपालिश को छुड़ाकर दुबारा लगाना चाहिए.

विटामिन की भरपूर मात्रा लें

नाखूनों को मजबूत बनाने के लिए सबसे जरूरी होता है कि आपके शरीर में विटामिन की भरपूर मात्रा हो. आप चाहें तो विटामिन से भरपूर चीजों को सीधे भी नाखूनों पर लगा सकते है.

जब चुनें अपनी त्वचा के लिए स्क्रबर…

हममें से ज्यादातर लोग अपनी त्वचा पर स्‍क्रब का इस्तेमाल करते हैं ताकि डेड स्‍किन निकल जाए और त्‍वचा साफ-सुथरी लगे. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि त्‍वचा को स्‍क्रब करना दोनों ही पुरुष और महिला के लिये अच्‍छा होता है. यदि आपको समझ में नहीं आ रहा है कि आपकी त्‍वचा के लिये कौन सा स्‍क्रब अच्‍छा रहेगा, तो नीचे दिये हुए लेख को जरुर पढें. इसको पढ़ने से आपको आपके सवाल का जवाब जरूर मिल जाएगा.

रूखी त्‍वचा

रूखी त्‍वचा को स्‍क्रब करने पर विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता होती है. यह भी संवेदनशील त्‍वचा की ही तरह काफी नाजुक होती है. आप इस त्‍वचा के लिये ओटमील का प्रयोग कर सकती हैं. ओटमील में यदि थोड़ा सा दूध मिला लिया जाए तो स्‍क्रब करने के बाद आपकी त्‍वचा छिलेगी नहीं और मुलायम भी हो जाएगी.

औइली स्‍किन

अगर आपकी स्‍किन औइली है तो आपको स्‍क्रब करने के लिये बेकिंग सोडा की आवश्‍यकता पड़ेगी. यह ऐसी सामग्री है जो शरीर से अत्‍यधिक तेल को बाहर निकाल कर त्‍वचा में ग्‍लो लाती है.

संवेदनशील त्‍वचा

अगर आपकी त्‍वचा संवेदनशील है तो स्‍क्रब करने का काम थोड़ा ट्रिकी बन जाता है. स्‍क्रब करने के लिये उंगलियों की बजाए अपनी हथेलियों का प्रयोग करें. स्‍क्रब के लिये अच्‍छी सामग्री में नमक का प्रयोग करें.

साधारण त्‍वचा

साधारण त्‍वचा के लिये हर प्रकार का स्‍क्रब सही होता है, चाहे वह शुगर स्‍क्रब हो या फिर सौल्‍ट स्‍क्रब. इसके अलावा आप बादाम को कूंट कर भी उसका स्‍क्रब तैयार कर सकती हैं. यह बहुत ही लाभकारी होता है.

मिली जुली त्‍वचा

अगर आपकी त्‍वचा का कुछ हिस्‍सा औइली है और कुछ ड्राई है, तो आपके लिये शुगर स्‍क्रब बेस्‍ट रहेगा.

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